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जदयू ने लॉन्च किया अपना आधिकारिक वेब पोर्टल

जदयू संसदीय दल के नेता व राष्ट्रीय महासचिव श्री आरसीपी सिंह ने आज पार्टी मुख्यालय में जदयू के आधिकारिक वेब पोर्टल (www.janatadalunited.online) और वेब पत्रिका ‘जदयू संदेश’ का लोकार्पण किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, मुख्य प्रवक्ता श्री संजय सिंह, विधानपार्षद श्री नीरज कुमार, विधानपार्षद श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद श्री रामेश्वर महतो, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारीद्वय डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार, प्रवक्ता डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. भारती मेहता, श्री निखिल मंडल, श्री अरविन्द निषाद, श्रीमति श्वेता विश्वास, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार, महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री हुलेस मांझी, राष्ट्रीय कार्यालय सचिव श्री मिथिलेश प्रसाद सहित मीडिया सेल की पूरी टीम मौजूद रही।

JDU Media Cell President Dr.Amardeep demonstrating ( www.janatadalunited.online ) on the occasion of Launching of JDU Web Portal.
JDU Media Cell President Dr.Amardeep demonstrating ( www.janatadalunited.online ) on the occasion of Launching of JDU Web Portal.

लोकार्पण के उपरान्त अपने संबोधन में श्री आरसीपी सिंह ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि नेता, नीति, विचार और कार्यक्रम हर मामले में हमारी पार्टी बेजोड़ है और अब हम तकनीक में भी सबसे आगे होंगे। उन्होंने कहा कि ये समय आधुनिक संचार माध्यमों का है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि पार्टी के मीडिया सेल की मेहनत और मुस्तैदी से अब मीडिया के हर फॉर्मेट पर जदयू की शानदार उपस्थिति रहेगी।
लोकार्पण से पूर्व जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने विस्तार से वेब पोर्टल और वेब पत्रिका की जानकारी दी और उपस्थित लोगों को इनकी खूबियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज से हमारी पार्टी एक नए युग में प्रवेश कर रही है। पार्टी के विचार और संस्कार को अब तकनीक की ताकत मिल गई है। मधेपुरा अबतक के पाठकों के लिए यहां ध्यातव्य है कि जदयू के लिए इस अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने वाले डॉ. अमरदीप मधेपुरा से ताल्लुक रखते हैं।
बहरहाल, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने कहा कि डॉ. अमरदीप के नेतृत्व में जदयू मीडिया सेल ने पार्टी हित में तकनीक का बेहतरीन उपयोग किया है। ये बदलते समय की मांग थी, जिसे जदयू मीडिया सेल ने अपने गठन के कुछ दिनों के अन्दर पूरा किया है। मुख्य प्रवक्ता श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी ने जनहित के कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं लेकिन प्रचार में हमलोग पीछे रह जाते थे। ये कमी अब दूर हो जाएगी। विधानपार्षद व प्रवक्ता श्री नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी का वेब पोर्टल और वेब पत्रिका ये सिद्ध करने में सहायक होंगे कि हमलोग पॉलिटिक्स विद डिफरेंस करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में पार्टी के मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार ने श्री आरसीपी सिंह सिंह सहित सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मीडिया सेल की ओर से श्री राहुल सिन्हा, श्रीमति राधा रानी, श्री आशुतोष सिंह राठौड़, श्री रविन्द्र नाथ मिश्रा, श्री राजेश कुमार, श्री विकास कुमार सिंह, श्री जीतेन्द्र यादव, श्री सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।

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एम्स से छुट्टी पर भड़के लालू ने लिखा पत्र

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से छुट्टी मिल गई है। गौरतलब है कि लालू अपना इलाज कराने के लिए करीब एक महीना पहले एम्स में भर्ती हुए थे। एम्स प्रशासन ने अब उन्हें वापस जाने को कह दिया है, लेकिन एम्स द्वारा छुट्टी देना लालू को नागवार गुजरा। उन्होंने इस संबंध में बकायदा पत्र लिखकर एम्स प्रशासन से नाराजगी जाहिर की और कहा कि उन्हें अभी और इलाज की जरूरत है, लिहाजा उन्हें अभी एम्स में ही रहने दिया जाए।

एम्स से अपनी छुट्टी को ‘राजनीतिक दबाव’ बताने पर जोर दे रहे लालू प्रसाद यादव ने अपने पत्र में लिखा कि मुझे रांची मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में अच्छे इलाज के लिए भेजा गया था। अभी भी मेरी तबीयत ठीक नहीं हुई है। मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैं हृदय रोग, किडनी इन्फेक्शन, शुगर एवं कई बीमारियों से ग्रस्त हूं। कमर में दर्द है एवं बार-बार चक्कर आ रहा है। मैं कई बार बाथरूम में गिर भी गया हूं। इन सब बीमारियों का इलाज यहां चल रहा है। प्रत्येक नागरिक का यह मूलभूत संवैधानिक अधिकार है कि उसका समुचित इलाज उसकी संतु्ष्टि के अनुसार हो। पर ना जाने किस राजनीतिक दबाव की वजह से मुझे यहां हटाया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आरजेडी सुप्रीमो से मिलने एम्स पहुंचे। इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में लालू प्रसाद यादव हरे रंग के कुर्ते, उजले रंग के पायजामे और एक चप्पल में एक बड़े सोफासेट पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी उनके सामने बैठे हुए हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इस तस्वीर के सामने आने के बाद ही यह खबर आई कि एम्स प्रशासन ने उन्हें छुट्टी दे दी है।

बहरहाल, बता दें कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला से जुड़े अलग-अलग मामलों में जेल की सजा काट रहे हैं। जेल में तबीयत खराब होने के बाद उऩ्हें पहले रिम्स में भर्ती कराया गया था और फिर उन्हें दिल्ली के एम्स में लाया गया था, जहां उन्हें स्वास्थ्य लाभ के साथ ही ‘राजनीतिक लाभ’ भी मिल रहा था। स्वाभाविक है कि अब इसमें होने वाली संभावित कमी उन्हें परेशान करेगी।

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नीतीश की मोदी से मांग, ‘भारत रत्न’ मिले लोहिया को

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाजा जाए। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि 12 अक्टूबर को डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि है, इसी दिन उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अनुरोध किया है कि गोवा हवाई अड्डे का नामकरण भी डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम पर किया जाए क्योंकि पुर्तगालियों से गोवा को आजाद कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के जीवन से जुड़े कई किस्सों का भी अपने पत्र में जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि संसद में नेहरू की सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए लोहिया ने पूरे विपक्ष को गैर-कांग्रेसवाद की धुरी पर इकट्ठा किया और उनकी कोशिशों की वजह से देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बन सकी।

सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह की मुहिम में लगे प्रधानमंत्री को उन्होंने खास तौर पर याद दिलाया कि ‘लोहिया ने गांवों में महिलाओं के लिए दरवाजा बंद शौचालयों के निर्माण की मांग को लेकर लगातार मुहिम चलाई और तत्कालीन सरकार पर दबाव भी बनाते रहे।’ नीतीश ने लिखा, डॉ. लोहिया नेहरू विरोधी थे और उनका कहना था कि यदि नेहरू सभी गांवों में महिलाओं के लिए शौचालय बनवा दें तो मैं उनका विरोध करना बंद कर दूंगा। लोहिया ने स्वच्छता और स्त्री स्वास्थ्य के लिए हमेशा प्रयास किया।

महिलाओं के लिए बिहार में आरक्षण समेत कई ऐतिहासिक कदम उठाने वाले मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए ‘उज्जवला योजना’ लागू करने वाले प्रधानमंत्री को आगे लिखा कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों की औरतों के लिए धुआंमुक्त चूल्हों की तकनीक को प्रत्येक रसोई में पहुँचाने की खातिर भी लोहिया की मजबूत आवाज संसद में और सड़कों पर लगातार गूंजती रही। पिछली सदी के मध्य में भारत की तत्कालीन सरकार और समाज को इन बिन्दुओं पर जागृत करना उनकी दूरदृष्टि का परिचायक है। इसके अलावा नीतीश कुमार ने भारत की आजादी की लड़ाई में लोहिया के योगदान और अमेरिका की रंगभेद नीति के खिलाफ उनके विचारों की चर्चा भी अपने पत्र में की।

इस तरह प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. लोहिया के द्वारा किए कई महत्वपूर्ण कार्यों की याद दिलाते हुए उनके विज़न और अतीत के साथ-साथ वर्तमान में भी उनकी प्रांसगिकता को बड़ी मजबूती से रेखांकित किया। उनकी मांग पर केन्द्र की मोदी सरकार चाहे जब फैसला करे, लेकिन कहना गलत ना होगा कि इस बहाने देश भर में लोहिया पर एक सार्थक बहस और चर्चा तो छिड़ ही गई है। लोहिया जैसे युगपुरुष के विचार पार्टी ही नहीं, राज्य व देश की सीमाओं से भी परे हैं और समाजवाद के इस पुरोधा हेतु ‘भारत रत्न’ की मांग करने के लिए नीतीश कुमार नि:संदेह साधुवाद के पात्र हैं। यहां स्मरणीय है कि इससे पहले नीतीश कुमार बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री व देश के समाजवादी नेताओं में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर को भी ‘भारत रत्न’ देने की मांग का समर्थन कर चुके हैं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार के अतुल प्रकाश को यूपीएससी में चौथा स्थान

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 2017 में सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा और 2018 में इंटरव्यू के आधार पर अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। सफल उम्मीदवारों की सूची में हैदराबाद के अनुदीप दुरिशेट्टी को प्रथम स्थान मिला है। वहीं, दूसरे नंबर पर अनु कुमारी और तीसरे पर सचिन गुप्ता हैं। बिहार के अतुल प्रकाश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया है। जबकि पांचवां स्थान पवन कौशिक को मिला है।

गौरतलब है कि प्रथम पांच में स्थान बनाने वाले अतुल प्रकाश आइआइटियन हैं और मूलत: बिहार के आरा के रहने वाले हैं। उनके पिता एके राय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में हाजीपुर जोन में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

यूपीएससी के टॉपर दुरिशेट्टी अनुदीप गूगल में काम कर चुके हैं। वे साल 2011 में बिट्स पिलानी से ग्रैजुएट हैं। उन्होंने 2013 में भी यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की थी। उस साल उन्हें 790वां स्थान मिला था और वर्तमान में वे भारतीय राजस्व सेवा के अंतर्गत असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के रूप में पदस्थापित हैं।

बता दें कि इस साल कुल 990 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। इनमें सामान्य श्रेणी के 476, ओबीसी के 275, अनुसूचित जाति के 165 तथा अनुसूचित जनजाति के 74 अभ्यर्थी शामिल हैं। जबकि रिजर्व सूची में कुल 132 अभ्यर्थी हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि इस साल आइएएस के 180, आइएफएस के 42, आइपीएस के लिए 150, सेंट्रल सर्विस ग्रुप ‘ए’ के लिए 565 तथा ग्रुप ‘बी’ के लिए 121 पदों पर नियुक्ति होनी है।

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जी हाँ, ‘निर्भया’ ने पहुँचाया आसाराम को अंजाम तक !

लाखों लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले आसाराम बापू को बुधवार को उम्रकैद की सजा मिली। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका श्रेय देश भर को झकझोर देने वाली दिल्ली गैंगरेप की शिकार ‘निर्भया’ को जाता है? जी हाँ, यह निर्भया केस के बाद हुए कानूनी बदलाव का ही नतीजा है कि आसाराम को जिन्दगी भर के लिए जेल में रहने की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि निर्भया केस के बाद रेप लॉ में बदलाव करके उसके बेहद सख्त बना दिया गया था। यह बदलाव 2 अप्रैल 2013 से लागू हुए। आसाराम के खिलाफ मामला अगस्त 2013 में दर्ज हुआ और यही कारण है कि उसे नए कानून के तहत सजा मिली।

आसाराम को रेप की जिन धाराओं में जीवन भर जेल की सजा हुई है, वे तमाम धाराएं और कानून निर्भया केस के बाद जोड़े गए थे। इसके तहत गैंगरेप में 20 साल से लेकर उम्रकैद यानि मौत होने तक जेल में रखने का प्रावधान किया गया था। वहीं, ऐसा शख्स रेप करता है, जिस पर पीड़िता भरोसा करती थी तो ऐसे मामले में 10 साल से लेकर ताउम्र जेल का नियम बनाया गया। इन दोनों ही धाराओं में आसाराम को सजा दी गई है।

इससे पहले, गैंग रेप के मामले में अधिकतम उम्रकैद का ही प्रावधान था। साथ ही सरकार को 14 साल जेल काटने के बाद सजा में छूट देने का भी अधिकार था। लेकिन जिन दो धाराओं में आसाराम को उम्रकैद दी गई है, उसमें उम्रकैद का मतलब स्वाभाविक तरीके से मृत्यु होने तक जेल से है और ऐसे मामले में सरकार सजा में छूट भी नहीं दे सकती। इस तरह हम कह सकते हैं कि ये ‘निर्भया’ ही है, जिसने आसाराम को उसके अंजाम तक पहुँचाया।

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फिर बिगड़े चौबे के बोल

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलने के क्रम में चौबे ने कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी जो किसी भी तरह शोभनीय नहीं। उन्होंने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल को श्मशान पहुंचाने के लिए चार लोग भी नहीं मिलेंगे।

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अश्विनी चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शेर हैं और राहुल गांधी सवा शेर बनने की कोशिश न करें। उन्‍होंने सवाल किया कि कांग्रेस अध्‍यक्ष लोकसभा में क्‍यों गूंगे रहते हैं? उनके बयानों में कोई तथ्‍य रहता है क्‍या? दरअसल चौबे प्रधानमंत्री मोदी को राहुल गांधी के 15 मिनट भाषण वाली चुनौती के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों राफेल व नीरव मोदी मामले के संदर्भ में राहुल ने कहा था कि उन्‍हें संसद में भाषण देने के लिए सिर्फ 15 मिनट मिल जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।

बहरहाल, अश्विनी चौबे की इस टिप्पणी पर हंगामा मच गया है। वाराणसी में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री का पुतला फूंक अपना विरोध जताया है। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस कार्यकर्ता इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। पर चौबे इन प्रतिक्रियाओं से परेशान हो रहे होंगे, ऐसा लगता नहीं। और परेशान हों भी क्यों, ऐसे ही बयानों से वे चर्चा में बने रहते हैं और ‘प्रसाद’ मिल जाता है वो अलग।

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12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप पर अब मौत की सजा

मासूम बच्चियों के साथ हुई लगातार हो रही बलात्कार की घटनाओं की पृष्ठभूमि में शनिवार, 21 अप्रैल को केन्द्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के तहत केन्द्र सरकार नाबालिग बच्चों से बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा देने के लिए अध्यादेश लाएगी। फिलहाल सरकार ने इस अध्यादेश को लाने के फैसले पर मुहर लगाई है। आगे वह इसके जरिए कानून बनाएगी, जिसमें 12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप करने वाले दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जाएगी। केन्द्र सरकार इसके लिए ‘द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट’ (पॉक्सो एक्ट) में संशोधन करेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नई दिल्ली स्थित आवास पर इस संबंध में शनिवार दोपहर करीब ढाई घंटे बैठक हुई थी, जिसमें केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। काफी विचार-विमर्श के बाद इस मसले पर सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि हाल ही में गैंगरेप की दो जघन्य घटनाओं – पहली उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में और दूसरी जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में – से संपूर्ण देश आक्रोशित है। ऐसा ही आक्रोश दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद पनपा था। तब ऐसी घटनाओं के लिए बने कानून में परिवर्तन भी किया गया था, लेकिन वह पर्याप्त साबित नहीं हुआ। ध्यातव्य है कि पॉक्सो एक्ट में फिलहाल रेप-गैंगरेप सरीखे जघन्य अपराधों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है। न्यूनतम सजा के रूप में फिलहाल दोषियों को सात साल की जेल की सजा सुनाई जाती है।

बहरहाल, देर से ही सही सरकार ने स्वागत योग्य निर्णय लिया है। हालांकि यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि यह अध्यादेश जिस दिन आएगा, उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अध्यादेश से पहले के केसों पर यह लागू नहीं होगा। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार नाबालिगों के रेप-गैंगरेप के मामले को लेकर जो कानून आगे लाएगी, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ, उत्तर प्रदेश के उन्नाव, गुजरात के सूरत और मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई घटनाओं पर लागू नहीं हो सकेगा।

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एटीएम से खाली हाथ लौटने का कारण हम हैं, सरकार नहीं !

क्या पिछले कुछ दिनों में ऐसा हुआ है कि आप पैसे निकालने एटीएम गए हों और आपको खाली हाथ लौटना पड़ा हो, या तीन-चार एटीएम के दर्शन करने के बाद आपकी जरूरत पूरी हुई हो? इन दिनों ये बात आम-सी हो गई है कि एटीएम का शटर या तो गिरा हुआ है या फिर एटीएम के आगे ‘कैश नहीं है’ की तख्ती लगी हुई है। ऐसा आखिर हो क्यों रहा है? बहुत संभव है कि ऐसा होने पर आपने आरबीआई या सरकार को कोसा हो या किसी को कोसते हुए सुना हो! बुद्धिजीवी टाइप के लोग ये बोलते भी मिल जाएंगे कि ये सारी कवायद ‘कैशलेस इकोनोमी’ के लिए की जा रही है। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

दरअसल पिछले 5-6 दिनों से आपको जिस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है, वो समस्या देशव्यापी है। ऐसा किसी राज्यविशेष में या देश के किसी खास हिस्से में नहीं हो रहा। आखिर इतनी बड़ी समस्या का कारण क्या है, ये पूछने पर सरकार के आर्थिक मामलों के सचिव एस. सी. गर्ग बताते हैं कि इसके मूल में पिछले 15 दिनों में सामान्य से 3 गुना ज्यादा नोटों की निकासी होना है। एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में हर महीने 20 हजार करोड़ रुपये के नोटों की सामान्य मांग रहती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कुछ इलाकों में नोटों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘इस महीने के 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ करंसी की खपत हो चुकी है।’ इस अप्रत्याशित या अचानक बढ़ी मांग का कारण पूछे जाने पर गर्ग बताते हैं कि लोग इस अफवाह का शिकार होकर जल्दबाजी में पैसे निकाल रहे हैं कि आनेवाले दिनों में नोटों की कमी हो जाएगी।

बहरहाल, सरकार ने इस बाबत तमाम जरूरी कदम उठा लिए हैं। 500 रुपये के नोटों की छपाई पांच गुना करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि अभी हर दिन 500 करोड़ रुपये के मूल्य के 500 के नोटों की छपाई होती है, जिसे अगले कुछ दिनों में बढ़ाकर 2,500 करोड़ रुपये प्रतिदिन कर दिया जाएगा। इस तरह एक महीने में लगभग 75,000 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति होने लगेगी।

एक सजग नागरिक के तौर पर हमें जानना चाहिए कि नोटबंदी के वक्त 17.50 लाख करोड़ मूल्य के नोट सर्कुलेशन में थे, लेकिन अभी 18 लाख करोड़ के नोट हैं, यानि जरूरत से ज्यादा। इसके अतिरिक्त अभी सरकार के पास अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये का भंडार भी है। कहने का मतलब यह कि यह समस्या पूरी तरह से तात्कालिक है, जिससे निपटने में हम सक्षम हैं। देश में नोटों की कोई कमी नहीं है। किसी अफवाह पर बिल्कुल ध्यान ना दें। वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल भी नोटों की कमी को अगले तीन दिनों में दूर करने का भरोसा दिला ही चुके हैं। बिहार की बात करें तो यहां के वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी लगातार आरबीआई और बैंकों के अधिकारियों से संवादरत हैं। उन्होंने भी इस समस्या के शीघ्र दूर होने का आश्वासन दिया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 500 मेडल जीतने वाला पाँचवाँ देश बना

भारत के लिए इस 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स का 10वाँ दिन वास्तव में सर्वाधिक शानदार रहा | भारत के लिए 88 साल के कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में विदेश में मेडल टेबुल में स्थान के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा |

जहाँ तीन बच्चों की माँ दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम भारत की ध्वजावाहक बनी हो वहाँ भारत को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से कौन रोकेगा | दशवें दिन आठ गोल्ड मेडल मिले भारत को जिसकी शुरुआत मेरी कॉम ने ही 48 किलोग्राम स्पर्धा वाले बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतकर की थी | उस दिन 14 अप्रैल को कुल 17 पदक जीतकर भारत ने मेडलों का अर्धशतक पूरा किया |

बता दें कि संसार के 53 ऐसे स्वतंत्र देशों का एक संघ, जो कॉमनवेल्थ कंट्रीज के नाम से जाना जाता है, का मुख्यालय लंदन में है | वे सभी कभी-न-कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था | इन देशों की 2 वर्षों में एक बार लंदन में बैठक होती है | इन्हीं देशों के सम्मिलित खेलों को कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाता है |

यह भी जानिए कि 2018 का कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट स्थित कैरारा स्टेडियम में हजारों पुरुष-महिलाओं खिलाड़ियों एवं खेल पदाधिकारियों की उपस्थिति में 11 दिवसीय विभिन्न प्रतियोगिताओं के रूप में आयोजित किया गया जिसका समापन 15 अप्रैल (रविवार) को जश्न के साथ संपन्न हुआ | इस अवसर पर राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की अध्यक्षा लुई मार्टिन ने कहा कि खिलाड़ियों की क्षमता की कोई सानी नहीं | इस बार 2018 में भारत 26 गोल्ड के साथ तीसरे स्थान पर रहा जबकि 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में 38 गोल्ड जीतकर भारत दूसरे स्थान पर तिरंगा लहराया था | तभी तो हम कहते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में विदेश में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ और कुल मिलाकर तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है इस बार |

हाँ | यह भी बता दें कि भारत के 115 पुरुष एवं 103 महिला खिलाड़ियों ने इस खेल में कुल 66 मेडल जीते जिसमें 26 गोल्ड, 20 सिल्वर एवं 20 ब्रांज | किसी मायने में महिलाएं पीछे नहीं रही हैं | पुरुष 13 गोल्ड जीते तो महिलाएं 12 गोल्ड हासिल की तथा एक गोल्ड मिक्स्ड टीम ने दिलाई | पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चली महिलाएं |

यह भी जानिए कि भारत का कुश्ती में सक्सेस रेट 100% और बॉक्सिंग में 75% रहा है | भारत पहली बार बैडमिंटन में 6 मेडल जीते जिसमें 2 गोल्ड भी है | यह किसी भी कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन में सबसे अधिक गोल्ड और मेडल है | मणिका ने टेटे में 4 मेडल जीते यह क्या कम है |

भारत द्वारा इतिहास तब रचा गया जब बैडमिंटन में गोल्ड और सिल्वर के लिए दोनों तरफ से भारतीय महिला खिलाड़ी पीवी सिंधु और साइना संघर्ष कर रही थी | जहाँ पिछली बार ग्लासगो में इंग्लैंड ने सर्वाधिक पदक जीते थे वही इस बार ऑस्ट्रेलिया ने शानदार वापसी की |

और अंत में बिहार को गौरवान्वित करने और अपने स्वर्णिम प्रदर्शनों के बीच “गोल्डन गर्ल” बनी रहने के लिए श्रेयसी को शूटिंग में स्वर्ण दिलाने के लिए ‘मधेपुरा अबतक’ सलाम करता है |

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65वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: किसे क्या मिला ?

शुक्रवार को 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। राष्ट्रीय फिल्मों के निर्णायक मंडल ने अभिनेता विनोद खन्ना को प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और अभिनेत्री श्रीदेवी को फिल्म ‘मॉम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार देने की घोषणा की। दोनों ही कलाकारों को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया जाएगा। विनोद खन्ना का पिछले साल 27 अप्रैल को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वहीं इस साल 25 फरवरी को श्रीदेवी (54) के निधन से पूरा देश सकते में आ गया था।

बाकी पुरस्कारों की बात करें तो ‘न्यूटन’ को साल के सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म के लिए चुना गया है। वहीं इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी को स्पेशल अवॉर्ड मिला है। दुनिया भर में धूम मचा देने वाली एस एस राजमौली की फिल्म ‘बाहुबली: द कन्क्लूजन’ का नाम इस सूची में ना हो ऐसा भला कैसे हो सकता है! इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा इस फिल्म को बेस्ट एक्शन डायरेक्शन और बेस्ट स्पेशल इफेक्ट मूवी का खिताब भी मिला है।

अन्य पुरस्कारों में असमी फिल्म ‘विजय रॉकस्टार्स’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और मलयाली फिल्म ‘भयानकम’ के लिए जयराज को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं बंगाली फिल्म ‘नगर कीर्तन’ में शानदार अभिनय के लिए रिद्धी सेन ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया है। चलते-चलते बता दें कि निर्णायक मंडल के प्रमुख प्रसिद्ध अभिनेता व निर्देशक शेखर कपूर थे।

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