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ग्लोबल टीचर अवार्डी भारतीय अध्यापकों ने बताया- कैसी हो भविष्य की टीचिंग

वैश्विक आधुनिक शिक्षा जगत के नोबेल कहे जाने वाले ग्लोबल टीचर अवार्ड हेतु लगभग डेढ़ सौ देशों के 12 हजार टीचर्स में शाॅर्ट लिस्ट किए गए शीर्ष 50 शिक्षकों में जिन तीन भारतीय शिक्षकों ने अपना स्थान सुरक्षित किया, वे तीनों है-

1.रंजीत सिंह दिसाले, सरकारी स्कूल टीचर, सोलापुर (महाराष्ट्र)

2.विनीता गर्ग, दिल्ली की कंप्यूटर टीचर, और

3.शुभोजित पायने, अजमेर (राजस्थान)

बता दें कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों से कहा कि सभी को अपने विकास के लिए शिक्षा में हो रहे नए बदलावों के बारे में जानना होगा तथा बच्चों को रुचि के साथ सीखने के लिए प्रेरित करना होगा। महामहिम ने पुनः कहा कि हमारे शिक्षक डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए अपने कौशल को समयानुकूल उन्नत बनाएं।

एक ओर जहां महामहिम राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि कोरोना के कारण आए इस अचानक बदलाव के समय पारंपरिक शिक्षा के माध्यमों से हटकर डिजिटल माध्यम से पढ़ाने में सभी शिक्षक सहज नहीं हो पा रहे थे, परंतु अल्पावधि में हमारे प्राध्यापकों ने डिजिटल माध्यम का उपयोग कर विद्यार्थियों से जुड़ने के लिए कड़ी मेहनत की, वहीं शिक्षक रंजीत सिंह दिसाले द्वारा 2014 में ही बनाई क्यूआर कोड किताबों से लाॅकडाउन में 8 देशों के 16 हजार बच्चे जुड़े और रूचि के साथ पढ़े। आज की तारीख में उसे एनसीईआरटी  इस्तेमाल कर रहा है। विनीता गर्ग और शुभोजीत पायने कंप्यूटर कोडिंग जैसे कठिन व जटिल विषय को सुगम बना कर संगीत और अन्य विषयों की पढ़ाई को सरल बना दिया है।

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पंचतत्व में लीन हुए पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी

भारत के 13वें राष्ट्रपति थे भारत रत्न प्रणब मुखर्जी और उनका कार्यकाल रहा था 2012 से 2017 तक। अपने कार्यकाल को बेहतर तरीके से पूरा करके फिलहाल वे दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग में रह रहे थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों व दिग्गजों ने राजाजी मार्ग स्थित उनके निवास पर उनके पार्थिक शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। दिवंगत प्रणब मुखर्जी को सभी वर्गों का सम्मान प्राप्त होता रहा। वे आम लोगों के बीच रहना पसंद करते थे। अंतिम यात्रा भी आम लोग की तरह ही संपन्न हुई। एक सजे हुए एंबुलेंस में उनके  पार्थिव शरीर को लोधी  विद्युत शवदाह गृह में ले जाकर पुत्र अभिजीत मुखर्जी द्वारा मुखाग्नि देने के बाद संस्कारित किया गया।

बता दें कि राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक रहे प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसंबर 1935 को जन्म ग्रहण किया था। राजनीति शास्त्र से एमए प्रणब मुखर्जी लगभग 6 वर्षों तक विद्यानगर कॉलेज में प्राध्यापक रहने के बाद 1969 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1982 में केंद्रीय वित्त मंत्री, 1995 में विदेश मंत्री और 2004 में रक्षा मंत्री बने। उन्हें पद्म विभूषण और फिर भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

चलते-चलते यह जानिए कि जिस कोरोना के कहर ने दुनिया में कोहराम मचा रखा है उसी कोरोना में 10 अगस्त 2020 को प्रणब मुखर्जी को अपनी चपेट में ले लिया और 31 अगस्त 2020 को उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली… और दुनिया को अलविदा कह दिया।

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जीवन जो कुछ नहीं दे सका, मौत उसे वह दे जाती है- डॉ.मधेपुरी

वर्ष 2009 से अब तक यानि 11 वर्षों तक सुशांत सिंह राजपूत फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड (मुंबई) में कठिन परिश्रम करने के बावजूद एक भी फिल्म फेयर अवार्ड नहीं पा सका, जबकि सुशांत के लाखों चाहने वाले आज भी हैं।

बता दें कि अवार्ड और पुरस्कार के नाम पर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को वर्ष 2014 में बेस्ट मेल डेब्यू के लिए सर्वप्रथम प्रोड्यूसर गिल्ड फिल्म अवार्ड और बाद में स्क्रीन अवार्ड से नवाजा गया था।

यह भी जानिए कि 3 वर्ष बीतने के बाद 2017 में फिल्म एम एस धोनी यानि भारतीय क्रिकेट कप्तान धोनी का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए सुशांत सिंह राजपूत को बेस्ट ऐक्टर का स्क्रीन अवार्ड तथा उसी वर्ष इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबोर्न में बेस्ट एक्टर अवार्ड से नवाजा गया था।

बता दें कि दुनिया को हम कब अलविदा कहेंगे, यह कोई नहीं जानता। वह प्रतिभा संपन्न सुशांत 14 जून 2020 को दुनिया से चला जाएगा, इसे कोई नहीं जानता था। परंतु बॉलीवुड सितारों की तरह सुशांत सिंह राजपूत ने भी एक सपना देखा था-” दादा साहब फाल्के पुरस्कार” पाने का, जो उसके मरणोपरांत पूरा होने जा रहा है। सचमुच, सच्चे दिल से देखा जाए गया सपना पूरा होने में कायनात की पूरी मदद मिल जाती है। जानिए कि दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स 2021 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को मरणोपरांत दिया जाएगा। अवार्ड कमेटी ने अपनी ऑफिशल इंस्टाग्राम पेज पर घोषित कर इसकी जानकारी दुनिया को दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 14 जून को मुंबई स्थित बांद्रा वाले अपार्टमेंट में बिहार का बेटा, पूर्णिया जिला निवासी एक्टर सुशांत को का शव मिला था। पिता ने पटना में एक एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस ने केस की जांच शुरू की और लगे हाथ दूसरे ही दिन पूर्णिया के पूर्व लोकप्रिय सांसद पप्पू यादव और मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार से इस केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही जांच प्रगति पर है।

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संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विदाई समारोह का निमंत्रण किया अस्वीकार

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन ने संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा को पत्र भेजकर कहा कि बार एसोसिएशन उनके अवकाश ग्रहण करने से पहले 2 सितंबर को उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित करना चाहता है। उस विदाई समारोह में भाग लेने हेतु श्रीमान द्वारा एसोसिएशन के निमंत्रण को स्वीकार करने की महती कृपा की जाय।

जानिये कि कोरोना के इस कहर काल में कोविड-19 पेनेडेमिक से जहां दुनिया त्राहिमाम कर रही है वहीं सुप्रीम कोर्ट के संवेदनशील जस्टिस श्री मिश्रा ने एसोसिएशन को पत्र के माध्यम से यही कहा कि मेरी अंतरात्मा मुझे किसी भी ऐसे विदाई समारोह में जाने की स्वीकृति नहीं देती।

सर्वाधिक संवेदनशील न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने पत्रोत्तर के माध्यम से एसोसिएशन से बार-बार क्षमा मांगते हुए यही कहा कि जब इस कोरोना के कहर एवं कोहराम से सभी लोग निकल जाएंगे और परिस्थिति नॉर्मल हो जाएगी तब मैं निश्चय ही आपके एसोसिएशन के सदस्यों के बीच आकर गर्मजोशी के साथ आपके आमंत्रण के लिए सम्मान प्रकट कर लूंगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे अति संवेदनशील जस्टिस अरुण मिश्रा के ऐसे सशक्त प्रेरणादायी विचार देश के समस्त समझ वाले एवं संवेदनशील लोगों का आये दिन मार्गदर्शन करता रहेगा। संवेदनशील न्यायमूर्ति के प्रति गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने संपूर्ण संवेदना के साथ कृतज्ञता ज्ञापित की है।

 

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अनलॉक- 4 यानि 1 सितंबर से क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद ?

कोरोना के कहर और कोहराम के दरमियान ट्रेन से लेकर प्लेन तक को बंद करना पड़ा तथा सिनेमा हॉल से लेकर मॉल तक में ताला लटका रहा। कोरोना संक्रमण इतना लंबा चलेगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था। स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक में पढ़ाई से लेकर परीक्षा सब कुछ बंद-बंद ही रहा।

बता दें कि 1 सितंबर से पूरे देश में अनलॉक का चौथा चरण शुरू होने जा रहा है जबकि बिहार राज्य में 6 सितंबर तक लॉकडाउन घोषित है। जानिए कि भारत में अब तक कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग 35 लाख और बिहार में 1 लाख 32 हजार  पार कर चुकी है। पूरे देश में इस खतरनाक कोरोना वायरस से अब तक 62 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

अनलॉक के चौथे चरण में 7 सितंबर से मेट्रो सेवा जो 22 मार्च से ही दिल्ली एवं एनसीआर में रुकी हुई थी उसे चालू की जा सकती है लेकिन केंद्र सरकार के अगले आदेश (तत्काल 30 सितंबर) तक स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। मेट्रो में अब संपर्क रहित टिकटिंग सिस्टम लागू होगा और टोकन के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह भी कि कुछ क्षेत्र विशेष में यानि कर्नाटक हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में राहत के लिए सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही रेस्तरां में शराब की बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जा सकता है।

यह भी कि घरेलू उड़ानों को कोलकाता में उतरने की स्वीकृति दी जा सकती है जबकि मुंबई में लोकल ट्रेन नहीं चलेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पश्चिम बंगाल में सप्ताह में दो दिन पूर्ण लॉकडाउन रहेगा तथा चेन्नई में इंटर-स्टेट एवं इंटर-डिस्ट्रिक्ट मूवमेंट के लिए ई-पास अनिवार्य होगा।

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लेखक राजेंद्र यादव ने ही पहली बार दलित साहित्य पर गोष्ठी कराई थी

लेखक राजेंद्र यादव और ‘हंस’ की एक सिक्के के दो पहलू जैसे हैं। जीवन के 57वें बसंत पार करने के बाद उन्होंने हंस का प्रकाशन शुरू किया था। इस उम्र में प्राय: साहित्यकार सुस्त पड़ जाते हैं, परंतु राजेंद्र यादव ने जो समय जो राह इस उम्र में पकड़ी वह उनके जीवन का सबसे उर्वर समय बन गया और उन्होंने हिन्दी साहित्य और विमर्श को बिल्कुल अलग ही दिशा दे दी तथा हिन्दी में दलित साहित्य को बढ़ाने का काम किया।

ये बातें डॉ.मधेपुरी मार्ग पर अवस्थित भारतीय जन लेखक संघ के केंद्रीय कार्यालय के महासचिव महेंद्र नारायण पंकज ने 28 अगस्त को राजेंद्र यादव के जन्मदिन पर ऑनलाइन जयंती मनाने के क्रम में कही।

इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार का डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने श्रद्धा निवेदित करते हुए लेखक राजेंद्र यादव की हंस पत्रिका के बाबत यही कहा कि हंस के पुनर्प्रकाशन के बाद उन्होंने हंस को ऐसे मंच का रूप दिया जिस पर कई नए महिला व पुरुष कहानीकार भी सामने आए, जिन्हें दुनिया जानती तक नहीं थी। उनका दुस्साहस कहिए कि तमाम विवादों के बावजूद भी उन्होंने नए लेखक या लेखिकाओं को मौका देते चले गए।

मौके पर बीजेएलएस मधेपुरा जिला सचिव  डॉ.गजेंद्र नारायण यादव ने समापन करते हुए यही कहा कि उन दिनों पुरातन मानसिकता के लोगों ने हंस की तीखी आलोचना की और कुंठित वक्तव्य भी दिए थे, परंतु राजेंद्र यादव कभी झुके नहीं बल्कि उस उम्र में भी वे अपनी चाल चलते रहे। अंत में साहित्यकार द्विजराज ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

 

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रोहित, थंगावेलू, मिनीका, विनेश फोगाट और रानी रामपाल को 25-25 लाख का खेल रत्न पुरस्कार मिलेगा

‘खेल रत्न’ भारत का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है जो राजीव गांधी के नाम रखा गया है। हर साल भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया जाता है। प्रत्येक वर्ष खेल दिवस (29 अगस्त) के दिन राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम आयोजित कर विभिन्न विधाओं के चुने गए खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिए जाते हैं।

बता दें कि इस वर्ष के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय ने 5 खिलाड़ियों को खेल रत्न देने का के फैसले पर मुहर लगा दी है। जिनमें क्रिकेट से रोहित शर्मा, पैराएथलीट से मरियप्पन थंगावेलू, टेबल टेनिस से मोनिका बन्ना, रेसलिंग से विनेश फोगाट और महिला हॉकी से रानी रामपाल शामिल हैं।

यह भी बता दें कि क्रिकेट खेल से खेल रत्न पाने वाला चौथा खिलाड़ी रोहित शर्मा है। उनसे पहले तेंदुलकर, धोनी और कोहली को खेल रत्न दिया जा चुका है। रोहित पहले खिलाड़ी होंगे जिन्हें 25 लाख की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा जबकि पूर्व में इन तीनों कप्तानों को 7.5 लाख ही मिलते रहे। इसी बार से इसमें वृद्धि की गई है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बार अर्जुन अवॉर्ड पाने वालों को 5 लाख की जगह 15 लाख, द्रोणाचार्य अवॉर्डी को 5 लाख की जगह 10 लाख तथा मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अवॉर्ड पाने वाले को 5 लाख की जगह 15 लाख की राशि देकर पुरस्कृत किए जाएंगे।

 

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90 वर्षीय मशहूर शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने अमेरिका में ली अंतिम साँस

भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पंडित जसराज का अमेरिका के न्यू जर्सी वाले निजी आवास पर सोमवार (17 अगस्त) को प्रातः 5:15 पर दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। यह जानकारी उनकी सुपुत्री दुर्गा जसराज ने सर्वप्रथम दुनिया को यही कहते हुए दी-

हम सपरिवार प्रार्थना करते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग के द्वार पर पिताश्री का स्वागत करें जहां वे अपना पसंदीदा भजन ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ उन्हें समर्पित करें।

बता दें कि 28 जनवरी 1930 को हरियाणा (हिसार) में जन्मे तथा 2020 के 28 जनवरी को अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले पंडित जसराज ने अपनी आखिरी प्रस्तुति 9 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर फेसबुक लाइव के जरिए वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर के लिए दी थी। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि कनाडा और अमेरिका में भी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ अर्ध-शास्त्रीय स्वरों के माध्यम से कुछ नामी शिष्यों को भी तैयार किया। कोरोना लॉकडाउन के चलते वे फिलहाल अमेरिका में ही अपनी पुत्री दुर्गा जसराज के पास रह रहे थे।

यह भी जानिए कि उनके समस्त प्रदर्शनों को एल्बम और फिल्म साउंडट्रैक के रूप में उनके शिष्यों ने तैयार किया है, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने तो विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित जसराज के सम्मान में खोजे गए एक नए ग्रह का नाम ही “पंडित जसराज” नाम दे डाला है।

ऐसे विश्व विख्यात भारतीय संगीतकार के निधन का समाचार सुनते ही मधेपुरा जिले के संगीत गुरुओं एवं उनके शिष्यों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। जिले के संगीत व कला प्रेमियों के लिए विभिन्न राजकीय आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु जिला प्रशासन द्वारा लगातार संयोजक/अध्यक्ष चयनित किए जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार व संगीत्यानुरागी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी  द्वारा इस कोरोना काल में वैसे विश्वविख्यात पंडित जसराज को श्रद्धांजलि देने हेतु शोक सभा आयोजित करने के एवज में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत तबला वादक प्रो.योगेंद्र नारायण यादव, प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, प्रो.संजय परमार, शशि प्रभा, रेखा यादव, पुष्पलता, सुनीत साना, चिरामणी यादव, लाला भूपेन्द्र, डॉ.रवि रंजन सहित शिवाली सरीखे नन्हे-मुन्ने कलाकारों को भी शोकोदगार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

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कोरोना से हुई मौतें 51 हजार के पार, लोकसभा-राज्यसभा एक साथ पहली बार

भारत में अब तक कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 26 लाख से ज्यादा हो चुकी है। फिलहाल कोरोना से हुई मौतें 51 हजार पार कर चुकी है। भारत में कोविड-19 का कहर बढ़ता ही चला जा रहा है। जबकि सारा संसार इसके उपचार हेतु वैक्सीन बनाने में लगा हुआ है। बता दें कि कोरोना वायरस के वैश्विक आंकड़ों पर काम करने वाले वेबसाइट वर्ल्डोमीटर्स के अनुसार अब तक भारत में कुल 19 लाख से ज्यादे लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

यह भी जानिए कि कोरोना को लेकर भारतीय संसद के मानसून सत्र के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के तहत एक अनोखी व्यवस्था की जा रही है। ऐसा है कि लोकसभा प्रातः 10:00 से 2:00 बजे दिन तक चलेगा तथा राज्यसभा की कार्यवाही 4:00 बजे संध्या से 8:00 बजे रात्रि तक चलेगी। इन दोनों सदनों के मॉनसून सत्र की कार्यवाही के लिए अपने-अपने कार्यकाल में एक-दूसरे के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। भारतीय संसद के इतिहास में 1952 के बाद कोरोना के कारण पहली बार ऐसा होगा कि कार्यवाही के दौरान लोकसभा और राज्यसभा का हाॅल एक साथ जुड़ जाएंगी। दो गज की दूरी पर बैठने के कारण दोनों को जोड़कर जगह बढ़ाई गई है। इस दौरान कई अलग-अलग जगहों पर बैठे मंत्री व सांसद बड़े-बड़े टीवी स्क्रीन एवं वीडियो कांफ्रेंसिंग से एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। प्रथम 4 घंटे (10:00 बजे से 2:00 बजे दिन) लोकसभा फिर 2 घंटे ब्रेक के बाद राज्यसभा की 4 घंटे ( 4:00 बजे से 8:00 बजे रात तक) की कार्यवाही शुरू होगी।

 

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डॉ.महावीर की 24वीं पुण्य तिथि पर सर्वप्रथम माल्यार्पण व पुष्पांजलि किया उद्घाटनकर्ता कुलपति डॉ.द्विवेदी व मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर पदासीन रहते हुए डॉ.महावीर प्रसाद यादव ने 13 अगस्त 1997 के दिन दुनिया को अलविदा कहा था। उनकी प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो.(डॉ.)ज्ञानांजय द्विवेदी एवं मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सहित बीएन मुस्टा के महासचिव व सीनेेेटर प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार, FA एससी दास, स्नातकोत्तर जंतु विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, कुलसचिव डॉ.कपिलदेव प्रसाद, विकास पदाधिकारी डाॅ.ललन अद्री, नवीन कुमार, पीआरओ सुधांशु शेखर, एनएसएस पदाधिकारी डॉ.अभय कुमार, डीन आरकेपी रमण, डॉ.शंकर कुमार मिश्रा आदि अन्य विश्वविद्यालय कर्मियों ने।

फिलहाल कोरोना के कहर के कारण सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए कम से कम समय में विश्वविद्यालय के एक शैक्षिक हाल में अतिथियों का स्वागत किया गया। डाॅ.महावीर बाबू के प्रति सबों ने दो-दो मिनट में अपने उद्गार व्यक्त किए। वित्त परामर्शी एससी दास, डीन आरके रमण एवं  कुलसचिव डॉ.कपिलदेव प्रसाद ने अपने संस्मरण सुनाए।

From LtoR VC Dr.Gyananjay Dwivedi, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & Registrar Dr.Kapildev Prasad at BNMU.
(From L to R) VC Dr.Gyananjay Dwivedi, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri & Registrar Dr.Kapildev Prasad at BNMU.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ.महावीर बाबू के साथ बिताए 25 वर्षों को समेटते हुए बस यही कहा-

अच्छी पुस्तकें गुरुओं के गुरु हुआ करती हैं। गुरु के दर्शन से भाव बदल जाते हैं, स्वभाव बदल जाते हैं और खुद के अंदर खुदा के दर्शन होने लगते हैं तथा हर किसी के अंतर्मन में प्रकाश का प्रादुर्भाव होने लगता है।

इसके अलावा डॉ.मधेपुरी ने वर्षवार महावीर बाबू के विधायक, शिक्षा मंत्री, प्रति कुलपति, सांसद और अंतिम बीएनएमयू के कुलपति बनने सहित शेक्सपियर, डेल कार्नेगी, टालस्टाय आदि को कोट करते हुए उन्हें टीपी कॉलेज का विश्वकर्मा कहकर  श्रोताओं की तालियां भी बटोरी।

संक्षिप्त उद्घाटन भाषण के क्रम में कुलपति प्रो.(डॉ.)ज्ञानांजय द्विवेदी ने दिवंगत कुलपति डॉ.महावीर प्रसाद यादव को निष्काम कर्मयोगी बताते हुए उपस्थित विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से यही कहा कि उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सब अपने-अपने हिस्से का आवंटित काम तो मनोयोग से पूरा करते रहें। डॉ.द्विवेदी ने मंच संचालक प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार से कहा कि तीन व्यक्तियों की एक कमिटी बना लें जो विश्वविद्यालय से जुड़े महापुरुषों के बाबत ऐसी दुर्लभ जानकारियां प्राप्त करने हेतु डॉ.मधेपुरी जैसे विद्वान को आमंत्रित कर विभिन्न अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित करती रहे।

अंत में विश्वविद्यालय की गतिविधियों में सर्वाधिक समय देने वाले प्रो.(डॉ.)नरेश कुमार ने डॉ.ललन सहनी सहित कुछ अन्य कर्मियों से उद्गार व्यक्त करने हेतु समय नहीं दे पाने के लिए क्षमा मांगते हुए सबों को धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम समापन की घोषणा भी की।

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