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लालू ने कहा, सजा के लिए मनपसंद चौराहा चुन लें प्रधानमंत्री

नोटबंदी को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला। सोमवार को उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल किया कि उन्हें किस चौराहे पर सजा दी जाए? वे अपना मनपसंद चौराहा चुन लें, जहाँ जनता उन्हें सजा देगी। दरअसल, नोटबंदी के बाद 13 नवंबर को गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि 50 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो उन्हें चौराहे पर जो सजा दी जाएगी, वह उसे स्वीकार करेंगे। बता दें कि नोटबंदी के विरोध मे आरजेडी ने 28 दिसंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में महाधरना देने की घोषणा भी की है।
सोमवार को लालू राजधानी पटना के सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद आजतक हालात नहीं सुधरे हैं। काम छिन जाने के कारण लाखों मजदूर शहर छोड़कर गांव लौटने को विवश हो रहे हैं। हजारों कंपनियां वेतन देने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त नकद नहीं है। उन्होंने नोटबंदी पर अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स के उस आकलन का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया जिससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था की क्षति हुई, बल्कि हाशिये पर खड़े करोड़ों गरीब लोगों को संकट में डाला गया।
इस दौरान लालू ने शिवसेना के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उसने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर वह मदमस्त हाथी नहीं बने। उत्तर प्रदेश का इतिहास रहा है कि जब-जब सत्ताधारी मस्ती में आए हैं, जनता ने तब-तब उन्हें सत्ता से उतार फेंका है। लालू ने कहा कि शिवसेना ठीक कह रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सपा फिर विजयी होगी और भाजपा प्रदेश में कहीं नहीं दिखेगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मिले ‘सुर’ मेरा तुम्हारा

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने साल 2013-14 के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कॉरपोरेट घरानों द्वारा करोड़ों की रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाया था। राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए लालू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से फंस गए हैं, अब उन्हें राष्ट्र को सफाई देनी होगी। लालू ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
बता दें कि बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि आदित्य बिड़ला और सहारा समूह ने 40 करोड़ रुपये नरेन्द्र मोदी को दिए थे। लालू का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री के ऊपर इस तरह के आरोप बिना सबूत नहीं लगा सकते। इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार में शामिल थे। मैं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करता हूँ। लालू ने यह भी कहा कि अगर कोई प्रवक्ता अब प्रधानमंत्री के बचाव में बयान देगा तो यह गलत होगा।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कहा था कि इनकम टैक्स के रिकॉर्ड के मुताबिक अक्टूबर 2013 से फरवरी 2014 के बीच सहारा ग्रुप ने प्रधानमंत्री मोदी को 40 करोड़ रुपए दिए थे। ये पैसे 9 बार में दिए गए थे। बिड़ला ग्रुप को लेकर राहुल का आरोप है कि इस ग्रुप ने प्रधानमंत्री को 12 करोड़ रुपये दिए थे।
बहरहाल, राजनीति तो खेल ही आरोप-प्रत्यारोप का है। भाजपा राहुल के बयान को पहले ही ‘बचकाना’ और ‘बेबुनियाद’ बता चुकी है। यहाँ गौर करने की बात यह है कि आरोपों के इस खेल में लालू अचानक राहुल-राग क्यों अलापने लगे? कहीं इसका कारण भाजपा के संग नीतीश की बढ़ती नजदीकियों की ख़बरें तो नहीं? कहीं लालू कांग्रेस के संग कोई ‘संभावना’ तलाशने में तो नहीं जुटे हैं? जो भी हो, लालू राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं और मोदी पर लगाए गए आरोपों पर राहुल का समर्थन कर उन्होंने मौके पर चौका मारा है। आप गौर से देखें तो पाएंगे कि एक तीर से उन्होंने दो निशाना – नीतीश पर ‘दबाव’ और कांग्रेस पर ‘प्रभाव’ – साधा है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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पप्पू ने कहा पहले नीतीश लालू की संपत्ति की जांच कराएं

मधेपुरा के सांसद और जनअधिकार पार्टी के संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सही मायने में बेनामी संपत्ति को बाहर लाना चाहते हैं तो पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार सहित अपनी पार्टी के विधायकों और सांसदों की संपत्ति की जांच कराएं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो बेनामी संपत्ति के नाम पर उनका कुछ कहना लोगों की आँखों में धूल झोंकने के बराबर होगा। गौरतलब है कि पप्पू ने ये बातें रविवार को पटना में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कही।

लालू-नीतीश पर निशाना साधने के साथ-साथ पप्पू ने भाजपा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि भाजपा द्वारा विभिन्न जिलों में पार्टी कार्यालय खोले जाने के लिए खरीदी गई जमीन की जांच हो। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से तमाम राजनीतिक पार्टी को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए कानून बनाने और राजनीतिक दलों के खातों की निगरानी की भी मांग की।

नोटबंदी के मुद्दे पर जनअधिकार पार्टी के संरक्षक ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कालाधन के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर 500 और 1000 रुपये पर रोक लगाकर आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को नोटबंदी को लेकर हाईकोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के कारण उद्योग और व्यवसाय ठप्प पड़ गया और एक बड़ी आबादी बेरोजगार हो गई है। मधेपुरा के सांसद ने केन्द्र सरकार पर कैशलेस सोसाइटी बनाने के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के कई अर्थशास्त्री ने नोटबंदी को अव्यावहारिक करार दिया है।

प्रेस कांफ्रेस में पप्पू ने घोषणा की कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर आगामी 20 दिसंबर को रेल चक्का जाम और 22 दिसंबर को सड़का जाम करेगी।

चलते-चलते पप्पू यादवजी से एक बात पूछे बिना नहीं रहा जा रहा कि आज जिस लालू की सम्पत्ति की जांच कराने वो नीतीश से कह रहे हैं, आज भी उसी लालू की पार्टी से वो संसद में हैं और हाल-हाल तक खुद को उनका ‘राजनीतिक वारिस’ बताते नहीं थक रहे थे। नैतिकता का तकाजा यह है कि वे पहले संसद की सदस्यता से इस्तीफा दें और उसके बाद लालू के लिए जो चाहे बोलें। और जहाँ तक बात भाजपा की है, लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से उनकी ‘नजदीकियां’ और उसके शीर्ष नेताओं से उनकी ‘मुलाकातें’ कोई छिपी हुई बात नहीं है।

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कैशलेस-कैशलेस चिल्लाकर क्या ‘ऑक्सीजन’ मिलता है मोदी को – लालू

नोटबंदी पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का हमलावर रुख लगातार बना हुआ है। कल ही उन्होंने कहा था कि नोटबंदी का वही हश्र होगा जो कांग्रेस के नसबंदी अभियान का हुआ था और आज उन्होंने नोटबंदी पर व्यापक आंदोलन का ऐलान करते हुए कहा कि सभी गैर भाजपा और समाजवादी दलों को एकजुट किया जाएगा। सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट कर इसके खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। बता दें कि लालू ने नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए आज आरजेडी की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद के खोदे गड्ढ़े में गिर गए हैं। आज मजदूरों, किसानों, छात्रों समेत आमजनों की स्थिति बदतर हो गई है। भाजपा नेताओं के पास ही सारा कालाधन है और उनके पास से ही यह निकल रहा है।
केन्द्र के ‘कैशलेस अभियान’ पर लालू ने कहा कि मोदी कैशलेस-कैशलेस चिल्लाते रहते हैं, इस तरह की फालतू बातें बोलने से क्या उन्हें ‘ऑक्सीजन’ मिलता है? पे-टीएम के प्रचार पर उन्होंने सवाल उठाया कि गांव का गरीब कहां से पे-टीएम करेगा? उसके पास मोबाइल कहां है? प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार पर आरोपों की बौछार के बीच उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि केन्द्र सरकार ने दो हजार के नोट पर गांधीजी के चश्मे के पीछे भाजपा का स्वच्छता का स्लोगन लिख दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच हो और इसे तुरंत हटाया जाए।
नोटबंदी के मुद्दे पर नीतीश के साथ मतभेद को खारिज करते हुए लालू ने कहा कि जनता की समस्या पर हम और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साथ हैं। महागठबंधन की सरकार में कोई टकराव नहीं है। गौरतलब है कि नीतीश पहले दिन से नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, हालांकि इसे लागू करने के तरीके से उनकी असहमति जरूर थी।
बता दें कि इस मुद्दे को लेकर लालू के आवास पर सभी जिलों और प्रखंडों से कार्यकर्ता व नेता जुटे थे। इस कार्यक्रम में प्रख्यात अर्थशास्त्री मोहन गुरूमूर्ति को भी नोटबंदी से होने वाले ‘नुकसान’ और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके ‘कुप्रभावों’ को लेकर प्रस्तुतिकरण देने बुलाया गया था। गुरुमूर्ति ने आशंका जताई कि सरकार के इस कदम से देश की जीडीपी में 2.5 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।
बहरहाल, कार्यक्रम में तय किया गया कि केन्द्र के इस ‘जनविरोधी’ कदम के खिलाफ पटना में जल्द ही विशाल रैली आयोजित की जाएगी। उससे पहले 20 से 26 दिसंबर के बीच पंचायत से प्रखंड स्तर तक जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में लालू-राबड़ी के साथ-साथ रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह, अब्दुल बारी सिद्दीकी, रामचन्द्र पूर्वे आदि पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अपने ‘निश्चय’ से मधेपुरा की ‘चेतना’ छू गए मुख्यमंत्री

निश्चय यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल मधेपुरा पहुँचे। उन्होंने यहाँ कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और स्थानीय बीएन मंडल स्टेडियम में ‘चेतना सभा’ को संबोधित किया। मधेपुरावासियों से अपने ‘विज़न’ को साझा करते हुए उन्होंने एक बार फिर विश्वास दिलाया कि उनके साहसिक और करिश्माई नेतृत्व में मधेपुरा समेत बिहार के सभी जिले विकास के पथ पर अबाध चलते रहेंगे।

गौरतलब है कि शुक्रवार से पूरे राज्य में युवा कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मधेपुरा में इसका शुभारंभ स्वयं मुख्यमंत्री ने किया। मधेपुरा बायपास रोड स्थित समिधा ग्रुप कम्प्यूटर संस्थान पहुंचकर उन्होंने कौशल विकास केन्द्र तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके उपरान्त बीएन मंडल स्टेडियम में आयोजित चेतना सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल से बिहार का विकास होगा। युवाओं को प्रतिभा निखारने के लिए कम्प्यूटर की समुचित जानकारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी मात्र 13 प्रतिशत छात्र ही उच्च शिक्षा ले पाते हैं। इसमें बढ़ोतरी के लिए सरकार प्रयासरत है। छात्रों को चार लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार खोजने के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी कॉलेजों में वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। हर जिले में इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, आईटीआई व पारा मेडिकल कॉलेज तथा जीएनम व एएनएम स्कूल खोले जाएंगे।

सात निश्चय योजना की बाबत मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी सफलता से बिहार की 75 प्रतिशत समस्याएं खत्म हो जाएंगी। आने वाले चार वर्षों में हर घर में शौचालय होगा। हर घर नल का जल होगा। हर गांव की गली पक्की होगी और नालियों का निर्माण होगा। साथ ही हर घर में बिजली का कनेक्शन होगा। इसके लिए सर्वे अंतिम चरण में है और लोगों की सूची बनाई जा रही है।

शराबबंदी को मजबूत निर्णय बताते हुए नीतीश कुमार ने लोगों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से समाज का वातावरण बदल गया है। उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा कि यदि पूरे देश में शराब बंद कर दी जाए तो भारत विकास में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। आगे उन्होंने कहा कि 21 जनवरी को शराबबंदी के दूसरे चरण की शुरुआत विशाल मानव-श्रृंखला के साथ की जाएगी जिससे बिहार का संदेश पूरे विश्व में जाएगा।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने मधेपुरा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया तथा सुखासन गांव में सात निश्चय के तहत हो रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। सुखासन जाने के क्रम में वे मधेपुरा के पूर्व सांसद स्वर्गीय आरपी यादव के तुनियाही स्थित समाधि स्थल भी गए। शाम में उन्होंने स्थानीय झल्लू बाबू सभागार में अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।

शुक्रवार के अतिव्यस्त कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने मधेपुरा में ही रात्रि विश्राम किया और आज सुबह 9 बजे देवाधिदेव महादेव के दर्शन हेतु सुप्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान गए। विगत कुछ वर्षों से आयोजित हो रहे और इस इलाके के आकर्षण का केन्द्र बन चुके ‘सिंहेश्वर महोत्सव’ का श्रेय उन्हें ही जाता है।

मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान उनके साथ जिले के प्रभारी सह ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफूर, विधान परिषद के उपसभापति हारून रसीद, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, डीजीपी पीके ठाकुर, डीएम मो. सोहैल आदि मौजूद रहे। अपने ‘निश्चय’ से मधेपुरा की ‘चेतना’ को छूकर मुख्यमंत्री निश्चय यात्रा के अगले पड़ाव सहरसा के लिए रवाना हो गए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जेडीयू ने कहा रघुवंश को कंट्रोल में रखें लालू

जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए अपने तल्ख तेवर और बयानों से चर्चा में रहने वाले आरजेडी के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह को जेडीयू ने बड़े सख्त लहजे में कहा कि वे ‘महागठबंधन धर्म’ से बाहर निकल रहे हैं और साथ में ये भी कि अगर पार्टी सुप्रीमो लालू ने अपने इस नेता को ‘कंट्रोल’ नहीं किया तो ‘कार्रवाई’ की बात भी सोची जा सकती है।
गौरतलब है कि रघुवंश ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बयान दिया था कि इन दिनों नीतीश की नजदीकी भाजपा से बढ़ रही है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पहले भी नीतीश भाजपा के साथ थे। ये बयान देकर रघुवंश ने जो ‘आग’ लगाई उसमें भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ये कहकर और ‘घी’ डाल दिया कि जो व्यक्ति 17 साल तक साथ रहने के बाद भाजपा को धोखा दे सकता है, वो किसी को भी दे सकता है। रघुवंश प्रसाद को लगता होगा कि जो भाजपा का नहीं हुआ वो लालू के साथ कब तक रहेगा?
इन बयानों के बाद तिलमिलाए जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि रघुवंश प्रसाद सिंह अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं और आजकल वे ‘पॉलिटिकल कोमा’ में हैं। आगे उन्होंने लालू से रघुवंश पर लगाम लगाने की अपील करते हुए कहा कि लालूजी हमारे महागठबंधन के वरिष्ठ नेता हैं और मैं उनसे अपील करता हूँ कि वो अपने नेता पर लगाम लगाएं।
पर रघुवंश तो रघुवंश ठहरे। वे कहाँ चुप रहने वाले थे। उन्होंने उल्टा जेडीयू से सवाल किया कि मुझे ‘महागठबंधन धर्म’ वाले लोग बताएं कि नोटबंदी पर अलग स्टैंड लेना कौन-सा गठबंधन धर्म है। इतना ही नहीं, उन्होंने एक बार फिर नीतीश पर आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार जानबूझकर मुझे गाली दिलवा रहे हैं।
बहरहाल, जेडीयू-आरजेडी के बीच आए दिन नोक-झोंक होती ही रहती है और ज्यादातर अवसरों पर कारण रघुवंश बाबू ही होते हैं। पार्टी ने उन्हें कई बार चेतावनी भी दी है लेकिन उनके बयानों की तल्खी घटने की जगह बढ़ती ही जा रही है। उन जैसे वरिष्ठ, अनुभवी व कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे नेता ऐसा ‘अगंभीर’ बर्ताव करेंगे यह बात पचती नहीं। ऐसे में एक सवाल यह उठ खड़ा होता है कि कहीं यह सब ‘प्रायोजित’ और ‘सोची-समझी रणनीति’ के तहत तो नहीं हो रहा? खैर, ये राजनीति है और राजनीति में ‘रघुवंश की रीत’ सदा से चली आई है। इन दांव-पेंचों में ज्यादा न ही उलझें तो बेहतर है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश की शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसले के तहत सभी हाइवे पर शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच द्वारा दिए गए इस फैसले में कहा गया है कि सभी राज्यों में नेशनल हाइवे पर या उसके आसपास पड़ने वाली शराब की दुकानों के लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से बिहार के सत्तारूढ़ महागठबंधन में खुशी की लहर है। खास तौर पर जेडीयू के नेताओं का उत्साह देखते ही बनता है। पार्टी इसे अपने मुखिया नीतीश कुमार की शराबबंदी मुहिम पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर मान रही है।

बहरहाल, बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर शराब की दुकानें पूरी तरह से बंद करवाने के लिए अगले साल एक अप्रैल तक की समयसीमा तय की गई है। इन शराब की दुकानों का एक अप्रैल के बाद रिन्युअल नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद जेडीयू में जैसे नई जान आ गई है। पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने शराबबंदी का फैसला किया और तमाम आलोचनाओं के बावजूद आज भी अडिग है। कोर्ट ने भी माना है कि शराबबंदी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की मुहिम रंग ला रही है और हम इस फैसले से बहुत ही खुश हैं। हमारे फैसले को संवैधानिक स्वीकृति मिली है।

उत्साह से लबरेज जेडीयू नेता व प्रवक्ता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कहा कि बिहार सरकार की नीतियों पर अब पूरे देश को चलना होगा। अब केन्द्र की सरकार को भी शराबबंदी पूरे देश में लागू करने के लिए सोचना होगा। आरजेडी नेता और बिहार सरकार के मंत्री आलोक मेहता ने भी फैसले की तारीफ की और कहा कि लोग शराब पीकर हाइवे पर गाड़ी चलाते थे और दुर्घटना के शिकार होते थे। शराब हाइवे पर होने वाली दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह थी। आज कोर्ट ने दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अच्छा फैसला दिया है। अब बिहार सरकार की शराबबंदी की मुहिम आन्दोलन का रूप लेगी।

आगे जो भी हो, कोर्ट के इस फैसले के बाद नीतीश के हौसले में अनगिनत पर लग गए होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं। अब अपनी भावी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए वो दोगुनी ताकत से लगेंगे। कहने की जरूरत नहीं कि इसके बाद राज्य और देश में कई समीकरण बनेंगे और कई बिगड़ेंगे, जिन पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से जुड़े पाँच अनछुए प्रसंग

कल स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की 132वीं जयंती थी। बिहार के जीरादेई में 3 दिसम्बर 1884 को जन्मे राजेन्द्र बाबू ने अपनी अन्तिम सांस भी बिहार में ही पटना स्थित सदाकत आश्रम में 28 फरवरी 1963 को ली। वे विलक्षण छात्र, आदर्श शिक्षक, सफल अधिवक्ता, प्रभावशाली लेखक, समर्पित गांधीवादी और स्वतंत्रता आन्दोलन में अपना सर्वस्व झोंक देने वाले सेनानी थे। ‘सादा जीवन उच्च विचार’ क्या होता है, ये समझने के लिए उनसे बेहतर उदाहरण हमें ढूंढ़े नहीं मिलेगा। 1950 से 1962 तक वे देश के ‘प्रथम नागरिक’ की भूमिका में रहे। अवकाश ग्रहण करने के बाद 1962 में ही उन्हें ‘भारतरत्न’ से नवाजा गया। कहने की जरूरत नहीं कि उनका सारा जीवन ही अनमोल धरोहर है और उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें कई-कई तरह से याद किया। चलिए, आज बिहार को अखंड गौरव देने वाले इस सपूत से जुड़े कुछ ऐसे रोचक प्रसंग से रू-ब-रू होते हैं, जिनसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं।

उत्तर प्रदेश से बिहार आए थे राजेन्द्र बाबू के पूर्वज

राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वज मूलरूप से कुआं गांव, अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। इनका कायस्थ परिवार था। यहाँ के कुछ कायस्थ परिवार इस स्थान को छोड़ बलिया जा बसे थे। कुछ परिवारों को बलिया भी रास नहीं आया और वे वहाँ से बिहार के सारन जिले के एक गांव जीरादेई में जा बसे। इन्हीं परिवारों में राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वजों का परिवार भी था। जीरादेई के पास ही एक छोटी-सी रियासत थी – हथुआ। राजेन्द्र बाबू के दादा को पढ़े-लिखे होने के कारण इस हथिया रियासत की दीवानी मिल गई। वे 25-30 साल तक इस रियासत के दीवान रहे। धीरे-धीरे उन्होंने स्वयं भी कुछ जमीन खरीद ली। राजेन्द्र बाबू के पिता महादेव सहाय इस जमींदारी की देखभाल करते थे।

बारात के वधू के घर पहुँचने पर पालकी में सोए मिले वर राजेन्द्र प्रसाद

राजेन्द्र प्रसाद का विवाह 12 साल की उम्र में हुआ था। घोडों, बैलगाड़ियों और हाथी के साथ चली उनकी बारात को वधू राजवंशी देवी के घर पहुँचने में दो दिन लगे थे। वर राजेन्द्र प्रसाद चांदी की पालकी में सज-धज कर बैठे थे। लम्बी यात्रा के बाद बारात मध्य रात्रि को वधू के घर पहुँची। उस वक्त राजेन्द्र बाबू पालकी में सोए मिले। बड़ी कठिनाई से उन्हें विवाह की रस्म के लिए उठाया गया।

पत्नी के संग बहुत कम बिता पाते थे समय

राजेन्द्र बाबू की धर्मपत्नी उन दिनों के रिवाज के अनुसार ज्यादातर पर्दे में ही रहती थीं। छुट्टियों में घर जाने पर अपनी पत्नी को देखने या उनसे बोलने का उन्हें बहुत ही कम अवसर मिलता था। बाद में जब राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय आन्दोलन में शामिल हो गए, तब पत्नी से मिलना और भी कम हो गया। वास्तव में विवाह के प्रथम पचास वर्षों में दोनों पति-पत्नी मुश्किल से पचास महीने साथ रहे होंगे।

धरी रह गई इंग्लैण्ड जाने की तैयारी

छात्रजीवन के दौरान राजेन्द्र प्रसाद आई.सी.एस. की परीक्षा देने के लिए इंग्लैण्ड जाना चाहते थे, पर उन्हें डर था कि परिवार के लोग इतनी दूर जाने की अनुमति कभी नहीं देंगे। इसीलिए उन्होंने बड़े ही गुप्त तरीके से जहाज से इंग्लैण्ड जाने के लिए सीट का आरक्षण करवाया और बाकी प्रबंध भी कर लिया। यहाँ तक कि इंग्लैण्ड में पहनने के लिए दो सूट भी सिलवा लिए। लेकिन जिसका उन्हें डर था वही हुआ। उनके पिता ने उन्हें अनुमति नहीं दी और उन्हें बड़ी अनिच्छा से इंग्लैण्ड जाने का विचार छोड़ना पड़ा।

आज भी चालू है उनका खाता

राजेन्द्र प्रसाद के देहावसान के 50 वर्ष से ज्यादा गुजर गए, लेकिन उनका बैंक खाता उनके सम्मान में आज भी चालू है। राजेन्द्र बाबू ने मृत्यु से कुछ समय पहले ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ‘पंजाब नेशनल बैंक’ में अपना खोता खोला था। यह खाता बैंक की पटना स्थित एग्जीबिशन रोड शाखा में 24 अक्टूबर 1962 को खोला गया था। बैंक उन्हें गर्व से अपना प्रथम ग्राहक कहता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक फिलहाल उनके खाते में 1,213 से कुछ अधिक रुपए हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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भाजपा ने बदली बिहार और दिल्ली की कमान

भाजपा आलाकमान ने दो महत्वपूर्ण राज्यों – बिहार और दिल्ली – में पार्टी का ‘चेहरा’ बदल दिया है। पार्टी नेतृत्व ने इन दोनों राज्यों में बड़ा परिवर्तन करते हुए नित्यानंद राय को बिहार का और मनोज तिवारी को दिल्ली का अध्यक्ष मनोनीत किया है। नित्यानंद राय बिहार में मंगल पांडेय और मनोज तिवारी दिल्ली में सतीश उपाध्याय की जगह लेंगे।

पहले बिहार की बात। बिहार भाजपा में काफी समय से बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। युवा नित्यानंद राय को पार्टी की जिम्मेदारी सौंपकर नेतृत्व ने युवाओं को लुभाने की कोशिश की है। साथ ही उन्हें सामने लाकर लालू (और आगे चलकर तेजस्वी) के माय समीकरण की काट भी खोजी गई है। गौरतलब है कि नित्यानंद राय यादव समाज से आते हैं और उन्हें अघ्यक्ष बनाकर पार्टी ने यादव और पिछड़ा कार्ड एक साथ खेला है। बता दें कि राय वर्तमान में उजियारपुर से सांसद हैं और इससे पहले 2000, फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010 में लगातार चार बार हाजीपुर से विधायक रह चुके हैं।

उधर दिल्ली की कमान मनोज तिवारी को देकर पार्टी में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है। लोकसभा चुनाव में दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से जीत के बाद मनोज तिवारी दिल्ली भाजपा का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गए थे। गौरतलब है कि दिल्ली की राजनीति में एक समय पंजाबी समुदाय का वर्चस्व माना जाता था, बाद में वैश्य समुदाय का वर्चस्व बढ़ा और मौजूदा समय में पूर्वांचलियों का बोलबाला है। ऐसे में पार्टी आलाकमान को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो पूर्वांचली वोटरों को लुभा सके। कहने की जरूरत नहीं कि मनोज तिवारी पूर्वांचलियों में खासे लोकप्रिय हैं और यही बात उनके चयन के पक्ष में गई। यहाँ यह रेखांकित करना भी जरूरी है कि तिवारी बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव से आते हैं और उन्हें सामने लाकर पार्टी ने दिल्ली में बिहारियों की ‘अपरिहार्यता’ को भी स्वीकार किया है।

बता दें कि भाजपा संविधान के मुताबिक हर तीन साल में पार्टी के अध्यक्ष बदले जाते हैं। पिछले साल दिल्ली और बिहार को छोड़कर सभी राज्यों के अध्यक्ष बदल दिए गए थे। अब दिल्ली और बिहार में भी इसी के तहत बदलाव हुए हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश के रुख से सकते में लालू-सोनिया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा की बढ़ती नजदीकियों और उनके बीच ‘गुप्त’ बातचीत की अटकलों से महागठबंधन के सहयोगियों में बेचैनी है। इस बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बातचीत की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि रविवार को हुई इस बातचीत के दौरान बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी भी मौजूद थे। इस बाबत पूछे जाने पर कोई भी टिप्पणी करने से आरजेडी के लोग परहेज कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नोटबंदी के मुद्दे पर नीतीश कुमार जिस तरह खुलकर मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं उसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि नीतीश का ‘नैतिक’ समर्थन अब ‘व्यावहारिक’ समर्थन में तब्दील हो गया है। तभी तो वो नोटबंदी के मुद्दे पर सोमवार को आयोजित विपक्षी दलों के ‘भारत बंद’ और ‘आक्रोश रैली’ से भी अपनी पार्टी को दूर रख रहे है, और उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान उनके ‘निर्णय’ और ‘सहयोग’ की खुली सराहना और स्वागत कर रहे हैं।

नीतीश के इस ‘यू-टर्न’ से आरजेडी और कांग्रेस का सकते में आना स्वाभाविक है। नोटबंदी का खुलकर विरोध कर रहीं दोनों पार्टियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर क्या वजह है जिससे नीतीश एक बार फिर से भाजपा के करीब जाने को मजबूर हैं। यह सही है कि राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता लेकिन किसी के करीब जाने या किसी से दूर होने की कोई छोटी या बड़ी, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वजह तो होनी ही चाहिए। नहीं तो कल तक जो नीतीश मिशन-2019 को ध्यान में रख एक-एक कदम बढ़ाने और मोदी के बरक्स खुद को खड़ा करने में लगे थे, आज भाजपा के लिए उनका सोया (या मोदी के उदय के बाद मर चुका) प्यार यूं अचानक जग न गया होता!

यह सही है कि बिहार में लालू के दोनों लाल के साथ सत्ता संभालने में नीतीश बहुत ‘सहज’ नहीं महसूस करते लेकिन नैतिकता का तकाजा यह है कि वो मैनडेट का सम्मान करें और ईमानदारी से गठबंधन धर्म निभाएं। अन्यथा, आने वाले समय में जनता की सहानुभूति लालू (कांग्रेस के साथ) बटोर ले जाएं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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