आये दिन देश के लगभग सभी राज्यों की विधान सभाओं, परिषदों तथा संसद के दोनों सदनों में भी सत्ता और विपक्षी दलों के सदस्यों के बीच जूते-चप्पल फेंकने से लेकर माइक तोड़ोउवल, कुर्सी फेंकउअल….. और महिला विधायिका की साड़ी सदन के अंदर खींचना भी लाखों लोगों के जनप्रतिनिधि के लिए अब शर्मनाक बातों के घेरे में नहीं आते देखने के बाद प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने 30 वर्ष पूर्व से ही प्रत्येक सदन में सदस्यों की सीट के चारों ओर पिंजरे बनवाए जाने की मांग तब शुरू की थी जब तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता सुश्री जयललिता की साड़ी एक मंत्री जी द्वारा खींचे जाने के बाद भारतीय संस्कृति को शर्मसार करने वाली ये बातें उन्होंने कही थी- “…आगे वह विधानसभा में तभी प्रवेश करेगी जब उनका शील अक्षुण्ण रहने की पूर्ण गारंटी सरकार देगी।”
जानिए कि दो दिन कबल यानि मंगलवार को कर्नाटक विधान परिषद में सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई…. अराजकता की ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि सदन में ही उप-सभापति एसएल गौड़ा को कुर्सी से खींच कर फर्श पर पटक दिया, जिन्हें मार्शल द्वारा उठाते हुए टीवी पर दुनिया के लोगों ने देखा। भला क्यों नहीं, जिन सदनों में आधे से अधिक सदस्य वैसे होते हैं जिन पर लूट, अपहरण….. मर्डर तक के केस चल रहे हैं…. जो बाहुबली कहे जाने पर गर्व महसूस करते हैं, वैसों ही के कारण पार्लियामेंट महीनों चल नहीं पाते और देशवासियों के टैक्स के करोड़ों-करोड़ रूपए बेमतलब बर्बाद होते रहते हैं। सारी परंपराएं तेजी से टूटती जा रही हैं। एक साथ होने वाला लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव का क्रम टूटा और करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार जनता पर पड़ा। क्या यही रहेगी हमारी संसदीय परंपरा?
बकौल समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी, संसदीय परंपरा के निर्वहन के लिए, महिला सदस्यों सहित अन्य सदस्यों की हिफाजत तथा विकास को गति देने के लिए प्रत्येक सदन में सदस्यों की सीट पर कुर्सी के चारों तरफ लोहे के पिंजरे बनें। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदस्यों को उसमें बंद हो जाना पड़े। पिंजरे में ऑटोमेटिक लॉक हो जिसका रिमोट स्पीकर के पास दिया जाए। सदस्य पिंजरे के अंदर से ही विचार व्यक्त करें……।


