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‘बिहार से होगी अगली हरित क्रांति’: राष्ट्रपति

गुरुवार को बिहार में तीसरे कृषि रोडमैप 2017-2022 का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रोडमैप का शुभारंभ किया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि चंपारण शताब्दी वर्ष में कृषि रोडमैप का लोकार्पण बेहतर कदम है। इससे किसानों को फायदा होगा। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि आज से नए युग की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश की हर थाली में एक बिहारी व्यंजन पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।

कृषि रोडमैप का शुभारंभ करने पटना पहुंचे राष्ट्रपति कोविंद का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं महामहिम और राष्ट्रपति बनने के बाद वे पहली बार बिहार आए हैं। इसलिए विशेष तौर पर आपका स्वागत है। बिहार का राज्यपाल रहते राष्ट्रपति बनना हमारे लिए गौरव की बात है।

उधर बिहार आकर राष्ट्रपति कोविंद खासे भावुक दिखे। उन्होंने कहा, मैं जन्म से तो नहीं लेकिन कर्म से बिहारी हूं। बिहारीपन ही मेरी पहचान है, जिस पर मुझे गर्व है। बिहार का राज्यपाल रहते हुए मुझे जो प्यार और स्नेह मिला वह जीवन भर के लिए यादगार क्षण बनकर दिल में रहेगा। राजभवन से लेकर राष्ट्रपति भवन का सफर मेरे जीवन के यादगार वर्ष रहेंगे।

कृषि के क्षेत्र में बिहार की संभावनाओं पर बात करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि बिहार के किसान मेहनती हैं और बिहार में कृषि की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन प्रणाली बेहतर तरीके से लागू हो जाए तो अगली हरित क्रांति बिहार से हो सकती है। कृषि रोड मैप में शामिल जैविक कॉरिडोर से बड़ा बदलाव आ सकता है। कृषि रोड मैप से बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बिहार की छवि को और बेहतर करने में सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीसरे कृषि रोड मैप के संबंध में बताया कि इसके तहत पांच वर्ष में 12 विभागों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं पर 1.54 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रोड मैप का लक्ष्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है। इसके लिए हर क्षेत्र में काम किया गया है। सिंचाई को बेहतर बनाने के लिए सिंचाई विभाग को अंदरुनी तौर पर दो हिस्सो में बांटा गया है। एक हिस्सा बाढ़ नियंत्रण का काम देखेगा और दूसरा हिस्सा सिंचाई परियोजनाओं को देखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सहकारी समिति बनायी जाएगी, जिसमें किसानों के आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा। कार्यक्रम को राज्यपाल सत्यपाल मलिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार आदि ने भी संबोधित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब तांत्रिक के भरोसे आरजेडी !

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आए दिन चौंकाने वाले काम करते रहते हैं और कभी-कभी कुछ ज्यादा ही चौंका देते हैं। जिन दिनों वे सत्ता के शिखर पर थे, उन्होंने लालू-चालीसा रचने वाले को उच्च सदन भेज कर ‘दरबारी’ राजनीति का नया संस्करण शुरू किया था और आज जब बिहार की सबसे बड़ी पार्टी (विधायकों की संख्या के लिहाज से) के मुखिया होकर भी वे परेशान हैं, उन्होंने ‘तंत्र’ राजनीति शुरू करने की ठान ली है। जी हां, लालू ने लगातार पीछा कर रहीं पारिवारिक व राजनीतिक परेशानियों से लड़ने के लिए एक तांत्रिक बाबा को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बाबा कौन हैं और इनमें ऐसी क्या खूबी है कि लालू ने इन्हें प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाज दिया है? तो बता दें कि शंकर चरण त्रिपाठी नाम के ये बाबा लखनऊ के रहने वाले हैं, पेशे से सेल्स टैक्स अधिकारी रहे हैं और तंत्र का भी ज्ञान रखते हैं। बताया जाता है कि पिछले काफी दिनों से लालू इनसे काफी प्रभावित रहे हैं और इन्हीं के कहने पर लालू ने रंगीन कुर्ता पहनना शुरू किया था। रंगीन कुर्ता पहनना शुरू करने के बाद लालू के दिन सचमुच फिरे और बिहार विधान सभा में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

पंडित शंकर चरण त्रिपाठी लोगों की कुंडली देखते हैं उनकी समस्याओं का समाधान मिनट भर में बता देते हैं। समाधान में छोटे-मोटे टोटके होते हैं। मसलन, किसे-कब जल अर्पित करें? किस रंग से प्यार करें और किस रंग से दूर रहें? कब-किस पशु-पक्षी को भोजन करा दें? कैसे वास्तु दोष दूर कर लें? उदाहरण के तौर पर हाल ही में लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने सरकारी बंगले का दरवाजा पीछे की ओर कराया है।

बहरहाल, लालू के इस कदम पर जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरजेडी सुप्रीमो राजनीति में भी अपने लिए   आरोपी साथी ढूंढ रहे हैं। जिस तरह उन्होंने आरोपों का लबादा ओढ़ कर अपनी राजनीति की उसी तरह अपनी पार्टी के लिए भी आरोपी और दोषी पदाधिकारी ढूंढ कर ला रहे हैं।  उन्होंने कहा कि लालू ने जिन शंकर चरण त्रिपाठी को अपनी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है, उन पर बलात्कार का  आरोप है। यह आरोप किसी ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी बहू ने लगाया है। लालू प्रसाद प्रवक्ता बनाने से पहले अपने इस तांत्रिक साथी के बारे में विस्तार से जानकारी तो ले लेते।

बकौल सिंह इन बाबा के बड़े-बड़े कारनामे हैं। लखनऊ में इनकी बड़ी बहू ने इन पर बलात्कार का आरोप लगाया है। यही नहीं, इनके लड़के पर भी उनकी बहू ने प्रताडऩा का केस किया हुआ है। अब लालू प्रसाद ऐसे लोगों को अपनी पार्टी का सिरमौर बना रहे हैं जिनसे बहु-बेटियां डरेंगी। लालू प्रसाद अपने कुनबे में एक से बढ़ कर एक नवरत्न रखे हुए हैं। इन नवरत्नों में शहाबुद्दीन, राजबल्लभ यादव और न जाने कितने माफिया शामिल हैं। अब उस फेहरिस्त में शंकर चरण त्रिपाठी चार चांद लगाएंगे। वहीं, बिहार भजपा के नेता व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है कि लालू तंत्र-मंत्र के सहारे सत्ता वापसी चाह रहे हैं लेकिन अब यह नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि लालू त्रिपाठी को प्रवक्ता क्यों बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देते तो सही रहता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नियोजित शिक्षक समान वेतन के हकदार : हाई कोर्ट

बिहार के लगभग 4 लाख नियोजित शिक्षकों को 14 वर्षों के कठिन संघर्षों के दौरान न्याय दिलाने में लगे रहे- कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सह विधान पार्षद श्री केदारनाथ पांडे एवं महासचिव श्री शत्रुघ्न प्रसाद सिंह आदि……. जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट श्री अभय कुमार जी से ‘समान काम समान वेतन’ को लेकर नियोजित, वित्तरहित व अन्य कोटि के शिक्षकों के बारे में कई राउंड विचार-विमर्श करते रहे……. आते-जाते रहे….. तथा देखे जाते रहे |

बता दें कि एमएलसी डॉ.संजीव ने तो प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए यही कहा कि अंततः जायज मांगों की न्यायिक जीत हुई | उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस आर.मेनन एवं जस्टिस डॉ.ए.के.उपाध्याय के खंडपीठ का फैसला- “समान कार्य के लिए समान वेतन के हकदार हैं ये नियोजित शिक्षक, ऐसा नहीं करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है |”

इस प्रकार के ऐतिहासिक फैसला को सुनते ही गोपालगंज से किशनगंज तक और सासाराम से सुपौल तक के सभी जिलों के नियोजित शिक्षकों के बीच खुशी की ऐसी लहर दौड़ने लगी कि सभी एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाने लगे, मिठाइयाँ खिलाने लगे और पटाखे फोड़ने लगे | सूबे के सभी शिक्षक संगठनों द्वारा ‘न्याय की जीत हुई’ का उद्घोष करते हुए मुक्तकंठ से माननीय उच्च न्यायालय के प्रति बार-बार आभार प्रकट किया जाता रहा |

MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .
MLC Dr.Sanjeev Kumar Singh , Chairman of Bihar Madhyamik Shikshak Sangh cum Member of Bihar Vidhan Parishad , Shri Kedarnath Pandey & Mahasachiv Shri Shatrughan Prasad Singh with senior advocate Shri Abhay Kumar .

एम.एल.सी. डॉ.संजीव ने इस ऐतिहासिक फैसले को नियोजित शिक्षकों एवं इनके संघ-संगठनों के सतत संघर्ष का फल बताते हुए समस्त नियोजित शिक्षकों को हृदय से बधाई दिया है तथा सरकार के समक्ष अपनी भावनाओं का इजहार इस प्रकार किया है-

“यह न्यायादेश सिर्फ शिक्षकों के संदर्भ में ही नहीं बल्कि सरकार को इसे व्यापक शैक्षणिक संदर्भ में लेने की जरूरत है | सरकार द्वारा सहजतापूर्वक तत्काल इस फैसले को लागू किये जाने से नियोजित एवं स्थायी शिक्षकों का भेदभाव मिटेगा और वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य बदलने के साथ-साथ सार्थक एवं सकारात्मक परिणाम नजर आयेगा”

पुनः MLC डॉ.संजीव ने कहा कि संबंधित फैसले का समुचित अध्ययन किये बिना माननीय शिक्षा मंत्री का यह वक्तव्य कि इस न्यायादेश के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे, कहीं से भी राज्य के शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं होगा बल्कि यह शिक्षकों के नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध ही होगा……. साथ ही यह न्यायालय की अवमानना का भी मामला बन सकता है |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri.

इस बाबत जब समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ही तो माननीय हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया है |सूबे की सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय हाई कोर्ट के फैसले को तत्काल लागू करना चाहिए | डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए यहाँ तक कह डाला कि नियोजित शिक्षकों को चार-पांच माह से वेतन नहीं मिलना बल्कि होली-दशहरा-दिवाली, छठ-ईद-मुहर्रम जैसे पर्वों पर भी इस तरह की सरकारी चुप्पी को क्या कहेंगे आप…….? सरकार डाल-डाल चलेगी तो शिक्षक संगठनों को पात-पात चलने को मजबूर होना होगा……..|

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बाबा विशुराउत मेले को राजकीय दर्जा मिलने पर जश्न का माहौल

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने सर्वाधिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मधेपुरा अबतक को बताया कि जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित बाबा विशुराउत मंदिर में प्रतिवर्ष 13 अप्रैल से लगनेवाले तीन दिवसीय मेला को राज्य सरकार द्वारा राजकीय दर्जा दिया जाने वाला पत्र प्राप्त हो गया है | उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि नीतीश सरकार के माननीय मंत्री राम नारायण मंडल, राजस्व व भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव प्रवीण कुमार झा द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना ज्ञापांक- 898(8)-01 नवंबर, 2017 के तहत इस मेले को राजकीय मेला अधिसूचित करते हुए बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में दे दिया गया है |

बता दें कि मधेपुरा जिला अंतर्गत चौसा प्रखंड के पचरासी बथान में गोपालक लोक देवता के रूप में बाबा विशुराउत की पूजा-अर्चना नियम व निष्ठा के साथ शुरू दुग्धाभिषेक द्वारा की जाती रही है | पचरासी बथान स्थित उनकी समाधि पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को विशेष श्रृंगार पूजा होती है | साथ ही बाबा विशुराउत की समाधि पर इतनी मात्रा में श्रद्धालुओं द्वारा दूध चढ़ाया जाता है कि आस-पास में दूध की नदी बहने लगती है | यूँ तो विशु बाबा की महिमा अपरंपार है और विशेषता यह है कि चाहे जितनी भी दूरी से श्रद्धालुगण कच्चा दूध लेकर आते हैं- वह दूध ना तो फटता है और ना खराब होता है |

Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.
Devotees offering Raw Milk at Baba Vishuraut Temple.

यह भी जानिए कि बाबा विशु के नाम से चौसा में एक महाविद्यालय की स्थापना स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा की गई है तथा कोसी नदी पर विशाल सेतु भी बना है | आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के श्रमशील जनता एवं वर्तमान विधायक सह राजस्व भूमि सुधार सहित कई विभागों के मंत्री रह चुके नरेन्द्र नारायण यादव के आसपास आज जश्न का माहौल है क्योंकि यहाँ के लोग वर्षो से बाबा विशुराउत मेला को राजकीय दर्जा देने की मांग कर रहे थे | आज बिहार सरकार द्वारा एक ओर जहाँ विशुराउत मेला को और वहीं दूसरी ओर आस्था का महापर्व छठ पूजा के दौरान आयोजित होने वाले ‘देव मेला’ को भी राजकीय दर्जा दिये जाने पर संपूर्ण बिहार में ही हर्ष व्याप्त है |

Md.Sohail (IAS), Madhepura
Md.Sohail (IAS), Madhepura .

चलते-चलते यह भी बता दें कि बाबा विशुराउत की समाधि पर बिहार के अनेक विधायक, मंत्री, सांसद एवं कई मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय स्तर के नेतागण का आना-जाना लगा ही रहता है जिन्हें आज बेहद खुशी होती होगी | साथ ही आकाश से निरखते हुए शुभाशीष अर्पित कर रहे होंगे यहाँ के प्रथम विधायक तनुक लाल मंडल, विद्याकर कवि एवं वीरेंद्र प्रसाद सिंह आदि भी………| इलाके के पशुपालकों में उत्साह व उमंग को देखकर स्थानीय बुद्धिजीवियों- सूर्यकुमार पटवे, डॉ.अंबिका प्रसाद गुप्ता, रघुनंदन यादव, मुर्शीद आलम, बैजनाथ साह, निवास चन्द, मुन्ना यादव, जीवन शर्मा, सुबोध सिंह……… आदि ने इस मेला को राजकीय मेला घोषित किये जाने पर ईश्वर से यही कहा कि अब मेला के साथ इस इलाके में भी विकास का नया आयाम खुलेगा |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट के सदस्य सुप्रसिद्ध समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से टिप्पणी करने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बिहार में सोनपुर के बाद एक महीने तक चलने वाला सिंहेश्वर मेला को जल्द ही राजकीय दर्जा मिलेगा क्योंकि इसे नीतीश सरकार द्वारा “महोत्सव” की स्वीकृति तो दे ही दी गई है…… अब डीएम मो.सोहैल द्वारा राजकीय दर्जा देने हेतु लिखे गए पत्रादि के प्रयास को शीघ्रातिशीघ्र सफलता मिलेगी ही मिलेगी……. तब सिंहेश्वर के श्रद्धालु जमकर जश्न मनायेंगे |

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सामा-चकेवा भाई-बहन के अतिरिक्त पक्षियों से भी जुड़ा त्योहार है

छठ पर्व संपन्न होने के साथ ही मिथिला-कोसी का यह लोकपर्व सामा-चकेवा शुरू हो जाता है | मिथिलांचल में यह पर्व उत्सव के रूप में मनाया जाता है | 8 दिनों का यह त्योहार भाई-बहन के बीच के अटूट प्रेम को दर्शाता है जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है | सामा-चकेवा से जुड़ी लोकगीत- “चुगला करे चुगली बिलैया करे म्याऊं……….. गाम के अधिकारी हमर बड़का भैया हो……. कई दिनों तक घर-आंगन में गूंजते रहते हैं | ज्ञातव्य हो कि मिथिलांचल में मवेशियों का त्योहार तो मनाया ही जाता है, पक्षियों के लिए भी त्योहार है जिसे ‘सामा-चकेवा’ के नाम से जाना जाता है |

बता दें कि लोक कथाओं के अनुसार ‘सामा’ कृष्ण की पुत्री थी | कुछ चुगलों द्वारा आरोप लगाने के कारण मथुरा के राजा भगवान कृष्ण ने क्रोधित होकर उसे मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा सुना दी | परंतु अपने भाई सांभ की भक्ति के कारण, ‘चकेवा’ के त्याग के साथ-साथ अटूट एवं निश्छल प्रेम होने के कारण ‘सामा’ पुनः पक्षी से मनुष्य के रूप में आ जाती है | तब से सामा-चकेवा पर्व मनाने वाली लड़कियां कार्तिक पूर्णिमा की रात में चुगला के मुंह में आग लगाकर जलाती है और विसर्जित करती है | ग्रामीण इलाके में आज भी यह पर्व उत्साह पूर्वक मनाया जाता है | महापर्व छठ की समाप्ति के साथ ही बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए कार्तिक पूर्णिमा तक प्रत्येक दिन इस खेल का आयोजन करती हैं |

Sama Chakeva celebration in Mithila.
Sama Chakeva celebration in Mithila.

यह भी बता दें कि भाई-बहन के बीच का प्रेम व त्याग लोकगीतों के माध्यम से भैयादूज से शुरु होकर कार्तिक पूर्णिमा की देर रात तक में संपन्न होता है | पूर्णिमा की रात को महिलाएं सहेलियों की टोली बनाकर सामा से सजे डाले को कंधे या सिर पर ले-लेकर गीत गाते हुए सामा खेलती है | चकेवा व चुगला सहित मिट्टी की बनाई गई विभिन्न पक्षियों की मूर्तियों को डाले में सजाकर निकट के तालाब में या जोते हुए खेतों में विसर्जित कर आती हैं |

जानकारों के अनुसार सामा-चकेवा के बाद कोसी-मिथिलांचल में आते हैं प्रवासी पक्षीगण- जिन्हें यहाँ के लोग अधंगा….. लालसर…… सुर्खाब…… नकटा….. हसुआ आदि नामों से जानते हैं | मिथिलांचल में मेहमानों की तरह इन पंक्षियों का स्वागत होना चाहिए, परंतु ऐसा होता नहीं………| लोगों द्वारा लगातार इनके शिकार होने के चलते इन पक्षियों की तादाद में सर्वाधिक कमी आती जा रही है |

चलते-चलते बता दें कि जहाँ पहले महिलाएं अपने हाथों से मिट्टी के सामा-चकेवा एवं विभिन्न पक्षियों की मूर्तियां बनाती थी और विभिन्न रंगों से सजाती थी वहीं अब बाजार में बिक रहे रंग-बिरंगे मिट्टी से बनी हुई रेडीमेड ‘सामा-चकेवा’ आदि खरीद लाती हैं | संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार की मानसिकता में सर्वाधिक वृद्धि होने के कारण आये दिनों लोग इस पर्व से दूर होते जा रहे हैं |

फिर भी मिथिलांचल की कुछ बेटियाँ आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन सामा खेलने अपने ससुरालों से मायके अवश्य आयेंगी और नम आँखों से भावपूर्ण समदाउन गीतों के बीच अपने-अपने भाइयों को खुद से ठेकुआ, मुढ़ी, भुसवा……  खिलायेंगी……. परंपरा जीवित रहेगी, तभी ‘प्रेम’ अमर रहेगा !

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फिर चुनाव आयोग पहुंचा जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल

जेडीयू का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चुनाव आयोग से मिला और शरद खेमे द्वारा दायर याचिका को जल्द खारिज करने का आग्रह किया। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, महासचिव संजय झा एवं बिहार सरकार में मंत्री ललन सिंह वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात चुनाव के मद्देनजर शरद खेमे की याचिका पर जल्द फैसला लेकर उसे खारिज करने का चुनाव आयोग से आग्रह किया। गौरतलब है कि शरद खेमे ने जदयू और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए चुनाव आयोग में ज्ञापन सौंप रखा है।

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि गुजरात में 9 नवंबर से नामांकन शुरू है और उससे पहले हमें पार्टी के प्रत्याशी तय करने हैं और उन्हें पार्टी सिंबल आवंटित करना है। जबकि शरद यादव केवल चुनाव आयोग का समय बर्बाद करना चाहते हैं।

बकौल प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है जेडीयू नीतीश कुमार की है। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर राजगीर में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगी थी। उस बैठक में शरद यादव भी मौजूद थे। अब शरद यादव कुछ अलग ही दावा कर रहे हैं।

चलते-चलते बता दें कि इस बीच शरद खेमे द्वारा ज्ञापन के साथ दिए गए तीन सौ से अधिक शपथ पत्रों की जांच चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग ने 31 अक्टूबर तक इन शपथ पत्रों की मूल प्रति जमा करने कहा है।

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छठ महापर्व स्वच्छ एवं सुगंधमय बना देता है सम्पूर्ण बिहार को……..!

आस्था एवं विश्वास के इस महापर्व छठ में उत्साह व उमंग की ऊंचाई इतनी होती है कि श्रद्धापूर्ण माहौल में सम्पूर्ण बिहार स्वच्छ एवं सुगंधमय बन जाता है | नदी से लेकर नाले तक एवं पोखर से लेकर पनघट तक की सफाई हो जाती है |

बता दें कि चार दिवसीय इस महापर्व में जहाँ उगते सूरज से पहले ढलते सूरज को ही नमन किया जाता है, उसी तर्ज पर प्रशासन द्वारा भी दिल्ली-मुंबई-हरियाणा….. से गाँवों तक आने के लिए (पद्मश्री संतोष यादव (मुंगेर) , गीतकार राजशेखर (मधेपुरा) सहित अन्य आम लोगों  व  मजदूरों के वास्ते) विशेष ट्रेन की व्यवस्था जिस तरह छठ से पूर्व की गई थी उसी तरह उन्हें छठ के बाद पुनः कार्यस्थल तक पहूँचाने के लिए और अधिक सुविधाओं के साथ व्यस्था की जा रही है | भारतीय रेल के समस्तीपुर मंडल के सीनियर डीसीएम वीरेन्द्र कुमार के निर्देश पर छठ पर्व के बाद लौट रहे रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सहरसा स्टेशन पर अतिरिक्त चार टिकट काउंटर खोलने के संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है और तदनुरूप डीसीआई रमण झा टिकट काउंटर चालू करवाने में जुट गये हैं |

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री-आपदा प्रबंधन मंत्री से लेकर जिला प्रशासन की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था के बावजूद राज्य में कुल 63 लोगों की मौत छठ पर्व के दौरान डूबने से हुई जिसमें मधेपुरा से एक के डूबने की पुष्टि की गई है, जबकि जिले में 192 घाटों पर डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार और एसडीएम संजय कुमार निराला की टीम एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, मोटरबोट व गोताखोरों सहित अन्य सतर्कताओं के साथ तैनात दिखे | डीएम मो.सोहैल ने तो यहां तक हिदायत दे डाली थी कि अभिभावक अपने बच्चों के पाँकेट में पूरा पता लिखकर ‘कागज’ डाल दें ताकि भीड़ में खो जाने पर उसे उनके परिजनों को आसानी से हस्तगत करा दिये जायेंगे |

यह भी जानिए कि कर्मकांड की जटिलता से मुक्त………..  इस महापर्व छठ में समानता की सर्वाधिक विशालता नजर आती है- ना आडंबर, ना पैसे, ना स्टेटस………. और ना पूजा कराने के वास्ते पंडित-पुरोहित की जरूरत | मरिक जाति द्वारा तैयार सभी के सूप में वही अल्हुआ, सुथनी, मूली, गाजर, हल्दी-अदरक-ईख……..  नारियल-बद्दी-जायफल आदि | सभी अपने-अपने माथे पर दउरा उठाते हैं | घाट पर सभी व्रती होते हैं चाहे अपने निजी आवासीय परिसर वाले निर्मित घाटों पर वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परिवार हो या पूर्व मुख्यमंत्री लालू-राबड़ी का या फिर मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी का ही परिवार क्यों ना हो | ऊर्जा के अनंत स्रोतवाले सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना ही तो छठ महापर्व का सार है, जो हमारे अस्तित्व को कायम रखने में सहायक है |

बिहारी समाज देश से लेकर विदेश तक में जहाँ भी होते हैं- छठ की थाली में एकता का दीप जलाने के वास्ते ट्रेन या प्लेन से घर आने की कोशिश में जुटे रहते हैं………|

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छठ के अर्घ्य के मूल में हैं भगवान श्रीकृष्ण

आस्था का महापर्व है छठ। इस छठ से न जाने कितनी ही कथाएं जुड़ी हुई हैं। सच तो यह है कि कोई पर्व ‘महापर्व’ बनता ही तब है जब उससे हमारी, आपकी, गांव की, शहर की, पुराण की, इतिहास की अनगिनत स्मृतियां-अनुभूतियां कथाओं के रूप में जुड़ जाएं। आपको सुखद आश्चर्य होगा कि महापर्व छठ की एक कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और उस कथा का विशेष महत्व है क्योंकि वो हमारा परिचय उस बिन्दु से कराती है जहां सूर्य को अर्घ्य देने की पवित्र परिपाटी का उद्गम है। चलिए, आपको ले चलें बिहार के नालंदा जिला स्थित बड़गांव जहां स्वयं श्रीकृष्ण पधारे थे और जिनकी प्रेरणा से यहां भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई थी।

बड़गांव वैदिक काल से ही सूर्योपासना का प्रमुख केन्द्र रहा है। यहां का सूर्यमंदिर दुनिया के 12 अर्कों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां छठ करने पर हर मुराद पूरी होती है। तत्कालीन मगध में छठ की महिमा इतनी उत्कर्ष पर थी कि युद्ध के लिए राजगीर आए भगवान कृष्ण ने भी बड़गांव पहुंच कर भगवान सूर्य की अराधना की थी। इसकी चर्चा सूर्य पुराण में भी है। आज भी हजारों श्रद्धालु चैत और कार्तिक माह में यहां छठ का व्रत करने आते हैं।

बहरहाल, यहां से आगे चलते हैं। ऐसी मान्यता है कि महर्षि दुर्वासा एक बार श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका गए थे। उस समय भगवान कृष्ण रुक्मिणी के साथ विहार कर रहे थे। उसी दौरान किसी बात पर श्रीकृष्ण के पौत्र राजा साम्ब को हंसी आ गई। महर्षि दुर्वासा ने उनकी हंसी को अपना उपहास समझ लिया और उन्हें कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। श्रीकृष्ण ने इस कष्टदायी श्राप से मुक्ति के लिए अपने पौत्र को सूर्य की अराधना करने को कहा। तब राजा साम्ब ने 49 दिनों तक बर्राक (वर्तमान बड़गांव) में रहकर भगवान सूर्य की उपासना की। कहते हैं उन्होंने वहां स्थित एक गड्ढ़े के जल का सेवन किया और उसी से सूर्य को अर्घ्य दिया, जिससे वे रोग व श्राप से मुक्त हो सके। आगे चलकर राजा साम्ब ने अपने पितामह श्रीकृष्ण की आज्ञा से उस गड्ढे वाले स्थान की खुदाई करके तालाब का निर्माण कराया। इसमें स्नान करके आज भी कुष्ठ जैसे असाध्य रोग से लोगों को मुक्ति मिलती है।

आपको बता दें कि कालांतर में तालाब की खुदाई के दौरान भगवान सूर्य, कल्प विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, आदित्य माता, जिन्हें छठी मैया भी कहते है, सहित नवग्रह देवता की प्रतिमाएं इस स्थान से निकलीं। तालाब के पास ही एक सूर्यमंदिर भी था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसकी स्थापना अपने पितामह के कहने पर राजा साम्ब ने ही कराई थी। आगे चलकर 1934 के भूकंप में यह मंदिर ध्वस्त हो गया। बाद में ग्रामीणों ने तालाब से कुछ दूर पर मंदिर का निर्माण कर सभी प्रतिमाओं को स्थापित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तेजस्वी ने कुछ इस तरह दी अमित शाह को जन्मदिन की बधाई

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भारतीय जनता पार्टी प्राय: रोज हमले करती है। सुशील कुमार मोदी समेत बिहार भाजपा के अन्य नेता ही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ऐसा कोई मौका नहीं चूकते। दूसरी तरफ लालू और उनके बेटे भी जवाब देने में कोई कसर नहीं रखते। आज आरजेडी के ‘युवराज’ को भाजपा पर तंज कसने का जबरदस्त मौका मिला और उन्होंने इसे बेहद खास तरीके से भुनाया।

जी हां, मौका था भाजपा के ‘करिश्माई’ अध्यक्ष अमित शाह के जन्मदिन का। रविवार को वे 53 साल के हो गए। देश भर से बधाईयों का तांता लगा था। ऐसे में भला तेजस्वी क्यों पीछे रहते? उन्होंने भी शाह को बधाई दी पर कुछ इस अंदाज में कि वो देखते ही देखते वायरल हो गई।

दरअसल यह बधाई कम, तंज ज्यादा था। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बधाई दी और लिखा, “अमित शाह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत, सफलता दे और उनकी दौलत 256000000 (16000×16000) गुना बढ़ जाए।“ तेजस्वी के इस ट्वीट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। पर इससे पहले लोगों की बधाईयों का शुक्रिया अदा कर रहे शाह खामोश रहे। उन्होंने शायद ही अपने जन्मदिन पर ऐसी बधाई का अनुमान किया होगा!

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले अमित शाह पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे और अब उनके बेटे जय शाह पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक ‘मोदी-राज’ में भाजपा अध्यक्ष के बेटे की कमाई 50 हजार से 80 करोड़ जा पहुंची। जी हां, इन ख़बरों पर यकीन करें तो पिछले एक साल में जय शाह की कंपनी का टर्नओवर 16 हजार गुना बढ़ा। तेजस्वी ने अपने ट्वीट में इसी 16000 को निशाना बनाते हुए उसके 16000 गुना बढ़ने की बात कही।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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एल्सटॉम कंपनी ने लिया मधेपुरा के छह गाँवों को गोद

मधेपुरा विद्युत रेल इंजन कारखाना निर्माण में जुटा है फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम | पहला रेल इंजन बनना चालू होने के साथ एल्सटॉम द्वारा आस-पास के 6 गाँवों- तुनियाही (उत्तरी-दक्षिणी), लक्ष्मीरामपुर (उत्तरी-दक्षिणी) एवं गणेश स्थान (वार्ड न० – 13 और 14) को गोद लिया गया है |

बता दें कि प्रोजेक्ट पदाधिकारी ऋषिकेष रंजन द्वारा मधेपुरा अबतक को यह जानकारी दी गई कि जहाँ इन गाँवों में नियमितरुप से 6 मोबाइल विकास केंद्रों में फिलहाल स्कूल नहीं जाने वाले 14 वर्ष से कम उम्र के 110 बच्चों को एल्सटॉम की ओर से NGO- प्रज्ञा’ द्वारा नियमित रूप से पढ़ाया जाता है वहीं डॉ.एम.के.झा के निर्देशन में पांच सदस्यों वाली मेडिकल टीम द्वारा गोद लिए गये गाँवों में नियमित रुप से जा-जाकर जरूरतमंद सभी मरीजों की मुफ्त जाँच की जाती है और मुफ्त दवा भी उपलब्ध कराई जाती है |

एल्सटॉम कंपनी के वरीय पदाधिकारी के.के.भार्गव ने भी बताया कि आने वाले दिनों में सामाजिक सरोकार के तहत कई और अन्य विकास के काम किए जायेंगे | तत्काल इन गाँवों के बेरोजगार युवाओं एवं महिलाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा सरकारी नौकरियों में निकलने वाली वैकेंसी के बारे में भी इन्हें जानकारी दी जा रही है | कंपनी इन्हें Job दिलाने की दिशा में हर संभव प्रयास करेगी |

इस अवसर पर मधेपुरा के शिक्षाविद-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री सहित एल्सटॉम कंपनी के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को दीपावली एवं छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए यही कहा कि ‘एल्सटॉम’ एवं ‘प्रज्ञा’ द्वारा आस-पास के गोद लिए गये इन गाँवों से अशिक्षा और बेरोजगारी को दूर करने की जो मुहिम चलायी जा रही है वह निश्चिय ही ग्रासरूट पर किये जाने वाले कार्य हैं- जिनसे गाँवों का विकास होगा, क्योंकि अभी भी तो हमारा गाँव गरीब ही है | गाँधी-लोहिया-जयप्रकाश एवं भूपेन्द्र-भीम-कर्पूरी….. का भारत तो मूलरूप से गाँवों में ही बसता है |

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