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फिर बिगड़े चौबे के बोल

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलने के क्रम में चौबे ने कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी जो किसी भी तरह शोभनीय नहीं। उन्होंने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल को श्मशान पहुंचाने के लिए चार लोग भी नहीं मिलेंगे।

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अश्विनी चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शेर हैं और राहुल गांधी सवा शेर बनने की कोशिश न करें। उन्‍होंने सवाल किया कि कांग्रेस अध्‍यक्ष लोकसभा में क्‍यों गूंगे रहते हैं? उनके बयानों में कोई तथ्‍य रहता है क्‍या? दरअसल चौबे प्रधानमंत्री मोदी को राहुल गांधी के 15 मिनट भाषण वाली चुनौती के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों राफेल व नीरव मोदी मामले के संदर्भ में राहुल ने कहा था कि उन्‍हें संसद में भाषण देने के लिए सिर्फ 15 मिनट मिल जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।

बहरहाल, अश्विनी चौबे की इस टिप्पणी पर हंगामा मच गया है। वाराणसी में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री का पुतला फूंक अपना विरोध जताया है। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस कार्यकर्ता इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। पर चौबे इन प्रतिक्रियाओं से परेशान हो रहे होंगे, ऐसा लगता नहीं। और परेशान हों भी क्यों, ऐसे ही बयानों से वे चर्चा में बने रहते हैं और ‘प्रसाद’ मिल जाता है वो अलग।

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तीसरी बार सीएम के हाथों पुरस्कृत हुए डीएम मो.सोहैल

सबों को पता है कि सूबे बिहार में कुल 38 जिले हैं जिनमें से मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भाप्रसे) सहित कुल 9 जिले के जिलाधिकारी और डीडीसी को उनके बेहतर कार्यों के लिए भारतीय सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल, शनिवार) के दिन राजधानी पटना में सम्मानित किया गया- सूबे के सीएम नीतीश कुमार द्वारा | वही सीएम जो देश-विदेश में विकास पुरुष के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके हैं |

बता दें कि सिविल सेवा दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में सामान्य प्रशासन विभाग के बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी द्वारा “संवाद” नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर्मठ हाथों से सूबे के नौ चुनिंदे जिलाधिकारी एवं डीडीसी को सम्मानित किया गया |

यह भी जानिए कि वे चुनिंदे डीएम एवं डीडीसी निम्न जिले के हैं जिन्हें प्रधान सचिव आमिर सुबहानी (IAS) द्वारा पत्र भेजकर आमंत्रित किया गया था | वे जिले हैं- मधेपुरा, किशनगंज, शेखपुरा, नालंदा, समस्तीपुर, पटना, जहानाबाद, रोहतास और दरभंगा |

यह भी बता दें कि बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, बिहार लोक शिकायत अधिकार अधिनियम एवं सात निश्चय योजनाओं के कार्यान्वयन में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियाँ हासिल करने वाले चुनिंदा इन नौ जिलों के डीएम, डीडीसी को CM Nitish Kumar ने सम्मानित करके सूबे में कार्यरत समस्त सिविल सेवाओं के अधिकारियों के बीच उनकी पहचान को ऊंचाई देने का काम किया है |

यह भी जानिए कि जिले के विकास को समर्पित डीएम मो.सोहैल यहां की सभी योजनाओं की प्रगति का जायजा प्रतिदिन लेते हैं | सरकारी योजनाएँ, चाहे सूबे की सरकार की हो या केंद्रीय सरकार की- डीएम अपने व्यक्तिगत कार्यों को भले ही भूल जाय, परंतु छोटी-बड़ी सभी सरकारी योजनाओं की निगरानी मिनट-टू-मिनट करना नहीं भूलते | वे जांच की क्रॉस चेकिंग भी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से करा ही लेते हैं |

मधेपुरा के मशहूर समाजसेवी साहित्यकार और भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि यदि भारत के कुल 712 जिलों के जिलाधिकारियों में से आधे जिलाधिकारी भी अगर डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की तरह ही जिले के विकास के लिए समर्पित हो जायें तो अभी भी गांधीयन मिसाइलमैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 2020 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना देखा गया था वो पूरा हो सकता है !

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क्या तेज प्रताप की शादी में शामिल हो पाएंगे लालू ?

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप की शादी में शामिल हो पाएंगे कि नहीं, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। कारण कि झारखंड हाईकोर्ट ने लागातार दूसरी बार उन्हें जमानत नहीं दी है। उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने रिम्स और एम्स प्रबंधन से उनकी हेल्थ रिपोर्ट मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी। झारखंड हाईकोर्ट ने इससे पहले 23 फरवरी को देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में सजा पाने के बाद उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद छह अप्रैल को भी लालू यादव की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई थी। लालू के वकील ने खराब तबीयत के आधार पर जमानत मांगी थी तब सीबीआई के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांग लिया था।

बता दें कि पिछले साल 23 दिसंबर से रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद लालू प्रसाद यादव इन दिनों दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं और वहां इलाज करा रहे हैं। उन्हें किडनी में इन्फेक्शन हुआ है। इसके अलावा वो हार्ट के भी मरीज हैं। गौरतलब है कि वो देवघर ट्रेजरी, दुमका ट्रेजरी और चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं। चाईबासा के दो मामलों में उन्हें पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है, जबकि दुमका ट्रेजरी से 1.33 करोड़ की अवैध निकासी में उन्हें दो अलग-अलग धाराओं में सात-सात साल जेल और 30-30 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है।

बहरहाल, करीब 20 दिन बाद भूतपूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पोती और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ तेज प्रताप यादव की शादी है। दो दिन पहले ही बुधवार (18 अप्रैल) को उनकी सगाई हुई थी। उस मौके पर भी लालू यादव मौजूद नहीं थे। लालू की गैर मौजूदगी की वजह से समारोह स्वाभाविक तौर पर थोड़ा फीका रहा। लालू के छोटे बेटे तेजस्वी ने इस पर भावुक होकर लंबा पोस्ट लिखा था और कहा था कि पहली बार बिना लालू के आशीर्वाद के उनके घर का कोई सदस्य जीवन का नया सफर शुरू करने जा रहा है।

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शिवनंदन बाबू आजीवन औरों के लिए जीते रहे- डॉ.मधेपुरी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम योद्धा एवं बिहार के प्रथम विधि मंत्री रह चुके शिवनंदन प्रसाद मंडल की 128वीं जयन्ती उन्हीं के नामवाले एसएनपीएम +2 स्कूल में प्राचार्य मो.शकील अहमद की अध्यक्षता में मनाई गई |

बता दें कि इस अवसर पर सर्वप्रथम जयन्ती समारोह के उद्घाटनकर्ता समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, मुख्यअतिथि प्रो.श्यामल किशोर यादव एवं विशिष्ट अतिथि प्रमंडलीय सचिव परमेश्वरी प्रसाद यादव व समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार सहित स्कूल के प्रायः सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं द्वारा परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि की गई | उसके बाद स्कूल के के हॉल में उनके भव्य तैल चित्र पर अतिथियों सहित सभी गणमान्यों एवं शिक्षक-छात्रों द्वारा पुष्पांजलि करते हुए बारी-बारी से उद्गार व्यक्त किया गया |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri and others paying homage to Shiv Nandan Prasad Mandal Pratima at SNPM +2 High School, Madhepura.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri and others paying homage to Shiv Nandan Prasad Mandal Pratima at SNPM +2 High School, Madhepura.

जानिए कि अपने विस्तृत संबोधन में उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने कहा कि पटना के गांधी संग्रहालय की एक पट्टिका में अंकित 56 नामों को आधुनिक बिहार के निर्माताओं की सूची के रुप में प्रदर्शित किया गया है | जिसमें एक ही नाम ऐसा है जो हर कोसीवासी एवं मधेपुरावासी को गौरव से भर देता है और वह नाम है- क्रान्तिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि बाबू शिवनंदन प्रसाद मंडल आजीवन औरों के लिए जीते रहे इसीलिए वे अमर हैं और रहेंगे भी | मरता तो वह है जो अपनों के लिए जीता है | अंत में डॉ.मधेपुरी ने प्राचार्य मो.शकील को शिवनंदन बाबू की जीवनी “इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल” की स्वलिखित कुछ प्रतियां जो ₹5000 की पुस्तकें होंगी पुस्तकालय हेतु दानस्वरूप भेंट की ताकि बच्चे उनके बारे में बहुत कुछ जान सकें | यह भी कि वे सो गये थे इसलिए 01 अप्रैल 1954 को सहरसा जिला नहीं बन गया | सच्चाई यह है कि आजादी से पूर्व ही 01 जून 1944 को अंग्रेजों द्वारा सहरसा को सब-डिस्ट्रिक्ट घोषित किया जा चुका था……. 1952 में जिला परिषद काम करना शुरू कर दिया था……. एस.पी.जी.नारायण 1954 के फरवरी में ही पद भार ग्रहण कर चुके थे |

Dr.Bhupendra Madhepuri (Author of Itihas Purush Shiv Nandan Mandal), donating books to the school library of SNMP +2 High School, Madhepura.
Dr.Bhupendra Madhepuri (Author of Itihas Purush Shiv Nandan Prasad Mandal), donating books to the school library of SNPM +2 High School, Madhepura.

इस अवसर पर मुख्यअतिथि प्रो.श्यामल किशोर यादव ने कहा कि शिवनंदन बाबू हिन्दी, अंग्रेजी एवं संस्कृत के बेजोड़ विद्वान तो थे, ओजस्वी वक्ता भी थे | विशिष्ट अतिथि द्वय परमेश्वरी प्रसाद यादव एवं डॉ.आलोक कुमार सहित आये हुए गणमान्यों राजेन्द्र प्रसाद यादव, कीर्ति नारायण यादव आदि के साथ-साथ स्कूल के शिक्षकों ने भी उद्गार व्यक्त किये और सबों ने यही कहा कि मधेपुरा को गढ़नेवालों में शिवनंदन प्रसाद मंडल अग्रणी हैं | अध्यक्षीय संबोधन के साथ प्राचार्य मो.शकील अहमद ने अतिथियों का धन्यवाद किया तथा शिक्षक सह मंच संचालक डॉ.अमलेश कुमार ने अध्यक्ष के निर्देशानुसार समारोह के समापन की घोषणा की | इस अवसर पर शिक्षक रमेश कुमार एवं संतोष कुमार आदि के सहयोग की सराहना की गई |

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एटीएम से खाली हाथ लौटने का कारण हम हैं, सरकार नहीं !

क्या पिछले कुछ दिनों में ऐसा हुआ है कि आप पैसे निकालने एटीएम गए हों और आपको खाली हाथ लौटना पड़ा हो, या तीन-चार एटीएम के दर्शन करने के बाद आपकी जरूरत पूरी हुई हो? इन दिनों ये बात आम-सी हो गई है कि एटीएम का शटर या तो गिरा हुआ है या फिर एटीएम के आगे ‘कैश नहीं है’ की तख्ती लगी हुई है। ऐसा आखिर हो क्यों रहा है? बहुत संभव है कि ऐसा होने पर आपने आरबीआई या सरकार को कोसा हो या किसी को कोसते हुए सुना हो! बुद्धिजीवी टाइप के लोग ये बोलते भी मिल जाएंगे कि ये सारी कवायद ‘कैशलेस इकोनोमी’ के लिए की जा रही है। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

दरअसल पिछले 5-6 दिनों से आपको जिस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है, वो समस्या देशव्यापी है। ऐसा किसी राज्यविशेष में या देश के किसी खास हिस्से में नहीं हो रहा। आखिर इतनी बड़ी समस्या का कारण क्या है, ये पूछने पर सरकार के आर्थिक मामलों के सचिव एस. सी. गर्ग बताते हैं कि इसके मूल में पिछले 15 दिनों में सामान्य से 3 गुना ज्यादा नोटों की निकासी होना है। एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में हर महीने 20 हजार करोड़ रुपये के नोटों की सामान्य मांग रहती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कुछ इलाकों में नोटों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘इस महीने के 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ करंसी की खपत हो चुकी है।’ इस अप्रत्याशित या अचानक बढ़ी मांग का कारण पूछे जाने पर गर्ग बताते हैं कि लोग इस अफवाह का शिकार होकर जल्दबाजी में पैसे निकाल रहे हैं कि आनेवाले दिनों में नोटों की कमी हो जाएगी।

बहरहाल, सरकार ने इस बाबत तमाम जरूरी कदम उठा लिए हैं। 500 रुपये के नोटों की छपाई पांच गुना करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि अभी हर दिन 500 करोड़ रुपये के मूल्य के 500 के नोटों की छपाई होती है, जिसे अगले कुछ दिनों में बढ़ाकर 2,500 करोड़ रुपये प्रतिदिन कर दिया जाएगा। इस तरह एक महीने में लगभग 75,000 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति होने लगेगी।

एक सजग नागरिक के तौर पर हमें जानना चाहिए कि नोटबंदी के वक्त 17.50 लाख करोड़ मूल्य के नोट सर्कुलेशन में थे, लेकिन अभी 18 लाख करोड़ के नोट हैं, यानि जरूरत से ज्यादा। इसके अतिरिक्त अभी सरकार के पास अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये का भंडार भी है। कहने का मतलब यह कि यह समस्या पूरी तरह से तात्कालिक है, जिससे निपटने में हम सक्षम हैं। देश में नोटों की कोई कमी नहीं है। किसी अफवाह पर बिल्कुल ध्यान ना दें। वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल भी नोटों की कमी को अगले तीन दिनों में दूर करने का भरोसा दिला ही चुके हैं। बिहार की बात करें तो यहां के वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी लगातार आरबीआई और बैंकों के अधिकारियों से संवादरत हैं। उन्होंने भी इस समस्या के शीघ्र दूर होने का आश्वासन दिया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 500 मेडल जीतने वाला पाँचवाँ देश बना

भारत के लिए इस 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स का 10वाँ दिन वास्तव में सर्वाधिक शानदार रहा | भारत के लिए 88 साल के कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में विदेश में मेडल टेबुल में स्थान के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा |

जहाँ तीन बच्चों की माँ दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम भारत की ध्वजावाहक बनी हो वहाँ भारत को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से कौन रोकेगा | दशवें दिन आठ गोल्ड मेडल मिले भारत को जिसकी शुरुआत मेरी कॉम ने ही 48 किलोग्राम स्पर्धा वाले बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतकर की थी | उस दिन 14 अप्रैल को कुल 17 पदक जीतकर भारत ने मेडलों का अर्धशतक पूरा किया |

बता दें कि संसार के 53 ऐसे स्वतंत्र देशों का एक संघ, जो कॉमनवेल्थ कंट्रीज के नाम से जाना जाता है, का मुख्यालय लंदन में है | वे सभी कभी-न-कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था | इन देशों की 2 वर्षों में एक बार लंदन में बैठक होती है | इन्हीं देशों के सम्मिलित खेलों को कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाता है |

यह भी जानिए कि 2018 का कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट स्थित कैरारा स्टेडियम में हजारों पुरुष-महिलाओं खिलाड़ियों एवं खेल पदाधिकारियों की उपस्थिति में 11 दिवसीय विभिन्न प्रतियोगिताओं के रूप में आयोजित किया गया जिसका समापन 15 अप्रैल (रविवार) को जश्न के साथ संपन्न हुआ | इस अवसर पर राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की अध्यक्षा लुई मार्टिन ने कहा कि खिलाड़ियों की क्षमता की कोई सानी नहीं | इस बार 2018 में भारत 26 गोल्ड के साथ तीसरे स्थान पर रहा जबकि 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में 38 गोल्ड जीतकर भारत दूसरे स्थान पर तिरंगा लहराया था | तभी तो हम कहते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में विदेश में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ और कुल मिलाकर तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है इस बार |

हाँ | यह भी बता दें कि भारत के 115 पुरुष एवं 103 महिला खिलाड़ियों ने इस खेल में कुल 66 मेडल जीते जिसमें 26 गोल्ड, 20 सिल्वर एवं 20 ब्रांज | किसी मायने में महिलाएं पीछे नहीं रही हैं | पुरुष 13 गोल्ड जीते तो महिलाएं 12 गोल्ड हासिल की तथा एक गोल्ड मिक्स्ड टीम ने दिलाई | पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चली महिलाएं |

यह भी जानिए कि भारत का कुश्ती में सक्सेस रेट 100% और बॉक्सिंग में 75% रहा है | भारत पहली बार बैडमिंटन में 6 मेडल जीते जिसमें 2 गोल्ड भी है | यह किसी भी कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन में सबसे अधिक गोल्ड और मेडल है | मणिका ने टेटे में 4 मेडल जीते यह क्या कम है |

भारत द्वारा इतिहास तब रचा गया जब बैडमिंटन में गोल्ड और सिल्वर के लिए दोनों तरफ से भारतीय महिला खिलाड़ी पीवी सिंधु और साइना संघर्ष कर रही थी | जहाँ पिछली बार ग्लासगो में इंग्लैंड ने सर्वाधिक पदक जीते थे वही इस बार ऑस्ट्रेलिया ने शानदार वापसी की |

और अंत में बिहार को गौरवान्वित करने और अपने स्वर्णिम प्रदर्शनों के बीच “गोल्डन गर्ल” बनी रहने के लिए श्रेयसी को शूटिंग में स्वर्ण दिलाने के लिए ‘मधेपुरा अबतक’ सलाम करता है |

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बिहार विधान परिषद के लिए सभी उम्मीदवारों के नाम घोषित

बिहार विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए सत्ताधारी जदयू ने रविवार की शाम अपने कोटे से तीन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा दो नए चेहरे – रामेश्वर महतो और खालिद अनवर – को उम्मीदवार बनाया गया है। संगठन से जुड़े महतो सीतामढ़ी के रहने वाले हैं और उन्हें कुशवाहा कार्ड के रूप में उतारा गया है जबकि मुस्लिम कार्ड के रूप में खालिद अनवर को विधान परिषद भेजने का फैसला किया गया है।

उधर सरकार की सहयोगी पार्टी भाजपा ने भी तीन उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के अलावा तीसरे चेहरे के तौर पर दलित नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजय पासवान को उतारा गया है। बता दें कि तीसरी सीट को लेकर ये तय नहीं था कि इस पर एनडीए का कौन-सा दल अपनी दावेदारी जताएगा, लेकिन शाम से पहले ही भाजपा ने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतार कर स्थिति स्पष्ट कर दी।

संख्या-बल को देखते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने चार उम्मीदवार खड़े किए हैं। चौथी सीट के लिए उसे कुछ वोटों की दरकार है जो कांग्रेस से पूरी हो जाएगी। राजद ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अलावा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी और खुर्शीद मोहसिन उम्मीदवार बनाया है। राजद के सभा प्रत्याशियों ने शुक्रवार को नामांकन भी कर दिया।

राजद की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी रविवार को अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। कांग्रेस की एक सीट के लिए दावेदार बहुत सारे थे, लेकिन पार्टी आलाकमान ने प्रेमचंद मिश्रा पर भरोसा जताया

चलते-चलते बता दें कि सोमवार, 16 अप्रैल को नामांकन की आखिरी तारीख है और 19 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। अगर जरूरी हुआ तो 26 अप्रैल को चुनाव कराए जाएंगे। वैसे देखा जाय तो इन भी उम्मीदवारों का विधान परिषद पहुंचना तय माना जा रहा है।

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कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार की श्रेयसी को गोल्ड मेडल

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत और खासकर यहां की बेटियों के शानदार प्रदर्शन में अब बिहार की बेटी का नाम भी जुड़ गया है। 11 करोड़ बिहारवासियों को गौरवान्वित करने वाली बिहार की ये बेटी है जमुई की श्रेयसी सिंह, जिन्होंने डबल ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई दी है।

बता दें कि केन्द्रीय मंत्री रहे दिग्विजय सिंह और बांका की पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी श्रेयसी ने इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित 61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में महिलाओं की डबल ट्रैप स्पर्द्धा में गोल्‍ड जीता था। अब एक बार फिर अपनी उपलब्धि से उन्होंने देश सहित बिहार का सिर ऊँचा किया है। यह भी जानें कि श्रेयसी राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीतने वाली बिहार की अकेली खिलाड़ी हैं।

गौरतलब है कि श्रेयसी ने ऑस्ट्रेलिया की एम्मा कॉक्स को एक अंक से हराते हुए गोल्‍ड मेडल पर कब्जा जमाया। उन्‍होंने कुल 98 अंक हासिल कर भारत की झोली में 12वां गोल्‍ड डाला। कॉमनवेल्थ गेम्स में अब भारत के 23 मेडल हो गए हैं। इनमे 12 गोल्ड, चार सिल्वर और सात ब्रॉन्ज मेडल शामिल है। पदक तालिका में भारत तीसरे नंबर पर बना हुआ है।

श्रेयसी ने अपनी स्वर्णिम सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी मां ने तमाम परेशानियों के बाद भी पूरे जीवन मुझे सपोर्ट किया, जिसके चलते मैं आज कामयाब हो पाई हूं। वहीं अपने कोच के योगदान की चर्चा करते हुए श्रेयसी ने कहा कि मेरे कोच ने कड़ी ट्रेनिंग दी थी, जिसके चलते मैं कॉमनवेल्थ में अच्छा परफॉर्म कर पाई। मैं पहले सिल्वर जीत चुकी थी। इस बार अधिक मेहनत की थी। कॉम्पिटिशन कठिन था। ऑस्ट्रेलिया की शूटर एम्मा काक्स का होम ग्राउंड होने के चलते मैं नर्वस थी, लेकिन मेरी ट्रेनिंग काम आई। ‘मधेपुरा अबतक’ बिहार की इस बेटी को सलाम करता है।

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बिहार को मिला मधेपुरा रेल इंजन कारखाने का उपहार

‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह’ कार्यक्रम के तहत बिहार के मोतिहारी आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को बिहारवासियों को दो बड़े उपहार दिए। मधेपुरा के लिए विशेष खुशी की बात यह कि इनमें से एक उपहार के साथ उसका नाम भी जुड़ा है। जी हाँ, सर्वप्रथम जानें कि प्रधानमंत्री मोदी ने मधेपुरा स्थित देश का पहला विद्युत रेल इंजन कारखाना राष्ट्र को समर्पित किया और दूसरा यह कि उन्होंने दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन हमसफर एक्सप्रेस और नए स्वरूप में बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन का भी लोकार्पण किया। बता दें कि प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कटिहार-नई दिल्ली के बीच हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और फिर मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री का भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही लोकार्पण किया। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक, केन्द्रीय मंत्री श्री रामविलास पासवान व सुश्री उमा भारती सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

मधेपुरा विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री के लोकार्पण का इंतजार यूं तो पूरे बिहार को था, लेकिन मधेपुरा के लिए इस इंतजार के मायने कुछ ज्यादा ही खास थे। हो भी क्यों ना! अब इसमें भला किसे दो राय हो सकती है कि इस फैक्ट्री के चालू होने से कोसी के इलाके में औद्योगिक विकास की रफ्तार और तेज होगी। उल्लेखनीय है कि दस साल के लंबे इंतजार के बाद यह कारखाना शुरू होने जा रहा है और इस संदर्भ में जमीन अधिग्रहण को लेकर लगातार उत्पन्न विवादों के बाद भी कारखाना निर्माण में बाधा उत्पन्न नहीं होने देने में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बता दें कि मधेपुरा के श्रीपुर चकला में बने इस कारखाने में पांच लोकोमोटिव इंजन साल 2019 में, 35 इंजन 2020 में और 60 लोकोमोटिव इंजन साल 2021 में बनाये जाएंगे। इसके बाद 800 लोकोमोटिव्स का लक्ष्य पूरा होने तक हर साल 100 लोकोमोटिव इंजन का निर्माण कारखाने में किया जाएगा। 26 हजार करोड़ की इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत 12 हजार हॉर्स पावर वाले लोकोमोटिव इंजन का निर्माण होगा और इस कारखाने से निकलने वाले इंजन 9000 टन वजनी मालगाड़ी को लेकर चलने की क्षमता वाले होंगे। चलते-चलते बता दें कि वित्तीय वर्ष 2007-08 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाना लगाने की घोषणा की थी।

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क्या प्रैक्टिकल बिना किये ही अब बनेंगे इंजीनियर ……!

सरकारी तंत्र अपनी छाती चौड़ी कर यही कहता है कि जहाँ दिन में भी लोग नहीं जाते थे वहाँ आजकल रात में भी घूमते नजर आते हैं | परंतु, दूसरी ओर हाल यह है कि जहाँ पढ़कर और कठिन से कठिन प्रैक्टिकल करके छात्र डॉक्टर-इंजीनियर बनते थे वहीं अब बिना पढ़े और प्रैक्टिकल किये ही डिग्री मिलने वाली है | सोचिये तो सही जहाँ बिना नदी, पोखर या स्विमिंग पुल में उतरे ही तैरने की ट्रेनिंग और तैराकी की डिग्री दे दी जाती हो तो उस राज्य और देश के भविष्य का क्या होगा ?

यह भी जानिये कि ऐसा छात्र जो पढ़ते समय एक भी प्रैक्टिकल किये बिना ही इंजीनियर बनकर किसी नदी में पुल बना डाले, तो वैसे पुल को पार करते समय बच्चों से भरा स्कूल बस सहित पुल भी नदी में बहेगा नहीं….. तो और क्या होगा….! वैसे इंजीनियरों द्वारा बनाये गये स्कूली भवनों के अंदर बच्चे दबकर मरेंगे नहीं तो और क्या करेंगे |

बता दें कि सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के नाम पर मधेपुरा में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज 3 वर्ष पहले खुला है जिसमें आजतक लैब व इंस्ट्रक्टर की कोई व्यवस्था नहीं हो पायी है जैसा प्राचार्य डॉ.एम.के.झा ने मधेपुरा अबतक से कहा उन्होंने यह भी कहा कि दो सत्रों में लगभग 400 छात्र-छात्राओं का नामांकन हो चुका है | सभी थ्योरी का क्लास करते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल क्लास नहीं होता है | सोचिये, बिना प्रैक्टिकल किये ही ऐसे इंजीनियर अपने बिहार में तैयार हो रहे हैं जहाँ के मुख्यमंत्री स्वयं इंजीनियर हैं |

जरा विचार करें हम सभी, इन 400 छात्र-छात्राओं के भविष्य के बारे में, जो पढ़ते तो हैं बिहार के निर्माता व बिहार के प्रथम विधि मंत्री के नाम वाले शिवनंदन प्रसाद मंडल +2 विद्यालय के भवन में और उन्हें प्रेक्टिकल करने के नाम पर खानापूरी कराने के लिए भागलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में ले जाने हेतु सोचा जा रहा है | तीन साल में एक भी प्रेक्टिकल नहीं….. केवल थ्योरी का क्लास यानी बोर्ड पर ही तैरने के तरीके सीखते रहे छात्र और सिखाते रहे शिक्षक |

मधेपुरा अबतक द्वारा बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एम.के.झा से इस बाबत जानकारी मांगने के दरमियान उन्होंने बताया कि लैब के अभाव में तीन साल से छात्रों को प्रैक्टिकल नहीं कराया जाता है | डॉ.झा ने पुनः यही कहा कि तीसरे सत्र में नामांकन के साथ ही क्लास रूम का भी अभाव हो जायेगा और थ्योरी का क्लास लेने की भी समस्या सामने खड़ी हो जायेगी | उन्होंने अवरुद्ध कंठ से यही कहा कि बच्चे प्रैक्टिकल ज्ञान के अभाव में न तो असली इंजीनियर बन पायेंगे और ना हीं दिखाई देंगे उनके कार्यों में इंजीनियरिंग के गुर एवं गुणवत्ता |

यह भी बता दें कि जब मधेपुरा के कलाम कहे जानेवाले शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से उच्च शिक्षा के भविष्य के बारे में मधेपुरा अबतक द्वारा पूछा गया तो उन्होंने यही कहा कि +2 तक के माध्यमिक विद्यालयों में प्रैक्टिकल का बहुत बुरा हाल है | क्योंकि, बीच के 20-25 वर्षों तक न जाने किस मनहूस सरकारी समिति की रिपोर्ट पर माध्यमिक स्कूलों में प्रैक्टिकल समाप्त कर दिया गया था | बाद में कॉलेज में सायंस पढ़ने वाले छात्र जब ‘मीटर स्केल’ भी नहीं पहचानने लगे तब फिर से स्कूलों में प्रेक्टिकल शुरू किया गया | लेकिन, तब तक सूबे के स्कूलों में करोड़ों-करोड़ के रसायन(Chemical) मिट्टी में मिल चुके थे तथा लोहे के उपकरणों को जंग खा चुके थे |

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वर्तमान में स्थिति यह है कि बिना शिक्षक और इन्फ्रास्ट्रक्चर के ही मिडल स्कूलों में +2 की पढ़ाई शुरू कर दी गई है- सरकारी शिक्षा विभाग द्वारा | हाँ ! ऐसे उत्क्रमित +2 विद्यालय में न तो शिक्षक हैं, न लैब है….. न इंफ्रास्ट्रक्चर है…… बस यही है कि बिना पढ़े-पढ़ाए और बिना प्रैक्टिकल कराये ही परीक्षा लेना और सर्टिफिकेट देना | तभी तो आज कल किसी डिग्री पर विश्वास करना मुश्किल है | हर क्षेत्र में अलग से ‘इलिजिबिलिटी टेस्ट’ लेकर ही नौकरी के लिए चयन की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है | फिलहाल सारी व्यवस्थाएं शिक्षा को पंगु बनाने में लगी है | यह केवल बिहार की ही नहीं, कमोवेश पूरे देश की यही स्थिति है |

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