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केपीएस से लेकर केन्द्र तक बेटियों ने उड़ान भरी…..!

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) नई दिल्ली ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दिए | जहाँ अखिल भारतीय रैंकिंग में चार में से तीन बेटियों- रिमझिम अग्रवाल (बिजनौर), नंदिनी गर्ग (शामली), श्री लक्ष्मी (कोच्चि) एवं एक बेटे प्रखर मित्तल (गुड़गांव) ने 500 में से 499 अंक हासिल कर देश में टॉप किया वहीं 498 अंक लाकर 7 परीक्षार्थी दूसरे स्थान पर रहे तथा 497 अंक लाकर 14 परीक्षार्थी तीसरे स्थान पर |

जानिए कि इस वर्ष लगभग 16 लाख 25 हज़ार परीक्षार्थियों के लिए देश व विदेश सहित लगभग साढ़े चार हजार परीक्षा केन्द्र बनाए गये, जिसमें 14 लाख के लगभग छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए | हाँ ! जहाँ तक पास होने की बात है- छात्राएं 88.67 फीसदी एवं छात्र 86.70 फीसदी उत्तीर्ण हुए |

यह भी बता दें कि तिरुवनंतपुरम जोन 99.6 फ़ीसदी रिजल्ट के साथ प्रथम, चेन्नई जोन 97.37% रिजल्ट के साथ द्वितीय तथा अजमेर जोन 91.86% रिजल्ट के साथ तृतीय स्थान पर रहा | आपको दिल्ली जोन के ‘Pass प्रतिशत’ जानने की जिज्ञासा अवश्य होती होगी | तो लीजिए देश की राजधानी दिल्ली जोन का Pass प्रतिशत रिजल्ट है- 78.62% जो पिछले साल की तुलना में ‘ना’ के बराबर बढ़त दर्ज करायी है |

यहाँ पटना जोन में बिहार-झारखंड आता है और जिसमें कुल 1,61,078 परीक्षार्थियों को सफलता मिली और 22,367 परीक्षार्थी फेल हुए, वहीं खगोल के रोहित राज एवं धनबाद की मैत्री शांडिल्य 99.2% अंक लाकर दोनों के  दोनों स्टेट बिहार और झारखंड में टॉपर हुए | पटना जोन में झारखंड से बेहतर रिजल्ट रहा बिहार का |

अब कोसी कमिश्नरी के तीनों जिलों मधेपुरा, सहरसा और सुपौल के बाबत जानने की जिज्ञासा आपके मन में उमड़-घुमड़ रही होगी…. तो जानिए कि जहाँ जिला मधेपुरा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा शिवम, वहीं सहरसा का टॉपर 97.2% अंक के साथ रहा अंकित और सुपौल के टॉपर अभिषेक को प्राप्त हुआ 95.06% अंक जबकि मधेपुरा के किरण पब्लिक स्कूल की छात्रा शिवांगी 95.60% अंक लाने के बावजूद मधेपुरा जिले के सकेंड टॉपर ही रही | मधेपुरा जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय (सुखासन) के छात्र शिवम को शिवांगी से 0.60% कम अंक प्राप्त करने पर ही स्कूल टाॅॅॅपर होने का अवसर मिल गया |

शिवांगी जैसी हर बेटी बने स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो……. उस स्कूल की जय हो !

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उपचुनावों का परिणाम: भाजपा के लिए खतरे की घंटी

भाजपा अभी कर्नाटक के झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि उसे एक और झटका लग गया। 11 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। 4 में से केवल एक संसदीय सीट (महाराष्ट्र के पालघर) पर भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई, जबकि 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में उसके खाते में केवल एक सीट आ पाई। शेष 10 सीटें विपक्षी दलों ने जीतीं। बिहार के जोकीहाट में भी एनडीए उम्मीदवार जदयू के मुर्शीद आलम को हार का सामना करना पड़ा। यहां से आरजेडी उम्मीदवार शाहनवाज आलम ने 41 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की।
उधर देश की सियासत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां की कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस सीट से विपक्ष समर्थित रालोद उम्मीदवार की जीत हुई। यहां की नूरपुर विधानसभा सीट भी भाजपा के खाते से निकलकर सपा के खाते में चली गई। इन चुनावी नतीजों के बाद सियासी चर्चा का बाजार खासा गर्म है। चर्चा हो रही है कि क्या भाजपा की लोकप्रियता और वोट प्रतिशत में गिरावट आई है? अगर हां तो क्या अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार होगी?
बहरहाल, इस संदर्भ में एबीपी न्यूज चैनल का आकलन है कि अगर वोटिंग का यही पैटर्न रहा तो भाजपा की आगे की राह मुश्किल हो सकती है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को लें तो 2014 के आम चुनावों में एनडीए को यहां 73 सीटें मिली थीं, जबकि मात्र 5 सीट पर सपा और 2 सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी। बसपा और रालोद को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। तब एनडीए को कुल 43 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि सपा और बसपा के वोट प्रतिशत को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 42 प्रतिशत का था। उधर कांग्रेस को 12 प्रतिशत और शेष वोट अन्य के खाते में गए थे। पर हालिया चुनावों ने इस गणित को गड़बड़ा दिया है।
हाल में हुए चुनावों के पैटर्न को देख चैनल का अनुमान है कि अभी चुनाव हुए तो उत्तर प्रदेश में एनडीए के खाते में 35 प्रतिशत वोट जबकि सपा और बसपा गठजोड़ को 46 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। यानि चार सालों में भाजपा को कुल 8 प्रतिशत का नुकसान होते दिखाया गया है जबकि सपा-बसपा गठजोड़ को 4 प्रतिशत वोट का इजाफा होता दिखाया गया है। इतना ही नहीं, अगर सपा-बसपा और कांग्रेस तीनों का गठजोड़ यहां होता है तो इस गठबंधन को करीब 60 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं और 2014 में 73 सीटें जीतकर सनसनी फैला देने वाली भाजपा (एनडीए) महज 19 सीटों पर सिमट सकती है, जबकि शेष 61 सीटें विपक्षी दलों के खाते में होंगी।
सबसे अहम बात यह कि अगर विपक्षी दलों की अभी दिख रही एकता आगे भी बनी रहे तो कमोबेश यही स्थिति अन्य राज्यों में भी हो सकती है। ऐसे में भाजपा और एनडीए की आगे की रणनीति क्या होगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा और उससे भी अधिक उत्सुकता इस बात की रहेगी कि एनडीए में मोदी के बाद सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन परिस्थितियों में आगे क्या रुख अख्तियार करेंगे..?

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आनंद कुमार का सुपर 30 अब जापान में होगा शुरू !

संसार के सर्वाधिक बड़े शहरों में एक है जापान की राजधानी ‘टोकियो’ | टोकियो से प्रकाशित होने वाले जापान का सबसे प्रसिद्ध अखबार ‘योमिउरी शिमबन’ में भारत के सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार के ऊपर विस्तार से एक लेख छपी है | लेख में आनंद कुमार को छात्रों का रोल मॉडल बताया गया है |

बता दें कि जापानी अखबार के लेख में यह बताया गया है कि आनंद कुमार विगत 17 साल से निरंतर गरीब एवं जरूरतमंद छात्रों की हर तरह से मदद करते आ रहे हैं | आनंद सर के इस कृत्य को भारत ही नहीं देश-विदेश के लोग भी प्रशंसनीय कार्य बताते हैं | तभी तो जापानी अखबार में छपे लेख में आनंद कुमार के बारे में कहा गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को सही-सही मार्गदर्शन देने तथा आईआईटी तक भेजने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं |

यह भी जानिए कि अखबार में छपे लेख में विज्ञान के रहस्यों का गहन अध्ययन करने वाले आनंद सर द्वारा बच्चों के भीतर की सोयी हुई ऊर्जा को जागृत कर दिया जाता है तथा उसे हाई एनर्जी लेवल तक पहुंचा दिया जाता है | बच्चों में संकल्प और जुनून के साथ आत्मविश्वास पैदा कर दिया जाता है | और दुनिया जानती है कि आत्मविश्वास किसी के भी जीवन में अद्भुत चमत्कार ला देता है |

बता दें कि आनंद सर द्वारा इन बातों को उन बच्चों में डालते ही वे सभी समय से आगे सोचने की शक्ति से भर जाते हैं, खासकर वैसे बच्चे जो अर्थ के अभाव में जीवन को अर्थहीन बनाने के रास्ते चल रहे होते हैं | वैसे ही 30 बच्चों को अपने साथ अपने घर पर रखते हैं आनंद सर और सबों को खाना बनाकर कर खिलाती थी आरंभ में उनकी माँ और अब उनकी पत्नी |

चलते-चलते यह भी बता दें कि टोकियो यूनिवर्सिटी में एक नहीं बल्कि अनेक बार सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार का व्याख्यान आयोजित किया जा चुका है | जापान के लिए आनंद सर नये नहीं रहे तभी तो उनकी सफलता की कहानी अब वहाँ की भिन्न-भिन्न मीडियाऔं द्वारा प्रकाशित किया जाने लगा है | सर्वाधिक गौरव की बात यह है कि अब जापान में भी सुपर-30 शुरू होने जा रहा है |

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देश में बनी मेघना तो बिहार में सुजल बने टॉपर !

सीबीएसई के 12वीं में 14 साल में पहली बार 500 में 499 नंबर यानी 99.8% अंक प्राप्त कर नोएडा (यू.पी) की मेघना श्रीवास्तव ने जहाँ संपूर्ण भारत में टॉप किया वहीं बिहार में सुजल राज ने 98.4% अंक लाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया | मेघना और सुजल दोनों आर्ट्स से टॉपर बने |

यह जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर पहले नंबर पर मेघना (99.8%), दूसरे नंबर पर गाजियाबाद की अनुष्का (99.6%) दोनों ही आर्ट्स की हैं | तीसरे नंबर पर (99.4%) यानी 497 अंक ला-लाकर 7 स्टूडेंट्स आये जिसमें 5 लड़कियाँ हैं |

बता दें कि देश स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर कुल 9 स्टूडेंट्स आये हैं जिसमें मात्र 2 लड़के हैं और 7 लड़कियाँ | ये सातों बेटियां हैं- मेघना श्रीवास्तव, अनुष्का चंद्रा, चाहत बोधराज, तनुजा कापरी, अनन्या सिंह, आस्था बंबा और सुप्रिया कौशिक | बेटे का नाम बताने से पहले- जो बेटी बनी स्वाभिमान पिता का, उस बेटी की जय हो ! नौ में केवल दो बेटे हैं- नकुल गुप्ता और क्षैतिज आनंद |

यह भी जानिए कि भारत में लगभग 12 लाख छात्रों ने परीक्षा दी जिसमें लगभग 9 लाख पास हुए और लगभग तीन लाख के आस-पास फेल | जहाँ 12 हजार से अधिक छात्रों ने 95% से ज्यादा नंबर लाया, वहीं 72 हजार से अधिक छात्रों ने 90% से ज्यादा नंबर लाया है | इस वर्ष लड़कों से 9.32% अधिक लड़कियां ही परीक्षा में उत्तीर्ण हुई हैं | इस साल उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत है- 83.01% | निजी स्कूलों के मुकाबले में सरकारी स्कूलों के छात्रों का जलवा रहा | जहाँ सरकारी स्कूलों में 84% पास हुए वहीं निजी स्कूलों में 82% के लगभग |

चलते-चलते मेघना के बारे में- न ट्यूशन लिया, न पढ़ाई के घंटे गिने और न कोचिंग की भारत की इस बेटी ने | साल भर एक जैसी पढ़ाई की | स्टडी टेबल के सामने एक ड्रीम बोर्ड लगाया था जिसपर हररोज टारगेट लिखती और उसे पूरा करने तक पढ़ती |

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पानी ज्यादा पीने से कम हो सकता है कैंसर का खतरा

यूँ तो प्रायः बुद्धिजीवियों द्वारा निरंतर पढ़ा , लिखा और बोला जाता है कि जल ही जीवन है , परंतु व्यवहार में जल का उपयोग लोग उतना नहीं करते जितना स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है | बाबा रामदेव भी सुबह सवेरे योग कक्षा में इतना तो हर रोज कहते ही हैं – सवेरे उठकर दो से तीन ग्लास पानी अवश्य पी लें…… गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर या फिर एक चम्मच मधु घोलकर |
वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से कैंसर का खतरा कम हो सकता है | गहन अध्ययन और शोध कार्यों से पता चला है कि अधिक पानी पीकर 40% कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है |
यूँ तो भारत में कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या ज्यादा है, परंतु मौत के मामले में पुरुष महिलाओं से आगे हैं  | क्योंकि महिलाओं में शुरुआती चरणों में ही कैंसर जैसी बीमारी का पता चल जाता है | विगत वर्षों में प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जहां लगभग 6 लाख महिलाओं को कैंसर डिटेक्ट हुआ था वहीं कैंसर पीड़ित पुरुषों की संख्या लगभग 5 लाख थी |
यह भी जानिए कि भारत में कैंसर पीड़ित महिलाओं में मृत्यु दर 60% है वहीं पुरुषों में होने वाली मौत की दर 75% है | पुरुषों में जहां फेफड़े और मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और गर्भाशय का कैंसर |
आर्थिक रुप से कमजोर लोग भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी प्रतिदिन अवश्य पीयें, जो कैंसर से बचने का सटीक और आसान उपाय है । साथ ही मीठी चीजों और नशीली चीजों का सेवन ना करना भी फायदेमंद है । जंक फूड और मांस खाने से परहेज करने के साथ-साथ घर का काम-काज करें…. बागवानी  भी करें तो और अच्छा हैै……!!

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सूबे के 534 प्रखंडों में होगी मौसम की क्लोज मॉनिटरिंग !

फिलहाल बिहार के पाँच जिलों में प्रयोग के तौर पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि प्रत्येक 20 मिनट पर मौसम का डाटा चला जायेगा ISRO के पास | जिससे किसानों को मौसम की सही जानकारियाँ दी जाती रहेंगी और यदाकदा फसल की क्षति का मुआवजा देने में सरकार को भी आसानी होगी |

बता दें कि इन पाँचो जिले में खोले गये मौसम केंद्रों के सफल होने पर राज्य के 38 जिले के कुल 534 प्रखंडों एवं 8391 पंचायतों में भी इसका विस्तार किया जाएगा, क्योंकि राज्य के अधिकतर भागों में खेतीबारी पूर्णत: मौसम पर ही आधारित है | लिहाजा मौसम की सही जानकारियाँ नहीं रहने के कारण किसानों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ती है |

यह भी जान लें कि गत वर्ष कोसी प्रमंडल के सुपौल जिला सहित नालंदा एवं पूर्वी चम्पारण के सभी प्रखंडों में ‘ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन’ एवं इन जिलों के सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ की स्थापना हेतु स्वीकृति दी गई थी | चालू वर्ष में अरवल एवं गया जिले को भी इस व्यवस्था में जोड़ा गया है | सफलता मिलते ही शीघ्र ही सभी जिलों में इसका विस्तार कर लिया जाएगा |

यह भी बता दें कि कभी-कभी एक ही प्रखंड के कुछ पंचायतों में वर्षा की कमी हो जाती है और कुछ में अधिकता…….| फलस्वरूप क्लोज मॉनिटरिंग नहीं हो पाने के कारण वर्षा की कमी वाले पंचायतों के किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है, क्योंकि सरकार के पास इसका सही-सही रिकॉर्ड नहीं होता | इस कठिनाई को दूर करने हेतु सरकार द्वारा सभी पंचायतों में ‘टेलीमैट्रिक रेनगेज’ लगाने का फैसला लिया गया है |

चलते-चलते यह भी जान लें कि उपलब्ध सारी जानकारियाँ सिस्टम द्वारा स्वतः ISRO को प्रत्येक 20 मिनट पर प्रेषित होता रहेगा और ISRO के डाटा विश्लेषण के आधार पर सरकार को अद्यतन जानकारियाँ मिलती रहेंगी और किसानों को नमी, तापमान एवं हवा की गति व दिशा की सही-सही जानकारीयाँ भी प्राप्त होती रहेंगी |

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बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो !

भारतीय रेल की सवारी गाड़ी में ‘महिला डिब्बा’ को प्रायः पुरुष यात्रियों द्वारा ही कब्जा कर लिया जाता है | जब महिला यात्रीगण आती हैं तब भी पुरुष यात्रियों द्वारा जगह खाली नहीं किये जाते हैं | नतीजतन दर्जनों महिला यात्री ट्रेन पर सवार होने से वंचित रह जाती हैं | तुर्रा तो यह है कि पूर्व में महिलाओं के लिए सुरक्षित डिब्बे पर केवल ‘महिला’ अथवा ‘महिला डिब्बा’ ही अंकित कर देने से काम चल जाता था परंतु आज-कल तो “महिला डिब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” तक लिख डालने पर भी बात बनती नहीं है |

बता दें कि सूबे की राजधानी पटना में ही पटना-गया रेलखंड पर चलनेवाली सवारी रेलगाड़ी में कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ गृहणियों का भी पटना आना-जाना लगा रहता है | मंगलवार को नदवां स्टेशन पर महिला के लिए आरक्षित डिब्बे पर “महिला डब्बा, पुरुष प्रवेश निषेध” अंकित रहने के बावजूद भी पुरुषों द्वारा पूरे डब्बे को दखल कर लिए जाने पर महिला यात्रियों ने पहले तो अनुरोध किया और नहीं मानने पर किया जमकर हंगामा | हंगामे के बावजूद भी पुरुष यात्रीयों ने बॉगी खाली करने का नाम नहीं लिया तो बातें आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश रंजन तक चली गई |

जानिए कि नदवां स्टेशन पर महिला बॉगी में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करती महिला यात्रियों की दशा देखकर इंस्पेक्टर ने यही कहा कि जागरूकता के अभाव में पुरुष यात्रीगण महिला बॉगी में सवार हो जाते हैं | कई बार अनेक स्टेशनों पर पुलिस द्वारा कार्यवाई कर महिला बॉगी से पुरुष यात्रियों को बाहर निकाला व उतारा जाता रहा है | यहाँ तो प्रवचनकर्ता रविशंकर की वाणी-

“बेटा बने सरताज बाप का, उस बेटे की जय हो” जहाँ प्रभावहीन हो रही है वहीं “बेटी बने स्वाभिमान बाप का, उस बेटी की जय हो” कारगर सिद्ध हो रही है | अब बेटियां हवाई जहाज उड़ाने के साथ-साथ हक की खातिर हंगामा करने से भी बाज नहीं आ रही है |

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आरजेडी ने कहा, कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी बने सरकार

कर्नाटक की आंच बिहार तक भी आ पहुंची है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को अपने सहयोगी दलों के नेताओं के साथ राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान राज्यपाल को 111 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा गया। तेजस्वी के साथ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी एवं प्रेमचंद मिश्रा, हम के दानिश रिजवान एवं आरजेडी के तेजप्रताप यादव, आलोक मेहता एवं शिवचंद्र राम समेत कई विधायक मौजूद थे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी ने दावा किया कि अगर उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलता है तो वह आसानी से फ्लोर टेस्ट पास कर लेंगे। तेजस्वी का दावा है कि उऩके साथ कुल 111 विधायक हैं और कुछ जेडीयू से नाखुश विधायक भी उनके संपर्क में हैं। इसके पहले कर्नाटक मुद्दे पर आरजेडी ने धरना-प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। शुक्रवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने ट्वीट भी किया और कहा, ‘देश संविधान के आधार पर दिल्ली से चलना चाहिए, न कि संघ के नागपुर मुख्यालय से। चलो लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरें।’

वहीं दूसरी ओर जेडीयू ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘बबुआगिरी’ छोड़ राज्यपाल की शक्तियों को जानने की सलाह दी है। जेडीयू के प्रवक्ता और विधानपार्षद नीरज कुमार ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए उनके नाम एक खुला पत्र जारी कर उन्हें लोकतंत्र और सरकार बनाने के नियमों का ज्ञान नहीं होने की बात कही। पत्र में कहा गया है कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के पूर्व विधानसभा में वर्तमान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर संख्याबल के द्वारा वर्तमान सरकार गिरानी पड़ती है और इसके बाद नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।

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‘साक्ष्य’ में मधेपुरा के पाँच कलमकारों के आलेख प्रकाशित

बिहार विधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘साक्ष्य’ पत्रिका में इसी वर्ष मार्च 2018 में लोहिया स्मरण से संबंधित लगभग साढे तीन दर्जन आलेख को जगह दी गई है । इस ताजा “लोहिया स्मरण अंक” में प्रधान संरक्षक मो.हारुण रशीद से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राम मनोहर लोहिया के आलेख से लेकर भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी तक की लेखनी को समाहित किया गया है ।

बता दें कि आज की तारीख में मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले विज्ञानवेत्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी जब भी डॉ.लोहिया पर कुछ लिखने हेतु कलम उठाते हैं तो उन्हें अपनी लघुता का अहसास होने लगता है जबकि वह लोहिया के सानिध्य में तब से रहे हैं जब लोहिया अपनी पत्रिका ‘जन’ का प्रधान संपादक हुआ करते और मधेपुरी रासबिहारी उच्च विद्यालय का छात्र । यह बात 1960 की है जब (डॉ.) मधेपुरी ‘जन’ में भी कुछ-कुछ लिखा करते थे जिसके चलते वे मनीषी भूपेंद्र नारायण मंडल के निकटतम होते चले गये ।

यह भी जानिये कि 1964 ई. में उसी रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में डॉ.लोहिया क्या कहते हैं- ” हे मधेपुरा वासियों ! मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूँ  ?क्योंकि, इस समाजवादी धरती ने भूपेंद्र नारायण मंडल जैसे निडर और बहादुर सपूत को पैदा किया है जो बेझिझक एवं निडर होकर भारतीय संसद में महत्वपूर्ण सवाल उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे………!”

यह भी बता दें कि साक्ष्य में मधेपुरा के जिन पाँच कलमकारों की रचना को शामिल किया गया है उन में सर्वश्रेष्ठ व वरिष्ठ साहित्यकार एवं इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ हैं जिन्हें छात्र जीवन में डॉ.लोहिया और अच्युत पटवर्धन के साथ बैलगाड़ी से मधेपुरा से नेपाल बकरो के टापू तक जाने का अवसर मिला था….I

यह भी बता दें कि जहाँ शिक्षा और सामाजिक न्याय की लोहिया-दृष्टि के मर्मज्ञ एवं ख्याति प्राप्त विज्ञान वेत्ता डॉ.अवध किशोर राय (कुलपति बी.एन.एम.यू.) के शीलसंपन्न आलेख को साक्ष्य में सम्मानपूर्वक जगह दी गई वहीं डॉ.लोहिया को ताजिंदगी मार्गदर्शक के रुप में जीने वाले विधायक रह चुके राधाकांत यादव के लगभग डेढ़ दर्जन पृष्ठों वाले भीमकाय आलेख को भी साक्ष्य में शामिल किया गया है I  इसके अलावे डॉ.मधेपुरी सहित समकालीन कवि डॉ.अरविंद श्रीवास्तव को भी साक्ष्य में प्रमुखता से स्थान दिया गया है I

चलते-चलते यह भी जानिए कि कोशी क्षेत्र में डॉ.लोहिया के प्रति समर्पित क्रांतिवीरों की कमी नहीं रही, जिनमें प्रमुख रहे हैं- शिवनंदन प्रसाद मंडल, भूपेन्द्र नारायण मंडल, कार्तिक प्रसाद सिंह, चुल्हाय यादव, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल, राम बहादुर सिंह, चित्र नारायण शर्मा, महताप लाल यादव, कुदरत उल्लाह, बैधनाथधर मजुमदार, गुणानंद झा, छेदी झा  द्विजवर, बुलाकी सुनार, ईश्वरी सिंह, भगवान चन्द्र विनोद आदि I

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प्रोविजनल बेल पर 42 दिनों के लिए बाहर आए लालू

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बुधवार को छह हफ्ते की औपबंधिक जमानत (प्रोविजनल बेल) पर रांची की होटवार जेल से बाहर आ गए। देर शाम उन्हें सेवा विमान से पटना लाया गया। पटना हवाई अड्डे से उन्हें व्हील चेयर पर बाहर निकाला गया। अब इलाज के लिए उन्हें मुंबई हार्ट हास्पिटल ले जाने की तैयारी की जाएगी। इससे पहले रांची जेल में उनकी जमानत की सारी जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। जमानत की अवधि गुरुवार से गिनी जाएगी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद को मेडिकल ग्राउंड पर छह हफ्तों की सशर्त जमानत दी है। इसके तहत लालू को जमानत अवधि के दौरान कोई राजनीतिक रैली नहीं करनी है। मीडिया से बात नहीं करनी है। साथ ही इलाज कहां-कहां कराएंगे, इसकी जानकारी अदालत को देने को कहा गया है। जमानत के दौरान उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं रहेगी।

राजद के राष्ट्रीय महासचिव एवं लालू के बेहद करीबी विधायक भोला यादव के मुताबिक राजद प्रमुख को 16 तरह की बीमारियां हैं। उनका किडनी 40 प्रतिशत ही काम कर रहा है। हार्ट, शुगर, बैक पेन, चक्कर आना जैसी अन्य बीमारियां भी हैं। यह दिल्‍ली एम्स की रिपोर्ट है। सभी बीमारियों का इलाज बारी-बारी से होगा। पटना में लालू का तबतक इलाज होगा, जबतक कि बाहर के डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट नहीं मिल जाता। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. पांडा से समय लेकर उनसे जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि तीन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इलाज की जरूरत महसूस की गई है। अन्य जगह ले जाने की जरूरत पड़ी तो अदालत से अनुरोध किया जाएगा।

चलते-चलते बता दें कि रांची में लालू के इंतजार में बड़ी संख्या में समर्थक व मीडियाकर्मी खड़े थे, लेकिन इनसे बचते हुए लालू को निकाला गया। कड़ी सुरक्षा के घेरे में उन्हें एयरपोर्ट ले जाया गया। जेल गेट के बाद बड़ी संख्या में समर्थक जश्न की तैयारी में थे लेकिन किसी को इसका मौका ही नहीं मिला। पटना में भी इस तरह के किसी भी प्रदर्शन से बचने की कोशिश की गई।

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