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लालजी टंडन ने बिहार के 39वें राज्यपाल के रूप में ली शपथ

बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल लालजी टंडन ने बिहार के 39वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमआर शाह ने राजभवन के राजेन्द्र मंडपम में आयोजित समारोह में राज्यपाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर लेडी गवर्नर कृष्णा टंडन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राज्यपाल के पुत्र व उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन, बिहार सरकार के कई मंत्री, वरीय अधिकारी व अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

इससे पूर्व बुधवार की शाम पटना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा,  खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस, पटना की मेयर सीता साहू, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक केएस द्विवेदी के साथ ही अन्य महकमों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

बता दें कि 83 वर्षीय लालजी टंडन उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं और इन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के निकट सहयोगी के रूप में जाना जाता है। लालजी टंडन 1978 से लेकर 1996 तक लगातार एमएलसी रहे। फिर वे लखनऊ से विधायक चुने गये और लगातार तीन बार विधायक रहे। इसके बाद वे 2009 में लखनऊ से लोकसभा के सांसद बने। एक सभासद से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले टंडन उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भी रहे। उऩ्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

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मधेपुरा का सपूत संजीव कुमार सज्जन बना बीपीएससी टॉपर

आदमी के भीतर यदि जुनून की आग सदैव जलती रहे तो बड़ा-से-बड़ा सपना साकार करने में देर नहीं लगती | इसे ही पूरा कर दिखाया मधेपुरा का सपूत संजीव कुमार सज्जन ने BPSC की 56….59वीं परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर यानि टॉपर बनकर |

जानिए कि संजीव कुमार सज्जन अब अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपनी सेवा बिहार में प्रारंभ करेंगे जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा वर्ष 2015 में चयनित होकर यू.पी. के रामपुर जनपद में DSP के पद पर कार्यरत हैं | अपनी इस सर्वश्रेष्ठ सफलता का श्रेय मुरलीगंज प्रखंड के भेलाही गांव निवासी अधिवक्ता पिताश्री जनेश्वर प्रसाद यादव एवं माताश्री नीता देवी सहित गुरुओं व बड़े बुजुर्गों को देते हैं |

DSP से SDM यानि पुलिस सेवा से प्रशासनिक सेवा में आने के बारे में संजीव कुमार सज्जन ने मधेपुरा अबतक को बताया कि वे देश एवं प्रदेश की सरकारी योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाने हेतु बेहतरीन व्यवस्था उपलब्ध कराना चाहते हैं | उन्होंने यही भी बताया कि उनकी शिक्षा-दीक्षा भेलाही-मुरलीगंज के बाद मधेपुरा के पार्वती सायंस कॉलेज सहित दिल्ली आदि अन्य जगहों पर कई शिक्षण संस्थानों में हुई |

यह भी बता दें कि संजीव ने प्रतियोगी छात्रों से यही कहना चाहा कि सफल होने के लिए सटीक विषयों का चयन एवं एकाग्रचित होकर नियमित अध्ययन करते रहने पर असफलता के बाद मिली हुई सफलता का स्वाद सर्वाधिक मीठा होता है…….. क्योंकि तीसरे प्रयास में BPSC का टॉपर बनने वाला संजीव कुमार सज्जन अपने प्रथम प्रयास के प्रारंभिक परीक्षा में ही अनुत्तीर्ण हो गये थे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा जिले का नाम रोशन करने वालों की कमी नहीं है अब | प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंहेश्वर प्रखंड के गौरीपुर निवासी श्री शत्रुघ्न चौधरी (अवकाश प्राप्त कर्मचारी बीएनएमयू) एवं श्रीमती राजकुमारी देवी के पुत्र दीपक कुमार ने सामान्य श्रेणी में 273वाँ रैंक लाकर सर्विस में 5वाँ रैंक Executive Officer का प्राप्त किया | कई बार असफल होने पर भी दीपक ने हिम्मत नहीं हारी….. अंततः सफलता खुद चलकर आती है और दीपक के गले लग जाती है | उसी तरह गढ़िया मधेपुरा के प्रेम शंकर कुमार पिता श्री कृष्णानंद यादव (अवकाश प्राप्त रासायन प्रदर्शक) ने सरकारी सेवा में रहते हुए BPSC कम्पिट  कर Election Officer बन जिला का नाम रोशन किया |

और अन्त में यह कि मधेपुरा जिले की एक बेटी मीनाक्षी ने बिहार लोक सेवा आयोग के वित्तीय सेवा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है | मीनाक्षी सेवानिवृत्त अपर सचिव जयशंकर प्रसाद यादव की बेटी है जो मुरलीगंज प्रखंड के ही गंगापुर निवासी हैं | मीनाक्षी की शिक्षा पटना व दिल्ली में हुई है | नेट कर मीनाक्षी पाटलीपुत्रा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) के पद पर कार्यारंभ करने वाली थी | बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए मीनाक्षी को सीटीओ पद हेतु चयनित की गयी है | मीनाक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दी है |

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पंचतत्व में विलीन हुए अटल

भारतरत्न, कविहृदय जननेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। दिल्ली के स्मृति स्थल पर राष्ट्र ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। उससे पहले नातिन निहारिका ने उनके पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया। बेटी, नातिन और परिवार के लोग ही नहीं स्मृति स्थल पर मौजूद ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंखों में आंसू ना हो। अटल थे ही कुछ ऐसे। सियासत की दुनिया का उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, दुश्मन उनका कोई नहीं था।

Leaders at Smriti-Sthal
Leaders at Smriti-Sthal

मुखाग्नि देने से पूर्व स्मृति स्थल पर तीनों सेनाओं की ओर से अटल जी को अंतिम सलामी दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी के पुराने साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सपा नेता मुलायम सिंह यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं सभी विपक्षी दलों के नेता अंतिम विदाई देने मौजूद रहे। पड़ोसी देशों की ओर से भूटान नरेश जिग्मे नामग्याल वांग्चुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और वाजपेयी के मित्र रहे हामिद करजई भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने भी इस मौके पर उपस्थिति दर्ज की।

इससे पहले वाजपेयी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाजपेयी की अंतिम यात्रा में भाजपा मुख्यालय से उनके पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे वाहन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल चल रहे थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और विजय रूपाणी, शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी वाहन के पीछे चल रहे थे। अटल जी के अंतिम दर्शन के लिए 7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर उमस भरी गर्मी के बावजूद हजारों हजार की संख्या में लोग उमड़े चले आ रहे थे। ‘अटल बिहारी अमर रहे’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

अटल जी का शरीर भले ही अब इस दुनिया में नहीं है पर उनके अटल विचार, सिद्धांत और नैतिक मूल्य हमेशा देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। अटल ने कविता के जरिए पहले ही अपने अंतिम सफर का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?’ अपनी ऐसी ही पंक्तियों, सम्मोहित कर देने वाले भाषणों और अनगिनत अवदानों की बदौलत युगों-युगों तक याद किए जाते रहेंगे हम सबके अटल जी। उन्हें हृदय की सम्पूर्ण श्रद्धा अर्पित करते हुए सादर नमन..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप’

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लौटकर आइएगा अटलजी..!

भारत के अनमोल रत्न, देश के सार्वकालिक महान व्यक्तित्वों में एक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। देश भर की दुआएं काम ना आईं। कल हमलोगों ने राष्ट्रीय उत्सव मनाया और आज नियति ने सवा सौ करोड़ भारतवासियों को राष्ट्रीय शोक दे दिया। अटल जी पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और 11 जून को तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स लाया गया था। दो दिनों से वे वेंटिलेटर पर थे और आज 94 वर्ष की उम्र में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

किसी बड़े व्यक्ति के जाने पर आमतौर कहने का चलन है कि ये ‘अपूरणीय क्षति’ है, पर अटल बिहारी वाजपेयी नाम के शख्स के जाने से बनी रिक्तता सचमुच कभी नहीं भरी जा सकती। भारत के मानचित्र पर जैसे हिमालय जैसा दूसरा संबल नहीं हो सकता, हमारी अंजुलि में जैसे गंगा जैसा दूसरा जल नहीं हो सकता, वैसे ही इस वसुंधरा पर दूसरा अटल नहीं हो सकता। संवेदना से ओतप्रोत कवि, विचारों से लबालब बेजोड़ वक्ता, विनम्रता और शालीनता की प्रतिमूर्ति, नेताओं की भीड़ में अद्वितीय स्टेट्समैन जिसकी भव्यता ना तो किसी पार्टी में समा सकती थी ना प्रधानमंत्री जैसे पद में – काजल की कोठरी कही जाने वाली राजनीति में जैसे तमाम अच्छी चीजें उन्होंने समेट रखी हो अपने भीतर।

आज जबकि राजनीति पर विश्वसनीयता का संकट आन पड़ा है, ‘सांकेतिक’ ही सही अटलजी की मौजूदगी की बेहद जरूरत थी हमें। बहरहाल, पूरा देश शोकाकुल है आज। राजनेताओं से लेकर तमाम क्षेत्रों के दिग्गज उन्हें भाव-विह्वल श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “उनका जाना पिता का साया सिर से उठने जैसा है।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “देश ने सबसे बड़े राजनीतिक शख्सियत, प्रखर वक्ता, लेखक, चिंतक, अभिभावक एवं करिश्माई व्यक्तित्व को खो दिया।” उनके निधन को लेकर सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। कई राज्यों ने भी राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की है। बिहार में सात दिनों के राजकीय शोक और शुक्रवार 16 अगस्त के अवकाश की घोषणा की गई है।

अटलजी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रातभर रखा जाएगा। सुबह 9 बजे पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय ले जाई जाएगी। दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। वहां महात्मा गांधी के स्मृति स्थल के नजदीक 4 बजे अटलजी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी की अस्थियां प्रदेश की सभी नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।

25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटलजी 10 बार लोकसभा के सदस्य, दो बार राज्यसभा के सदस्य और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके प्रशंसक भारत ही नहीं दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे। उन जैसे नेता सदियों में होते हैं और इतिहास के पन्नों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। अटलजी, श्रद्धांजलि शब्द छोटा है आपके लिए, श्रद्धा का पूरा घट ही अर्पित करता हूँ आपको… बस अपना कहा पूरा करिएगा – मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? – लौटकर आइएगा अटलजी..!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पार्टी का आधार बढ़ाने को अभियान छेड़ेगा जदयू व्यावसायिक प्रकोष्ठ

जदयू व्यावसायिक प्रकोष्ठ ने पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। प्रकोष्ठ के पटना महानगर, पटना ग्रामीण और बाढ़ इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधानपार्षद सह प्रकोष्ठ के संयोजक श्री ललन सर्राफ थे, जबकि जदयू के प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य तथा मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुमार निराला उर्फ सिन्दूरिया, कोषाध्यक्ष श्री नीलू मशकरा, महासचिव श्री गणेश कानू, श्री नगीना चौरसिया, श्रीमती बेबी मंडल, पटना ग्रामीण के जिलाध्यक्ष श्री माणिक लाल, पटना महानगर के प्रभारी श्री उपेन्द्र विभूति एवं श्री अमरदीप पप्पू, श्री रीतेश कुमार, श्री रणजीत गुप्ता, श्री राजेश गुप्ता, श्री मिथिलेश कुमार, मो. अली समेत तीनों जिला इकाई के सैकडों सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस मौके पर लगभग 250 लोगों ने जदयू की सदस्यता लेते हुए जदयू की नीतियों और दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के आदर्शों पर चलने की शपथ ली।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में श्री ललन सर्राफ ने कहा कि जदयू के प्रति निष्ठा रखने वाले हर साथी को समझना होगा कि हमारी पार्टी और हमारे नेता कैसे औरों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि गांधी, जेपी, लोहिया, अंबेडकर और कर्पूरी के विचारों को आज कोई मूर्त रूप दे रहा है तो वे श्री नीतीश कुमार हैं। उन्होंने पार्टी से जुड़ने वाले सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए ‘बढ़ता बिहार, नीतीश कुमार’ का नारा भी बुलंद किया।

JDU Media Cell President Dr. Amardeep Adreesing the Meeting
JDU Media Cell President Dr. Amardeep addressing the Meeting.

डॉ. नवीन कुमार आर्य ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार जैसे नेता युगों में पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे साथियों को प्रकोष्ठ के संगठन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जो स्वयं को पूर्ण रूप से दल के प्रति समर्पित कर सकें।
मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने विस्तार से दल की नीतियों और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की चर्चा की और वर्तमान समय में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्रदेश, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक संगठन को और मजबूत करने की बात कही। इस दौरान तय किया गया कि हर बूथ पर समर्पित साथियों की टोली तैयार की जाएगी जिससे 2019 और 2020 के चुनाव में व्यावसायिक प्रकोष्ठ बड़ी भूमिका निभा सके। इस दौरान श्री ललन सर्राफ ने कहा कि छोटे-बड़े विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों को जदयू से जोड़ने का ये सिलसिला अनवरत चलता रहेगा।

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असाधारण है राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का सफर

पत्रकारिता जगत के बड़े स्तंभ, शालीन व्यक्तित्व के धनी, जदयू के प्रखर सांसद और एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। भारत जैसे बड़े देश के इतने बड़े संवैधानिक पद पर पहुँचने के मूल में सबसे पहले तो उनका अपना व्यक्तित्व है, साथ ही जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बड़े कद और कैनवास का सबूत भी इससे मिला है। भाजपा जानती थी कि उसके पास इस पद के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है, लिहाजा उसने जदयू के हरिवंश का नाम आगे किया ताकि नीतीश कुमार के प्रभाव से वैसे दलों का साथ (बीजेडी, टीआरएस, पीडीपी आदि) भी उसे मिले, जो किसी अन्य स्थिति में उसे शायद ही मिलते।

बहरहाल, गुरुवार को उपसभापति चुने जाने के बाद 62 वर्षीय हरिवंश ने अपने बचपन के संघर्ष के दिनों को याद किया। सम्पूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा में पैदा हुए हरिवंश ने कहा, ‘मैंने पेड़ के नीचे पढ़ाई की, मैं एक साधारण प्राइमरी स्कूल में पढ़ा। लुटियंस दिल्ली तक मेरा सफर केवल आप सबकी वजह से तय हो पाया है। हमारे गांव में सड़क नहीं थी। अगर कोई बीमार होता था तो उसे 15 किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ता था। हमने कई वर्षों के बाद बिजली देखी। हम दीये में पढ़ाई किया करते थे।’
हरिवंश का जन्म 1956 में बलिया उत्तर प्रदेश के सिताब दियारा गांव में हुआ था। उन्होंने 1977 में बीएचयू से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने ‘धर्मयुग’ से पत्रकारिता की शुरुआत की। 1990 से 91 तक उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सलाहकार के रूप में पीएमओ में भी काम किया। 1990 से 2017 तक हरिवंश बिहार-झारखंड के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ के मुख्य संपादक रहे और इसके सर्कुलेशन को उन्होंने 400 से लाखों तक पहुँचाया। 2014 में जेडीयू की तरफ से उन्हें राज्यसभा सांसद चुना गया। उन्होंने 19 किताबें लिखी हैं और हिन्दी के सम्मान और स्थान के लिए सदैव संघर्षरत रहे हैं। समाज के वंचित वर्ग, विशेषकर आदिवासियों की तो वे आवाज ही रहे हैं। बता दें कि दशरथ मांझी के संघर्ष को आज जो राष्ट्रीय पहचान मिली है, उसके मूल में हरिवंश ही हैं।

चुनाव की औपचारिकता पूरी होने के बाद अपने संबोधन में हरिवंश ने कहा कि वे राज्यसभा की गरिमा बनाए रखने का हमेशा प्रयास करेंगे और आशा जताई कि बहस, सर्वसम्मति और मार्गदर्शन से मतभेदों को सुलझाया जाएगा। आगे उन्होंने दिल को छू लेने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि वह इस पद पर उसी तरह रहेंगे जैसे अपने गांव में गंगा और घाघरा दो नदियों के बीच रह चुके हैं। वहां अकसर बाढ़ का खतरा बन जाता था और लोग सोचते थे कि हो सकता है यही उनका आखिरी दिन हो। इतनी गहरी सोच रखने वाले हरिवंश जी को इतने बड़े पद पर पहुँचने और कलम का सम्मान करने वालों का मान विशेष तौर पर बढ़ाने के लिए हम ह्रदय से बधाई देते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का आगाज़ 9 अगस्त से ही

सामाजिक न्याय के वैज्ञानिक बी.पी.मंडल का जन्म सौ साल पूर्व 25 अगस्त 1918 को कबीर की नगरी काशी में हुआ था। 100वें सालगिरह पर जन्मोत्सव का आगाज़ 9 अगस्त यानि क्रांति दिवस के दिन से ही करने का निर्णय लिया गया है। तैयारी समिति ने निर्णय लिया है कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी की अध्यक्षता में बी.पी.मंडल जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ दिन के 1:45 बजेे अपराह्न से किया जाएगा।

बता दें कि कार्यक्रम का श्रीगणेश ‘मंडल गीत’ एवं सृजन दर्पण द्वारा “मंडल मसीहा की आवाज” नाटक की प्रस्तुति द्वारा किया जाएगा….। तैयारी समिति में मंडल विचार के प्रधान संपादक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.भागवत प्रसाद यादव सहित संयोजनकर्ता पीजी भौतिकी के डॉ.विमल सागर आदि गणमान्यों की उपस्थिति देखी गई। अध्यक्षता कर रहे डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा-

बी.पी.मंडल कुल 632 दिनों तक कश्मीर से कन्याकुमारी एवं राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह चलते रहे….. और उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णों के 3743 जातियों की पहचान की जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में आते हैं, जिनकी संख्या उन दिनों भारत की कुल जनसंख्या का करीब 52% हुआ करता था। परंतु, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण सीमा 50% दिए जाने के सुझाव के तहत मंडल कमीशन ने इन समस्त 3743 जातियों (जिनमें ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ….. आदि भी हैं) के लिए 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की थी।

डॉ मधेपुरी ने आगे कहा कि मंडल रिपोर्ट को लागू करने हेतु ढेर सारी कुर्बानियां दी गईं । प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह कैबिनेट ने अपनी कुर्सियाँ गंवा दी और शरद-लालू-नीतीश, रामविलास-रंजन-रमई…….. सहित बहुतों ने अपना सुख-चैन गँवा दिया, फिर भी मंडल रिपोर्ट हु-ब-हू लागू नहीं किया जा सका। शरद यादव का ‘मंडल-रथ’ भी देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरता हुआ अंततः क्रीमी लेयर के कीचड़ में फंस ही गया।

आगे डाॅ.मधेपुरी ने विनम्रता पूर्वक समाजवादी चिंतक मधुलिमये को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान के प्रावधानों में लुक-छिपकर संशोधन करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में संशोधन करने का काम अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए।

अंत में मंडल की लौ को धीमी होने पर चिंता व्यक्त करने के बाद डॉ.मधेपुरी ने इस बाबत हाल ही में मधेपुरा आये पूर्व सांसद डॉ.रंजन प्रसाद यादव एवं उच्च शिक्षा के पूर्व निदेशक डॉ.विद्यासागर यादव की चर्चा करते हुए यही कहा-

मेरे सीने में नहीं, तेरे ही सीने में सही……

हो जहाँ भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए !!

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मधेपुरा के राजशेखर को मिला दिल्ली हिन्दी अकादमी का काव्य-सम्मान

मधेपुरा जिले के  भेलवा गाँव निवासी प्रसिद्धि प्राप्त युवा गीतकार राजशेखर को हिन्दी अकादमी का “काव्य-सम्मान” दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिया। इस सम्मान अर्पण समारोह की अध्यक्षता हिन्दी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने की। समारोह में दिल्ली हिन्दी अकादमी के सदस्यों के साथ-साथ साहित्य से जुड़े गणमान्यों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई।

बता दें कि फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से ही अनवरत लोकप्रियता बटोरते रहे इस धरती पुत्र राजशेखर को 2017-18 के लिए हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा यह काव्य सम्मान दिया गया है। जानिए कि पूर्व में यह सम्मान उन विद्वान विभूतियों को दिए गए हैं जिन्होंने साहित्य, संस्कृति, समाज सेवा एवं पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह भी बता दें कि मौके पर दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम इस समारोह में विशिष्ट अतिथि रहे। इस कार्यक्रम में युवा गीतकार राजशेखर को 1लाख रूपया, ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र एवं शाॅल आदि देकर डिप्टी सीएम द्वारा सम्मानित किया गया।

अंत में दिल्ली सरकार की कला संस्कृति व भाषा विभाग की सचिव रिंकू दुग्गा की उपस्थिति में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।

 

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दिनकर की जन्मभूमि पर अब लहरायेगा सबसे ऊंचा तिरंगा

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की धरती पुनः हम सबों को गौरवान्वित करने जा रही है। जल्द ही बेगूसराय की धरती पर सबसे ऊंचा तिरंगा लहराएगा जिसकी तैयारियों में लगे हैं- पटना के मूल निवासी अजय कुमार एवं सीईओ कौशलेंद्र सिंह।

बता दें कि ये सामाजिक कार्यकर्ता द्वय ने बेगूसराय के डीएम से जमीन की मांग की है। उम्मीद है कि इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर बिहार में सबसे ऊंचा तिरंगा लहराने लगे।

यह भी बता दें कि पूरे भारत में कई जगहों पर 300 फीट से अधिक ऊँचाई पर तिरंगा लहरा रहा है। तिरंगा हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज है। जहां नई दिल्ली में 207 फीट की ऊँचाई पर तिरंगा लहराता है वही अटारी बॉर्डर पर 307 फीट की ऊँचाई पर।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली बेगूसराय की धरती पर बिहार का सबसे ऊंचा यानी 200 फीट की ऊँचाई वाला फ्लैग पोल पर बिहार का सर्वाधिक ऊंचा झंडा लगाया जाएगा। हाँ ! इसके लिए विद्युत व एविएशन के साथ-साथ अन्य विभागों से भी क्लीयरेंस लेने की जरूरत पड़ेगी ।

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बिहार का दूसरा खुला जेल बनेगा भागलपुर में

बिहार राज्य में अभी एक मात्र खुला जेल बक्सर जिला में है जिसकी क्षमता 104 कैदियों की है। जेल के अंदर 8 ब्लॉक बनाए गये हैं। प्रत्येक ब्लॉक में 13 फ्लैट हैं। जानिए कि बक्सर के खुले जेल में कैदियों के इलाज की भी व्यवस्था है ।

बता दें कि भागलपुर में बनने वाले खुले जेल के डीपीआर बनने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी- कि इस जेल की क्षमता क्या होगी ? यूँ यह माना जा रहा है कि इसकी भी क्षमता बक्सर की तरह ही होगी |

यह भी बता दें कि खुले जेल में उन्हीं कैदियों को जगह मिलती है जो आधी सजा काट चुके होते हैं । साथ ही जिस कैदी का चाल-चलन अच्छा रहा होता है । ऐसे कैदियों को परिवार के चार सदस्यों के साथ रहने की इजाजत दी जाती है । हाँ ! कैदी के भोजन-दवा का खर्च तो जेल प्रशासन उठाता है, परंतु साथ में रहने वाले चारों सदस्य का खर्चा कैदी को खुद वहन करना पड़ता है ।

यह भी जानिए कि खुले जेल में जाने वाले कैदियों को 5 किलोमीटर के दायरे में काम करने की इजाजत दी जाती है । परंतु, कैदियों को सूर्यास्त होने तक वापस जेल लौट आना अनिवार्य होता है ।

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