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बाबा की नगरी में गूंजा ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’

रविवार को सिंहेश्वर, मधेपुरा में जदयू के दलित-महादलित प्रमंडलीय सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। स्थानीय मवेशी हाट मैदान में आयोजित सभा का उद्घाटन राष्ट्रीय महासचिव व जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने किया, जबकि ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

Inauguration of JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.
Inauguration of JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.

अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में एक ओर जहां कोसी के तमाम दिग्गज चेहरे – आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव, लोकसभा व राज्यसभा के पूर्व सांसद एवं बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. आर. के. यादव रवि, पूर्व मंत्री व विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, विधानपार्षद ललन सर्राफ, विधायक बीना भारती आदि एक साथ दिखे, वहीं जदयू के वरिष्ठ दलित-महादलित नेताओं – राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष निराला, पूर्व मंत्री सह विधानपार्षद अशोक चौधरी, विधायक सह जदयू दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवि ज्योति, विधायक रत्नेश सदा, पूर्व विधानपार्षद रविन्द्र तांती और जदयू दलित-महादलित प्रकोष्ठ के प्रभारी विद्यानंद विकल – की पूरी टीम मंच पर विराजमान थी। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और प्रवक्ता निखिल मंडल ने भी इस मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज की। सभा का संचालन मधेपुरा जदयू के अध्यक्ष बिजेन्द्र नारायण यादव ने किया।

Speech of JDU General Secretary RCP Singh
Speech of JDU General Secretary RCP Singh

समारोह को संबोधित करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व दलितों के आरक्षण को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। समाज में विद्वेष का जहर भरने वाले ऐसे लोगों का मंसूबा कभी पूरा नहीं होगा। जब तक भारत का संविधान कायम है, तब तक आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता।

Speech of Minister Bijendra Narayan Yadav
Speech of Minister Bijendra Prasad Yadav

ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि दलितों-महादलितों के लिए जो किसी भी राज्य में नहीं किया गया वह बिहार में हुआ है। वहीं, आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के शासनकाल में दलितों-महादलितों को बराबर का दर्जा दिया गया है।

Dr. RK Yadav Ravi, Ex-MP & Founder VC, addressing JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Dr.R.K.Yadav Ravi, Ex-MP & Founder VC, addressing JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar

लोकसभा व राज्यसभा के पूर्व सांसद तथा बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. आर. के. यादव रवि ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केवल एक नाम नहीं बल्कि वे अब विचार और संस्कार में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने गांधी, जेपी, लोहिया और अंबेडकर के सपनों को मूर्त रूप दिया है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार के अथक प्रयासों के कारण आज दलित समाज याचक नहीं दाता की भूमिका में है। पूर्व शिक्षामंत्री एवं विधानपार्षद अशोक चौधरी ने कहा कि दलितों के जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं जिस पर नीतीश कुमार की नज़र ना गई हो और उसके लिए सरकार के स्तर पर कार्य ना हुआ हो। वहीं, बिहार सरकार के मंत्रियों रमेश ऋषिदेव, महेश्वर हजारी एवं संतोष निराला ने दलितों-महादलितों के उत्थान व सर्वांगीण विकास के लिए किए गए कार्यों और चलाई जा रही योजनाओं की विस्तार से चर्चा की।

Dr. Amardeep, President, JDU Media Cell addressing Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Dr. Amardeep, President, JDU Media Cell addressing Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar.

जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने अपने जोशीले व काव्यमय संबोधन से खूब तालियां बटोरीं। उनकी बेहद चर्चित व लोकप्रिय कविता ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’ ने जनसमूह में उत्साह भरने का काम किया। युवाओं ने उनके साथ ‘मैं भी हूँ नीतीश कुमार’ के जमकर नारे लगाए।

Big gathering in JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar
Big gathering in JDU Dalit-Mahadlit Sammelan at Singheshwar

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जदयू के दलित-महादलित प्रमंडलीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

दलित-महादलित जिला सम्मेलन के सफल आयोजन के बाद आज सारण प्रमंडल अंतर्गत सीवान से जदयू के दलित-महादलित प्रमंडलीय सम्मेलन की शानदार शुरुआत हुई। सीवान के गांधी मैदान में आयोजित भव्य सभा में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह के नेतृत्व में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष निराला, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व मंत्री सह विधायक अशोक चौधरी, विधानपार्षद ललन सर्राफ, विधायक सह प्रदेश प्रवक्ता मनीष कुमार, विधायक सह जदयू दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवि ज्योति, विधायक रत्नेश सदा, पूर्व विधानपार्षद रवीन्द्र तांती, जदयू दलित-महादलित प्रकोष्ठ के प्रभारी विद्यानंद विकल आदि प्रमुख हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत में अंबेडकर के सपनों को किसी ने संपूर्णता में जमीन पर उतारने का काम किया है तो वे बिहार के यशस्वी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हाशिए पर खड़े दलितों-महादलितों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए उन्होंने योजनाओं का अंबार लगा दिया है।

श्याम रजक ने कहा कि यह श्री नीतीश कुमार की देन है कि आज दलित वर्ग के लोग समाज में सिर उठाकर जी रहे हैं। वहीं, अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के भागीरथ प्रयत्न से आज दलितों के बच्चे शिक्षा हो या रोजगार समाज के किसी भी अन्य वर्ग से कंधा मिलाने की स्थिति में हैं।

बिहार सरकार के मंत्रियों महेश्वर हजारी, संतोष निराला एवं रमेश ऋषिदेव ने बिहार सरकार द्वारा दलितों-महादलितों के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे मे विस्तार से बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार के अथक प्रयत्न से दलितों-महादलितों का बिहार में नवयुग शुरू हुआ है।

चलते-चलते बता दें कि जदयू का अगला दलित-महादलित प्रमंडलीय सम्मेलन 27 अक्टूबर को राज मैदान, दरभंगा (दरंभगा प्रमंडल), 28 अक्टूबर को मवेशी हाट मैदान, सिंहेश्वर स्थान, मधेपुरा (कोशी प्रमंडल), 29 अक्टूबर को इंदिरा गांधी स्टेडियम, पूर्णिया (पूर्णिया प्रमंडल), 30 अक्टूबर को डुमरामा हाई स्कूल मैदान, अमरपुर, बांका (भागलपुर प्रमंडल), 31 अक्टूबर को गांधी मैदान, गया (मगध प्रमंडल), 3 नवंबर को इन्टर कॉलेज मैदान, विक्रमगंज, रोहतास (पटना प्रमंडल) तथा 4 नवंबर को पोलो मैदान, मुंगेर (मुंगेर प्रमंडल) में होगा।

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पुस्तक के रूप में आया नीतीश के संसदीय भाषणों का संकलन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संसदीय भाषणों का संकलन मंगलवार को पुस्तक के रूप में जारी किया गया। बिहार विधान परिषद के उपभवन स्थित सभागार में आयोजित ‘नीतीश कुमार : संसद में विकास की बातें’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, बिहार विधान परिषद के उपसभापति हारूण रशीद, मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और श्रवण कुमार तथा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह नीतीश कुमार एक मजबूत नेता हैं। यह भी सराहनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री बनने से पहले महत्वपूर्ण केन्द्रीय मंत्रालयों की जिम्मेवारी संभालने के बावजूद उनकी ईमानदारी निष्कलंक है। उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग हुए जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से बिना भटके ईमानदारी और संकल्प से इतिहास बनाया। नीतीश कुमार इसके जीवित उदाहरण हैं।

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार में हिम्मत है कि वे पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने और शराबबंदी जैसे असाधारण निर्णय ले सकें। मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बड़ी लकीर खींच दी है, जिसकी बराबरी शायद अगले 20-25 वर्षों में भी कोई नहीं कर पाये। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने केवल मुख्यमंत्री के नाते ही उल्लेखनीय काम नहीं किया है, रेलमंत्री के तौर पर भी उन्होंने ‘बेंचमार्क’ स्थापित किया। आमतौर पर यह धारणा थी कि विकास कार्यों से वोट नहीं मिलता है, मगर नीतीश कुमार ने यह साबित कर दिया कि विकास से ही वोट मिलता है।

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार 1985 में पहली बार जीतकर विधानसभा में आए और उसी समय से उनके भविष्य की संभावनाएं दृष्टिगोचर होने लगी थीं। वे आधुनिक बिहार के विश्वकर्मा हैं।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि समाज और राजनीति को नीतीश कुमार जैसे विजनरी की जरूरत थी और समय ने इसे पूरा किया। उन्होंने राजनीति को संपदा और सत्ता का नहीं, सेवा का केन्द्र बनाया। उनके नेतृत्व में बिहार में नवनिर्माण का दौर चल रहा है।

गौरतलब है कि प्रभात प्रकाशन से आई इस पुस्तक का संपादन नरेंद्र पाठक ने किया है। पुस्तक में नीतीश कुमार द्वारा फरवरी 1990 से 24 अक्टूबर 2005 तक संसद में दिए गये भाषणों का संकलन है। पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि एक सांसद के रूप में नीतीश कुमार ने जो बातें अपने भाषण के रूप में संसद में कही थीं, उन्हीं बातों को जब वह मुख्यमंत्री बने तो अपने शासन के एजेंडे में शामिल किया। बिजली, सड़क, लड़कियों की शिक्षा और सात निश्चय का एजेंडा — इन सभी बातों को एक सांसद के रूप में नीतीश लोकसभा में पहले ही रेखांकित कर चुके हैं। संसदीय यात्रा के क्रम में नीतीश कुमार सरकार और समाज से जुड़े मुद्दों को आम विमर्श के केंद्र में कैसे लाए और शासन में आने के बाद उन मुद्दों को जमीन पर उतारने में कैसे जुट गए, इसकी पूरी तस्वीर पुस्तक में देखी जा सकती है।

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कोसी-मिथिलांचल के दो देवी स्थानों को जोड़ेगा भारत का सबसे लंबा पुल

नीतीश सरकार के अनुभवी व ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री एवं मधेपुरा जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने मधेपुरा अबतक को बताया कि भारत माला प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिला मधुबनी के उच्चैठ दुर्गा स्थान से सहरसा जिला के महिषी तारा स्थान (भाया उमगाँव-परसरमा) तक दोनों देवी-स्थानों को शीघ्र ही NH-527A जोड़ेगा जिसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंत्री श्री यादव ने बताया कि भू-अर्जन विभाग द्वारा 3A का प्रस्ताव भेज दिया गया है। सड़क के लिए जिले में लगभग 55 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।

प्रभारी मंत्री ने मधेपुरा अबतक से पुनः कहा कि उच्चैठ दुर्गा स्थान से महिषी तारा स्थान तक NH-527A पर सूबे बिहार का ही नहीं, बल्कि देश का सबसे लंबा पुल (10.2 कि.मी.) बनेगा जिसमें 204 पाये (Pillar) होंगे।उन्होंने बताया कि गाइड बांध व कटाव निरोधी कार्य सहित लगभग 1300करोड़ रुपए से तैयार होने वाले इस पुल में 50 मीटर लंबे 50 स्पैनौं का व्यवहार किया जायेगा। इस पुल की चौड़ाई 16 मीटर होगी तथा दोनों ओर डेढ़ मीटर चौड़ा फुटपाथ भी होगा।

ऊर्जा मंत्री श्री यादव ने कहा कि इस पुल के बन जाने से कोसी और मिथिलांचल की दूरी बहुत घट जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मिथिला पेंटिंग के प्रचार-प्रसार की गति तेज होगी तथा कोसी के भूले-भटके इलाकों को भी NH का सुख प्राप्त होगा। यह पुल कोसी के विकास को नया आयाम देगा।

अंत में मंत्री विजेंद्र ने उपस्थित प्रबुद्ध जनों से यही कहकर विदा लिया कि दशहरे के मौके पर कोसी प्रमंडल को मिला एक सर्वोत्कृष्ट तोहफा और इसके साथ ही पुल निर्माण की प्रक्रिया को तीव्र गति से शुरू करने हेतु डीएम को मिला विभागीय पत्र।

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ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान करने पर ढाई फ़ीसदी की छूट

जहाँ बिहार के एक करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं में से 20 लाख बिहारी ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं, जो 18.3% है और देश में 11वाँ पायदान पर स्थित है वहीं उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं द्वारा 14.2% भुगतान ऑनलाइन किया जाता है और देश में 14वाँ पायदान पर है…….. जबकि पश्चिम बंगाल 8% ऑनलाइन भुगतान कर 19वाँ पायदान पर खड़ा है…….. और की बात तो छोड़िए त्रिपुरा 4%, सिक्किम 3.8%, नागालैंड 1.9% और अरुणाचल प्रदेश 0% ऑनलाइन भुगतान कर रहा है | इसे देखकर यह कहावत सही लगता है- एक बिहारी सब पे भारी……|

बता दें कि बीते 1 वर्ष में बिहार में ऑनलाइन भुगतान करने वालों की संख्या में 6% की वृद्धि भी हुई है | ऐसा लगने लगा है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय नई दिल्ली की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में देश के 26 राज्यों में बिहार को दिये गये 11वाँ स्थान में और वृद्धि होगी और बिहार तेजी से नीतीश सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में शीर्ष स्थान को प्राप्त करेगा |

यह भी जानिए कि जहाँ बिहार के 67 शहरों में राजधानी पटना के अधिकतम 27.1%, मुंगेर के 25.5% तथा बक्सर के 23.5 फ़ीसदी लोग बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं वहीं बरौनी के 3.5 फ़ीसदी लोग, गोगरी जमालपुर के 3 फ़ीसदी और रिविलगंज के मात्र 0.5 फ़ीसदी लोग न्यूनतम बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं |

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देवीमय हो गया मधेपुरा, कोसी और बिहार

दुर्गा पूजा का पर्व हिन्दू देवी दुर्गा द्वारा बुराई के प्रतीक राक्षस ‘महिषासुर’ पर विजय प्राप्त करने के बाद से ही मनाया जाता रहा है | प्रायः सभी संप्रदायों के पर्व-त्यौहार बुराई पर भलाई की विजय के रूप में देखा और मनाया जाता है | यह पर्व बिहार, झारखंड, मणिपुर, त्रिपुरा, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से उत्सवी माहौल के साथ मनाया जाता है | संपूर्ण वर्ष के सबसे बड़े उत्सव के रूप में मनाई जाती है- दुर्गा पूजा |

बता दें कि यह पर्व यू.पी., दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कश्मीर, कर्नाटक और केरल में तो मनाया ही जाता  है, इसके अलावा नेपाल और बांग्लादेश में बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा है | आजकल तो प्रवासी भारतीयों द्वारा दुर्गा पूजा अमेरिका से लेकर जर्मनी……. और फ्रांस से लेकर कुवैत तक में भी मनायी जाने लगी है |

नवरात्रा के अवसर पर मधेपुरा जिला मुख्यालय दुर्गा माता के जयकारे से गूंजने लगा है | दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है | या देवी सर्वभूतेषु……. आदि मंत्रों से पूजा के पंडाल तो गूंजते ही हैं साथ ही श्रद्धालुओं के घरों में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ अहर्निश गुंजायमान होता रहता है | शारदीय नवरात्र को लेकर संपूर्ण वातावरण ही भक्तिमय बना रहता है |

आप जिले में जहाँ भी जाँय- शहर से लेकर गांव तक मां दुर्गा एवं देवी-देवताओं की प्रतिमाओं व पंडालों का आकर्षक स्वरूप देखेंगे…….. वह शक्ति स्वरूपा करती है सबकी मुरादें पूरी तथा अटूट आस्था-विश्वास रखने वाले श्रद्धालुओं पर बरसती है माता की कृपा कस्तूरी |

अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी मैया जागरण तेजी से कदम बढ़ाता जा रहा है | आलमनगर, पुरैनी, नया नगर, किसुनगंज, बिहारीगंज, मुरलीगंज, शंकरपुर, सिंहेश्वर, मधेपुरा आदि जगहों पर श्रद्धालुओं द्वारा नवरात्रा के दौरान धूम-धाम से पूजा-अर्चना की जाती है | एक ओर जहाँ कुमारखंड प्रखंड के खुर्दा गाँव में चंद वर्षों से माननीय सांसद द्वय श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव व श्रीमती रंजीत रंजन द्वारा दुर्गा पूजनोत्सव के दौरान ग्रामीण वातावरण को बॉलीवुड के कलाकारों के माध्यम से इंद्रधनुषी सतरंगों से सराबोर कर दिया जाता है वहीं दूसरी और किसुनगंज प्रखंड के चतरा गाँव में इसी वर्ष से लोकसभा व राज्यसभा के सांसद रह चुके प्रो.(डॉ.)आर.के.यादव रवि के पुत्र प्रो.(डॉ.)अमरदीप उत्साह पूर्वक दुर्गा पूजनोत्सव के अवसर पर मैया जागरण का भव्य आयोजन चोटी के कलाकारों द्वारा आरंभ करने जा रहे हैं | मालूम हो कि डॉ.अमरदीप बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) के मीडिया सेल के अध्यक्ष हैं |

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अलविदा, वीर आशीष !

आज जबकि दुनिया स्वयं तक सिमटती जा रही है, ऐसे में देश और समाज की खातिर प्राण न्योछावर कर देना वाला कोई शख्स सामने आता है और यह विश्वास दिला जाता है कि दुनिया अभी भी इतनी ‘संकीर्ण’ नहीं हुई है कि इंसानियत को घुटन होने लगे। ऐसे ही थे खगड़िया में तैनात और सहरसा में जन्मे जांबाज दारोगा आशीष कुमार सिंह जो कल देर रात अपराधियों से लोहा लेते शहीद हो गए।

वीर आशीष को नाज था अपनी वर्दी पर… कर्तव्य निभाने का जुनून ऐसा कि अपराधियों के एक कुख्यात गैंग की ख़बर मिलते ही रात के एक बजे ट्रैक्टर से निकल पड़े उनका अंत करने। गोली लगने के बाद भी डटे रहे और एक अपराधी को ढेर करके ही माने। ऐसा नहीं था कि गोली उन्हें पहली बार लगी थी लेकिन इस बार एक के बाद एक चार-चार गोलियां उतर गई थीं उनके भीतर..!

2009 में दारोगा की परीक्षा पास करने के बाद आशीष जहां भी गए उस थाना क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम की। बेगूसराय में भी दो थाना क्षेत्रों में उन्होंने अपराधियों को नाको चने चबवाया था। वो बेखौफ होकर अपराधियों से लोहा लेते थे। पिछले साल जब वो मुफस्सिल थाना प्रभारी थे तब भी एक मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी थी लेकिन वो बच गए। काश इस बार भी..! लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनके साथ गए एक सिपाही को भी कमर के नीचे गोली लगी जिसका इलाज भागलपुर अस्पताल में चल रहा है।

आशीष कुमार न केवल जांबाज सिपाही थे बल्कि एक बेहद संवेदनशील व्यक्ति थे जो समाज के गरीब गुरबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे आए। उनकी मां कैंसर की बीमारी से पीड़ित थीं। आशीष खुद उन्हें लेकर इलाज के लिए दिल्ली आया-जाया करते थे। पिता गोपाल सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे आशीष अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को, जिनमें एक बेटा है और एक बेटी, छोड गए हैं। आज सरोजा गांव में मातम पसरा हुआ है। ऐसा कोई शख्स नहीं जिसकी आँखें नम ना हों।

आशीष, मेरे भाई, मुझे गर्व है कि मैं भी कोसी की उसी मिट्टी से उपजा हूँ, जिससे तुम उपजे थे..!! ये वक्त नहीं था तुम्हारे जाने का लेकिन जब ‘महाप्रयाण’ पर तुम चले ही गए हो, मैं रोऊँगा नहीं तुम्हारे लिए, बल्कि बोऊँगा तुम्हारे व्यक्तित्व का अंश अपनी सोच, अपनी जुबान और अपनी कलम से, जितना संभव हो सके और जितनी सामर्थ्य रही, जीवन भर..!!!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘लालू-लीला’ पर गरमाई बिहार की सियासत

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की लिखी पुस्तक ‘लालू-लीला’ के लोकार्पण के बाद बिहार की सियासत में उबाल आ गया है। भाजपा के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में हुए लोकार्पण कार्यक्रम में मोदी ने कहा था कि लालू प्रसाद को जितना मैं जानता हूं उतना राबड़ी भी नहीं जानती। बकौल मोदी साइकिल से जिंदगी की शुरुआत करने वाले लालू प्रसाद के परिवार के पास 141 भूखंड, 30 फ्लैट और आधे दर्जन आलीशान मकान हैं। उन्होंने लालू परिवार को बिहार का सबसे बड़ा जमींदार परिवार बताया। उधर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी ने किताब को झूठ का पुलिंदा करार दिया है। आरजेडी ने कहा है कि इस किताब का नाम ‘सुशील की साजिश’ होना चाहिए। हालांकि पुस्तक पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव की टिप्पणी अभी नहीं आई है, लेकिन उनकी पार्टी के अन्य नेता लालू के बचाव में उतर आए हैं।

सुशील मोदी का कहते हैं कि लालू यादव से मेरा 48 साल का संबंध है। इसीलिए कभी-कभार मैं कह देता हूं कि राबड़ी देवी से भी ज्यादा मैं लालू यादव को जानता हूं। जब कभी मुलाकात होती है तो लालू मुझसे कहते हैं, तुम मेरा पीछा नहीं छोड़ोगे। उन्होंने कहा, हिन्दुस्तान में लालू यादव की तरह ताकतवर कोई दूसरा नेता नहीं हुआ। मैंने लालू के उत्कर्ष को भी देखा है और उनके पराभव को भी देखा। चारा घोटाले में जेल जाने के बाद भी यह व्यक्ति नहीं सुधरा। संपत्ति की भूख बढ़ती ही गई। मोदी ने कहा साइकिल से सफर शुरू कर लालू आज 40 लाख की मर्सिडीज बेंज कार के मालिक हैं। बेटा तेज प्रताप 20 लाख की हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल एवं 30 लाख की बीएमडब्ल्यू कार का मालिक है।

मोदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि सत्ता का दुरुपयोग कर लालू ने अकूत संपत्ति हासिल की है। इसके लिए उन्होंने तरह-तरह के तरीके अपनाए। दान, वसीयत, लीज व पावर ऑफ एटार्नी जैसे नए-नए तरीके ईजाद कर संपत्ति हथियाने में उन्होंने राबर्ट वाड्रा को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस ने नारा दिया था – तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। लालू प्रसाद ने नारा दिया – टिकट चाहिए, जमीन लिख दो, एमपी बनना है जमीन लिख दो। मंत्री बनना है, जमीन लिख दो। कोई काम कराना हो, जमीन लिख दो।

मोदी के इन आरोपों पर आरजेडी नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सांसद जय प्रकाश यादव ने लालू प्रसाद को गरीबों का मसीहा बताया और कहा कि उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों का हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने किताब को झूठ से भरा बताया और कहा कि इसका बिहार की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि पुस्तक का नाम विषयवस्तु के आधार पर किया जाता है। सच यह है कि इस पुस्तक में सुशील मोदी ने लालू परिवार के खिलाफ (मोदी एंड कंपनी) द्वारा की गई साजिशों को संकलित किया है। इस लिहाज से किताब का नाम ‘सुशील की साजिश’ होना चाहिए था। विधायक डॉ. रामानुज प्रसाद एवं भाई अरुण कुमार ने कहा कि लालू की सारी संपत्ति पब्लिक डोमेन में है। लालू पर आरोप लगाकर सुशील मोदी राजनीति में प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।

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26 नवम्बर से बी.पी.मंडल सेतु पर आवागमन होगा शुरू

‘कोसी का लाइफ लाइन’ के नाम से मशहूर बी.पी.मंडल सेतु (डुमरी पुल) पर वर्षों से वाहनों का आवागमन बंद था। आगे 26 नवंबर से इस पुल होकर चार पहिये समेत भारी वाहनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। यूं तो 24 सितंबर से ही पुल होकर पैदल एवं बाइक का आवागमन चालू हो गया है।

बता दें कि सेतु निर्माण कंपनी एसपी सिंगला के अधिकारियों के अनुसार सेतु ढलाई का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है…… उम्मीद है कि 26 नवंबर तक बी.पी.मंडल सेतु होकर भारी वाहनों का परिचालन भी आरंभ हो जाएगा एक वरिष्ठ अधिकारी प्रोजेक्ट मैनेजर के.के.रंजन ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 15 से 25 नवंबर के बीच सेटरिंग खोलने समेत अन्य सभी कार्य पूरा कर लिया जायेगा। इसीलिए 26 नवंबर से पुल होकर भारी वाहनों के परिचालन की घोषणा कर दी गई है। इसके बाद बी.पी.मंडल सेतु होकर एनएच-107 के विभागीय कार्यपालक अभियंता उमाशंकर प्रसाद भारी वाहनों का परिचालन करा सकते हैं।

ज्ञातव्य है कि बी.पी.मंडल के मुख्यमंत्रित्व काल में कोसी के आधे दर्जन जिले के लोगों के लिए इस पुल की घोषणा की गई थी। जिसे बाद वाली सरकार ने “बीपी मंडल सेतु” नाम देकर उन्हें सम्मानित किया। यह पुल बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्षों से बंद पड़ा था। जिसपर होकर परिचालन शुरू होने का समाचार सुनकर चारों ओर खुशियों की लहर दौड़ गई है।

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पांच राज्यों में चुनाव का ऐलान

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया। आयोग ने छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने की घोषणा की है। बाकी चार राज्यों – मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना में – एक ही चरण में चुनाव कराए जाएंगे। चुनावों की घोषणा के साथ ही सभी पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

आयोग की घोषणा के मुताबिक छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 18 सीटों पर 12 नवंबर को वोटिंग होगी। इसके बाद दूसरे चरण में 72 विधानसभा क्षेत्रों में 20 नवंबर को चुनाव होंगे। जबकि मध्य प्रदेश और मिजोरम में एक ही चरण में 28 नवंबर को वोटिंग होगी। इसी तरह राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव आयोग ने सात दिसंबर को वोटिंग कराने का ऐलान किया है। मतगणना 11 दिसंबर को होगी और उसी दिन परिणाम आ जाएंगे।

बहरहाल, चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के ऐलान के साथ ये पांचों राज्य चुनावी मोड में आ गए हैं। ये चुनाव 2019 के आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लिए एक रीजनल टेस्ट के तौर पर सामने हैं, तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी अपनी नेतृत्व क्षमता को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब देने का अवसर होगा। खासकर इन चुनावों का महत्व भाजपा के लिए बढ़ जाता है क्योंकि पांच में से तीन राज्यों- पश्चिम में राजस्थान, सेंट्रल में मध्य प्रदेश और पूर्व में छत्तीसगढ़ में उसकी सरकार है। यहां बीजेपी को अपनी सत्ता बचानी है और बाकी के दो राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करके दिखाना है।

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