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झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की लालू की जमानत याचिका

चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लगभग दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लालू के वकील कपिल सिब्बल ने उनकी बीमारियों और उम्र का हवाला देते हुए जमानत की अपील की थी जिसका सीबीआई के वकील ने विरोध किया था।
लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि देवघर, चाईबासा एवं दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में उन्हें इससे पहले भी जमानत दी जा चुकी है, इसलिए उन्हें फिर से जमानत की सुविधा प्रदान की जाए। कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद यादव की बीमारियों से संबंधित सर्टिफिकेट भी पेश किए और कोर्ट को बताया कि लालू प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी और डिप्रेशन समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए आरजेडी सुप्रीमो की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसंबर 2017 को दोषी करार देने के बाद से जेल में हैं। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें पहले रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया। कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए छह सप्ताह की जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें 30 अगस्त को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
बहरहाल, लालू प्रसाद यादव को जमानत नहीं मिलने से आरजेडी खेमे में निराशा का माहौल है। उनके बाहर आने से न केवल पार्टी को मजबूती मिलती बल्कि महागठबंधन के प्रयासों को भी बल मिलता। उनकी अनुपस्थिति में तेजस्वी पार्टी की नैया कैसे पार लगाते हैं, यह देखने की बात होगी।

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पासवान को हवाई अड्डे पर नहीं मिला वीआईपी प्रोटोकॉल !

हवाई अड्डे पर वीआईपी प्रोटोकॉल खत्म होने को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और फिल्म अभिनेता व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चर्चा अभी थमी भी न थी कि अब लोजपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान को मिलने वाली वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा समाप्त कर दिए जाने की खबर सामने आई है। दरअसल पासवान सोमवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन जयनारायण निषाद के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और उसी दिन शाम की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। दिल्ली के लिए रवाना होने के दौरान उन्हें आम यात्री वाले गेट से हवाई अड्डे के भीतर दाखिल होते देखा गया।
गौरतलब है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा जिन वीआईपी लोगों को प्राप्त होती है, उनके हवाई अड्डे से निकलने का रास्ता आम यात्रियों से अलग होता है और उनके लिए वीआईपी लॉन्ज होता है जहां वे ठहरते हैं और विश्राम करते हैं। उन जगहों पर आम यात्री नहीं जा सकते हैं।
इस बाबत पूछे जाने पर पटना के जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डे के निदेशक का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल की सुविधा उपलब्ध कराने और उसे समाप्त करने में पटना हवाई अड्डे की कोई भूमिका नहीं है। इस सबंध में ब्यूरो ऑफ सिविल एवियेशन सिक्यूरिटी सुझाव भेजता है। उन्होंने कहा कि पासवान के वीआईपी प्रोटोकॉल के नवीकरण को लेकर हमें कोई नया आदेश नहीं मिला है। उधर लोजपा प्रमुख का कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल समाप्त नहीं हुआ है और ये जल्द ही बहाल हो जाएगा।

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200 वर्ष पूर्व बनी पटना की पेंटिंग लंदन संग्रहालय की जान

विश्व का सबसे बड़ा म्यूजियम (संग्रहालय) लंदन में है जिसका नाम है- ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पटना के कई कलाकारों की पेंटिंग्स भी लगाई गई है उस म्यूजियम में।

बता दें कि पटना में मुहर्रम के दृश्य पर पटना के ही हिन्दू चित्रकार सेवक राम द्वारा बनाई गई पेंटिंग आज भी उस लंदन संग्रहालय की जान है। दो सौ ग्यारह साल पहले बनी मुहर्रम पर निकाले गये ताजिया जुलूस की पेंटिंग इतनी खूबसूरत है कि वह आज लंदन स्थित विश्व के सबसे बड़े डेकोरेटिव आर्ट्स एंड डिजाइन संग्रहालय ‘द विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम’ की जान बनी हुई है। मौके पर संसार के समस्त मुस्लिम देशों में बिहार की राजधानी पटना के उस हिन्दू कलाकार सेवकराम के मुहर्रम पर बनी पेंटिंग की जमकर चर्चाएं होती रहती हैं।

यह भी जानिए कि पटना में पटना सिटी स्थित दीवान मुहल्ला, लोदी कटरा और मच्छरहट्टा मुहल्ले में इस विद्या के माहिर कलाकार 18वीं शताब्दी के आरंभिक काल में हुआ करते थे। इसका विस्तार पटना, दानापुर व आरा तक था। शिवा लाल शिवा लाल की पेंटिंग्स भी ताजिए को लेकर चर्चित रही है।

आज के दिनों में जिस तरह ताजिये बनते हैं वही अंदाज 1807 में भी था। तब के इस पेंटिंग में बच्चों की मौजूदगी एवं सफेद कपड़े पहने बड़े लोगों की संख्या भी सर्वाधिक देखी जाती रही है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 17वीं शताब्दी में स्थापित लंदन स्थित विक्टोरिया म्यूजियम में तीस लाख से भी अधिक प्रदर्श हैं जो मुख्य रूप से डेकोरेटिव आर्ट्स व डिजाइन से संबंधित हैं। पहले ताजिये के जुलूस में हिन्दुओं की सहभागिता सर्वाधिक हुआ करती जिसमें कमी होती दिखने लगी है। तब के दिनों में राजा की सहभागिता भी हाथी पर चढ़कर ताजिए के पहलाम वाले जुलूस में देखी जाती थी….।

 

 

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क्या लालू को जमानत मिलेगी?

बहुचर्चित चारा घोटाले में दोषी पाए गए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब लालू को जमानत के लिए लगभग एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं है। किडनी, हृदय-रोग और डायबिटिज समेत 11 बीमारियों के चलते वे रांची स्थित रिम्स (राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में भर्ती हैं। बेहतर इलाज के लिए उन्होंने देवघर, दुमका और चाईबासा मामले में जमानत के लिए अर्जी दी थी। कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से पक्ष रखा। लगभग डेढ़ घंटा चली बहस के दौरान सिब्बल ने लालू की जमानत की अवधि और आयु का जिक्र किया। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

बता दें कि इससे पहले 21 दिसंबर 2018 को सीबीआई के आग्रह पर लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई थी। कोर्ट ने तब सुनवाई के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की थी, पर सीबीआई ने जमानत पर विरोध जताया था। इधर लालू परिवार समेत पूरा आरजेडी खेमा आशान्वित है कि लालू जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाएंगे।

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मधेपुरा सीट के लिए शरद ढूंढ़ रहे पप्पू का हल

लोकतांत्रिक जनता दल बनाकर नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे शरद यादव परेशान हैं इन दिनों। उनकी परेशानी की वजह है मधेपुरा लोकसभा सीट जहां से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल यहां एक म्यान में दो तलवार की स्थिति आन पड़ी है उनके सामने और ये दूसरी तलवार हैं मधेपुरा के वर्तमान सांसद पप्पू यादव। महागठबंधन का उम्मीदवार बनकर शरद एनडीए से लोहा लें उससे पहले उन्हें पप्पू का हल ढूँढ़ना पड़ रहा है। प्रश्न उठता है कि पप्पू उनके लिए सीट छोड़ें क्यों? वे तो स्वयं इस जुगत में हैं कि किसी तरह महागठबंधन में उनकी इंट्री हो जाए। राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद जानते हैं कि अगर वे एनडीए के विरुद्ध महागठबंधन के उम्मीदवार बन जाएं और पप्पू भी वहां से खड़े हो जाएं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा और ऐसे में एनडीए को रोकना असंभव-सा होगा क्योंकि पप्पू यादव का भी वोट बैंक कमोबेश वही है जो आरजेडी या महागठबंधन का है।
इन सारी परिस्थितियों के बीच शरद यादव इस कोशिश में हैं कि लालू प्रसाद यादव की रजामंदी से पप्पू यादव को मधेपुरा से हटाकर सुपौल या झंझारपुर से चुनाव लड़वाया जाय। बता दें कि सुपौल से पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की मौजूदा सांसद हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना नगण्य है कि पप्पू सुपौल से लड़ें। ऐसे में झंझारपुर उनका नया ठिकाना हो सकता है। ये सभी संसदीय क्षेत्र यादव बहुल हैं और दोनों यादव नेता इसका लाभ लेना चाहते हैं। हालांकि आरजेडी सुप्रीमो ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया है।
गौरतलब है कि पप्पू यादव पूर्णिया से तीन बार सांसद रह चुके हैं और उनके लिए पूर्णिया एक बेहतर विकल्प हो सकता था लेकिन सूत्रों के मुताबिक पप्पू स्वयं वहां से चुनाव लड़ना नहीं चाहते। इसके पीछे उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरियां बताई जा रही हैं। चलते-चलते यह भी बता दें कि साल भर पहले लालू परिवार के खिलाफ आग उगलने वाले पप्पू इन दिनों लालू के गुण गाने में लगे हैं। इसे आरजेडी खेमे से उनकी बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा जा रहा है और यह बात भी शरद को परेशान कर रही है।

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दलाई लामा से मिले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

साल 2018 के अंतिम दिन बोधगया में दो बेमिसाल शख्सियतें एक साथ थीं। जी हाँ, सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बोधगया में परम पावन दलाई लामा से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इस अवसर पर दलाई लामा ने मुख्यमंत्री को खादा भेंट की और उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया।
दलाई लामा से भेंट करने के उपरान्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महाबोधि मंदिर जाकर भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना की। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री ने महाबोधि वृक्ष के नीचे जाकर पुष्प अर्पित करते हुए पवित्र वृक्ष को नमन किया। इस अवसर पर अवसर पर मुख्यमंत्री को महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से बीटीएमसी के अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी द्वारा नववर्ष का कैलेंडर, महाबोधि मंदिर पर चढ़ाए गए फूल से बनाया गया डाई पाउडर और उससे बनाए गए रंग से रंगा हुआ कपड़ा भेंट किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान महाबोधि मंदिर के नए निकास द्वार का भी अवलोकन किया तथा निकास द्वार के समीप अंदर घेरे के निचले हिस्से में सौन्दर्यीकरण कराने का निर्देश दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, विशेष सचिव अनुपम कुमार, गया के जिलाधिकारी अभिषेक सिंह, मगध प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरिक्षक विनय कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा, बीटीएमसी के सचिव एन दोरजी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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जदयू मीडिया सेल ने डॉ. भारती मेहता को किया सम्मानित

जदयू मीडिया सेल मुख्यालय में आज बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. भारती मेहता के लिए सम्मान-समारोह का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने की। संस्कृत शिक्षा बोर्ड का कार्यभार संभालने से पूर्व डॉ. भारती मेहता जदयू की प्रदेश प्रवक्ता होने के साथ-साथ जदयू मीडिया सेल परामर्शदात्री समिति की सदस्य भी रही हैं। इस कारण मीडिया सेल के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों ने उनको बोर्ड की महती जिम्मेदारी दिए जाने पर विशेष रूप से हर्ष प्रकट किया। इस सम्मान-समारोह में मीडिया सेल के कई प्रदेश पदाधिकारी व जिला संयोजक शामिल हुए जिनमें श्री राजीव रंजन पटेल, श्री धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, श्री संतोष चौधरी, श्री अप्पू पटेल, श्री संतोष अशर, श्री अभय विश्वास भट्ट, श्रीमती देवयानी दूबे, श्री प्रभात कुमार आर्य, श्री नबीस नवेन्दु, श्री अमित नारायण, श्री अशरफ हुसैन, श्री राहुल किशोर सिन्हा, श्री आशुतोष सिंह राठौड़ आदि प्रमुख हैं। जदयू नगर निकाय प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता श्री चंदन यादव समेत युवा एवं छात्र जदयू के पदाधिकारी भी इस सम्मान-समारोह में मौजूद रहे। डॉ. भारती मेहता को सम्मान-स्वरूप शाल, बुके आदि दिए जाने के साथ ही डॉ. अमरदीप ने अपनी दो पुस्तकें भी भेंट कीं।
इस मौके पर अपने संबोधन में डॉ. अमरदीप ने कहा कि डॉ. भारती मेहता को बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की जिम्मेदारी देना मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का ऐतिहासिक निर्णय है। अत्यंत पिछड़े समाज की बेटी को यह पद देकर उन्होंने कई मिथकों को तोड़ा है। उनका यह निर्णय बताता है कि राजनीतिक और सामाजिक समानता को लेकर उनके विजन का कैनवास कितना बड़ा है।
डॉ. भारती मेहता ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इतना बड़ा दायित्व देकर माननीय मुख्यमंत्री ने साबित किया है कि पिछड़े समाज के समग्र उत्थान और आधी आबादी के समुचित सम्मान के लिए वे किस कदर प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि देवभाषा संस्कृत को समर्पित इस बोर्ड की खोई हुई गरिमा को वापस लौटाने और अपने नेता के विश्वास पर खरा उतरने में वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
सम्मान-समारोह को श्री राजीव रंजन पटेल, श्री धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, श्री चंदन यादव, श्री अभय विश्वास भट्ट एवं श्रीमती देवयानी दूबे ने भी संबोधित किया। सभी नेताओं ने डॉ. भारती को शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि अपने कार्यकाल में वे मील का पत्थर स्थापित करने में सफल होंगी।

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जदयू मीडिया सेल ने पूरा किया एक साल, जनवरी में आएगा जदयू ऐप

मंगलवार को जदयू मीडिया सेल की स्थापना का एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में प्रदेश जदयू मुख्यालय में मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति एवं जिला मीडिया संयोजकों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने की। पार्टी की इस महत्वपूर्ण बैठक में जदयू के वरिष्ठ प्रवक्ता सह विधानपार्षद श्री नीरज कुमार, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, जदयू के प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार तथा राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री विद्यानंद विकल खास तौर पर मौजूद रहे। बैठक में मीडिया सेल के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे जिनमें श्री राजीव रंजन पटेल, श्री धनंजय शर्मा, श्री प्रभात रंजन झा, डॉ. धीरज सिन्हा, श्री श्याम पटेल, डॉ. सुभाष चन्द्रशेखर, श्री धीरज सिंह राठौड़, श्री संतोष अशर, श्री अप्पू पटेल, श्री कैप कुमार, श्री प्रभात कुमार आर्य, श्री नबीस कुमार नवेन्दु, श्री मिथिलेश प्रसाद निराला, श्री संतोष चौधरी, श्री अमित नारायण, श्री राहुल किशोर सिन्हा, श्रीमती राधा रानी, श्री विकास कुमार सिंह एवं श्री आशुतोष सिंह राठौड़ प्रमुख हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता सह विधानपार्षद श्री नीरज कुमार ने कहा कि महज एक साल में जदयू मीडिया सेल ने पार्टी के लिए जितने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं उसके लिए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी पूरी टीम बधाई की हकदार हैं। उन्होंने कहा कि हम सबके नेता श्री नीतीश कुमार के कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक प्रचार करने वालों को माकूल जवाब देने की जिम्मेदारी भी मीडिया सेल के ऊपर है। 2019 और 2020 को ध्यान में रखकर मीडिया सेल की भूमिका और महत्वपूर्ण होने जा रही है।
विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ ने कहा कि डॉ. अमरदीप के नेतृत्व में जदयू मीडिया सेल ने पार्टी को नई मजबूती दी है। इसके माध्यम से ना केवल सांगठनिक स्तर पर सार्थक संवाद संभव हो रहा है बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी हम बाकी दलों से आगे हो सके हैं। श्री नीतीश कुमार के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में मीडिया सेल की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी।
प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं श्री अनिल कुमार ने मीडिया सेल को सफलता के साथ एक वर्ष पूरा करने पर अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बदलते हुए समय में मीडिया सेल पार्टी की जरूरत थी, जो अब पूरी हो गई है। अब इसे जिला और प्रखंड स्तर पर और सुदृढ़ करने की जरूरत है। वहीं, श्री विद्यानंद विकल ने कहा कि जितने कम समय में जदयू मीडिया सेल ने अपनी उपयोगिता और अनिवार्यता साबित की है, वह प्रशंसा योग्य है।
इस मौके पर जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की और साल भर की सारी उपलब्धियों का लेखा-जोखा सामने रखा। जदयू के वेब पोर्टल और वेब पत्रिका की सफलता के बाद उन्होंने जनवरी में पार्टी के वेब ऐप को लॉन्च करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने बताया कि शीघ्र ही सभी 534 प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों के 117 सेक्टरों में मीडिया संयोजकों की नियुक्ति हो जाएगी। मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जनवरी में जदयू मीडिया सेल का राजधानी पटना में प्रदेश, जिला एवं प्रखंड व सेक्टर स्तर के पदाधिकारियों के संयुक्त सम्मेलन का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें पार्टी के सभी शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे।

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तेजप्रताप ने कहा, तलाक से पीछे हटने का सवाल ही नहीं

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने कहा है कि ऐश्वर्या राय से उनके तलाक की कार्यवाही जारी रहेगी। इस बीच मीडिया में चल रही तलाक की अर्जी वापस लेने संबंधी खबरों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि न्यूज चैनल्स गलत खबर चला रहे हैं। तलाक के फैसले से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।

गौरतलब है कि तेजप्रताप हाल ही में अपने पिता से मिले थे। उसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वे शायद मान जाएंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टे उनसे मिलने के बाद तेजप्रताप ने कहा, ‘मैंने जो भी फैसला लिया, अब उसे बदलने वाला नहीं हूं। मुझपर मेरे पिता का आशीर्वाद है।’

बता दें कि इसी साल तेजप्रताप की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय की पोती और आरजेडी विधायक चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से हुई थी। शादी के पांच महीने बाद ही तेजप्रताप ने पटना कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, जिसके बाद से ही दोनों के परिवारों ने तेजप्रताप को मनाने की हरसंभव कोशिश की पर तेजप्रताप टस से मस होते नहीं दिख रहे। तेजप्रताप के वकील यशवंत कुमार शर्मा का कहना है कि तेजप्रताप और ऐश्वर्या राय के बीच सबकुछ ठीक नहीं था इसलिए यह फैसला लिया गया।

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टूट गई रालोसपा, कुशवाहा के लिए संकट की घड़ी

अभी-अभी एनडीए से अलग हुई रालोसपा आज दो भागों में बंट गई। बिहार में पार्टी के दोनों विधायक और एकमात्र विधानपार्षद ने एनडीए के साथ रहने की घोषणा करते हुए रालोसपा पर दावा तक ठोंक दिया। इन नेताओं ने स्वयं को असली रालोसपा का नेता बताते हुए अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिगत राजनीति करने का आरोप लगाया।

पटना में रालोसपा के दोनों विधायकों – सुधांशु शेखर और ललन पासवान – के साथ विधानपार्षद संजीव श्याम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन कर एनडीए में रहने की घोषणा की और कहा कि वे एनडीए में थे और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि रालोसपा एनडीए से कभी अलग हुई ही नहीं है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पूर्व रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने एनडीए में ‘सम्मान’ नहीं मिलने के कारण अलग होने की घोषणा की थी।

बहरहाल, संवाददाता सम्मेलन में तीनों नेताओं ने रालोसपा पर दावा ठोंकते हुए कहा कि अगर जरूरत पडे़गी तो वे लोग निर्वाचन आयोग से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं। उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने कहा कि वे केवल अपने लाभ की बात करते हैं। उन्हें ना पार्टी से मतलब रहा ना ही उन्हें बिहार से मतलब रहा।

कुल मिलाकर पहले ही कठिन दौर से गुजर रहे उपेन्द्र कुशवाहा के लिए ये सचमुच बहुत बुरी खबर है। पार्टी में दो फाड़ होने से स्पष्ट है कि महागठबंधन में भी उन्हें वो ‘भाव’ नहीं मिलेगा जिसकी उन्हेँ अपेक्षा होगी। कांग्रेस के दिन उधर अलग फिर गए हैं। तीन-तीन राज्यों में सत्ता में आने के बाद उसके हौसले बुलंद हैं और बहुत संभव है कि पार्टी बिहार में अधिक हिस्सेदारी चाहेगी। इसका खामियाजा भी कहीं ना कहीं रालोसपा को भुगतना पड़ेगा।

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