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शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के नाम बिहार में बनेगा संगीत विश्वविद्यालय

सूबे बिहार की नीतीश सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री प्रमोद कुमार ने बिहार विधानसभा में कहा है कि भारतरत्न शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ के नाम बिहार में संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना जल्द ही की जाएगी | इस सिलसिले में विभागीय स्तर पर कार्यवाही आरंभ कर दी गई है |

बता दें कि संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कम से कम 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता बतायी गई है | इस हेतू मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी द्वारा कढ़नी में 2.80 एकड़ उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है | बकौल विभागीय मंत्री जमीन की उपलब्धता हेतु अन्य जिलाधिकारी से भी संपर्क साधा जा रहा है….. जहाँ जमीन मिल जाएगी वहीं बनेगा संगीत विश्वविद्यालय |

यह भी बता दें कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना का हक तो बनता है मधेपुरा जिला का….. क्योंकि शहनाई वादक बिस्मिल्ला ख़ाँ को 20वीं सदी में कई बार मधेपुरा के रासबिहारी उच्च विद्यालय के मंच पर दशहरे के अवसर पर संगीत के प्रति गहरी अभिरुचि रखने वाले तबलावादक प्रो.योगेन्द्र नारायण यादव, समाजसेवी रमेश चंद्र यादव, गिरिधर प्रसाद श्रीवास्तव, प्रो.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी आदि द्वारा बुलाया गया था | बिस्मिल्लाह खाँ की शहनाई सुनकर लोगों को मंत्रमुग्ध होते देख आयोजकगण बेहद खुश होते थे |

चलते-चलते अंत में बकौल डॉ.मधेपुरी यह भी जान लें कि विदेशों में जब बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई बजाया करते तथा श्रोतागण तालियाँ बजाकर उन्हें सम्मानित किया करते तो कार्यक्रम समाप्ति के तुरंत बाद पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि तालियों की गड़गड़ाहट सुनकर आपको कैसा लगता है- के जवाब में बिस्मिल्ला खाँ बस इतना ही कहते-

“तालियों की गड़गड़ाहट से मुझे कोई फर्क इसलिए नहीं पड़ता है कि वहाँ बिस्मिल्लाह खाँ तो शहनाई बजाता नहीं…. वहाँ तो भारत शहनाई बजा रहा होता है।”

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बिहार में 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी का काम पूरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कब्रिस्तान की घेराबंदी के संबंध में विधानसभा में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के 75 प्रतिशत संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई जा चुकी है। बाकी 25 प्रतिशत का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आरजेडी विधायक रघुवंश कुमार यादव के तारांकित प्रश्न के जवाब के दौरान हस्तक्षेप करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बिहार के सभी कब्रिस्तानों का सर्वेक्षण कराया है और इनमें से 8064 कब्रिस्तानों को संवेदनशील मानते हुए घेराबंदी कराने का फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री के जवाब का विपक्षी दलों ने विरोध किया और आरोप लगाया कि कब्रिस्तानों के सर्वेक्षण की सूची गलत है। विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 2006 की सूची है। अगर सूची में किसी विवादित या संवेदनशील कब्रिस्तान का नाम छूट गया है तो क्षेत्रीय विधायक भी संशोधित करवा सकते हैं। उनका सुझाव आमंत्रित है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में वैसे कब्रिस्तानों की घेराबंदी का फैसला लिया गया है, जहां विवाद है या होने की आशंका है। संबंधित जिलों के डीएम एवं एसपी को विवादित और संवेदनशील कब्रिस्तानों को चिह्नित करने का जिम्मा दिया गया है। उन्हें घेराबंदी की प्राथमिकता तय करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। प्राथमिकता वाले अबतक 8064 कब्रिस्तानों की सूची बनाई गई है।

गौरतलब है कि घेराबंदी के लिए बजट का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कब्रिस्तानों की घेराबंदी के लिए राज्य सरकार की कोई कमिटी नहीं है। विधायक और विधानपार्षद भी चाहें तो वह मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से कब्रिस्तानों की घेराबंदी करा सकते हैं।

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ट्विटर पर प्रकट हुए तेजस्वी

पिछले कई दिनों से बिहार के राजनीतिक गलियारे में ये कौतूहल का विषय था कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कहाँ लापता हो गए? इस दौरान आश्चर्यजनक रूप से न तो उनका कोई बयान आ रहा था और न ही सोशल मीडिया पर ही उनकी कोई जानकारी मिल पा रही थी। यहां तक कि आरजेडी के नेताओं को भी पता नहीं था कि वो कहां हैं? इसे लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से कई तरह की बयानबाजी हो रही थी। इन सबके बीच तेजस्वी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि वो अपनी पुरानी बीमारी का इलाज करा रहे थे, कहीं भागे नहीं थे और वो जल्द बिहार लौट रहे हैं।

तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा कि दोस्तों! पिछले कुछ हफ्तों से मैं अपनी लिगामेंट और एसीएल की चोट से परेशान था और उसी के इलाज में व्यस्त था। हालांकि, मैं राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ मसालेदार कहानियों को पकाने वाले मीडिया की कहानियों को सुनने के लिए जानने के लिए उत्सुक हूं और जल्द ही आ रहा हूं।

इसके साथ ही तेजस्वी ने एक के बाद एक कई ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि लोकसभा में मिली हार से हमने सीख ली है और अब हम नए सिरे से अपनी शुरुआत करेंगे। आगे उन्होंने लिखा लिखा कि एईएस से सौ से अधिक गरीब बच्चों की मौत हो गई है और इस घटना ने मुझे बहुत तकलीफ पहुंचाई है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से तेजस्वी अचानक लापता हो गए थे, वो कहां हैं? इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। आरजेडी का कोई नेता कह रहा था कि वो क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने गए हैं तो कोई कह रहा था कि वो दिल्ली में हैं। इसके साथ ही सत्ता पक्ष को भी मुद्दा मिल गया था और वो इसे लेकर लगातार हमलावर था।

गौरतलब है कि शुक्रवार से बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू हो चुका है और उस दिन भी सदन में तेजस्वी की अनुपस्थिति की बात उठी थी। राबड़ी देवी को कहना पड़ा था कि तेजस्वी किसी काम में लगे हुए हैं और जल्द पटना लौटेंगे। हालांकि जब मीडियाकर्मियों ने इस बाबत सवाल किया तब वो भड़क गईं और गुस्से में जवाब देते हुए पत्रकारों से कहा कि तेजस्वी आपके घर में है।

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राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए रामविलास

शुक्रवार, 28 जून को केन्द्रीय मंत्री व लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान को बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिया गया। किसी और उम्मीदवार की अनुपस्थिति में शुक्रवार की शाम नामांकन पत्रों की वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्हें निर्विरोध सांसद निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए के घटक दलों जदयू, भाजपा और लोजपा के बीच सीट बंटवारे के तहत इन दलों को क्रमश: 17, 17 और 6 सीटें मिली थीं और लोजपा से वादा किया गया था कि पासवान के लिए उसे एक राज्यसभा की सीट भी दी जाएगी। इस तरह रविशंकर प्रसाद के पटना साहिब से सांसद चुने जाने के बाद राज्यसभा की खाली हुई सीट पर पासवान का जाना तय-सा माना जा रहा था।

बहरहाल, केन्द्र सरकार में उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण विभाग में मंत्री रामविलास पासवान ने 21 जून को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था। मैदान में अकेले होने के कारण उनका चुना जाना औपचारिकता मात्र था। पासवान पहले ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। ऐसे में शुक्रवार को शाम 3 बजे पर्चा वापस लेने की समय-सीमा खत्म होते ही एलजेपी प्रमुख को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिया गया।

बता दें कि पासवान बिहार की अपनी पारंपरिक हाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ते थे। 10 बार संसदीय चुनाव में उतरने वाले पासवान ने इस सीट से आठ बार जीत हासिल की है। इस बार वे चुनाव मैदान में नहीं उतरे। उनकी जगह उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस यहां से सांसद चुने गए।

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बिजली पम्प से नाता जोड़ो, डीजल पम्प को जल्दी छोड़ो

नीतीश सरकार किसानों की स्थिति में सर्वाधिक सुधार लाने को संकल्पित है | तभी तो नीतीश सरकार के उर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बिहार सरकार के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों, पदाधिकारियों एवं समस्त विद्युत कर्मियों को अहर्निश कृषक-सेवा के लिए तैयार किया है और हर घर को बिजली देने के बाद अब हर खेत को बिजली देने का संकल्प लिया है….. जिसके लिए उन्होंने स्लोगन दिया है…. “बिजली पम्प से नाता जोड़ो, डीजल पम्प को जल्दी छोड़ो” |

बता दें कि किसान के उस खेत को बिजली आधारित पंपसेट से पटवन करने पर जहां ₹10 खर्च आता है वहीं उसी खेत को डीजल वाले पम्प सेट से सिंचाई करने पर ₹100 व्यय करना पड़ता है यानि 10 गुना ज्यादा खर्च होता है | इसलिए विद्युत गति से कृषि पटवन हेतु नया विद्युत संबंध प्रदान करने के लिए नीतीश सरकार द्वारा प्रत्येक बुधवार एवं शनिवार को संपूर्ण सूबे के 534 प्रखंड कार्यालयों में शिविर का आयोजन किया जा रहा है |

यह भी जान लें कि शिविर तो सप्ताह में केवल दो ही दिन आयोजित किया जाएगा, परंतु शिविर के अतिरिक्त नये विद्युत संबंध प्रदान करने के लिए ऑनलाइन या सहायक विद्युत अभियंता के कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस को आवेदन दिया जा सकता है जिसके साथ पहचान पत्र / आधार कार्ड एवं जमीन से संबंधित कागजात संलग्न करना अनिवार्य होगा |

चलते-चलते यह भी बता दें कि यदि बोरिंग के पास तक बिजली पहुंची हुई हो तो 7 दिनों के अंदर विद्युत संबंध ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदान कर दिया जाएगा….. बिजली नहीं रहने की स्थिति में दिसंबर 2019 तक विद्युत संबंध प्रदान करने को संकल्पित है नीतीश सरकार | हाँ ! बिजली पोल से नलकूप तक का तार, एक बोर्ड, एक किटकैट आदि किसान को स्वयं क्रय कर मीटर लगाने के समय उपलब्ध कराना होगा | आवेदन के समय किसी प्रकार की राशि देय नहीं है | बोरिंग में विद्युत कनेक्शन हो जाने के बाद सिंगल फेज लेने पर ₹875 या थ्री फेज के लिए 1500 रुपया 10 किस्तों में बिना सूद के विद्युत रसीद ले कर देय होगा | मात्र 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली का भुगतान किसान को करना होगा |

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बिहार में होगी साढ़े छह हजार से अधिक डॉक्टरों की बहाली

बिहार इन दिनों एईएस और लू की चपेट में है। लगभग तीन सौ लोग जान गंवा चुके हैं। हालांकि आज मानसून के आगमन के साथ लगातार हो रही मौतों का सिलसिला जरूर रुकेगा। इधर सरकार भी अपनी ओर से हरसंभव कोशिश करने में जुटी है। इन आपदाओं से प्रभावित जिलों में हालात से निपटने के लिए डॉक्टर अन्य जिलों से लेकर राज्य के बाहर तक से बुलाए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि राज्य में डॉक्टरों की कमी है। इसे देखते हुए सरकार ने डॉक्‍टरों को बहाल करने का निर्णय लिया है। जी हाँ, सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य में साढ़े छह हजार से अधिर डॉक्‍टरों की नियुक्ति की जाएगी।

बिहार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के प्रधान सचिव संजय प्रसाद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के साथ ही अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्‍टरों की कमी को देखते हुए 2325 विशेषज्ञ डॉक्टर और करीब 4500 एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति होगी। स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग से स्वीकृत कराते हुए तकनीकी सेवा आयोग को भेज दिया है।

बता दें कि डॉक्टरों के साथ ही 9139 स्टॉफ नर्स (ए ग्रेड) की नियुक्ति भी होगी। सभी नियुक्तियों का प्रस्ताव आयोग को भेजा जा चुका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और जल्द ही बहाली प्रक्रिया शुरू होगी।

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बिहार कैबिनेट ने लगाई कुल 13 एजेंडों पर मुहर

शुक्रवार, 21 जून 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में कुल 13 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें एक महत्‍वपूर्ण प्रस्‍ताव पेंशनभोगियों के महंगाई भत्‍ते का था। बिहार सरकार ने पेंशन भोगियों के महंगाई भत्ता में 11 प्रतिशत का इजाफा कर उसे 284 प्रतिशत से बढ़ाकर 295 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही अपुनरीक्षित कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 148 फीसदी से बढ़ाकर 154 फीसदी कर दिया गया। ये दोनों फैसले 1 जनवरी 2019 के प्रभाव से लागू होंगे।

बैठक में नदियों से संबंधित आंकड़ों के संग्रह के लिए बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केन्द्र, अनिसाबाद, पटना को अपग्रेड करने का फैसला भी किया गया। इस काम के लिए कैबिनेट ने 20.62 करोड़ रुपये मंजूर किए। बता दें कि इस केन्द्र से कोसी बाढ़ समुत्थान परियोजना, कोसी बेसिन विकास परियोजना एवं राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है। साथ ही यहां से विभिन्न नदियों के मॉडलिंग कार्य, बाढ़ पूर्वानुमान लगाने और चेतावनी देने की प्रणाली भी काम कर रही है। इन कार्यों को और तेज गति से करने तथा सारे जलीय आंकड़ों का संग्रण वास्तविक समय में करने और नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन सहित 72 घंटे पूर्व विभिन्न नदियों के लिए बाढ़ पूर्व चेतावनी विकसित करने के इरादे से इस केन्द्र को अपग्रेड करने का फैसला किया गया।

कैबिनेट ने 2010 से संविदा पर काम कर रहे 212 व्यवसाय अनुदेशकों को एक वर्ष का अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया। इसके अलावा बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा नियमावली 2006 में संशोधन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। संशोधन के बाद आशुलिपिक सेवा संवर्ग में आप्त सचिव एवं प्रधान आप्त सचिव को राजपत्रित पद नामित किया जा सकेगा।

कैबिनेट ने बैठक में सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के संगम ज्ञापन में संशोधन की मंजूरी भी दी। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत राज्य आयोग, उपभोक्ता संरक्षण एवं जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया, वेतन भत्ते एवं सेवा शर्त नियमावली 2019 के गठन का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया।

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चमकी बुखार और लू से निपटने को तत्पर है सरकार

बिहार चमकी बुखार (एईएस) और हिट वेव की आपदा एक साथ झेल रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संदर्भ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय समेत स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए वे मुजफ्फरपुर जा रहे हैं। बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर में अब तक चमकी बुखार से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। बिहार सरकार इस स्वास्थ्य आपदा से जूझ ही रही थी कि बिहार में लू का कहर भी शुरू हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रचंड गर्मी और लू से बिहार में अब तक 78 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से 35 मौतें सिर्फ गया में हुई हैं, जबकि 47 लोग औरंगाबाद में मरे हैं।

बिहार में  एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) यानि चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में 375 बच्चे एडमिट हैं। चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। वहीं चमकी बुखार की आंच अब मोतिहारी तक पहुंच गई है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है।

लू की बात करें तो बिहार के गया में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में लू के कारण मरने वालों की संख्या 35 तक पहुंच चुकी है। इनमें से 28 की इलाज के दौरान मौत हो गई तो सात को मृत हालात में ही लाया गया था। वहीं 106 मरीजों का फिलहाल इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि बिहार में गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। गया में गर्मी को लेकर धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं भीषण गर्मी के कारण 22 जून तक बिहार के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों आपदा के सभी मृतकों के परिजनों को तत्काल चार-चार लाख रुपए अनुग्रह अनुदान देने और इन विपदाओं से जूझ रहे सभी लोगों के लिए हरसंभव चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था करने का निर्देश दे चुके हैं।

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सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला बिहार बना पहला राज्य

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सचिवालय, पटना स्थित ‘संवाद’ कक्ष में वृद्धजन पेंशन योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के शुभारंभ के साथ बिहार सभी बुजुर्गों को पेंशन देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बता दें कि बिहार में 35 से 36 लाख ऐसे लोग हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। इस योजना पर हर वर्ष राज्य सरकार की तरफ से 1800 करोड़ रुपए व्यय होंगे। इस योजना के तहत अभी तक दो लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से सत्यापन के बाद एक लाख 35 हजार 928 लोगों के खाते में मार्च और अप्रैल 2019 की राशि भी ट्रांसफर कर दी गई। इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के गरीब लोगों को प्रति माह 400 रुपए और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रतिमाह 500 रुपए मिलेंगे।

वृद्धजन पेंशन योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को भुगतान का शुभारंभ करने के बाद नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि इस वर्ष 01 मार्च से इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसकी राशि का भुगतान आज से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा था। विधवा पेंशन, दिव्यांगजनों को पेंशन जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं लेकिन 60 वर्ष से ऊपर के सभी वृद्धजनों चाहे स्त्री हो या पुरुष जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार से कोई वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त नहीं हो रहा है, उन्हें इसका लाभ देने की योजना बनाई और इसे लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे वृद्धजनों का अपने परिवार में सम्मान बढ़ेगा और उनकी कुछ जरूरतें भी पूरी होंगी। कितना अच्छा लगेगा जब बुजुर्ग इससे अपने पोता-पोती को चॉकलेट लाकर देंगे। इस योजना के माध्यम से कम से कम ऐसी खुशी तो हम उन्हें दे ही सकते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह व्यवस्था भी कर दी है कि जो लोग माता-पिता की उपेक्षा करेंगे उनकी खैर नहीं। एसडीओ के यहां आवेदन देने से ही कार्रवाई हो जाएगी। अपील के लिए कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं। अब डीएम के स्तर पर तीस दिनों के अंदर फैसला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अब दूसरे राज्य यह पूछ रहे हैं कि हमने यह निर्णय किस तरह से लिया। वे लोग भी ऐसा करना चाह रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद वृद्धजनों से मुख्यमंत्री ने यह अपील की कि सभी लोगों को इस योजना के बारे में बताएं ताकि ताकि अधिक से अधिक संख्या में आवेदन भरे जा सकें। इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह भी उपस्थित थे। चलते-चलते बता दें कि लोक सेवा केंद्र और ऑनलाइन माध्यम से इस योजना के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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नीतीश हमेशा बड़ी लकीर खींचने वाले सकारात्मक सोच के व्यक्ति रहे हैं- डॉ.मधेपुरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह बड़े-बड़े सपने देखने और उसे अमलीजामा पहनाने में विश्वास करते हैं | नीतीश ने सपना देखा है कि दिल्ली एम्स की तरह बने और उसकी बराबरी करे बिहार का आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) भी |

बता दें कि नीतीश कुमार ने आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास को विश्वास के साथ कहा- दिल्ली एम्स की तर्ज पर बनावें बिहार का आईजीआईएमएस… सिर्फ इलाज नहीं….. शोध की श्रेष्ठता पर भी ध्यान रहे….. इसमें जितनी राशि लगेगी वह राज्य सरकार देगी |

ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को आईजीआईएमएस परिसर में 500 बेड के अस्पताल भवन के शिलान्यास व कार्यारंभ के मौके पर प्रेस को संबोधित करते हुए बता रहे थे-

यह भवन 6 मंजिला होगा जो 2 वर्षों में बनकर तैयार होगा और इस निर्माण पर खर्च होने वाली राशि होगी लगभग 300 करोड़……. जल्द ही 1200 बेड के एक और अस्पताल भवन का निर्माण होगा तब इसकी क्षमता 2500 बेड की हो जाएगी…… वर्तमान में इसकी क्षमता 850 बेड की है |

CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.
CM Nitish Kumar is being honoured at IGIMS in cordial presence of Central Ministers and Deputy CM.

मुख्यमंत्री के हवाले से यह भी कहा गया-  दिल्ली एम्स की तरह यहाँ भी मरीजों को सेवा मिले…. इसके लिए हर स्तर पर काम हो चाहे वह आधारभूत संरचना का मामला हो अथवा विशेषज्ञों व कर्मियों की नियुक्ति का ही क्यों ना हो | ऐसी व्यवस्था व इंतजाम किए जाएं कि बिहार में सभी तरह के इलाज बेहतर तरीके से हो  | बिहार वासियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े |

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, मंगल पांडे आदि गणमान्यों की उपस्थिति में माननीय मुख्यमंत्री को संस्थान के निदेशक डॉ.एन.आर.विश्वास ने सम्मानित किया | मौके पर जहाँ केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि गरीबों की सेवा में सतत लगे रहने वाले पीएम और सीएम को कोटि-कोटि साधुवाद- वहीं उपमुख्यमंत्री मोदी ने आईजीआईएमएस की अपनी पहचान की चर्चा की | जहाँ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री चौबे ने चिकित्सकों से कहा कि वे रोगियों का हृदय से स्वागत करें | वही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को दवाओं का खर्च मिलेगा |

चलते-चलते यह भी कि जब मधेपुरा अबतक द्वारा भारतरत्न डॉ.कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से इस अस्पताल निर्माण के बाबत चर्चा की गई तो डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ई.नीतीश कुमार सदा से ही डॉ.कलाम की तरह बड़ी लकीर खींचने वाले व बड़े-बड़े सपने देखने वाले सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति रहे हैं | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए बहुत कुछ किए भी हैं और आगे करने वाले भी हैं |

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