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जदयू मीडिया सेल ने बनाई डिजिटल अभियान की रणनीति

रविवार 9 फरवरी 2020 को पटना स्थित जदयू मीडिया सेल मुख्यालय में प्रदेश कार्यसमिति एवं जिला मीडिया संयोजकों की संयुक्त बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने की। मीडिया सेल की इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन एवं विधि प्रभारी प्रवीण तिवारी, मुख्यालय प्रभारी संतोष चौधरी, सोशल नेटवर्क प्रभारी संतोष अशर, सूचना प्रभारी प्रो. चन्द्रभूषण सिंह शशि, संवाद प्रभारी सुनील सहाय तथा प्रमंडल प्रभारी यादव उमेश कुमार, संजय कुमार, अभय विश्वास भट्ट, मिथिलेश प्रसाद निराला, विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. धीरज सिन्हा, विनीता स्टेफी पासवान, पिंकी भारती, तकनीकी समिति के कोऑर्डिनेटर राहुल किशोर सिन्हा एवं सॉफ्टवेयर प्रभारी आशुतोष सिंह राठौड़ समेत विभिन्न जिलों के मीडिया संयोजक मौजूद रहे।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने बैठक के प्रारंभ में मीडिया सेल के डिजिटल अभियान की रूप-रेखा पेश की और इसके उद्देश्य से सबको अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मार्च तक जदयू के 62 लाख 50 हजार कार्यकर्ताओं को डिजिटली कनेक्ट करने का लक्ष्य पूरा करना है। उन्होंने अपने संबोधन में विस्तार से कहा कि यह अभियान आज के समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बने इसके लिए जदयू मीडिया सेल हर बूथ पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर मिशन 2020 में सार्थक और निर्णायक भूमिका निभाएगा।
सोशल नेटवर्क प्रभारी संतोष अशर ने इस अभियान के तकनीकी पहलुओं पर अपना प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया सेल की तकनीकी टीम तय समय से पहले इस लक्ष्य को हासिल करेगी। संगठन एवं विधि प्रभारी प्रवीण तिवारी ने सोशल मीडिया के विभिन्न फॉर्मेट पर और अधिक सक्रिय होने पर जोर दिया। मुख्यालय प्रभारी संतोष चौधरी ने कहा कि मीडिया सेल मुख्यालय चौबीसों घंटे हर तरह के सहयोग के लिए तैयार है। वहीं, प्रमंडल प्रभारी यादव उमेश कुमार (पूर्णिया एवं भागलपुर), संजय कुमार (पटना), अभय विश्वास भट्ट (मगध) और मिथिलेश प्रसाद निराला (दरभंगा) ने अपने-अपने प्रमंडल में इस अभियान की तैयारी के बारे में जानकारी दी। ध्यातव्य है कि इस अभियान के सिलसिले में शीघ्र ही मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति एवं जिला मीडिया संयोजकों की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें शेष प्रमंडलों के प्रभारी एवं जिला संयोजक भाग लेंगे।

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राज्य स्तरीय सब्जी-खेती के लिए पुरस्कृत तीन किसानों को आत्मा निदेशक राजन वालन ने किया सम्मानित

सूबे बिहार के मुखिया नीतीश कुमार की रहनुमाई में पटना के ज्ञान भवन में 17-18-19 जनवरी को राज्य स्तरीय “तरकारी महोत्सव” आयोजित करने का निर्देश दिया गया था जिसमें मधेपुरा जिले की तीन किसानों- आशा देवी, गुलाब महतो एवं शिव शंकर मेहता को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कृत होकर जिले में वापसी के बाद आत्मा कार्यालय में उन तीनों किसानों के लिए निदेशक राजन वालन ने सम्मान समारोह का आयोजन किया।

इस अवसर पर आत्मा के परियोजना निदेशक राजन वालन ने कहा कि कोसी प्रमंडल से मात्र मधेपुरा जिले के इन तीनों किसानों को यह सम्मान राज्य स्तर पर मिल सका है। उन्होंने कहा कि मधेपुरा जिले के किसानों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि ही नहीं बल्कि दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना है।

बता दें कि जिले के प्रखंड शंकरपुर के बेहरारी कोल्हुआ निवासी महिला किसान श्रीमती आशा देवी (पति- देवनंदन मंडल) को गाजर की बेहतर खेती के लिए, इसी प्रखंड के निवासी व पैक्स अध्यक्ष शिव शंकर मेहता को लौकी की बेहतर खेती के लिए तथा मुरलीगंज प्रखंड के नाढ़ी पंचायत के बंधा गांव निवासी किसान गुलाब महतो को अदरक की बेहतर खेती के लिए राज्य स्तरीय तरकारी महोत्सव में कृषि मंत्री एवं सचिव डॉ.एन सरवण के द्वारा पुरस्कृत किया गया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ मधेपुरा प्रखंड के राजपुर गाँव निवासी जैविक खेती करने वाले राष्ट्रपति भवन में पुरस्कृत किसान प्रो.शंभू शरण भारतीय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे किसान आत्मनिर्भर होंगे वहीं राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे मधेपुरा के समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसानों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए।

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हिन्दू शादी केरल की एक मस्जिद में हुई संपन्न और बनी मिसाल

एक तरफ बिहार में 19 जनवरी को बिहार के सीएम नीतीश कुमार के जल-जीवन-हरियाली मिशन को वैश्विक आंदोलन बनाने हेतु 18000 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर मिसाल कायम की जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसी दिन उसी समय (11:30 से 12 बजे के बीच) केरल की एक मस्जिद में हिन्दू शादी संपन्न हुई और बनी मिसाल। मस्जिद में अजान की जगह गूंज रही थी हिन्दू लड़की की शादी की शहनाई।

बता दें कि चेरुवल्ली मुस्लिम जमात मस्जिद परिसर में शरतशशि और अंजू की हिन्दू रीति-रिवाज से संपन्न हुई शादी का जिम्मा उठाया था मुस्लिम जमात समिति ने। समिति के सचिव नजीमुद्दीन ने मीडिया को यह जानकारी दी-

“22 वर्षीय दुल्हन अंजू के पिता अशोकन का एक वर्ष पूर्व निधन हो गया था… परिवार इतना सक्षम नहीं था कि वह शादी का खर्च उठा सकता। समिति ने 10 तोला सोना तथा दो लाख रुपये के उपहार देने हेतु प्रस्ताव पारित किया था और एक हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था भी की थी।”

चलते-चलते यह भी बता दें कि शरत-अंजू की शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर सर्वाधिक वायरल हुआ। शादी के कार्ड में जमात समिति ने यह अंकित करवा दिया था कि वह परिवार के अनुरोध पर मस्जिद पर हिन्दू शादी का आयोजन कर रहा है तथा इस अवसर पर सभी समुदाय के लोगों को विवाहोत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया गया था। धार्मिक भाईचारे की अद्वितीय मिसाल।

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पहले था 15 साल बुरा हाल, हमारा नारा 15 साल बेमिसाल: आरसीपी

23 जनवरी 2020 को राजगीर कन्वेंशन सेन्टर में जदयू के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शानदार समापन हुआ। शिविर के दूसरे दिन जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह के साथ-साथ सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार, पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद मंगनीलाल मंडल, विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, ललन सर्राफ, प्रो. रणवीर नंदन, प्रो. युनूस हकीम, परमहंस कुमार, प्रगति मेहता, रामगुलाम राम, विद्यानंद विकल तथा कन्हैया सिंह प्रशिक्षक के रूप में शामिल हुए। जदयू प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील कुमार की अध्यक्षता में चल रहे इस शिविर में राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, चंदन कुमार सिंह, डॉ. सुहेली मेहता, कामाख्या नारायण सिंह, विपिन कुमार यादव, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, नेत्री डॉ. रंजू गीता, डॉ. भारती मेहता, अंजुम आरा, श्वेता विश्वास समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
समापन सत्र में शिविर में शामिल हुए पार्टी के 423 मास्टर ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर के दौरान विभिन्न विषयों पर अर्जित अनुभव को वे बिहार के सभी 243 विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में जो सामाजिक क्रांति हुई है, उसे नीचे तक पहुँचाना है। आरसीपी सिंह ने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार ने समाज के सभी उपेक्षित तबकों को मुख्य धारा में लाने का काम किया है।
आरसीपी सिंह ने कहा कि आज बिहार देश और दुनिया के सामने इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि कैसे कोई नेतृत्वकर्ता अपने विजन और दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत इतने बड़े प्रदेश का कायाकल्प कर सकता है। उन्होंने कहा कि पहले था 15 साल बुरा हाल और हमारा नारा है 15 साल बेमिसाल। आगे उन्होंने पूरे विश्वास से कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए 2020 का चुनाव अब तक के सबसे बड़े फासले से जीतेगा।
वरिष्ठ नेता मंगनीलाल मंडल ने अतिपिछड़ा सशक्तिकरण विषय पर बोलते हुए कहा कि नीतीश कुमार से पहले के नेताओं ने केवल सामाजिक न्याय का ढोल पीटा। वास्तव में अतिपिछड़ा समाज के लिए किसी ने किया तो वे नीतीश कुमार हैं। अतिपिछड़ा समाज को आरक्षण देकर उन्होंने उन्हें बिहार के सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का हिस्सा बनाया। वास्तव में अतिपिछड़ों के एकमात्र नेता नीतीश कुमार हैं।
सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि बिहार में कानून का राज स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। 2005 से पहले 118 नरंसहारों वाले बिहार में सुशासन कायम करना और वो भी विभिन्न सामाजिक तबकों में तनाव पैदा किए बिना, यह केवल नीतीश कुमार ही कर सकते थे। नीतीश कुमार ने अपने शासन से बिहार में न्याय के साथ विकास को सच्चे अर्थों में परिभाषित करके दिखाया।

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बिहार में बनी विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी मानव-श्रृंखला

बिहार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। यह तीसरी बार है जब बिहार में मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया। पिछली बार की तरह इस बार भी बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। जल-जीवन-हरियाली और नशामुक्ति के समर्थन एवं बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में इस बार 5 करोड़ 16 लाख 71 हजार 389 बिहारवासियों ने 18,034 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला बनाई। इस श्रृंखला की भव्यता और विशालता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिहार की मानव-श्रृंखला 1155 किलोमीटर के विश्व रिकॉर्ड से 15 गुना बड़ी है। इस तरह बिहार ने अपना ही रिकॉर्ड और बेहतर करते हुए विश्व रिकॉर्ड को तीसरी बार तोड़ा।
बता दें कि इस ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला का शुभारंभ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान से गुब्बारा उड़ाकर किया। मानव-श्रृंखला के लिए हुए इस मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद सहित कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद एवं आला अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जलपुरुष एवं मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित श्री राजेन्द्र सिंह एवं यूएनआईपी के इंडिया कंट्री हेड अतुल बगई गांधी मैदान में विशेष तौर पर मौजूद रहे।
मानव-श्रृंखला को लेकर पूरे बिहार में उत्सव-सा माहौल रहा। हालांकि इसके लिए दिन के 11.30 से 12.00 बजे का समय निर्धारित था लेकिन उत्साह का आलम यह था कि लोग 10 बजे से ही कतार में लगने के लिए घरों से निकलने लगे। यहां तक कि बिहार के विभिन्न जेलो के 43445 कैदी भी जेलकर्मियों के साथ इस श्रृंखला में शामिल हुए। मानव-श्रृंखला की फोटोग्राफी के लिए 07 हैलीकॉप्टर और 100 से अधिक ड्रोन लगाए गए थे। इस श्रृंखला पर देश और दुनिया की नजरें टिकी थीं। इसके साथ ही दो प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक – इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – की टीमें भी इसे परखने के लिए बिहार में जमी थीं।
मानव-श्रृंखला के इस विराट आयोजन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को उनके अभूतपूर्व समर्थन के लिए “हृदय से धन्यवाद” देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन एवं अन्य सामाजिक सुधार के अभियानों के प्रति जागरुकता फैलाने में यह मानव-श्रृंखला मील का पत्थर साबित होगी। बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक मानव-श्रृंखला बनाकर बिहार ने पूरे विश्व को संदेश दिया है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि इस अभूतपूर्व मानव-श्रृंखला का आयोजन कर बिहारवासियों ने राज्य को नया गौरव दिया है।

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri along with senior citizens of Madhepura taking part in Jal-Jeevan-Hariyali Manav-Shrinkhala at Bhupendra Chowk, Madhepura.

वहीं मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने मुख्यमंत्री को उनके जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दौरान शुभकामना व्यक्त करते हुए यही कहा था कि आपका यह कार्यक्रम  एक दिन “वैश्विक क्रांति” का मार्ग प्रशस्त करेगा….. जैसा कि बिहार वासियों की  बढ़ती हुई सहभागिता से स्पष्ट नजर आने लगा है।‘मधेपुरा अबतक’ भी इस मौके पर बिहारवासियों को हार्दिक बधाई और साधुवाद देता है।

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पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन की मिट्टी सदा महका करेगी

बेंगलुरु का एक शख्स है उमेश गोपीनाथ जाधव। उमेश जाधव एक संगीत शिक्षक है। बच्चों को संगीत सिखाने वाले गोपीनाथ जाधव अब पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप में शहीदों के आंगन से मिट्टी ला-लाकर भारत का मानचित्र बनाएंगे। सभी शहीदों के परिवार वालों से मिलेंगे भी।

बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सभी जवानों के घर-आंगन की मिट्टी वहीं अपनी खुशबू बिखेरेगी जहां विगत 14 फरवरी 2019 को उनकी शहादत हुई थी। शहीदों के आंगन की मिट्टी इकट्ठा करने में लगे गोपीनाथ जाधव का 9 अप्रैल 2019 से ही सफर शुरू हो चुका है। वे 29 राज्यों सहित सात केंद्र शासित प्रदेशों में भी जाएंगे और देश की मिट्टी की अहमियत दुनिया के लोगों तक पहुंचाएंगे।

यह भी बता दें कि गोपीनाथ जाधव बेंगलुरु से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र होते हुए भोपाल से आगे निकलते रहे और चंद रोज कबल गोपीनाथ ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के गाँव हरपुर, टोला- बेलडीहा शहीद लाल पंकज त्रिपाठी के आंगन की मिट्टी एकत्र की। अब तक 23 राज्यों की 27 शहीदों के आंगन की मिट्टी एकत्र कर चुके हैं गोपीनाथ। शेष 13 शहीदों के आंगन की मिट्टी लाकर वह संगीत शिक्षक उमेश गोपीनाथ जाधव भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक “मानचित्र” बनाकर पुलवामा के सीआरपीएफ कैंप को शहीदों की शहादत भरे सुगंध से भर देगा।

Pulwama Martyrs.
Pulwama Martyrs.

चलते-चलते बता दें कि पुलवामा हमले के बाद वहां सीआरपीएफ कैंप में जाकर उमेश ने कसम खाई थी कि इन चालीसो शहीदों के आंगन की मिट्टी लाने और उनके परिजनों से मिलने उनके घर पर जाएंगे….. पुलवामा में उनकी याद में स्मारक बनाएंगे। यह भी कि लगभग 50 हजार  किलोमीटर की यात्रा पूरी करने हेतु गोपीनाथ जाधव ने अलग-अलग गाड़ियों के पुर्जों को मिलाकर अपनी एक गाड़ी तैयार की और उस गाड़ी पर तिरंगा, सेना की वर्दी तथा देशभक्ति के मैसेज अंकित कराए।

पुनश्च उन्हीं दिनों अति संवेदनशील समाजसेवी- साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर यह निवेदन किया था कि उन चालीसों पुलवामा शहीदों के परिजनों के बैंक अकाउंट को पब्लिक किया जाए ताकि देश के संवेदनशील करोड़ों लोग एक-एक रुपए देंगे तो उन्हें बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़े- के जवाब में गृह मंत्री ने यही लिखा- “आपकी भावना का कद्र करते हुए बैठक में इस पर गहन चिंतन-मंथन किया गया। बैंक अकाउंट को पब्लिक करने के खतरे को ध्यान में रखते हुए समिति आपको आश्वस्त करती है कि शहीदों के परिजनों को सरकार इतनी राशि दी है कि उन्हें अब हाथ फैलाने की नौबत नहीं आएगी।”

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16,351 किलोमीटर लंबी होगी मानव-श्रृंखला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ सभाकक्ष में जल-जीवन-हरियाली अभियान, शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में तथा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ 19 जनवरी 2020 को पूर्वाह्न 11.30 बजे से मध्याह्न 12 बजे तक बनने वाली मानव-श्रृंखला के निर्माण की तैयारियों की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों में प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक भी जुड़े हुए थे।
इस मौके पर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने मानव-श्रृंखला की तैयारियों के संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। 19 जनवरी को कुल 16,351 किलोमीटर की अनुमानित लंबाई की मानव-श्रृंखला बनेगी, जिसमें 5,052 किलोमीटर मुख्य मार्ग की लंबाई होगी और 11,299 किलोमीटर उपमार्ग की लंबाई होगी। मानव-श्रृंखला में अनुमानित प्रतिभागियों की संख्या लगभग दो हजार व्यक्ति प्रति किलोमीटर की दर से 3 करोड़ 27 लाख संख्या होगी तथा प्रत्येक वार्ड में सौ लोगों के हिसाब से एक करोड़ लोगों की संख्या होगी यानि कुल 4 करोड़ 27 लाख लोगों के मानव-श्रृंखला में शामिल होने की संभावना है।
बता दें कि पटना में गांधी मैदान से मानव-श्रृंखला के प्रस्थान बिन्दु की तैयारी की गई है। गांधी मैदान से चारों दिशाओं में मानव-श्रृंखला का प्रस्थान होगा, जो एक-दूसरे से जुड़ते हुए राज्य के सभी जिले आपस में श्रृंखलाबद्ध होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांधी मैदान में ही मानव-श्रृंखला का हिस्सा बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि यह मानव-श्रृंखला लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता को प्रदर्शित करेगी। जलवायु में हो रहे परिवर्तन के प्रति लोग अपनी सजगता दिखाने के लिए एकजुट होकर मानव-श्रृंखला बना रहे हैं। गरीब राज्य और इतनी घनी आबादी होने के बावजूद यहां मानव-श्रृंखला बनाना बड़ी बात है। यह मानव-श्रृंखला पर्यावरण के लिहाज से बहुत बड़ा रिकॉर्ड साबित होगा।
बैठक में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय सहित तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

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मानवता को जीवित रखने के लिए नीतीश के जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियान से संपूर्ण विश्व को जोड़ना आवश्यक- डॉ.मधेपुरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस “जल-जीवन-हरियाली” अभियान को लेकर 19 जनवरी 2020 को आयोजित होने वाली ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की सफलता के लिए तैयारी बैठकें जोर पकड़ती जा रही हैं। पंचायत से लेकर प्रखंड और जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक लंबी मानव श्रृंखला हेतु पूर्वाभ्यास की तैयारियां चतुर्दिक देखी जा रही है। कोसी के तीनों जिलों- मधेपुरा… सहरसा… सुपौल… के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने पांचवी कक्षा से ऊपर की छात्र-छात्राओं से लेकर शिक्षक-शिक्षिकाओं, कलाजत्था, साक्षरता कर्मियों एवं सेविकाओं- सहायिकाओं सहित सभी कोटि के पंचायत प्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को ‘जल-जीवन-हरियाली’ को एक मिशन के रूप में लेने का आह्वान किया है। मानव श्रृंखला का उद्देश्य लोगों को ‘जल-जीवन-हरियाली’ सरीखे अभियान के प्रति जागरूक करना है।

बता दें कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा स्कूली बच्चों एवं शिक्षक व शिक्षिकाओं के बीच में जा-जाकर यह कहते सुना जा रहा है कि मानव जाति को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के इस ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान से समाज को जोड़ना है, संपूर्ण विश्व को जोड़ना है। डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने स्कूली बच्चों एवं बुजुर्गों से कहा कि आगामी 19 जनवरी को 11:30 बजे से 12:00 बजे तक मानव श्रृंखला के लिए समय का निर्धारण किया गया है। डॉ.मधेपुरी ने ग्रामीण लोगों से अपील की कि मानव श्रृंखला हेतु निर्धारित किए गए मार्ग पर समय से पहुंचने हेतु घर से एक घंटा पूर्व ही प्रस्थान करें।

चलते-चलते यह भी बता दें कि स्कूलों में जाकर डॉ.मधेपुरी बच्चों के बीच यही कहते हुए सुने जाते रहे कि जल है तो जीवन है। और जीवन के चारों और हरियाली ही हरियाली होगी तो चतुर्दिक खुशहाली होगी….. यानि खुशहाली बरकरार रखने के लिए जल को बचाना है और हरियाली को निरंतर बढ़ाते रहना है।

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2020 की उम्मीदें : खुद से चलेंगी कारें

जानिए कि 5 साल पूर्व टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन ने कहा था कि टोटल एक्सेस ब्रांड एक ऐसी कार पेश करेगी जो बिना ड्राइवर के खुद ही चलेगी… जो अब सच होने जा रहा है। सच में, वर्ष 2020 में कई प्रकार की तकनीकी बदलाव धरती पर लोगों के जीवन को आसान बना देगा। सड़कों पर जो खुद से चलने वाली कार नजर आएंगी वहीं आम लोगों को 5G तकनीक से इंटरनेट की तेज गति मिलेगी।

बता दें कि जहाँ खुद से चलने वाली कार की कीमत कितनी होगी उसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है वहीं टेस्ला भी वर्ष 2020 में दुनिया के कई चुनिंदा शहरों में स्वचालित रोबोट टैक्सी लॉन्च करेगी। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का कहना है कि 1 वर्ष बाद सड़कों पर 10 लाख से ज्यादा रोबोट टैक्सियों दिखाई देंगी। जून 2020 तक टेस्ला का ऑटोनॉमस सिस्टम इतना विकसित हो जाएगा कि ड्राइवरों को सड़क पर माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

चलते -चलते यह भी बता दें कि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में 5G नेटवर्क का दायरा बहुत बढ़ेगा। इसमें 3 घंटे की एचडी फिल्म कुछ सेकंड में डाउनलोड हो सकेगी। एक ओर जहाँ भारतीय मोबाइल ऑपरेटर 5G को अपनाने की तैयारी में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर प्रमुख मोबाइल कंपनियां 5G हैंडसेट लॉन्च करने में जुटी है।

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शादी, बच्चे या फिर रिटायरमेंट के बाद भी महिलाओं में यदि जुनून हो तो अवसर मौजूद होते हैं

जरा सोचो भारत की बेटियों ! महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके प्रति पूर्वाग्रस्त होकर उन्हें कमतर आंकना है। अगर आपमें जुनून हो तो कोई भी आपको अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण है- आईसीसी मैच के रेफरी-पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर जीएस लक्ष्मी।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में जन्मी जीएस लक्ष्मी (गांडिकोटा सर्व लक्ष्मी) लाइमलाइट में तब आई जब वह आईसीसी की पुरुष वनडे मैच की पहली महिला रैफरी बनी। यूँ तो आंध्र महिला, बिहार महिला….. रेल महिला समेत कई टूर्नामेंट खेली है। वह तेज गेंदबाज और बल्लेबाज के रूप में खेलती रही है। वर्ष 1999 में भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के लिए चयनित भी हुई थी लक्ष्मी, परंतु देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का लक्ष्मी का ख्वाब पूरा नहीं हो सका था।

यह भी जानिए कि 2004 में अपनी 12 वर्ष की बेटी प्रणाती श्रावणी की परवरिश करते हुए और अपनी फिटनेस के साथ खेलते हुए क्रिकेट से रिटायर होने के बाद लक्ष्मी ने क्रिकेट में कोचिंग देना शुरू कर दिया। इस दौरान 4 साल बाद यानी 2008 में बीसीसीआई ने घरेलू महिला क्रिकेट में महिला रेफरी को मैच में उतारना शुरू किया तो लक्ष्मी बतौर रेफरी शामिल होने लगी। 12 वर्षों से रैफरी की भूमिका निभा रही 51 वर्षीय लक्ष्मी के लिए आगे की राह तब खुली जब बीसीसीआई ने महिलाओं को क्रिकेट अधिकारी के रूप में जोड़ने के लिए संपूर्ण भारत से मात्र 5 महिलाओं को चुना जिसमें जीएस लक्ष्मी पहली भारतीय महिला थी। कुछ समय पूर्व आईसीसी मैच रेफरी के अंतरराष्ट्रीय पैनल में शामिल होने पर लक्ष्मी चर्चा में आई। वही लक्ष्मी शारजाह के अबूधाबी के जायद स्टेडियम में हांगकांग और आयरलैंड के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में रेफरी की भूमिका निभाई। जिसे देश के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल पाने का अफसोस अब तक सलाता रहा था। लक्ष्मी कहती है कि क्रिकेट की बदौलत ही उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिल पाया था। वह भारत की बेटियों को यही संदेश देना चाहती है- “दुनिया में कोशिश का कोई विकल्प नहीं। दो बच्चे की मां मैरी कॉम आज एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लेती है और ओलंपिक में जीतने का हौसला रखती है। जुनून हो तो महिलाएं कुछ भी कर सकती है चांद पर घर बसा सकती है। पर्वतारोही संतोष यादव की तरह एवरेस्ट पर तिरंगा लहरा सकती है।”

 

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