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पिता ने दी समाज सेवा की सीख

शहर के जाने-माने समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बताया कि अपने पिता स्मृतिशेष नत्थन प्रसाद मंडल के दिखाये मार्ग पर चलकर ही इस मुकाम तक पहुंचा हूं। पिताश्री मुझे हमेशा यही सिखाते थे कि कर्म ही मनुष्य को ऊंचाई प्रदान कराता है। सकारात्मक सोच एवं उच्च विचारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने को कहते रहे थे। वे यह भी कहा करते कि जीवन के हर मोड़ पर मुश्किलें आती हैं, परंतु उन मुश्किलों का समाधान और निदान खुश रहकर तलाशना चाहिए। उनका कहना था कि हर समस्या का समाधान होता है। उन्हीं के बताएं मार्ग पर चलकर मैंने एक सफल शिक्षक के साथ-साथ बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विकास पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक व कुलसचिव आदि पदों को प्राप्त किया है। यहां तक कि महामहिम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का करीबी भी बन गया हूं। भले वे आज मेरे साथ नहीं हैं, परंतु उनके दिखाएं मार्ग पर चलकर आज भी मैं लोगों की सेवा में लगा रहता हूं। मैं अपने पिताश्री एवं अन्य पितरों के प्रति जल तर्पण की जगह निरंतर मन तर्पण कर रहा हूं।

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डॉ.मधेपुरी ने सांसद पप्पू यादव के पिता को दी श्रद्धांजलि

मधेपुरा के पूर्व सांसद व पूर्णिया लोकसभा के वर्तमान लोकप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के पिता एवं सुपौल के पूर्व सांसद व छत्तीसगढ़ से वर्तमान में राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन के समाज सेवी ससुर 84 वर्षीय चंद्र नारायण यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि वर्ष 1975 में बीएन मंडल वाणिज्य महाविद्यालय निर्माण काल में उनके सहयोग तथा बीएन मंडल प्रतिमा अनावरण एवं विश्वविद्यालय निर्माण में सिंहेश्वर विधायक के रूप में पप्पू यादव के सहयोग को वे सदा याद करते रहेंगे। डॉ.मधेपुरी ने इस परिवार की समाज सेवा को याद करते हुए उनके पिताश्री के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की और यही कहा-

पीकर कौन आया है यहां आवेहयात

बनी है ये दुनिया एक रोज जाने के लिए।

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हिंदी दिवस पर साहित्यकार मणि भूषण और मयंक होंगे कौशिकी द्वारा सम्मानित

कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मेलन संस्थान कोसी क्षेत्र में आजादी के बाद से ही साहित्यिक रोशनी बिखेरती आ रही है। संस्थापक अध्यक्ष युगल शास्त्री प्रेम की एक खंड काव्य “साधना” प्रयाग विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाती थी। बाद के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की पुस्तक “अंग लिपि का इतिहास” तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर में पढ़ाई जाती है। संस्थान के वर्तमान सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” को झारखंड सरकार द्वारा छठे वर्ग में ‘प्रेरणा के बीच’ नाम से पढ़ाई जाती है। कोसी के उसी संस्थान कौशिकी द्वारा 14 सितंबर यानी हिंदी दिवस- 2024 को स्थानीय दो प्रखर साहित्यकारों प्रो.मणि भूषण वर्मा जिनकी चार पुस्तकें- सृष्टि का श्रृंगार, सुबह की प्रतीक्षा, धुएं के देश में और पीड़ा से भरी प्रार्थना जैसी धारदार रचनाएं क्रमशः महाकाव्य, खंडकाव्य, मुक्तक और जीत के रूप में शुमार की जाती है। वहीं सेवानिवृत प्रधानाध्यापक सियाराम यादव मयंक विशुद्ध गजलकार हैं, की गजल की चार पुस्तकें- मोहब्बत के चिराग, गुले-चमन आदि प्रकाशित हो चुकी हैं। वे अब तक विभिन्न राज्यों के 75 से अधिक मंचों पर सम्मानित हो चुके हैं। जिनमें डॉक्टर अंबेडकर फैलोशिप सम्मान, नई दिल्ली से लेकर हिंदी साहित्य के विश्वाकाश में चमकते सूर्य सम्मान- 2024 (मध्य प्रदेश) भी शामिल है।  इन दोनों साहित्यकारों का सारस्वत सम्मान अध्यक्ष प्रो.(डॉ.) केके मंडल पूर्व प्रतिकुलपति, टीएमबीयू द्वारा किया जाएगा। यह जानकारी सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने दी।

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देवेंद्र धाम टेंगराहा के निर्माता व पूर्व कृषि पदाधिकारी दिगंबर यादव नहीं रहे

मधेपुरा के शहीद चुल्हाय मार्ग पर अवस्थित टेंगराहा के दिगंबर प्रसाद यादव का निवास जहां कभी लालू प्रसाद व रावड़ी देवी सरीखे दो-दो मुख्यमंत्री रहकर चुनाव लड़ा करते वहीं आज सबेरे से मधेपुरा के गणमान्यों, लायंस क्लब के सदस्यों, समाजसेवियों व शिक्षाविदों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन को पहुंचती रही। कृषि पदाधिकारी रह चुके 85 वर्षीय दिगंबर बाबू ने लगभग 10 दिनों से लिवर इन्फेक्शन से संघर्ष करते हुए सहरसा के एक प्राइवेट क्लीनिक में दिनांक 10 सितंबर के तड़के 3:30 बजे एक मात्र पुत्र रौशन, पुत्रवधू प्रीति एवं पुत्रियों-परिजनों के बीच अंतिम सांस ली।

समाजसेवी- साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.अरुण कुमार, डॉ.आलोक कुमार, मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार, शिवनंदन प्रसाद मंडल विधि महाविद्यालय के प्राचार्य सत्यजीत यादव, प्रोफेसर प्रज्ञा प्रसाद, समाजसेविका विनीता भारती, डॉ.अमित आनंद, पूर्व मुखिया अरविंद कुमार, इंजीनियर सत्येंद्र कुमार, डीएस अकैडमी के निदेशक विमल किशोर गौतम उर्फ ललटू जी, दिवाकर कुमार, चंदन कुमार, मनोज कुमार, शिवनाथ यादव, लाॅयन इंद्रनील घोष, विकास सर्राफ, राजू ,राहुल आदि ढेर सारे लोगों ने उनके पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन किया और माल्यार्पण व पुष्पांजलि की। आज ही दिन के लगभग 3:00 बजे टेंगराहा निवासियों की भीड़ के बीच देवेंद्र धाम के समीप उनके पुत्र रोशन कुमार ने मुखाग्नि दी और वे पंच तत्व में विलीन हो गये।

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रासबिहारी मधेपुरा के अस्तित्व बोध के लिए बेहद जरूरी- डॉ.मधेपुरी

स्थानीय एवं ऐतिहासिक रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में समाज सुधारक व पराधीन भारत में स्वाधीन सोच रखने वाले क्रांतिवीर रासबिहारी लाल मंडल की 107वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सर्वप्रथम उनके पौत्र प्रो.प्रभाष चंद्र यादव, प्रपौत्र डॉ.ऐके मंडल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ۔भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी एवं अन्य अतिथियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की। प्रधानाध्यापक संजीव कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में कार्यक्रम का श्री गणेश अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

मुख्य वक्ता के रूप में समाजसेवी-साहित्यकार एवं “रासबिहारी लाल मंडल: पराधीन भारत में स्वाधीन सोच” पुस्तक के लेखक प्रो۔(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि रासबिहारी लाल मंडल वह नाम है जो मधेपुरा के संपूर्ण परिचय के लिए आवश्यक ही नहीं बल्कि मधेपुरा के अस्तित्व बोध के लिए बेहद जरूरी भी है। वे बने-बनाये  पदचिन्हों पर कभी नहीं चले बल्कि स्वयं के द्वारा पदचिन्हों को तैयार कर चलते रहे। डॉ۔मधेपुरी ने विस्तार से उनकी निर्भीकता, समाज सुधारवादी प्रवृत्ति और अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने की क्षमता की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसी कारण उनके परम मित्र दरभंगा के महाराजा लक्ष्मीश्वर प्रसाद सिंह उन्हें “तिरहुत का शेर” कहकर पुकारा करते थे।

कमलेश्वरी विंध्येश्वरी महिला महाविद्यालय के सचिव प्रो۔ प्रभाष चंद्र यादव, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ۔ऐके मंडल, विज्ञान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव आदि ने कहा कि वे जीवन भर गरीबों, शोषितों और वंचितों की राह सजाते रहे। अंग्रेजों के सामने कभी नहीं झुके। वे हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत के अलावे बांग्ला, उर्दू, फारसी और फ्रेंच जैसी भाषाओं के भी ज्ञाता थे। विद्यालय के शिक्षक अमित कुमार सहित अन्य शिक्षकों एवं छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पढ़ने-लिखने में व्यस्त रहते थे। उनके मुरहो गांव में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और बंगला के चार-अखबार आते थे। वे “भारत माता का संदेश” पुस्तक की भी रचना की थी।

स्कूल के छात्रों के बीच पेंटिंग कंपिटीशन एवं क्विज कंपिटीशन कराया गया जिसमें रासबिहारी बाबू का चित्र ज्यादातर लड़को ने बनाया। उनमें विवेक कुमार प्रथम, आयुष कुमार द्वितीय एवं ओम कुमार तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन्हें मेडल और ज्ञानवर्धक पुस्तकों द्वारा पुरस्कृत किया गया। क्विज कंपिटीशन में 12 लड़कों ने भाग लिया जिनमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय ग्रुप को मेडल व कलम देकर पुरस्कृत किया गया।

अंत में शिक्षिका माधुरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और मंच संचालन स्काउट एंड गाइड आयुक्त जयकृष्ण प्रसाद यादव ने किया।

 

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बीपी मंडल के जीवन की प्रमुख घटनाएं

बिंध्येश्वरी प्रसाद मंडल को दुनिया बीपी मंडल के नाम से जानती है। मुरहो के जमींदार और अंग्रेजों से निर्भीकता पूर्वक लड़ने वाले बाबू रास बिहारी लाल मंडल के तीन पुत्र रहे हैं- भुवनेश्वरी प्रसाद मंडल, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल और सबसे छोटे सामाजिक न्याय के पुरोधा बिंध्येश्वरी प्रसाद मंडल। पिछड़ा वर्ग आयोग- 2 के अध्यक्ष बने बीपी मंडल। दुनिया मंडल कमीशन के रूप में उन्हें सदा याद करती रहेगी। वे प्रतिभा संपन्न थे और उन्हें विरासत में निर्भीकता मिली थी। वे अंग्रेजी ऑनर्स के छात्र रहते हुए देश सेवा में कूद पड़े।

बीपी मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 है और जन्म स्थान कबीर की नगरी काशी, उत्तर प्रदेश है। उनकी शादी 1937 ईस्वी में सीता देवी के साथ हुई। उन्हें पांच पुत्र और दो पुत्रियाँ हुई। 1945 से 1951 तक मधेपुरा में ऑनरेरी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत रहे। वे तीन बार विधायक चुने गए- 1952-57, 1962-67 और 1972-75। वे एक बार 1968 में एमएलसी भी बने।

बीपी मंडल लोकसभा के सांसद भी तीन बार चुने गए- वर्ष 1967-68, 1968-71 और 1977-80। वे 1967-68 में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री बने। अल्पकाल के लिए ही सही वे 47 दिनों के लिए बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनकी प्रशासनिक क्षमता की गूंज आज भी सचिवालय के गलियारे में गूंजती हुई सुनाई देती है। वे एक वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक घड़ी की सुई की तरह बिना रुके कश्मीर से कन्याकुमारी तक और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक सभी धर्मों की 3743 जातियों को रेखांकित कर सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ों की सूची बनाई और उन्हें 27% आरक्षण देने की अनुशंसा की। उन्होंने 31-12-1980 को मंडल रिपोर्ट की प्रतियां तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को समर्पित किया। फरवरी 1981 के 23 तारीख को मधेपुरा के सोशल क्लब में बीपी मंडल का भव्य नागरिक अभिनंदन तत्कालीन नगर पालिका उपाध्यक्ष डॉ۔भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। बिहार स्टेट सिटिजन काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन रहते हुए उन्होंने 13 अप्रैल 1982 को पटना में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव मुरहो में किया गया।

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रक्षाबंधन पर संकल्प लें- प्रत्येक वृक्ष को स्नेह व सम्मान दें- डॉ۔मधेपुरी

रक्षाबंधन के पर्व पर राखी बांधने के बाद लोग अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते आ रहे हैं तथा बहनों के प्रति अपना स्नेह दर्शाने के लिए कुछ नायाब उपहार भी देते हैं। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि लोगों को अपनी बहनों के लिए स्नेह और सम्मान बनाए रखना चाहिए चाहे लोगों को कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो !

रक्षाबंधन के अवसर पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ۔भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने वृंदावन हॉस्पिटल की महिला चिकित्सक डॉ.रश्मि भारती, अक्षत कुमार, विकास कुमार, गजेंद्र यादव, संजय मुखिया, विवेक कुमार, पप्पू यादव, प्रकाश कुमार, बसंत कुमार आदि की मौजूदगी में अपने वृंदावन परिसर के वृक्षों को राखी बांधा और रक्षाबंधन पर्व के अत्याधुनिक महत्व से उन्हें रू-ब-रू कराते हुए कहा- यदि धरती को रहने योग्य बनाना है तो लोगों को वृक्षों में राखियां बांध-बांधकर बहनों की तरह उसकी रक्षा करने का वादा करना होगा। साथ ही वृक्षों के प्रति सदैव स्नेह और सम्मान कायम रखना होगा।

डॉ۔मधेपुरी ने इस अवसर पर मौजूद लोगों से कहा कि प्राचीन काल से तो विशेष रूप से दो ही वृक्षों- पीपल और बरगद की पूजा की जाती रही है, परंतु आज ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण को लेकर भिन्न-भिन्न अवसर पर किये गए पौधरोपण में प्रत्येक वृक्ष को स्नेह व सम्मान के साथ-साथ संरक्षण भी चाहिए अन्यथा धरती आने वाली पीढ़ियों के रहने योग्य नहीं रहेगी। वहीं डॉ۔रश्मि भारती ने वृक्षों के इस रक्षाबंधन की जमकर सराहना की। इस अवसर पर डॉक्टर रश्मि भारती ने मौजूद लोगों के बीच मिठाइयां बांटी।

Dr.BhupendraMadhepuri along with Dr.Rashmi Bharti, Akshat, Bikash and Gajen tying Rakhi to tree on the occasion of Ramsha Bandhan at VrindavanMadhepura.

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मेडिकल कॉलेज में एथिकल कमेटी के अध्यक्ष बने डॉ۔मधेपुरी

जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.दिनेश कुमार द्वारा एथिकल कमिटी के गठन हेतु आयोजित विभिन्न चिकित्सा विभागों के विभागाध्यक्षों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों व अधिवक्ताओं की बैठक में शिक्षाविद व प्रखर समाजसेवी-साहित्यकार तथा बीएन मंडल विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक, कुलानुशासक, कुलसचिव आदि पदों पर कार्यरत रह चुके फिजिक्स के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चयनित किया गया। इस समिति के अध्यक्ष डॉ۔मधेपुरी एवं सचिव के रूप में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ۔प्रकाश कुमार मिश्र सहित नौ सदस्य हैं। जिनमें दो महिला सदस्यों में एक हैं- स्त्री रोग एवं प्रसव विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ۔पूनम कुमारी और दूसरी समाजसेविका सह राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्या श्रीमती मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी। शेष पांच सदस्यों में एक हैं- पीएसएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.काशिफ शाहनवाज, दूसरे हैं- सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ۔गणेश कुमार, तीसरे हैं- केपी कॉलेज मुरलीगंज के पूर्व प्राचार्य प्रो.(डॉ.)राजीव रंजन, चौथे हैं- अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा एवं अंतिम हैं- समाजसेवी राजकुमार रंजन।

ज्ञातव्य हो कि जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज मधेपुरा में नवगठित एथिकल कमिटी को सरकार के विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग बिहार पटना द्वारा स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है।

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प्रथम प्रयास में ही मधैली के आर्यन ने किया आईआईटी कम्पीट

जिला मधेपुरा और राज्य बिहार के लिए गर्व एवं सर्वाधिक प्रसन्नता की बात है कि ग्राम- मधैली बाजार व प्रखंड- शंकरपुर के निवासी कुमार आर्यन ने आईआईटी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने गांव का नाम रौशन किया है और जिला को गौरवान्वित किया है। आर्यन ने आईआईटी एडवांस एग्जाम- 2024 में समस्त भारत में प्रथम प्रयास में ही 2666वाँ रैंक प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि कुमार आर्यन ने 2024 में ही 12th की परीक्षा में 95% मार्क्स लाकर सीबीएसई बोर्ड से उत्तीर्णता प्राप्त की है। कुमार आर्यन ने यह सफलता कठिन परिश्रम, स्वाध्याय एवं आत्मविश्वास के बल पर हासिल की है। प्रायः लोग यही सोचते हैं कि आईआईटी जैसी कठिन परीक्षा के लिए कोटा या दिल्ली जाकर ही तैयारी की जा सकती है। परंतु, आर्यन की नियमित पढ़ाई व कठिन परिश्रम ने उसे गलत साबित कर दिया है। वह अपने माता-पिता के साथ पटना में रहकर मेहनत करते हुए निकटतम कोचिंग संस्थान से गाइडेंस लेकर ही यह रैंक प्राप्त किया है।

यह भी प्रेरित करने वाली बात है कि आर्यन के पिता दौलत कुमार भी आईआईटी से उत्तीर्णता प्राप्त कर वर्तमान में इंडियन रिवेन्यू सर्विस (IRS) में उच्चाधिकारी के रूप में चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। आर्यन की मां कुमारी श्वेता इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय हजारीबाग से 10th पास की जिन्होंने बिहार में 9वां रैंक प्राप्त किया था। अंत में पूछे जाने पर आर्यन ने बताया कि माता-पिता व गुरुओं के अलावे अपनी सफलता का श्रेय तीन प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में प्रथम दादाश्री उपेंद्र नारायण यादव, दूसरे नानाश्री उपेंद्र कुमार जो मधेपुरा PWD में इंजीनियर थे और तीसरे भौतिकी के बेहतरीन प्रोफेसर एवं मधेपुरा के साहित्यकार डॉ۔भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को देता हूं।

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डॉ۔मधेपुरी द्वारा ऑल इंडिया नीट टॉपर सिंहेश्वर के सक्षम को किया जाएगा सम्मानित

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ۔भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के द्वारा वर्षों से चलाए जा रहे कार्यक्रम- “जो करेंगे मधेपुरा जिला को गौरवान्वित, उन्हें करेंगे डॉ۔मधेपुरी सम्मानित” के तहत सिंहेश्वर निवासी सक्षम अग्रवाल, जिन्होंने प्रथम प्रयास में ही नीट परीक्षा- 2024 में ऑल इंडिया स्तर पर प्रथम रैंक लाया है, को सम्मानित किया जाएगा। जानिए कि सक्षम ने 100% अंक लाकर जिले का नाम भारत भर में रोशन किया है। उसी प्रतिभा पुंज सिंहेश्वर के सक्षम अग्रवाल को भारतरत्न डॉ۔एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि आगामी 27 जुलाई को टीपी कॉलेज मधेपुरा के सभागार में सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। डाॅ.मधेपुरी ने सक्षम की ममतामयी मां माया अग्रवाल व चिकित्सक पिता डॉ۔चेतन अग्रवाल सहित उनके समस्त गुरुओं को भी ससम्मान हृदय से बधाई दी है।

साथ ही डॉ۔मधेपुरी ने मधेपुरा से दोबारा सांसद बने दिनेश चंद्र यादव सहित विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे लगा-लगाकर धरती के भविष्य को सुरक्षित रखने वालों एवं देश को मजबूत विपक्ष देने वाले कुशल मतदाताओं को भी ढेर सारी बधाइयां दी है।

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