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कोरोना के कहर के कारण माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई भी बंद की नेपाल ने

कोरोना वायरस के कोहराम से चिंता की लहर जब यूरोपीय देशों में उठी तो आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। रोम के चर्च में जहां प्रार्थना पर रोक लगा दी गई वहीं कावा में सामूहिक नमाज अता करने पर प्रतिबंध…. या फिर काशी के मंदिरों में ताले ही लगा दिए गए। सभी प्रकार के वाहनों से लेकर सरकारी व निजी विमानों के परिचालन पर आज तक रोक लगी हुई है।

क्यों न लगे रोक… जबकि लाखों-लाख लोग कोरोना की चपेट में दम तोड़ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने तो इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। सारा विश्व कोरोना के खिलाफ युद्ध कर रहा है। सारे विश्व की गति ठहर सी गई है। स्कूल-कालेज, कोर्ट-कचहरी और बाजार सबके सब बंद हैं। सभी देश घर के अंदर सिमट गया है।

यह भी जानिए कि कोरोना का असर लोगों तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि उसके  बंद के घेरे में गिरिराज हिमालय के माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई भी आ गई है। नेपाल ने भी कोरोना संक्रमण के डर से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई बंद कर दी है। नेपाल सरकार के पर्यटन मंत्री ने घोषणा कर दी है कि माउंट एवरेस्ट सहित पर्वतराज हिमालय की अन्य चोटियों की चढ़ाई भी वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दी गई है। मतलब यही कि इस घोषणा के अनुसार मार्च से मई तक फिलहाल किसी प्रकार का पर्वतारोहण नहीं होगा। इससे नेपाल सरकार के पर्यटन विभाग को लाखों-लाख  डॉलर आय का नुकसान होगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोरोना की चोट सहन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।

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पायें इंटर उत्तीर्ण अविवाहिता के लिए सीएम कन्या योजना के 10 हजार, दें सही जानकारी

नि:संदेह आज की तारीख में दुनिया पर है भारी… कोरोना की महामारी। भले ही भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या आज 40 हजार के पार और मौतों की संख्या 13 सौ के पार हो गई है, परंतु सृजन के कार्यों को तो समुचित सावधानियों के साथ हमें करते ही रहना है। सृजन का काम रुकने से यह संसार ही निष्प्राण होने लगेगा।

बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेटियों के हौसलों को नई उड़ान देने के लिए इंटरमीडिएट पास अविवाहित छात्राओं को प्रति छात्रा ₹10000 की राशि देने हेतु मुख्यमंत्री कल्याण उत्थान योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष 2019 में 3 लाख 62 हजार 613 छात्राओं को दस-दस हजार रुपये की राशि दी जानी थी जिसमें सही जानकारी देने पर कुल 3 लाख 31 हजार 530 छात्राओं के खाते में राशि चली गई और शेष 30 हजार 883 छात्राओं को उक्त राशि इसलिए नहीं दी जा सकी कि उनके द्वारा दी गई आवश्यक जानकारी या तो नहीं दी गई और यदि दी भी गई तो पूरी की पूरी सही-सही नहीं दी गई।

जानिए कि वैसी बेटियों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआईसी पोर्टल पर सही जानकारी देने हेतु शिक्षा विभाग को एक मौका और देने का निर्देश दिया है। ऐसी छात्राओं के माता-पिता व अभिभावक शीघ्राति शीघ्र एनआईसी पोर्टल पर अपनी बेटियों के बैंक खाता संख्या, बैंक शाखा का नाम, आईएफएससी कोड, आधार नंबर तथा अविवाहित होने की विधिवत जानकारी प्रेषित करें और मुख्यमंत्री कल्याण उत्थान योजना के तहत 10 हजार  की राशि प्राप्त करें तथा बेटियों के सपनों को पंख लगाकर ऊंची उड़ान का अवसर प्रदान करें।

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प्रवासियों के आने का पूरा खर्च वहन करेगी बिहार सरकार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार, 4 मई को एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जो भी प्रवासी बिहारी लौट कर आ रहे हैं, उनके आने का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले मजदूरों एवं अन्य लोगों को 21 दिनों के क्वारंटाइन के बाद बिहार सरकार किराया खर्च के अलावा और 500 रु. एवं न्यूनतम 1000 रु. देगी। वहीं, अपने संदेश में कोटा से आने वाले छात्र-छात्राओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें बिहार आने कि लिए रेल भाड़ा नहीं देना होगा। इसके लिए बिहार सरकार रेलवे को पैसा दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी बिहारी रेल से जिस किसी भी स्टेशन पर उतरेंगे, वहां से उन्हें उनके प्रखंड मुख्यालय स्थित क्वारंटाइन सेंटर पर राज्य सरकार भेजेगी। इन क्वारंटाइन सेंटर्स पर बाहर से आने वाले मजदूरों एवं अन्य लोगों को 21 दिनों के क्वारंटाइन के बाद किराया खर्च के अलावा और 500 रु. एवं न्यूतम 1000 रु. राज्य सरकार द्वारा दिए जाएंगे।
ध्यातव्य है कि प्रखंड क्वारंटाइन सेंटर्स में भोजन, आवासन, चिकित्सा से लेकर देख-रेख के सारे इंतजाम किए गए हैं। लोगों के स्नान, शौचालय, शुद्ध पेयजल आदि की पूरी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार आने वाले सभी प्रवासी मजदूर क्वारंटाइन सेंटर में 21 दिनों तक रहेंगे और जब वहां से 21 दिनों के बाद निकलेंगे तो वे जहां जिस राज्य में फंसे हुए थे, वहां से यहां तक आने में उनका जितना भी पैसा लगा हो, चाहे वो रेल का भाड़ा हो या अन्य प्रकार से उनका कोई पैसा लगा हो, वो पैसा सरकार देगी। यही नहीं, उस राशि के अलावे सरकार और 500 रु. देगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहर से आए हुए हर व्यक्ति को न्यूनतम 1000 रु. दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हमलोग जो भी काम करते हैं लोगों के हित में करते हैं और चाहते हैं कि ये काम हो। उन्होंने कहा, हमने सोचा था कि लोगों को लाभ मिलता तो वे अपने आप बताते लेकिन इधर काफी बयानबाजी हो रही है, इसको देखते हुए हमने सोचा कि इन सब बातों की जानकारी साझा करना आवश्यक है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के अधिकांश लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं, यही कारण है कि बिहार को वैसी परेशानी नहीं हो रही जैसी अन्यत्र है। इसके लिए बिहारवासियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पुन: सबलोगों से अपील करूंगा कि कोरोना वायरस से भयभीत होने की जरूरत नहीं, सजग रहने की जरूरत है। हमलोग जरूर उस पर कामयाबी हासिल करेंगे।

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शाकाहारी भोजन कोरोना के लिए ज्यादा सुरक्षित

मानव शरीर के लिए ऐसा कोई पौष्टिक तत्व नहीं जो शाकाहारी भोजन यानि वनस्पतियों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। शाकाहारी भोजन हमें कठिन से कठिन रोगों से भी बचाता है। दुनिया के महानतम लोग शाकाहारी रहे हैं।

बता दें कि शाकाहारियों में हृदय को रक्त भेजने वाली धमनियों से संबंधित बीमारियों की संभावना कम होती है। मांसाहारियों की अपेक्षा शाकाहारियों में हाई ब्लड प्रेशर की संभावना भी कम होती है। स्वास्थ्य रक्षा एवं रोग अवरोधक शक्ति का संचय ही शाकाहार का लाभ है। शाकाहारियों द्वारा रेसा युक्त फल और सब्जियों का अधिक सेवन करने से इम्यूनिटी भी बढ़ता है और साथ ही फेफड़ों व बड़ी आँत कैंसर भी कम होता है। शाकाहारियों में एस्ट्रोजन की मात्रा कम पाए जाने के कारण विश्व भर के लिए गए आंकड़े यही बताते हैं कि शाकाहारी भोजन करने वालों में कैंसर (खासकर स्तन कैंसर) एवं गुर्दे से संबंधित रोगों की संभावना कम होती है।

जानिए कि भोजन दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है जो शरीर को ऊर्जावान व फुर्तीला बनाए रखता है। जहां मांसाहार को पचाने में बहुत समय लगता है वहीं शाकाहारी भोजन सुपाच्य होता है। शाकाहारी भोजन शरीर के ऐम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। जो कोरोना से अंत तक लड़ता है। भारत में 31% जनसंख्या शाकाहारी है जो दुनिया में सबसे अधिक है। रिसर्च के अनुसार शाकाहार से 50 लाख  लोगों की मौत को टाला जा सकता है। तभी तो लोग मांसाहार से किनारा करने लगे हैं। विश्व भर में शाकाहार का डंका बजने लगा है और अब संसार ‘शाकाहार दिवस’ भी मनाने लगा है।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी कहते हैं कि डॉ.कलाम ताजिंदगी संपूर्ण शाकाहारी बने रहे… जीवन पर्यन्त डॉ.कलाम ने चाय-कॉफी के साथ-साथ मांस-मछली भी नहीं ग्रहण किया। विश्व की चंद हस्तियों को जाने जिन्होंने शाकाहार को स्वीकारा और वे हैं- महात्मा गांधी, हिटलर, निकोला टेस्ला, सीवी रमन, रविंद्र नाथ टैगोर, डॉ.कलाम, नरेंद्र मोदी, अमिताभ बच्चन… आदि !!

 

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लॉकडाउन-3: आप किस जोन में हैं ?

केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को तीसरे चरण के लॉकडाउन की घोषणा कर दी। अब देश में लॉकडाउन दो हफ्ते (17 मई तक) के लिए और बढ़ गया है। हालांकि गृह मंत्रालय ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बंटे जिलों के हिसाब से कुछ रियायतें दी हैं। कुछ सुविधाएं ऐसी हैं जो हर जोन में रहेंगी। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देशों का पालन करने को कहा है।
रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन के हिसाब से बिहार की बात करें तो यहां के 38 जिलो में से 05 रेड जोन में शामिल हैं। वहीं, 20 जिले ऑरेंज और 13 जिले ग्रीन जोन में हैं। आइये डालते हैं एक नज़र।
रेड जोन में शामिल 05 जिले हैं – मुंगेर, पटना, रोहतास, गया और बक्सर। ऑरेंज जोन में शामिल 20 जिले हैं – सिवान, नालंदा, कैमूर, बेगूसराय, भोजपुर, औरंगाबाद, गोपालगंज, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, भागलपुर, अरवल, सारण, नवादा, लखीसराय, बांका, पूर्णिया, वैशाली, दरभंगा, मधेपुरा और जहानाबाद। वहीं, ग्रीन जोन में रखे गए 13 जिले हैं – कटिहार, किशनगंज, शेखपुरा, अररिया, जमुई, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर, शिवहर और सीतामढ़ी।

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कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने से मधेपुरा जिले को फिलहाल राहत

जिले के बिहारीगंज की कोरोना पॉजिटिव महिला के साथ ऑटो से पटना आईजीआईएमएस गए पति, पुत्र, पुत्री एवं ऑटो ड्राइवर की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। मोहनपुर पंचायत की उस महिला के अत्यंत करीब रहने वाले चारो लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आने से सबको ऐसा लगने लगा है कि जिले में उस महिला से कोरोना संक्रमण का खतरा न्यूनतम हो सकता है। फिलहाल इस नेगेटिव रिपोर्ट के आने से मधेपुरा जिला वासियों ने राहत की सांस ली है।

बता दें कि जिले के डीएम नवदीप शुक्ला, एडीएम उपेन्द्र कुमार एवं जनसंपर्क पदाधिकारी रजनीश राय आदि द्वारा पॉजिटिव महिला के परिवार के 28 लोग, महिला के सिंहेश्वर में रहने वाली दो रिश्तेदार तथा उदाकिशुनगंज हॉस्पिटल में इलाज करने वाले तीन चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों का सैंपल लिया गया और उसकी जांच कराई गई। कुल 45 लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने की सूचना प्राप्त होने पर लोग जिला प्रशासन की मुस्तैदी पर साधुवाद तथा स्वास्थ्य कर्मियों को धन्यवाद देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

चलते-चलते यह भी कि डोर-टू-डोर सर्वे को लेकर प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। संदिग्ध लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर 3 पूर्व से कार्यरत, 3 क्वॉरेंटाइन सेंटर के अतिरिक्त एक अल्पसंख्यक बालिका छात्रावास (टीपी कॉलेज) को नया सेंटर बनाया गया है। इन सेंटरों में बाहर से आने वाले छात्रों-मजदूरों आदि सभी संदिग्धों को 14 दिनों तक रखने के बाद ही छोड़ा जाएगा। फिलहाल पूर्व के तीनों सेंटर में 152 कोरोना के संदिग्ध मरीज मौजूद हैं जिन्हें सरकार की ओर से सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

 

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डोर टू डोर कैंपेन में एईएस और जेई की भी जानकारी लें: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोरोना संक्रमण को लेकर चलाए जा रहे डोर टू डोर कैंपेन में चमकी बुखार (एईएस) और जेई के संबंध में भी जानकारी लें। आशा एवं आंगनबाड़ी कर्मी घर-घर जाकर लोगों को यह जरूर बताएं कि एईएस का लक्षण दिखने पर बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएं। मुजफ्फरपुर के पांच प्रखंड एईएस से अधिक प्रभावित रहे हैं वहां स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन में 200 ग्राम दूध पाउडर भी उपलब्ध कराएं। अस्पतालों में चिकित्सक चौबीस घंटे उपलब्ध रहें। वाहनों की गांव के हिसाब से टैगिंग की जाए तथा अस्पताल पहुंचने पर उनके तत्काल भुगतान की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अधिकारियों को जेई का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित कराने का आदेश भी दिया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मंगलवार, 28 अप्रैल को 1, अणे मार्ग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित जिलों के डीएम के साथ एईएस और जेई की रोकथाम को लेकर किए जा रहे कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि एसओपी बनाकर पूरी तैयारी की गई है। 30 अप्रैल तक एसकेएमसीएच में 65 बेड का एईएस वार्ड बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अतिरिक्त अलग से बन रहे पैडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट के 100 बेड में से 70 बेड इस माह के अंत तक पूरे हो जाएंगे।
समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय एवं मुख्य सचिव दीपक कुमार समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

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मधेपुरा में कोरोना की दस्तक ने डीएम-एसपी की नींद कर दी हराम

बिहार की नीतीश सरकार ने 17 मार्च 2020 (मंगलवार) को कोरोना को महामारी घोषित कर दी थी… तब से अब तक मधेपुरा जिले में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। जिले के सभी समुदायों के लोगों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग… से लेकर लाॅकडाउन के दरमियान घर में रहने जैसे सारे निर्देशों के पालन किए जाते रहे और सभी सुरक्षित भी रहे। परंतु 24 अप्रैल (शुक्रवार) को जिले के बिहारीगंज प्रखंड के मोहनपुर पंचायत के रहटा गांव की एक 46 वर्षीय महिला अचानक कोरोना पॉजिटिव हो गई जिसके साथ ही मधेपुरा जिला के डीएम नवदीप शुक्ला सहित एसपी संजय कुमार की पूरी टीम की चिंता बढ़ गई और नींद हराम हो गई।

बता दें कि रहटा के इस महिला को 19 अप्रैल को पेट में दर्द हुआ तो उसे बिहारीगंज पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) लाया गया तथा वहां से उदाकिशुनगंज रेफरल अस्पताल भेज दिया गया। जहां उदाकिशुनगंज से उस महिला को भागलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया वहीं डीएम मधेपुरा ने एडीएम उपेंद्र कुमार को एहतियात के तौर पर समस्त कार्यों की निगरानी का जिम्मा सौंप दिया।

जानिए कि कोरोना समर्पित हॉस्पिटल होने के बावजूद भागलपुर मेडिकल कॉलेज ने उस महिला का ना तो कोरोना टेस्ट का सैंपल लिया और ना एंबुलेंस उपलब्ध कराया जबकि कोरोना के कुछ प्रारंभिक लक्षण रहने के बावजूद उसे कैंसर रोगी मानकर पटना आईजीआईएमएस कैंसर संस्थान रेफर कर दिया गया। परंतु एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण महिला अपने परिजनों सहित बिहारीगंज अपने घर वापस आ गई जबकि महिला बीते कई माह से गॉलब्लैडर कैंसर से पीड़ित थी और कई डॉक्टरों से भी दिखाती रही थी। घर लौटने पर दर्जनों लोग महिला के संपर्क में आए भी।

यह भी जानिए कि गांव का ही एक ऑटो 22 अप्रैल को किराए पर लेखकर पटना गई। 23 अप्रैल को आईजीआईएमएस गई तो वहां सर्वप्रथम उसका कोरोना सैंपल लिया गया और 24 अप्रैल को उसकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई। अब सवाल यह उठता है कि संक्रमण के खतरे के घेरे में कौन-कौन लोग आते हैं उनकी सूची कैसे तैयार होगी ? फिलहाल रहटा गांव के 3 किलोमीटर के एरिया को कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया गया है। इस क्षेत्र में इस तरह की बैरिकेडिंग की गई है और पुलिसिंग भी कि ना कोई रहटा गांव के अंदर आ पाएगा और ना ही कोई बाहर जा पाएगा। आवश्यक सामग्रियों के लिए भी होम डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। एहतियात के तौर पर 7 किलोमीटर के एरिया को बफर जोन बनाया गया है जिसके अंदर डोर-टू-डोर परिवार के प्रत्येक सदस्यों की स्क्रीनिंग कार्य तेजी से कराने का निर्देश भी जारी किया गया है।

 

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कोरोना वायरस से भयभीत है दुनिया !

विगत तीन-चार महीनों से समस्त संसार कोरोना वायरस से भयभीत है। दुनिया के विकसित देशों- अमेरिका, इटली, स्पेन… जैसे देश इस कोरोना के कहर के सामने घुटने टेक दिए हैं। इन देशों में कोरोना वायरस के कोहराम के चलते अमूमन 15 हजार से 50 हजार लोगों ने मौत को गले लगा लिया है।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय से जगकर तथा 135 करोड़ देशवासियों का सहयोग प्राप्त कर कोरोना वायरस से सामना करने वाला विश्व का प्रथम राष्ट्र नायक बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है। इस गौरव को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के साथ-साथ कोरोना के समस्त वारियर्स को समर्पित किया है।

यह भी बता दें कि हमारे प्रधानमंत्री  अहर्निश देश और देशवासियों की चिंता में डूबे रहते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था से लेकर भारत में भी कोरोना के बैक गियर से उत्पन्न होने वाली खतरनाक स्थितियों व मुसीबतों से जूझते रहते हैं। इन्हीं कारणों से उनकी आंखों से नींद भी आजकल दूर होती जा रही है। भला क्यों नहीं, आजादी की जंग से अधिक कठिन है कोरोना से लड़ना और जीतना।

यह भी जानिए और मानिए कि कोरोना का कोई मजहब नहीं। यह तो चीन से निकला एक दानव है। इसे मजहबी चश्मे से कोई ना देखें तो यह दानव जल्द से जल्द हमारा पीछा छोड़ देगा। इस दानव को मिटाने में अपनी सारी ऊर्जा को लगाना है और कोरोना रूपी राक्षस से अपने संसार को बचाना है। आज हर जुबान से बस यही आवाज निकले- “कोरोना को हराओ और देश को बचाओ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि फिलहाल दुनिया में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है जबकि पूरी दुनिया में 30 लाख कोरोना संक्रमित हैं। वे जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं तथा उन्हें बचाने के लिए कोरोना वारियर्स के रूप में सरकारी तंत्र, सामाजिक संगठन और डॉक्टर्स व पुलिस प्रशासन के लोग लगे हैं।

जहां भारत में अब तक 26500 से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं… और 6000 से अधिक लोग ठीक हो कर घर भी लौट गए हैं… तथा 824 लोगों की मौत हो चुकी है… वहीं बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 238 है– जिसमें मधेपुरा (बिहारीगंज) की एकमात्र महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। इस पर मधेपुरा के संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने लोगों से निवेदन किया–

सभी धैर्य और संयम के साथ घर में रहें…. सुरक्षित रहें तथा अक्षय तृतीया एवं रमजान के इस पाक महीने में- “इंसानियत की होती रहे बात… कोरोना को देने के लिए मात… सारा देश रहे एक साथ !!!”

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शुरू हुआ रमजान का पाक महीना

रमजान का पाक महीना शनिवार, 25 अप्रैल से शुरू हो गया। इस्लाम को मानने वाले लोग इस महीने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से नौवां महीना रमजान का होता है। चांद दिखने के साथ ही रमजान का महीना शुरू हो जाता है और मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखना शुरू कर देते हैं। इस बार दुनिया के तमाम मुल्क कोरोना की त्रासदी झेल रहे हैं, इसलिए रमजान भी लॉकडाउन के साये में ही होगा और लोग घरों में रहकर ही इबादत करेंगे।
रमजान के महीने में सबसे ज्यादा महत्व रोजा रखने का होता है। रोजा अल्लाह की मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की इबादत करने का एक तरीका है। इसमें मन की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी है। रोजा रखने के लिए सूर्योदय से पहले उठकर कुछ खाने-पीने का प्रावधान है। इसे सहरी कहा जाता है। सहरी का वक्त सूर्योदय से पहले का होता है और सुबह फज्र की नमाज के साथ खत्म हो जाता है। इस तरह रोजा फज्र की नमाज के साथ शुरू होता है और शाम के समय लोग मगरीब की नमाज के बाद सामूहिक रूप से इफ्तार करते हैं। इस बीच रोजा रखने वाले दिन भर रोजा रखने के साथ अपना दैनिक काम भी कर सकते हैं। साथ ही इस महीने विशेष नमाज भी की जाती है, जिसे तराबी कहते हैं।
इस बार लॉकडाउन की वजह से इफ्तार की रौनक गायब रहेगी और लोग मस्जिद की बजाय घरों में रहकर सजदा करेंगे। माना जाता है कि यह बरकतों और रहमतों का महीना होता है और सच्चे मन से की गई हर दुआ कबूल होती है। मधेपुरा अबतक आप सभी को इस पवित्र महीने की शुभकामनाएं देता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि कोरोना से संसार को जल्द मुक्ति मिले।

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