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50 लाख श्रमिकों को रोजगार देगी बिहार सरकार

बिहार में अलग-अलग राज्यों से अबतक 5 लाख प्रवासी मजदूर आ चुके हैं। अभी लगभग 20 लाख लोग और विभिन्न राज्यों से आने वाले हैं। ऐसे में बिहार सरकार ने आने वाले मजदूरों को सालों भर यहीं रोजगार देने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी विभागों को रोजगार के अवसर बढ़ाने, जिला स्तर पर अवसर तलाशने और इसकी कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
बता दें कि राज्य सरकार की तैयारी 50 लाख मजदूरों को रोजगार देने की है। इसके लिए हर जिले का अध्ययन कराया जा रहा है कि किन-किन जिलों में कौन-कौन से काम कराए जा सकते हैं। ताकि पहले से यहां रह रहे मजदूरों के साथ-साथ आने वालों को भी स्थायी रोजगार दिया जा सके।
ध्यातव्य है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर लॉकडाउन के दौरान अभी तक 3 लाख 91 हजार 283 योजनाओं में 2 करोड़ 17 लाख 84 हजार मानव श्रम दिवसों का सृजन किया गया है। अभी जिन क्षेत्रों में बिहार में अधिक काम उपलब्ध है, उनमें मनरेगा, नल-जल योजना, नाली-गली पक्कीकरण योजना, सड़क निर्माण और जल-जीवन-हरियाली के तहत काम चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त नई योजनाएं शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। मुख्यमंत्री ने नई निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक पहल करने का निर्देश उद्योग विभाग को दिया है।
बता दें कि शनिवार, 16 मई को एक पोर्टल लॉन्च किया गया है जिससे जाना जा सकता है कि राज्य में कितने तरह के काम हैं और इनकी संख्या क्या है। सभी जिलों से इसका डाटा आने के बाद उसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह भी जानें कि जो प्रवासी अपना उद्योग शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सरकार से पूरी मदद मिलेगी।

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बुजुर्ग एवं गर्भवती महिला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी हेतु बिहार महिला समाज की मांग

बिहार महिला समाज के सदस्यों एवं विभिन्न इकाइयों के अध्यक्षों द्वारा अपने-अपने घरों में 11बजे से 2 बजे अपराह्न तक सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ धरना दिया गया जिसमें मांग की गई कि कोरोना के कारण प्रवासी बुजुर्ग, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिला मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था की जाए। महिला समाज के सदस्यों ने तख्तियों, नारों या कोई-कोई वीडियो के जरिए कई सवालों को भी उठाया।

बता दें कि भारतीय महिला फेडरेशन का समर्थन भी प्रवासी मजदूरों, बुजुर्ग, गर्भवती व दूध पिलाती महिलाओं को राहत देने की वकालत करता रहा। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकार की लापरवाही के कारण रेल की पटरियों पर सो रहे मजदूरों की मौत हो गई। सरकार उनके परिजनों को दुख-दर्द की भरपाई के लिए कम से कम 50-50 लाख रुपए अविलंब आवंटित करें।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इन संगठनों का कहना है कि देश की आर्थिक हालात को बेहतर बनाने में जिन मजदूरों का खून-पसीना लगता रहा है उन मजदूरों के अधिकारों पर सरकार किसी प्रकार का हमला न करें बल्कि उन भूखे व बदहाल मजदूरों की हर संभव मदद के लिए नित नई योजनाएं बनाती रहे।

 

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राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली के लिए 12 मई से एक स्पेशल ट्रेन का परिचालन प्रारंभ

कोविड- 19 के कहर के कारण लगभग 2 महीने से भारत में ट्रेन और प्लेन का परिचालन बंद है। संपूर्ण भारत लाॅक डाउन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाॅकडाउन-3 के दरमियान वैश्विक आर्थिक मंदी एवं मजदूरों के वापसी के मद्देनजर 12 मई 2020 से 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को स्वीकृति दे दी है।

बता दें कि यह सभी ट्रेनें नई दिल्ली स्टेशन से स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाई जाएंगी जो पटना, हावड़ा, डिब्रूगढ़, अगरतला, बिलासपुर, राँची, मडगांव, गोवा, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मूतवी को जोड़ेगी।

यह भी जान लें कि पूर्व मध्य रेल द्वारा राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली एवं वापसी के लिए प्रतिदिन एक स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। राजेंद्र नगर टर्मिनल से 12 मई से एक स्पेशल ट्रेन नंबर 02309 संध्या 7:20 बजे खुलेगी और दूसरे दिन प्रातः 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। पुनः वापसी में ट्रेन नंबर 02310 नई दिल्ली स्टेशन से 13 मई को संध्या 5:15 बजे खुलेगी और दूसरे दिन प्रातः 5:30 बजे राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुंचेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस स्पेशल ट्रेन में वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के 09, द्वितीय श्रेणी के 07 एवं प्रथम श्रेणी के 2 कोच लगेंगे। अग्रिम आरक्षण अवधि फिलहाल 7 दिन रखा गया है। स्टेशन के बुकिंग काउंटर अभी बंद रहेंगे। प्लेटफार्म टिकट भी जारी नहीं की जाएगी। यात्री खाने-पीने की सामग्री अपने साथ लेकर चलेंगे। सभी डिब्बे वातानुकूलित होंगे परंतु रेल द्वारा कंबल नहीं दिया जाएगा। बिना मास्क के यात्रा की अनुमति नहीं होगी। ट्रेन खुलने के समय से डेढ़ घंटे पूर्व आकर स्क्रीनिंग के पश्चात ही सिर्फ उन्हीं यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति होगी जिनमें कोविड-19 के संक्रमण का कोई लक्षण नहीं होगा।

 

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डॉ. नवल के निधन से शोक में डूबा साहित्य-जगत

हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ. नंदकिशोर नवल का मंगलवार रात निधन हो गया। वे कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। 83 वर्षीय डॉ. नवल पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक रह चुके थे। उनका जन्म 2 सितंबर 1937 को वैशाली जिले के चांदपुरा में हुआ था।
डॉ. नवल ने हिन्दी साहित्य को अपनी दर्जनों महत्वपूर्ण पुस्तकों से समृद्ध किया। कविता की मुक्ति, हिन्दी आलोचना का विकास, शताब्दी की कविताएं, समकालीन काव्य-यात्रा, कविता के आर-पार आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं। उन्होंने निराला रचनावली तथा दिनकर रचनावली का संपादन भी किया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. नवल के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके निधन से हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
डॉ. नवल के निधन से साहित्य-जगत जैसे शोक में डूब गया। मधेपुरा के साहित्यप्रेमी भी उनके निधन से मर्माहत हैं। पूर्व सांसद, बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति व दर्जनों पुस्तकों के रचयिता डॉ. आर. के. यादव रवि, कोसी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ एवं मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने संयुक्त शोक-संदेश जारी कर कहा कि डॉ. नंदकिशोर नवल जी ने आजीवन साहित्य की जैसी साधना की उसकी कोई सानी नहीं है। आलोचना के क्षेत्र में उन्होंने जो स्थान बनाया था उसकी भरपाई संभव दिखाई नहीं पड़ती।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष व साहित्यकार डॉ. अमरदीप ने कहा कि डॉ. नवल अपनी बात को जिस शैली में और जितनी बेबाकी से रखते थे उसके लिए वे सदैव याद किए जाएंगे और उनका रचा वांग्मय आने वाली कई पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।

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कोरोना की धमकी से फिलहाल मुक्ति नहीं, बरतें सावधानियाँ

कोरोना की धमकियों से हाल-फिलहाल दुनिया मुक्त नहीं होने जा रही है। जीवन और जगत पर ब्रेक लग गया है। कोरोना के कारण कारागृह में कब तक बंद रहेगी दुनिया। इन सावधानियों के साथ जीवन को आगे बढ़ाएं-

1.शाकाहारी भोजन पसंद करें और इम्यूनिटी बढ़ाएं ! 2.प्रत्येक गुजर रहे सप्ताह में विशेष सावधानियां रखें ! 3.अनावश्यक मीटिंग को नकारें और जिसमें जाना आवश्यक हो तो मास्क लगाएं एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें। 4. मीटिंग में  रुमाल, घड़ी, अंगूठी और बेल्ट आदि पहनकर नहीं जाएं। संभव हो तो सैनिटाइजर एवं टिशू पेपर को साथ रखें तथा आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें। 5. सैैलून या पार्लर से आने के बाद भी सर्वाधिक सावधानियों का ध्यान रखें…. संभव हो तो ब्लेड, तौलिया, कंघी-कैची … आदि अपना ही इस्तेमाल करें। 6.सालभर सिनेमा हॉल, मॉल, भीड़ भरी जगहों पर या पार्टियों में ना जाएं। 7. 1 साल तक घर से बाहर खाना ना खाएं एवं उत्सवों में अनावश्यक ना जाएं। 8.अनावश्यक की यात्रा ना करें 1 वर्ष और विदेश यात्रा पर न जाएं 2 वर्षों तक।

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लाॅकडाउन-3 के बीच मधेपुरा डीएम ने दुकान खोलने हेतु नई गाइडलाइन की जारी

सूबे बिहार की नीतीश सरकार द्वारा दुकान खोलने को लेकर जारी की गई नई गाइडलाइन एवं जिलाधीश को प्रदत्त विशेषाधिकार सहित मंथन करते हुए डीएम नवदीप शुक्ला ने अधिसूचना जारी की है कि कोविड-19 के मद्देनजर व्यावसायिक दुकानों/प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन किया जाएगा एवं भारत सरकार / राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए निदेशों का अक्षरशः अनुपालन किया जाएगा।

बता दें कि पूर्व से खुली रहने वाली आवश्यक व इमरजेंसी दुकानों के अतिरिक्त लाॅकडाउन-3 में खोली जाने वाली दुकानों को 7 कैटेगरी में बांटी गई है जिसमें 6 कैटेगरी की दुकानें प्रत्येक दिन खुलेगी। एक कैटिगरी ही मात्र अल्टरनेट यानी सोम-बुध और शुक्रवार को 9:00 बजे प्रातः से 3:00 बजे अपराह्न तक खुली रहेगी जिसके अंतर्गत केवल ऑटोमोबाइल एंड स्पेयर्स की दुकानें होंगी।

यह भी जानिए कि प्रत्येक दिन खुलने वाली दुकानों में तीन कैटेगरी की दुकानें प्रातः 9:00 से 3:00 बजे तक ही खुली रहेगी और दो कैटेगरी दिन के 11:00 बजे से 5:00 बजे शाम तक खुली रहेगी।

चलते-चलते जानिए कि प्रातः 9:00 से 3:00 बजे तक खुलने वाली सभी तरह की दुकानें होंगी- गैरेज एण्ड वर्क शाॅप, ऑटोमोबाइल्स, टायर एंड ट्यूब/मोटरसाइकिल/स्कूटर मरम्मत सहित… सीमेंट, स्टील, बालू, गिट्टी, ईंट, हार्डवेयर, सैनिटरी फिटिंग, पेंटिंग, शटरिंग सामग्री।

दिन के 11:00 बजे से 5:00 बजे शाम तक खुली रहने वाली दुकानें होंगी- इलेक्ट्रिकल गुड्स, पंखा-कूलर, एयर कंडीशनर विक्रय सहित मरम्मत भी और प्रत्येक दिन खुलने वाली अंतिम 1 कैटेगरी के प्रतिष्ठान प्रदूषण जांच केंद्र के खुलने का समय 10:00 दिन से 5:00 शाम तक होगा।

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आधार और खाता नहीं होने पर भी मिलेगी सहायता राशि

नीतीश सरकार ने राज्य के 56 लाख 62 हजार राशन कार्डधारकों को बड़ी राहत दी है। ऐसे व्यक्ति जिनका ना आधार नंबर है ना बैंक खाता, उन्हें भी एक-एक हजार रुपए जल्द मिलेंगे। कोरोना सहायता राशि से जो अब तक वंचित हैं, उन्हें कोरोना सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नया तरीका अपनाने जा रही है। इसके लिए नियम में बदलाव करते हुए डीएम के स्तर पर सहायता राशि देने का फैसला किया गया है।
ध्यातव्य है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में राज्य में एक करोड़ 68 लाख परिवार आते हैं। इनमें 14 लाख 69 हजार ऐसे राशन कार्डधारक हैं जिनका ना आधार नंबर मिल पा रहा है ना खाता नंबर। ऐसे परिवारों के लिए नियम में बदलाव करते हुए डीएम को सहायता राशि देने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के जरिये पीडीएस दुकानदारों द्वारा ऐसे कार्डधारकों की सूची तैयार कराई जा रही है। यह सूची जिलाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
इसके अतिरिक्त बिहार में 41 लाख 93 हजार ऐसे राशन कार्डधारक हैं जिनका बैंक खाता आधार नंबर से लिंक नहीं रहने और बैंक खाता और राशन कार्ड में दर्ज नाम में भिन्नता के चलते राशि भेजने में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे लाभुकों के नाम को ठीक कराया जा रहा है ताकि डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जा सके। अब तक नौ लाख राशन कार्डधारकों के बैंक खाते में नाम की भिन्नता को ठीक करा लिया गया है। अब उन्हें आधार नंबर से लिंक कराया जा रहा है। बता दें कि कागज दुरुस्त रखने वाले एक करोड़ 11 लाख से ज्यादा राशन कार्डधारकों को अप्रैल की सहायता राशि भेजी जा चुकी है।

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अब कोरोना से क्यों डरना ?

2020 के आरंभ से ही सारे विश्व में कोरोना के कहर के कारण अमेरिका, इटली, स्पेन… आदि जैसे देशों में भी कोहराम मचा है। विश्व का कदाचित कोई देश नहीं जो कोरोना से युद्ध नहीं लड़ रहा हो। अमेरिका में कोरोना वायरस के चलते मरने वालों की संख्या तेजी से लाख छूने ही वाली है।

बता दें कि भारत में अब तक 60 हजार के लगभग संक्रमित हैं और 2 हजार  के पार लोगों की मौत हो चुकी है। लाॅकडाउन- 3 भी समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोना को महामारी घोषित कर दिया गया है… जबकि बहुत सारे देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजरने लगा है। ट्रेन से लेकर प्लेन तक अब और कितने दिनों तक बंद रखा जाएगा। संभव है अब जनहित व देशहित में सब कुछ धीरे-धीरे नॉर्मल स्थिति में लाए जाएं ताकि आर्थिक मंदी से भी निपटा जाए।

बता दें कि ऐसी परिस्थिति में भले ही लाॅकडाउन-3 के बाद कुछ जिलों में लाॅकडाउन समाप्त हो जाए फिर भी प्रत्येक व्यक्ति को ये सावधानियाँ बरतना आवश्यक है। इन्हें आप अपने दिनचर्या में समाहित कर लें। लाॅकडाउन हो या ना हो फिर भी अगले 6 से 12 महीने तक ये सावधानियाँ अति आवश्यक हैं- बस हमेशा याद रखें-

1.मास्क 2.हैंड सेनीटाइजर 3.सोशल डिस्टेंसिंग 4.बिना गए काम नहीं हो तभी बाहर जाएं 5.बाहर से आते ही हाथ -पैर धोकर ही घर में प्रवेश करें 6.यदि ऐसा लगे कि किसी संदिग्ध के संपर्क में आ गए हैं तो पूरा स्नान करें, भाप लें तथा गर्म काढ़ा पियें 7.जूते भी बाहर रखें 8.बेल्ट, अंगूठी, घड़ी, रुमाल का इस्तेमाल नहीं करें 9.सैनिटाइजर और टिश्यू पेपर साथ में रखें और जब जरूरी समझें तब इस्तेमाल करें। 10.सैलून जाने से बचें, दाढ़ी स्वयं शेव करें और बाल बनाने हेतु नाई को घर पर बुलाएं तो उसे मास्क पहना हो, हाथ सैनिटाइज कराएं तथा कंघी-कैंची-ब्लेड आदि सब समान आपका अपना हो।

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लॉक डाउन में रवीन्द्र नाथ टैगोर की 160वीं जयंती मधेपुरा में इस तरह मनी

मधेपुरा की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन जहां कोरोना संक्रमण के कारण गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की 160वीं जयंती 7 मई को आयोजित नहीं की जा सकी। सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ के निदेशानुसार सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने लाॅकडाउन के दरमियान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए अपने परिवार के सदस्यों के बीच नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एक सशक्त कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार, चित्रकार के साथ-साथ एक महान शिक्षक रवीन्द्र नाथ टैगोर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

कि 7 मई के ही दिन 1861 ई. में कोलकाता के देवेंद्र नाथ टैगोर के घर चौदहवीं संतान के रूप में एक बालक रवीन्द्र ने जन्म ग्रहण किया था। उसने 8 वर्ष से लिखना आरंभ किया। उसकी कविता 12 वर्ष में एवं लघु कथा 16 साल की उम्र में प्रकाशित हुई। वर्ष 1910 में उन्होंने गीतांजलि की रचना की जिसे 10 दिसंबर 1913 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान “नोबेल पुरस्कार” पाने वाला पहला भारतीय बने रवीन्द्र नाथ टैगोर।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि 3 देशों के राष्ट्रगान से गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम जुड़ा है। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन…..” और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला….” तो उनकी ही रचनाएं हैं। तीसरा देश श्रीलंका  जिसका राष्ट्रगीत “श्रीलंका मथा….” भी गुरुदेव की कविताओं की प्रेरणा से बना है।

चलते-चलते यह भी कि बचपन में इस नोबेल पुरस्कार विजेता को स्कूल की दीवारें बंधन जैसा लगता था जिसके कारण उन्होंने बड़े होकर शांति निकेतन की स्थापना की। आज दुनिया उसे विश्व भारती यूनिवर्सिटी के नाम से पुकारती है।

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मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की सर्वदलीय बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार, 05 मई को सभी राजनीतिक दल के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सर्वदलीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने कोरोना संकट से मुकाबले के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, जदयू के बिजेन्द्र प्रसाद यादव, भाजपा के प्रेम कुमार, हम के जीतन राम मांझी, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी, कांग्रेस के सदानंद सिंह, भाकपा माले के महबूब आलम एवं लोजपा के राजू तिवारी शामिल रहे। इन नेताओं के अलावे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे।

All Party Meet through Video Confrencing.
All Party Meet through Video Confrencing.

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा कोरोना संकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों व किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में बाहर से आने वाले लोगों के कारण कोरोना संक्रमण का फैलाव ज्यादा हुआ। बाहर से आने वाले लोगों के कॉन्टैक्ट्स से भी कोरोना संक्रमण की चेन बनी, जिसे तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने निर्देश दिया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों में जिला प्रशासन संबंधित विधायकों से भी सुझाव लें। विधायकों व राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बैठक में विपक्ष से आग्रह किया कि वे केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से बैंकों के जरिए गरीबों को दी जा रही 12162 करोड़ की सहायता राशि व खाद्यान्नों के वितरण में सहयोग करें। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार, राहत और बचाव कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सेवा ले। उनके सुझाव का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को जवाबदेही देने का आश्वासन दिया। हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने राज्य सरकार को एक अलग पोर्टल बनाने का सुझाव दिया, जिस पर किसी भी राज्य में फंसे बिहारी श्रमिक अपना निबंधन करा सकें।

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