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टिड्डियों के आतंक से भारत परेशान

भारत में टिड्डियों के आतंक का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थानी टिड्डियों की टोली से परेशान हो रहा है भारत के बाकी राज्यों का किसान समुदाय। अब तो टिड्डियों की टीम का खतरा शहरों तक आ पहुंचा है। दिल्ली भी इस खतरे से जूझ रहा है। कई राज्यों ने तो टिड्डियों के दल से निपटने हेतु कमर कस ली है।

बता दें कि कोरोना काल के बीच में ही अचानक टिड्डियों की टोली नई मुसीबत बनकर भारतीय किसानों की नींद उड़ाने में लग गई है। भारत के कई राज्यों में लाखों-करोड़ों की तादाद में आए टिड्डियों ने किसानों की नाक में दम कर दिया है। अब तक टिड्डियों द्वारा देश में 10 करोड़ की फसल बर्बाद की जा चुकी है। लाखों किसान भूखमरी के कगार पर खड़े होकर परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा ड्रोन की सहायता से छिड़काव किया जा रहा है। कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा इमरजेंसी बैठकें बुलाई जा रही हैं।

चलते-चलते यह भी जानिए कि 27 वर्षों के बाद टिड्डियों का यह आतंक किसी भी रूप में कोरोना के कहर से कम नहीं है। 1 घंटे में टिड्डियों के दल ढाई हजार लोगों का भोजन चट कर जाता है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के 1 लाख 25 हज़ार एकड़ जमीन की फसल को बर्बाद कर दिया है। टिड्डियों ने राज्य सरकार के साथ-साथ भारत सरकार की भी नींद हराम कर दी है।

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बिहार की बेटी ज्योति ने राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी इवांका को बनाया दीवाना

जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का…. तो फिर देखना फिजूल है बिहार की बेटियों के लिए कद आसमान का। कामयाबी का जुनून यदि अंदर विद्यमान हो तो बाहर मुश्किलों की क्या औकात रह जाती है बिहारी बेटियों के लिए। ऐसी ही बेटियों में एक 15 साल की बिहारी बेटी है ज्योति जिसने कोरोना लाॅक डाउन के दरमियान 7 दिनों में 1200 किलोमीटर का लंबा सफर (हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के सिरहुल्ली दरभंगा तक) अपने मजबूर पिता को साइकिल पर बिठाकर तय किया।

बता दें कि मजदूर पिता मोहन एवं माता फूलो की इस पुत्री ज्योति के ऐसे साहसिक कदम को देखते हुए भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन ने ट्रायल के साथ-साथ सम्मानित करने के लिए भी उन्हें दिल्ली बुलाया है। ज्योति के इस साहसिक कदम के लिए नवभारत टाइम्स ने भी उनसे संपर्क किया है। अब तो ज्योति की मदद के लिए कई हाथ उठने लगे हैं।

यह भी जानिए कि विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने बिहार की इस बेटी की जमकर सराहना की। जहां दरभंगा पहुंचने पर ज्योति को ₹20000 देकर पुरस्कृत करते हुए यह भी कहा गया कि उसकी पढ़ाई का खर्चा भी लोग उठाएंगे वहीं लगे हाथ दिल्ली से साइकिल पर रेस लगाने हेतु फोन आया और यह भी कहा गया ज्योति को दिल्ली में ही रखेंगे और वही पढ़ाएंगे लिखाएंगे।

चलते चलते यह भी कि ज्योति साइकिल पर रेस लगाना चाहती है… वह पढ़ना भी चाहती है और ऐसे साहसिक कदम उठाने के लिए चारों ओर लगातार हो रही तारीफ की जानकारी पाकर ज्योति बिहार की बेटियों से यही कहना चाहती है- मैंने सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि ऐसा दिन आएगा।

ज्योति के ऐसे साहसिक कदम के बारे में जानकारी मिलते ही समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने यही कहा- ज्योति ने यह साबित कर दिखा दिया है कि कोई जगत-जननी नारी को कमजोर नहीं समझे। नारी तो उत्साह, चेतना और प्रेरणा का संगम है। ज्योति ने आधी आबादी को अच्छी तरह संस्कारित कर दिया है… झकझोर दिया है तथा ऊंची उड़ान के लिए हौसला बुलंद कर दिया है।

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UGC का बड़ा फैसला : एक साथ अब दो-दो डिग्रियां लेने की छूट

जब डब्ल्यूएचओ द्वारा घोषित कर दिया गया कि कोरोना वैश्विक महामारी है तब इस विकट काल में यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन) नई दिल्ली ने संपूर्ण भारत के छात्र-छात्राओं के हित में यह बड़ा फैसला लिया कि अब भारतीय छात्रों को भी एक साथ दो-दो डिग्रियां लेने की छूट दी जाती है।

बता दें कि छात्र चाहे तो एक ही संकाय या फिर अलग-अलग संकाय से एक ही समय दो डिग्रियां ले सकते हैं। यूजीसी द्वारा शर्त यही रखी गई है कि दो में से एक डिग्री रेगुलर मोड में ही लेनी होगी यानि एक विषय में छात्रों द्वारा अपने कक्षा में उपस्थिति की अनिवार्यता पूर्ववत रहेगी, वहीं दूसरे विषय की डिग्री दूरस्थ मोड से या फिर ऑनलाइन के जरिए भी ली जा सकती है।

जानिए कि यूजीसी के इस निर्णय से छात्रों को बहुत फायदा होगा। इस नई व्यवस्था में कम समय में ही जहां विद्यार्थियों को अपनी योग्यता विकसित करने का मौका मिलेगा वहीं उन्हें अपने करियर को संवारने में भी सहूलियत होगी। जानिए कि विदेशों में एक साथ दो-दो डिग्रियां लेने की व्यवस्था तो पहले से ही है, परंतु भारत में इस सुविधा के लिए अरसे से मांग उठ रही थी।

भारतीय छात्रों को यूजीसी द्वारा फायदे पहुंचाने वाले इस निर्णय को संदर्भित करते हुए बीएन मंडल विश्वविद्यालय के भौतिकी के प्रोफेसर व समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि देर से ही सही, परंतु यूजीसी के इस निर्णय का दूरगामी सकारात्मक प्रभाव देखने को अवश्य मिलेगा तथा शैक्षणिक गतिविधियां पहले से ज्यादा बढ़ेगी एवं छात्रों को सर्वाधिक लाभ भी मिलेगा… यूजीसी के इस निर्णय का चिंतनशील शिक्षाविदों द्वारा स्वागत अवश्य किया जाना चाहिए।

UGC

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आप सब लोग बिहार में ही रहिए…

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल और आज 10-10 जिलों के 20-20 क्वारंटाइन केन्द्रों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जायजा लिया और वहां रहे प्रवासियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सरकार का संकल्प दोहराया कि सभी को बिहार में ही रोजगार दिया जाएगा। सरकार इसके लिए पूरी व्यवस्था कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग बाहर जाकर कार्य कर रहे थे, उन्हें वहां कष्ट झेलना पड़ा। हमारी इच्छा है कि आप सब लोग बिहार में ही रहिए। आप सभी लोग बिहार के विकास में भागीदार बनें। किसी को कष्ट न हो, सभी की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हम हमेशा आप की ही चिन्ता करते हैं।

बहरहाल, मुख्यमंत्री ने क्वारंटाइन केन्द्रों में शौचालय, पेयजल, रसोईघर, लोगों के रहने की व्यवस्था एवं केन्द्रों की साफ-सफाई का किया बारीकी से अवलोकन किया। प्रवासियों ने क्वारंटाइन केन्द्रों की व्यवस्था को सराहा और कहा कि अब वे बिहार में रहकर ही काम करना चाहते हैं। सबकी बातों को सुनने के क्रम में मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जो इस प्रकार हैं:

क्वारंटाइन केन्द्रों पर आवासित प्रवासियों का पूर्ण सर्वे कराएं। उनके पूर्व के रोजगार की जानकारी लें ताकि उन्हें यहां रोजगार देने में सुविधा हो।
हमारा दायित्व है कि सबको रोजगार मिले। अपना खुद का व्यवसाय करने वाले को सरकार हरसंभव मदद करेगी।
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग को बढ़ावा दें। उदाहरण के तौर पर मुजफ्फरपुर क्षेत्र में चमड़ा, जूता उद्योग तथा कपड़ा उद्योग की अपार संभावानाएं हैं।
बाहर से आ रहे प्रवासी जो बिजली के कार्य में दक्ष हैं, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बिहार राज्य पावर होल्डिंग कम्पनी लिमिटेड कार्रवाई करे।
क्वारंटाइन केन्द्र में रह रहे जिन प्रवासियों का बिहार में नहीं हो खाता, उनका खाता खुलवाएं। आधार एवं राशन कार्ड नहीं बना हो, तो वो भी अविलंब बनवाएं।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पांच प्रमुख निर्देश

कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर किए जा रहे उपायों व कार्यों की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हर दिन स्वयं उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे हैं। इसी क्रम में 21 मई 2020 को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इनमें पांच प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं।

पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर सभी प्रवासी मजदूरों की डोर टू डोर विस्तृत स्क्रीनिंग कराई जाय। इससे सभी की सुरक्षा हो सकेगी।
स्क्रीनिंग की यह प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाय। एक अंतराल के बाद पुन: स्क्रीनिंग कराई जाय और इसका फॉलोअप भी किया जाय।
कोरोना संक्रमण की जांच एवं बचाव से संबंधित जो भी उपकरण प्राप्त हुए हैं या शीघ्र प्राप्त होने वाले हैं, उन्हें फंक्शनल करने हेतु कार्रवाई की जाय।
स्वास्थ्य विभाग हरसंभव स्रोत से वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट, पीपीई किट, दवाओं एवं जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
रोजगार उपलब्ध कराने हेतु बनाया गया राज्यस्तरीय टास्क फोर्स अविलंब कार्य शुरू करे और प्रवासी मजदूरों के लिए श्रमनीति तैयार करने के संबंध में शीघ्र सुझाव दे।

अपने पाठकों को बता दें कि 21 मई तक बिहार में कुल 593 पॉजिटिव मरीज स्वस्थ हुए हैं तथा राज्य में कुल 10 हजार 353 प्रखंडस्तरीय क्वारंटाइन सेंटर चल रहे हैं, जिनमें 7 लाख 45 हजार 881 लोग आवासित हैं।

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बिहार में अब 14 स्थानों पर होगी कोरोना की जांच

बिहार में कोरोना जांच का दायरा बढ़ गया है। अब तक सात स्थानों पर कोरोना की जांच की जा रही थी, अब सात नए स्थानों पर भी कोरोना की जांच शुरू कर दी गई है। इस प्रकार बिहार में 14 स्थानों पर जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे कोरोना के संक्रमण की जांच में अपेक्षित तेजी आ सकेगी।
गौरतलब है कि बिहार में सात जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में कोरोना की जांच ट्रू नेट मशीन से शुरू की गई है। इनमें पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (नालंदा), कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मधेपुरा), गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल (गया), सीवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीवान), सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (बेतिया), जिला अस्पताल (मुंगेर) और जिला अस्पताल (मोतिहारी) शामिल हैं। इसके पूर्व आरएमआरआई (पटना), पीएमसीएच (पटना), एम्स (पटना), एसकेएमसीएच (मुजफ्फरपुर), जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (भागलपुर) और डीएमसीएच (दरभंगा) में कोरोना की जांच की जा रही थी।
बता दें कि पहले राज्य के सात स्वास्थ्य संस्थानों में औसतन 1050 सैम्पलों की जांच की जा रही थी, जबकि यह औसत बढ़कर अब दो हजार सैम्पल रोज हो गई है। ध्यातव्य है कि राज्य सरकार ने कोरोना जांच की क्षमता प्रतिदिन 10 हजार करने का निर्देश दिया है।

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भारतीय बच्ची श्रव्या को ट्रंप ने कोविड-19 को लेकर पुरस्कृत किया

अमेरिका में कोरोना ने जो तांडव मचा रखा है वह किसी से छिपा नहीं है। अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों एवं दमकल विभाग के कर्मचारियों को कुकीज व कार्ड भेजने वाली आंध्र प्रदेश की 10 वर्षीय श्रव्या अन्नापरेड्डी को सम्मान के साथ पुरस्कृत किया।

बता दें कि श्रव्या के माता-पिता वर्तमान में अमेरिका में ही रहने लगे हैं और श्रव्या “गर्ल स्काउट ग्रुप” की सदस्य भी है। 10 वर्षीय श्रव्या मैरीलैंड के हनोवर हिल्स एलीमेंट्री स्कूल के क्लास फोर्थ की छात्रा है।

यह भी बता दे कि श्रव्या अन्नापरेड्डी जो ‘गर्ल स्काउट’ की उन तीन बच्चियों में शामिल है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं अमेरिका की प्रथम महिला मिलेनिया ट्रंप ने शुक्रवार को कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात कोरोना वारियर्स की मदद करने हेतुु ससम्मान पुरस्कृत किया।

चलते-चलते यह भी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जो कोई इस कठिन समय में हमें मदद कर अपने स्नेह में बांधता है और हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है उसे सम्मानित करना हमारा परम कर्तव्य है। इन लड़कियों ने कोरोना वारियर्स को कुकीज के 100 डिब्बे भेजे थे तथा हाथ से बनाकर 200 कार्ड भी स्नेह की डोरी से बांधकर भेजे थे।

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बिहार में ऑनलाइन एजुकेशन प्रणाली के विस्तार पर बल दें: नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार, 19 मई 2020 को केन्द्र के आर्थिक पैकेज पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वित्त विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, श्रम संसाधन विभाग, ऊर्जा विभाग तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ विचार-विमर्श किया तथा कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में ऑनलाइन एजुकेशन प्रणाली के विस्तार पर बल दें। कक्षावार तैयार किए गए ई-कंटेंट को टेलीविजन के माध्यम से दिखाएं और कक्षा 06 से 12 की तरह कक्षा 01 से 05 के लिए भी ई-कंटेंट विकसित किया जाय।
आगे उन्होंने कहा कि राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के विभिन्न पहलुओं पर समुचित कार्रवाई करें। श्रमिकों के ओवरटाइम का पारिश्रमिक क्या हो इस बारे में श्रम संसाधन विभाग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। उन्होंने कहा कि लम्बी अवधि से यह दिशा-निर्देश दिया जा रहा है कि शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत मकान बनाने की योजना शुरू हो। इस पर काम शुरू करें। इस संदर्भ में शहरी विकास एवं आवास विभाग ठोस कार्रवाई करे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्ट्रीट वेंडरों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर हैं। सभी स्ट्रीट वेंडरों का व्यवस्थित रूप से सर्वे कराएं। यह ध्यान रखें कि कोई छूटे नहीं। सभी को योजनाओं का लाभ मिल सके।
ऊर्जा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार इस क्षेत्र में रिफॉर्म करने जा रही है। इस पर नजर रखी जाए। ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार पहले ही काफी नई पहल एवं सुधारात्मक प्रयोग कर चुका है। यह अच्छी बात है कि केन्द्र सरकार अब बिहार मॉडल को अपना रहा है।

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भारत सरकार के आर्थिक पैकेज पर मुख्यमंत्री ने किया विचार-विमर्श

सोमवार, 18 मई को 1, अणे मार्ग स्थित नेक संवाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज से संबंधित गहन समीक्षा की और यह जानने का प्रयास किया कि पैकेज से हमें क्या मदद मिल सकती है और कैसे किसान, श्रमिक, उद्योगकर्मी, मनरेगाकर्मी आदि को लाभ पहुंचाया जा सकता है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, उद्योग मंत्री श्याम रजक तथा सहकारिता मंत्री राणा सिंह चौहान समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में विचार-विमर्श के मुख्य बिन्दु ये रहे – 1. हर हिन्दुस्तानी की थाल में बिहार का एक व्यंजन हो, यह हमारा उद्देश्य है। मखाना इसे पूरा कर सकता है, इससे कृषि रोडमैप में निर्धारित लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा। 2. मखाना के साथ-साथ शाही लीची, चिनिया केला, आम, मेंथा तेल, खस तेल, करतनी चावल एवं अन्य कृषि उत्पादों के क्लस्टर को भी बढ़ावा दें। 3. बिहार में शहद उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। इसके लिए शहद की प्रोसेसिंग यूनिट तथा मार्केटिंग एवं ब्रांड वैल्यू पर विशेष बल दिया जाय। 4. जीविका द्वारा की जा रही कन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दें तथा उसका विस्तार करें। 5. केन्द्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज का अधिक से अधिक लाभ कृषकों एवं श्रमिकों को हो सके, इसके लिए अनिवार्य कार्रवाई करें।
इसके अतिरिक्त इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निर्देश दिया कि बिहार के बाहर से आ रहे श्रमिकों के लिए उनकी स्किल मैपिंग के अनुसार रोजगार सृजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। इसके लिए राज्य में संचालित इकाईयों में उनके स्किल के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाय। साथ ही नई निर्माण इकाईयों की स्थापना की दिशा में भी समुचित कार्रवाई की जाय। उन्होंने कहा कि नए उद्योगों को लगाने में सरकार पूरी मदद करेगी। श्रमिकों के स्किल की विवरणी के अनुरूप क्या-क्या नए उद्योग लगाए जा सकते हैं, क्या मदद दी जा सकती है, इस पर विचार करें। साथ ही, मनरेगा में अधिकतम श्रम दिवस की सीमा को 100 से 200 करने तथा स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के बीमा से संबंधित तिथि विस्तार हेतु केन्द्र से अनुरोध करें।

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लालू की कविता का जदयू ने डॉ. अमरदीप की कविता से दिया जवाब

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की कविता, जो उन्होंने 13 मई को अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखी थी, का जदयू ने कविता में ही जवाब दिया। 14 मई 2020 को यह कविता जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखी जिसे जदयू के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से भी रीट्वीट किया गया। बेहद सधे हुए जवाब के कारण यह कविता सोशल मीडिया पर तत्काल वायरल हो गई।
डॉ. अमरदीप ने अपनी कविता में लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधते हुए कहा – 15 साल का जंगलराज/ घोटालों के आप सरताज, 15 साल का जंगलराज/ बिगड़े बिहार के सारे काज, 15 साल का जंगलराज/ नीतीश कुमार ने बदला आज, हम न्याय के साथ विकास के पैरोकार/ और आपकी कहानी खुद कह रहा होटवार।
बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने अपने ट्वीट में नीतीश सरकार पर बेहद तल्ख पंक्तियां लिखी थीं। उन्होंने लिखा था – 15 साल की पंक्चर सरकार/ गरीब मजदूर की दुश्मन सरकार, 15 साल की पंक्चर सरकार/ जमीनी विकास में बंजर सरकार, 15 साल की पंक्चर सरकार/ बर्बाद कर दिया पूरा बिहार, बिलखता नौनिहाल, तड़पता मजदूर, मरता किसान/ डबल इंजन सरकार बंद करो झूठ का दुकान। डॉ. अमरदीप ने इसी कविता का जवाब अपनी कविता से दिया।
बहरहाल, 14 मई को ही कविता के साथ ही जारी अपने बयान में डॉ. अमरदीप ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में बिहार का कायाकल्प करके रख दिया। नीतीश कुमार के कार्यों की सराहना आज देश और दुनिया में हो रही है लेकिन बिहार के मुख्य विपक्षी दल और इसके नेताओं को नकारात्मक राजनीति से फुरसत नहीं।

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