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भारत में विगत 24 घंटे में मिले 95 हजार कोरोना मरीज और अब तक मौत को गले लगा चुके हैं 75 हजार

बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में है। जानिए कि महाराष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमितों का इलाज वहां के अस्पतालों में चल रहा है। दूसरे और तीसरे नंबर पर आता है तमिलनाडु और दिल्ली….. चौथे व पांचवें नंबर पर क्रमशः गुजरात एवं पश्चिम बंगाल आता है। इन सभी पांचों राज्यों में कोरोना पॉजिटिवों का सर्वाधिक केस है या यह कहें कि एक्टिव कोरोना संक्रमितों के मामले में विश्व में भारत का दूसरा स्थान है यानि भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित देश है। मौत के मामले में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत का ही नंबर आता है।

चलते-चलते कोरोना अपडेट की जानकारी ले लीजिए- भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 44 लाख के पार पहुंच गई है। देश में विगत 24 घंटे में 95 हजार 735 नए मामले का रिकार्ड सामने आया है जबकि 7 सितंबर को 90 हजार 802 मामले दर्ज हुए थे। देश में 2 सितंबर से लगातार प्रतिदिन 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। अबतक भारत में कोरोना के कारण काल के गाल में जाने वालों की संख्या 75000 के पार पहुंच गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजे आंकड़े के अनुसार भारत में कोरोना  संक्रमितों की कुल संख्या 44 लाख 62 हजार हो गई है जिसमें एक्टिव केस की संख्या 9 लाख 19 हजार ही है। अब तक 34 लाख 71 हजार भारतीय ठीक हो चुके हैं। आईसीएमआर के अनुसार कुल 5 करोड़ 40 लाख सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं जिसमें 11 लाख की टेस्टिंग कल की गई है।

अंत में यह कि मृत्यु दर (1.68%) एवं एक्टिव केस रेट में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जबकि रिकवरी रेट (78%) लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावे आईजीआईएमएस द्वारा कोरोना से ठीक हुए मरीजों को फिजियोथेरेपी लाभ प्राप्त करने हेतु सलाह मुफ्त में दी जाएगी।

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इंटरनेशनल लिटरेसी डे- 2020

प्रत्येक वर्ष संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरुआत 26 अक्टूबर 1966 को हुई थी । यह कार्यक्रम शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने हेतु किया जाता है। सर्वप्रथम ईरान के तेहरान में दुनिया से निरक्षरता को खत्म करने के लिए दुनिया भर में एक अभियान चलाने पर चर्चा की गई थी। इस वर्ष वैश्विक कोविड-19 महामारी के खतरे के अनुरूप यह “साक्षरता  शिक्षण और कोविड-19 संकट और उसके बाद” विषय पर केंद्रित किया गया। फलस्वरूप इस वर्ष इस वैश्विक संकट के मौके पर ‘शिक्षकों की भूमिका और बदली शिक्षा पद्धति’ पर जोर दिया गया और आगे भी दिया जाता रहेगा।

बता दें कि कोरोना काल में विश्व साक्षरता दिवस को सफल बनाने हेतु फिलहाल टीवी, रेडियो एवं इंटरनेट के जरिए शिक्षा के काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस साल साक्षरता दिवस के दिन संयुक्त राष्ट्र ने शिक्षा के मुद्दे पर कई प्रकार के ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया है। इसका उद्देश्य यही है कि लोग साक्षर होकर अपने आने वाले कल को बेहतर बना सके तथा  अंधेरी गलियों में उजियारा ला सके।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहां साक्षरता के मामले में देश का शीर्ष राज्य है केरल… जहां 96.2% लोग  साक्षर हैं, वहीं आंध्र प्रदेश इस मामले में सबसे निचले पायदान पर है जहां की साक्षरता दर 66.4% है। जानिए कि ब्रिटिश हुकूमत के समय देश में सिर्फ 12% लोग ही साक्षर थे।

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आशा भोंसले ने अपने जन्मदिन की 87वीं वर्षगांठ मनायी

पंडित दीनानाथ मंगेशकर सरीखे मराठी रंगमंच अभिनेता, प्रसिद्ध गायक व नाटककार पिता की दो पुत्रियों भारत रत्न लता मंगेशकर और आशा मंगेशकर ने फिल्मी दुनिया में अपनी गायकी की ऊंचाइयों के लिए प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है। आज भी इन दोनों की आवाज के करोड़ों दीवाने हैं। शेष दो पुत्रियां मीणा व उषा एवं पुत्र हृदयनाथ मंगेशकर हैं।

बता दें कि आशा मंगेशकर का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। बेहद छोटी उम्र में ही अपने बच्चों को संगीत की तालीम देनी शुरू कर दी पिता श्री पंडित दीनानाथ ने। आशा जी ने जीवन के 9वें बसंत पार करते ही पिता को खो दिया। तब पूरा मंगेशकर परिवार मुंबई आकर रहने लगा। बड़ी बहन लता जी के कंधे पर परिवार का बोझ आने पर उसने कम ही उम्र में फिल्मों में गाना व अभिनय शुरू कर दिया था।

यह भी जानिए की बड़ी बहन लता जी के अधिक उम्र के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से आशा जी ने परिवार के विरुद्ध जाकर प्रेम विवाह कर लिया और इस कारण उन्हें घर भी छोड़ना पड़ा था। पहली शादी से उन्हें तीन बच्चे हैं। दो बेटे- हेमंत एवं आनंद और एक बेटी वर्षा। बाद में शादी टूटने के बाद आशा जी अपने तीनों बच्चों के साथ घर वापस आ गई।

यह भी बता दें  कि आशा जी ने दूसरी शादी प्रसिद्ध संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) से की। जानिए कि संगीतकार एसडी बर्मन के पुत्र राहुल देव बर्मन बचपन में रोते वक़्त पाँच तरह की आवाजें निकालते थे इसलिए उन्हें पंचम कहा जाने लगा और बाद में ‘पंचम दा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए। यह पारिवारिक संबंध आशा जी ने पंचम दा के निधन तक निभाया।

आरंभ में आशा भोंसले को बहुत संघर्ष करना पड़ा था। आशा जी ने 1948 में अपना पहला गीत फिल्म ‘सावन आया’ में  गाया फिर तो नया दौर, उमराव जान, तीसरी मंजिल आदि फिल्मों में  मोहम्मद रफी के साथ  मांग के साथ तुम्हारा…, उड़े जब जब जुल्फें तेरी… आदि गीतों ने धूम मचा दी और छह दशक तक  16 हजार से ज्यादे गानों में न जाने  इतने बेहतरीन  गाने गाती चली गई।

चलते-चलते यह भी जानिए कि आशा भोंसले केवल एक अच्छी गायिका ही नहीं बल्कि एक बेहद अच्छी कुक भी हैं आशा जी कुवैत एवं दुबई में “अपना रेस्तरां” चेन भी चलाती हैं।

 

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ग्लोबल टीचर अवार्डी भारतीय अध्यापकों ने बताया- कैसी हो भविष्य की टीचिंग

वैश्विक आधुनिक शिक्षा जगत के नोबेल कहे जाने वाले ग्लोबल टीचर अवार्ड हेतु लगभग डेढ़ सौ देशों के 12 हजार टीचर्स में शाॅर्ट लिस्ट किए गए शीर्ष 50 शिक्षकों में जिन तीन भारतीय शिक्षकों ने अपना स्थान सुरक्षित किया, वे तीनों है-

1.रंजीत सिंह दिसाले, सरकारी स्कूल टीचर, सोलापुर (महाराष्ट्र)

2.विनीता गर्ग, दिल्ली की कंप्यूटर टीचर, और

3.शुभोजित पायने, अजमेर (राजस्थान)

बता दें कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों से कहा कि सभी को अपने विकास के लिए शिक्षा में हो रहे नए बदलावों के बारे में जानना होगा तथा बच्चों को रुचि के साथ सीखने के लिए प्रेरित करना होगा। महामहिम ने पुनः कहा कि हमारे शिक्षक डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए अपने कौशल को समयानुकूल उन्नत बनाएं।

एक ओर जहां महामहिम राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि कोरोना के कारण आए इस अचानक बदलाव के समय पारंपरिक शिक्षा के माध्यमों से हटकर डिजिटल माध्यम से पढ़ाने में सभी शिक्षक सहज नहीं हो पा रहे थे, परंतु अल्पावधि में हमारे प्राध्यापकों ने डिजिटल माध्यम का उपयोग कर विद्यार्थियों से जुड़ने के लिए कड़ी मेहनत की, वहीं शिक्षक रंजीत सिंह दिसाले द्वारा 2014 में ही बनाई क्यूआर कोड किताबों से लाॅकडाउन में 8 देशों के 16 हजार बच्चे जुड़े और रूचि के साथ पढ़े। आज की तारीख में उसे एनसीईआरटी  इस्तेमाल कर रहा है। विनीता गर्ग और शुभोजीत पायने कंप्यूटर कोडिंग जैसे कठिन व जटिल विषय को सुगम बना कर संगीत और अन्य विषयों की पढ़ाई को सरल बना दिया है।

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डीएम द्वारा दिए गए चेक के साथ-साथ राजकीय शिक्षक सम्मान प्राप्त किया एचएम मोहम्मद ताहिर हुसैन ने

मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल के रहटा गांव स्थित ‘मदरसा’ के एचएम मोहम्मद ताहिर हुसैन को जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने राजकीय शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया। डीएम शुक्ला ने मोहम्मद हुसैन को पुरस्कार स्वरूप ₹15000 का चेक, प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर पुरस्कृत किया। साथ ही डीएम ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सरकार द्वारा मोहम्मद ताहिर हुसैन को इसके लिए चुना गया है। इनके चयन से जिले में उत्साह का माहौल बना हुआ है।

मौके पर डीपीओ (स्थापना) केएन सादा सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) ने कहा- शिक्षक का पद समाज में सबसे ऊपर है। शिक्षक ही समाज को प्रगतिशील बनाता है। ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने वाले इंसान के पीछे परिवार के साथ-साथ शिक्षक का ही हाथ होता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहां पूरे बिहार में राजकीय शिक्षक सम्मान के लिए 20 शिक्षकों का चयन किया गया वहीं राष्ट्रीय सम्मान के लिए 2 शिक्षकों- एक सारण जिले के अखिलेश्वर पाठक एवं दूसरे बेगूसराय जिला के संत कुमार सहनी को चुना गया। कोरोना के कारण राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति ने वेबिनार के माध्यम से तथा राजकीय पुरस्कार संबंधित जिला के जिला पदाधिकारी के माध्यम से शिक्षकों को प्रदान किया गया। समाजसेवी-साहित्यकार एवं फिजिक्स के लोकप्रिय शिक्षक रह चुके प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने  मोहम्मद ताहिर हुसैन को हृदय से साधुवाद देते हुए कहा कि डीएम नवदीप शुक्ला द्वारा आयोजित इस सम्मान कार्यक्रम से जिले के शिक्षकों का उत्साह वर्धन होता रहेगा।

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समर्पित शिक्षकों के सम्मान में आज भी कमी नहीं है- डॉ.मधेपुरी

आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मधेपुरा में फिजिक्स के ख्याति प्राप्त शिक्षक के रूप में अपनी पहचान कायम करने वाले प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने निज आवास ‘वृंदावन’ पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षक व पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती मनाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों एवं शिक्षकों से यही कहा- एक समर्पित शिक्षक का जीवन उस दीपक की तरह होता है जो स्वयं को जलाकर औरों के रास्ते में उजाला फैलाता है।

वैसे ही शिक्षकों में शुमार किए जाते हैं- डॉ.एस राधाकृष्णन, डाॅ.जाकिर हुसैन और डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम जो राष्ट्रपति बनने से पहले शिक्षक रहते हुए ही भारत रत्न सरीखे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए हैं। सारा देश आज के दिन वैसे समर्पित शिक्षकों के साथ-साथ प्रथम गुरु “मां” को भी सलाम करता है, याद करता है।

स्थानीय कई स्कूलों द्वारा आमंत्रित किए जाने के बावजूद कोरोना के कहर के चलते उन स्कूलों में नहीं जाकर डॉ.मधेपुरी ने डॉ.राधाकृष्णन के जन्मदिन (5 सितंबर) को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया और छात्रों से यही कहा कि आज के दिन भारत के महामहिम राष्ट्रपति देश के गिने-चुने समर्पित शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान तथा राज्य के माननीय मुख्यमंत्री कुछ चयनित शिक्षकों को राजकीय सम्मान से सम्मानित करते हैं।

डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन के अंत में यही कहा कि वर्तमान गिरावट के दौड़ में भी अच्छे-सच्चे व समर्पित शिक्षकों के सम्मान और मर्यादा में कमी नहीं आई है। आज भी विश्व के कई देशों में शिक्षक का सम्मान विधायक, सांसद, मंत्री या प्रधानमंत्री से भी ऊंचा है, क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माता ही नहीं बल्कि राष्ट्र का रक्षक, रहवर और रखवाला भी होता है। देश के सर्वाधिक सचेतन लोगों की चाहत है कि महामहिम राष्ट्रपति का पद वैसे समर्पित व ख्यातिप्राप्त शिक्षकों से भरा जाए जो अपना जीवन व्यक्तिगत नहीं रखा हो बल्कि छात्रहित के लिए सार्वजनिक कर दिया हो।

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कोसी प्रमंडल का सुपौल जिला बना धूम्रपान मुक्त

भारत में धूम्रपान के रूप में तेजी से तंबाकू का सेवन किया जा रहा है। धूम्रपान से फेफड़े के कैंसर की बीमारी होती है। अमीरों की तुलना में गरीब तथा महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक धूम्रपान करते हैं। जबकि तंबाकू का सेवन हर तरह से खतरनाक है। दुनिया में प्रतिवर्ष 70 लाख तथा भारत में  प्रतिदिन लगभग 3 हजार मौत तंबाकू सेवन की वजह से होती है।

यह भी बता दें कि धूम्रपान से हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है। दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ जाता है। तंबाकू और धूम्रपान मुंह की नाजुक मांस पेशियों को नुकसान पहुंचाता है जिससे खाने में स्वाद नहीं लगता है। अधिक धूम्रपान से सांस लेने में कठिनाई होती है एवं फेफड़े खराब हो जाते हैं और दस प्रकार के कैंसर से घिर जाते हैं लोग।

डब्ल्यूएचओ के बैनर तले विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर धूम्रपान एवं तंबाकू सेवन नहीं करने का हर कोई को संकल्प कराया जाता है। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी अपने लिए नहीं तो कम से कम अपनों के लिए ही इस बुरी आदत को छोड़ने का संकल्प प्रत्येक जिले में दिलाया जाता है। कोसी प्रमंडल के सुपौल जिले के डीएम महेंद्र कुमार ने समारोह आयोजित कर सुपौल जिला को धूम्रपान मुक्त घोषित किया। इस समारोह में डीएम के अलावे सिविल सर्जन डॉ.कृष्ण मोहन प्रसाद सहित जिले के समस्त संबंधित अधिकारीगण व कर्मियों ने भाग लिया। डीएम महेंद्र कुमार ने कहा कि इसके लिए विगत कई वर्षों से प्रयास जारी था जिसके लिए सुपौल जिले वासियों के संकल्प के साथ-साथ नोडल पदाधिकारी व संबंधित पदाधिकारी के कार्यों की सराहना अवश्य होनी चाहिए।

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बिहार में 16 जिले के 130 प्रखंड बाढ़ की चपेट में, केंद्रीय टीम द्वारा सर्वेक्षण शुरू

बिहार के मक्का किसान एक साथ कोरोना के कहर और बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर कोरोना के कारण मक्के के खरीदार आते नहीं हैं और दूसरी ओर किसानों के सामने मक्के को सहेज कर रखने की समस्याएं भी उत्पन्न हो गई हैं। बाढ़ में खेत की फसल के साथ-साथ घर के अन्न भी बह जाने से भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

बता दें कि बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए छह सदस्यीय केंद्रीय टीम बुधवार को देर शाम पटना पहुंची। वह टीम गुरुवार को सवेरे से गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि अन्य बाढ़ ग्रस्त जिलों का दौरा करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव पीयूष गोयल टीम को लीड करेंगे।

यह भी बता दें कि सर्वेक्षणोपरांत सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 16 बाढ़ ग्रस्त जिलों में हुए नुकसान की विस्तृत जानकारियां केंद्रीय टीम को दी गई। नीतीश सरकार के आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि विभाग द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन कर बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारियां दी गई।

चलते-चलते यह भी बता दें कि प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि टीम के साथ नोडल पदाधिकारियों को लगाया गया है और साथ ही सभी जिले के संबंधित जिलाधिकारियों को इस बाबत पूर्व में ही सूचना दे दी गई है। केंद्रीय टीम जहां-जहां भ्रमण करना चाहेगी वह जा सकती है। 4 सितंबर को दिल्ली लौटने से पहले बिहार सरकार के अधिकारियों से आवश्यक जानकारियां भी ली यह कि बाढ़ से साढ़े आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिसमें अब तक 27 लोगों की एवं 88 पशुओं की मौत हो चुकी है।

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पंचतत्व में लीन हुए पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी

भारत के 13वें राष्ट्रपति थे भारत रत्न प्रणब मुखर्जी और उनका कार्यकाल रहा था 2012 से 2017 तक। अपने कार्यकाल को बेहतर तरीके से पूरा करके फिलहाल वे दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग में रह रहे थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों व दिग्गजों ने राजाजी मार्ग स्थित उनके निवास पर उनके पार्थिक शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। दिवंगत प्रणब मुखर्जी को सभी वर्गों का सम्मान प्राप्त होता रहा। वे आम लोगों के बीच रहना पसंद करते थे। अंतिम यात्रा भी आम लोग की तरह ही संपन्न हुई। एक सजे हुए एंबुलेंस में उनके  पार्थिव शरीर को लोधी  विद्युत शवदाह गृह में ले जाकर पुत्र अभिजीत मुखर्जी द्वारा मुखाग्नि देने के बाद संस्कारित किया गया।

बता दें कि राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक रहे प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसंबर 1935 को जन्म ग्रहण किया था। राजनीति शास्त्र से एमए प्रणब मुखर्जी लगभग 6 वर्षों तक विद्यानगर कॉलेज में प्राध्यापक रहने के बाद 1969 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1982 में केंद्रीय वित्त मंत्री, 1995 में विदेश मंत्री और 2004 में रक्षा मंत्री बने। उन्हें पद्म विभूषण और फिर भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

चलते-चलते यह जानिए कि जिस कोरोना के कहर ने दुनिया में कोहराम मचा रखा है उसी कोरोना में 10 अगस्त 2020 को प्रणब मुखर्जी को अपनी चपेट में ले लिया और 31 अगस्त 2020 को उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में दिल्ली के सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली… और दुनिया को अलविदा कह दिया।

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जीवन जो कुछ नहीं दे सका, मौत उसे वह दे जाती है- डॉ.मधेपुरी

वर्ष 2009 से अब तक यानि 11 वर्षों तक सुशांत सिंह राजपूत फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड (मुंबई) में कठिन परिश्रम करने के बावजूद एक भी फिल्म फेयर अवार्ड नहीं पा सका, जबकि सुशांत के लाखों चाहने वाले आज भी हैं।

बता दें कि अवार्ड और पुरस्कार के नाम पर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को वर्ष 2014 में बेस्ट मेल डेब्यू के लिए सर्वप्रथम प्रोड्यूसर गिल्ड फिल्म अवार्ड और बाद में स्क्रीन अवार्ड से नवाजा गया था।

यह भी जानिए कि 3 वर्ष बीतने के बाद 2017 में फिल्म एम एस धोनी यानि भारतीय क्रिकेट कप्तान धोनी का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए सुशांत सिंह राजपूत को बेस्ट ऐक्टर का स्क्रीन अवार्ड तथा उसी वर्ष इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबोर्न में बेस्ट एक्टर अवार्ड से नवाजा गया था।

बता दें कि दुनिया को हम कब अलविदा कहेंगे, यह कोई नहीं जानता। वह प्रतिभा संपन्न सुशांत 14 जून 2020 को दुनिया से चला जाएगा, इसे कोई नहीं जानता था। परंतु बॉलीवुड सितारों की तरह सुशांत सिंह राजपूत ने भी एक सपना देखा था-” दादा साहब फाल्के पुरस्कार” पाने का, जो उसके मरणोपरांत पूरा होने जा रहा है। सचमुच, सच्चे दिल से देखा जाए गया सपना पूरा होने में कायनात की पूरी मदद मिल जाती है। जानिए कि दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स 2021 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को मरणोपरांत दिया जाएगा। अवार्ड कमेटी ने अपनी ऑफिशल इंस्टाग्राम पेज पर घोषित कर इसकी जानकारी दुनिया को दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि 14 जून को मुंबई स्थित बांद्रा वाले अपार्टमेंट में बिहार का बेटा, पूर्णिया जिला निवासी एक्टर सुशांत को का शव मिला था। पिता ने पटना में एक एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस ने केस की जांच शुरू की और लगे हाथ दूसरे ही दिन पूर्णिया के पूर्व लोकप्रिय सांसद पप्पू यादव और मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने नीतीश सरकार से इस केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही जांच प्रगति पर है।

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