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पीएम ने पैरालंपिक खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया

इसी अगस्त महीने की 8 तारीख को टोक्यो- 2020 ओलंपिक का समापन हुआ और भारतीय खिलाड़ियों को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष मेहमान के रूप में आमंत्रित किया और सम्मानित भी। पीएम ने सभी खिलाड़ियों की जमकर सराहना की।

आज प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो पैरालंपिक में भाग लेने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और कहा कि देश आपके साथ खड़ा है और आपसे उम्मीदें लगाए हुए है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि आप अपना 100% देंगे तो देश आप से प्रेरित होकर अपने अन्य संकल्पों को भी पूरा करेगा।

बता दें कि पैरालंपिक- 2020 भी कोविड-19 के कारण स्थगित कर दिया गया था जो अब 24 अगस्त से 5 सितंबर 2021 तक जापान की राजधानी टोक्यो में खेला जाएगा। जहां भारत के 43 दिव्यांग एथलीट 9 गेमों में भाग लेंगे। जबकि वहां कुल गेमों की संख्या 28 है।

जानिए कि जिस 9 स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी भाग लेंगे, वे हैं- 1. जैवलिन थ्रो 2.हाई जम्प 3. शॉट पुट 4. डिस्कस थ्रो 5. तीरंदाजी 6.बैडमिंटन 7.टेबल टेनिस 8.शूटिंग 9.तैराकी

आप इन खेलों का प्रसारण डीडी स्पोर्ट्स पर भी देख सकते हैं।

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आज 16 अगस्त को केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह मंत्री बनने के बाद पहली बार पहुंच रहे हैं बिहार

बता दें कि मंत्री बनने के बाद 16 अगस्त को पहली बार बिहार पहुंच रहे केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह के भव्य स्वागत की तैयारी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पूरी कर ली है। पटना एयरपोर्ट से जदयू मुख्यालय तक के हर रास्ते को पोस्टरों से पाट दिया गया है।

जानिए कि आरसीपी के पूर्व में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के कारण बिहार के हर जिले से उनके स्वागत में जदयू कार्यकर्ताओं के पटना आने की तैयारी है। सभी कार्यकर्तागण मंत्री आरसीपी की एक झलक पाने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में लगे हैं। क्योंकि, लगभग सप्ताह भर आरसीपी के बिहार प्रवास पर रहने की उम्मीद की जा रही है।

यह भी कि संपूर्ण स्वागत समारोह पार्टी के आधिकारिक सोशल साइट पर लाइव प्रसारित किया जाएगा और इसको लेकर प्रदेश मीडिया सेल की टीम द्वारा व्यापक प्रसारण का इंतजाम पूरा कर लिया गया है। यह भी कि 17 एवं 18 अगस्त को केंद्रीय इस्पात मंत्री पटना, नालंदा और शेखपुरा जिलों के कार्यकर्ता-संपर्क एवं आभार कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

चलते-चलते यह भी कि मधेपुरा के समाजसेवी-शिक्षाविद् एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता व मार्गदर्शक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने माननीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह से अनुरोध किया है कि इसी तरह जब-जब मौका मिले तो वे बिहार के शेष सभी जिलों में भी बारी-बारी से पहुंच कर  कार्यकर्ता-संपर्क एवं आभार कार्यक्रमों में भाग लेते रहेंगे ताकि किसी भी जिले के कार्यकर्ता को निराशा ना हो।

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मधेपुरा ने भी मनाया आजादी का 75वां अमृत महोत्सव

आज जहां भारत आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है वहीं मधेपुरा भी कोरोना के कारण बिना बच्चों की सहभागिता के आजादी का जश्न विद्यालय व महाविद्यालय के प्रधान से लेकर भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण के नेतृत्व में मना रहा है। एनसीसी के जवानों की उपस्थिति में जन-गण-मन की धुन बजते रहे और काले-काले बादलों की टुकड़ियों के बीच बूंदा-बूंदी का लुत्फ लेते हुए सभी उपस्थित नर-नारी व युवा आजादी के इतिहास का रसास्वादन करते रहे। इस अवसर पर टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.केपी यादव के द्वारा 10 श्रेष्ठ छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।

Educationist Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri giving certificate & medal to the best NCC Cadet on the occasion of 75th Independence Day In cordial presence of Principal Prof.(Dr.)K.P.Yadav and Senator Dr.Jawahar Paswan at T.P.college Madhepura
Educationist Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri giving certificate & medal to the best NCC Cadet on the occasion of 75th Independence Day in cordial presence of Principal Prof.(Dr.)K.P.Yadav and Senator Dr.Jawahar Paswan at T.P.college Madhepura.

बता दें कि मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ.आलोक कुमार, सतीश कुमार, अधिवक्ता सुधांशु रंजन, आनंद कुमार आदि को संबोधित करते हुए यही कहा कि 75 वर्ष में केवल 74 बार 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया गया और देश को संबोधित भी किया गया।

बस केवल एक बार 1947 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी का जश्न 16 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से मनाया था और देशवासियों को संबोधित किया। ऐसा इसलिए हुआ था कि 15 अगस्त 1947 को राष्ट्रपति भवन, संसद भवन एवं बोट क्लब स्थित इंडिया गेट पर ध्वजारोहण का जश्न मनाते-मनाते ही शाम हो गई थी।

इस अवसर पर डॉ. मधेपुरी ने ध्वजारोहण और झंडोत्तोलन में अंतर की जानकारी भी दी और आजादी के दीवानों को हृदय से नमन किया, बंदन किया। कर्पूरी चौक पर पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला ने ध्वजारोहण किया, जदयू जिला अध्यक्ष गुड्डी देवी ने भी तिरंगे को सलामी दी।

यह भी जानिए कि बीएन मंडल स्टेडियम में मधेपुरा के डीएम श्याम बिहारी मीणा, एसपी योगेंद्र कुमार सहित सभी पदाधिकारियों ने कोरोना वायरस के नियमों का पालन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दिया और जिले के विकास की बातें की। समाजसेवी शौकत अली एवं सीताराम पंडित ने भी तिरंगे को सलामी दी।

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डॉ.महावीर की 25वीं पुण्यतिथि विश्वविद्यालय में मनी

टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य, मधेपुरा के विधायक, सांसद व बिहार के शिक्षा मंत्री रहे डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण, प्रति कुलपति प्रो.(डॉ.)आभा सिंह, कुलसचिव डॉ.मिहिर कुमार ठाकुर, समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेद्र नारायण यादव मधेपुरी, सिंहेश्वर के युवा विधायक चंद्रहास चौपाल, डॉ.शिवनारायण यादव, पूर्व कुलानुशासक सहित सीनेटर व बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ.) नरेश कुमार, विकास पदाधिकारी डॉ.ललन अद्री, पीए टू वीसी शंभू नारायण यादव एवं विश्वविद्यालय अधिकारी-पदाधिकारी व कर्मचारीगण द्वारा उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। सबने यही कहा कि महावीर बाबू  की तरह हम सबों को भी अपने-अपने स्वधर्म का पालन करना चाहिए यानि हमें कर्तव्यनिष्ठ बनना चाहिए।

बकौल डॉ.मधेपुरी भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के 5वें कुलपति रह चुके महावीर बाबू अत्यंत विनोदी स्वभाव के थे और हंसते-हंसते उनकी आंखों से आंसू टपक पड़ते थे। आजकल तो लोग हंसना ही भूलते जा रहे हैं। हंसने के लिए लाफ्टर शो का सहारा लेते हैं।

पुष्पांजलि करने के बाद उनके चारों पुत्रों- इंदु भूषण, डॉ.अरुण कुमार, मनोज कुमार और उमेश कुमार ने पिता द्वारा दी गई नसीहत को याद करते हुए कहा कि अनुशासन को जीवन का आधार बनाकर दूसरों की इज्जत करना- हमें ताजिंदगी सीखते रहना है। मौके पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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सिंहेश्वर में आध्यात्मिक प्रवचन हेतु नवनिर्मित शिव शक्ति भवन के गृह प्रवेश का भव्य समारोह आयोजित

सिंहेश्वर में नवनिर्मित “शिव शक्ति भवन” के गृह-प्रवेश को लेकर भव्य स्नेह मिलन समारोह का आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस भवन के लिए भूूू-दाता बने डॉ.सच्चिदानंद चौधरी और मुख्य निर्माता हुए मनोहर लाल द्वारिका प्रसाद के वंशज इंजीनियर शिवप्रसाद टेकरीवाल और उनकी धर्मपत्नी गायत्री देवी व अन्य सभी दान-दाताओं को समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.मधेपुरी ने ह्रदय से धन्यवाद किया और जमकर सराहना भी की।

MLA Chandrahas Chaupal, Educationist Dr.B.N.Yadav Madhepuri, Brahmakumari Ranju Didi, Er.Shiv Prasad Tekriwal and others unfurling Brahmakumari flag at Singheshwar.
MLA Chandrahas Chaupal, BK Deepak,  Educationist Dr.B.N.Yadav Madhepuri, BK Bhagwati, BK Ranju, BK Kaushyalya, Arvind Pransukhka, Dilip Khandelwal and others unfurling Brahmakumari flag on the occasion of  Shiv Shakti Bhawan Griha- Pravesh at Singheshwar.

बता दें कि जहां समारोह की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी भगवती दीदी कर रही थी वहीं समारोह की निदेशिका की भूमिका में ब्रम्हाकुमारी राजयोगिनी रंजु दीदी देखी गई। दोनों के द्वारा आध्यात्मिक व नैतिक शिक्षा से समाज में मानवीय मूल्यों के विकास के बारे में विस्तार से बातों को रखी गई। स्थानीय केंद्र संचालिका कौशल्या दीदी ने अतिथियों का सत्कार किया, स्वागत किया। मधेपुरा, सहरसा और सुपौल सहित नेपाल से भी ब्रम्हाकुमारी दीदियाँ समारोह में सम्मिलित हुई थी। उनका भी सम्मान किया गया।

Er.Shiv Prasad, Samajsevi Dr.B.N.Yadav Madhepuri, MLA Chandrahas Chaupal, Brahmakumari Ranju Didi and others in celebration gesture at Shiv Shakti Bhawan, Madhepura.
Er.Shiv Prasad Tekriwal, Gyatri Devi, Jawahar Navoday Vidyalaya Principal B.K.N.Singh,  Samajsevi Dr.B.N.Yadav Madhepuri, MLA Chandrahas Chaupal, Brahmakumari Bhagwati and others in celebration gesture at Shiv Shakti Bhawan, Singheshwar.

जानिए जहां गृह प्रवेश समारोह के उद्घाटनकर्ता थे सिंहेश्वर के विधायक माननीय चंद्रहास चौपाल, वहीं मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए थे शिक्षाविद प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी। डॉ.मधेपुरी ने विधायक चंद्रहास चौपाल से ‘शिव शक्ति भवन’ तक सड़क निर्माण एवं सिंहेश्वर में वृद्धाश्रम निर्माण की मांग की जिसे विधायक द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूरा करने की सहमति जताई गई। मौके पर विधायक के दिल में शिक्षक के प्रति सम्मान की सराहना डॉ.मधेपुरी ने खूब की। साथ ही विधायक चंद्रहास चौपाल ने यह भी कहा कि युवाओं को आध्यात्मिकता द्वारा ही नई दिशा मिलेगी।

आरंभ में अतिथियों को पाग, अंगवस्त्रम आदि से सम्मानित किया गया। बाद में अतिथियों की के साथ-साथ नेपाल से आए ब्रह्मा कुमार दीपक, बबीता दीदी, हरी टेकरीवाल, दिलीप खंडेलवाल, विनय वर्धन (खोखा बाबू), अरविंद प्राणसुखका, जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य बीकेएन सिंह, ओम प्रकाश यादव आदि भी ने भी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मंच संचालन किया ब्रह्माकुमार किशोर भाई ने। साथ ही बाहर से आए ब्रम्हाकुमार एवं ब्रम्हाकुमारियों सहित निखिल, सुरेश, अभिषेक, नवीन, सुमित के अलावे मटुकधारी चौधरी व अन्य सबों का स्वागत भी किया गया ब्रह्माकुमार किशोर द्वारा।

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इसरो के संस्थापक डॉ.विक्रम साराभाई की 102वीं जयंती पर बोले डॉ.मधेपुरी

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अपने निवास वृंदावन में भौतिकी के प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बच्चों व युवाओं को इसरो के संस्थापक डॉ.विक्रम अंबालाल साराभाई की 102वीं जयंती पर उन्हें स्मरण व नमन करते हुए ये बातें कही-

आज ही के दिन 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद (गुजरात) में माता सरला व पिता अंबालाल के घर एक बालक का जन्म हुआ जो आगे विक्रम अंबालाल साराभाई के नाम से लोक विश्रुत हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा गुजरात में तथा उच्च शिक्षा कैंब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में हुई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान में भारत को सर्वोच्च स्थान दिलाया।

डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से यह भी कहा कि 28 वर्ष की उम्र में ही साराभाई ने आजादी मिलने के बाद ही 11 नवंबर 1947 को अहमदाबाद में फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री की स्थापना की। कालांतर में वे एटॉमिक एनर्जी कमिशन के चेयरमैन भी बने। डॉ.साराभाई को 76 वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन एवं 40 वैज्ञानिक शोध संस्थाओं की स्थापना करने का श्रेय प्राप्त हुआ। इसलिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण एवं मृत्योपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

अंत में डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे डा.मधेपुरी ने युवाओं से कहा कि एक बार महामहिम राष्ट्रपति डॉ.कलाम ने उनसे यही कहा था- “डॉ.विक्रम अंबालाल साराभाई भारत को वैज्ञानिक बुलंदियों तक ले जाने के लिए अहर्निश काम किया करते थे….. तभी तो उन्होंने मुझे दिल्ली के अशोका होटल में एक बार मिलने का समय रात्रि के 3:30 बजे दिया था।”

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एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा के सम्मान में हर साल 7 अगस्त को “जेवलिन थ्रो डे”

नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त को टोक्यो- 2020 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। अब भारतीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा इस दिन को “राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस” के रूप में मनाएगा।

बता दें कि एएफआई के योजना आयोग के अध्यक्ष ललित भनोट ने कहा है कि चोपड़ा सहित अन्य एथलीटों के सम्मान में पूरे भारत में भाला फेंक को बढ़ावा देने के लिए हम 7 अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस के रूप में मनाएंगे।

जानिए कि एएफआई के ऐसे निर्णय पर टिप्पणी करते हुए गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने कहा कि कभी भी सुपरस्टार वाली मानसिकता अपने ऊपर हावी नहीं होने दूंगा। भाला फेंक के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा का लक्ष्य फिलहाल 2022 में 15 से 24 जुलाई तक अमेरिका में होने वाले “विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप” में स्वर्ण पदक जीतना है।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने गुजरात के उस पेट्रोल पंप के मालिक एवं अन्य को धन्यवाद दिया जिन्होंने नीरज के गोल्ड जीतने की खुशी में 24 घंटे के लिए नीरज नाम के सभी वाहन चालकों/मालिकों को मुफ्त में पेट्रोल देने का काम किया और ऐसा करके भारतीय युवाओं में खेल के प्रति उन्होंने अद्भुत आकर्षण पैदा कर दिया। साथ ही डॉ.मधेपुरी ने सफलता का खुमार कभी हावी नहीं होने देने के लिए नीरज चोपड़ा को जन्म देने वाले एवं परवरिश करने वाले उस देशभक्त माता-पिता सरोज देवी व सतीश कुमार को नमन करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया है।

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सभी खिलाड़ियों को केंद्रीय खेल मंत्रियों ने किया सम्मानित

टोक्यो- 2020 का समापन 8 अगस्त 2021 को हुआ और 9 अगस्त को दिल्ली के अशोका होटल में गोल्डन ब्वाय नीरज चोपड़ा, चांदी की चमक के साथ आई चानू और रवि तथा चार कांस्य पदक विजेताओं- सिंधू, लवलीना, पूनिया और पुरुष हॉकी के साथ-साथ महिला हॉकी टीम को बुलाकर सम्मान दिया खेल मंत्री अनुराग ठाकुर एवं पूर्व खेल मंत्री किरण रिजीजू।

बता दें कि महिला हॉकी टीम को इसलिए बुलाया गया कि ऑस्ट्रेलिया की जिस पुरुष हॉकी टीम ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को हरा दिया वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलियाई महिला हॉकी टीम को धूल चटा दिया। भारतीय महिला टीम हार कर भी अपने प्रदर्शन से सभी हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया।

जानिए कि नीरज ने तो स्वर्ण पदक जीतकर देश का मौसम बदल दिया। नीरज ने कहा जहां देश का प्रधानमंत्री खिलाड़ी से फोन पर बात करें इससे बड़ी बात और क्या होगी। नीरज ने देशवासियों की खुशियों का इजहार करते हुए कहा-

ना खा पाता हूं, ना सो पाता हूं… इतने लोग आते हैं मिलने कि मेडल को पॉकेट में लेकर घूम रहा हूं। जब भी इसे निकाल कर देख लेता हूं….. तो सब ठीक रहता है। यह मेरा नहीं पूरे देश का मेडल है। इस प्रकार के समर्थन के लिए सबको धन्यवाद ! जब हम लोग खेल रहे थे तो पूरा भारत खिलाड़ियों के साथ खड़ा था।

मौके पर खेलप्रेमी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि टोक्यो- 2020 के चैंपियनों का सतरंगी सत्कार ही भारत को आने वाले दिनों में बनाएगा- खेलों की महाशक्ति ! उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक- 2024 से पूर्व भारत के शेष सभी राज्यों में खेल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं।।

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कीर्ति नारायण मंडल को जानने के लिए बुद्ध, नानक और कबीर को जानना जरूरी- डॉ.मधेपुरी

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कोरोना प्रोटोकाॅल के नियमों का पालन करते हुए अपने निवास ‘वृंदावन’ में शिक्षा के महान पुजारी कीर्ति नारायण मंडल को नमन करते हुए उनकी 106वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल ताजिंदगी कबीर की तरह जीवन जीते रहे….. बिल्कुल उसी तरह जैसे कबीर कहा करते थे- जो घर जारे आपनो…. चले हमारे साथ।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि कीर्ति बाबू भगवान बुद्ध की तरह घर-परिवार को त्याग कर लोक कल्याणार्थ सब कुछ न्योछावर करते रहे। उन्होंने पिताश्री के नाम पर ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय की स्थापना की जिसमें 50 बीघे जमीन और ₹25000 दान में दिए। माताश्री के नाम पार्वती विज्ञान महाविद्यालय स्थापित करने में करोड़ों रुपए की कीमती जमीन दान में दी। मिडिल स्कूल, हाई स्कूल और दर्जनों कॉलेजों के निर्माता बन गए कीर्ति बाबू। कितने गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता देकर पढ़ाया उन्होंने। कितनों को नौकरी देकर उनके घरों में रोशनी जला दी उन्होंने।

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों को कीर्ति बाबू के बारे में यह भी कहा कि कीर्ति बाबू तपस्वी थे। वे वर्षों नमक नहीं खाते तो कभी कई महीनों तक केवल दूध पीकर ही रह जाते। वे जहां भी रहते हमेशा साफ-सफाई करते रहते। वे कृष्ण की तरह जूठे पत्तल उठाने में भी संकोच नहीं करते।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने नानक को संदर्भित करते हुए कीर्ति बाबू का एक संस्मरण बच्चों को सुनाकर बच्चों में काम करने का संस्कार भरा। उन्होंने कहा कि एक बार मैंने कीर्ति बाबू को पार्वती कॉलेज में ईंट की दीवार जोड़ते हुए देखा। फिर उन्होंने नानक के बारे में कहा कि नानक उन हाथों का पानी ग्रहण नहीं करते जिनके हाथ में काम करने का कोई ठेला कीर्ति बाबू की तरह नहीं होता। कीर्ति बाबू सचमुच महान हैं। उनकी जयंती हर घर में मनाई जानी चाहिए।

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टोक्यो- 2020 का समापन और भारत

टोक्यो ओलंपिक- 2020 के समापन से एक दिन पूर्व नीरज चोपड़ा के ‘पानीपत’ का पानी ओलंपिक में रंग दिखा दिया। जब नीरज ने जैवलिन को 87.58 मीटर पर गाड़ा और भारत के लिए गोल्ड जीता कि 137 करोड़ भारतीय के भीतर खुशियों की लहर दौड़ गई। हुआ यही कि टोक्यो से दिल्ली तक सिर्फ इंडिया… इंडिया सुनाई देने लगा। सभी भारतवासियों के भरोसे को नीरज ने जीत लिया। 23 वर्षीय हरियाणवी छोड़ा की मेहनत ने रंग ला दी। सभी भारतीयों के चेहरे खिल उठे। टोक्यो के पोडियम में नीरज ने तिरंगा को ऊंचाई प्रदान की और राष्ट्रगान बजवा दिया। इसलिए तो टोक्यो- 2020 के समापन से पहले ही नीरज के लिए 13-14 करोड़ के इनाम का ऐलान हो चुका है।

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक के समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक बजरंग पूनिया ने कहा कि 2024 के पेरिस ओलंपिक में गोल्ड के लिए होगी कोशिश। अभी विश्व के 200 से अधिक देशों में भारत 47वें स्थान पर है जबकि टोक्यो ओलंपिक में नंबर 4 पर रही महिला हॉकी टीम वरना……!

जानिए कि 125 वर्ष में एथलेटिक्स में पहला गोल्ड जीतकर नीरज ने उसे मिल्खा सिंह को समर्पित किया। नीरज ने भाला फेंककर दुनिया को स्तब्ध और भारतीयों को जश्न में डुबो दिया। भारत ने इस बार कुल 7 पदक जीते जिसमें एक नीरज का गोल्ड, 2 सिल्वर- चानू और रवि का तथा 4 कांस्य है- सिंधू, लवलीना, पूनिया एवं पुरुष हॉकी का। भारत यह सातों पदक 17 दिनों तक 205 देशों के 11000 से अधिक एथलीटों के साथ जद्दोजहद करके जीता है। टोक्यो- 2020 ओलंपिक में 33 खेल और 339 इवेंट्स हुए।

बता दें कि टोक्यो में नीरज का गोल्ड भारत का दसवां स्वर्ण पदक है। भारत ने इससे पहले हॉकी में 8 स्वर्ण और शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने एक स्वर्ण जीता था। अद्वितीय जोश एवं अतुलनीय धैर्य से खेलने वाले ही गोल्ड मेडल जीतते हैं।

जब नीरज ने भारत के लिए गोल्ड जीता तो राष्ट्रपति से लेकर खेल मंत्री सहित सभी भारतीयों ने उनके लिए हृदय से बधाइयों का तांता लगा दिया। भारतीय क्रिकेट की शान सुनील गावस्कर ने ताली बजाते हुए खड़े होकर अपने अद्भुत अंदाज में कहा- “टोक्यो के हीरो”।

सुविख्यात कवि कुमार विश्वास ने कहा कि कुश्ती और हॉकी में उम्मीद थी गोल्ड की जो चूक गई। परंतु, नीरज ने गोल्ड के लिए भाला गाड़ दिया।

अंत में ऐन मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने टीवी पर गोल्ड मेडल पहने बीच में खड़े नीरज को देख उस लम्हे को याद करते हुए यूं बयां किया है- राष्ट्रगान का धुन बज रहा था। भारतीय तिरंगा धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा था। मैं भावुक हो रहा था। मेरे अंदर उठ रहे जोश मेरे आंसू को कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे… कदाचित उस घड़ी सभी भारतीयों के रोंगटे खड़े हो रहे होंगे… सबों की यही दशा रही होगी… सभी यही कह रहे होंगे- नीरज पर नाज है…! और यह भी कि… “भारत का भाला… है सबसे आला !!”

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