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शिक्षा जगत के विश्वकर्मा रहे हैं कोसी के कीर्ति नारायण

शिक्षा जगत को अपने जीवन की आहुति देने वाले अमर पुरुष कीर्ति नारायण मंडल को कोसी अंचल ही नहीं बल्कि, आने वाले दिनों में, संपूर्ण राष्ट्र उन्हें याद करेगा, नमन करेगा | बिना किसी की बातों पर ध्यान दिये, सूरज की तरह अपने काम में लगे रहना और शिक्षा का दीप जला-जला कर अज्ञानता के अंधकार को मिटाते  रहना ही उस विश्वकर्मा के जीवन का उद्देश्य रहा |

कोसी के सातो जिलों में तीन दर्जन से अधिक महाविद्यालयों की स्थापना करने वाले उस महामना मालवीय कहलाने वाले कीर्ति बाबू की 102वीं जयंती उनकी माता श्री के नाम वाले पार्वती विज्ञान महाविद्यालय परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष इप्टा कर्मियों द्वारा 18 मार्च को आयोजित किया गया |

बता दें कि श्रद्धानवत अनुयायियों द्वारा कीर्ति बाबू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करने के बाद उनके मानवीय गुणों को करीब से महसूसने वाले समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने सर्वप्रथम अध्यक्षता कर रहे डॉ.नरेश कुमार सहित उपस्थित शिक्षकों-छात्रों को संबोधित किया और यही कहा कि कीर्ति बाबु का जीवन महात्मा कबीर जैसा रहा- जो घर जोर आपनों चले हमारे साथ….. से लेकर….. जस की तस धर दीन्ही चदरिया तक जाकर वे दुनिया को अलविदा कह गये |

इप्टा के संरक्षक डॉ.मधेपुरी विस्तार ने उनके साथ बिताये क्षणों की चर्चा करते हुए अपने संबोधन में यही कहा कि कीर्ति बाबू को जानने के लिए राम-कृष्ण, बुद्ध-महावीर, नानक और मालवीय को जानना होगा | स्वाभिमानी व सत्यवादी कीर्ति नारायण मंडल लोगों को अति साधारण दिखते परंतु उनकी क्षमता असाधारण रही है | समाज के लिए जीना-मरना और कल करो सो आज करना- में विश्वास करने के कारण ही उन्होंने कोसी और सीमांचल के ऊसर वन में तीन दर्जन कॉलेजों की स्थापना कर शिक्षा का दीप जलाया |

मुख्य इप्टा संरक्षक प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.विनय कुमार चौधरी, दशरथ प्रसाद सिंह, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ.एम.आई.रहमान आदि ने अपने विस्तृत संबोधनों में जहां कोई उन्हें मालवीय तो कोई सर सैयद कहा वहीं किसी ने यहां तक कह डाला कि यदि वे यूपी, महाराष्ट्र में जन्मे होते तो देश की हर चौक-चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगी होती………!

अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ.नरेश कुमार ने कहा कि कीर्ति बाबू का रहन-सहन एवं पहनावा बिल्कुल साधारण परंतु आंतरिक व्यक्तित्व बेहद असाधारण रहा है | वे जो भी ठान लेते, सुबह होते-होते उसे आरंभ कर देते |

कार्यक्रम में अंत तक मौजूद रहने वालों में प्रमुख रहे- डॉ.बी.के.दयाल, डॉ.मधुसूदन यादव, इप्टा उपाध्यक्ष आशीष सोना, प्रदेश सचिव सुभाष चंद्र, तुर्वसु, धीरज कुमार आदि | मंच संचालन किया सुभाष चंद्र ने एवं धन्यवाद ज्ञापन किया तुर्वसु ने |

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मधेपुरा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई रंगकर्मी उज्जवल कुमार ने

चार वर्ष पहले यानि 2014 में मधेपुरा जिले के पहले रंगकर्मी के रूप में उज्जवल कुमार ने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्था- NSD (राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) की चुनौतीपूर्ण परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त कर (मात्र 26 सीटों में से एक अपने नाम कर ) बाजी मारी थी | उज्जवल की तमन्ना थी की एनएसडी से निकलने के बाद वह कोसी अंचल की संस्कृति को नई पहचान देने का प्रयास करेगा |

बता दें कि उज्जवल का वह सपना अब पुर्णतः आकार लेता हुआ मधेपुरा के साथ-साथ सुबे बिहार को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कदम बढ़ा चुका है | एनएसडी नई दिल्ली से नाट्यकला में पीजी डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त करने के बाद मधेपुरा का बेटा उज्जवल कुमार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने निर्देशन की बारीकियों का लोहा मनवा रहा है | तभी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने जा रहे ‘आठवें थिएटर ओलंपिक्स’ में उज्जवल कुमार द्वारा निर्देशित नाटक ’01-12-58’ को भी शामिल किया गया है जिसकी प्रस्तुति 8 अप्रैल 2018 को अभिमंच ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में होने जा रही है |

यह भी जानिये कि इस थिएटर ओलंपिक्स में देश-विदेश की नाटकों को शामिल किया जाता है | मधेपुरा के उज्जवल द्वारा निर्देशित नाटक ’01-12-58’ लक्ष्मणपुर बाथे में हुए जनसंघार पर आधारित है | इस वर्ष आठवां थियेटर ओलंपिक्स का आयोजन 17 फरवरी से 8 अप्रैल तक होगा जिसमें 8 अप्रैल को उज्जवल के इस नाटक की प्रस्तुति होगी |

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डीएम मो.सोहैल ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्कों को अस्वीकार किया !

मधेपुरा जिले में लगभग 50 हज़ार एकड़ में लगे मकई के खराब बीज के कारण फसल की ऐसी बर्बादी हुई है कि आलमनगर-मुरलीगंज सहित विभिन्न प्रखंडों के पंचायतों व गांवों के आक्रोशित किसानों ने लगातार प्रखंड मुख्यालयों पर धरना दिया, क्षतिपूर्ति की माँग की तथा आत्महत्या करने पर भी उतारू दिखे | विधानसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया |

बता दें कि सूबे में ऐसी समा बांधते देखकर जहाँ जिले के संवेदनशील एवं अति डायनेमिक डीएम मो.सोहैल एक ओर अपने कृषि वैज्ञानिकों व पदाधिकारियों की पूरी टीम को साथ लेकर मुरलीगंज प्रखंड के रामपुर- दीनापट्टी गाँव के अन्नदाता किसानों की लहलहाते बिना दाना वाले मकई के खेत की आड़ पर गिरते-संभलते एवं परेशानियों से रू-ब-रू होते दिख रहे हैं वहीं दूसरी ओर 22-23 मार्च को बिहार दिवस समारोह को भव्यता के साथ मनाने हेतु देश की रक्षा एवं सीमा की सुरक्षा में शहीद हुए इस जिले के जाँवाजों को सम्मान देने के लिए जिला अतिथि गृह के सामने वाले (तत्कालीन सांसद डॉ.रवि के विकास मद से बने) चिल्ड्रन पार्क को “शहीद पार्क” नामित कर उन शहीदों को सम्मानित करने के लिए (स्वतंत्रता संग्राम से अद्यतन) शहीदों की सूची उपलब्ध कराने व स्थल चयन करने हेतु डीएम मो.सोहैल ने समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को जिम्मेवारी सौंप दी है |

Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with Senior Deputy Collector Md.Allama Mukhtar , Executive Engineer Building Mr.Manoj Kumar Singh & Asst. Engineer Mr.Madhusudan Kumar Karn & others regarding the construction of Shahid Platform in Shahid Park (Children Park) opposite District Guest House , Madhepura.
Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri discussing with Senior Deputy Collector Md.Allama Mukhtar , Executive Engineer Building Mr.Manoj Kumar Singh & Asst. Engineer Mr.Madhusudan Kumar Karn & others regarding the construction of Shahid Platform in Shahid Park (Children Park) opposite District Guest House , Madhepura.

डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने मधेपुरा आजतक को बताया कि मक्का की बाली में दाना नहीं आने का कारण जहाँ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा “मौसम में बदलाव” को कारण माना जा रहा है वहीं डीएम ने कृषि वैज्ञानिकों के तर्कों को मानने से इनकार किया और कहा कि यदि ऐसा होता तो सभी खेत का मक्का दाना विहीन होता | जिला पदाधिकारी ने कहा कि पायोनियर कंपनी के 3535 नंबर के बीज वाले मक्का में भरपूर दाना है वहीं उसी कंपनी के 3522 नंबर वाले में दाना बिल्कुल नहीं है | तभी तो उन्होंने बीजो मुखिया द्वारा 3535 लगे खेत में पुरा दाना पाया वहीं विपीन यादव द्वारा पायोनियर 3522 लगे खेत में दाना विहीन फसल देखा |

यह भी जानिए कि डीएम ने कृषि वैज्ञानिकों को विश्लेषण करने की सलाह देते हुए आशंका व्यक्त किया कि कदाचित बीज के प्रोसेसिंग में गलती हुई है | जहाँ डीएम मो.सोहैल ने एक ओर पीड़ित किसानों से बिना किसी तरह की रसीद के ही आवेदन जमा लेने के बाबत सभी प्रखंड पदाधिकारियों को निदेश भेजा है वहीं दूसरी ओर पायोनियर 3522 में खराबी के लिए बीज कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाई आरंभ कर दी है | इस बाबत डीएम द्वारा राज्य सरकार को पत्र भेजा जा रहा है वहीं केंद्र सरकार की जांच टीम को मधेपुरा बुलाई जा रही है | किसानों को मानसिक व आर्थिक परेशानी नहीं हो इसके लिए प्रभावित किसानों को 4% ब्याज पर लोन मुहैया कराने की बात चल रही है | अब तक जिले के 1860 किसानों ने शिकायत की है |

यह भी बता दें कि जहाँ डीएम द्वारा फसल सर्वेक्षण के दौरान डीएओ यदुनंदन प्रसाद यादव, बीएओ विनोद कुमार श्रीवास्तव, सीओ शशि भूषण कुमार, कृषि समन्वयक आनंद कुमार एवं कृषि सलाहकार रजनीश कुमार आदि कुछ ग्रामीण किसानों को साथ लिए चल रहे थे वहीं अतिथि गृह के सामने शहीदों को सम्मान वाले शिलापट्ट स्थल निर्माण को लेकर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विचार-विमर्श करते हुए स्थापना के वरीय उपसमाहर्ता मो.अल्लामा मुख्तार, भवन निर्माण के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सिंह, सहायक अभियंता मधुसूदन कुमार कर्ण आदि से अनुरोध किया कि इस शहीद पार्क में अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ-साथ साफ-सफाई की भी व्यवस्था बिहार दिवस के आयोजन से पूर्व कर ली जाय |

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अब बसों में भी ट्रेन की तरह बायो टॉयलेट होगा

लंबी दूरी की बसों में ट्रेनों की तरह जरूरी है टॉयलेट | यूँ आरंभ में तो ट्रेनों में भी टॉयलेट नहीं हुआ करता था  | अर्धशतक बीत गया ट्रेन में टॉयलेट लगते-लगते |

बता दें कि अंग्रेजों द्वारा 16 अप्रैल 1853 को भाप के इंजन के जरिये पहली ट्रेन चलाई गई थी जिसमें लगभग 400 यात्रियों ने बम्बई यानी मुंबई शहर के बोरीबंदर (वर्तमान छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणे स्टेशन तक की यात्रा बिना टॉयलेट वाली ट्रेन में पूरी की थी |

यह भी जानिये कि आगे 55 वर्षों तक यानी 1908 ई. तक ट्रेनों में यात्रियों के लिए टॉयलेट की सुविधा नहीं थी | बसों की तरह ही जब अनिवार्य एवं अपरिहार्य स्थिति हो जाती तब ट्रेन को भी बस की तरह रोकवाकर यात्री द्वारा मल-मूत्र का परित्याग कर लिया जाता था और फिर उसे बैठाकर ट्रेन खुलती थी |

यह भी बता दें कि अखिलेश चन्द्र सेन नामक यात्री को 1891  ई. में शौच/लघुशंखा करते छोड़कर ट्रेन खुल गई | श्री सेन द्वारा इसके विरोध में संघर्ष करते हुए दिये गये एक आवेदन के आलोक में अंततः 1909 ई. में जाकर फर्स्ट क्लास के डब्बे में सर्वप्रथम टॉयलेट बनाया गया और वह आवेदन पत्र आज भी दिल्ली के रेल संग्रहालय में सुरक्षित है जिसे कोई भी देख सकता है |

जानिए कि अब ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाया जाना शुरू हो गया है ताकि रेलवे स्टेशनों पर गाड़ी खड़ी होने पर भी गंदगी नहीं फैलेगी- क्योंकि मल-मूत्र को बायोलॉजिकल पद्धति से नष्ट कर दिया जाता है तथा हानिकारक पानी को क्लोरीन चेंबर होकर बाहर निकाल दिया जाता है |
जो भी हो ट्रेन के सभी कंपार्टमेंट में तो टॉयलेट बन गया फिर भी इंजन के ड्राइवर को स्टेशन के टॉयलेट में ही जाना पड़ता है | बाहरहाल केंद्र सरकार के रेल बजट में अब इंजन में भी बायो टॉयलेट बनाने की स्वीकृति के साथ-साथ बजट में भी प्रावधान कर दिया गया है |
अंत में यह कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है | अस्तु आने वाले समय में लंबी दूरी की बसों में जरूरी लगता है टॉयलेट का होना | मोटर संशोधन विधेयक की समीक्षा के लिए सांसद  वी.पी.सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली 24 सदस्यीय संसदीय समिति ने “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत इस पर सरकार से गंभीरता पूर्वक विचार करने को कहा है | फिलहाल भारत में बहुत कम बसों में टॉयलेट की व्यवस्था की गई है |

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भारत ने निशानेबाजी में अमेरिका और चीन को धूल चटाया

पहली बार भारत ने मेक्सिको में आयोजित आईएसएसएफ निशानेबाजी वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर चीन व अमेरिका के दबदबे को धता बता दिया | बता दें कि जहाँ वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में 4 स्वर्ण सहित कुल 9 पदकों के साथ भारत प्रथम स्थान पर रहा वहीं 3 स्वर्ण समेत 6 पदकों के संग अमेरिका को दूसरे स्थान पर और 2 स्वर्ण समेत 5 पदकों के साथ चीन को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा |

यह भी बता दें कि हरियाणा के झज्जर की 16 वर्षीय मनु भाकर के दूसरे गोल्ड मेडल के साथ ही भारत शीर्ष पर पहुंच गया | मनु ने लगातार स्वर्ण जीतकर निशाने-बाजी जगत को हैरान कर दिया | और तो और भारत के लिए नंबर एक जोड़ी के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे- मनु भाकर और ओमप्रकाश की जोड़ी ने क्वालीफिकेशन में अद्भुत अंक जुटाये |

जानिये कि ग्यारहवीं कक्षा की निशानेबाज छात्रा मनु भाकर को विश्ववास नहीं हो रहा है कि वह विश्वकप जैसी प्रतियोगिता में 2 दिन के अंदर दो स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही | ऐसा शानदार प्रदर्शन कि समस्त निशानेबाजी जगत को हैरान होना पड़ा |

संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि जिन भारतीय निशानेबाजों ने इतिहास रचा वे हैं- 4 स्वर्ण पदक विजेता : शहजार रिजवी, मनुभाकर, अखिल श्योरण एवं मनु-ओमप्रकाश की जोड़ी | रजत पदक पदक विजेता में मात्र एक नाम दर्ज कराया है- अंजुम मुद्दगल ने | कांस्य पदक (4) के लिए जिन्होंने संघर्ष किया वे हैं- मेहुली घोष, जीतू राय, रवि कुमार और मेहुली-दीपक की जोड़ी |

मेडल जीतकर भारत को शीर्ष पर ले जाने के बाद भारतीय निशानेबाजों में अग्रणी मनु भाकर ने कहा कि अब हमारी जिम्मेदारी बढ़ गयी है | आगे इसे बरकरार रखते हुए भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदों पर हमें अब खड़ा उतरना होगा |

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खुद को संवारेंगे या संस्कृति को सहेजेंगे संसद सदस्य ?

भारत अपने आप में एक महत्वपूर्ण विश्व विरासत है | विश्व विरासत की सूची में सांस्कृतिक संपदा के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र है भारत | भारत के लिए अपनी संस्कृति को हर हाल में सहेजकर तथा सम्मान के साथ बचाकर रखना अपेक्षित है | परंतु, भारतीय संसद के सदस्यगण अपनी संस्कृति को सहेजने के बजाय खुद को नाना प्रकार की सुविधाओं से लैस करने एवं सँवारने में लगे रहते हैं |

तभी तो प्रेम व भाईचारे वाले त्यौहार जिसे आम लोगों द्वारा भी उमंग के साथ खुशियाँ बांटने वाला पर्व ‘होली’ कहकर संबोधित किया जाता है तथा मथुरा-वरसाने की वह ‘होली’ जो परम को भी प्रिय है | बावजूद इसके हमारे संसद सदस्यों की अवहेलना के चलते केंद्रीय डाक विभाग द्वारा आजादी के बाद से आज तक कोई डाक टिकट ‘होली’ को लेकर जारी नहीं किया गया | जबकि दक्षिण अमेरिका का ‘गुयाना’ दुनिया का एकलौता ऐसा देश है जिसने ‘होली’ पर लगभग 50 वर्ष पूर्व (26 जनवरी 1969) ही चार डाक टिकटो का खूबसूरत सेट जारी किया था जिसमें राधा-कृष्ण को होली खेलते हुए तथा रंग-गुलाल से बचते-बचाते हुए दिखाया गया है |

बता दें कि यह कितनी अफसोस की बात है कि जो भी त्यौहार यानी ‘होली, ईद….. आदि हमारे देश में इतना अहम हैं, उन पर संसद-सदस्यों द्वारा अभी तक ध्यान नहीं दिये गये हैं और ना ही डाक टिकटें जारी किये गये हैं  | अलबत्ता एक दो के अलाबे सभी सांसद सदस्यगण वेतन-भत्ता व अन्य सारी सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए सदैव ‘कागचेष्टा वकोध्यानंम….’ को भी मात देने में लगे रहते हैं बल्कि संस्कृति भांड़ में जाय तो जाय…… उसकी कभी चिंता नहीं करते |

हाँ ! 10 वर्षों की सतत मांग के बाद ही भारत में दीपावली पर 7 अक्टूबर 2008 को तीन डाक टिकट जारी किए गये | इसमें भी गुयाना हमें पीछे छोड़ दिया | क्योंकि , गुयाना लगभग 30 वर्ष पूर्व ही दिपावली पर चार टिकट जारी कर दिये थे जिसमें महालक्ष्मी के साथ दीप दान का चित्र बना है |

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इरादे हो नेक, हौसले सदाबहार……. आइए ! मिलकर बनायें अपना बिहार- MLC डॉ.संजीव कुमार

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह के द्वारा सदन में “नियोजित शिक्षकों के वेतन के विरुद्ध बैंक से लोन दिये जाने” के बाबत एक अल्प सूचित प्रश्न पूछा गया | सदन में MLC डॉ.संजीव ने माननीय अध्यक्ष महोदय से कहा कि जब राज्य सरकार के किसी भी कर्मी को वेतन के विरुद्ध लोन देने का प्रावधान है तो नियोजित शिक्षकों को इसके लिए इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ती है |

बता दें कि कोसी के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह के इस सवाल के जवाब में प्रभारी वित्त मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यही कहा- “राज्य सरकार इस मामले को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में उठायेगी |”

यह भी जानिये कि MLC डॉ.संजीव कुमार सिंह ने सदन में माननीय अध्यक्ष महोदय के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा वर्ग दशम एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की परीक्षाओं से संबंधित सारी प्रक्रियाएं ‘ऑन लाइन’ कर दी गई है जो स्वागत योग्य है | परंतु, अधिकांश विद्यालयों/महाविद्यालयों को कंप्यूटर संबंधी सुविधाएं नहीं रहने के कारण वसुधा केंद्र या साइबर कैफे पर निर्भर करना पड़ता है | जिसके फलस्वरूप पंजीयन से लेकर परीक्षा प्रपत्रों में अनेक त्रुटियां रह जाती हैं और इन गलतियों के कारण प्रभारी शिक्षकों या प्राचार्यों को बेवजह दंड भुगतना पड़ता है | महोदय, क्या सरकार उक्त समस्या के समाधान हेतु ऐसे संस्थानों में कंप्यूटर कक्ष के साथ-साथ कंप्यूटर आदि की व्यवस्था बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में जमा राशि के माध्यम से कराना चाहेगी ?

बता दें कि विधान पार्षद डॉ.संजीव ने सदन में आगे माननीय अध्यक्ष महोदय से पुनः अनुरोध किया कि विगत माध्यमिक परीक्षाओं में परीक्षार्थियों के कभी जूते खोले गये तो कभी चश्मे उतारे गये- ऐसी स्थिति में वे सहज होकर परीक्षा कैसे दे पायेंगे ? अच्छा होगा कि भविष्य में नजदीक के केंद्रों पर परीक्षा देने की व्यवस्था हो और जिन विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है वहां बाउंड्रीवाल बनाया जाय | परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पूर्व यानि गेट से बाहर ही सहजतापूर्वक सघन जांच करा ली जाय |

और यह भी जानिए कि ताजिंदगी MLC रहने वाले शारदा बाबू के समय से अद्यतन उनके पुत्र एमएलसी डॉ.संजीव के कार्यकाल में भी वित्त रहित शिक्षकों एवं समान काम के लिए समान वेतन भुगतानादि की चर्चाएं करते रहने वाले बी.एन.मंडल कॉमर्स कॉलेज के फाउंडर एवं भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा शिक्षकों के कई महीनों से वेतन/पेंशन नहीं मिलने के सवाल को उठाते हुए विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह ने सदन में माननीय अध्यक्ष जी से यही कहा-

“महोदय ! विभागीय लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी के कारण ही 6 महीने से शिक्षकों को वेतन/पेंशन नहीं मिला है | क्या सरकार वेतन/पेंशन भोगियों को इस विलंब के कारण हुई परेशानियों के बाबत सूद सहित वेतन/पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करेगी- राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालयों के न्यायादेशों के अनुसार…….!!”

यूँ कहने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है जबकि शिक्षा विभाग द्वारा 1625 करोड़ की राशि सरेंडर किये जाने का समाचार चंद रोज कबल दैनिक जागरण में छपा है |

नोट- एमएलसी डॉ.संजीव को शिक्षकों के हितार्थ सदन में दहाड़ते हुए देखना व सुनना चाहते हैं तो नीचे क्लिक करें |

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केन्द्र सरकार अब 6 माह का ट्रेनिंग देकर ही पैदा करेगा डॉक्टर

1956 ईस्वी. से राज्यों एवं केन्द्र सरकारों द्वारा मनोनीत एवं निर्वाचित केवल चिकित्सीय सदस्यों द्वारा गठित पारदर्शी संस्था MCI (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) को खत्म कर NMC (नेशनल मेडिकल कमीशन) गठन करने हेतु भारत सरकार ‘बिल’ पारित करने जा रही है I देशभर के डॉक्टरों ने गोलबंद होकर इस बिल के विरोध में सड़क से सदन तक चरणबद्ध आंदोलन करने की घोषणा की है I

बता दें कि IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के प्रमंडलीय सचिव डॉ. सच्चिदानंद यादव, जिला सचिव डॉ. दिलीप कुमार सिंह, डॉ.बी.एन.भारती, डॉ.पी.के. मधुकर, डॉ.आलोक निरंजन, डॉ. बरुण कुमार, डॉ. एन.एन. सिंह आदि ने कहा कि इस विधेयक के पास हो जाने से गैरचिकित्सक सदस्यों, जिन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का कोई ज्ञान नहीं है, का साम्राज्य स्थापित हो जाएगा I सोचिए तो सही गैरचिकित्सक द्वारा चिकित्सकों के लिए कानून-नियम बने- यह कितनी बड़ी विडंबना है I

यह भी बता दें कि विधेयक पास होने पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को मनमाना फीस तय करने का अधिकार मिलेगा I और तब इस मनमाने फीस के बोझ तले गरीब व मेधावी छात्रों के डॉक्टर बनने के सपने पर ग्रहण लग जाएगा I इतना ही नहीं, “ब्रिज कोर्स” के नाम पर मनमाना पैसा उगाही कर अन्य धारा के ग्रेजुएट्स को मात्र 6 माह ट्रेनिंग देकर मॉडर्न मेडिकल सिस्टम में कार्य करने की अनुमति देना बिल्कुल उसी तरह है जैसे एक कार ड्राइवर को बायाँ दायाँ ट्रेनिंग देकर हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस देना !

Civil Surgeon Dr.Gadadhar Pandey along with Lady Doctors Dr.Poonan Kumari, Dr.Rashmi Bharti, Dr.Naidu Kumari & Secretary Red Cross Society Dr.A.K.Mandal, Divisional Secretary IMA Dr.S.N.Yadav and others waiting to co-operate Cycle Rally on 11th March against NMC Bill.
Civil Surgeon Dr.Gadadhar Pandey along with Lady Doctors Dr.Poonan Kumari, Dr.Rashmi Bharti, Dr.Naidu Kumari & Secretary Red Cross Society Dr.A.K.Mandal, Divisional Secretary IMA Dr.S.N.Yadav and others waiting to co-operate Cycle Rally on 11th March against NMC Bill.

यह भी जानिए कि महिला चिकित्सक डॉ.पूनम कुमारी, डॉ.नायडू कुमारी, डॉ. रश्मि भारती आदि ने मधेपुरा अबतक को बताया कि इस विधेयक के लागू होने से वर्षों MBBS, MS की पढ़ाई करते हुए तमाम परीक्षाएं उत्तीर्ण होने के बाद भी “एग्जिट परीक्षा” देना चिकित्सकों के लिए प्रताड़ना है- जो पूरी तरह पैसा उगाही करने वाले गैरचिकित्सक माफियाओं का साम्राज्य स्थापित करना है I चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार को चरम तक ले जाना है I

आज 11 मार्च को वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ.ए,के.मंडल, डॉ.मिथिलेश कुमार, डॉ.अखिलेश कुमार, डॉ.एल.के.लक्ष्मण और साइकिल पर सवार समस्त चिकित्सकों द्वारा विधेयक के विरोध में रासबिहारी उच्च विद्यालय के मैदान से शहर में निकाली जाने वाली साइकिल रैली को सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडे ने हरी झंडी दिखाई | डॉ.पांडे ने कहा कि आगामी 25 मार्च को विरोध प्रदर्शन करने हेतु दिल्ली में महापंचायत का आयोजन किया गया है | सबों ने इस विधेयक को जनविरोधी, छात्र विरोधी, गरीब विरोधी और भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला बताते हुए यही कहा कि एनएमसी बिल आने के बाद कॉर्पोरेट घरानों को फायदा होगा क्योंकि देश के मेडिकल कॉलेजों के 40% सीट पर कारपोरेट घराने के लोगों का अधिकार होगा | इस बिल के खत्म होने तक आईएमए अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन जारी रखेगा ……|

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नेहरू युवा केंद्र खासकर ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारता है…… !

भारत सरकार के ‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय’ के अधीन क्रियाशील है नेहरू युवा केंद्र संगठन, जो भारत के सभी राज्यों के प्रत्येक जिले में कार्यरत है | यह नेहरू युवा केंद्र विशेष रूप से ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने का कार्य करता चला आ रहा है |

बता दें कि जगमग नगरों से दूर बसे गाँव में रहने वाले युवाओं के अंदर सोयी प्रतिभाओं को जगाता है यह नेहरू युवा केंद्र मधेपुरा | टूटे-फूटे कच्चे घरों में बिखरी एवं खोई प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने हेतु निरंतर प्रयास करती है इस केंद्र के कोऑर्डिनेटर अजय कुमार गुप्ता की पूरी टीम |

Chief Guest Dr.Madhepuri boosting players at BN Mandal Stadium Madhepura.
Chief Guest Dr.Madhepuri boosting players at BN Mandal Stadium Madhepura.

यह भी जानिए कि नये वर्ष के साथ ही जिले के सभी तेरहो प्रखंड में अलग-अलग निर्धारित तिथियों के अनुरूप प्रखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की गई | प्रत्येक प्रखंड में कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स आदि खेल का आयोजन किया गया | प्रत्येक विधा में चयनित प्रतिभागियों को जिला स्तर पर अपनी क्षमता व दक्षता दिखाने का अवसर दिया गया | तदनुरूप तीन दिवसीय जिला स्तरीय खेलों का आयोजन टी.पी.कॉलेज परिसर में एवं समापन बी.एन.मंडल स्टेडियम में किया गया |

बता दें कि समापन के दिन मुख्य अतिथि के रुप में पुरस्कार वितरण के लिए आमंत्रित किये गये समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल से सामाजिक सौहार्द और भाईचारा के साथ-साथ देश की एकता और अखंडता भी जुड़ी हुई है | डॉ.मधेपुरी ने हाथ की पाँचों उंगलियों को अलग-अलग खेल, रेल, सिनेमा, हिंदी और महात्मा गांधी बताते हुए कहा कि यह  पांचो तत्व भारत की एकता और अखंडता को हमेशा बनाये रखेगा |

अंत में मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने दौड़ में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय आये उदय कुमार मेहता, शिवकुमार एवं अखिलेश को मोमेंटो एवं सर्टिफीकेट हस्तगत कराया | फिर कबड्डी में विजेता टीम ‘ग्वालपाड़ा’ एवं उपविजेता टीम ‘पुरैनी’ को तथा फुटबॉल में विजेता टीम ‘मिठाही’ एवं उपविजेता टीम ‘जोगवनी’ को अध्यक्षता कर रहे नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक श्री अजय कुमार गुप्ता सहित श्री कुंवर जी, श्री जयकुमार, मो.इसराइल, श्री महेश पासवान आदि सहित डॉ.मधेपुरी द्वारा पुरस्कृत किया गया |

मौके पर माया के अध्यक्ष राहुल यादव, सुधांशु शेखर, ललन कुमार एवं स्थानीय खेल प्रेमी अंत तक मौजूद रहे |

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विरासत की श्रेष्ठता अपनाएं तो समाज आगे बढ़ेगा- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा का किरण पब्लिक स्कूल, जो अपनी उत्कृष्टताओं के चलते अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था द्वारा जिले के प्रथम प्रमाणित स्कूल बना, अपने स्थापना काल से ही प्रतिवर्ष हर महीने भिन्न-भिन्न प्रकार की शैक्षिक एवं खेलकूद से संबंधित प्रतियोगिताएँ आयोजित करता है और वर्ष में एक दिन उत्साह के साथ समारोह पूर्वक आयोजित “Prize Distribution Ceremony” में सर्वाधिक अंक व विशिष्ट स्थान प्राप्त करने वाले तीन-तीन छात्र-छात्राओं को चयनित कर प्रोत्साहित करते हुए सम्मानित किया जाता है |

बता दें कि विभिन्न विधाओं में चयनित छोटे-बड़े सभी छात्रों को पुरस्कृत करने हेतु आयोजित समारोह का शुभारंभ उद्घाटनकर्ता के रूप में SDM संजय कुमार निराला, मुख्य अतिथि समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, स्कूल की निदेशिका किरण प्रकाश व प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

यह जानें कि अतिथियों के स्वागत व सत्कार के बाद भाषण, वाद-विवाद, क्विज एवं अन्य शैक्षिक विधाओं एवं विभिन्न प्रकार के खेलों में प्रथम-द्वितीय-तृतीय आये प्रतिभागियों को मोमेंटो आदि देकर उद्घाटनकर्ता, मुख्य अतिथि व अन्य द्वारा पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित किया गया |

इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता एसडीएम ने छात्रों को समय से स्कूल आने की सीख देते हुए अपने स्कूली जीवन की चर्चाएं की | उन्होंने कहा कि एक दिन प्रार्थना समाप्त होने के बाद स्कूल आने पर उन्हें अकेले प्रार्थना करना पड़ा था, तब से वे सदा समय पर स्कूल आते रहे, कभी लेट नहीं हुए |

मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने अपनी विरासत की श्रेष्टताओं की चर्चा करते हुए आधुनिक बिहार के निर्माता एवं प्रथम विधि मंत्री (बिहार) शिव नंदन प्रसाद मंडल की चर्चा की एवं बच्चों से यही कहा कि वे हमेशा यही चिंतन किया करते थे –

“…..No Soul should remain uneducated on the Earth.”

डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि किरण पब्लिक स्कूल के संस्थापक जयप्रकाश बाबू भी अपनी विरासत की ऐसी-ऐसी श्रेष्टताओं को अपना कर ही इस स्कूल की स्थापना की होगी जिसे यहाँ के सभी शिक्षक कर्मियों द्वारा प्रतिदिन ऊंचाई प्रदान किया जा रहा है | उन्होंने समर्पित सभी शिक्षकों को कोटि-कोटि साधुवाद दिया |

मौके पर निदेशिका किरण प्रकाश, प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश ने अपने उदगार से बच्चों को प्रोत्साहित किया | प्राचार्य किशोर कुमार ने मंच संचालित किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी किया |

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