डिप्टी कलेक्टरी छोड़कर बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं राकेश

डिप्टी कलेक्टर राकेश कुमार बक्सर जिले में पदस्थापित हैं। डिप्टी कलेक्टर की नौकरी में चयन होने से पहले राकेश कुमार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय क्षेत्र अंतर्गत मुरारका कॉलेज सुल्तानगंज में भूगोल के शिक्षक रहे हैं। चंद वर्षों की पढ़ाई में ही उनके कई छात्र सुल्तानगंज से निकलकर जेएनयू दिल्ली विश्वविद्यालय एवं बीएचयू सरीखे शीर्षस्थ संस्थानों में जा चुके हैं। भला क्यों नहीं, राकेश कुमार भी तो जेएनयू के प्रतिभा संपन्न छात्रों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने जेएनयू से ही भूगोल में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है।

राकेश ने यह बताया कि प्रशासनिक सेवा में आकर्षण तथा पारिवारिक दबाव के कारण ही उन्होंने कालेज शिक्षक की नौकरी छोड़कर डिप्टी कलेक्टरी में अपना योगदान दिया था। वर्तमान सरकारी सेवा में जाने से पूर्व राकेश ने टीएमबीयू के कुलसचिव को लियन पर बिना वेतन की छुट्टी हेतु आवेदन दिया था। उनकी छुट्टी विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत हुई या नहीं इसकी विधिवत जानकारी लिए बिना वे चले गए….. उन्होंने अपनी सेवा से इस्तीफा नहीं दिया था।

बकौल राकेश अब उन्हें प्रशासनिक सेवा की नौकरी में मन नहीं लग रहा है। वे पुनः छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं, बच्चों के बीच ज्ञान की रोशनी फैलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2008 तक कॉलेज में सेवा देने के बाद वे बक्सर चले गए थे। फिलहाल बक्सर जिले में उनका प्रशिक्षण चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा बीएनएमयू के स्थायी कुलपति तथा भागलपुर टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने कहा कि राकेश कुमार द्वारा दिए गए आवेदन पर विचार किया जाएगा। सिंडिकेट से पारित कराकर यथोचित कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत कुलपति डॉ.राय ने कहा कि राकेश कुमार को प्रशासनिक सेवा की नौकरी से इस्तीफा देनी पड़ेगी।

 

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