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मोदीजी, फिर टीवी पर आईए! नोटबंदी का स्याह सच भी बताईए !

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा हमने खो दिया। वित्तीय वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी दर गिरकर 6.1 प्रतिशत पर आ गई, जबकि इस दौरान चीन की आर्थिक विकास दर 6.9 प्रतिशत रही। चारो तिमाही को मिलाकर यानि पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल जीडीपी दर 8 प्रतिशत थी, जबकि इस साल यह 7.1 प्रतिशत रही। जानकारों के मुताबिक अर्थव्यवस्था में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण पिछले साल के अंत में मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी रही है।

हालांकि केन्द्रीय सांख्यिकी विभाग विकास दर में आई कमी के लिए केवल नोटबंदी को जिम्मेदार नहीं मानता। उसका कहना है कि गिरावट की कई वजहें हैं जिनमें से एक नोटबंदी भी है। वित्तमंत्री अरुण जेटली भी कह रहे हैं कि विकास की रफ्तार में आई गिरावट के लिए नोटबंदी नहीं, पूरे विश्व में जारी आर्थिक मंदी और यूपीए सरकार जिम्मेदार है। रही बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तो वे स्पेन जाकर भारत को निवेश के लिए पहले से अधिक मजबूत बता रहे हैं। जाहिर है, कोई सच मानने को तैयार नहीं। पर नोटबंदी का स्याह सच यह है कि अगर जीडीपी की गणना में छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्रों के आंकड़े शामिल कर दिए जाएं, जिन पर नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार पड़ी और जिन्हें हमारे देश की जीडीपी की गणना में शामिल नहीं किया जाता, तो स्थिति बद से बदतर होती दिखेगी।

देश को यह जानना चाहिए कि नोटबंदी के बाद एक कृषि को छोड़ सारे क्षेत्रों में – चाहे वो विनिर्माण हो, मैन्यूफैक्चरिंग हो या सेवा क्षेत्र – भारी गिरावट आई। कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली जैसे बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर एकदम से चरमरा गई।

नोटबंदी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इससे जीडीपी में दो प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के मुताबिक नोटबंदी एक भूल थी। इसके बुरे परिणामों की आशंका जताते हुए उन्होंने कहा था कि इतने बड़े निर्णय के पीछे उन्हें कोई कारण नहीं दिखता। वर्ल्ड बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री एवं वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने तो इसे पिछले 70 वर्षों में आर्थिक नीति की सबसे बड़ी भूल करार दिया था। क्या ये तमाम आशंकाएं आज सच होती नहीं नहीं दिख रहीं?

चलते-चलते एक बात और, केन्द्र सरकार ने नोटबंदी के बाद जितना कालाधन मिलने की बात कही, क्या उससे कई गुणा अधिक नुकसान जीडीपी में गिरावट से देश को नहीं हुआ? इसमें नए नोटों को छापने का खर्च मिला दें तो सोचिए नुकसान का आंकड़ा कहां तक जाएगा! और हां, नोटबंदी के कारण जो जानें गईं क्या वो कभी लौट के आएंगी? मोदीजी, आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि एक बार फिर टीवी पर आईए और अपने ‘भाईयों एवं बहनों’ को नोटबंदी का स्याह सच भी बताईए!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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यूपीएससी के नतीजे घोषित, कर्नाटक की केआर नंदिनी टॉपर

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2016 का परिणाम घोषित कर दिया गया। कर्नाटक की केआर नंदिनी इस साल की टॉपर रहीं। दूसरे स्थान पर अनमोल शेर सिंह बेदी रहे, जबकि गोपाल कृष्ण रोनंकी को तीसरा स्थान मिला। चौथे नंबर पर फिर एक लड़की सौम्या पांडे ने बाजी मारी और टॉप फाइव में पांचवें पायदान पर अभिलाष मिश्रा रहे। टॉप 10 उम्मीदवारों में तीन और टॉप 25 में सात लड़कियां शामिल हैं।

यूपीएससी द्वारा जारी सफल उम्मीदवारों की सूची में इस साल कुल 1099 नाम हैं। इनमें 180 आईएएस, 150 आईपीएस और 45 आईएफएस के रूप में चयनित हुए हैं। गौरतलब है कि सफल उम्मीदवारों में 500 सामान्य वर्ग के, 347 ओबीसी, 163 एससी और 89 एसटी वर्ग के हैं। कुल चयनित उम्मीदवारों में 44 दिव्यांग श्रेणी के हैं।

प्रथम स्थान पर चयनित केआर नंदिनी ओबीसी वर्ग से आती हैं। उन्होंने वैकल्पिक विषय के तौर पर कन्नड़ साहित्य लिया था। वर्तमान में आईआरएस ऑफिसर नंदिनी का यह चौथा प्रयास था। बता दें कि पूर्व में उन्होंने बेंगलुरु के एमएस रमैया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की थी। दिलचस्प संयोग है कि लड़कों में टॉपर और ओवरऑल दूसरा स्थान हासिल करने वाले अनमोल शेर सिंह बेदी के पास भी बीई की डिग्री है। अनमोल ने बीआईटीएस, पिलानी से कम्प्यूटर साइंस में बीई किया है।

चलते-चलते बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा की लिखित परीक्षा पिछले साल दिसंबर में आयोजित की गई थी और इस साल मार्च से मई के बीच साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। इन्हीं के आधार पर ये परिणाम घोषित किए गए हैं। यह भी बताते चलें कि 220 उम्मीदवार अभी प्रतीक्षा सूची में हैं। सभी सफल उम्मीदवारों को ‘मधेपुरा अबतक’ की बधाई।

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देश के हर नागरिक को दिखानी चाहिए यह फिल्म

क्रिकेट के ‘भगवान’ बॉक्स ऑफिस पर भी छा गए। मैदान चाहे कोई भी हो, सचिन तो आखिर सचिन हैं। भारत में क्रिकेट के पर्याय बन चुके सचिन तेंदुलकर के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सचिन ए बिलियन ड्रीम्स’ ने रिलीज के बाद पहले वीकेंड पर 27.85 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कमाई कर ली है। गौरतलब है कि इस फिल्म ने रिलीज के पहले दिन भी रिकॉर्ड बनाया था। पहले दिन इस फिल्म ने 8.40 करोड़ की कमाई की थी।

आप सोच रहे होंगे कि ‘बाहुबली 2’ और ‘दंगल’ जैसी फिल्में, जिन्होंने 1500 करोड़ का अकल्पनीय क्लब तैयार कर लिया है, के रहते मैं ये किस रिकॉर्डतोड़ कमाई की बात कर रहा हूं। तो जनाब, जान लें कि सचिन पर बनी यह फिल्म कोई फीचर फिल्म नहीं है। यह एक डॉक्यू-ड्रामा है और इस श्रेणी में यह निर्विवाद रूप से अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म है। इतना ही नहीं, यह फिल्म इस साल रिलीज हुई फिल्मों में सबसे ज्यादा ओपनिंग वाली टॉप 10 फिल्मों में भी शामिल हो गई है।

अब थोड़ी चर्चा फिल्म पर। इस स्पोर्ट्स डॉक्यू-ड्रामा में सचिन की ज़िन्दगी और क्रिकेट के प्रति उनके योगदान व कड़ी मेहनत को दिखाया गया है। फिल्म में सचिन के बचपन को देखना कमाल की अनुभूति है। फिल्म जरूरत के मुताबिक उनके निजी जीवन में भी झांकती है। इस फिल्म में आप सचिन के फैमिली वीडियो भी देख सकते हैं।

‘सचिन ए बिलियन ड्रीम्स’ कई ऐतिहासिक मैचों की याद ताजा कर देती है। फिल्म में कई कमेंटेटर्स, क्रिटिक्स और साथी खिलाड़ियों के इंटरव्यू शामिल किए गए हैं। इनमें भारत से महेन्द्र सिंह धोनी, विराट कोहली, सौरव गांगुली, वीरेन्द्र सहवाग और हरभजन सिंह के नाम शामिल हैं।

फिल्म का एक बेहद ईमानदार पहलू यह है कि इसमें यादों के सुहाने सफर के अलावा क्रिकेट से जुड़ी कंट्रोवर्सी को भी जगह मिली है। और तो और फिल्म में सचिन के खराब प्रदर्शन के बारे में भी बात की गई है। यह फिल्म यह मैसेज देने में पूरी तरह सफल होती है कि सचिन जैसे महान खिलाड़ी केवल धैर्य, तैयारी और कड़ी मेहनत से बनते हैं।

चलते-चलते

बुधवार 24 मई को मुंबई में फिल्म का प्रीमियर रखा गया था, जिसमें बॉलीवुड और क्रिकेट जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। महानायक अमिताभ बच्चन फिल्म को देख इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा, यह फिल्म देश के हर नागरिक को दिखानी चाहिए। स्कूलों में भी बच्चों को यह फिल्म दिखाई जानी चाहिए। भावुक स्वर में अमिताभ ने यहां तक कहा कि उन्हें गर्व है कि वह उस देश में रहते हैं जहां सचिन जैसा महान क्रिकेटर रहता है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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ये क्या नीतीशजी, सोनिया को ना, मोदी को हां !

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष का साझा उम्मीदवार खड़ा करने और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अगुवाई करने का आग्रह करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐन वक्त पर क्या यू-टर्न ले लिया? अब जबकि उनकी सलाह के मुताबिक सोनिया सक्रिय हुई हैं और राष्ट्रपति चुनाव के कुछ ही हफ्ते बचे हैं, नीतीश के एक कदम से विपक्ष की सारी कवायदों की हवा निकलती दिख रही है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहे जो तर्क दे लें लेकिन ये बात हजम नहीं होती कि शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए सोनिया द्वारा आयोजित अहम भोज में उन्होंने शिरकत नहीं की, लेकिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के सम्मान में दिए गए भोज में वे शामिल हुए। जबकि दोनों ही भोज की जगह दिल्ली थी और एक दिन पहले नीतीश की कोई असामान्य व्यस्तता भी नहीं थी।

गौरतलब है कि सोनिया द्वारा दिए गए भोज में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव  समेत 17 पार्टियों के नेताओं ने भाग लिया, जबकि जेडीयू की ओर से इसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव शामिल हुए। नीतीश ने इस बैठक में अपने शामिल न होने पर सफाई देते हुए कहा कि उनके न जाने का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उन पर वह पिछले महीने ही सोनिया गांधी से मिलकर चर्चा कर चुके थे। ठीक है कि पिछले महीने नीतीश सोनिया से मिले थे, राष्ट्रपति चुनाव की बाबत चर्चा भी हुई थी, लेकिन सोनिया की यह बैठक इस दिशा में अबतक का सबसे बड़ा प्रयास थी और उसमें शामिल न होकर उन्होंने गलत वक्त पर कयासों का बाज़ार गर्म करने का मौका दे दिया, क्या इसे झुठलाया जा सकता है ?

वैसे भी लालू से जुड़े ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद लालू-नीतीश के संबंधों में आई तल्खी छिपी नहीं है। इसके बाद लालू के ट्वीट ‘बीजेपी को नए पार्टनर मुबारक हों’ ने भी अटकलों को हवा दी। इससे पहले लालू ने नोटबंदी का जितना खुलकर विरोध किया, नीतीश उतना ही खुलकर उसके समर्थन में सामने आए। बदले में प्रकाशोत्सव पर बिहार आए मोदी ने शराबबंदी पर नीतीश की सराहना की। हाल ही में उन्होंने नीतीश को उनके जन्मदिन पर ट्वीट कर बधाई भी दी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि भाजपा जहां जरूरत पड़ने पर नीतीश में अपना स्वाभाविक साथी देख रही है, वहीं नीतीश के लिए यह लालू को हद में रखने की रणनीति है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आरजेडी नेताओं द्वारा तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोरशोर से उठी थी, जिससे लालू के छिपे एजेंडे के तौर पर देखा गया था। बहराहाल, लालू का एजेंडा चाहे जो हो, नीतीश ने भी अपना एजेंडा छिपाकर नहीं रखा। बिना कुछ कहे सब कुछ कह जाना, यही तो राजनीति है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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चंद्रास्वामी: बीते कल की ‘सुर्खी’ एक बार फिर सुर्खियों में

तांत्रिक, ज्योतिष, आध्यात्मिक गुरु, गॉडमैन या राजनेताओं और उद्योगपतियों के दलाल – क्या थे चंद्रास्वामी? 1990 के दशक में खासा चर्चित यह चेहरा जितना अपने ‘प्रभाव’ के लिए जाना जाता था उतना ही विवादों के लिए। पर पीवी नरसिम्हा राव के सत्ता के शीर्ष पर रहते एक दौर ऐसा भी रहा जब चंद्रास्वामी की तूती बोलती थी और उनके आभामंडल के आगे बड़े-से-बड़े नतमस्तक थे। कारण कि नरसिम्हा राव के तथाकथित आध्यात्मिक गुरु थे चंद्रास्वामी। वहीं भारत के एक और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सार्वजनिक तौर पर बेहिचक कहा करते कि चंद्रास्वामी हमारे दोस्त हैं।

चंद्रास्वामी का वक्त वर्षों पहले ढल चुका। सुर्खियों से उनकी विदाई कब की हो चुकी। पर बीते मंगलवार को इस दुनिया से उनकी विदाई ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। बताया जाता है वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 1948 में जन्मे और अभी-अभी रुखसत हुए इस बेहद दिलचस्प शख्सियत का असली नाम नेमिचंद था और वे जैन समुदाय से ताल्लुक रखते थे।

चंद्रास्वामी तंत्रविज्ञान के कितने बड़े ज्ञाता थे ये ठीक-ठीक कहना मुश्किल है लेकिन उनके ‘तंत्र’ का जाल कितनी दूर तक और कितने गहरे फैला था, इसका अंदाजा उनके मुरीदों की फेहरिस्त से लगाया जा सकता है, जिसमें भारत के सैकड़ों राजनेताओं, उद्योगपतियों, नौकरशाहों से लेकर हॉलीवुड अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर और ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर तक का नाम शामिल है। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी किताब ‘वॉकिंग विद लायन्स: टेल्स फ्रॉम अ डिप्लोमेटिक पास्ट’ में लिखा है कि 1975 में ब्रिटेन में चंद्रास्वामी और मारग्रेट थैचर की मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात में चंद्रास्वामी ने कह दिया था कि अगले तीन-चार साल में थैचर प्रधानमंत्री बनेंगी और 9, 11 या 13 वर्षों तक प्रधानमंत्री बनी रहेंगी। अब इसे संयोग कहें या चंद्रास्वामी की तथाकथित ‘तंत्र-शक्ति’ कि थैचर उनके कहे समय में प्रधानमंत्री बनीं और पूरे 11 साल तक रहीं। नटवर सिंह ने इस बात की भी पुष्टि की है कि थैचर उस मुलाकात में बकायदा चंद्रास्वामी के कहे मुताबिक लाल रंग के वस्त्र में आई थीं और यहां तक कि चंद्रास्वामी की दी ताबीज भी उन्होंने बांध रखी थी।

चंद्रास्वामी का विवादों से गहरा नाता रहा। कहा जाता है कि उनका ‘आश्रम’ फंडिग के लिए उद्योगपतियों को तलाश रहे नेताओं और अपने अनुकूल नीतियां बनवाने व लाइसेंस-परमिट पाने के लिए नेताओं को ढूंढ रहे उद्योगपतियों की मिलन-स्थली था। हथियारों के अंतर्राष्ट्रीय सौदागर अदनान खशोगी से उनके रिश्ते बताए जाते हैं। उन पर ये आरोप भी लगा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में उनका हाथ था। राजीव हत्याकांड की जांच करने वाले जैन कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था। लंदन के एक बिजनेसमैन से एक लाख डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में 1996 में वे जेल भी गए। उनके ऊपर विदेशी मुद्रा उल्लंघन के कई गंभीर मामले चले।

चंद्रास्वामी पर लगे आरोपों या सत्ता पर उनकी पकड़ के दावों में कितनी सच्चाई है, इसका लेखा-जोखा रखने से कुछ हाथ आने वाला नहीं, लेकिन एक व्यक्ति एक साथ कितने चेहरे रख सकता है और पद या पैसा पाने की ‘कमजोरी’ रखने वालों को सीढ़ी बनाकर कितने ‘ऊपर’ तक का सफर तय कर सकता है, इसकी समझ तो हासिल की ही जा सकती है।

 ‘मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

 

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पटना में शीघ्र होगा डॉ. कलाम के नाम पर साइंस सिटी का निर्माण

सार्वकालिक महानतम भारतीयों में शुमार पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बिहार के लिए विशेष लगाव रहा। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। इसके अतिरिक्त भी उन्होंने कई अवसरों पर बिहार का मार्गदर्शन किया। उनका मानना था कि बिहार में देश का अगुआ बनने की प्रचुर संभावना है। इसके लिए आमजन, विशेष तौर पर युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अलग-अलग मौकों पर वे सुझाव देते रहे थे।

और एक अति महत्वपूर्ण सुझाव डॉ.कलाम ने पटना में ही लेखक डॉ.मधेपुरी को दी थी | बता दें कि 30 दिसंबर 2005 को पटना के हवाई अड्डे पर महामहिम राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की मुलाकात रात्रि के लगभग 9:00 बजे लाइब्रेरी के एक विशाल हॉल में तब हुई जब ‘अग्नि की उड़ान’ के सह-लेखक डॉ.अरुण कुमार तिवारी उपस्थित थे | मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अपनी टीम के साथ उन्हें विदा करने हेतु आने ही वाले थे |

The President of India Dr.APJ Abdul Kalam with Dr.Bhupendra Madhepuri at Patna Airport .
The President of India Dr.APJ Abdul Kalam with Dr.Bhupendra Madhepuri at Patna Airport .

बता दें कि डॉ.मधेपुरी द्वारा जो दो पुस्तकें – एक डॉ.कलाम पर और दूसरी डॉ.कलाम के साथ लिखी गई हैं- उन्हीं पुस्तक द्वय के अवलोकन के क्रम में महामहिम डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने डॉ.मधेपुरी को राष्ट्रपति भवन आने के आमंत्रण के साथ ही यह मूल्यवान सुझाव भी दिया था –

“ये ऑंखें दुनिया को दोबारा नहीं देख सकती, अतएव तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वो दुनिया को देकर जाना……… बच्चों को देकर जाना |”                       

ऐसे सार्वकालिक गांधीयन मिसाइलमैन की एक आदमकद प्रतिमा मधेपुरा समाहरणालय के उत्तरी खाली परिसर में लगा कर डॉ.कलाम सरीखे ऋषि की स्मृतियों को जीवंत रखने की तमन्ना पालते देखे जा रहे हैं समाजसेवी साहित्यकार डॉ.मधेपुरी , जिन्हें कुछ लोग “मधेपुरा का डॉ.कलाम” भी कहने लगे हैं | मधेपुरा आशा भरी निगाहों से देख रहा है कि यहां के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल या फिर बिहार के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों में से पहले किनकी सहमति प्राप्त होती है……… लेकिन फिलहाल तो सीएम उनके नाम पटना में साइंस सिटी बनाने में व्यस्त दिखने लगे हैं |

मिसाईलमैन की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए ही बिहार सरकार ने पटना में उनके नाम पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की साइंस सिटी बनाने का निर्णय लिया, जिसका निर्माण अब शीघ्र शुरू होगा। मंगलवार को इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 397 करोड़ खर्च करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इनमें से 94 करोड़ जल्द ही बिहार काउंसिल ऑन साइंस सिटी एंड टेक्नोलॉजी को बिहार आकस्मिकता निधि से दिया जाएगा, ताकि काम अविलंब शुरू हो।

गौरतलब है कि प्रस्तावित साइंस सिटी का निर्माण पटना के राजेन्द्र नगर स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के नजदीक करीब 20 एकड़ भूमि में होना है। अपने ढंग के अनूठे इस साइंस सिटी में वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित कई प्रदर्श दीर्घा का निर्माण होगा। इसमें वैज्ञानिक सिद्धांतों की अनुभूति और इनका आम जन-जीवन में हो रहे प्रयोगों को भी दिखाया जाएगा। साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में भी इसका विकास किया जाएगा। कलाम के करोड़ों चाहने वालों के लिए ये निश्चित रूप से अनमोल तोहफा होगा, जिसके लिए बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साधुवाद के पात्र हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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केन्द्र सरकार के तीन साल: जेडीयू के सात सवाल

बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल जेडीयू ने केन्द्र की वर्तमान एनडीए सरकार के तीन साल पूरा होने पर नरेन्द्र मोदी सरकार से आज सात सवाल किए। पटना स्थित जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह एवं नीरज कुमार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 2 करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली केन्द्र सरकार 20 हजार नौकरी भी नहीं दे पा रही है। उन्होंने पूछा कि अनूसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछडी जातियों की भर्ती में 90 प्रतिशत की कमी आई और मात्र 8,436 भर्तियां हुईं, क्या इसे पिछड़ा विरोधी न कहा जाए?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को हसीन सपने दिखने वाले लोग रिक्त स्थानों पर भी भर्तियां नहीं कर रहे है? कुल सरकारी नौकरी में 89 प्रतिशत की कटौती करते हैं, ऐसे में क्या इन्हें युवा विरोधी सरकार कहना गलत होगा? जेडीयू ने आरोप लगाया कि छह महीने में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सिर्फ 12,000 नौकरियां पैदा हुई हैं, जबकि इस सेक्टर के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया का अभियान चलाया गया। इस पर केन्द्र सरकार का क्या कहना है?
आईटी क्षेत्र एवं अन्य निजी क्षेत्र मे भारी छटनी चल रही है और तकरीबन 10 लाख लोगों को निकाले जाने की संभावना है, कटौती को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने क्या कदम उठाये हैं? जेडीयू के प्रवक्ताओं ने कहा कि उनकी पार्टी ये सवाल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं पूछ रही है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण से जुड़ा सवाल है। बेरोजगार युवाओं से कैसे राष्ट्र निर्माण करेंगे? कैसे बनेगा भारत विश्व शक्ति, अगर हमारे देश के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं के बच्चों को सरकारी मिल रही है? उन्हें ये सवाल केन्द्र सरकार से करना चाहिए कि क्या बीजेपी के सपनों में सिर्फ पूंजीपतियों को ही जगह मिलेगी? बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जेडीयू नेताओं ने कहा कि साल 2009 में 12.56 लाख लोगों को रोजगार मिला था और साल 2015 में यह आंकड़ा 1.35 लाख रह गया। पिछले चार साल से हर दिन 550 नौकरियां गायब होती चली जा रही है। इस हिसाब से 2050 तक भारत में 70 लाख नौकरियों की कमी हो जाएगी। बहरहाल, इन तीखे सवालों का भाजपा व केन्द्र सरकार क्या जवाब देती है, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा।

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102 साल के अमिताभ और 75 के ऋषि कपूर

चौंकने को तैयार हो जाईये। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन बन गए हैं 102 साल के बुजुर्ग और 75 साल के उनके बेटे बने हैं ऋषि कपूर। जी हां, उमेश शुक्ला के निर्देशन में बनने वाली फिल्म ‘102 नॉट आउट’ में अमिताभ और ऋषि कपूर एक साथ नज़र आने वाले हैं। ये फिल्म लेखक-निर्देशक सौम्या जोशी के सफल गुजराती नाटक ‘102 नॉट आउट’ का फिल्म रूपांतरण है।

गौरतलब है कि पिता-पुत्र की प्रेम कहानी वाली इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर पूरे 26 साल बाद बड़े परदे पर एक साथ दिखेंगे। पिछली बार दोनों अभिनेताओं ने 1991 में आई फिल्म ‘अजूबा’ में साथ काम किया था। याद दिला दें कि ढलती उम्र के साथ अभिनय में नित नए प्रयोग कर रहे इन दिग्गज कलाकारों ने एक साथ काम करते हुए ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘कभी कभी’, ‘कुली’ और ‘नसीब’ जैसी अत्यन्त सफल फिल्में दी हैं।

उमेश शुक्ला की पिछली फ़िल्म ‘ऑल इज़ वेल’ में ऋषि कपूर अमिताभ के बेटे अभिषेक बच्चन के साथ नज़र आए थे। इस बार बिग बी के साथ उन्हें देखना सचमुच बहुत सुखदायी अनुभव होगा। इतने सालों बाद ये जोड़ी बड़े परदे पर क्या जादू बिखेरती है, ये देखने की बात होगी।

चलते-चलते बता दें कि फिल्म की शूटिंग मुंबई में शुरू हो चुकी है और जुलाई के अंत तक समाप्त भी हो जाएगी। कहने का मतलब यह कि इस फिल्म के लिए दर्शकों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिसके लिए कहा जा रहा है कि अपनी यूनीक कहानी और ह्यूमर के कारण यह एक देखने लायक फिल्म होगी। एक और खास बात यह कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर पहली बार कोई गुजराती किरदार निभाने जा रहे हैं।

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आखिर शर्मिंदा होना कब सीखेगा पाकिस्तान ?

हरीश साल्वे और उनकी टीम सवा सौ करोड़ देशवासियों की अपेक्षा पर खरी उतरी। उनकी ओर से दी गई दलीलें काम आईं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी। भारत ने वियना कन्वेंशन के तहत काउंसिलर एक्सेस नहीं दिए जाने का हवाला दिया था और पाकिस्तान ने इस मामले के कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की दलील दी थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कहा कि उसे इस मामले में सुनवाई करने का अधिकार है।

देश और दुनिया का ध्यान खींचने वाले इस मामले में अदालत ने भारत की सभी दलीलों को स्वीकार किया है। अदालत ने कहा कि उसके पास इस मामले को सुनने का अधिकार है। अदालत ने ये भी स्वीकार किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद है और उसे सुनने का अधिकार अदालत को है। अदालत ने माना कि काउंसिलर एक्सेस के मामले में 2008 के समझौते के बावजूद पाकिस्तान ने भारत को काउंसिलर एक्सेस नहीं दिया, इसलिए अदालत को अंतरिम फैसला देने का हक है।

गौरतलब है कि कुलभूषण का मामला भारत के लिए काफी अलग था और इसमें समय काफी कम था। मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में ये मामला इसलिए उठाया क्योंकि पाकिस्तान इस पर टाल मटोल कर रहा था। भारत का कहना है कि ये मानवाधिकार का मामला है, जिस पर अब अदालत मामले के मेरिट पर फैसला करेगी।

बहरहाल, अदालत का फैसला आने के बाद पाकिस्तान को अपना रुख बदलना पड़ सकता है। हालांकि इस फैसले के तत्काल बाद उसने जैसी प्रतिक्रिया दी है, वह कहीं से स्वागतयोग्य नहीं। कहने की जरूरत नहीं कि उसे इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है और अपनी किरकिरी को वह पचा नहीं पा रहा। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान अभी कुलभूषण पर कोई कार्रवाई नहीं करे और पाकिस्तान के लिए ये फैसला मानना जरूरी है। यही नहीं, पाकिस्तान को ये भी बताना होगा कि इस फैसले पर क्या कदम उठाए गए हैं।

चलते-चलते बता दें कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फिलहाल ये नहीं देखा कि पाकिस्तान की अदालत का फांसी पर फैसला सही है या नहीं। अदालत को ये भी देखना है कि वियना संधि के तहत काउंसिलर एक्सेस न देने से कुलभूषण के मामले में बचाव का सही मौका मिला या नहीं। हालांकि छुपा कुछ भी नहीं। सारी दुनिया जानती है, सच क्या है। फिर भी अदालत की अपनी मर्यादा और प्रक्रिया होती है, उसका पालन होना ही चाहिए। पर हद तो यह है कि इतना सब होने के बावजूद पाकिस्तान की आंखों में पानी नाम की कोई चीज नहीं। आखिर शर्मिंदा होना कब सीखेगा पाकिस्तान?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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जीएसटी के तहत अनाज और दूध टैक्समुक्त होंगे

पूरे देश के लिए अच्छी ख़बर। जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स) के तहत अधिकतर वस्तुओं की टैक्स दरों को लेकर केन्द्र और राज्यों के बीच सहमति बन गई है। श्रीनगर में गुरुवार को शुरू हुई दो दिवसीय जीएसटी काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स रेट घटाने का फैसला लिया गया। नए टैक्स सिस्टम के तहत कई जरूरी चीजों की कीमतें कम हो सकती हैं। अनाज और दूध को टैक्समुक्त कर दिया गया है। प्रोसेस्ड फूड भी सस्ते हो जाएंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मिठाई, खाद्य तेल, चीनी, चायपत्ती, कॉफी और कोयले को 5% टैक्स स्लैब में रखा गया है। हेयर ऑइल, टूथ पेस्ट और साबुन पर 18% टैक्स लगाया जाएगा। अभी इन पर 28% टैक्स लगता है। कोयले और मसालों पर भी 5% टैक्स लगेगा। एंटरटेनमेंट, होटल और रेस्टोरेंट में खाने पर 18% टैक्स लगेगा।

सूत्रों के मुताबिक छोटी कारों पर 28% टैक्स के अलावा सेस लगाया जाएगा। लग्जरी कारों पर टैक्स के अलावा 15% सेस जोड़ा जाएगा। एसी और फ्रिज को भी 28% टैक्स दायरे में रखा गया है। हालांकि अभी इन पर 30-31% टैक्स लगता है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि “किसी भी वस्तु पर टैक्स की बढ़ोतरी नहीं की गई है। कई चीजों पर टैक्स की दरें कम हो जाएंगी। विचार यह है कि जीएसटी का असर महंगाई बढ़ाने वाला ना हो।” राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया कि 1211 वस्तुओं में से 7% को छूट के दायरे में रखा गया है, जबकि 14% वस्तुओं को 5%  टैक्स के दायरे में, 17% वस्तुओं को 12% टैक्स के दायरें में और 43% वस्तुओं को 18% टैक्स के दायरे में रखा गया है। शेष 19% वस्तुओं पर 28% टैक्स देना होगा। सोने (गोल्ड) के शौकीनों को बता दें कि उस पर टैक्स स्लैब का फैसला शुक्रवार को होगा। सर्विस टैक्स की दरें भी दूसरे दिन ही तय की जाएंगी।

वैसे अभी तक जीएसटी काउंसिल के जिन फैसलों की जानकारी मिली है, वे देशवासियों को बड़ी राहत देने वाले हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार बधाई की पात्र है। वहीं, इसके लिए बिहार सरकार को भी साधुवाद मिलना चाहिए क्योंकि बिहार विधानमंडल ने इस बिल को ध्वनिमत से पारित कर भेजा था और तमाम राजनैतिक विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके पक्ष में मजबूती से खड़े रहे थे।

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