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‘इंसान के खाने लायक नहीं भारतीय रेलवे का खाना’: सीएजी

एक आम भारतीय की ज़िन्दगी का अभिन्न हिस्सा है भारतीय रेलवे। रेल न हो तो ज़िन्दगी रुक सी जाएगी हमारी। 2015-16 के एक आंकड़े के अनुसार हमारे देश में हर दिन 13,313 पैंसेजर ट्रेन लगभग 7000 स्टेशनों के बीच पटरी पर दौड़ती है, जिनमें लगभग दो करोड़ बीस लाख लोग सफर करते हैं। हमें इस बात का गौरव हासिल है कि भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। ऐसे में अगर आपके सामने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी – Comptroller & Auditor General of India) की यह रिपोर्ट आए कि भारतीय रेलवे के खाने का स्तर लगातार गिर रहा है और इस हद तक कि कहीं-कहीं यह इंसान के खाने लायक नहीं है, तो आप भीतर से हिल से जाते हैं।

जी हां, देश के 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों की जांच के बाद संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को परोसी जा रही चीजें खाने लायक नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर ट्रेन के भीतर और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं तो दूसरी ओर डिब्बाबंद और बोतलबंद वस्तुएं एक्सपायरी डेट के बाद भी बेची जा रही हैं।

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर साफ-सफाई का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा जाता है। कूड़ेदानों को न तो ढक कर रखा जाता है और न ही इनकी नियमित सफाई होती है। रिपोर्ट के मुताबिक पेय पदार्थों में साफ पानी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है और खाने-पीने की चीजों को धूल-मक्खी से बचाने के लिए ढकने की व्यवस्था नहीं है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार ट्रेनों के अंदर चूहे और तेलचट्टों का पाया जाना भी एकदम आम बात है।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जिन ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध हैं उनमें जहां एक ओर बेची जा रही चीजों का रेट कार्ड उपलब्ध नहीं है, वहीं दूसरी ओर चीजें ऊंची कीमतों पर बेची जा रही हैं।

2014 में रेलवे जैसा बड़ा मंत्रालय मिलने के बाद सुरेश प्रभु ने जोरशोर के साथ अपना काम शुरू किया था। ट्विटर के जरिए उन्होंने ‘चमत्कृत’ करने वाले कई कार्य किए। रेलवे के कामकाज के तरीकों में वे जिस तरह सुधार का प्रयास करते दिखे, उसे देखकर लगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन पर सही ही भरोसा जताया है। लेकिन सीएजी की इस रिपोर्ट ने उनकी तमाम कोशिशों को नाकाफी साबित कर दिया। खासकर ट्रेनों में कैटरिंग की व्यवस्था में सुधार होने के उनके दावों की पोल बुरी तरह खुल गई है। अब सीएजी के सवालों से मोदी सरकार कैसे निबटती है, यह देखने की बात होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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रामनाथ कोविंद होंगे भारत के अगले राष्ट्रपति

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे। एनडीए उम्मीदवार कोविंद ने विपक्ष की मीरा कुमार को बड़े अंतर से हराकर रायसीना हिल्स की रेस जीती। कोविंद को जहां 66.65 प्रतिशत वोट मिले वहीं मीरा का अभियान 34.35 प्रतिशत मतों पर ही रुक गया। सोमवार को हुए मतदान में रामनाथ कोविंद को कुल 7,02,044 वोट मिले, जबकि मीरा कुमार को 3,67,314 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। बता दें कि नए राष्ट्रपति का शपथग्रहण 25 जुलाई को होना है।

राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद कोविंद ने कहा कि वे सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना से काम करेंगे और पद की मर्यादा को बनाए रखेंगे। अपने संक्षिप्त और भावुक संबोधन में उन्होंने कहा, “जिस पद का गौरव डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी जैसे विद्वानों ने बढ़ाया उस पद पर रहना मेरे लिए गौरव की बात है और यह मुझे जिम्मेदारी का अहसास करा रहा है।”

अपने जीवन के बेहद खास मौके पर गरीबी में बिताए अपने बचपन को याद करते हुए आगे उन्होंने कहा, “आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है। बारिश का मौसम मुझे बचपन की याद दिलाता है। हमारा घर कच्चा था। मिट्टी की दीवारें थीं। बारिश के समय फूस की छत पानी को रोक नहीं पाती थी। हम सब भाई-बहन कमरे की दीवार से लग कर बारिश रुकने का इंतजार करते थे। आज पता नहीं कितने ही रामनाथ कोविंद बारिश में भींग रहे होंगे। खेत में काम कर रहे होंगे और शाम के भोजन के लिए प्रबंध कर रहे होंगे। मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि परौख गांव का यह रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में उनका प्रतिनिधि बनकर जा रहा है।”

अपनी जीत की औपचारिक घोषणा के बाद कोविंद ने अपनी प्रतिद्वंद्वि मीरा कुमार को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं मीरा ने भी उन्हें बधाई दी और कहा कि उनके ऊपर संविधान की रक्षा का दायित्व आया है। उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत देश भर के नेताओं ने कोविंद को बधाई और शुभकामनाएं दीं। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से भी उन्हें हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं। एक बात और, बिहार का राज्यपाल रहते हुए उन्हें देश का प्रथम नागरिक बनने का अवसर मिला, इसलिए हम अपेक्षा करते हैं कि उनके मन और मस्तिष्क में बिहार के लिए खास जगह रहेगी और सम्पूर्ण देश के लिए अपना दायित्व निभाते हुए भी करोड़ों बिहारवासियों के ‘विशेष’ अपनत्व व अधिकाबोध का मान वे रख पाएंगे!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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मायवती का राज्यसभा से इस्तीफा: राजनीतिक स्टंट या मास्टरस्ट्रोक

विधानसभा चुनाव में मुंह के बल गिरने के बाद मायावती फिर से उठने और अपनी खोई जमीन पाने की कोशिश में बड़ी शिद्दत से लग गई हैं। कहने की जरूरत नहीं कि बसपा का आधार वोट दलित हैं और उनकी बड़ी आबादी को पार्टी से जोड़े रखना आसान नहीं। इसके लिए फिलहाल दो चीजें चाहिएं। पहली चीज है एक अदद मुद्दा जिसे वो भुना सकें और दूसरी चीज है पर्याप्त समय जो उस मुद्दे को भुनाने में लगा सकें। अपने एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ से उन्होंने ये दोनों चीजें एक साथ पाने की कोशिश की है। सहारनपुर हिंसा पर सदन में न बोल पाने से ‘क्षुब्ध’ मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि मंगलवार को दिया उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

बहरहाल, मायावती इस बात से नाराज थीं कि शून्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलितों पर हुए अत्याचार पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश करने के बाद उन्हें बोलने के लिए सिर्फ तीन मिनट का समय दिया गया। उन्होंने इस पर कहा, “लानत है। अगर मैं कमजोर वर्ग की बात सदन में नहीं रख सकती तो मुझे सदन में रहने का अधिकार नहीं है।” इसके बाद शाम होते-होते उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। ये अलग बात है कि उनके विरोधी इसे उनका राजनीतिक ‘स्टंट’ बताते हैं और इस बात का हवाला देते हैं कि उनका कार्यकाल वैसे भी आठ महीने के बाद खत्म होने वाला था।

एक और अहम बात यह कि वर्तमान में बसपा के पास केवल 18 विधायक हैं, ऐसे में अगली बार उनका अपने बूते राज्यसभा में आना तक संभव नहीं। इसके लिए उन्हें बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में महागबंधन-प्रयोग की आवश्यकता होगी। कहने की जरूरत नहीं कि मायावती अब अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं, जो एसी कमरे में बैठकर कतई नहीं लड़ी जा सकती। राजनीति के जानकार मानते हैं कि जिस दिन भाजपा ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था, उसी दिन साफ हो गया था कि मायावती जल्द ही जवाबी कदम उठाएंगी क्योंकि यह उनके वोटबैंक में सेंध लगाने की भाजपा की बड़ी कोशिश थी। बस मायावती को सही वक्त और माकूल मुद्दे की तलाश थी, जो शायद उन्हें मिल गया है।

वैसे मायावती के इस्तीफे को नैतिक समर्थन देने वाले भी कम नहीं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तो तत्काल यहां तक कहा कि मायवती चाहेंगी तो हम बिहार से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजेंगे। उनके इस प्रस्ताव में भावी राजनीति के बीज आसानी से देखे जा सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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आईफा अवार्ड 2017: किसको क्या मिला ?

बॉलीवुड के चर्चित आईफा अवार्ड में इस साल ‘उड़ता पंजाब’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की धूम रही। फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के लिए जहां शाहिद कपूर ने बेस्ट एक्टर, आलिया भट्ट ने बेस्ट एक्ट्रेस और दिलजीत दोसांझ ने बेस्ट डेब्यू मेल का अवार्ड जीता, वहीं ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर (प्रीतम), बेस्ट लिरिक्स (‘चन्ना मेरेया’ गाने के लिए अमिताभ भट्टाचार्य) और बेस्ट प्लेबैक सिंगर – मेल (‘बुलेया’ गाने के लिए अमित मिश्रा) का अवार्ड मिला। बेस्ट फिल्म का पुरस्कार ‘नीरजा’ को और बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार अनिरुद्ध राय चौधरी (‘पिंक’) को मिला।

अपने चलुबुले अभिनय से बॉलीवुड में जगह बनाने वाले वरुण धवन को फिल्म ‘ढिशुम’ के लिए बेस्ट एक्टर इन कॉमिक रोल का अवार्ड मिला। वहीं फिल्म ‘नीरजा’ के लिए जिम सरभ ने बेस्ट परफॉरमेंस इन नेगेटिव रोल का पुरस्कार जीता। ‘पिंक’ में अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाली तापसी पन्नू को इस फिल्म के लिए ‘वुमेन ऑफ द इयर’ के खिताब से नवाजा गया, तो एक के बाद एक सफल फिल्में दे रहीं आलिया भट्ट ने ‘मिंत्रा स्टाइल आइकॉन’ का खिताब अपने नाम किया।

फिल्म ‘एमएस धोनी’ के लिए दिशा पाटनी को बेस्ट डेब्यू फीमेल का अवार्ड दिया गया। वहीं अनुपम खेर ने इसी फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल का पुरस्कार जीता। बेस्ट एक्ट्रेस इन सपोर्टिंग रोल का पुरस्कार ‘नीरजा’ के लिए शबाना आजमी को मिला। वहीं संगीतकार एआर रहमान को बॉलीवुड में 25 सालों के योगदान के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म ‘कपूर एंड संस’ के लिए देवित्रे ढिल्लन और शकुन बत्रा को बेस्ट स्टोरी का पुरस्कार मिला। कनिका कपूर (‘उड़ता पंजाब’) और तुलसी कुमार (‘एयरलिफ्ट’) ने संयुक्त रूप से बेस्ट प्लेबैक सिंगर – फीमेल का पुरस्कार जीता।

अवार्ड समारोह के दौरान सलमान खान, कैटरीना कैफ, शाहिद कपूर, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सुशांत सिंह राजपूत आदि ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। हां, ‘दंगल’, ‘सुल्तान’, ‘रुस्तम’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों का नाम पुरस्कार की किसी भी कैटेगरी में न होना जरूर अखर गया। क्या कोई पुरस्कार समारोह ‘राजनीति’ से रहित नहीं हो सकता?

 

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राहुल नहीं, नीतीश संभालेंगे यूपीए की कमान !

बिहार की राजनीति में चल रही महाभारत के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अहम मुलाकात हुई। बताया जाता है कि इस बातचीत में तय हुआ कि नीतीश कुमार को संयुक्त विपक्ष में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी और बिहार में महागठबंधन की सरकार चलती रहेगी। यही नहीं, तेजस्वी प्रसाद यादव उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दे देंगे। हालांकि फिलहाल कांग्रेस या जेडीयू के किसी पदाधिकारी ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है।

गौरतलब है कि बिहार में चल रही राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनज़र सोनिया गांधी ने अपनी ओर से पहल करते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बात की। कथित रूप से उन्होंने तेजस्वी के मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए दोनों दलों के प्रमुख को राजी कर लिया है। इसके साथ ही आगे की रणनीति पर भी बात हुई बताई जाती है।

सोनिया की इस पहल के बाद बिहार के राजनीतिक हलके में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि अब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बनेंगे। अगर बनेंगे भी तो वे प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। ऐसा होने पर स्पष्ट है कि यूपीए 2019 का चुनाव नीतीश की अगुआई में लड़ेगा। देखा जाय तो बिहार समेत पूरे देश के लिए ये बड़ी ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि वर्तमान समय के प्रसिद्ध इतिहासकार व लेखक रामचंद्र गुहा ने बीते मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कांग्रेस को बचाना है, तो इसका नेतृत्व नीतीश कुमार को सौंप दें। हालांकि ये बात उन्होंने एक ‘आदर्श कल्पना’ के तौर पर कही थी, लेकिन अपने क्षेत्र के दिग्गज और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किसी आदमी का इतनी बड़ी बात कहना मायने रखता है। यूपीए की साख बढ़ाना और प्रकारान्तर से मोदी-शाह की दिन-ब-दिन बढ़ती ताकत को रोकना उनके मुताबिक नीतीश की अगुआई में ही संभव है। अब राजनीतिक हलके में जिस तरह की चर्चा चल रही है, उससे गुहा की ‘कल्पना’ सच होती दिख रही है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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भारत के टॉप 10 ब्रांड में जियो और एसबीआई के साथ पतंजलि

योगगुरु बाबा रामदेव का ब्रांड पतंजलि भारत के टॉप 10 प्रभावशाली ब्रांड में शामिल हो गया है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस (IPSOS) ने भारतीय बाज़ार में 100 से अधिक ब्रांड का मूल्यांकन करने के बाद टॉप 20 ब्रांड की रैंकिंग जारी की है, जिसमें मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो और पब्लिक सैक्टर के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के साथ पतंजलि ने भी जगह बनाई है। सूची में सर्च इंजन गूगल पहले, माइक्रोसॉफ्ट दूसरे और सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक तीसरे स्थान पर रही।

टॉप 10 ब्रांड में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और उसकी प्रतिस्पर्द्धी कंपनी अमेजॉन भी शामिल हैं। हालांकि फ्लिपकार्ट इस बार तीन पायदान गिरकर 10वें स्थान पर पहुंच गई है, जबकि अमेजॉन इंडिया ने अपने रैंक में सुधार करते हुए छठे स्थान पर कब्जा जमाया।

इप्सोस की इस सूची में शीर्ष पर जगह बनाने की क्या अहमियत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऐपल, स्नैपडील, कैडबरी, अमूल और डिटॉल जैसे दिग्गज ब्रांड टॉप 10 में अपनी जगह नहीं बना सके। हालांकि ये टॉप 20 में जरूर शामिल हैं। गौरतलब है कि रैंकिंग जारी करने से पहले इप्सोस सारे ब्रांड को क्वालिटी, अनुभव और वैल्यू के पैमाने पर जांचने के साथ ही बाज़ार पर उनके प्रभाव का भी बारीकी से आकलन करती है।

बहरहाल, देश के टॉप 10 ब्रांड में शामिल होने के बाद बाबा रामदेव अब कुछ नया करने जा रहे हैं। जी हां, एफएमसीजी सेक्टर में पतंजलि की स्वर्णिम सफलता के बाद उन्होंने चालीस हजार करोड़ रुपये वाले प्राइवेट सिक्योरिटी मार्केट में भी दस्तक दे दी है। गुरुवार को उन्होंने हरिद्वार में पराक्रम सुरक्षा प्राइवेट लिमिटेड नाम से प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म की शुरुआत की। ‘पराक्रम सुरक्षा, आपकी रक्षा’ के नारे के साथ आई इस कंपनी का 2017 के आखिर तक देशभर में शाखाएं खोलने का लक्ष्य है।

चलते-चलते बता दें कि पतंजलि की स्थापना बाबा रामदेव ने साल 2006 में की थी। महज 11 साल में इसके ग्रोथ के जादुई सफर का अंदाजा आप पिछले वित्त वर्ष में हासिल किए गए इसके राजस्व से लगा सकते हैं, जो 10,561 करोड़ रुपये का था।

 

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झारखंड के सरकारी पाठ्यक्रम में शामिल की गई डॉ.मधेपुरी की पुस्तक……

झारखंड सरकार ने मधेपुरा के लेखक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” के सर्वाधिक अंश को सरकारी स्कूलों के लिए तैयार किये गये छठी कक्षा की हिन्दी किताब में डॉ.कलाम से संबंधित आलेख “प्रेरणा के बीज” के लिए चयनित किया है | इस कृत्य से डॉ.मधेपुरी सहित मधेपुरा और बिहार के समस्त साहित्कार समुदाय भी गौरवान्वित हुए हैं |

बता दें कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार एवं भौतिकी के विद्वान डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के संग बिताये गये सर्वाधिक प्रेरक क्षणों की उपलब्धियों को राष्ट्र निर्माण करनेवाले नौनिहालों के निमित्त “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” पुस्तक में पिरोने का काम किया तो सरकारी स्तर पर सबसे पहले झारखंड सरकार ने इस पुस्तक के सर्वाधिक अंशो को छठी कक्षा के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में डालकर पढ़ाना भी शुरू कर दिया | जानिये कि डॉ.मधेपुरी द्वारा इस प्रेरक पुस्तक सहित आधे दर्जन पुस्तकों की रचना हिन्दी में की गई है |

यह भी जानिये कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बच्चों द्वारा चाचा कलाम से पूछे गये सवाल और भारतरत्न डॉ.कलाम द्वारा दिये गये जवाब का सारगर्भित संकलन है- यह पुस्तक “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” | इस पुस्तक के अब तक सात संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं |

बता दें कि लगभग एक दशक से भारत के सभी राज्यों के बड़े-बड़े स्टेशनों पर अवस्थित ए.एच.व्हीलर की दुकानों में यह पुस्तक निरंतर बिकती रही है और देती रही है डॉ.मधेपुरी को शोहरत के साथ-साथ उच्च कोटि की साहित्यिक पहचान भी | क्योंकि, प्रभात खबर अखबार को डॉ.मधेपुरी ने बताया कि इस पुस्तक के माध्यम से वे देश के विभिन्न हिस्सों के बुद्धिजीवियों एवं साहित्यकारों से वर्षों से जुड़े हैं जो प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन पर बधाई देना प्रायः नहीं भूलते !

यूँ तो इस पुस्तक में एक से एक उमदा प्रश्न पूछे गये हैं और डॉ.कलाम द्वारा दिया गया जवाब भी हृदय को छू लेने वाला है | कोई एक प्रश्न, यह कि- आपको जिंदगी में सबसे अधिक दुख किस बात की है ? के जवाब में डॉ.कलाम ने यही कहा कि- जिस समय मुझे भारतरत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान महामहिम राष्ट्रपति डॉ.के.आर.नारायणन द्वारा दिया जा रहा था उस समय मेरे माता, पिता और गुरुओं में से कोई नहीं थे…….| दूसरा एक प्रश्न- यह कि यदि ईश्वर आपको एक वरदान देना चाहें तो आप क्या मांगेंगे- का जवाब उन्होंने दिया- हे ईश्वर ! भारत को विकसित राष्ट्र बना दो……..!

साभार – प्रभात खबर

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निर्भया के देश में ‘मॉम’

महज 4 साल की उम्र में कैमरे के सामने आने वाली श्रीदेवी अपने करियर के 50वें साल में ‘मॉम’ बनकर आई हैं। ‘इंग्लिश विंग्लिश’ के साथ उन्होंने अपनी दूसरी पारी धमाकेदार तरीके से शुरू की थी। अगर बलात्कार की पृष्ठभूमि में रची गई ‘मॉम’ की कहानी पर थोड़ी और मेहनत की गई होती तो इस फिल्म का धमाका उससे भी बड़ा हो सकता था। बल्कि यह क्लासिक का दर्जा पा सकती थी। बहरहाल, हिन्दी फिल्मों की पहली महिला सुपरस्टार की यह 300वीं फिल्म है और वो क्यों सुपरस्टार थीं (या हैं) यह जानने के लिए जरूर देखी जाने लायक है।

एक पंक्ति में कहें तो ‘मॉम’ एक मां के अपनी बेटी के साथ हुए बलात्कार के खिलाफ कानून का दरवाजा खटखटाने और इंसाफ न मिलने पर खुद ही उसे इंसाफ दिलाने की कहानी है। इस कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि जिस बेटी के लिए वह मां जमीन-आसमान एक कर देती है, वह न केवल उसकी सगी बेटी नहीं है, बल्कि उसने उसे मां का दर्जा भी नहीं दिया है। इस तरह मॉम केवल बदले की कहानी न होकर एक मां के मां का दर्जा पाने की तड़प और जद्दोजहद की कहानी भी है। बावजूद इसके, इसमें चौंकाने जैसी कोई बात नहीं क्योंकि यह फिल्म इंटरवल के बाद जिस क्लाइमेक्स की ओर बढ़ती है, वह काफी आजमाया हुआ-सा है और उसमें कोई नयापन नहीं है। इसके अलावा एक और चीज ‘मॉम’ के असर को कम करती है और वो यह कि दर्शक इससे पहले ऐसे ही विषय पर बनी रवीना टंडन की ‘मातृ’ देख चुके हैं। हालांकि ‘मॉम’ में ‘मातृ’ से इमोशन की एक परत ज्यादा है क्योंकि इसमें दो संघर्ष समानान्तर रूप से चलते हैं।

जैसा कि पहले कहा जा चुका है, फिल्म की कहानी और बेहतर हो सकती थी, पर इसका स्क्रीनप्ले बेहद क्रिस्प है। फिल्म का कैनवास बड़ा है और ट्रीटमेंट भी रिच है। सिनेमाटोग्राफी कमाल की है। डायलॉग्स धारदार हैं और अदाकारी के तो कहने ही क्या। अभिनय में श्रीदेवी ने तो अपनी छाप छोड़ी ही है, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना और सजल अली का काम भी याद रखने लायक है। नवाज ने जहां एक बार फिर अपने लुक, लहजे और रेंज से चौंकाया है, वहीं अक्षय को देख कर यह बात कचोटती है कि अभिनय की अच्छी संभावना के बावजूद वो बीच-बीच में गायब क्यों हो जाते हैं।

निर्देशन की बात करें तो रवि उदयावर का काम बेहतरीन है। कई साल तक ऐड एजेंसी और ग्राफिक डिजाइनिंग के बाद बतौर डायरेक्टर यह उनकी डेब्यू फिल्म है। फिल्म के म्यूजिक के साथ एआर रहमान का नाम जुड़ा होने के बावजूद कुछ कमी रह गई-सी लगती है। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर झकझोर देने वाला है।

कुल मिलाकर ‘निर्भया’ के इस देश में ‘मॉम’ इसलिए भी देखी जानी चाहिए कि इसमें जहां आप ‘बलात्कारी’ मानसिकता और सिस्टम को करीब से देखते हैं, वहीं गुनहगारों को अपने अंजाम तक पहुंचता देख (वो भी नारी-शक्ति के हाथों) अपने भीतर सुकून भरा एक अहसास भी उतरता पाते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप         

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शिक्षकों को कौन देंगे राष्ट्रपति पुरस्कार- महामहिम श्री राम….. या श्रीमती मीरा….

संसार के कुछ देशों में शिक्षकों को विशेष सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है | कहीं छुट्टी रहती है तो कहीं कार्य करते हुए इसे मनाते हैं | भारत में विश्व गुरु डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जो उपराष्ट्रपति एवं राष्ट्रपति रह चुके हैं, के जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है |

इस बार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2016 के तहत बिहार के 6 जिले से आठ समर्पित शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया गया है जिन्हें शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में नव चयनित महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जायेगा |

बता दें कि हमारे वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी माह के 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है | अब देखना है कि इस ब्रह्माण्ड में पुरुषों के प्रतीक श्री राम…. की मर्यादा की जीत होती है या फिर प्रकृति स्वरूपा श्रीमती मीरा……. के समर्पण व सेवा की | जो भी प्रथम नागरिक बनकर 25 जुलाई को उस रायसीना पहाड़ी के 400 एकड़ में फैले और 5 एकड़ भूमि पर निर्मित 345 कमरों वाले राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करेंगे- उन्हीं के कर कमलों द्वारा इन कर्मयोगी शिक्षक-शिक्षिकाओं को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा |

अब जानिए कि जिन आठों बिहारी शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है उनमें तीन केवल पूर्णिया जिले से हैं | पुरस्कृत होने वाले शिक्षक हैं- (1)डॉ.सविता रंजन- सहायक शिक्षिका, प्लस टू ब्रजबिहारी स्मारक हाई स्कूल, पूर्णिया (2) डॉ.उत्तिमा केसरी, प्रभारी प्रधानाध्यापिका, मध्य विद्यालय, सदर प्रखंड मुख्यालय (पूर्व) पूर्णिया (3) श्री विजेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक, आदर्श मध्य विद्यालय बरहरा कोठी, पूर्णिया (4) श्री नंदकिशोर सिंह, प्रधानाध्यापक, फिलिप हाई स्कूल, बरियारपुर, मुंगेर (5) श्री रामशंकर गिरि, प्रभारी प्रधानाध्यापक, राजकीय कृत विपिन मध्य विद्यालय, बेतिया (6) श्री हेमंत कुमार, सहायक शिक्षक, मध्य विद्यालय, मधुबनी (7) श्री ज्ञानवर्धन कंठ, प्राध्यापक, मध्य विद्यालय, डुमरा-सीतामढ़ी (8) श्री काशीनाथ त्रिपाठी, प्रभारी प्रधानाध्यापक, बलदेव अयोध्या अतिम प्रवेशिका +2 स्कूल, पूर्वी चंपारण |

अंत में बता दें कि इन आठों समर्पित शिक्षकों को शिक्षक दिवस के दिन राष्ट्रपति भवन में नवचयनित महामहिम के कर कमलों द्वारा पुरस्कार स्वरूप एक सिल्वर मेडल, ₹50,000 (पचास हजार) का चेक एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जायगा | इन आठों शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ-साथ राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत होनेवाले सभी शिक्षकों को मधेपुरा अबतक की अग्रिम बधाई !

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उपराष्ट्रपति चुनाव में नीतीश विपक्ष के साथ !

कांग्रेस की ओर से की हाल की बयानबाजी से नाराज नीतीश कुमार को मनाने में कांग्रेस जोर-शोर से जुट गई है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस और जेडीयू के बीच गहराता विवाद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राहुल ने अपनी पार्टी के नेताओं से बिहार के मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया है। जेडीयू ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने के संकेत दिए हैं।

राहुल के हस्तक्षेप का असर सबसे पहले कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद के यू-टर्न में दिखा। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री और महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार हमारे साथ हैं। हमारे बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। यही नहीं, उन्होंने यहां तक कहा कि नीतीश कुमार का कहना सही है कि हमने राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार घोषित करने में देर की है। हमसे यह गलती हुई है। इसलिए हमने यह तय किया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर समय रहते फैसला लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले नीतीश ने अपनी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों को संबोधित करते हुए कांग्रेस से साफ शब्दों में कहा था कि वे किसी के पिछलग्गू नहीं हैं। वे सहयोगी हैं और सहयोगी की तरह रहेंगे। नीतीश कुमार की नाराजगी गुलाम नबी आजाद के उस बयान को लेकर थी जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को समर्थन दिए जाने पर कहा था कि नीतीश एक विचारधारा के नहीं, बल्कि कई विचारधारा के नेता हैं। इस पर नीतीश ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा था कि सिद्धांत हम नहीं, आप बदलते रहते हैं। कांग्रेस ने आजादी के बाद सबसे पहले गांधी और बाद में नेहरू के सिद्धांतों को तिलांजलि दी। ऐसे में आजाद का इस कदर यू-टर्न लेना मायने रखता है। स्पष्ट है कि वे नीतीश की नाराजगी दूर करने की कोशिश में लगे हैं।

इन सारे घटनाक्रम के बीच विपक्ष ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। आगामी 11 जुलाई को संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में एक बार फिर पूरे विपक्ष के जुटने के आसार हैं। इसमें जेडीयू के शामिल होने की बाबत पूछे जाने पर पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा उनकी पार्टी को आमंत्रित किया जाता है तो निश्चित तौर पर हम उसमें भाग लेंगे। सूत्रों के मुताबिक उस दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष अलग से नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि राहुल उपराष्ट्रपति चुनाव में नीतीश के साथ की सांकेतिक और व्यावहारिक जरूरत अच्छी तरह समझते हैं और इस पूरे प्रकरण में उन्होंने जो परिपक्वता दिखाई है, वो सचमुच काबिलेतारिफ है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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