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नेहरा ने क्रिकेट को कहा अलविदा

बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में खेला गया टी-20 मैच न्यूजीलैंड पर भारत की धमाकेदार जीत के साथ ही शानदार तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के क्रिकेट को अलविदा कहने के कारण भी याद किया जाएगा। 38 वर्षीय नेहरा ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खिलाफ खेला जाने वाला यह मैच उनका आखिरी मैच होगा। नेहरा ने कहा था, “मेरे लिये यह अहम है कि ड्रेसिंग रुम में लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। सभी कह रहे हैं कि मैं एक-डेढ़ साल और खेल सकता था। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि ऐसे समय में संन्यास लेना चाहिए जब लोग ‘क्यों नहीं’ से ज्यादा यह कहें कि ‘क्यों’। मैं शिखर पर रहते हुए संन्यास लेना चाहता था।”

बहरहाल, अपने क्रिकेट करियर का समापन करने वाले इस तेज गेंदबाज को भारतीय टीम ने ट्रॉफी से नवाजा और उनके योगदान की सरहाना की। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने भी अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को उनके आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले शुभकामनाएं दीं और कहा, “हर खिलाड़ी के लिए पहला और आखिरी मैच खास होता है। कई वर्षों तक भारतीय क्रिकेट में अपनी सेवाएं देने के बाद नेहरा अपने घर में विदाई के हकदार हैं।” नेहरा को खेल का महान दूत बताते हुए कपिल ने कहा, ‘आपने देश की सेवा काफी अच्छे से की।’

बता दें कि नेहरा की विदाई के मौके पर फिरोजशाह कोटला में साइट स्क्रीन के ऊपर ‘फेयरवेल आशीष नेहरा’ नाम का संदेश लिखा गया। यही नहीं, उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के एक छोर का नाम नेहरा के नाम पर रखा गया है। गौरतलब है कि नेहरा ने अपने 18 साल के लंबे करियर की शुरुआत फरवरी 1999 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में की थी।

नेहरा का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, लेकिन वह भारत के बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी-20 मैच खेले। टेस्ट में उनके नाम कुल 44, वनडे में 157 और टी-20 में 34 विकेट हैं। उन्हें डरबन में 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने यह शानदार प्रदर्शन बीमार होने के बावजूद किया था। इस विश्व कप में जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और नेहरा की तिकड़ी ने भारतीय टीम की सफलता में अहम रोल निभाया था। नेहरा 2011 में धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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फिर चुनाव आयोग पहुंचा जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल

जेडीयू का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चुनाव आयोग से मिला और शरद खेमे द्वारा दायर याचिका को जल्द खारिज करने का आग्रह किया। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, महासचिव संजय झा एवं बिहार सरकार में मंत्री ललन सिंह वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात चुनाव के मद्देनजर शरद खेमे की याचिका पर जल्द फैसला लेकर उसे खारिज करने का चुनाव आयोग से आग्रह किया। गौरतलब है कि शरद खेमे ने जदयू और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए चुनाव आयोग में ज्ञापन सौंप रखा है।

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि गुजरात में 9 नवंबर से नामांकन शुरू है और उससे पहले हमें पार्टी के प्रत्याशी तय करने हैं और उन्हें पार्टी सिंबल आवंटित करना है। जबकि शरद यादव केवल चुनाव आयोग का समय बर्बाद करना चाहते हैं।

बकौल प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है जेडीयू नीतीश कुमार की है। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर राजगीर में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगी थी। उस बैठक में शरद यादव भी मौजूद थे। अब शरद यादव कुछ अलग ही दावा कर रहे हैं।

चलते-चलते बता दें कि इस बीच शरद खेमे द्वारा ज्ञापन के साथ दिए गए तीन सौ से अधिक शपथ पत्रों की जांच चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग ने 31 अक्टूबर तक इन शपथ पत्रों की मूल प्रति जमा करने कहा है।

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न्यूजीलैंड को हरा भारत ने जीती लगातार सातवीं वनडे सीरीज

कानपुर में खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मैच में रोहित शर्मा और विराट कोहली के धमाकेदार शतकों और दोनों के बीच रिकॉर्ड साझेदारी के बाद अंतिम ओवरों में गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड को 6 रन से हराकर भारत ने 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली। एकदिवसीय मैचों में यह भारतीय टीम की लगातार सातवीं सीरीज जीत है, जो कि उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यही नहीं, उसने न्यूजीलैंड के खिलाफ स्वदेश में द्विपक्षीय सीरीज कभी नहीं गंवाने का रिकॉर्ड भी बरकरार रखा।

अब मैच की बात थोड़े विस्तार से। भारत के 338 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम सलामी बल्लेबाज कोलिन मुनरो (75), कप्तान केन विलियमसन (64) और टाम लैथम (65) के अर्द्धशतकों के बावजूद सात विकेट पर 331 रन ही बना सकी। अंतिम ओवरों में भारत की जीत के सूत्रधार रहे जसप्रीत बुमराह ने 47 रन देकर तीन विकेट चटकाए। यजुवेन्द्र चहल ने भी 47 रन देकर दो विकेट हासिल किए। जबकि भुवनेश्वर कुमार 92 रन लुटाकर एक विकेट ही ले पाए।

भारत ने इससे पहले रोहित शर्मा (147) और विराट कोहली (113) के बीच दूसरे विकेट की 230 रन की साझेदारी की बदौलत छह विकेट पर 337 रन बनाए जो कि ग्रीन पार्क पर बनाया गया सर्वाधिक स्कोर है। यह भी जानें कि शर्मा-कोहली की जोड़ी वनडे क्रिकेट में चार दोहरी शतकीय साझेदारी करने वाली दुनिया की पहली जोड़ी है। रोहित ने 138 गेंद का सामना करते हुए 18 चौके और दो छक्के जड़े जबकि कोहली ने 106 गेंद का सामना करते हुए नौ चौके और एक छक्का मारा। महेंद्र सिंह धोनी (25) और केदार जाधव (18) ने अंत में कुछ अच्छे शॉट खेले।

गौरतलब है कि अपनी पारी के दौरान 83 रन पूरे करते ही कोहली सबसे तेजी से 9000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे छठे भारतीय बल्लेबाज हैं। उन्होंने 194वीं पारी में यह उपलब्धि हासिल करते हुए साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स (205 पारी) का रिकॉर्ड तोड़ा। चलते-चलते बता दें कि इस पारी के दौरान ही कोहली 2017 में 2000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज भी बने।

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छठ महापर्व स्वच्छ एवं सुगंधमय बना देता है सम्पूर्ण बिहार को……..!

आस्था एवं विश्वास के इस महापर्व छठ में उत्साह व उमंग की ऊंचाई इतनी होती है कि श्रद्धापूर्ण माहौल में सम्पूर्ण बिहार स्वच्छ एवं सुगंधमय बन जाता है | नदी से लेकर नाले तक एवं पोखर से लेकर पनघट तक की सफाई हो जाती है |

बता दें कि चार दिवसीय इस महापर्व में जहाँ उगते सूरज से पहले ढलते सूरज को ही नमन किया जाता है, उसी तर्ज पर प्रशासन द्वारा भी दिल्ली-मुंबई-हरियाणा….. से गाँवों तक आने के लिए (पद्मश्री संतोष यादव (मुंगेर) , गीतकार राजशेखर (मधेपुरा) सहित अन्य आम लोगों  व  मजदूरों के वास्ते) विशेष ट्रेन की व्यवस्था जिस तरह छठ से पूर्व की गई थी उसी तरह उन्हें छठ के बाद पुनः कार्यस्थल तक पहूँचाने के लिए और अधिक सुविधाओं के साथ व्यस्था की जा रही है | भारतीय रेल के समस्तीपुर मंडल के सीनियर डीसीएम वीरेन्द्र कुमार के निर्देश पर छठ पर्व के बाद लौट रहे रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सहरसा स्टेशन पर अतिरिक्त चार टिकट काउंटर खोलने के संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है और तदनुरूप डीसीआई रमण झा टिकट काउंटर चालू करवाने में जुट गये हैं |

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री-आपदा प्रबंधन मंत्री से लेकर जिला प्रशासन की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था के बावजूद राज्य में कुल 63 लोगों की मौत छठ पर्व के दौरान डूबने से हुई जिसमें मधेपुरा से एक के डूबने की पुष्टि की गई है, जबकि जिले में 192 घाटों पर डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार और एसडीएम संजय कुमार निराला की टीम एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, मोटरबोट व गोताखोरों सहित अन्य सतर्कताओं के साथ तैनात दिखे | डीएम मो.सोहैल ने तो यहां तक हिदायत दे डाली थी कि अभिभावक अपने बच्चों के पाँकेट में पूरा पता लिखकर ‘कागज’ डाल दें ताकि भीड़ में खो जाने पर उसे उनके परिजनों को आसानी से हस्तगत करा दिये जायेंगे |

यह भी जानिए कि कर्मकांड की जटिलता से मुक्त………..  इस महापर्व छठ में समानता की सर्वाधिक विशालता नजर आती है- ना आडंबर, ना पैसे, ना स्टेटस………. और ना पूजा कराने के वास्ते पंडित-पुरोहित की जरूरत | मरिक जाति द्वारा तैयार सभी के सूप में वही अल्हुआ, सुथनी, मूली, गाजर, हल्दी-अदरक-ईख……..  नारियल-बद्दी-जायफल आदि | सभी अपने-अपने माथे पर दउरा उठाते हैं | घाट पर सभी व्रती होते हैं चाहे अपने निजी आवासीय परिसर वाले निर्मित घाटों पर वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परिवार हो या पूर्व मुख्यमंत्री लालू-राबड़ी का या फिर मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी का ही परिवार क्यों ना हो | ऊर्जा के अनंत स्रोतवाले सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना ही तो छठ महापर्व का सार है, जो हमारे अस्तित्व को कायम रखने में सहायक है |

बिहारी समाज देश से लेकर विदेश तक में जहाँ भी होते हैं- छठ की थाली में एकता का दीप जलाने के वास्ते ट्रेन या प्लेन से घर आने की कोशिश में जुटे रहते हैं………|

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छठ के अर्घ्य के मूल में हैं भगवान श्रीकृष्ण

आस्था का महापर्व है छठ। इस छठ से न जाने कितनी ही कथाएं जुड़ी हुई हैं। सच तो यह है कि कोई पर्व ‘महापर्व’ बनता ही तब है जब उससे हमारी, आपकी, गांव की, शहर की, पुराण की, इतिहास की अनगिनत स्मृतियां-अनुभूतियां कथाओं के रूप में जुड़ जाएं। आपको सुखद आश्चर्य होगा कि महापर्व छठ की एक कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और उस कथा का विशेष महत्व है क्योंकि वो हमारा परिचय उस बिन्दु से कराती है जहां सूर्य को अर्घ्य देने की पवित्र परिपाटी का उद्गम है। चलिए, आपको ले चलें बिहार के नालंदा जिला स्थित बड़गांव जहां स्वयं श्रीकृष्ण पधारे थे और जिनकी प्रेरणा से यहां भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई थी।

बड़गांव वैदिक काल से ही सूर्योपासना का प्रमुख केन्द्र रहा है। यहां का सूर्यमंदिर दुनिया के 12 अर्कों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां छठ करने पर हर मुराद पूरी होती है। तत्कालीन मगध में छठ की महिमा इतनी उत्कर्ष पर थी कि युद्ध के लिए राजगीर आए भगवान कृष्ण ने भी बड़गांव पहुंच कर भगवान सूर्य की अराधना की थी। इसकी चर्चा सूर्य पुराण में भी है। आज भी हजारों श्रद्धालु चैत और कार्तिक माह में यहां छठ का व्रत करने आते हैं।

बहरहाल, यहां से आगे चलते हैं। ऐसी मान्यता है कि महर्षि दुर्वासा एक बार श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका गए थे। उस समय भगवान कृष्ण रुक्मिणी के साथ विहार कर रहे थे। उसी दौरान किसी बात पर श्रीकृष्ण के पौत्र राजा साम्ब को हंसी आ गई। महर्षि दुर्वासा ने उनकी हंसी को अपना उपहास समझ लिया और उन्हें कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। श्रीकृष्ण ने इस कष्टदायी श्राप से मुक्ति के लिए अपने पौत्र को सूर्य की अराधना करने को कहा। तब राजा साम्ब ने 49 दिनों तक बर्राक (वर्तमान बड़गांव) में रहकर भगवान सूर्य की उपासना की। कहते हैं उन्होंने वहां स्थित एक गड्ढ़े के जल का सेवन किया और उसी से सूर्य को अर्घ्य दिया, जिससे वे रोग व श्राप से मुक्त हो सके। आगे चलकर राजा साम्ब ने अपने पितामह श्रीकृष्ण की आज्ञा से उस गड्ढे वाले स्थान की खुदाई करके तालाब का निर्माण कराया। इसमें स्नान करके आज भी कुष्ठ जैसे असाध्य रोग से लोगों को मुक्ति मिलती है।

आपको बता दें कि कालांतर में तालाब की खुदाई के दौरान भगवान सूर्य, कल्प विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, आदित्य माता, जिन्हें छठी मैया भी कहते है, सहित नवग्रह देवता की प्रतिमाएं इस स्थान से निकलीं। तालाब के पास ही एक सूर्यमंदिर भी था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसकी स्थापना अपने पितामह के कहने पर राजा साम्ब ने ही कराई थी। आगे चलकर 1934 के भूकंप में यह मंदिर ध्वस्त हो गया। बाद में ग्रामीणों ने तालाब से कुछ दूर पर मंदिर का निर्माण कर सभी प्रतिमाओं को स्थापित किया।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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“जीएसटी का मतलब गब्बर सिंह टैक्स”: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों गुजरात में खासे सक्रिय हैं। देखा जाय तो राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत के बाद से गुजरात को लेकर कांग्रेस के हौसले में काफी इजाफा हुआ है। फिर हार्दिक पटेल और उनके सहयोगियों की नजदीकी और एंटी इनकम्बेंसी आदि वजहों से भी कांग्रेस वहां अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त दिख रही है। इन सबके बीच राहुल भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध रोज नए-नए ‘पंच’ लेकर सामने आ रहे हैं ताकि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का जोश बना रहे। उदाहरण के तौर पर राहुल का ताजा ‘पंच’ ही लें जो कि मोदी सरकार के आर्थिक एजेंडे पर है।

राहुल गांधी ने गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक एजेंडे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जीएसटी का मतलब ‘गब्बर सिंह टैक्स’ है, जिसका नोटबंदी के जख्मों से उबर रहे देश पर बुरा असर पड़ा है। राहुल ने कहा कि “मोदी ने पिछले साल नोटबंदी अपनी मनमर्जी से लागू कर लाखों लोगों को परेशानी में डाल दिया। ये जो इनका जीएसटी है, ये आम आदमी पर बोझ है… ये जीएसटी नहीं गब्बर सिंह टैक्स है। इसको जल्दबाजी में लाया गया है।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आगे कहा, “जीएसटी कांग्रेस लाई थी लेकिन उसमें 18 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स नहीं था और अभी की तरह पांच स्लैब्स भी नहीं थे। हमने सरकार से धीरे-धीरे कानून लागू करने की गुजारिश भी की, लेकिन उन्होंने हमारी नहीं सुनी।… मोदी सरकार गरीबों के खिलाफ है और आम लोगों की भलाई के लिए काम नहीं कर रही है।”

राहुल ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री पर जमकर चुटकी ली और उनकी नकल भी उतारी। उन्होंने कहा, ‘8 नवंबर को क्या हुआ? मोदीजी टीवी पर आए और बोले कि मुझे 500 और 1000 के नोट नहीं पसंद हैं। तो मैंने फैसला किया है कि आज रात से मैं उन्हें बंद कर दूंगा। ऐसा कर के उन्होने एक ही कदम से पूरे देश को झटका दे दिया। पहले दो या तीन दिन उन्हें ही पता नहीं चला कि क्या हुआ। प्रधानमंत्री को 5-6 दिन बाद समझ आया कि उनसे गलती हुई है और वे फिर टीवी पर आए कहा कि 30 दिसंबर तक अगर मैंने काला धन खत्म नहीं किया तो मुझे सूली पर चढ़ा देना।” राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ पर भी तंज कसा और कहा कि यह पूरी तरह से फेल हो चुका है और चीनी उत्पाद भारत में भर गए हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राहुल ने ख़बरों में रहने की कला सीख ली है। अब मंच पर वे पहले से अधिक परिपक्व दिखते हैं और आत्मविश्वास से लबरेज नज़र आते हैं। हालांकि ये तो गुजरात का परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि उनके ‘पंच’ में असल में दम कितना था?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तेजस्वी ने कुछ इस तरह दी अमित शाह को जन्मदिन की बधाई

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भारतीय जनता पार्टी प्राय: रोज हमले करती है। सुशील कुमार मोदी समेत बिहार भाजपा के अन्य नेता ही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ऐसा कोई मौका नहीं चूकते। दूसरी तरफ लालू और उनके बेटे भी जवाब देने में कोई कसर नहीं रखते। आज आरजेडी के ‘युवराज’ को भाजपा पर तंज कसने का जबरदस्त मौका मिला और उन्होंने इसे बेहद खास तरीके से भुनाया।

जी हां, मौका था भाजपा के ‘करिश्माई’ अध्यक्ष अमित शाह के जन्मदिन का। रविवार को वे 53 साल के हो गए। देश भर से बधाईयों का तांता लगा था। ऐसे में भला तेजस्वी क्यों पीछे रहते? उन्होंने भी शाह को बधाई दी पर कुछ इस अंदाज में कि वो देखते ही देखते वायरल हो गई।

दरअसल यह बधाई कम, तंज ज्यादा था। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बधाई दी और लिखा, “अमित शाह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत, सफलता दे और उनकी दौलत 256000000 (16000×16000) गुना बढ़ जाए।“ तेजस्वी के इस ट्वीट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। पर इससे पहले लोगों की बधाईयों का शुक्रिया अदा कर रहे शाह खामोश रहे। उन्होंने शायद ही अपने जन्मदिन पर ऐसी बधाई का अनुमान किया होगा!

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले अमित शाह पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे और अब उनके बेटे जय शाह पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक ‘मोदी-राज’ में भाजपा अध्यक्ष के बेटे की कमाई 50 हजार से 80 करोड़ जा पहुंची। जी हां, इन ख़बरों पर यकीन करें तो पिछले एक साल में जय शाह की कंपनी का टर्नओवर 16 हजार गुना बढ़ा। तेजस्वी ने अपने ट्वीट में इसी 16000 को निशाना बनाते हुए उसके 16000 गुना बढ़ने की बात कही।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘कमजोर हिंदी के कारण नहीं बना प्रधानमंत्री’: प्रणव मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का मानना है कि वे प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बन सके क्योंकि वे हिन्दी में कमजोर थे। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री के तौर पर उपयुक्त नहीं था क्योंकि मैं हिंदी में कमजोर होने के चलते जनता के साथ संवाद नहीं कर सकता था। कोई भी व्यक्ति जनता से संवाद करने की भाषा में सक्षम न होने पर प्रधानमंत्री नहीं बन सकता, जब तक कि कोई अन्य राजनीतिक कारण न हों।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि जब उनके नाम का ऐलान प्रधानमंत्री के तौर पर हुआ तो वे खुद हैरान थे क्योंकि प्रणब मुखर्जी उनसे अधिक योग्य व्यक्ति थे। हालांकि मुखर्जी कहते हैं कि ‘डॉक्टर साहिब (मनमोहन सिंह) हमेशा बहुत अच्छे विकल्प रहे। नि:संदेह वे बहुत अच्छे प्रधानमंत्री थे। मैंने तब भी कहा था और बाद में भी कि कांग्रेसियों में प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे अच्छे विकल्प मनमोहन सिंह ही थे।

बता दें कि प्रणब दा ने ये बातें टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के क्रम में कहीं। इस दौरान उन्होंने और भी कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। क्षेत्रीय दलों के एजेंडे के चलते राष्ट्रीय हित प्रभावित होने के विषय में उन्होंने कहा कि इस पर पर देश में गंभीर चर्चा किए जाने की जरूरत है। खासतौर पर गठबंधन सरकारों में प्रधानमंत्री अपने मन-मुताबिक फैसले लेने में सक्षम नहीं रहता है। यहां तक कि वह मंत्रियों और उनके विभागों का चुनाव भी अपने मुताबिक नहीं कर पाता है। उन्होंने बताया कि यूपीए के कार्यकाल में क्षेत्रीय दलों से निपटना चुनौती था। और आज जबकि भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है, तब भी उसके लिए यह एक बड़ी चुनौती है। बकौल मुखर्जी क्षेत्रीय हितों के साथ राष्ट्रीय हितों का तालमेल मुश्किल हो जाता है।

यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति भवन से निकलने के बाद वह कांग्रेस के लिए गाइड के तौर पर उपलब्ध होंगे, उन्होंने कहा राजनीति में दोबारा आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हालांकि वे सलाह के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने पूर्व के राष्ट्रपतियों डॉ. राजेंद्र प्रसाद, शंकर दयाल शर्मा आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सभी कांग्रेस से आकर राष्ट्रपति बने थे, वे मुझसे बड़े कांग्रेसी थे, लेकिन राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद वे दोबारा सक्रिय राजनीति में नहीं लौटे।

प्रणब मुखर्जी वर्तमान समय के उन गिने-चुने राजनतीतिज्ञों में एक हैं जिनका सम्मान दलगत सीमाओं से ऊपर है। अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई दौर देखे हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि वर्तमान में कैसे भविष्य के बीज बोए जाते हैं और कैसे आदर्श के प्रतिमान गढ़े जाते हैं। उनकी तमाम बातों में उनके अनुभव का अक्श देखा जा सकता है। ऊपर कही बातें भी इसकी पुष्टि करती हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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भाजपा है भारत की सबसे अमीर पार्टी

पैसे का महत्व हर युग में रहा है, लेकिन आज के समय में इसकी ताकत बेहिसाब बढ़ गई है। आज यह पैसा नीयत, नीति, नियम, नैतिकता, न्याय और यहां तक कि नियति तक को बदलने की सामर्थ्य रखती है। जब पैसे की इस ताकत से बड़े-से-बड़ा और छोटे-से-छोटा हर आदमी वाकिफ है, तो भला राजनीतिक पार्टियां इससे कैसे अछूती रहें। यह संयोग से कुछ अधिक है कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है, तब-तब सभी पार्टियों की संपत्ति में इजाफा हो जाता है। क्यों होता है, यह किसी से छिपा नहीं।

दरअसल तमाम राजनीतिक पार्टियां चुनाव आने के लगभग साल भर पहले से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर देती हैं। इनकम टैक्स विभाग चाहे जितने नियम बना लें, राजनीतिक पार्टियां अपनी आमदनी को उसमें फिट करने की ‘कला’ बखूबी जानती हैं। आज चुनाव प्रणाली के लिए पैसे की ये ताकत कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, इस पर बात करना ही बेकार है। बात तो इस पर होनी चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिग पारदर्शी कैसे हो।

बहरहाल, यह समस्या इतनी गंभीर है कि इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। फिलहाल तो आप यह जानें कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे अमीर पार्टी कौन है और उसके पास कितनी सम्पत्ति है? आपको बता दें कि हाल के वर्षों में तेजी से अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टी भाजपा ने कांग्रेस से सबसे बड़ी और उसी के साथ सबसे अमीर होने का दर्जा छीन लिया है। यह तथ्य ‘रिसर्च असोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की तरफ से कोलकाता में सोमवार को ‘अनैलेसिस ऑफ असेट्स ऐंड लायबिलिटीज ऑफ नैशनल पार्टीज फाइनैंशल ईयर 2004-5 से 2015-16’ के नाम से जारी रिपोर्ट से सामने आई है।

एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में भाजपा की सम्पत्ति 627 प्रतिशत बढ़कर 122.93 करोड़ रुपये से 893 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा 2004-05 से 2015-16 के बीच का है। जबकि इसी समय में कांग्रेस की सम्पत्ति 167.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 758.79 करोड़ रुपये हो गई, यानि इन 10 सालों में उसकी सम्पत्ति में 353.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बता दें कि एडीआर ने इस रिपोर्ट में विश्लेषण के लिए कुल 7 पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा किए ऑडिटेड अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है। वे पार्टियां हैं: भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, एनसीपी, बसपा, सीपीआई, सीपीएम और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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धनतेरस: धन ही नहीं, स्वास्थ्य का भी पर्व

धनतेरस, एक अनोखा पर्व जो न केवल दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है बल्कि समृद्दि के लिए स्वास्थ्य का महत्व भी रेखांकित करता है। आम धारणा के अनुसार धन का पर्व दीपावली है, जो सही नहीं है। दीपावली तो धन के साथ-साथ अन्य सिद्धियों का दिन भी है। धन का दिन तो असल में धनतेरस है। साथ ही यह दिन औषधि और स्वास्थ्य के स्वामी धन्वंतरि का भी दिन है, जो इस बात का संदेश देता है कि धन का भोग करने के लिए लक्ष्मी की कृपा जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरत उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की होती है। बता दें कि आर्युवेद, जिसकी रचना ब्रह्मा ने की थी, को प्रकाश में लाने का श्रेय भी धन्वंतरि को ही जाता है।

धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। दीपावली की महानिशा से दो दिन पहले इसी खास दिन यक्ष-यक्षिणियों का जागरण होता है। यक्ष-यक्षिणी इस स्थूल जगत के उन सभी चमकीले तत्वों के नियंता कहे जाते हैं, जिन्हें दुनिया ‘दौलत’, ‘सम्पत्ति’, ‘वैभव’, ‘ऐश्वर्य’ जैसे नामों से जानती है। जानना दिलचस्प होगा कि कुबेर को यक्ष और लक्ष्मी को यक्षिणी का रूप माना जाता है। कुबेर और लक्ष्मी यक्ष-यक्षिणी के रूप में हमारे जीवन की उस ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं, जिससे हमारी जीवन-शैली निर्धारित और नियंत्रित होती है।

‘धनतेरस’ में ‘धन’ शब्द को धन-संपत्ति और धन्वंतरि दोनों से ही जोड़कर देखा जाता है। भगवान धन्वंतरि को हिन्दू धर्म में देव वैद्य का पद हासिल है। कुछ ग्रंथों में इन्हें विष्णु का अवतार भी माना गया है। मान्यता है कि समुद्र-मंथन के दौरान धन्वंतरि चांदी के कलश और शंख के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन शंख और चांदी का कोई पात्र, बर्तन या सिक्का खरीदना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार कुछ लोग चांदी की जगह सोना तो कुछ लोग पीतल या स्टील की चीज खरीदते हैं, लेकिन ये रस्म लोग निभाते जरूर हैं। दीपावली के लिए इसी दिन लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और पूजन सामग्री खरीदना भी शुभ माना गया है।

तंत्र शास्त्र में इस दिन लक्ष्मी, गणपति, विष्णु और धन्वंतरि के साथ कुबेर की साधना की जाती है। धनतेरस की रात्रि में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, श्री यंत्र तथा लक्ष्मी स्वरूप श्री दक्षिणावर्ती शंख के पूजन को अचूक माना गया है। इस दिन अपने मस्तिष्क को स्वर्ण समझकर ध्यानस्थ होने से धन अर्जित करने की आन्तरिक क्षमता सक्रिय होती है, जो सही मायने में समृद्धि का कारक बनती है।

एक बात और, ‘धनतेरस’ में ‘धन’ से जुड़े ‘तेरस’ शब्द को लेकर एक बड़ी महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि इस दिन खरीदे गए धन, विशेषकर सोना या चांदी, में तेरह गुना वृद्धि हो जाती है। ईश्वर करे आपके धन में भी तेरह गुना की वृद्धि हो और हर धनतेरस को हो। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इस दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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