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केबीसी में करोड़पति बन सनोज ने किया बिहार को गौरवान्वित

बिहार के जहानाबाद निवासी सनोज राज कौन बनेगा करोड़पति सीजन 11 के पहले करोड़पति बन गए हैं। शनिवार को सनोज ने शानदार खेल दिखाते हुए 15 सवालों के सही जवाब दिए और 1 करोड़ की धनराशि अपने नाम कर ली। उन्होंने 7 करोड़ के लिए 16वां सवाल नहीं खेला, जिसका ग़लत उत्तर देने पर जीती हुई राशि घटकर 3 लाख 20 हजार रह जाती।

आपको सहज रूप से उत्सुकता हो रही होगी कि जिस सवाल ने सनोज को एक करोड़ रुपए का इनाम जिताया, वो क्या था? चलिए हम बताए देते हैं। वो सवाल था – भारत के किस मुख्य न्यायाधीश के पिता भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे? इसका सही जवाब है – जस्टिस रंजन गोगोई। इस सवाल का जवाब देने के लिए सनोज ने अपनी आखिरी लाइफ “लाइन आस्क द एक्सपर्ट” का इस्तेमाल किया। वैसे जिस सवाल का जवाब देकर सनोज 7 करोड़ की धनराशि जीतकर इतिहास रच सकते थे, वो था – ऑस्ट्रेलियन दिग्गज बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने किस भारतीय गेंदबाज की बॉलिंग पर एक रन बनाकर सौंवा शतक पूरा किया था? इसका सही जवाब है – गोगुमल किशन चंद।

स्वभाव से सरल व मृदुभाषी और सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखने वाले सनोज ने हॉट सीट पर बेहद धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ एक के बाद एक सवाल का सामना किया। आईएएस बनने को इच्छुक सनोज दिल्ली में रहकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि आईएएस के पद के साथ ही बदलाव लाने का मौका भी मिलता है। उनकी दिलचस्पी नीति निर्माण और उनके क्रियान्वयन में है। वे स्वास्थ्य और पर्यावरण के संबंध में नीतियां बनाना चाहते हैं। उनके विचारों ने महानायक अमिताभ बच्चन को खासा प्रभावित किया। उन्होंने सनोज को गले लगकर बधाई दी। उस क्षण सनोज के पिता भी उपस्थित थे। वे स्वाभाविक तौर पर गौरवान्वित और भावुक हो रहे थे।

केबीसी 11 के पहले करोड़पति बनने पर सनोज ने कहा, “मैं इस जीत पर खुश हूँ। यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण पल है और मैं यहां से और आगे बढ़ने का इरादा रखता हूँ। मेरा मानना है कि अपने लक्ष्यों के प्रति कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया को बहुत अधिक सुखद बना देगा। वर्तमान में मेरी खुशी अल्पकालिक है क्योंकि मैं अपनी यूपीएससी परीक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर रहा हूँ जो अगले सप्ताह शुरू हो रही है।“ बिहार को गौरवान्वित करने वाले इस मेधावी युवा को ‘मधेपुरा अबतक’ की शुभकामनाएं।

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पद्म पुरस्कारों के लिए खेल मंत्रालय के भेजे सभी 9 नाम बेटियों के

भारतीय खेल मंत्रालय ने पद्म पुरस्कारों के लिए 9 नाम प्रस्तावित किए हैं और दिलचस्प बात यह कि ये सभी नाम बेटियों के हैं। देश को गौरवान्वित करने वाली इन 9 महिला खिलाड़ियों में बॉक्सर मैरी कॉम और और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के नाम शामिल हैं। मैरी कॉम का नाम पद्म विभूषण के लिए जबकि पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के लिए भेजा गया है। शेष 7 नाम पद्म श्री के लिए भेजे गए हैं।

गौरतलब है भारतीय खेल इतिहास में पहली बार किसी महिला एथलीट को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने की सिफारिश की गई है। वैसे भी इस सम्मान के लिए छह बार की वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर एमसी मैरीकॉम से बेहतर नाम हो भी क्या सकता था। वर्तमान में राज्यसभा की सदस्य मैरी कॉम 2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं। उन्हें 2013 में पद्म भूषण और 2006 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है।

इसी तरह वर्ल्ड चैंपियन बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के प्रस्तावित किया गया है, जो कि देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। सिंधु का नाम इस सम्मान के लिए 2017 में भी भेजा गया था, लेकिन वह फाइनल सूची में जगह नहीं बना पाईं। उन्हें 2015 में पद्म श्री मिला था। रियो ओलिंपिक्स में सिल्वर मेडल जीतने वालीं सिंधु ने हाल ही में वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

मैरी कॉम और सिंधु के अलावा अन्य 7 महिला खिलाड़ियों के नाम पद्म श्री के लिए प्रस्तावित है। ये खिलाड़ी हैं – कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट, टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा, महिला क्रिकेट टीम की टी20 कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी कैप्टन रानी रामपाल, पूर्व शूटर सुमा शिरुर और पर्वातारोही जुड़वा बहनें ताशी और नुंगशी मलिक।

प्रस्तावित सभी नामों को गृह मंत्रालय के पद्म अवार्ड कमिटी को भेजा गया है। अवार्ड के लिए चयनित नामों की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2020 को की जाएगी।

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सचमुच बेमिसाल थे राम जेठमलानी

भारतीय कानून जगत के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले दिग्गज वकील, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मौजूदा समय में बिहार से राजद के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। जेठमलानी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और इलाजरत थे। उनके परिवार में उनके बेटे महेश जेठमलानी हैं, जो स्वयं जाने-माने वकील हैं, और एक बेटी हैं जो अमेरिका में रहती हैं।
अपने बेबाक बयानों और दिलचस्प शख्सियत के कारण जेठमलानी कोर्ट में ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में भी खासे लोकप्रिय रहे। वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी ने महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री ली और पाकिस्तान में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। बॉम्बे वे एक शरणार्थी के तौर पर पहुँचे और फिर वहां नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी शुरू की। यहां पहली बार वे नानावटी केस से चर्चा में आए और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विलक्षण प्रतिभा के धनी और बेहद परिश्रमी राम जेठमलानी हमेशा जीतने के लिए लड़ते थे और उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहेंगे। उनकी ऊर्जा युवा वकीलों को भी शर्माने के लिए मजबूर कर दिया करती। उनमें यह अद्भुत साहस था कि वे बहुत अलोकप्रिय केस को भी हाथ में लिया करते। उन्होंने इन्दिरा गांधी और आगे चलकर राजीव गांधी के हत्यारे का केस लड़ा और संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु का बचाव किया जबकि आम जन की भावना इसके खिलाफ थी। इसी तरह उन्होंने जेसिका लाल मर्डर केस में मनु शर्मा का बचाव किया, स्टॉक मार्केट केस में हर्षद मेहता और केतन पारेख का बचाव किया और अपनी आलोचनाओं से बिल्कुल बेपरवाह रहे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान, जयललिता, लालू प्रसाद यादव, अमित शाह, अरविन्द केजरीवाल, जगनमोहन रेड्डी, बीएस येदियुरप्पा, कनिमोई, संजय दत्त, बाबा रामदेव और आसाराम बापू के केस भी लड़े।
जेठमलानी के नाम देश में सबसे कम और सबसे अधिक उम्र के वकील होने का नायाब रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 19 साल की उम्र में वकालत शुरू की और लगातार 77 साल तक इस पेशे में रहे। ज़िन्दगी उन्होंने अपनी शर्तों पर जी और अपने बनाए उसूलों पर चले। 2017 में अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि 76 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ, पर कोई आदर्श नहीं मिला। वे दूसरों का मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया करते जिन मूल्यों में वे खुद यकीन रखते। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने जनता की भलाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए।
बता दें कि साल 2010 में राम जेठमलानी को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। छठी और सातवीं लोकसभा में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मुंबई से चुनाव जीता था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे और साल 2004 में वाजपेयी के ही खिलाफ उन्होंने लखनऊ सीट से चुनाव भी लड़ा था।
कुल मिलाकर, इस बेमिसाल शख्सियत को किसी एक लेख से या महज कुछ पन्नों में जान लेना और जानकर समझ लेना मुमकिन नहीं। उन्हें समझने के लिए कई-कई बार और कई-कई तरीके से देखना होगा। फिलहाल इतना ही। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा है, हमारी उम्मीदें नहीं

चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर या कहें दो कदम दूर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया, लेकिन सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। मून मिशन में भले ही शत प्रतिशत सफलता नहीं मिल पाई हो, लेकिन जितनी मिली है, इतिहास रच देने के लिए वो भी कम नहीं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

बहरहाल, इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। इसके बाद वैज्ञानिक लैंडर से दोबारा संपर्क नहीं साध पाए। इसरो का कहना है कि लैंडिंग के अंतिम क्षणों में जो डाटा मिला है, उसके अध्ययन के बाद ही संपर्क टूटने का कारण पता चल सकेगा।

इस मौके पर इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय में दम साधकर इस अभियान को लाइव देख रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भावुक कर देने वाले उन क्षणों में वैज्ञानिकों की भरपूर हौसला आफजाई की और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है। वे देश की सेवा कर रहे हैं। आगे भी हमारी यात्रा जारी रहेगी। मैं पूरी तरह वैज्ञानिकों के साथ हूँ। हिम्मत बनाए रखें, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।”

गौरतलब है कि इसरो प्रमुख के. सिवन ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान की लांचिंग के मौके पर कहा था कि हमारे लिए आखिरी के 15 मिनट आतंक के पल होंगे। उनकी चिंता सही साबित हुई। मंजिल बस दो कदम दूर थी, लेकिन आखिरी मौके पर जीत हाथ से फिसल गई। वैसे बता दें कि लैंडर-रोवर से संपर्क भले ही टूट गया है, लेकिन ऑर्बिटर से उम्मीदें अभी भी कायम हैं। लैंडर-रोवर को दो सितंबर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग किया गया था। ऑर्बिटर अब भी चांद से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है। इसरो को उससे संकेत और जरूरी डाटा प्राप्त हो रहे हैं।

चलते-चलते बस इतना कि मून मिशन में कामयाबी जल्द ही भारत के कदम चूमेगी। इस विश्वास के पीछे पहली वजह यह कि इसरो के साथ यह ख्याति जुड़ी है कि उसके लिए हर चुनौती एक अवसर होती है और दूसरी यह कि करोड़ों हाथ इस मिशन के लिए एक साथ उठकर दिन-रात दुआ कर रहे हैं।

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चन्दा मामा को छूने चला भारतीय चन्द्रयान- 2 का लैंडर “विक्रम”

आज 3 सितंबर  है और  दिन मंगलवार। आज से पहले यही हुआ कि चन्द्रयान-2 ने चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग की दिशा में एक और मील का पत्थर पार करने का रिकॉर्ड बना लिया है। सितंबर 2 को दोपहर दिन में आधे घंटे के दरमियान ‘विक्रम’ आर्बिटर से सही सलामत अलग हो गया और फिलहाल दोनों पांचवी कक्षा में घूम रहे हैं- चंद्रमा से जिसकी न्यूनतम दूरी 119 किलोमीटर तथा अधिकतम 127 किलोमीटर है।

बता दें कि आज यानी 3 सितंबर के बाद अगले दो दिन विक्रम अपनी कक्षा को छोटी करता जाएगा… 4 सितंबर को इसकी कक्षा में अंतिम बार बदलाव होगा…  5-6 सितंबर को लैंडर में लगे उपकरणों को मिशन डायरेक्टर बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ की टीम द्वारा (इसरो के अध्यक्ष के.शिवन के निर्देशन में) जांच की जाएगी।

भारत ही नहीं सारा संसार 7 सितंबर को सिर ऊपर करके बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ के कारनामे को देखता रह जाएगा जब लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा…. जबकि ऑर्बिटर अगले 1 वर्ष तक चंद्रमा की कक्षा में ही चक्कर लगाता रहेगा….. और चाँद की मैपिंग के साथ-साथ उसके बाहरी वातावरण का भी अध्ययन करता रहेगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सॉफ्ट लैंडिंग सरीखे जटिल कार्य को रूस द्वारा नकारे जाने के बाद खुद करने की ठान ली जो 6-7 सितंबर की दरमियानी भारत के लिए बेहद अहम रात होगी… लगभग 1:40 पर लैंडर विक्रम चंद्रमा पर उतरेगा तथा 5:00 बजे तड़के रोवर चाँद की सतह पर मॉर्निंग वॉक करना शुरू कर देगा और इसी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा भारत !!!

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रानू मंडल: ‘स्टेशन’ से ‘स्टार’ बनने का सफर

वर्तमान समय में सोशल मीडिया की क्या अहमियत है, कहने की जरूरत नहीं। आज की तारीख में आप इसे पसंद कर सकते हैं, नापसंद कर सकते हैं, लेकिन नज़रअंदाज नहीं कर सकते। आप ही बताएं, जो प्लेटफॉर्म आपको पलक झपकते लाखों लोगों की नज़रों में ला देता है और अगर आपमें प्रतिभा है तो कुछ ही दिनों में करोड़ों पलकों पर बिठा देता है उसे भला नज़रअंदाज करें भी तो कैसे? वर्षों से पश्चिम बंगाल के रानो घाट स्टेशन पर गाना गाकर जीवन बसर करने वाली रानू मंडल, जो आज अपनी आवाज की बदौलत रातोंरात सेलिब्रिटी का दर्जा पा चुकी है, इसका ताजा उदाहरण है।

गौरतलब है कि कुछ ही हफ्ते पहले रानू मंडल का एक विडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह लता मंगेशकर के सदाबहार गाने ‘एक प्यार का नगमा है’ को रेलवे प्लेटफार्म पर गा रही थी। इस विडियो पर कई चैनलों और म्यूजिक कंपोजरों का ध्यान गया, जिसमें हिमेश रेशमिया भी शामिल थे। उन्हें रानू की आवाज़ ने कुछ ऐसा छुआ कि उन्होंने उन्हें प्लेबैक सिंगर के रूप में बॉलिवुड में लॉन्च करने की पेशकश की और टीवी रिएलिटी शो ‘सुपरस्टार सिंगर’ के एक एपिसोड की रिकार्डिंग भी कर डाली। आज रानू मंडल का नाम हर जुबान पर है और वह एंटरटेनमेंट की दुनिया में किसी स्टार से कम नहीं।

रानू मंडल बताती हैं कि वह फुटपाथ पर पैदा नहीं हुई थीं। वह एक अच्छे परिवार से थीं लेकिन नियति का खेल कुछ ऐसा था कि वह अपने माता-पिता से केवल छह महीने के उम्र में अलग हो गईं। हालांकि दादी ने उन्हें पाला-पोसा लेकिन जीवन आसान नहीं था। उनलोगों का घर तो था लेकिन चलाने वाला कोई नहीं। इस तरह संघर्ष से उनका नाता होश संभालने से पहले ही हो गया।

रानू का कहना है कि वह हमेशा परिस्थितियों के मुताबिक गाना गाती थीं। उन्हें कभी गाने का मौका मिला हो, ऐसा नहीं था। बल्कि उन्हें गाने से प्यार था, इसलिए गाती थीं। वह लता मंगेशकर के गाने सीखा करतीं। किसी और से नहीं, रेडियो और कैसेट सुन-सुनकर।

बहरहाल, आज रानू बहुत खुश हैं। जिस भगवान का भरोसा उन्होंने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ा, शायद उन्हीं की ‘कृपा’ की बदौलत वे फिर से अपनी बेटी के साथ हैं और अपने बॉलिवुड डेब्यू की प्रतीक्षा कर रही हैं। यही नहीं, आज उनके पास मुंबई जैसे शहर में अपना घर है और साथ में ढेर सारे ऑफर। अपनी सुरीली आवाज को वे आगे किस दिशा में मोड़ती हैं, इस पर सबकी नज़र रहेगी।

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बिहार के 40 में सिर्फ 4 हैं…. सौ फ़ीसदी उपस्थिति वाले सांसद

भारतीय संसद में लोकसभा के सांसदों की संख्या 545 है। इसमें दो मनोनीत होते हैं। कुल 543 सांसद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के माध्यम से जनता द्वारा चुनकर संसद में प्रवेश करते हैं। संसद की बैठकों में वे कितने दिनों तक हाजिर अथवा गैर हाजिर रहते हैं…. संसद की इन गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन का नाम है- पीआरएस  लेजिसलेटिव रिसर्च। यह संगठन पारदर्शिता के साथ संसदीय गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाता है।

बता दें कि पीआरएस के अनुसार 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में जितने भी सांसद सदन की बैठकों में रोज हाजिर रहे…. इस श्रेणी के लोकसभा सदस्यों की संख्या 79 है…. जिसमें बिहार के 40 सांसदों में सिर्फ 4 हैं। चार में एक भाजपा के पुराने सांसद हैं, एक जदयू के पुराने सांसद तथा दो जदयू के नवनिर्वाचित सांसद हैं।

यह भी जानिए कि इन चारों में हैं कौन-कौन ? पहला तो महाराजगंज से भाजपा टिकट पर दूसरी बार जीते सांसद हैं जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जो नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वही नालंदा के पुराने जदयू सांसद हैं कौशलेंद्र कुमार।

यह भी बता दें कि शेष दो नए सांसदों एक हैं झंझारपुर से जदयू टिकट पर पहली बार सांसद बने रामप्रीत मंडल जो सांसद बनने से पहले पंचायत समिति सदस्य एवं प्रखंड प्रमुख भी रहे हैं वही नवनिर्वाचित दूसरे सांसद हैं- आलोक कुमार सुमन, जो गोपालगंज से पहली बार जदयू टिकट पर जीते हैं… इससे पहले राजनीति के क्षेत्र में उनके नाम की चर्चा भी नहीं थी।

अंत में यही कि 100 फ़ीसदी हाजिरी वालों में कुल 79 सांसद हुए संपूर्ण देश में. जिसमें बिहार के 4 सांसद हैं। इन चार में दो नवनिर्वाचित हैं और दो पुराने हैं। एक भाजपा के हैं और तीन जदयू के हैं वहीं जदयू जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

 

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गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा वेदों में- पीएम नरेन्द्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की जनता से यही कहा कि हमारे पास हजारों वर्ष पुराना वेदों का भंडार है जिसमें एक-से-एक गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा है। लोग उधर ध्यान नहीं दिए हैं।

बता दें कि पीएम मोदी के अनुसार हम अपने प्राचीन अनुसंधानों को आधुनिकता से जोड़ने में बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाए बल्कि आधुनिकता की चकाचौंध में उन्हें भूलते चले गए। नमो ने देशवासियों से कहा कि इसी स्थिति को बीते 5 वर्षों में हमने लगातार बदलते रहने का भरसक प्रयास किया है।

यह भी बता दें कि ये सारी बातें पीएम मोदी ने दिल्ली में आयोजित “योग पुरस्कार समारोह” को संबोधित करते हुए उपस्थित लोगों के बीच कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आयुष मंत्रालय के जरिए बीते 5 वर्षों से इस स्थिति को बदलने का काम अनवरत जारी है।

इस अवसर पर नमो द्वारा उद्घोषणा की गई कि प्राचीन शोधों को प्रयोगशालाओं में मान्यता दी जा रही है। साथ ही उन मान्यताओं को इस तरह पेश किया जा रहा है जिससे चिकित्सा विज्ञान भी उन्हें समझ सके। मोदी ने स्वीकार किया कि वेदों के पुराने ज्ञान को सफलतापूर्वक आधुनिकता के साथ जोड़ने में बहुत कम सफलता मिली है, फिर भी देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास पर तेजी से काम चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि केवल आधुनिक चिकित्सा ही नहीं, आयुष की शिक्षा में भी अधिक व बेहतर पेशेवर आएं, इसके लिए भी आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। जब हम देश में और डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोलने जा रहे हैं तो भला आयुष को कैसे भूलेंगे।

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पीवी सिंधु की ऐतिहासिक उपलब्धि

ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने इतिहास रच दिया। रविवार को स्विट्जरलैंड में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में उन्होंने जापान की खिलाड़ी नोजोमी ओकुहारा को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत के लिए महिला और पुरुष दोनों वर्गों में से किसी ने गोल्ड मेडल नहीं जीता था।
पीवी सिंधु ने नोजोमी ओकुहारा को सीधे गेमों में 21-7, 21-7 से पराजित किया। 38 मिनट तक चले इस मुकाबले को जीतने के साथ ही सिंधु ने 2017 के फाइनल में ओकुहारा से मिली हार का हिसाब बराबर कर लिया। ओकुहारा के खिलाफ सिंधु का कैरियर रिकार्ड अब 9-7 का हो गया है।
बता दें कि भारत ने इस टूर्नामेंट में अब तक तीन रजत और छह कांस्य पदक जीते थे। सिंधु इससे पहले इस टूर्नामेंट में 2017 और 2018 में लगातार दो बार फाइनल में हारी थीं। लेकिन इस बार उन्होंने इस सिलसिले को तोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में 2013 से खेल रही सिंधु के नाम अब पांच पदक हो गए हैं। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं। विश्व की किसी भी महिला खिलाज़ी ने अब तक इतने पदक नहीं जीते। यह भी जानें कि फाइनल जीतने के साथ ही इस टूर्नामेंट में सिंधु द्वारा अब तक जीते मैचों की संख्या 21 हो गई है। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से कोटिश: बधाई।

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बिहार का अमिताभ अब चाँद पर उतारेगा चन्द्रयान

शिक्षक दिवस 5 सितंबर के दो दिन बाद यानी 7 सितंबर को जब चन्द्रयान-2 चाँद की सतह पर उतरेगा तो धरती से लेकर अंतरिक्ष तक बिहार की प्रतिभा का पूरी दुनिया में डंका बजेगा | भारत के अति महत्वपूर्ण मिशन में बिहार के वरीय वैज्ञानिक (चन्द्रयान -2 के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं ऑपरेशन डायरेक्टर) अमिताभ की प्रमुख भागीदारी से समस्तीपुर जिला से लेकर सारे शिक्षण संस्थान (एएन कॉलेज पटना व बीआईटी मेसरा) जहाँ उन्होंने शिक्षा ग्रहण किया वे सभी गौरवान्वित हो रहे हैं |

बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स में गहरी अभिरुचि होने के कारण अमिताभ बचपन में रेडियो के पुर्जे खोलकर जोड़ने का अभ्यास करते-करते 1989 में एएन कॉलेज से एमएससी इन इलेक्ट्रॉनिक्स तक की पढ़ाई पूरी कर ली और एमटेक की पढ़ाई बीआईटी मेसरा से पूरी की | फिर 2002 में इसरो से जुड़े और चन्द्रयान -1 और चंद्रयान-2 मिशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें दी गई | वर्ष 2008 में सर्वप्रथम वे चन्द्रयान -1 मिशन में प्रोजेक्ट मैनेजर की भूमिका का निर्वहन सर्वाधिक सफलतापूर्वक करते रहे |

यह भी बता दें कि वैज्ञानिक अमिताभ द्वारा चंद्रमा की सतह पर चन्द्रयान -2 को लैंड कराने के लिए काफी रिसर्च किया गया | चंद्रमा के किस ओर की सतह पर चन्द्रयान -2 उतरेगा…… पहले इस काम के लिए रूस का सहयोग लिया जाना था, लेकिन रूस की अकारण उदासीनता से चंद्रयान-2 के लेंडर को विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी अमिताभ की टीम को ही दे दी गई है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि बिहार के इस वैज्ञानिक अमिताभ को इंडियन सोसायटी आफ रिमोट सेंसिंग सेंटर देहरादून से यंग अंतरिक्ष अवार्ड दिया जा चुका है |

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