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अनर्थ होने से पहले चलिए ‘अर्थ डे’ को अर्थ दें

22 अप्रैल को दुनिया ‘अर्थ डे’ के रूप में जानती है। ‘अर्थ डे’ यानि हम सबकी मां पृथ्वी का दिन, जो आज कराह रही है। शायद इस दिन की प्रासंगिकता यही है कि हम उसके कराहने को सुन सकें, समझ सकें, महसूस कर सकें। बहरहाल, पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल 1970 को पहली बार अमेरिका में ‘अर्थ डे’ मनाया गया। इस दिन को मनाने का मकसद था राजनीतिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियों को अमल में लाने के लिए दबाव बनाना। बीस वर्षों के बाद यानि 22 अप्रैल 1990 को ‘अर्थ डे’ के बीसवें जन्मदिन पर 141 देशों में दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था। तब से आज तक हर साल इस दिन दुनिया भर में पर्यावरण प्रेमी और सरकारें धरती को बचाने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं और एकजुट होते हैं।

जीवन और पर्यावरण को हमेशा से ही एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। पर्यावरण के बगैर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मानव-जाति के लिए यह पृथ्वी ही सबसे सुरक्षित ठिकाना है लेकिन दुर्भाग्यवश आज इसका अस्तित्व ही संकट में है। अगर समय रहते इसकी रक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो इसे बचाना मुश्किल हो जाएगा। प्रश्न उठता है, आखिर ऐसी क्या समस्याएं हैं जिनके कारण आज ‘पृथ्वी दिवस’ मनाने की जरूरत आ पड़ी है। चलिए, जानने की कोशिश करते हैं।

A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th'B', Litera Valley School, Patna
A Drawing on Earth Day By Akshay Deep, Student of class 4th’B’, Litera Valley School, Patna .

सबसे पहले ग्लोबल वार्मिंग। आज ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व के लिए एक बड़ा और सामाजिक मुद्दा है। सूरज की रोशनी को लगातार ग्रहण करते हुए हमारी पृथ्वी दिनों-दिन गर्म होती जा रही है, जिससे वातावरण में कार्बन-डाई-ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। पृथ्वी के तापमान में पिछले सौ सालों में 0.18 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि हो चुकी है। माना जाता है कि अगर ऐसे ही तापमान में बढ़ोतरी हुई तो 21वीं सदी के अंत तक 1.1-6.4 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान बढ़ जाएगा। ऐसा होने पर सूखा बढ़ेगा, बाढ़ की घटनाएं बढेंगी और मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

दूसरी बड़ी वजह है ग्रीन हाउस गैसें। ग्रीन हाउस गैसें वातावरण या जलवायु में परिवर्तन और अंतत: ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी होती हैं। जिन ग्रीन हाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन होता है उनमें कार्बन-डाई-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन आदि शामिल हैं। कार्बन-डाई-ऑक्साईड की ही बात करें तो पिछले 15 सालों में ही इसका उत्सर्जन 40 गुना और औद्योगिकीकरण के बाद से 100 गुना बढ़ गया है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन आम प्रयोग के उपकरणों, जैसे फ्रिज, कंप्यूटर, स्कूटर, कार आदि से होता है। कार्बन-डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत पेट्रोलियम ईंधन और परंपरागत चूल्हे हैं।

पृथ्वी के संकट का तीसरा बड़ा कारण है पॉलीथीन। सुविधा के लिए बनाई गई पॉलीथीन आज बहुत बड़ा सिरदर्द बन गई है। पॉलीथीन नष्ट नहीं हो सकती और इसके कारण यह धरती की उर्वरक क्षमता को खत्म कर रही है। साथ ही भूगर्मीय जल दूषित हो रहा है। इसको जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है। एक आंकड़े के मुताबिक सिर्फ भारत में ही हर साल 500 मीट्रिक टन पॉलीथीन का निर्माण होता है और रीसाइकलिंग एक प्रतिशत से भी कम की हो पाती है।

पृथ्वी के संकट की एक और वजह है हमारी खेती का असंतुलन। आजकल आमतौर पर भूमिविशेष पर एक ही फसल की खेती की जाती है, जो कि अस्थिर पर्यावरण तंत्र को बढ़ावा देती है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसान सिर्फ मक्का उपजाता है तो वहां विनाशकारी कीटों को खाने वाले परभक्षियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा, जिसकी वजह से कीटनाशकों की जरूरत होगी। इस कारण दुनिया भर में करोड़ों एकड़ कृषि भूमि बेकार हो रही है और हमारी भावी पीढ़ियों के पेट भरने पर भी संकट आ रहा है।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों को खत्म कर हमने पृथ्वी के संकट को और भी गहरा कर दिया है। आज इस वजह से हमारा मौसम चक्र ही अनियमित हो गया है। पूरी दुनिया में गर्मियां लंबी होती जा रही हैं और सर्दियां छोटी। जलवायु में इस परिवर्तन का असर मनुष्यों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर भी हो रहा है। पेड़-पौधों पर फूल और फल अब समय से पहले लग सकते हैं और पशु-पक्षी अपने क्षेत्रों से पलायन कर दूसरी जगह जा सकते हैं। हर दिन धटती हरियाली और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण नई समस्याओं को जन्म दे रहा है।

तो ये थी ‘अर्थ डे’ मनाने की चंद बड़ी वजहें। क्या आप पल भर की भी देरी करना चाहेंगे पृथ्वी को बचाने की मुहिम से जुड़ने में। ‘अर्थ डे’ पर केवल रस्म अदायगी न करें। आईये, कुछ सार्थक करें। तभी बच पाएगी हमारी मां पृथ्वी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

 

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नीतीश के बाद अब लालू मिलेंगे सोनिया से

अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीते गुरुवार को सोनिया गांधी से हुई मुलाकात की चर्चा थमी भी नहीं थी कि अब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की भी कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि उनकी मुलाकात की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

बताया जाता है कि नीतीश ने देश भर में भाजपा विरोधी अभियान की शुरुआत को लेकर सोनिया से मुलाकात की थी। साथ ही इस बैठक में दोनों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा हुई। जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर राष्ट्रपति पद के लिए एक ही उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए और विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने की वजह से सोनिया गांधी को आगे आकर राजनीतिक दलों से बातचीत करनी चाहिए।

हालांकि नीतीश इससे पूर्व भी कई बार कह चुके हैं कि बिहार की तरह राष्ट्रीय स्तर पर गैर भाजपा दलों के महागठबंधन को ले कांग्रेस पहल करे। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि महज चार दिन पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के सिलसिले में पटना में थे। इस दौरान वे नीतीश और लालू दोनों के साथ एक ही मंच पर थे। चूंकि राहुल गांधी से हुई इस मुलाकात के तुरंत बाद नीतीश ने सोनिया से मुलाकात की है, इसीलिए इसके अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं। भाजपा खेमे के लोग इसे लालू पर दबाव बनाने की नीतीश की राजनीति बता रहे हैं।

बहरहाल, देखा जाय तो लालू की कांग्रेस के प्रति ‘निष्ठा’ पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं उठाया जा सकता। लेकिन महागठबंधन बनने के पूर्व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उन से ज्यादा नीतीश को तवज्जो दी थी। अब जबकि नीतीश और लालू दोनों अलग-अलग कांग्रेस अध्यक्ष से मिल रहे हैं, जाहिर है कुछ तो नया बिहार की राजनीति में भी देखने को मिलेगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप   

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भाजपा ने क्यों किया चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का बहिष्कार?

बिहार सरकार की तरफ से सोमवार को पटना में आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम का भाजपा समेत एनडीए के तमाम घटक दलों ने बहिष्कार किया। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार ने कार्यक्रम का ‘राजनीतिकरण’ किया। पार्टी इस बात से भी नाराज है कि कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को न्योता नहीं दिया गया, जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कार्यक्रम में शिरकत की। हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ जिन लोगों को मंच साझा करना था उनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह शामिल थे, लेकिन वे भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे और एक तरह से इसका ‘अघोषित बहिष्कार’ किया।

गौरतलब है कि चंपारण सत्याग्रह शताब्दी कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार द्वारा आयोजित स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अतिरिक्त मंच पर जिन लोगों को जगह दी गई थी उनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव सत्येन्द्र नारायण सिंह एवं अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एसोसिएशन के सचिव सत्यानंद याजी शामिल थे। इस सूची पर सख्त आपत्ति जताते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया कि ‘नीतीश, आप चारा घोटाले के दोषी लालू और नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर चल रहे राहुल गांधी को बुलाकर फ्रीडम फाइटर्स का अपमान कर रहे या सम्मान?’ वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस कार्यक्रम के ‘राजनीतिकरण’ से आहत हैं। उनके इस बयान का आशय विशेषकर लालू को मंच पर जगह देने से था।

इस कार्यक्रम को लेकर एनडीए की अगुआ भाजपा का रुख सामने आने के बाद ही हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी ने इस कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया, जैसा कि हम के नेता जीतन राम मांझी के बयान से भी स्पष्ट होता है, जिसमें उन्होंने कहा कि एनडीए में रहने के कारण उनका इस कार्यक्रम में जाना उचित नहीं होगा।

बहरहाल, जब एनडीए खेमे की ओर से इतनी उठापठक हो रही हो तो लालू कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा कि वह बीजेपी को एक हाथ से गांधी और दूसरे हाथ से उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को माला पहनाने का ‘ड्रामा’ नहीं करने देंगे। वहीं, नीतीश ने कहा कि उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों को बुलावा भेजा था, लेकिन जो नहीं पहुंच सके, उन्हें उनसे कोई शिकायत नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब मोदी ने लालू को 21वीं सदी का सबसे बड़ा जमींदार बताया

भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव पर फिर बड़ा हमला करते हुए कहा कि वे 21वीं सदी के सबसे बड़े जमींदार हैं। बकौल मोदी उनकी एक जगह नहीं, कई जगहों पर जमीन है। फर्जी कंपनी बनाकर वे जमीन हड़पने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजद सुप्रीमो की तीस कंपनियां हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन मात्र तीन पतों पर है। ये कंपनियां काले धन को सफेद करती हैं।

गौरतलब है कि मोदी लालू और उनके परिवार पर एक के बाद एक घोटाले का आरोप लगा रहे हैं। पहले उन्होंने मिट्टी घोटाले का आरोप लगाया, फिर जमीन घोटाले की बात कही। उसके बाद कहा कि लालू ने बिहटा में शराब फैक्ट्री खुलवाकर करोड़ों की संपत्ति बनाई। सिर्फ 55 हजार निवेश कर करोड़ों की जमीन के मालिक बन गए वगैरह-वगैरह।

प्रश्न उठता है कि लालू पर लगातार हमलावर मोदी को दस्तावेजी सबूत आखिर मिल कहां से रहे हैं? कुछ लोगों का मानना है कि इसके पीछे बीएसएससी घोटाले में आईएएस सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के से उपजी आईएएस लॉबी की नाराजगी है। जेडीयू से भाजपा में आए ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू का भी कहना है कि कुछ अधिकारी मोदी के मददगार बने हुए हैं। स्वयं सुशील कुमार मोदी भी दावा कर रहे हैं कि बिहार सरकार में शामिल लोग ही उनकी मदद कर रहे हैं।

बहरहाल, इन सारे घटनाक्रम के मद्देनज़र अब कई लोग दबी जुबान से लालू-नीतीश के संबंधों में आई खटास को इन सबकी वजह बता रहे हैं। कहने की कोई जरूरत नहीं कि अगर इस कयास में थोड़ी भी सच्चाई है तो इसका अर्थ यह है कि महागठबंधन सरकार संकट में है।

उधर राजद सुप्रीमो ने अपनी पार्टी के सारे प्रवक्ताओं को बुलाकर कहा कि इन आरोपों से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। बकौल लालू तेजस्वी और तेजप्रताप की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सुशील मोदी अनर्गल और असंगत आरोप लगा रहे हैं। लालू ने यह भी कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है। ये सब उनकी और उनके परिवार की छवि खराब करने की साजिश है। यही नहीं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि लालू ने अपने सारे प्रवक्ताओं को स्वयं ट्रेनिंग भी दी कि मीडिया में इन आरोपों का किस तरह मंहतोड़ जवाब दिया जाय।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने की दहेज लेने वालों की शादियों में न जाने की अपील

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से दहेज लेने वालों की शादी में शिरकत नहीं करने की अपील की है। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी शादियों में मत जाइए। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। बता दें कि नीतीश मंगलवार को मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज परिसर में चंपारण सत्याग्रह स्मृति वर्ष, 2017 को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी, फिर नशाबंदी और अब दहेजबंदी लागू कराना है। चंपारण सत्याग्रह के सौवें वर्ष में बापू को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए अभी से तैयारी करें, तभी 2019 तक यह संभव हो पाएगा। नीतीश प्रधानमंत्री को याद कराना नहीं भूले कि वे उस राज्य से आते हैं, जहां राज्य के स्थापना काल से शराबबंदी लागू है। लगे हाथ उन्होंने प्रधानमंत्री से यह आग्रह भी किया कि कुछ राज्य शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट हाइवे को डिनोटिफाइ कर परिवर्तित करने में जुट गए हैं। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे तिकड़म लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में आई कमी की चर्चा भी की और शराबबंदी के बाद राज्य को हुए लाभ व उपलब्धियां गिनाईं। इशारों ही इशारों में उन्होंने विपक्ष की जमकर खबर ली और कहा – ‘पूर्ण शराबबंदी कानून को तालिबानी कानून बताने वालों की अब बोलती बंद हो गई है’। नीतीश ने स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए कहा कि किसी भी बड़े और सार्थक प्रयास का पहले मजाक उड़ाया जाता है, फिर विरोध होता है और धीरे-धीरे लोग साथ आ जाते हैं। अब हमारा मकसद गांधी के संदेशों और विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है। अगर दस प्रतिशत युवाओं तक यह संदेश हम पहुंचाने में सफल रहे तो यह प्रयास सार्थक साबित होगा।

बकौल नीतीश नई पीढ़ी को गांधी के विचारों से जोडऩा ही अब उनका मकसद है। उम्मीद की जानी चाहिए कि शराबबंदी के बाद वे जिस तरह दहेजबंदी के विरुद्ध कमर कस कर लग चुके हैं, इसके सुखद परिणाम से भी हम बहुत जल्द रू-ब-रू हो सकेंगे।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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और इस तरह राम के भाई थे हनुमान

चलिए, हनुमान जयंती के पावन अवसर पर एक अद्भुत कथा से अवगत कराएं आपको। ये कथा न केवल भगवान राम और उनके सर्वप्रिय भक्त हनुमान से जुड़ी है, बल्कि मधेपुरा के समीप स्थित प्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान से भी जुड़ी है।

पूरी दुनिया राम और हनुमान के बीच भगवान और भक्त का रिश्ता जानती है, है भी। सच तो यह है कि भक्ति में हनुमान की कोई सानी ही नहीं। यह भी सच है कि मर्यादापुरुषोत्तम राम अपने इस भक्त को भाई से कम नहीं मानते थे। उन्होंने अपने मुख से कहा है – तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई। अर्थात् हे हनुमान तुम मुझे मेरे भाई भरत जैसे ही प्रिय हो। चाहे वाल्मीकि रामायण हो, चाहे तुलसीदासरचित रामचरितमानस या रामायण के अन्य सैकड़ों संस्करण, राम और हनुमान के बीच का यह स्नेह सर्वत्र वर्णनातीत है। न तो उसे शब्दों में बांधा जा सकता है और न ही वो किसी संबंधविशेष के दायरे में समा सकता है। फिर भी ये जानना खासा दिलचस्प होगा कि राम और हनुमान केवल भावना से नहीं, रिश्ते से भी भाई थे। भले ही इनकी मुलाकात सुग्रीव के सौजन्य से पहली बार ऋष्यमूक पर्वत पर हुई हो, पर सच यह है कि विधाता ने इनका रिश्ता जन्म के पहले ही जोड़ दिया था। चलिए जानते हैं कैसे।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, राजा दशरथ ने पुत्रप्राप्ति की कामना से ऋष्य़ श्रृंग, जिनका आश्रम मधेपुरा के समीप स्थित सिंहेश्वर में था, को बुलाकर पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ के पूर्ण होने पर अग्निदेव एक पात्र में खीर लेकर प्रकट हुए, जो राजा दशरथ की तीनों रानियों को खाना था। राजा दशरथ ने यह खीर अभी तीनों रानियों को दिया ही था कि एक पक्षी अचानक आया और खीर का पात्र लेकर उड़ चला। तीनों रानियों के खा लेने के बाद भी खीर के कुछ दाने उस पात्र में रह गए थे। संयोगवश पक्षी के मुंह से खीर का वह पात्र छूट गया और हनुमानजी की माता अंजनी की गोद में जा गिरा जो उस समय स्वयं पुत्र की कामना से तपस्या कर रही थीं। माता अंजनी ने उस खीर को भगवान शिव का प्रसाद समझकर खा लिया और उस खीर के प्रताप से दशरथ की तीनों रानियों की तरह वो भी गर्भवती हो गईं।

समय आने पर दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन का जन्म हुआ, तो दूसरी ओर माता अंजनी ने हनुमान को जन्म दिया। इस तरह भगवान राम और उनके अप्रतिम भक्त हनुमान के बीच एक अनजाना रिश्ता जुड़ा था, जो भाई-भाई का था। इस बात की सत्यता इससे भी प्रमाणित होती है कि राम और हनुमान के जन्मदिवस में मात्र छह दिनों का अंतर है।

सौजन्य: मंटो बाबू

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बिहार की आशा को ब्रिटेन का ‘एशियन बिजनेस वुमेन पुरस्कार’

13 साल की उम्र में जिस लड़की की पढ़ाई छूट हो गई हो, 15 साल की उम्र में शादी हो गई हो और 25 साल की उम्र तक जिसे अंग्रेजी न आती हो, आज उसके नाम ब्रिटेन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित पुरस्कारों की पूरी फेहरिस्त हो तो क्या कहेंगे आप? और उस वक्त आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी जब आपको कहा जाय कि वो शख्सियत पिछड़े कहे जाने वाले बिहार की मिट्टी से निकली है? जी हां, मैं बात कर रहा हूं बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली 65 वर्षीया आशा खेमका की जिन्हें शुक्रवार को ब्रिटेन का प्रतिष्ठित ‘एशियन बिजनेस वुमेन पुरस्कार’ दिया गया। इससे पहले 2013 में उन्हें ब्रिटेन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘डेम कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर’ से नवाजा जा चुका है।

आशा खेमका पर आगे चर्चा हो, उससे पहले ये जानें कि वे हैं कौन? ब्रिटेन की नामचीन हस्तियों में शुमार आशा वर्तमान में वहां के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार वेस्ट नॉटिंघमशायर कॉलेज की प्रिंसिपल हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए बेहद खास है कि शादी के बाद जब वे ब्रिटेन गई थीं, तब उन्हें अंग्रेजी का कोई ज्ञान नहीं था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंग्रेजी की पढ़ाई शुरू कर दी। कुछ कर दिखाने की ऐसी अदम्य लालसा थी उनके भीतर कि अंग्रेजी पर उन्होंने जैसे अधिकार ही कर लिया।

आपको बता दें कि आशा 13 साल की थीं, जब उनकी पढ़ाई छूट गई थी। 15 साल की होते-होते परिवारवालों ने उनकी शादी डॉक्टर शंकर अग्रवाल से कर दी। शादी के बाद घर संभालते वह 25 वर्ष की हो गईं तब उनके पति को ब्रिटेन में नौकरी मिली। तब वो अपने बच्चों के साथ पति के पास ब्रिटेन आ गईं। स्वाभाविक था कि अंग्रेजी का ज्ञान न होने के कारण उनके शुरुआती दिन बहुत कठिन रहे होंगे। पर आशा ने टीवी पर बच्चों के लिए आने वाले शो को देख-देख अंग्रेजी सीखना शुरू किया।

प्रारम्भ में आशा साथी युवा महिलाओं से टूटी-फूटी अंग्रेजी मे बात करतीं, पर घबरातीं नहीं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई, आत्मविश्वास बढ़ता गया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ सालों बाद कैड्रिफ यूनिवर्सिटी से उन्होंने बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री ली और ब्रिटेन के चुनिंदा कॉलेजों में शुमार वेस्ट नॉटिंघमशायर कॉलेज में लेक्चरर बनीं। अब वो इसी कॉलेज की प्रिंसिपल हैं।

आशा खेमका की कहानी आप तक पहुंचाने का उद्देश्य यह है कि अंग्रेजी या किसी भी भाषा या विषय का समुचित ज्ञान न होने के कारण स्वयं को हीन मान लेने वाले प्रेरणा पा सकें, क्योंकि हम और आप इससे इनकार नहीं कर सकते कि न केवल बिहार बल्कि सम्पूर्ण देश में ग्रामीण या कस्बाई इलाके में रहने वाले अधिकांश परिवारों के लड़के-लड़कियां आमतौर पर ऐसी हीनता से ग्रसित होते हैं। जरा सोच कर देखें जब आशा ने उस मुल्क में अपनी ऐसी पहचान बनाई जिसने उसके अपने देश भारत समेत लगभग आधी दुनिया पर कभी राज किया हो, तो आप अपने देश में ऐसा क्यों नहीं कर सकते? क्या आशा की कहानी पढ़ने के बाद आपकी आशा को पंख नहीं लग जाएंगे!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप         

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राष्ट्रपिता गांधी के ताजिंदगी लंगोटी धारण करने का राज !

एक ओर जहां बिहार के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष पर 16 अप्रैल से 2018 के बिहार दिवस की पूर्व संध्या तक इसे नये-नये कार्यक्रमों के साथ हर माह समारोहपूर्वक उत्सवी माहौल में मनाये जाने का उद्घोष किया गया वहीं दूसरी ओर मधेपुरा के झल्लूबाबू सभागार में अति संवेदनशील एवं डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल (भा.प्र.से.) द्वारा इस दरमियान बारहों महीने में आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों के नतीजों से समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की पुरजोर चर्चाएं कई घंटों तक पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों के बीच की जाती रही |

यह भी बता दें कि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि 16 अप्रैल को जिला मुख्यालय से लेकर पंचायत के हर गांव व टोले में सफाई अभियान चलाया जायगा, 17 अप्रैल को प्रातः गांधी पदयात्रा का आयोजन, दिन में गांधी व्याख्यान का आयोजन और शाम में अलग-अलग संस्था द्वारा गांधी के विचारों पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया जायेगा |

जिले के सभी प्रखंडों के बीडीओ, सीओ और सभी महिला पदाधिकारियों सहित दोनों अनुमंडल के एसडीएम, डीपीआरओ, डीईओ, डीआईओ, डीडीसी, एसपी, सहित समाजसेवियों को संबोधित करते हुए डीएम मो.सोहैल ने जहां यह कहा कि बिहार की धरती पर बापू के चंपारण सत्याग्रह को सौ साल पूरे होने पर 1 वर्ष तक हर माह अलग-अलग थीम यानी कभी कुष्ट निवारण तो कभी टीवी उन्मूलन, कभी नारी सशक्तिकरण तो कभी नशा मुक्तिकरण…….. आदि पर कार्यक्रम आयोजित होता रहेगा वहीं समाजसेवी साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने कहा कि “अप्रैल 1917 को गांधी को चंपारण की धरती पर स्वागत करने वालों में किसान राजकुमार शुक्ल, डॉ.अनुग्रह नारायण सिंह और वही जे.बी.कृपलानी थे……  जो आजादी के बाद मधेपुरा से प्रथम सांसद चुने गये | यह कहते हुए उन्होंने कहा कि अपने अतीत को जाने बिना ना तो हम अपने भविष्य को गढ़ सकेंगे और ना ही वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ सकेंगे | डॉ.मधेपुरी ने विस्तार से बापू को लगी तीन गोलियों की कहानी भी कहीं और विस्तार से गरीब महिला के वस्त्र के अभाव में 7 दिनों से नहीं नहाने की बात कस्तूरबा से सुनकर बापू ने ताजिंदगी लंगोटी धारण करते रहने की ठानी थी तथा शोषण के विरुद्ध निर्भीक होकर अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने की भी प्रतिज्ञा ली थी |

जहां अपने अनुभवों को बांटते हुए एसपी विकास कुमार ने बापू की तरह खुद पर प्रयोग कर निरामिष होने, क्रोधमुक्त होने और नशामुक्त होने पर विस्तार से चर्चा की वहीं डीडीसी मिथिलेश कुमार, एडीएम मुर्शिद अहमद, एसडीएम संजय कुमार निराला, सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पाण्डेय, डीपीआरओ मो.कयूम अंसारी, शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद यादव, श्यामल कुमार सुमित्र सहित मीडिया के तुर्वसु उर्फ बंटी, प्रो.प्रदीप कुमार झा आदि ने भी अपने मूल्यवान विचारों से सदन को अवगत कराया |

अंत में जिलाधिकारी मो.सोहैल ने सदन को जानकारियां दी कि 16 अप्रैल को जिले के सीमा पर गम्हरिया में “चंपारण सत्याग्रह द्वार” का शिलान्यास किया जायेगा और जिले के छोटे-बड़े सभी कार्यालय कक्षों में राष्ट्रपिता गांधी की तस्वीर होगी | उन्होंने यह भी कहा कि सभी प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक स्कूलों में प्रार्थना के बाद गांधी जी का भजन गाया जायेगा तथा होने वाली चेतना सभा में गांधी जी की छोटी कहानियों का वाचन होगा और बापू पर कहानियां लिखने के लिए स्कूली बच्चों को प्रेरित भी किया जायेगा | अंत में डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि ‘बापू आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत प्रत्येक पंचायत में दो-दो लोगों की टीम घर-घर जाकर घर के मुखिया का अभिवादन करेंगे और घर के लोगों को बुलाकर गांधी के संदेश साझा करेंगे……| गांधी शैली में सभी कार्यक्रम होंगे……. जहां-जहां गांधी की प्रतिमा है वहां मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद दरी बिछाकर अन्य कार्यक्रम किये जायेंगे |

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बिहार में शराबबंदी के बाद दहेजबंदी का बिगुल

शराबबंदी की सफलता से उत्साहित बिहार की नीतीश सरकार अब समाज-सुधार का एक और बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। खास बात यह कि इस सुधार की प्रेरणा-स्रोत भी शराबबंदी की तरह महिलाएं हैं और शोषण व पीड़ा से उनकी मुक्ति ही इसका केन्द्रीय उद्देश्य है। जी हां, इस बार सरकार जिस कुरीति के विरुद्ध बिगुल फूंकने जा रही है, वो है सदियों से हमारे समाज को डंसती आ रही दहेज की प्रथा। इसी के साथ बालविवाह के खिलाफ भी लड़ाई तेज होगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध बड़े जागरूकता अभियान की योजना बनाएं।

गौरतलब है कि पिछले सोमवार को महिलाओं के लिए विशेष रूप से आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में एक युवती ने मुख्यमंत्री को यह परामर्श दिया था कि वह शराबबंदी की तरह ही दहेजबंदी का अभियान चलाएं। वहीं एक युवती ने बालविवाह को लेकर सलाह दी थी कि ऐसा कानून बनना चाहिए कि जब तक लड़की की पढ़ाई पूरी न हो जाए तब तक उनकी शादी नहीं हो। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महत्वपूर्ण बात है कि अब महिलाएं इन मुद्दों को लेकर मुखर हैं। उन्होंने दहेज और बालविवाह के विरुद्ध चलाए जाने वाले अभियान को कारगर और प्रभावी बनाने के लिए निर्देश दिया कि प्रस्तावित कैंपेन में समाज कल्याण विभाग स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग को भी साथ ले।

इस बैठक में नीतीश कुमार ने ‘मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना’ के सभी अवयवों की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह बात सामने आनी चाहिए कि इन योजनाओं से कितने लोगों को लाभ हुआ है। मुख्यमंत्री ने कन्या सुरक्षा योजना की बात भी कही। इसके अतिरिक्त बालविवाह प्रतिरोध अधिनियम 2006, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, फूड सेफ्टी एंड न्यट्रिएंट, आंगनबाड़ी संचालन, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना, शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना, पुनर्वास गृह, बसेरा, वृद्धा आश्रम निर्माण एवं नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना पर भी चर्चा की गई। समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, समाज कल्याण विभाग की प्रधान सचिव वंदना किनी एवं महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक एन विजयलक्ष्मी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा रहीं।

 

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तो नीतीश सरकार लालू परिवार से जुड़े मामले की जांच कराएगी!

पटना के चिडियाघर (संजय गांधी जैविक उद्यान) में बिना टेंडर के 90 लाख की मिट्टी भराई का मामला तूल पकड़ चुका है। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने मामले की जांच के लिए संबंधित फाइल तलब की है। कहा जा रहा है कि आरोप की जांच के लिए राज्य सरकार कमेटी बना सकती है। ऐसे में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, हालांकि उन्होंने आरोप को निराधार बताते हुए सरकार से स्वयं जांच कराने का आग्रह किया था।

गौरतलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरजेडी सुप्रीमो के दोनों मंत्री बेटों पर पटना के एक निर्माणाधीन मॉल की मिट्टी पटना के चिड़ियाघर को ‘अवैध’ तरीके से बेचने का आरोप लगाया था। बताया जाता है कि उक्त मॉल बिहार का सबसे बड़ा मॉल है और जिस कंपनी द्वारा यह मॉल बनाया जा रहा है उसमें लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव, छोटे बेटे तेजस्वी यादव और एक बेटी चंदा यादव डायरेक्टर हैं।

आरजेडी सुप्रीमो ने इस पूरे मामले को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने उल्टा यह दावा किया कि मिट्टी बेचना तो दूर उनका परिवार चिड़ियाघर को गाय का गोबर तक मुफ्त में देता है। उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने तो सख्त अंदाज में सुशील मोदी पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। ध्यान रहे कि तेज प्रताप नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री भी हैं। यह मामला इसी विभाग का है।

उधर संजय गांधी जैविक उद्यान के निदेशक नंद किशोर ने कहा कि वन विभाग में ठेके पर काम कराने की कोई प्रथा नहीं है। विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से ही काम कराया जाता है। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर में मिट्टी की आवश्यकता थी, इसलिए यह काम एमएस इंटरप्राइजेज को दिया गया। वह कहां से मिट्टी ला रही है, इसकी जानकारी वन एवं पर्यावरण विभाग को नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस काम में नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है।

बहरहाल, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप हैं। अब जबकि मुख्य सचिव ने मामले की फाइल तलब की है, ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अपने दामन को पाक-साफ बताने के लिए सरकार संभवत: इसकी जांच करा सकती है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में राज्य की सियासत और गरमाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

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