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और नीतीश ने किसानों का दिल जीत लिया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन के अशोक कन्वेंशन सेंटर में किसान समागम का उद्घाटन किया। इस समागम का आयोजन कृषि विभाग ने राज्य के लिए तीसरा कृषि रोड मैप 2017-2022 तैयार करने के लिए किया था। बता दें कि पहला कृषि रोड मैप 2008-2012 और दूसरा कृषि रोड मैप 2012-2017 के लिए तैयार किया गया था।

शुक्रवार से शुरू हुए इस किसान समागम में राज्य के सभी जिलों से आए कृषि से संबंधित 534, पशुपालन से 75, मत्स्य से 25, वन व पर्यावरण से 25, सहकारिता से 25 एवं गन्ना से 15 किसानों द्वारा दिए गए सुझावों पर तीसरा कृषि रोड मैप तैयार किया जाएगा। रोड मैप तैयार कर लिए जाने के बाद बिहार में बीज हब की स्थापना की जाएगी ताकि किसानों को बीजों की समस्या से निजात मिल सके और राज्य में अबाध गति से कृषि का विकास हो।

किसान समागम का खास आकर्षण रहा दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीब 1400 किसानों के साथ जमीन पर बैठकर खाना। नीतीश ने कृषि विभाग को इसकी व्यवस्था करने का विशेष निर्देश दिया था। राज्य भर से आए किसानों पर इसका सकारात्मक असर भी तुरत देखने को मिला। नीतीश के इस कदम से उत्साहित जमुई के एक किसान ने कहा कि एक तरफ सरकारें किसानों पर गोलियां चलवा रही हैं और दूसरी ओर नीतीश किसानों के बीच बैठकर भोजन कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में जुटे किसानों ने खुलकर अपनी बातें कहीं और मुख्यमंत्री उन्हें डूब कर सुनते रहे। अच्छी बात यह कि उन्होंने कृषि योजनाओं की खूबियों और खामियों दोनों को समभाव से सुना। किसानों ने जहां खूबियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों की ओर भी इशारा किया। माहौल एकदम दोस्ताना था। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ हंसी-ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, मंत्री जय कुमार सिंह, आलोक मेहता और अवधेश सिंह तथा तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार मॉडल अपना कर चीन से आगे बढ़ेगा भारत : नीतीश

कई सौगातों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुपौल में हैं। यहां कोसी क्लब स्थित सभा स्थल से उन्होंने रिमोट द्वारा 44 योजनाओं का उद्घाटन एवं 88 नई योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके उपरान्त विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का विकास मॉडल पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए। बिहार मॉडल अपनाने से देश चीन से भी आगे बढ़ेगा।

शराबबंदी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समाज बदलने के संकल्प के साथ काम करते हैं। शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और साथ ही शराबबंदी के बाद ऐसा ही सशक्त अभियान चलाकर समाज से बालविवाह और दहेजप्रथा को भी खत्म किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह ने सही ही कहा कि मुख्यमंत्री अभी सोशल रिफॉर्मर की भूमिका में हैं। वहीं, मंत्री अब्दुल गफूर ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन पर तेजी से काम हो रहा है और राज्य में विकास की कई योजनाएं चल रही हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आज जिन योजनाओं का उद्घाटन किया है वे मील का पत्थर साबित होंगी। जबकि जलसंसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि बाढ़ के पूर्वानुमान का मुख्य कार्यालय कौशिकी भवन में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने आज ही वीरपुर में 54 करोड़ की लागत से नवनिर्मित कौशिकी भवन का उद्घाटन किया है।

बता दें कि उपरोक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि थे बिजेन्द्र प्रसाद यादव। वहीं विशिष्ट अतिथि थे बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति मो. हारुन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर। कार्यक्रम में आमंत्रित अन्य महत्वपूर्ण लोगों में सुपौल की सांसद रंजीत रंजन, छातापुर के विधायक नीरज कुमार सिंह, पिपरा के विधायक यदुवंश कुमार यादव, निर्मली के विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, त्रिवेणीगंज की विधायक वीणा भारती तथा सदस्य विधान परिषद नूतन सिंह, संजीव कुमार सिंह एवं डॉ. एनके यादव सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें से अधिकांश की उपस्थिति कार्यक्रम में देखी गई। विभिन्न महकमों के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी तो थी ही।

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राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा 17 जुलाई को !

भारतीय गणतंत्र के राष्ट्रपति-चुनाव हेतु चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने निर्वाचन कार्यक्रमों का एलान करते हुए आज 14 जून को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है |

बता दें कि नोटिफिकेशन में नसीम जैदी ने घोषणा की कि नामांकन की अंतिम तारीख 28 जून होगी और स्क्रूटनी 29 जून को | नाम वापसी की अंतिम तिथि 01 जुलाई तय की गयी है | जुलाई महीने के 17 तारीख को पूरे देश के 32 मतदान केंद्रों पर 4120 विधायकों एवं 776 सांसदों द्वारा वोट डाले जायेंगे तथा मतों की गिनती 20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में होगी | विजयी घोषित प्रत्याशी को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जायेगी- 25 जुलाई को क्योंकि महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है |

यह भी बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने उद्घोषणा की कि राजनीतिक दल अपने विधायकों एवं सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव के बाबत व्हिप जारी नहीं कर सकता है | मतदान 29 राज्यों के विधानसभाओं, दो केंद्र शासित राज्यों (पांडिचेरी और दिल्ली) एवं एक संसद भवन यानि कुल 32 मतदान केंद्रों पर होगा- जहाँ सीक्रेट बैलेट एवं चुनाव के लिए खास निर्वाचक पेन का इस्तेमाल किया जायेगा अन्यथा वैसे वोट को अवैध माना जायेगा |

माननीय विधायकगण एवं लोकसभा-राज्यसभा के सांसदगण याद कर लेंगे कि आयोग द्वारा 17 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही वोट डालने का समय निर्धारित किया गया है | साथ ही यह भी कि कोई भी विधायक जरूरत पड़ने पर संसद भवन के मतदान केंद्र पर या संसद सदस्य किसी भी राज्य के विधानसभा परिसर स्थित मतदान केंद्र पर अपना वोट डाल सकेंगे बशर्ते उन्हें चुनाव आयोग को 10 दिन पहले इस बाबत सूचित करना होगा |

ध्यातव्य है कि राष्ट्रपति पद के लिए खड़े होने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को 50 प्रस्तावको एवं 50 अनुमोदकों के हस्ताक्षर युक्त नामांकन पत्र जमा करने होंगे | कोई भी प्रस्तावक या अनुमोदक किसी एक ही उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर सकेगा |

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने एलान किया है कि किसी को भी अपना बैलेट पेपर दिखाकर वोट डालने का अधिकार नहीं होगा | ऐसा करने पर वोट रद्द भी हो सकता है |

फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव के बाबत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है | जहाँ एक ओर भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने राष्ट्रपति प्रत्याशी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी के नाम का प्रस्ताव किया है वहीं दूसरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सर्वानुमति के लिए पहले केंद्र सरकार पहल करे- विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार की बात तब आयेगी जब सत्ता पक्ष सर्वानुमति नहीं बना पाता है |

और केंद्र की सत्ता संभाल रही भाजपा सरकार द्वारा एक त्रि-सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है जो अन्य दलों से बातचीत कर उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाने की हर संभव कोशिश करेगी | समिति में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त एवं रक्षा मंत्री अरुण जेटली एवं शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू सरीखे वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता शामिल हैं |

यूँ तो इस बाबत सोनिया गांधी, नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद में बातें भी हुई हैं | विपक्षी दलों की बैठकें  भी बुलाई गई है | नीतीश द्वारा वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ही विपक्ष की ओर से दोबारा प्रत्याशी बनाने की मंशा भी व्यक्त की जा चुकी है | अटकलों के बाजार में पक्ष-विपक्ष के बीच आम सहमति को लेकर बिहार फ्रंटफुट पर खड़ा दिख रहा है | तभी तो जदयू के राष्ट्रीय नेता शरद यादव को भाजपा की ओर से धर्मनिरपेक्ष छवि के प्रत्याशी दिये जाने पर किसी तरह की आपत्ति नहीं होगी- ऐसा माना जा रहा है |

बहरहाल इन तीनों नामों- प्रणब मुखर्जी, गोपाल कृष्ण गांधी और शरद यादव की चर्चाएं अटकलों के बाजार में तेजी पर है जबकि नामांकन के लिए अभी 14 दिन शेष हैं तथा सत्ता पक्ष की त्रि-सदस्यीय समिति की कोशिश अभी बाकी है……….. देखिए आगे-आगे होता है क्या ?

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जी हां, बिहार में ‘आईआईटीयन वाला गांव’ भी है !

एक तरफ जहां बिहार 12वीं में 65 प्रतिशत छात्रों के फेल होने से शर्मसार हो रहा है और साथ ही लगातार दूसरे साल रिजल्ट घोटाले का दंश झेल रहा है, वहीं ऐसे उदाहरण भी यहां मौजूद हैं जो सीने को चौड़ा और सिर को ऊंचा कर देते हैं और ये विश्वास दिलाते हैं कि क्षणविशेष में चाहे अंधेरा कितना ही घना क्यों न हो जाय, उजाले की कमी यहां न रही है और न रहेगी। चलिए आपको लिए चलते हैं गया के मानपुर प्रखंड के पटवा टोली गांव में जहां से इस साल एक नहीं, दो नहीं पूरे 20 छात्रों ने आईआईटी की परीक्षा में कामयाबी पाई है। आपको सुखद आश्चर्य होगा कि 10 हजार की आबादी वाले इस गांव से पिछले 25 सालों में 300 से ज्यादा इंजीनियर निकल चुके हैं और देश-दुनिया में बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं। आज इस गांव को लोग बड़े फक्र से ‘आईआईटीयन वाला गांव’ कहते हैं।

पटवा टोली की ये उपलब्धि तब और बड़ी दिखेगी आपको जब आप जानेंगे कि इस गांव में ज्यादातर आबादी बुनकरों की है। इन बुनकरों की जेब में पैसे चाहे हों या न हों लेकिन उनके पास जो चीज आपको निश्चित तौर पर दिख जाएगी, वो है उनके दिल में अपने बच्चों को इंजीनियर बनाने की ललक और इसके लिए दिन-रात मेहनत करने का जज्बा।

बुनकरों के इस गांव के सुनहले सफर की शुरुआत 1992 में हुई थी, जब इस गांव के जितेन्द्र प्रसाद ने सबसे पहले आईआईटी की परीक्षा पास की। ये वो वक्त था जब पटवा टोली और आसपास के गांव आर्थिक मंदी से जूझ रहे थे और पुश्तैनी पेशे में संभावना न देख यहां के बुनकर अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने लगे थे। जितेन्द्र प्रसाद की सफलता से उनमें उम्मीद और विश्वास की ऐसी लौ जगी कि अब हर साल यह गांव अपने होनहारों के कारण चर्चा में रहता है।

एक और अहम बात यह कि आज जबकि सिवाय अपनी सफलता और सुख के लोग अपने परिवार के अन्य सदस्यों तक का ख्याल आमतौर पर नहीं रखते, ऐसे में यहां के पूर्व इंजीनियरिंग छात्रों ने मिलकर ‘नवप्रयास’ नाम की एक संस्था बनाई है जो आईआईटी की परीक्षा देने वाले छात्रों को पढ़ाई में मदद करती है। कहना गलत न होगा कि बुद्ध की इस ज्ञानभूमि में उनका अंश आज भी मौजूद है। धर्म और आध्यात्म की दुनिया के उस इंजीनियर के खोजे ‘मध्यममार्ग’ पर चलकर आज की पीढ़ी अगर इंजीनियरिंग का झंडा फहरा रही है, तो आश्चर्य क्या है!

चलते-चलते

इस साल जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में यहां के जिन 20 छात्रों ने सफलता का परचम लहराया है, वे हैं – सन्नी कुमार, केदार नाथ, विनित कुमार, रंजन कुमार, कृष्णा कुमार, डॉली राज, गौतम राज, रंजीत कुमार, अभय कुमार, राहुल कुमार, रौशन कुमार, चेतन कुमार, अंकित कुमार, अमर कुमार, बबलू कुमार, गोपी कुमार, अमन कुमार, सरस्वती कुमारी, परमानंद कुमार और रंजीत कुमार। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इन सबको हार्दिक बधाई! और साथ में सलाम पटवा टोली की मिट्टी को!!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश ने लालू को 70 गुलाब के साथ दी 70वें जन्मदिन की बधाई

70 वर्ष के हो गए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। एक के बाद एक नए आरोप, चारा घोटाला मामले में फिर पेशी का दौर, विवादों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा… पर धूमधाम में कमी नहीं। एक दिन पहले से आवास और कार्यालय पर समर्थकों का जमावड़ा, तरह-तरह के फूलों की सजावट, बधाई वाले पोस्टर से पटे पटना के चौक-चौराहे और 70 पाउंड का केक… और क्या चाहिए। चाहे रिक्शा पर बैठकर जेल जाना हो या हाथी पर बैठकर बाहर आना – विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लिए आकर्षण पैदा कर लेने में लालू बेजोड़ रहे हैं। आज तो खैर उनका जन्मदिन ही है – उनके परिवार, उनकी पार्टी के लिए बेहद खास दिन। और कई मायनों में वर्तमान सरकार और सम्पूर्ण बिहार के लिए भी।

रात 12 बजते ही मीसा की बेटी, तेजस्वी, राबड़ी और परिवार के बाकी सदस्यों ने सोते लालू को केक काटने के लिए जगाया। रविवार सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 70 गुलाब का गलदस्ता लिए लालू को बधाई देने उनके आवास पहुंचे। कहा, लालूजी ने अपना जीवन जनता की सेवा में लगा दिया है। छात्र जीवन से अब तक इन्होंने जो योगदान दिया है, वह अहमियत रखता है। साथ में ये भी कि मैं और लालू मिलकर बिहार का विकास कर रहे हैं। उधर तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के जन्मदिन का फोटो शेयर किया और लिखा “शेरदिल, न्याय के लिए लड़ने वाले, समाजवाद के गुरु, गरीबों के मसीहा लालू प्रसाद यादव जी को जन्मदिन की मुबारकबाद। आप पर गर्व है डैड।”

लालू के जन्मदिन को और खास बनाने के लिए आज ही के दिन नीतीश-तेजस्वी ने बिहार को दो मेगा पुल उपहार में दिए। ये दो पुल हैं – पटना (दीघा) से सोनपुर (पहलेजा) को जोड़ने वाला जेपी पुल और आरा से छपरा को जोड़ने वाला वीर कुंवर सिंह पुल। इन दोनों पुलों के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री के अलावे लालू प्रसाद यादव भी मौजूद थे। गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ही पथ निर्माण विभाग के भी मंत्री हैं और इन दोनों पुलों के उद्घाटन के लिए पिता के जन्मदिन को चुनना निश्चित तौर पर अकारण नहीं था। भाजपा ने इस पर हो-हल्ला भी मचाया था।

बहरहाल, तमाम विरोधाभासों के बावजूद लालू बड़े नेता हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। बिहार ही नहीं देश की राजनीति में भी जब-जब सामाजिक न्याय की बात होगी, उनके बिना पूरी नहीं होगी। राजनीति की अपनी अनूठी शैली और गंवई पुट लिए भाव-भंगिमा से उन्होंने लाखों लोगों पर जो छाप छोड़ी है, वो आसानी से मिटने वाली नहीं। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सम्पूर्ण क्रांति दिवस बनाम लालू का जन्मदिन

बिहार के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पुल आरा-छपरा और दीघा-सोनपुर का लोकार्पण आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन 11 जून को होने जा रहा है। गौरतलब है कि संबंधित विभाग (पथ-निर्माण) के मंत्री लालू के छोटे पुत्र व सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हैं और इसी कारण बिहार भाजपा इसका पुरजोर विरोध करने की योजना बना रही है। पार्टी का तर्क है कि क्या ये तेजस्वी की पारिवारिक संपत्ति है जिसे वो ‘पापा’ को ‘गिफ्ट’ करने पर तुले हुए हैं।

इस बाबत भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार की जनता को यह बताना चाहिए कि क्या तेजस्वी ने अपने पिता को पुल ‘गिफ्ट’ करने का ऐलान उनकी सहमति से किया है। यही नहीं, लगे हाथ उन्होंने सरकार को एक बड़ी सलाह भी दे डाली कि इन दोनों पुलों का लोकार्पण लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति दिवस यानि 5 जून को किया जाय।

मोदी ने तंज कसते हुए आगे कहा कि विभिन्न घोटालों व विवादों से घिरे किसी शख्स के जन्मदिन पर पुलों का लोकार्पण कर सरकार बिहार की जनता को जलील न करे। तेजस्वी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि अगर गिफ्ट ही करना है तो वो पटना में बन रहे बिहार के सबसे बड़े मॉल, दिल्ली की सैकड़ों करोड़ की जमीन और अपनी एक हजार करोड़ से अधिक की बेनामी सम्पत्ति गिफ्ट करें।

बहरहाल, इन दिनों मोदी हाथ धोकर लालू और उनके परिवार के पीछे पड़े हैं। उनके आरोपों का सोता जैसे सूखने का नाम ही नहीं ले रहा। आजकल ऐसा कोई मौका नहीं छूटता जब वे लालू और उनके बेटों के खिलाफ और लालू के पुत्र व प्रवक्ता मोदी के खिलाफ आग न उगलते हों। लिहाजा यहां आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं। हां, उनकी यह बात सोचने को जरूर बाध्य करती है कि ये लोकार्पण लालू के जन्मदिन से छह दिन पहले सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर क्यों नहीं? हां, सम्पूर्ण क्रांति, पिछले तीन दशकों में बिहार की राजनीति की धुरी रहे लालू और नीतीश समेत मौजूदा दौर के कई बड़े हस्ताक्षर जिसकी उपज हैं। क्या समय बीतने पर प्राथमिकता के साथ-साथ प्रतीक भी बदल जाते हैं, और उनके मूल्य घट-बढ़ जाते हैं, सिक्कों की तरह?

जहां तक बात लालू प्रसाद यादव की है, तो बिहार की राजनीति से उनको खारिज करना संभव नहीं। पिछड़े तबकों के उभार में उनकी बड़ी भूमिका रही है, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। तो क्या इसका अर्थ यह है कि उन्हें जेपी पर तरजीह दी जाए? अगर तेजस्वी ने ‘पितृप्रेम’ में ऐसा प्रस्ताव रखा भी और लालू इस सम्मान के लिए अनुपयुक्त न भी हों, तो क्या लालू का फर्ज नहीं था कि वे अपने बेटे को अधिक उपयुक्त निर्णय लेने के लिए मदद और मार्गदर्शन देते?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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फिर गरजे गिरिराज

बिहार की महागठबंधन सरकार के मुखर आलोचक व केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर बड़ा हमला बोला है। लालू परिवार पर हाल के दिनों में लगे आरोपों के मद्देनज़र उन्होंने उनके परिवार को ‘जंगलराज का ब्रांड अंबेसेडर’ की संज्ञा दी। बता दें कि हाल ही में उन्होंने ट्वीट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘धृतराष्ट्र’ और लालू को ‘ब्लैकमेलर’ कहा था। लालू परिवार के खिलाफ उनका ताजा बयान इसी की कड़ी है।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहे गिरिराज दिल्ली में मीडिया से विभिन्न मुद्दों पर बात कर रहे थे। इस बातचीत में बीफ फेस्टिवल के आयोजन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन करने वालों में अगर हिम्मत है तो वे पोर्क फेस्टिवल करके दिखाएं। उन्होंने देश के कुछ मुख्यमंत्रियों व कांग्रेस पार्टी को वोटों का सौदागर करार दिया और कहा कि मवेशियों की बिक्री पर रोक के केन्द्र के निर्णय का विरोध वे महज वोटों के लिए कर रहे हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक ने वध के लिए पशुओं की बिक्री पर रोक का विरोध किया है।

राममंदिर के मुद्दे पर बात करते हुए गिरिराज ने जोर देकर कहा कि यह दो सौ फीसदी तय है कि अयोध्या में राममंदिर बनेगा। बहरहाल, इन मुद्दों पर सत्तासीन महागठबंधन सरकार की प्रतिक्रिया खासा दिलचस्प होगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

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ये क्या नीतीशजी, सोनिया को ना, मोदी को हां !

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष का साझा उम्मीदवार खड़ा करने और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अगुवाई करने का आग्रह करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐन वक्त पर क्या यू-टर्न ले लिया? अब जबकि उनकी सलाह के मुताबिक सोनिया सक्रिय हुई हैं और राष्ट्रपति चुनाव के कुछ ही हफ्ते बचे हैं, नीतीश के एक कदम से विपक्ष की सारी कवायदों की हवा निकलती दिख रही है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहे जो तर्क दे लें लेकिन ये बात हजम नहीं होती कि शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए सोनिया द्वारा आयोजित अहम भोज में उन्होंने शिरकत नहीं की, लेकिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के सम्मान में दिए गए भोज में वे शामिल हुए। जबकि दोनों ही भोज की जगह दिल्ली थी और एक दिन पहले नीतीश की कोई असामान्य व्यस्तता भी नहीं थी।

गौरतलब है कि सोनिया द्वारा दिए गए भोज में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव  समेत 17 पार्टियों के नेताओं ने भाग लिया, जबकि जेडीयू की ओर से इसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव शामिल हुए। नीतीश ने इस बैठक में अपने शामिल न होने पर सफाई देते हुए कहा कि उनके न जाने का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उन पर वह पिछले महीने ही सोनिया गांधी से मिलकर चर्चा कर चुके थे। ठीक है कि पिछले महीने नीतीश सोनिया से मिले थे, राष्ट्रपति चुनाव की बाबत चर्चा भी हुई थी, लेकिन सोनिया की यह बैठक इस दिशा में अबतक का सबसे बड़ा प्रयास थी और उसमें शामिल न होकर उन्होंने गलत वक्त पर कयासों का बाज़ार गर्म करने का मौका दे दिया, क्या इसे झुठलाया जा सकता है ?

वैसे भी लालू से जुड़े ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद लालू-नीतीश के संबंधों में आई तल्खी छिपी नहीं है। इसके बाद लालू के ट्वीट ‘बीजेपी को नए पार्टनर मुबारक हों’ ने भी अटकलों को हवा दी। इससे पहले लालू ने नोटबंदी का जितना खुलकर विरोध किया, नीतीश उतना ही खुलकर उसके समर्थन में सामने आए। बदले में प्रकाशोत्सव पर बिहार आए मोदी ने शराबबंदी पर नीतीश की सराहना की। हाल ही में उन्होंने नीतीश को उनके जन्मदिन पर ट्वीट कर बधाई भी दी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि भाजपा जहां जरूरत पड़ने पर नीतीश में अपना स्वाभाविक साथी देख रही है, वहीं नीतीश के लिए यह लालू को हद में रखने की रणनीति है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आरजेडी नेताओं द्वारा तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोरशोर से उठी थी, जिससे लालू के छिपे एजेंडे के तौर पर देखा गया था। बहराहाल, लालू का एजेंडा चाहे जो हो, नीतीश ने भी अपना एजेंडा छिपाकर नहीं रखा। बिना कुछ कहे सब कुछ कह जाना, यही तो राजनीति है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पटना में शीघ्र होगा डॉ. कलाम के नाम पर साइंस सिटी का निर्माण

सार्वकालिक महानतम भारतीयों में शुमार पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बिहार के लिए विशेष लगाव रहा। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। इसके अतिरिक्त भी उन्होंने कई अवसरों पर बिहार का मार्गदर्शन किया। उनका मानना था कि बिहार में देश का अगुआ बनने की प्रचुर संभावना है। इसके लिए आमजन, विशेष तौर पर युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अलग-अलग मौकों पर वे सुझाव देते रहे थे।

और एक अति महत्वपूर्ण सुझाव डॉ.कलाम ने पटना में ही लेखक डॉ.मधेपुरी को दी थी | बता दें कि 30 दिसंबर 2005 को पटना के हवाई अड्डे पर महामहिम राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की मुलाकात रात्रि के लगभग 9:00 बजे लाइब्रेरी के एक विशाल हॉल में तब हुई जब ‘अग्नि की उड़ान’ के सह-लेखक डॉ.अरुण कुमार तिवारी उपस्थित थे | मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अपनी टीम के साथ उन्हें विदा करने हेतु आने ही वाले थे |

The President of India Dr.APJ Abdul Kalam with Dr.Bhupendra Madhepuri at Patna Airport .
The President of India Dr.APJ Abdul Kalam with Dr.Bhupendra Madhepuri at Patna Airport .

बता दें कि डॉ.मधेपुरी द्वारा जो दो पुस्तकें – एक डॉ.कलाम पर और दूसरी डॉ.कलाम के साथ लिखी गई हैं- उन्हीं पुस्तक द्वय के अवलोकन के क्रम में महामहिम डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने डॉ.मधेपुरी को राष्ट्रपति भवन आने के आमंत्रण के साथ ही यह मूल्यवान सुझाव भी दिया था –

“ये ऑंखें दुनिया को दोबारा नहीं देख सकती, अतएव तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वो दुनिया को देकर जाना……… बच्चों को देकर जाना |”                       

ऐसे सार्वकालिक गांधीयन मिसाइलमैन की एक आदमकद प्रतिमा मधेपुरा समाहरणालय के उत्तरी खाली परिसर में लगा कर डॉ.कलाम सरीखे ऋषि की स्मृतियों को जीवंत रखने की तमन्ना पालते देखे जा रहे हैं समाजसेवी साहित्यकार डॉ.मधेपुरी , जिन्हें कुछ लोग “मधेपुरा का डॉ.कलाम” भी कहने लगे हैं | मधेपुरा आशा भरी निगाहों से देख रहा है कि यहां के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल या फिर बिहार के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों में से पहले किनकी सहमति प्राप्त होती है……… लेकिन फिलहाल तो सीएम उनके नाम पटना में साइंस सिटी बनाने में व्यस्त दिखने लगे हैं |

मिसाईलमैन की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए ही बिहार सरकार ने पटना में उनके नाम पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की साइंस सिटी बनाने का निर्णय लिया, जिसका निर्माण अब शीघ्र शुरू होगा। मंगलवार को इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 397 करोड़ खर्च करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इनमें से 94 करोड़ जल्द ही बिहार काउंसिल ऑन साइंस सिटी एंड टेक्नोलॉजी को बिहार आकस्मिकता निधि से दिया जाएगा, ताकि काम अविलंब शुरू हो।

गौरतलब है कि प्रस्तावित साइंस सिटी का निर्माण पटना के राजेन्द्र नगर स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के नजदीक करीब 20 एकड़ भूमि में होना है। अपने ढंग के अनूठे इस साइंस सिटी में वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित कई प्रदर्श दीर्घा का निर्माण होगा। इसमें वैज्ञानिक सिद्धांतों की अनुभूति और इनका आम जन-जीवन में हो रहे प्रयोगों को भी दिखाया जाएगा। साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में भी इसका विकास किया जाएगा। कलाम के करोड़ों चाहने वालों के लिए ये निश्चित रूप से अनमोल तोहफा होगा, जिसके लिए बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साधुवाद के पात्र हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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केन्द्र सरकार के तीन साल: जेडीयू के सात सवाल

बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल जेडीयू ने केन्द्र की वर्तमान एनडीए सरकार के तीन साल पूरा होने पर नरेन्द्र मोदी सरकार से आज सात सवाल किए। पटना स्थित जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह एवं नीरज कुमार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 2 करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली केन्द्र सरकार 20 हजार नौकरी भी नहीं दे पा रही है। उन्होंने पूछा कि अनूसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछडी जातियों की भर्ती में 90 प्रतिशत की कमी आई और मात्र 8,436 भर्तियां हुईं, क्या इसे पिछड़ा विरोधी न कहा जाए?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को हसीन सपने दिखने वाले लोग रिक्त स्थानों पर भी भर्तियां नहीं कर रहे है? कुल सरकारी नौकरी में 89 प्रतिशत की कटौती करते हैं, ऐसे में क्या इन्हें युवा विरोधी सरकार कहना गलत होगा? जेडीयू ने आरोप लगाया कि छह महीने में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सिर्फ 12,000 नौकरियां पैदा हुई हैं, जबकि इस सेक्टर के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया का अभियान चलाया गया। इस पर केन्द्र सरकार का क्या कहना है?
आईटी क्षेत्र एवं अन्य निजी क्षेत्र मे भारी छटनी चल रही है और तकरीबन 10 लाख लोगों को निकाले जाने की संभावना है, कटौती को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने क्या कदम उठाये हैं? जेडीयू के प्रवक्ताओं ने कहा कि उनकी पार्टी ये सवाल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं पूछ रही है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण से जुड़ा सवाल है। बेरोजगार युवाओं से कैसे राष्ट्र निर्माण करेंगे? कैसे बनेगा भारत विश्व शक्ति, अगर हमारे देश के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा?

जेडीयू के प्रवक्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं के बच्चों को सरकारी मिल रही है? उन्हें ये सवाल केन्द्र सरकार से करना चाहिए कि क्या बीजेपी के सपनों में सिर्फ पूंजीपतियों को ही जगह मिलेगी? बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जेडीयू नेताओं ने कहा कि साल 2009 में 12.56 लाख लोगों को रोजगार मिला था और साल 2015 में यह आंकड़ा 1.35 लाख रह गया। पिछले चार साल से हर दिन 550 नौकरियां गायब होती चली जा रही है। इस हिसाब से 2050 तक भारत में 70 लाख नौकरियों की कमी हो जाएगी। बहरहाल, इन तीखे सवालों का भाजपा व केन्द्र सरकार क्या जवाब देती है, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा।

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