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नीतीश सरकार करेगी 45 हजार एचएम की बहाली

सूबे के राजकीयकृत प्राइमरी विद्यालयों एवं उच्च विद्यालयों में 45852 प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक की बहाली करने जा रही है नीतीश सरकार।

जानिए कि यह सभी वेतनमान के पद होंगे। यह भी कि इन सारे पदों पर बहाली “बिहार लोक सेवा आयोग” के माध्यम से की जाएगी। यह प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की अध्यक्षता में स्वीकृत किया गया।

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि इन पदों के सृजन की भी मंजूरी दे दी गई है। अब स्कूलों की व्यवस्था पर दूरगामी बेहतर प्रभाव पड़ेगा और और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सर्वाधिक बेहतर सुधार होगा।

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नीतीश सरकार सूबे के सभी जिलों में खोलेंगे वृद्धाश्रम

मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल योजना के अंतर्गत सूबे के 38 जिले के मुख्यालयों के साथ-साथ 101 अनुमंडल मुख्यालय में भी वृद्धाश्रम (ओल्ड एज होम) की स्थापना जल्द ही की जाएगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति भी मिल गई है।

बता दें कि सभी ओल्ड एज होम में रहने वाले लाचार-बुजुर्गों को आवासीय सुविधा के साथ-साथ सुबह के नाश्ते से लेकर रात तक का भोजन मिलेगा। उन्हें स्वस्थ रखने के लिए दूध व अंडे भी दिए जाने की योजना बनाई गई है। इसके अलावे बुजुर्गों को नए कपड़े तो दिए ही जाएंगे, साथ ही मनोरंजन की भी व्यवस्था की जाएगी। बुजुर्गों की देखभाल के लिए मेडिकल ऑफिसरों द्वारा विजिट करने की व्यवस्था की जाएगी।

जानिए कि पहले चरण में 38 जिले में 50-50 बेड के दो यूनिट वृद्धाश्रम खोले जाएंगे। स्पष्ट है कि प्रत्येक जिले में 100-100 लाचार व बेबस बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में मुफ्त आवास, भोजन, कपड़े व इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएंगी।

बता दें कि अक्टूबर-नवंबर से सभी 38 जिलों में वृद्धाश्रम का संचालन शुरू किया जा सकता है। इस माह के अंत तक एजेंसी का चयन पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। एजेंसी को संचालन करने की पूरी जिम्मेवारी होगी। एजेंसी को ही किराए का भवन ढूंढना होगा जिसके लिए सरकार द्वारा उन्हें अधिकतम ₹50000 दिए जाएंगे।

मौके पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा नीतीश सरकार की इस नेक कार्य के लिए भरपूर सराहना की गई और हर्ष जताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट में सदस्य के रूप में वृद्धाश्रम स्थापना हेतु प्रस्ताव लाया था, परंतु आज सरकार द्वारा ही ओल्ड एज होम इस वर्ष के अंत तक आरंभ कर दिया जाएगा। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम ही होगी।

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ओलंपिक या पैरालंपिक के पदक वीरों को पेंशन व मेडिकल सुविधाएं मिले- डॉ.मधेपुरी

एक सकारात्मक सोच वाली अच्छी और हृदय को छूने वाली सच्ची बातें। ओलंपिक और पैरालंपिक में कोई अंतर नहीं फिर भी सम्मान में क्यों अंतर हो जाता है  ! ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ संपूर्ण देश खड़ा रहता है, लेकिन पैरालंपिक खिलाड़ियों को उनके घर वाले हवाई अड्डे पर रिसीव करने जाते हैं। जबकि दोनों के द्वारा गोल्ड जीतने पर पोडियम में भारत का राष्ट्रगान समान रूप से शान के साथ बजता है और तिरंगा भी सबसे ऊपर होता हुआ आकाश को चूमता है। ये क्रियाएं समान रूप से समस्त भारतवासियों को गौरवान्वित भी करता है।

समाजसेवी-शिक्षाविद् प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी की सोच है- ओलंपिक के खिलाड़ी हों या पैरालंपिक के, दोनों अपना सब कुछ न्योछावर कर देश को विश्व के खेल मंच पर ऊंचाई प्रदान करता है। किसी-किसी को तो 50 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रतिदिन ट्रेनिंग सेंटर तक जाना पड़ता है। यदि अंक देने की बात हो तो अधिक अंक पैरालंपिक खिलाड़ियों को ही दिया जाना उचित होगा। ऐसा इसलिए कि पैरालंपिक वाले कोई खिलाड़ी बिना पैर के तो कोई बिना हाथ के ही वो कमाल कर दिखाते हैं जो दो-दो हाथ-पैर वाले भारतीय ओलंपिक खिलाड़ी नहीं कर पाते हैं।

खेलों के इस महाकुंभ में चुनौतियां चेहरा नहीं देखती वो देखती है केवल जोश, जज्बा और जुनून। जब किसी ओलंपिक खिलाड़ी की तपस्या हद को पार कर जाती है तब उसे ओलंपिक पदक जैसी अमूल्य चीज मिल जाती है जो संपूर्ण देश के चेहरे पर मुस्कान ला देती है।

भारतीय ब्रांड्स को चाहिए कि एक बार में दो मेडल (एक स्वर्ण और एक कांस्य) जीतने वाली अवनी लेखरा जैसे पैरालंपिक खिलाड़ियों को भी अप्रोच करें और अवसर देकर उनका मनोबल बढ़ाएं।

जानिए कि टोक्यो- 2020 ओलंपिक में जहां एक बार जन-गण-मन…. बजा वहीं टोक्यो पैरालंपिक में पांच बार और तिरंगा तो 19 बार आकाश में लहराया। कल होकर वही खिलाड़ी जब खेल से रिटायर हो जाता है तो कुछ की आर्थिक स्थिति ऐसी हो जाती है कि वे अपने घर के बच्चों की परवरिश के लिए उसी मेडल को अपनी पहचान छुपा कर बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी जैसे संवेदनशील-समाजसेवी ने भारतीय खिलाड़ियों द्वारा खेल के प्रति अकंप्य एकाग्रता बनाए रखने के लिए देश के प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री एवं खेल व युवा मामले के मंत्रीगण से उन खिलाड़ियों के खेल से रिटायर होने पर उन्हें पेंशन एवं मेडिकल सुविधाएं देने की मांग की है। उन्होंने देश को गौरवान्वित करने वाले उन पदक वीरों को विधायकों एवं सांसदों की तरह ही पेंशन, मेडिकल व अन्य सुविधाएं देने हेतु विनम्र अनुरोध भी किया है।

अंत में यह भी जानिए कि डॉ.मधेपुरी ने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार और खेल व युवा मामले के केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर एवं सूबे बिहार के खेल मंत्री डॉ.आलोक रंजन को भी इस आशय का पत्र प्रेषित किया है।

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टोक्यो पैरालंपिक- 2020 के अंतिम दिन भारत ने गोल्ड के साथ रिकॉर्ड 19 मेडल जीते

टोक्यो पैरालंपिक 2020 के महान गेम्स में भारत को अंतिम दिन कृष्णा नागर ने बैडमिंटन में जहां स्वर्ण पदक दिलाया वहीं सुहास यतीराज रजत पदक दिलाया। इसके साथ ही भारत ने रिकॉर्ड 19 मेडल जीतकर पैरालंपिक का सुखद अंत किया। अब तक 53 सालों में भारत ने इससे पहले कुल मिलाकर मात्र 12 मेडल जीते थे।

बता दें कि 1968 में पहली बार भारत ने पैरालंपिक गेम्स में हिस्सा लिया था। अब तक 53 वर्षों में 11 पैरालंपिक गेम्स में कुल 12 मेडल भारत ने जीता। टोक्यो पैरालंपिक- 2020 में 19 मैडल जीतकर भारत 24वें स्थान पर रहा। इस बार भारत का पैरालंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा।

जानिए कि भारत ने इस बार दो-दो गोल्ड निशानेबाजी एवं बैडमिंटन में जीता। पदक तालिका में भारत ने इस बार लंबी छलांग लगाई। टोक्यो पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रोंज मेडल के साथ कुल 19 पदक भारत के नाम करके विश्व के देशों को पीछे छोड़ 24वें पायदान पर खड़े होकर तिरंगे को गौरवान्वित किया। भारत ने पहली बार पोडियम में 5 बार राष्ट्रगान बजवाया।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भारत के लिए खेलने वाले 54 पैरालंपिक खिलाड़ियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि जिस तरह से पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार खिलाड़ियों से फोन पर बातें करते हैं, बधाइयां देते हैं और खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने में लगे हैं कि 2024 के पैरालंपिक में भारत 50 से अधिक पदक जीतने वाला देश बनकर रहेगा।

 

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एक ओलंपिक में दो-दो पदक जीतकर अवनी लेखरा और सिंहराज अदाना ने रचा इतिहास

टोक्यो पैरालंपिक- 2020 में भारतीय खिलाड़ी जयपुर की अवनी लेखरा निशानेबाजी में 2 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। अवनी लेखरा ने पहले 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाजी में गोल्ड जीतकर पोडियम में भारतीय राष्ट्रगान बजवा दी और तिरंगे को गौरवान्वित किया। पुनः वही अवनी लेखरा ने 50 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीता।। इससे पूर्व किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने एक ओलंपिक में 2 पदक नहीं जीते हैं।

जानिए कि 30 अगस्त सोमवार को 1 दिन में 5 पदक (2 गोल्ड, 2 सिल्वर, 1 कांस्य) जीतकर भारत ने इतिहास रच दिया तथा एक दिन बाद मंगलवार को भारत ने 3 और मेडल- एक शूटिंग एवं दो ऊंची कूद में जीतकर मंगल-मंगल कर दिया। अब तक भारत कुल 17 मेडल (4 गोल्ड, 7 सिल्वर, 6 रजत) जीत चुका है। जिसमें 4 गोल्ड जीता है- अवनी लेखरा, सुमित अंतिल, मनीष अग्रवाल और प्रमोद भगत ने।  7 सिल्वर जीता है- भाविना पटेल, निषाद कुमार, देवेंद्र झांझरिया, योगेश कठोनिया, मरियप्पन थंगावेलू , प्रवीण कुमार और सिंहराज अदाना ने। साथ ही  6 कांस्य पदक जीता है- सुंदर सिंह गुर्जर, सिंहराज अदाना, शरद कुमार, अवनी लेखरा, हरविंदर सिंह एवं मनोज सरकार।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मीडिया एवं सरकारी तंत्र से विनम्र अनुरोध किया है कि ओलंपिक और पैरालंपिक के खिलाड़ियों के मान-सम्मान में अंतर नहीं किया जाए। दोनों को समान रूप से सम्मानित किया जाय। दोनों के द्वारा गोल्ड जीतने पर पोडियम में राष्ट्रगान बजता है इसे ख्याल रखा जाय।

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आनंद महिंद्रा के खेल प्रेम को देशवासियों का सलाम

और अब तक महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का खेल प्रेम किसी खेल प्रेमी से छुपा नहीं रह गया है। आनंद महिंद्रा ने ऐसा काम किया है, जिसके बारे में जानकर आपका दिल खुश हो जाएगा।

बता दें कि बीते दिनों जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित टोक्यो ओलंपिक- 2020 में जैवलिन थ्रो में प्रथम भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा द्वारा गोल्ड जीतने पर उन्हें चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने एक्सयूवी 700 स्पेशल एडिशन एसयूवी गाड़ी देने की घोषणा की।

यह भी जानिए कि आनंद महिंद्रा ने पुनः टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में सुनीत अंतिल द्वारा जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीतने के बाद अपने चीफ डिजाइनर प्रताप बोस से कहा कि और भी महिंद्रा एक्सयूवी 700 स्पेशल एडिशन एसयूवी बनाई जाए और देश का नाम ऊंचा करने वाले खिलाड़ी को गिफ्ट की जाए। यह भी माना जा रहा है कि सुमित अंतिल और अवनी लेखरा के लिए जो गाड़ी आएगी वह कस्टमाइज्ड होगी और इसे इस्तेमाल करने वालों को सर्वाधिक आसानी होगी। महिंद्रा ने तो जैवलिन नाम से ट्रेडमार्क भी करा दिया है।

चलते-चलते खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा की खेल प्रेम से ओतप्रोत देशभक्ति के जज्बे को सलाम करते हुए अन्य ऐसी ऐसी कंपनियों से अनुरोध किया है कि वे कम से कम पैरालिंपिक स्वर्ण विजेता खिलाड़ियों को गिफ्ट देकर खेल भावना को जीवित रखने में सहयोग करें। ऐसा करने से पैरालिंपिक खिलाड़ीगण भी प्रोत्साहित होंगे।

 

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पैरालिंपिक टोक्यो में तीन पदकों के साथ मंगलवार को भारत का मंगल-मंगल

टोक्यो पैरालंपिक- 2020 में लगातार भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। मंगलवार का दिन भारत के लिए शानदार, जानदार और सर्वाधिक मंगलमय रहा।

बता दें कि भारत ने निशानेबाजी में कांस्य जीतने के बाद ऊंची कूद में रजत एवं कांस्य पदक जीतकर पदकों की संख्या दहाई तक पहुंचा दी। भारत फिलहाल विश्व पैरालंपिक की पदक तालिका में 30वें स्थान पर है। भारत 2 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 कांस्य जीता है।

जानिए कि भारतीय निशानेबाज सिंहराज अंडाना ने जहां 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता वहीं पुरुष ऊंची कूद में मरियप्पन ने रजत एवं बिहार के शरद कुमार ने कांस्य जीता। जापान के टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में मंगलवार को बिहार ने पहली बार ऊंची छलांग लगाकर नीतीश सरकार द्वारा खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को सार्थक साबित कर दिया है।

मौके पर समाजसेवी-खेलप्रेमी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने इन पैरालिंपिक भारतीय खिलाड़ियों के पिता और खासकर माताओं को नमन किया है जिन्होंने अपने दिव्यांग बच्चों को हमेशा प्रोत्साहित किया है… कभी निराश नहीं होने दिया। तभी तो वे आज भारत को गौरवान्वित कर रहे हैं और विदेशों में भारत के तिरंगे और राष्ट्रगान का मान बढ़ा रहे हैं।

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कृष्णाष्टमी के दिन टोक्यो पैरालिंपिक में 5 मेडल विजेता भारतीय खिलाड़ियों का सुनहरा रहा सोमवार

टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में भारत ने भगवान कृष्ण के 5247वें जन्मोत्सव पर सुनहरे सोमवार के दिन दो गोल्ड सहित रिकॉर्ड 5 पदक जीत लिया। इतिहास में भारत ने किसी भी टूर्नामेंट में उतने पदक नहीं जीते थे जितना एक दिन में जीतकर इतिहास रच दिया। अब तक 53 साल में भारत के 19 मेडल हुए हैं जिसमें- 6 गोल्ड हैं जबकि अभी भी 5 सितम्बर तक खेल बचे हुए हैं। मेडल बढ़ने की उम्मीद है।

बता दें कि पैरालिंपिक- 1960 में शुरू हुआ और भारत तीसरे पैरालंपिक यानि 1968 में शामिल हुआ। पहला सिल्वर मेडल दीपा मलिक ने जीता और भाविना ने दूसरा सिल्वर और अवनी लेखरा ने इस बार गोल्ड जीतकर टोक्यो के पोडियम में भारतीय राष्ट्रगान बजाने में सफलता पाई।

जानिए कि 2012 में महाशिवरात्रि पर हादसे में अवनी का आधा शरीर लकवा ग्रस्त हुआ। 2017 में महाशिवरात्रि पर ही वर्ल्ड कप में पहला मेडल जीता और 2020 में 19 साल की अवनी ने कृष्णाष्टमी के दिन देश को पहला गोल्ड दिला कर सभी भारतीयों के चेहरे पर स्वर्णिम मुस्कान ला दिया। कृष्णाष्टमी के दिन वाले चार और विजेताओं के नाम हैं- जैवलीन थ्रो में गोल्ड पदक विजेता सुमित अंतिल, सिल्वर विजेता देवेंद्र झांझरिया एवं ब्राँज विजेता सुंदर सिंह गुर्जर। डिस्कस थ्रो में सिल्वर विजेता योगेश कठुनिया हरियाणा के रहने वाले हैं।

चलते-चलते यह भी कि खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जैवलीन थ्रो में स्वर्ण विजेता नीरज चोपड़ा के साथ जैवलीन थ्रो का अभ्यास करते-करते सुमित अंतिल भी पैरालिंपिक में गोल्ड जीतकर खेल प्रेमियों के दिलों में जगह बना ली है। उन्हें भी समस्त भारतीय खेल प्रेमियों की ओर से नमन और बंदन के साथ हरियाणा सरकार से गुजारिश है कि नीरज चोपड़ा की तरह सुमित अंतिल को भी वैसा ही सम्मान देकर समानता को कायम रखते हुए संविधान का सम्मान किया जाए।

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भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव “कृष्ण जन्माष्टमी” पर रहती है चतुर्दिक विशेष धूम

भगवान विष्णु के अवतारों में सबसे पहले नंबर पर आता है- कृष्ण जन्माष्टमी। द्वापर युग में अत्याचारी कंस से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्णावतार लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। जिसे भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में उनकी जन्मस्थली मथुरा में विशेष धूमधाम से मनाई जाती है। देश के सभी कृष्ण मंदिरों में भी यह जन्मोत्सव सर्वाधिक श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है।

बता दें कि इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त सोमवार को मध्य रात्रि में पूरे ब्रज क्षेत्र में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं व भक्तों द्वारा घरों से लेकर मंदिरों तक में झांकियां सजाई जाएंगी। घर में बाल गोपाल का जन्मोत्सव भी मनाते रहेंगे लोग।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि जिस तरह से सावन मास में भगवान शिव की भक्ति की धूम रहती है उसी तरह से भादो मास में श्री कृष्ण की आराधना की धूम मची होती है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। भारत में मनाए जाने वाले सभी पर्व-त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत व विविधता में एकता का प्रतीक माना जाता है।

 

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भाविना पैरालिंपिक टेटे फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी

भाविना शनिवार को वर्ल्ड नंबर- 3 चीन की मियाओ झेंग को सेमीफाइनल में हराकर फाइनल में पहुंच गई। परंतु, भारतीय राष्ट्रगान बजा नहीं पाई टोक्यो पैरालिंपिक- 2020 में यानि गुजरात की बेटी भाविना बेन पटेल आज वर्ल्ड नंबर- 1 चीन की यिंंग झोऊ से बाजी हार गई और उसे अब सभी भारतीय ‘सिल्वर गर्ल’ कह कर पुकारते रहेंगे 2024 तक।

बता दें कि गुजरात के मेहसाणा जिले में एक छोटी परचून की दुकान चलाने वाले हँसमुख भाई पटेल की बेटी भाविना ने अपने प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। वह 12 वर्ष की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थी। उसने दृष्टि दोष वाले बच्चों को टेटे खेलते देखकर इसी खेल को अपनाने का फैसला किया था। आज भाविना के घर पर होली-दिवाली जैसा माहौल है।

महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, खेल मंत्री, दीपिका मलिक, राहुल गांधी आदि बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भाविना की सराहना की। पीएम मोदी तो भाविना से फोन पर बातें की और कहा कि युवाओं में अब खेल के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा है। गुजरात सरकार ने भाविना को 3 करोड़ रुपये देकर सम्मानित किया है।

चलते-चलते यह भी कि खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए भाविना के साथ-साथ आज ही हाई जंप में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले निषाद कुमार के जज्बे को भी सलाम किया है।

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