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अब प्रताड़ित माता-पिता डीएम कोर्ट में कर सकते हैं अपील- नीतीश

प्रताड़ना झेल रहे माता-पिता को अपनी शिकायत के लिए परिवार न्यायालय जाने से मुक्ति मिल गई है। पहले अपने बच्चे-बच्चियों व निकट संबंधियों से प्रताड़ित होने वाले माता-पिता को परिवार न्यायालय में जाना पड़ता था।

बता दें कि नीतीश सरकार ने अनुभव किया तथा कानूनविदों से राय लेने के बाद परिवार न्यायालय से अपील की सुनवाई करने का अधिकार स्थानांतरित कर जिलाधिकारी को सौंप दिया है। राज्य कैबिनेट द्वारा लिया गया यह फैसला गत मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पारित किया गया। अब प्रताड़ित होने वाले माता-पिता व वृद्धजन प्रताड़ना को लेकर जिलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।

यह भी जानिए कि समाज कल्याण विभाग द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को नीतीश सरकार ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 के आलोक में गठित अपील अधिकरण के अध्यक्ष अब जिला पदाधिकारी को बनाने की मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट की बैठक समाप्ति के बाद कैबिनेट सचिव संजय कुमार एवं समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने मधेपुरा अबतक को बताया कि यह कानून पहले से ही है। इस कानून में माता-पिता एवं वरीय नागरिकों के भरण पोषण व सुरक्षा की जिम्मेदारी संतान / निकटतम संबंधी द्वारा नहीं निभाने पर अनुमंडल स्तर पर एसडीओ की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल में आवेदन दे सकते हैं। वहां के फैसले का पालन नहीं होने पर प्रताड़ित माता-पिता को जिले के परिवार न्यायालय में अपील के लिए जाना पड़ता था। परंतु 2007 से अब तक कोई प्रताड़ित माता-पिता व वृद्धजन कोर्ट की चक्कर से भयभीत होकर ना तो अदालत जाने का साहस जुटा पाते थे और ना ही इस कानून का लाभ  उठा पाते थे…. इसे देखते हुए कानूनविदो से राय लेकर… जिलाधिकारी के पास अपील करने वाले प्रस्ताव को इसलिए मंजूरी दी गई कि डीएम के पास कोई भी वरीय नागरिक सरलता से पहुंच सकता है तथा अपनी बात रख सकता है।

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8 जून से बिहार समेत देश भर में जदयू का सदस्यता अभियान

कल 8 जून से देश भर में जदयू का सदस्यता अभियान शुरू होने जा रहा है। पटना स्थित जदयू मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसकी शुरुआत करेंगे। पिछली बार जदयू ने 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा था। इस बार इस लक्ष्य में और इजाफा होने की संभावना है क्योंकि नीतीश कुमार के अध्यक्ष बनने के बाद जदयू ने कई राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है और अब वह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने की ओर अग्रसर है।
बहरहाल, 8 जून को राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपने बूथ के 25 वोटरों को जदयू का सदस्य बनाकर अभियान की विधिवत शुरुआत करेंगे। उनके साथ ही बिहार प्रदेश जदयू के अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह भी अपने बूथ के 25 वोटरों को सदस्यता प्रदान करेंगे। इस मौके पर विभिन्न प्रदेशों के जदयू अध्यक्ष भी उपस्थित रहेंगे। राज्य भर में व्यापक सदस्यता अभियान चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। पार्टी के सभी सांसद, विधायक, विधानपार्षद, राष्ट्रीय पदाधिकारी, राज्य पदाधिकारी, पार्टी एवं प्रकोष्ठों के जिला, प्रखंड, पंचायत तथा वार्ड प्रतिनिधि अपने-अपने बूथ पर 25 लोगों को सदस्यता दिलाकर खुद क्रियाशील सदस्य बनेंगे। जदयू के संविधान के मुताबिक पार्टी की सदस्यता तीन वर्षों के लिए होती है। पूर्व में 5 जून 2016 को वर्ष 2016-2019 के लिए सदस्यता दिलाई गई थी, जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है।
गौरतलब है कि जदयू का यह सदस्यता अभियान 5 जुलाई तक चलेगा। उसके बाद पार्टी की प्राथमिक इकाई से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चुनाव सम्पन्न कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। 2020 में बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी इस अभियान में कोई कोर-कसर नहीं रखना चाहती। बिहार के साथ ही अन्य राज्यों में भी जदयू बड़ी संख्या में सदस्यों को जोड़ना चाहेगी ताकि नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में हाल के दिनों में मिली सफलता के बाद राष्ट्रीय पार्टी का नजदीक दिख रहा दर्जा जल्दी मिल सके। बतातें चलें कि सदस्यता अभियान के ठीक अगले दिन 1, अणे मार्ग में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी रखी गई है।

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नीतीश कैबिनेट में आठ नए मंत्री शामिल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार, 2 जून 2019 को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। पूर्वाह्न 11.30 बजे राजभवन में राज्यपाल लालजी टंडन ने आठ नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके उपरान्त उनके विभागों की भी घोषणा कर दी गई। कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी किय़ा गया। इस मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए गए सभी मंत्री जदयू के हैं, जबकि भाजपा ने अपने कोटे की जगह को बाद में भरने का फैसला किया। विदित हो कि लोकसभा चुनाव के बाद संसद पहुंचे मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, दिनेशचन्द्र यादव और पशुपति कुमार पारस ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को तय माना जा रहा था।

Nitish Cabinet Expansion.
Nitish Cabinet Expansion.

बहरहाल, इस विस्तार में जदयू के जिन आठ नेताओं को नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला, उनके नाम और विभाग इस प्रकार हैं: नरेन्द्र नारायण यादव (लघु जल संसाधन विभाग तथा विधि विभाग), श्याम रजक (उद्योग विभाग), अशोक चौधरी (भवन निर्माण विभाग), बीमा भारती (गन्‍ना विकास विभाग), रामसेवक सिंह कुशवाहा (समाज कल्‍याण विभाग), नीरज कुमार (सूचना व जनसंपर्क विभाग), लक्ष्मेश्वर राय (आपदा प्रबंधन विभाग) और संजय झा (जल संसाधन विभाग)। इनमें पांच विधायक और तीन विधानपार्षद हैं।

नए मंत्रियों को शामिल करने के अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी किया, उनके नाम और अब वे जिस विभाग का काम देखेंगे वे इस प्रकार हैं: जयकुमार सिंह (विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग), महेश्‍वर हजारी (योजना व विकास विभाग), प्रमोद कुमार (कला-संस्‍कृति व युवा विभाग), बिनोद कुमार सिंह (पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग कल्‍याण विभाग), कृष्‍ण कुमार ऋषि (पर्यटन विभाग) और ब्रज किशोर बिंद (खान व भूतत्‍व विभाग)।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जदयू द्वारा सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व अस्‍वीकार करने के तीन दिनों बाद बिहार के इस मंत्रिमंडल विस्तार के अलग राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं और इसे एनडीए में आए तथाकथित दरार का परिणाम बताया जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि एनडीए में कहीं कोई दरार नहीं है। मंत्रिमंडल विस्‍तार को लेकर भाजपा से बातचीत हो चुकी थी। भाजपा ने तय किया कि उनके कोटे का मंत्रिमंडल विस्‍तार आगे किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्‍तार की जरूरत इसलिए थी कि विधानमंडल का सत्र आने वाला है। सत्र के दौरान कम मंत्री रहने के कारण मुश्किल होती। मंत्रियों के अधिकांश पद जदयू कोटे के ही थे, इसलिए आठ मंत्री बनाए गए।

उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता व उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि मंत्रिमंडल विस्‍तार को लेकर कोई विवाद नहीं है। मुख्यमंत्री ने भाजपा कोटे के मंत्रियों की रिक्तियां भरने की पेशकश की थी। लेकिन पार्टी नेतृत्‍व ने फिलहाल इसे टाल दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में भी इसे दुहराया।

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केन्द्र सरकार में जदयू की कारगर भूमिका चाहते हैं नीतीश

केन्द्र में नई सरकार के गठन से पूर्व जदयू की भूमिका और पार्टी की भावी रणनीति को लेकर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत गंभीर हैं। इस संदर्भ में बुधवार को दिल्ली में के. कामराज लेन स्थित अपने सरकारी आवास पर उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की और उससे पूर्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिले।

माना जा रहा है कि नीतीश कुमार जदयू कोटे से कम से कम दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री चाहते हैं। कैबिनेट मंत्री पद के लिए जहां राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह और बिहार सरकार में मंत्री रहे राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के नाम चर्चा में हैं, वहीं संतोष कुशवाहा और कहकशां परवीन को राज्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वैसे राजनीतिक गलियारें में अलग-अलग स्रोतों से रामनाथ ठाकुर, दिनेशचंद्र यादव, चन्देश्वर चन्द्रवंशी और महाबली सिंह के नाम भी सामने आ रहे हैं।

बहरहाल, राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में केन्द्र के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश की सरकार में भी जदयू के शामिल होने की चर्चा हुई। बता दें कि सात विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करके जदयू वहां दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है और इस बात की प्रबल संभावना है कि भाजपा के साथ पार्टी वहां भी सरकार में शामिल हो। इसके साथ ही बैठक में 5 जून से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने और 9 जून को पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने का निर्णय भी लिया गया।

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जानें एग्जिट पोल में बिहार की चर्चित सीटों के परिणाम

लोकसभा चुनाव का शोर थमने के बाद अब हर जगह एग्जिट पोल की चर्चा है। एग्जिट पोल में ज्यादातर एजेंसियां एनडीए को बहुमत दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वापसी तयप्राय दिख रही है। बिहार की बात करें तो अधिकांश एग्जिट पोल में यहां की 40 सीटों में 30 से ज्यादा सीटें एनडीए को मिलती दिख रही हैं। चैनल आजतक ने तो 38 से 40 सीटें तक एनडीए के खाते में जाने की बात कही है। कुल मिलाकर मोदी-नीतीश-रामविलास की तिकड़ी यहां काम कर गई है, इसमें कोई दो राय नहीं। सीटें एग्जिट पोल से कुछ कम या ज्यादा भले रह जाएं पर इतना तय है कि आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का गठबंधन बिहार की जनता को कुछ रास नहीं आया।

बहरहाल, यहां हम विभिन्न एग्जिट पोल के आधार पर बिहार की कुछ चर्चित सीटों के संभावित परिणाम से अवगत कराने जा रहे हैं। शुरू करते हैं मधेपुरा से जहां आरजेडी के टिकट पर लड़े लोजद नेता शरद यादव और एनडीए व यूपीए से गोटी बिठा पाने में नाकाम रहे जाप नेता और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का मुकाबला बिहार सरकार के मंत्री और जदयू उम्मीदवार दिनेश चन्द्र यादव से है। एग्जिट पोल की मानें तो मधेपुरा की इस बहुचर्चित सीट से दिनेश चन्द्र यादव बाजी मार सकते हैं। जीत-हार का फासला चाहे जो हो, शरद और पप्पू की हार यहां तय मानी जा रही है। कोसी की दूसरी सीट सुपौल भी स्पष्ट तौर पर जदयू के खाते में जाती दिख रही है। यहां से वर्तमान सांसद और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को जदयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत मात देने जा रहे हैं।

अब रुख करते हैं बेगूसराय का जिसने इस चुनाव में देश भर का ध्यान आकृष्ट किया है। एग्जिट पोल के मुताबिक बेगूसराय में गिरिराज सिंह बाजी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे कन्हैया कुमार और तनवीर हसन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार गिरिराज बेगूसराय पर भाजपा का विजय पताका फहरा सकते हैं और कन्हैया कुमार को मुंह की खानी पड़ सकती है।

राजधानी पटना से जुड़ी दोनों सीटें पटना साहिब और पाटलिपुत्र का मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं, लेकिन दोनों ही सीटें भाजपा को मिलती दिख रही हैं। पटना साहिब में जहां भाजपा के रविशंकर प्रसाद शत्रुघ्न सिन्हा को इस बार ‘खामोश’ करने जा रहे हैं, वहीं पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी की मीसा भारती पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर सहानुभूति जुटाने में विफल होती दिखाई पड़ रही हैं। यह सीट फिर भाजपा के राम कृपाल यादव के जीतने की पूरी संभावना है।

बिहार की जमुई लोकसभा सीट पर लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को मुश्किल मुकाबले में बताया जा रहा था, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार वे रालोसपा के भूदेव चौधरी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। वहीं मुंगेर से जदयू के लिए अच्छी खबर है। वहां से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार नीलम देवी को हराने जा रहे हैं।

वैशाली में आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी के लिए जीत का सूखा खत्म करते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल में वे लोजपा की वीणा देवी को हराते दिख रहे हैं। वहीं, आरजेडी के लिए प्रतिष्ठा की सीट सारण पर एक बार फिर भाजपा का परचम लहराने जा रहा है। यहां से राजीव प्रताप रूड़ी लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय को पटखनी देने जा रहे हैं।

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‘समान कार्य-समान वेतन’ पर कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह की बेबाक स्वीकारोक्ति !

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “समान कार्य – समान वेतन” पर दिनांक 10 मार्च 2019 को पारित न्यायनिर्णय के बाबत कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को दो दिन बाद यानि 13 मई 2019 को बेबाकी के साथ यही कहा- “शिक्षकों के सारे संगठनों की एकजुटता बनी रहे….. मैं शिक्षक संगठनों के द्वारा किये गये सभी संघर्षों की तरह इस संघर्ष में भी निष्ठापूर्वक साथ रहा हूँ…. और पूरी निष्ठा के साथ सदैव साथ रहूंगा….. शिक्षकों के हित के लिए सदा लड़ा हूँ और सदैव लडूंगा….. साथ दिया हूँ और सदा साथ दूंगा |”

सर्वोच्च न्यायालय के पारित न्यायनिर्णय के बाबत आप शिक्षकों के प्रिय प्रतिनिधि विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह द्वारा “जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ” के प्रति अभिव्यक्त भावनाएं…. हू-ब-हू उन्हीं के शब्दों में-

“एक शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में बेबाकी से स्वीकार करता हूँ कि ‘समान कार्य – समान वेतन’ के मामले में राज्य सरकार की बेरुखी के कारण ही विभिन्न शिक्षक संगठनों को अपेक्षित न्याय हेतु पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ा | पुनः पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ही पूर्व पारित न्यायनिर्णय के आलोक में पूर्ण सकारात्मक फैसला सुनाया गया….. लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुख्यरूप से अपने वित्तीय संसाधनों के अभाव एवं अन्य कतिपय कारणों का हवाला देते हुए शिक्षक हित के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने….. दूसरी तरफ विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेतृत्व द्वारा इस चुनौती को स्वीकारने के पश्चात् बड़े-बड़े विद्वान एवं नामी-गिरामी अधिवक्ताओं से तथ्यात्मक सार्थक बहस कराने के उपरांत 10.05.2019 को पारित न्यायनिर्णय से स्वयं सर्वोच्च न्यायालय आज अपनी ही न्यायिक निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर विरोधाभासी स्थिति में है |

सच तो यह है कि ‘न्याय के साथ विकास’ के क्रम में आज संपूर्ण शिक्षक वर्ग ही पीछे छूट गया है….. चाहे नियोजित शिक्षक हों, वित्तरहित शिक्षक संस्थानों के शिक्षक हों, अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षक हों या फिर मदरसा-संस्कृत शिक्षक हों | ऐसी स्थिति में शिक्षकों को अपने शैक्षिक दायित्व पर कम और अपनी हकमारी की लड़ाई पर ज्यादा ध्यान देना स्वाभाविक है |

लगभग 10 वर्षों के अंतराल में तो राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल मिलित में ही रहे लेकिन सफलता आंशिक ही मिली | इस मुद्दे पर आज राजनीति जितनी भी हो लेकिन जब तक शिक्षकों के विभिन्न सांगठनिक समूहों की कोई मिलित एवं कारगर रणनीति नहीं बनेगी तबतक संघर्ष भी सार्थक नहीं हो सकता | अपने संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों को हासिल करने हेतु अंततः हमें तरीके भी लोकतांत्रिक ही अपनाने होंगे ताकि सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का झुकाव इस दिशा में हो |

इस आंदोलन में सभी कोटि के शिक्षकों द्वारा अपना हक प्राप्त करने की सामूहिक प्रतिबद्धता तथा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सभी संघ-संगठनों के साथ-साथ शिक्षकों की एकजुटता से ही सफलता संभव है | मैं भी इस संघर्ष में सदैव साथ रहा हूं और सदैव रहूंगा…… जय शिक्षक, जय शिक्षक संघ !!”

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस फैसले के बाबत जब समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से पूछा गया तो डॉ.मधेपुरी ने यही कहा कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षक-संगठनों को एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका अवश्य दायर करनी चाहिए क्योंकि यह फैसला भारतीय संविधान की आत्मा की आवाज को अनसुनी करने जैसा है | डॉ.मधेपुरी ने विधायकों एवं सांसदों को ₹500 प्रतिमाह मोबाइल चार्ज की जगह ₹15,000 प्रतिमाह दिये जाने पर प्रश्न उठाते हुए यही कहा कि प्रतिनिधियों को ऐसे अनाप-सनाप रूपये भुगतान करने के लिए सरकारी खजाने में पैसे कहाँ से आते हैं…..?

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जदयू ने लॉन्च किया आधिकारिक वेब ऐप

जदयू ने मंगलवार को अपना आधिकारिक वेब ऐप लॉन्च किया। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने पार्टी मुख्यालय में इसका लोकार्पण किया। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. सुनील कुमार, अंजुम आरा, निखिल मंडल एवं जदयू मीडिया सेल के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे जिनमें धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, प्रवीण तिवारी, सैयद नजम, अभय विश्वास भट्ट, विनीता स्टेफी, प्रिंस श्रीवास्तव, प्रभात कुमार आर्य, नबीस नवेन्दु, राहुल सिन्हा, आशुतोष सिंह राठौड़ एवं आदित्य राज प्रमुख हैं।

इस मौके पर बशिष्ठ नारायण सिंह ने जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए जदयू ऐप को पार्टी के लिए बड़ी सूचना और उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जदयू वैचारिक स्तर पर बाकी पार्टियों से अलग है और नीतीश कुमार के नेतृत्व में हमने ऐसे कई कार्य किए हैं जो पहले नहीं हुए और जिनसे न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति को नया आयाम मिला है। जदयू ऐप से हमारे इन विचारों और कार्यों को तकनीक की ताकत मिलेगी और हमारी पहुँच अधिक-से-अधिक लोगों तक हो पाएगी।

जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने ऐप की विशेषताओं के ऊपर प्रकाश डालते हुए इसे पार्टी का ऑनलाइन वर्जन बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐप के माध्यम से हमने अगले तीन महीने में एक करोड़ लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है और इस कार्य के लिए प्रखंड, जिला, प्रमंडल और प्रदेश स्तर को मिलाकर नीतीश कुमार की नीतियों और आदर्शों में आस्था रखने वाले 700 समर्पित लोगों की टीम तैयार की है।

ध्यातव्य है कि जदयू ऐप एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर एक साथ उपलब्ध है। इसके माध्यम से जदयू के वेब पोर्टल www.janatadalunited.online तक लोगों की पहुँच बेहद आसान हो जाएगी। इसे डाउनलोड करने के साथ दल के सभी कार्यक्रमों और सरकार की सारी उपलब्धियों से आप रू-ब-रू हो सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से सैकड़ों भाषण, वीडियो, फोटो गैलरी और न्यूज वॉल को एक्सेस किया जा सकता है। पार्टी की वेब पत्रिका ‘जदयू संदेश’ और पार्टी द्वारा प्रकाशित सारी अध्ययन-सामग्री यहां उपलब्ध है और साथ ही लोगों को पार्टी से संवाद करने की सुविधा भी यहां दी गई है।

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देश के टॉप टेन सीटों में होगी पटना साहिब की सीट: रविशंकर प्रसाद

रविवार, 5 मई को वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री एवं पटना साहिब से एनडीए समर्थित भाजपा उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद दीघा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुर्जी पहुंचे जहां जदयू के प्रदेश प्रवक्ता एवं दीघा विधानसभा से जदयू के पूर्व प्रत्याशी राजीव रंजन के नेतृत्व में चुनावी सभा रखी गई थी। इस मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद जदयू कार्यकर्ताओं ने रविशंकर प्रसाद का भव्य स्वागत किया। सभा में उपस्थित लोगों में भाजपा विधायक संजीव चौरसिया, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, जदयू तकनीकी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामचरित्र प्रसाद, जदयू के वरीय नेता शबीउद्दीन अहमद ‘शीफू’, जदयू की वरीय नेत्री प्रतिभा सिन्हा, कंचनमाला चौधरी, पूनम दास, शोभा देवी, दीघा विधानसभा के संगठन प्रभारी नागेन्द्र कुमार, जदयू मीडिया सेल के मुख्यालय प्रभारी धनंजय शर्मा, पटना महानगर युवा जदयू के अध्यक्ष राहुल खंडेलवाल एवं जदयू दलित प्रकोष्ठ की प्रवक्ता विनीता स्टेफी प्रमुख हैं। सभा की अध्यक्षता कुर्जी सेक्टर जदयू के अध्यक्ष अरुण सिंह ने की, जबकि संचालन पटना महानगर जदयू के अध्यक्ष अवधेश सिंह ने किया।
कुर्जी में जदयू कार्यकर्ताओं के अभिनंदन और समर्थन से अभिभूत पटना साहिब से एनडीए उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि लोगों से मिल रहे अपार स्नेह की बदौलत मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि पटना साहिब की सीट सर्वाधिक मतों से जीती गई सीटों में देश भर में टॉप टेन में होगी। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा से बड़ा सोचने और करने में यकीन रखता आया हूँ। पटना साहिब के वर्तमान सांसद का नाम लिए बिना बस इतना कहूँगा कि यहां लड़ाई प्रतिबद्धता और अवसरवादिता की है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में जहां एनडीए ने हर मंच से अपनी निष्ठा और एकजुटता का परिचय दिया है, वहीं महागठबंधन केवल अवसरवादियों के जमावड़ा के रूप में दिखा है और वो भी बिखरा हुआ।
जदयू के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि आज देश बड़ी उम्मीद से नरेन्द्र मोदी की ओर देख रहा है और हमें बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बड़ी जीत हासिल कर उनके हाथों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद के मतों का अंतर कम-से-कम चार लाख वोटों का होगा और उसमें दीघा विधानसभा की बड़ी सहभागिता होगी। उन्होंने कहा कि अगली सरकार के कैबिनेट में रविशंकर प्रसाद पटना साहिब के सांसद के रूप में बैठेंगे, यह हम सबके लिए गौरव की बात होगी।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि पटना साहिब को अब अभिनेता नहीं असली जीवन का नायक चाहिए और वो रविशंकर प्रसाद हैं। उन्होंने कहा कि चाहे विजन हो या वैचारिक प्रतिबद्धता, पटना साहिब का प्रतिनिधि रविशंकर प्रसाद से बेहतर नहीं हो सकता। हमें इस बार पटना साहिब से मतों के अंतर का रिकॉर्ड बनाना है।

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सावधान! बिहार में भी रहेगा ‘फानी’ का असर!!

बिहार में तूफान की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दो मई से अगले तीन दिनों तक चक्रवाती तूफान ‘फानी’ का असर बिहार में भी रहेगा। बताया गया है कि बंगाल की खाड़ी से उठा यह तूफान गंगा के तटीय क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करेगा और इसका असर दो से चार मई तक पूर्वी बिहार और गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहेगा। वैसे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ‘फानी’ का सबसे अधिक असर ओडिशा में होगा।

गौरतलब है कि ‘फानी’ के कारण कुछ जगहों पर तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके कारण पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, फारबिसगंज, किशनगंज, अररिया और छपरा में तापमान में आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी आएगी। अनुमान है कि इसका असर तूफान के बाद भी रहेगा और छह मई तक अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच सकता है। इस दौरान बिहार में बादल छाए रहने के कारण गर्मी से राहत मिलेगी। मई के प्रथम सप्ताह के बाद मौसम सामान्य हो जाने की संभावना है।

चलते-चलते बता दें कि चक्रवाती तूफान ‘फानी’ को लेकर पूरा देश पहले से ही अलर्ट है। किसी बड़े संकट से बचने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने ओडिशा में ‘यलो वार्निंग’ जारी की है। पुरी प्रशासन ने पर्यटकों को दो मई तक पुरी छोड़ने का निर्देश दिया है। वहां सरकारी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। तूफान से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने भी अपनी कमर कस ली है।

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मुजफ्फरपुर में मोदी की हुंकार: विपक्ष चार चरण में ही चित्त

मंगलवार को मुजफ्फरपुर के पताही हवाई अड्डा मैदान में एनडीए की विजय संकल्प रैली का भव्य आयोजन हुआ जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत एनडीए के कई बड़े नेता शामिल हुए। तेज धूप में भी भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी निश्चित रूप से एनडीए के हौसले को बढ़ाने वाली थी। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत तमाम नेताओं के संबोधन में इसकी स्पष्ट झलक दिखी भी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि चार चरणों के चुनाव के बाद विपक्षी दल चारों खाने चित्त हो चुके हैं। अब अगले चरणों में यह तय होना है कि विपक्ष की हार कितनी बड़ी होगी और एनडीए की जीत कितनी भव्य। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और राजद नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जेल में हैं तो कुछ जेल के दरवाजे पर। जो बेल पर हैं और जो बेल के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं, वे एक मिनट भी केन्द्र में मजबूत सरकार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में हिंसा फैलाने वाली हर ताकत को उखाड़ फेंकने का संकल्प भी दोहराया और भीड़ से पूछा – आतंकवाद को कौन खत्म कर सकता है? जवाब आया – मोदी। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे देश के भीतर हो या सीमा के उस पार, आतंकवाद की फैक्ट्री जहां भी होगी, हम घर में घुसकर मारेंगे। किसी हाल में छोड़ेंगे नहीं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने देश का मान बढ़ाया है। आतंकवाद के बाद त्वरित कार्रवाई कर उन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत के नाम को शीर्ष पर रखा है। राज्य में हुए विकास में केन्द्र के योगदान की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र ने बिहार को सड़क और पुल-पुलिया बनाने के लिए पचास हजार करोड़ रुपए दिए हैं। अगर केन्द्र में फिर से एनडीए सरकार आती है तो बिहार के विकास को और गति मिलगी।
केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने इस मौके पर कहा कि कांग्रेस आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को डरा रही है। धर्म के नाम पर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। मगर जनता कांग्रेस की चाल समझ चुकी है। कांग्रेस ने किसी भी धर्म और समाज के लिए कभी कुछ नहीं किया। मोदी सरकार ने पांच साल में देश की दिशा बदल दी है।
उधर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि यह आरोप हास्यास्पद और गलत है कि लालू यादव को फंसाया गया है। सरकार ने नहीं, न्यायालय ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी बताया है। एक नहीं कई बार सुप्रीम कोर्ट से भी उनकी बेल अर्जी खारिज हो चुकी है।
इस मौके पर सभी नेताओं ने मुजफ्फरपुर से भाजपा प्रत्याशी अजय निषाद, वैशाली से लोजपा प्रत्याशी वीणा देवी और सीतामढ़ी से जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पिन्टू को जिताने की अपील की।

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