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यूपीएससी में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की शानदार वापसी

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में पिछले साल हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं ने शानदार वापसी की है। पिछले तीस साल में पहली बार आधे से अधिक परीक्षार्थी इन भाषाओं से हैं। जी हाँ, यह बात संघ लोक सेवा आयोग की ओर से जारी सालाना आंकड़ों से सामने आई है। इसे इस परीक्षा में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं की वापसी का ट्रेंड माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में छात्रों के बीच न केवल हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम के रूप में रखने का चलन बढ़ा है बल्कि इन भाषाओं को छात्र वैकल्पिक विषय के रूप में भी रख रहे हैं और अच्छी सफलता हासिल कर रहे हैं। पिछले साल सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए 812 प्रतियोगियों में 485 ने हिन्दी या क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से सफलता पाई। यह कुल प्रतियोगियों का लगभग 60 प्रतिशत है। 2017 में 1056 में 533 प्रतियोगियों ने हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में सफलता पाई थी।
बता दें कि चार साल पहले यूपीएसीसी की तरफ से संचालित सिविल सर्विस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट पेपर को लेकर छात्रों का उग्र आंदोलन हुआ था। इसमें आरोप लगा था कि हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। परिणाम में इस आरोप के संकेत मिलते थे। क्षेत्रीय और हिंदीभाषी छात्र इस पेपर को हटाने की मांग पर दो साल तक आंदोलन करते रहे। संसद तक में यह मामला जोरदार तरीके से उठा था। सरकार लंबे समय तक इस मुद्दे पर उलझन की स्थिति में रही। आखिरकार छात्रों की मांगों के सामने सरकार को झुकना पड़ा। उसके बाद से ही हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई और परिणाम का नया ट्रेंड शुरू हुआ।

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22-23 जनवरी 2020 को राजगीर में जदयू के 400 मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण

22-23 जनवरी 2020 को राजगीर में दल के 400 मास्टर ट्रेनरों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन होने जा रहा है, जिसका उद्घाटन जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इस दौरान उपस्थित रहेंगे। इस शिविर में सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी विधानसभा प्रभारी भाग लेंगे।
बता दें कि 2020 चुनाव को ध्यान में रखते हुए जदयू ने अपनी सांगठनिक गतिविधियां काफी तेज कर दी हैं। बिहार के सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव के मनोनयन को लेकर चले सफल अभियान के बाद पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 15 दिसंबर 2019 से सभी विधानसभाओं में नवमनोनीत बूथ अध्यक्षों एवं बूथ सचिवों के सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है और सौ से ज्यादा विधानसभाओं में सम्मेलन सम्पन्न हो चुके हैं। सभी विधानसभाओं में हो रहे इस महत्वपूर्ण सांगठनिक सम्मेलन में कड़ाके की ठंड के बावजूद बूथ अध्यक्षों एवं सचिवों की लगभग शत प्रतिशत उपस्थिति देखी जा रही है। इन सम्मेलनों में क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष तथा प्रदेश व जिला द्वारा नामित विधानसभा प्रभारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहते हैं। स्वयं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह भी कई जिलों के विधानसभा सम्मेलन में सम्मिलित हो चुके हैं।
जदयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सभी विधानसभाओं में सम्मेलन के बाद दल के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता 19 जनवरी 2020 को शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी के साथ-साथ जल-जीवन-हरियाली अभियान के पक्ष में बनने वाली मानव-श्रृंखला को अभूतपूर्व सफलता दिलाने हेतु जुट जाएंगे।

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जदयू मीडिया सेल ने पार्टी को दिया नया आयाम: आरसीपी सिंह

पटना स्थित जदयू मुख्यालय में मंगलवार, 24 दिसंबर को जदयू मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति, जिला संयोजकों एवं विधानसभा प्रभारियों की संयुक्त बैठक हुई जिसके उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह थे। जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद ललन सर्राफ, झारखंड प्रभारी अरुण सिंह, प्रदेश महासचिव अनिल कुमार, चंदन कुमार सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन, अंजुम आरा, प्रदेश सचिव प्रभात रंजन झा एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य धनंजय शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे।
आरसीपी सिंह ने अपने संबोधन के क्रम में जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपनी स्थापना के दो वर्ष के भीतर जदयू मीडिया सेल ने अपने कार्यों से ये साबित करके दिखाया है कि जदयू पॉलिटिक्स विथ डिफरेन्स करती है। उन्होंने कहा कि मीडिया सेल ने न केवल पार्टी के कार्यक्रमों बल्कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अब मीडिया सेल के सामने 2020 की चुनौती है और उन्हें पूरा विश्वास है कि मीडिया सेल पार्टी की कसौटी पर खरा उतरेगा।

MP(RS) RCP Singh, MLC Lallan Sarraf, JDU Media Cell President Dr.Amardeep and other senior leaders of JDU being garlanded.
MP(RS) RCP Singh, MLC Lallan Sarraf, JDU Media Cell President Dr.Amardeep and other senior leaders of JDU being garlanded.

आरसीपी सिंह ने कहा कि श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास के कई आयामों को देखा है। 2020 की लड़ाई 15 सलाम बनाम 15 साल की है। ‘भय’ और ‘भरोसा’ के इस फर्क को दिखाने का दायित्व मीडिया सेल के ऊपर है। उन्होंने कहा कि विरोधियों के दुष्प्रचार और अफवाह का जवाब मीडिया सेल बिहार में न्याय के साथ विकास को संभव करने वाले अपने नेता के कार्यों को बताकर और पूरी मजबूती से दे।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने जदयू मीडिया सेल की दो साल की यात्रा के विभिन्न पड़ावों को रेखांकित किया और सेल की उपलब्धियों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने दो साल पहले उन्हें मीडिया सेल का जो पौधा सौंपा, उसमें आज ‘जल’ भी है, ‘जीवन’ भी है और ‘हरियाली’ भी। उन्होंने कहा कि पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में मीडिया सेल कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2020 में फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बने इसके लिए मीडिया सेल ने बूथ स्तर तक जाकर अपनी रणनीति बना ली है।

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नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार बंद, नागरिक ही रहे परेशान

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ गुरुवार को बिहार सहित देश भर में प्रदर्शन हुए। वामदलों ने इस दिन बिहार बंद का आह्वान किया था जिसका कांग्रेस, रालोसपा, हम, जाप और वीआईपी ने भी समर्थन किया। इन दलों के कार्यकर्ताओं ने बंद के दौरान बिहार के कई जिलों में हंगामा और प्रदर्शन किया। कई जगह ट्रेनें रोकी गईं। बसें नहीं चलीं। सड़कें भी जाम रहीं। इससे आमलोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ जगहों पर मारपीट, तोड़फोड़, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं भी देखने को मिलीं।
पटना, आरा, बक्सर, जहानाबाद, वैशाली, मुजफ्फरपुर, गया, कैमूर, सीतामढ़ी आदि जिले बंद से विशेष रूप से प्रभावित रहे। भागलपुर के नाथनगर में हिंसक झड़प हुई। सहरसा, मधेपुरा और सीमांचल में भी बंद का असर देखने को मिला। पुलिस मुख्यालय के अनुसार राज्य भर में देर शाम तक बंद के दौरान 250 लोगों को पकड़ा गया था। बता दें कि इस बंद से राजद ने खुद को अलग रखा था। राजद का बिहार बंद 21 दिसंबर को है।
बहरहाल, बिहार बंद को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोले – कौन किसको भड़काता है, इस पर हम ध्यान नहीं देते। हमारे रहते अल्पसंख्यकों की उपेक्षा नहीं होगी। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बंद को फ्लॉप बताया।

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धरती को रहने योग्य बनाने हेतु “जल-जीवन-हरियाली” आंदोलन को तेज किया सीएम नीतीश कुमार ने

धरती को रहने योग्य बनाने में भारत की 8 वर्षीया लिसिप्रिया कंगुजम और स्वीडन की 16 वर्षीया ग्रेटा अनवर्ग सरीखे पर्यावरण कार्यकर्ता द्वय केे हौसला को पंख लगाने हेतु बिहार के विकासप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी और बाल विवाह-दहेज मुक्त विवाह के तर्ज पर जल-जीवन-हरियाली यात्रा को तीव्र गति प्रदान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री ने कई चरणों में बिहार के विभिन्न जिलों में जल-जीवन-हरियाली यात्रा के तहत आयोजित सम्मेलन में जा-जाकर यही संदेश देते रहे हैं-

“धरती को रहने योग्य बनाने में गांधीयन मिसाइल मैन डाॅ.एपीजे अब्दुल कलाम की तरह सब लोगों की पूरी प्रतिबद्धता होनी चाहिए। जल रहेगा तो हरियाली रहेगी….. और तभी जीवन बचा रहेगा और ऐसा होगा तभी सभी समुदाय के लोग धरती पर सामाजिक सरोकार निभाते हुए अमन चैैैन के साथ रह सकेंगे। अतः 19 जनवरी को बनने वाली जल-जीवन-हरियाली मानव श्रृंखला में बड़ी संख्या में शामिल होकर कीर्तिमान बनाएं।”

यह भी बता दें कि जब जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिथिलांचल का दौरा किया तो उन्होंने सम्मेलनों में यही कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों में जलवायु परिवर्तन पर केवल चर्चाएं होती रही हैं परंतु बिहार सरकार ने तो इस पर काम शुरू कर दिया है….. यदि सबों के सहयोग से यह योजना सफल हो गई तो बिहार की चर्चा हमेशा पूरे विश्व में होती रहेगी।

जगह-जगह पर आयोजित सम्मेलनों में सीएम ने कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों के भवनों में अब सौर ऊर्जा से ही काम होंगे….. बिहार अब अक्षय ऊर्जा के विकल्प पर काम कर रहा है। उन्होंने कई सरकारी भवनों पर रूप गार्डनिंग एवं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी उद्घाटन किया और कहा कि यह तकनीक अब सभी मकानों में इस्तेमाल होगी ताकि जलस्तर बना रहे। घट रही बारिश के दुष्प्रभाव से पृथ्वी को बचाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि पहले बिहार में 15 जून से ही मानसून की शुरूआत हो जाती थी तथा औसतन 1200 से 1500 मिलीमीटर तक सालाना वर्षा होती थी, विगत 30 वर्षों से वर्षा का सालाना रिकॉर्ड यही बताता है कि यह औसत 1500 मिलीमीटर से घटकर 1027 मिलीमीटर तक पर पहुंच गई है। विगत 13 वर्षों में औसत वर्षा घटकर 901 मिलीमीटर पर पहुंच गई है। अस्तु सब कोई मिलकर जब बूंद-बूंद जल को बचाएंगे तब हरियाली बचेगी… और तभी जीवन बच पाएगा।

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15 साल बनाम 15 साल होगा 2020 के चुनाव का नेरेटिव: आरसीपी

बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में शुक्रवार को क्षेत्रीय संगठन प्रभारियों, जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों, विधानसभा प्रभारियों, प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्षों एवं प्रदेश प्रवक्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह ने की। इस बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, कामाख्या नारायण सिंह, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, क्षेत्रीय संगठन प्रभारी सुनील कुमार, अरुण कुशवाहा, विपिन कुमार यादव, रामगुलाम राम, पंचम श्रीवास्तव, आशिफ कमाल, युवा जदयू अध्यक्ष अभय कुशवाहा, समाज सुधार वाहिनी अध्यक्ष रंजू गीता, महिला जदयू अध्यक्ष श्वेता विश्वास आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम 15 नवंबर से 05 दिसंबर तक बिहार के हर बूथ पर अध्यक्ष और सचिव के मनोनयन को लेकर चले अभियान का ब्योरा प्रस्तुत किया गया। अभियान की सफलता पर आरसीपी सिंह ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि पार्टी के संगठन के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। हमारा संगठन अब सभी बूथों तक है, यह पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है। हमारे नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमीन पर काम किया है और अब हमारा संगठन भी जमीन तक है। इस अभियान से हमारे कार्यकर्ताओं का भरोसा बढ़ा, पार्टी जड़ से मजबूत हुई और संगठन की ताकत बढ़ी।
अपने संबोधन में आरसीपी सिंह ने आगे कहा कि अब हमलोगों का अगला लक्ष्य 15 दिसंबर 2019 से 05 जनवरी 2020 के बीच विधानसभावार सम्मेलन का है। इसके बाद बूथ तक के सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना है। इसके लिए लगभग 400 मास्टर ट्रेनर बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी को एकजुट और संकल्पित रहना है कि बिहार में 2020 में फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बने।
आरसीपी सिंह ने कहा कि 2020 के चुनाव का नेरेटिव होगा 15 साल बनाम 15 साल। बिहार की जनता अच्छी तरह जानती है कि नीतीश कुमार के शासन के पहले और बाद के बिहार में क्या अंतर है और साथ में यह भी कि और अगले 5 साल में क्या कुछ हो सकता है। न्याय के साथ विकास, बिहार का समावेशी विकास, सामाजिक सौहार्द्र और कानून का राज – हमारे नेता अपने इन संकल्पों पर शुरू से लेकर आज तक अडिग हैं।
एनआरसी और नागरिक संशोधन बिल की चर्चा करते हुए आरसीपी सिंह ने कहा कि आज लोग नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस के नाम पर लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं, जबकि हमलोगों का एजेंडा ‘सी’ से आगे ‘डी’ का यानि नेशनल रजिस्टर ऑफ डेवलपमेंट का है। हमलोगों का एकमात्र एजेंडा विकास है और विकास की इस यात्रा में धर्म, जाति या लिंग के नाम पर कोई भेदभाव नहीं कर सकता। कुछ पार्टियां अल्पसंख्यकों के नाम पर भय की राजनीति करने में लगी हैं, जबकि हमलोगों की राजनीति भय के विरुद्ध भरोसा की है। यह भय बनाम भरोसा की लड़ाई है। हमलोग अल्पसंख्यकों के भरोसा को किसी कीमत पर टूटने नहीं देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी लाईन से अलग विचार या राय रखने वाले पार्टी की ओर से स्वतंत्र हैं।

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बिहार के एमआईटी में गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर बनेगा शोध केन्द्र

एमआईटी यानि मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विश्व विख्यात बिहार के गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर शोध केंद्र बनेगा। यह शोध केन्द्र एमटेक के थीसिस वर्क के साथ-साथ प्राध्यापकों के रिसर्च कार्य के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

बता दें कि एमआईटी के प्राचार्य डॉ.जे.एन.झा ने बताया कि संस्थान के रिसर्च सेंटर का नाम विश्व प्रसिद्ध महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर होगा। डॉ.झा ने कहा कि टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टी.ई.क्यू.आई.पी.) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) की बैठक में इसकी मंजूरी मिल गई है। अब डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से मंजूरी हेतु प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

प्राचार्य डॉ.जे.एन.झा द्वारा यह जानकारी दी गई कि इस रिसर्च सेंटर की स्थापना से सूबे में शोध कार्यों की संस्कृति विकसित होगी। उन्होंने कहा कि अब तक इस रिसर्च सेंटर में 75 कंप्यूटर इंस्टॉल किए जा चुके हैं जिसमें कुछ अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जाएंगे। वैसे सॉफ्टवेयर जिसमें डिजाइनिंग से लेकर अन्य जरूरतमंद तकनीकी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि रिसर्च सेंटर के संस्थान को बहुत फायदा होगा। आने वाले दिनों में एमआईटी का एनबीए से एक्रीडिटेशन होना है। अतः संस्थान में रिसर्च सेन्टर होने से इसे बेहतर रैंकिंग मिलेगा।

 

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राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लालू के निर्वाचन पर मुहर

राष्‍ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लालू प्रसाद यादव के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के रूप में निर्वाचन पर मुहर लग गई। मंगलवार को राजद की नवगठित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। इसके साथ ही पार्टी का खुला अधिवेशन भी होगा। सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक में आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के नारों और संघर्ष की रणनीति तय की गई और एक स्वर से तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया गया।

गौरतलब है कि सोमवार को राजद राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कई प्रदेशों के नेता आए, लेकिन राबड़ी देवी और मीसा भारती की अनुपस्थिति खटक रही थी। लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय और सांसद मनोज झा भी नहीं थे। बैठक में जहां लालू के छोटे बेटे तेजस्‍वी काफी सक्रिय दिखे, वहीं उनके बड़े बेटे तेजप्रताप काफी देर बाद पहुंचे। कुछ दिनों पहले अवकाश लेने की घोषणा करने वाले शिवानंद तिवारी की सक्रियता सबकी निगाहों में रही।

बहरहाल, सोमवार को हुई बैठक में आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के नारे और संघर्ष की रणनीति पर विचार किया गया। अपराध, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर केन्द्र-राज्य सरकारों के खिलाफ पार्टी की व्यूह रचना हो चुकी है। नई रणनीति के तहत आरजेडी को अब सवर्णों से भी परहेज नहीं है। मंगलवार को पटना के बापू भवन में आयोजित खुला अधिवेशन के दौरान मैदान की ओर प्रस्थान के लिए बिगुल बज जाएगा।

सोमवार की बैठक में कुल दस प्रस्तावों पर मुहर लगी। राजनीतिक प्रस्ताव चितरंजन गगन ने रखा जिसका समर्थन शिवानंद तिवारी और रामचंद्र पूर्वे ने किया। आर्थिक प्रस्ताव आलोक मेहता ने रखा जिसका समर्थन अब्दुलबारी सिद्दीकी और उदयनारायण चौधरी ने किया। शिक्षा संबंधी प्रस्ताव चन्द्रशेखर ने, विदेश नीति का प्रस्ताव अन्नु चाको ने, एससी-एसटी संबंधी प्रस्ताव सुरेश पासवान ने, अल्पसंख्यक संबंधी प्रस्ताव तनवीर हरसन ने, महिला सशक्तिकरण का प्रस्ताव कांति सिंह ने तथा संविधान संशोधन संबंधी प्रस्ताव भोला यादव ने रखा। बता दें कि राजद के प्रस्तावों में महिला सशक्‍तीकरण को पहली बार शामिल किया गया। प्रस्ताव प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने तैयार किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता रघुवंश प्रसाद सिंह ने की।

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बिहार में खुलेंगे 13 नर्सिंग कॉलेज और 03 पारा मेडिकल कॉलेज

सूबे की नीतीश सरकार जन स्वास्थ्य के प्रति सर्वाधिक जागरूक दिखती है। राज्य में एक ओर जहाँ 13 नए नर्सिंग कॉलेज खोलने हेतु आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की एफिलिएशन कमिटी ने प्रस्ताव को पारित किया है वहीं दूसरी ओर उसी एफिलिएशन कमिटी ने राज्य में तीन नए पारा मेडिकल कॉलेज खोलने का भी प्रस्ताव पारित किया है।

यह भी बता दें कि राज्य में पूर्व से चल रहे 12 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता भी इसी कमिटी ने  एक साल के लिए बढ़ा दी है। इन 12 नर्सिंग कॉलेजों के अतिरिक्त और 13 नए नर्सिंग कॉलेज खुलेंगे।

जानिए कि राज्य में पारा मेडिकल में काफी कम सीटें हैं। फलस्वरूप पारा मेडिकल की पढ़ाई के लिए सूबे के अधिकांश छात्रों को बाहर जाना पड़ता है। इन पारा मेडिकल कॉलेजों में बीएमएलटी, बीआईआईटी, बीओटीटी, बीपीटी तथा बीएचएम कोर्स की पढ़ाई होगी।

चलते-चलते यह भी जान ले कि यह 13 नर्सिंग कॉलेज एवं 3 नए पारा मेडिकल कॉलेज कहाँ-कहाँ स्थापित किए जाएंगे ? ये 13 नर्सिंग कॉलेज होंगे-

1. बीएम इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज  (नालंदा) 2. एमएस इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन (नालंदा) 3. कृष्णा इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन एंड पैरामेडिकल साइंसेज (समस्तीपुर) 4. मगध पारा मेडिकल एंड नर्सिंग इंस्टिट्यूट (गया) 5. अंबेडकर नर्सिंग इंस्टिट्यूट (रोहतास) 6. शेरशाह मेडिकल रिसर्च एंड ट्रेनिंग संस्थान (सासाराम) 7.एमके कॉलेज ऑफ नर्सिंग (पटना) 8. एस एन एस कॉलेज ऑफ नर्सिंग साइंसेस (पूर्वी चंपारण) 9. पीए नर्सिंग स्कूल (समस्तीपुर)  10. एसडी स्कूल ऑफ नर्सिंग (वैशाली) 11. शिवम कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज (पटना), 12. नूतन कॉलेज ऑफ नर्सिंग (सीतामढ़ी ) 13. वीपी सिंह मेमोरियल कॉलेज (औरंगाबाद)।

ये तीन नए पारा मेडिकल कॉलेज होंगे- 1. एसआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सीवान) 2. पटना इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस (पटना) 3. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन (पटना)

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जदयू ने बिहार के सभी बूथों पर बनाए अध्यक्ष और सचिव

बिहार के हर बूथ पर अध्यक्ष और सचिव बनाने को लेकर बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा 15 नवंबर से चल रहा अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। पार्टी ने 05 दिसंबर के तय समय पर बिहार के सारे बूथों पर अध्यक्ष और सचिव बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया।
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह ने ससमय इस अभियान के पूरा होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस अभियान में लगे सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारियों, जिला संगठन प्रभारियों, सभी जिलाध्यक्षों, प्रदेश एवं जिला द्वारा मनोनीत विधानसभा प्रभारियों, सभी प्रखंड अध्यक्षों एवं प्रखंड प्रभारियों, सभी पंचायत अध्यक्षों एवं पार्टी के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई दी। इस मौके पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता से जदयू ने सांगठनिक मजबूती की मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि लगातार 20 दिन तक चले इस अभियान के प्रति दल के सभी साथियों ने जैसा उत्साह दिखाया और हर बूथ पर पार्टी की दमदार उपस्थिति सुनिश्चित की, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम होगी।
गौरतलब है कि जदयू ने अधिकांश जिलों में यह लक्ष्य समय से पहले पूरा किया। केवल कुछ जिलों के कुछेक बूथ बचे हुए थे, जहां आज बूथ अध्यक्ष और सचिव का मनोनयन कर लिया गया। 09 दिसंबर 2019 को बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में आरसीपी सिंह की अध्यक्षता में बैठक आहूत की गई है जिसमें सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, सभी जिलाध्यक्ष एवं सभी विधानसभा प्रभारियों के साथ ही सभी प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी प्रदेश प्रवक्ता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में 15 नवंबर से 05 दिसंबर तक चले अभियान की समीक्षा के साथ ही भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी।
ध्यातव्य है कि आगामी 15 दिसंबर से 05 जनवरी के बीच सभी विधानसभाओं में पार्टी का सम्मेलन होना है। इसके साथ ही माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में चल रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान में जदयू की सक्रिय सहभागिता भी सुनिश्चित की जानी है।

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