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कोरोना: बिहार में लॉकडाउन

कोरोना वायरस से आज पूरी मानव जाति संकट में है। हम सब इस महामारी का डटकर मुकाबला कर रहे हैं। आवश्यक सावधानियां भी बरती जा रही हैं, किन्तु इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति का सचेत रहना नितांत आवश्यक है और इसका सबसे अच्छा उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने आज तत्काल प्रभाव से 31 मार्च तक के लिए सभी जिला मुख्यालयों, अनुमंडल मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यालयों एवं नगर निकायों में लॉकडाउन का निर्णय लिया। राज्यवासियों के नाम जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने और आमलोगों की सुरक्षा के लिए इसे आवश्यक बताया।
ध्यातव्य है कि लॉकडाउन के दौरान निजी प्रतिष्ठान, निजी कार्यालय एवं सार्वजनिक परिवहन पूर्णत: बंद रहेंगे परंतु आवश्यक एवं अनिवार्य सेवाओं से संबंधित प्रतिष्ठान जैसे चिकित्सा सेवाओं, खाद्यान्न एवं किराने के प्रतिष्ठान, दवा की दुकानों, डेयरी एवं डेयरी से संबंधित प्रतिष्ठान, पेट्रोल पम्प एवं सीएनजी स्टेशन, बैंकिंग एवं एटीएम, पोस्ट ऑफिस तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि सेवाओं एवं इन सेवाओं के लिए उपयोग किए जा रहे वाहनों को इस आदेश की परिधि से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों से अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम में अपना पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जब भी संकट का समय आया है हमने सभी लोगों के सहयोग से उस पर विजय पाई है। संकट की इस घड़ी में सरकार सभी लोगों के साथ है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करने में सक्षम होंगे। मैं सब लोगों से अपील करूंगा कि आप सब अपने घर के अंदर रहें, इधर-उधर अनावश्यक आने-जाने की जरूरत नहीं है। कोरोना से संबंधित सारी चीजों की जानकारी दी जा रही है। हम सब मिलकर इस परिस्थिति का मुकाबला कर सकते हैं और इसमें हम कामयाब होंगे।

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निर्भया के मामले में उसकी माँ को क्यों मिला मुश्किल से न्याय

निर्भया कांड के चारों गुनहगारों को जोड़कर आजाद भारत में फांसी के फंदे पर लटकने वालों की कुल संख्या 724 हो गई। देश में पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारों गोडसे एवं आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी तथा अंतिम फांसी निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को 20 मार्च 2020 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में दी गई।

बता दें कि निर्भया के माता-पिता के अटूट संकल्प व संयम के चलते और कोर्ट के कानूनी दांव-पेंच के बीच लगे व जगे रहने के कारण ही… लगभग 7 वर्ष 3 महीने से अधिक समय तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार छह दुष्कर्मियों में से चार को ही फांसी पर लटकाया गया। एक तो जेल में ही खुदकुशी कर ली थी और दूसरे को नाबालिग का लाभ मिल गया।

यह भी बता दें कि जब 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की सर्द रात में छह  दुष्कर्मियों ने निर्भया को अपना शिकार बनाया था तो ऐसा लगा कि सारा देश ठहर सा गया। निर्भया द्वारा अंतिम सांस लेने के बाद उसकी माँ “आशा” भारत की सारी माँओं की आशा बनकर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाती रही और न्याय पाने के लिए बिलबिलाती रही। इस दरमियान यदा-कदा थक जाने के चलते हलचल काफी कम हो जाया करती तथा घर में अकेले निर्भया की तस्वीर के सामने बैठना उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। मार्च 20 (शुक्रवार) को सवेरे 5:30 बजे फांसी की जानकारी के साथ निर्भया के माता-पिता को सुकून मिला और भारत की समस्त महिलाओं को खुशी मिली।

यह भी बता दें कि कई बार डेथ वारंट निकलने और फांसी की तिथि तय होने के बावजूद कोई ना कोई कानूनी पेच फंस ही जाता। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतिम तिथि 17 जनवरी को दया याचिका ठुकराई, फिर भी फांसी पर लटकने में दोषियों के वकील ने 70 दिन से अधिक समय जाया कर दिया।

चलते-चलते यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से जब निर्भया के मामले वाले दुष्कर्मियों को फांसी दिए जाने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों एवं भारतीय सांसदों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। केवल फांसी से ऐसे अपराध की पुनरावृति रुकने वाली नहीं है। परन्तु, हमारी कोशिश हो कि इस तरह के क्रूरतम अपराध फिर नहीं हो…. क्योंकि कोशिश का दुनिया में कोई विकल्प नहीं है…।

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डॉ.मनीष मंडल ने ब्रेन डेड घोषित रोहित के अंगों का दान ठिकाने लगाकर मिसाल पेश की

नौंवी कक्षा के 17 वर्षीय छात्र रोहित ने बचपन में ही अपने समाजसेवी पिताश्री रवीन्द्र कुमार से प्रेरित होकर मृत्योपरांत  अंगदान करने का फैसला खुद ही लिया था। परंतु, दुर्भाग्यवश 7 मार्च को ही मुजफ्फरपुर के कांटी में हुई स्कॉर्पियो और ट्रैक्टर की दुर्घटना में रोहित बुरी तरह घायल हो गया। भले ही रोहित की जान नहीं बच सकी, लेकिन रोहित के घर वालों ने उसके अंगदान करनेवाली इच्छा की पूर्ति करने के लिए आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल से सहयोग प्राप्त कर रोहित को अमरत्व प्रदान कर दिया।

बता दें कि मृत्यु के बाद रोहित के माता-पिता ने उसके किडनी, लीवर, हृदय तथा उसकी दोनों आंखों की काॅर्निया दान करने का निर्णय लिया… जिसके फलस्वरूप जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे छह लोगों को नया जीवन मिलने जा रहा है यानि दो आंखें, दो किडनियाँ, एक हार्ट और एक लीवर।

जानिए कि रोहित के ‘हृदय’ को ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट की देखरेख में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूरी सुरक्षा के साथ कोलकाता भेज दिया गया जहां एक बच्चे में रोहित का हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया गया। दो किडनियों में एक को गत बुधवार को ट्रांसप्लांट कर दिया गया और दूसरी को एक दिन बाद वेटिंग लिस्ट के मरीज के लिए जीवन बचाने हेतु रखा गया है। दोनों आंखें भी आइजीआइएमएस के आई बैंक में सुरक्षित रख दिया गया है।

यह भी कि रोहित का लीवर एक 47 वर्षीय बिहारी मूल के व्यक्ति को आइजीआइएमएस में ही लगाया गया जो नीतीश सरकार के कार्यकाल का “पहला लिवर ट्रांसप्लांट” के रूप में सदा रोहित की याद बिहार वासियों को दिलाता रहेगा। रोहित के इस अंग दान एवं डॉ.मनीष के प्रयास से छह लोगों को नई जिंदगी मिलेगी…. और समाज के दूसरे लोगों को अंगदान करने की प्रेरणा…।

चलते-चलते यह भी कि आइजीआइएमएस के अधीक्षक डॉ.मनीष मंडल द्वारा पूर्व में भी कई बार पटना ट्रैफिक पुलिस से भरपूर सहयोग ले-लेकर ग्रीन कॉरिडोर बनाते हुए जीवन दायिनी मानव अंगों को कभी कोलकाता तो कभी दिल्ली भेजा जाता रहा है। मधेपुरा के लोकप्रिय शिशु चिकित्सक डॉ.अरुण कुमार मंडल के ऐसे सपूत डॉ.मनीष मंडल के प्रति मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि आगे आने वाले दिनों में डॉ.मनीष बिहार का नायक ही नहीं कहलायेगा, बल्कि स्वास्थ्य कल्याण के क्षेत्र में भारत का महानायक बनेगा।

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एक महिला आईएएस ने पहली बार सरकारी अस्पताल में प्रसव करा कर इतिहास रचा

गोड्डा जिले के डीसी के रूप में कार्यरत महिला आईएएस श्रीमती किरण कुमारी पासी के पति श्री पुष्पेंद्र सरोज गोड्डा के पुंसिया स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में डीन के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी अस्पताल में पहली बार किसी आईएएस ने प्रसव कराया है… यह संदेश समाज के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।

बता दें कि आज की तारीख में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री की बात तो छोड़िए… विधायक भी अपना इलाज या ऑपरेशन अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में नहीं कराते हैं। यही कारण है कि वे इन अस्पतालों में जन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान नहीं देते। यदि मंत्री, विधायक या सांसद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने लगे और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने लगे तो धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। तब सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों को ठीक होने में कितना समय लगेगा ?

जानिए कि जनहित में विकास के प्रति समर्पित डीसी किरण कुमारी पासी को अपने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर इतना गहरा विश्वास था कि उन्होंने नि:संकोच होकर गोड्डा केे ही सदर अस्पताल में अपना दूसरा शल्य प्रसव कराया। प्रसव कराने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.प्रभारानी प्रसाद की टीम ने डीसी को थैंक्स करते हुए यही कहा कि क्षेत्र के लिए आपके द्वारा किए गए विकास कार्यों पर आपकी गहरी विश्वास के फलस्वरूप ही शल्य प्रसव बड़ी ही आसानी से कराया जा सका।

यह भी कि दूसरा शल्य प्रसव रहने से सचेत थी मेडिकल टीम। शल्य प्रसव के बाद 48 घंटे के परीक्षण में डीसी श्रीमती पासी के साथ बालक शिशु को डॉक्टरों की मेडिकल टीम की देखरेख में सदर अस्पताल में ही रखा गया। चिकित्सक डॉ.प्रभा के अनुसार जच्चा एवं बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

 

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कोरोना वायरस पर बिहार सरकार की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। बिहार विधानसभा में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज पर होने वाले सारे खर्च का भुगतान मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से राज्य सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही कहा कि कोरोना वायरस से मौत होने की स्थिति में मृतक के निकटतम संबंधी को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि शिक्षकों और सरकारी कर्मियों को भी इस रोग के बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से खतरे को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है और इसके संक्रमण को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और इसके इलाज के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है एवं सरकारी जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में पृथक वार्ड और जीवन रक्षक की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग को सौ अतिरिक्त वेंटीलेटर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है और उसपर काम शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सीमावर्ती देश नेपाल और राज्य उत्तर प्रदेश में इस रोग के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों से विदेशों में लोगों का आना-जाना लगा रहता है जिससे यहां भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पटना और गया हवाई अड्डे पर प्रभावित देशों से आने वालों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही बिहार और नेपाल की सीमा पर 49 स्थानों पर आने वाले यात्रियों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है एवं प्रभावित देशों से आने वालों को अलग से रखने की जाने की व्यवस्था की जा रही है और इसके लिए पटना स्थित होटल पाटलिपुत्र अशोक को इसके लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि संक्रमण को रोकने के उपायों के तहत शिक्षण संस्थाओं, सिनेमा हॉल और सार्वजनिक पार्को को 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है। माध्याह्न भोजन की राशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्रकार के सरकारी आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभागों के समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ कर्मियों को एक दिन छोड़कर कार्यालय आने का निर्देश दिया गया है ताकि कार्यालय परिसरों में भीड़ से बचा जा सके।

बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के आखिरी दिन नीतीश कुमार ने कहा कि इस रोग को लेकर कहीं से सभी कोई सूचना मिलने पर हमारे कार्यालय में भी लोग फोन कर सकते हैं और उसकी हम व्यवस्था करेंगे। उल्लेखनीय है कि बजट सत्र 31 मार्च तक चलना था लेकिन कोरोना वायरस के चलते समय से पूर्व ही सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का फैसला किया गया। कोरोना वायरयस को लेकर बिहार के 4-5 जिलों में धारा 144 लगाए जाने के बारे में बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं कि इसकी आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि गलतफहमी के कारण ऐसा किया गया क्योंकि यह कोई कानून व्यवस्था का मामला तो है नहीं।

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आखिर ज्योतिरादित्य ने अलग कर ही ली अपनी राह

मध्यप्रदेश में आंतरिक कलह और वर्चस्व की लड़ाई की शिकार कांग्रेस आखिरकार बिखर ही गई। पार्टी के भीतर लगातार उपेक्षा के शिकार हो रहे ज्योतिरादित्य ने वहां कमलनाथ सरकार की जड़ें हिला दीं। यही नहीं, अब उनके भाजपा में जाने की खबर है। पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। चर्चा तो यह भी है कि राज्यसभा चुनाव के ठीक बाद उन्हें मोदी सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है।

बता दें कि ज्योतिरादित्य मंगलवार सुबह करीब 10:45 बजे गुजरात भवन पहुंचे। यहां से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें अपने साथ 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास लेकर गए, जहां शाह की मौजूदगी में सिंधिया की प्रधानमंत्री से करीब घंटेभर बातचीत हुई। फिर शाह की ही कार में सिंधिया गुजरात भवन लौटे। इस मुलाकात के बाद दोपहर 12.10 बजे उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफे की चिट्ठी ट्वीट कर दी, जो सोमवार, यानी 9 मार्च को ही लिख ली गई थी।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने सिंधिया का प्रचार के मुख्य चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन सीएम पद की दौड़ में वे पिछड़ गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम आगे रहा, लेकिन पद नहीं मिला। अटकलें थीं कि वे डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उपेक्षा का दौर यहीं नहीं रुका, खबर यह भी है कि सिंधिया ने चार इमली में बी-17 बंगला मांगा, लेकिन वह कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को दे दिया गया। रही-सही कसर भी तब पूरी हो गई जब 14 फरवरी को टीकमगढ़ में अतिथि विद्वानों की मांगों पर ज्योतिरादित्य ने कहा कि यदि वचन पत्र की मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरेंगे। इस पर कमलनाथ ने टका सा जवाब दिया कि ऐसा है तो उतर जाएं। इसी के बाद तल्खी और बढ़ गई और इतनी बढ़ी कि मौजूदा शक्ल अख्तियार कर ली। यह भी याद दिला दें कि करीब 4 महीने पहले 25 नवंबर 2019 को ही ज्योतिरादित्य ने ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल से कांग्रेस का नाम हटा दिया था। इसकी जगह उन्होंने स्वयं को केवल जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया था।

एक ओर पृष्ठभूमि में इतनी बातें थीं हीं। ज्योतिरादित्य के सामने एक तरह से अस्तित्व का संकट था। ऐसे में राज्यसभा चुनाव आ गया। मध्यप्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों में से 2 पर उसके उम्मीदवारों का जीतना तय था। दिग्विजय की उम्मीदवारी पक्की थी। दूसरा नाम ज्योतिरादित्य का सामने आया। बताया जा रहा है कि यहां भी उनके नाम पर कमलनाथ अड़ंगे लगा रहे थे। इसी से ज्योतिरादित्य नाराज थे। इसके बाद 9 मार्च को जब प्रदेश के हालात पर चर्चा के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे थे, तभी 6 मंत्रियों समेत सिंधिया गुट के 17 विधायक बेंगलुरु चले गए थे। इससे साफ हो गया कि सिंधिया अपनी राहें अलग करने जा रहे हैं। बहरहाल, उनके भाजपा में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी अब हो ही जाएगी। उधर कमलनाथ अपने तरकश से कौन-कौन से तीर निकालते हैं और कांग्रेस सरकार की डूबती दिख रही नाव को किस तरह पार लगाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे वे ऐसा कर पाएंगे, इस पर मौजूदा स्थिति में यकीन कर पाना मुश्किल लगता है।

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कोरोना: पीछे हटने का नहीं, मिलकर काम करने का वक्त

दुनिया भर में कोरोना वायरस का फैलना जारी है। चीन में शुक्रवार को 28 और लोगों की मौत के साथ दुनिया भर के 17 देशों में मरने वालों की संख्या 3406 हो गई है। वहीं, संक्रमण के 99 नए मामले सामने आए। चीन में जहां संक्रमण के केन्द्र वुहान में नए मरीजों की संख्या में कमी आई है, वहीं हुबेई प्रांत से बाहर संक्रमण का फैलना जारी है। दूसरे देशों से चीन लौटे 24 लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। दूसरी तरफ संक्रमण के खतरे की वजह से अमेरिका में केलिफोर्निया के तट पर खड़े किए गए क्रूज शिप ग्रांड प्रिंसेस में फंसे 21 और यात्री संक्रमित पाए गए हैं।
ध्यातव्य है कि दुनिया के 84 देश कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और अब तक 1,00,329 लोग संक्रमित पाए गए हैं। बीमारी के केन्द्र चीन में सबसे ज्यादा 3070 मौतें हुई हैं और वहां 80,653 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। संक्रमण के चलते चीन के बाद इटली में सबसे ज्यादा 148 और ईरान में 107 लोगों की जान गई है।
पूरी दुनिया पर अभिशाप बनकर मंडराने वाले कोरोना वायरस के बारे में माना जा रहा है कि चीन के वुहान के सी-फूड और पोल्ट्री मार्केट से यह वायरस फैला। वुहान की आबादी 1.1 करोड़ है। वायरस लोगों से लोगों में फैल रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वायरस इतनी तेजी से कैसे फैला और इस कदर खतरनाक हो गया। एशिया में दक्षिण कोरिया और ईरान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ईरान में पीड़ितों की संख्या 3513 पहुंच गई है। दक्षिण कोरिया में 6593 केस सामने आए हैं। जापान में 1065 लोग इसकी चपेट में हैं। वहीं, भारत में कोरोना वायरस के 31 मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में एक और मरीज में संक्रमण की पुष्टि हुई।
इधर बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्तर पर लोग अलर्ट हैं और केन्द्र सरकार भी पूरी तरह सचेत है। उन्होंने कहा कि हमलोगों ने राज्य स्तर पर बैठक कर हर पहलू पर चर्चा की है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को जिम्मेवारी सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गया में बाहर से लोग आते हैं। इसके साथ ही नेपाल का बॉर्डर खुला हुआ है, वहां से भी लोग आवागमन करते हैं। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि चीन या अन्य जगहों से भी लोग नेपाल आए हों। हर पहलू को ध्यान में रखकर गंभीरता से विमर्श हुआ है। हर परिस्थिति में लोगों की सहायता करना सरकार का दायित्व है और सरकार की ओर से सब कुछ किया जा रहा है।
अंत में, जैसा कि शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा, हम भी यही कहेंगे कि यह वक्त पीछे हटने का नहीं, बल्कि मिलकर काम करने का है। तो आइये, सचेत रहें और मिलकर इसका सामना करें।

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एमएलसी डॉ.संजीव ने नियोजित शिक्षकों के हितार्थ माननीय मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

सूबे के आंदोलनरत शिक्षक संघ-संगठनों से छात्रहित में वार्ता हेतु हस्तक्षेप करने के लिए कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ.संजीव कुमार सिंह ने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा है जिसकी प्रतिलिपि सूबे के शिक्षा मंत्री एवं विभागीय अपर मुख्य सचिव को भी प्रेषित की गई है।

बता दें कि विधान पार्षद डॉ.संजीव ने पत्र में लिखा है कि सूबे के नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में वर्तमान विसंगतिपूर्ण वेतन संरचना तथा उनकी लंबित सेवा-शर्तों की अधिसूचना के साथ-साथ राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन के संदर्भ में मुख्यमंत्री के द्वारा विधान परिषद में विस्तार से सरकार का पक्ष रखा गया। इसी बाबत शिक्षा मंत्री द्वारा भी सकारात्मक वक्तव्य सभी सदस्यों के सामने आया, परंतु अभी तक वार्ता हेतु कोई विभागीय पहल नहीं होने से छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन एवं मैट्रिक व इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य बुरी तरह प्रभावित है।

सूबे के सीएम को उन्होंने यह भी कहा कि वित्त अनुदानित एवं गैर अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक-शिक्षिकाएं भी अपने चिर प्रतीक्षित “वेतनमान आधारित घाटानुदान” की मांगों के समर्थन में लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर हैं, परंतु अंततः आपसे ही समाधान की अपेक्षा भी इन सबों को है।

विधान पार्षद डॉ.संजीव ने पत्र में यह भी लिखा है कि संप्रति आपकी संकल्पित राजनीतिक इच्छाशक्ति “न्याय के साथ विकास” की अवधारणा एवं सिद्धांत के विपरीत शिक्षा विभाग तथा संबंधित जिला प्रशासन द्वारा शांति पूर्ण तरीके से आंदोलनरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रति दमनात्मक रवैया यथा निलंबन एवं बर्खास्तगी की कार्रवाई तथा प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई से गतिरोध बढ़ता जा रहा है। डॉ.सिंह ने अंत में यह भी कहा कि विभाग एवं जिला प्रशासन का यह कृत्य बिहार राज्य शिक्षक नियोजन एवं सेवा शर्त नियमावली के भी विपरीत है। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री जी से यह भी अनुरोध किया कि वे शिक्षा विभाग के मंत्री एवं शीर्षस्थ पदाधिकारियों को आंदोलनकारी संघ-संगठनों से सम्मानजनक वार्ता हेतु अविलंब दिशा निर्देश दे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले तथा डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से जब इस बाबत कुछ कहने को कहा गया तो डॉ.मधेपुरी ने बस इतना ही कहा कि गतिरोध बढ़े यह ठीक नहीं…. जल्द ही शिक्षकों की समस्या का समाधान हो…. मैं भी तो नीतीश सरकार की सामाजिक क्रांति के प्रतीक “साइकिल-पोशाक योजना” और वैश्विक क्रांति के प्रतीक “जल, जीवन और हरियाली” का प्रशंसक हूँँ…. प्रवक्ता हूँँ….. सर्वाधिक सूक्ष्म हिस्सा भी हूँँ ।

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“एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने की स्मारक बनाने की घोषणा

राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में शुक्रवार को आयोजित “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम को संबोधित करने के दरमियान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की कि बिहार पुलिस के शहीद जवानों के सम्मानार्थ उनकी याद में ‘स्मारक’ का निर्माण किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने भारतीय सेना में कार्यरत बिहार के सैनिक जो शहीद हुए अथवा राज्य पुलिस के शहीद जवानों के परिजनों को भी सम्मानित किया।

बता दें कि मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के आयोजकों को धन्यवाद देते हुए यही कहा कि शहीदों का परिवार हम सब का परिवार है। सीएम ने उन्हें पूरा सहयोग देने का संकल्प भी लिया और दर्शकों से उन परिवार वालों को सहयोग करने हेतु आह्वान भी किया। इतना ही नहीं, आगे उन्होंने आयोजकों से यह भी कहा कि इन शहीदी परिवारों को जब भी कोई जरूरत हुई तो इसकी जानकारी उन्हें भी जरूर दें।

इस आशय की जानकारी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मधेपुरा के प्रखर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 6 जून 2013 को मधेपुरा आने वाले थे। 1 जून 2013 को सीएम को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उस पत्र में अंकित था…. बीएनएमयू के नॉर्थ कैंपस का नाम शहीद चुल्हाय नगर करने…. जो नहीं हो सका। अब इस धरती के शहीद को सम्मान देने का द्वार पुनः खुलता हुआ नजर आने लगा है।

इस शहीद सम्मान कार्यक्रम में सम्मानित विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारून रशीद, उद्योग मंत्री श्याम रजक, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे आदि गणमान्य की उपस्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शहीदों के परिजनों के साथ खड़े दिखे और शहीदों के नाम ‘स्मारक’ बनाने हेतु संकल्पित भी। यह भी जानिए कि यह शहीद स्मारक पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के परिसर में पर्याप्त जगह होने पर वही बनेगा अन्यथा अन्य किसी उपयुक्त जगह की उपलब्धता पर आरंभ होगा निर्माण कार्य।

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2020 में 200 से अधिक सीटें जीतेगा एनडीए: नीतीश कुमार

शनिवार, 22 फरवरी को 1, अणे मार्ग, पटना में मुख्यमंत्री व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की उपस्थिति में बिहार प्रदेश जदयू के क्षेत्रीय संगठन प्रभारियों, जिलाध्यक्षों एवं प्रखंड अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह, लोकसभा में दल के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, चंदन कुमार सिंह, मंजीत सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, जदयू प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील कुमार, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप, क्षेत्रीय संगठन प्रभारी अरुण कुशवाहा, डॉ. बिपिन कुमार यादव, पंचम श्रीवास्तव, अशोक कुमार बादल, रामगुलाम राम एवं आसिफ कमाल मौजूद रहे।

JDU Media Cell President Dr. Amardeep addressing JDU Meeting.
JDU Media Cell President Dr. Amardeep addressing JDU Meeting.

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वप्रथम प्रखंड अध्यक्षों से अपनी बात रखने को कहा और पूरे तीन घंटे तक उन्हें सुनते रहे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता ही जदयू की पहचान हैं। आज बिहार के सभी बूथों पर पार्टी के अध्यक्ष और सचिव हैं, यह साधारण बात नहीं। हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि जदयू की जो सांगठनिक ताकत बनी है उसका उपयोग विगत 15 वर्षों में बिहार के समग्र विकास के लिए हुए कार्यों और सामाजिक अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने में होना चाहिए। उन्होंने सभी जिलाध्यक्षों एवं प्रखंड अध्यक्षों को कहा कि वे अपने घर पर पार्टी का झंडा जरूर लगाएं। इससे न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि आम लोगों में भी सार्थक संदेश जाएगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि दल के साथी वोट की चिन्ता नहीं करें। बिहार की जनता सही और गलत की पहचान रखती है। 2020 में एनडीए 200 से ज्यादा सीटें हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के पास ना कोई मुद्दा है, ना ही कोई कार्यक्रम। कुछ लोगों का काम केवल लोगों में भ्रम फैलाना होता है। वैसे लोगों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं। जिन विचारों को लेकर पार्टी आज तक चलती रही है, उन विचारों से समझौता किसी कीमत पर नहीं होगा। बिहार में धर्म, संप्रदाय, जाति या लिंग के आधार पर किसी भेदभाव का प्रश्न ही नहीं उठता।

A Glimpse of JDU Meeting held at 1, Anne Marg, Patna
A Glimpse of JDU Meeting held at 1, Anne Marg, Patna.

प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि दल के सभी कार्यकर्ता जन-जन तक अपने नेता का काम पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास के जितने आयाम देखने को मिले हैं, वह अभूतपूर्व है। बिहार में आधी आबादी की मौन क्रांति देखने को मिली है और शराबबंदी, दहेजबंदी, जल-जीवन-हरियाली जैसे सामाजिक अभियानों ने देश और दुनिया का ध्यान खींचा है। नीतीश कुमार ने मील के जितने पत्थर स्थापित किए हैं, उन्हें याद रखने और लोगों को याद दिलाते रहने की जरूरत है।
राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि जदयू के पास बेजोड़ नेता के साथ-साथ बेजोड़ कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने कहा कि जदयू ने न केवल सभी बूथों पर अध्यक्ष और सचिव का मनोनयन किया, बल्कि उनका सम्मेलन और अब प्रशिक्षण भी सपंन्न करा लिया। आज दल के सभी साथी पार्टी के विचारों से लैस हैं और उन्हें बिहार में हुए विकास कार्यों की समुचित जानकारी है। दल के सभी साथियों को लोगों के बीच जाकर अपनी बात रखनी है। उन्होंने इस मौके पर प्रखंड अध्यक्षों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण की भी घोषणा की। साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को विश्वास दिलाया कि 1 मार्च को दो लाख से भी अधिक संख्या में दल के कार्यकर्ता गांधी मैदान पहुँचेंगे।
लोकसभा में दल के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि आज बिहार का अनुसरण बाकी राज्य और केन्द्र सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने पहले हर घर बिजली योजना को अपनाया, फिर हर घर नल का जल योजना को और अब मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि आने वाले दिनों में श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान का अनुसरण भी केन्द्र और बाकी राज्य करेंगे।
ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा दल के कार्यकर्ताओं में प्रतिबद्धता और अनुशासन एक साथ होना चाहिए। नीतीश कुमार के हर कार्यकर्ता में अपने नेता के व्यक्तित्व की झलक दिखनी चाहिए। 2020 को लेकर उन्होंने कहा कि इस चुनाव में एनडीए की जीत तो सुनिश्चित है ही, दल के हर कार्यकर्ता का लक्ष्य होना चाहिए कि इस जीत का अंतर अधिक से अधिक हो।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कार्यक्रम के दौरान मीडिया एवं सोशल मीडिया के उपयोग और आधुनिक संचार माध्यमों पर पार्टी की उपस्थिति और तैयारी की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज जदयू न केवल विचारों बल्कि तकनीक में भी बाकी पार्टियों से आगे है।

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