पृष्ठ : बिहार अबतक

भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ 19 अप्रैल को किया गया था लांच

भारत और दुनिया के इतिहास में 19 अप्रैल को एक से बढ़कर एक महत्वपूर्ण घटनाएं घटती रही और आज भी घट रही है- जिनमें अमेरिकी क्रांति की शुरुआत से लेकर भारतीय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तात्या टोपे को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी गई फांसी भी शामिल है। आजाद भारत में पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” का 19 अप्रैल 1975 को लांच किया जाना भी इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

बता दें कि यह सेटेलाइट आर्यभट्ट भारत के विश्व विख्यात एवं महान खगोल शास्त्री व गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर नामित किया गया है जिनका जन्म बिहार की राजधानी पटना में पांचवी शताब्दी 476 ईसवी में तब हुई थी जब पटना का नाम कुसुमपुर था।

Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.
Stamp in memory of 1st Satellite Aryabhatta released by Govt. Of India.

गणितीय ज्ञान के तत्कालीन खजांची खगोल विद आर्यभट्ट द्वारा मात्र 23 वर्ष की आयु में दो भागों में आर्यभट्टियम पुस्तक लिखी गई थी जिसके कुल 121  श्लोकों द्वारा ज्योतिषीय, बीज गणितीय एवं त्रिकोणमितीय विद्याओं व सूत्रों की व्याख्या की गई। आर्यभट्ट द्वारा शून्य का आविष्कार भी उसे दुनिया में  अमरत्व दे गया है। तभी तो भारत ने अपने प्रथम उपग्रह का नाम उन्हीं के नाम पर आर्यभट्ट रखा… जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत काॅसमाॅस- 3M द्वारा कपुस्तिन से लांच किया गया। भारत सरकार ने 1975 में आर्यभट्ट के सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया है।

सम्बंधित खबरें


बिहार के कोरोना योद्धा डॉ.जे.पी.यादव की दिल्ली में सड़क दुर्घटना से मौत

बिहार के सुपौल जिला अंतर्गत त्रिवेणीगंज अनुमंडल स्थित भूड़ा गांव के निवासी एवं कोरोना-योद्धा डॉ.जे.पी.यादव दिल्ली में कोरोना मरीजों का इलाज करने में अहर्निश लगे रहते थे कि दिल्ली में ही अचानक एक सड़क दुर्घटना में चार रोज कबल उनकी मृत्यु हो गई। डॉ.जे.पी.यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भूड़ा में गुरुवार को किया गया।

बता दें कि 52 वर्षीय डॉ.जे.पी.यादव के पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली के दर्जनों डॉक्टर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए। रास्ते में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं कोरोना योद्धाओं द्वारा उनके पार्थिव शरीर पर फूल मालाएं चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.जय प्रकाश यादव दक्षिण एमसीडी में कोविड- 19 नोडल चिकित्सा पदाधिकारी थे। 1995 से वे दिल्ली को चिकित्सीय सेवा पूर्ण समर्पण के साथ दे रहे थे तथा वर्तमान में कोरोना वारियर्स के रूप में मरीजों का बेहतर इलाज कर रहे थे। उनकी कार जब स्टार्ट नहीं हुई तो बेटे की साईकिल से ही पॉलीक्लिनिक जाकर सीएमओ के रूप में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट वितरण करने में लग गए। एक शाम को अपने फ्लैट ग्रेटर कैलाश-1 लौटते वक्त एक अज्ञात कार ने पीछे से टक्कर मार दी और उन्हें महरौली के पास अरविंदो रोड के पीटीसी चौक से उठाकर मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया परंतु लाख कोशिश के बावजूद बचाया नहीं जा सका।

Funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Supaul.
The only son Kshitij near funeral of Dr.J.P.Yadav at his paternal village Bhura, Triveniganj (Supaul).

यह भी बता दें कि कोरोना वारियर्स डॉ.जे.पी.यादव को सारा देश संवेदना के साथ मौन श्रद्धांजलि दे रहा है तथा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत उनकी धर्मपत्नी डॉ.रश्मि एवं पुत्र क्षितिज व पुत्री दीक्षा सहित समस्त परिजनों को इस व्यथा को सहन करने की शक्ति प्रदान कर रहा है। परंतु, कृषक पिता महेश्वरी यादव व माता अमलेश्वरी देवी की आंखों के आंसू रुकने-थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और बहन मीना कुमारी होश में आते-आते बार-बार बेहोश हो जाती है। भाई सुभाष कुछ बोल भी नहीं पाता है। समस्त भूड़ा गांव ही शोक में डूबा है। यह कोरोना लाॅकडाउन तो महेश्वरी-अमलेश्वरी के संसार को प्रकाशित करने वाले सूरज को ही सदा के लिए लाॅकडाउन कर दिया है !

चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना जैसे अंतरराष्ट्रीय आपदा की घड़ी में जब चतुर्दिक लाॅकडाउन विराजमान है तब भी नीतीश सरकार के वरिष्ठ ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के निर्देश पर बिहार की सीमा में प्रवेश करते ही गोपालगंज के डीएम एवं एसपी ने डॉ.जयप्रकाश यादव के पार्थिव शरीर को वीरगति प्राप्त एक नायक जैसा सम्मान दिया तथा फूलमाला अर्पित करते हुए कहा कि डॉ.जेपी ने कोरोना-जंग में लोगों की सेवा करते-करते अपनी शहादत दी है…। त्रिवेणीगंज सदर के एसडीएम बीके सिंह ने जहां डॉ.जेपी के गांव भूड़ा जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की… वहीं अति संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने त्रिवेणीगंज भूड़ा की मिट्टी को (जिसकी सेवा उनकी बेटी व दामाद डॉ.रश्मि भारती एवं डॉ.वरुण कुमार वर्षों से करते आ रहे हैं) को नमन करते हुए कहा कि कोरोना योद्धा डॉ.जेपी जैसे यशस्वी पुत्र का माता-पिता होना भी परम सौभाग्य की बात है।

सम्बंधित खबरें


लालू पैरोल पर जल्द आएंगे बाहर

कोरोना संकट के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए सुकून देने वाली खबर। ये खबर आ रही है कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे की आहट सुन रहे झारखंड से। इस वैश्विक महामारी के बाद बदली परिस्थितियों में लालू प्रसाद यादव को राहत मिलनी तय हो गई है। चारा घोटाला मामले में सजा भुगत रहे आरजेडी सुप्रीमो पैरोल की सारी शर्तों को पूरा कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि एक-दो दिन में उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया जाएगा। हेमंत सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार ने इस मामले पर विधि विभाग से मंतव्य मांगा था। विधि विभाग ने अपना मंतव्य राज्य सरकार को भेज दिया है।

गौरतलब है कि किसी भी सजायाफ्ता को कुछ शर्तों के साथ पैरोल की सुविधा मिलती है। पैरोल एक्ट के अनुसार सजायाफ्ता व्यक्ति तभी जेल से बाहर निकल सकता है, जब उसने अपनी सजा का एक तिहाई समय जेल में बिताया हो या फिर वह एक साल से जेल में बंद हो। एक्ट के अनुसार सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों को पैरोल मिलता है, जिनके घर में शादी हो या किसी का निधन हुआ हो। स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं रहने पर भी पैरोल मिलता है। इसके लिए राज्य सरकार एक बोर्ड का गठन करती है, जिसमें संबंधित व्यक्ति का आवेदन भेजा जाता है। उसके बाद कमेटी जेल में उसके व्यवहार, स्वास्थ्य की स्थिति और स्पष्ट कारण को देखते हुए ही पैरोल देने पर सहमति जताती है।

बता दें कि लालू प्रसाद यादव इन दिनों चारा घोटाले के दुमका और चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सजायाफ्ता हैं। वे 23 दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं। जेल में उनके रहने की अवधि करीब 28 माह हो चुकी है, जो पैरोल की शर्तों को पूरा करता है। इसके अलावा उन्हें 15 से अधिक बीमारियां हैं, जिनका इलाज रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा है। साथ ही, लालू उसी भवन में भर्ती हैं, जहां पर रिम्स प्रशासन ने कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लिए आइशोलेशन वार्ड बनाया है। बहरहाल, यह भी देखना होगा कि पैरोल के बाद उन्हें लॉकडाउन में पटना भेजने की क्या व्यवस्था की जाती है।

सम्बंधित खबरें


उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन महीने बिना शुल्क के गैस

केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए तीन महीने नि:शुल्क गैस रिफिल की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक तेल कंपनियों के द्वारा इस मद में उज्ज्वला योजना के करीब 7.15 करोड़ लाभार्थियों के खाते में 5606 करोड़ हस्तांतरित किए गए हैं।
ध्यातव्य है कि यह योजना 01 अप्रैल से 30 जून तक के लिए प्रभावी है। इसके तहत कंपनियां लाभार्थी के खाते में उसके पैकेज के हिसाब से 14.2 किलो या 05 किलो के सिलेंडर की कीमत के बराबर का एडवांस जमा करा रही हैं। ग्राहक इस पैसे से सिलंडर रिफिल करा सकेंगे।
कोराना संकट को देखते हुए सभी कंपनियां हर लिहाज से कमर कस चुकी हैं। कंपनियां सुनिश्चित कर रही हैं कि डिलीवरी के लिए किसी ग्राहक को दो दिन से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। लॉकडाउन के बाद से देश में हर दिन रोजाना करीब 60 लाख सिलेंडर रिफिल किए जा रहे हैं।
यह भी जानें कि आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां पहले ही डिलीवरी ब्वाय समेत सप्लाई चेन के विभिन्न चरणों में कार्यरत अपने कर्मचारियों के लिए 05 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा कर चुकी हैं। किसी भी कर्मचारी की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु की स्थिति में यह राशि उनके परिजनों को दी जाएगी।

सम्बंधित खबरें


महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयन्ती अकेले मनाई डॉ.मधेपुरी ने

महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयंती पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने शनिवार को मधेपुरा स्थित अपने वृंदावन निवास में कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के तहत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

मानवता के कल्याण के लिए हमें जितना भी कष्ट उठाना पड़े….. सभी कार्यों का परित्याग कर घर के अंदर ही रहना पड़े….. हम सभी वैसा ही करें। प्रशासन एवं चिकित्सकों द्वारा निर्धारित जो भी नियम बताए गए हैं उसका पालन करें। इसके अतिरिक्त हम जितना दान कर सकते हैं- देश के लिए… देश में रहने वाले गरीब मजदूर-किसान के लिए तथा पशु-पक्षी के लिए… उतना भर दान हर कोई अवश्य करें। पर सेवा और पर उपकार में हम सब प्रतिदिन लगे रहें।

Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.
Samajsevi-Shikshavid Prof.(Dr.)Bhupendra Narayan Madhepuri.

यह भी ध्यान देंगे कि हमारे आस-पास कोई भूखा नहीं सोये… यही आज की तारीख में जोतीबा फुले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा कोरोना वायरस को परास्त करने का सच्चा मार्ग भी।

सम्बंधित खबरें


कोरोना संकट में बिहार के लिए सुकून भरा संकेत

क्या बिहार, क्या भारत, सम्पूर्ण संसार कोरोना वायरस की चपेट में है। लेकिन कोरोना संकट के इस दौर में भी बिहार के लिए एक सुकून भरा संकेत है और वह यह कि यहां एक भी मरीज न तो आईसीयू में भर्ती हुआ है और न ही किसी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखने की नौबत आई है। बस पॉजिटिव मरीज को अलग वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 इलाज के लिए समर्पित एनएमसीएच, पटना में सिर्फ दो पॉजिटिव मरीजों को ही इमरजेंसी वार्ड में रखा गया है।
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आईसीयू में भर्ती न होने या वेंटिलेटर पर नहीं जाने को लेकर भारत सरकार के ट्रॉपिकल डिजीज संस्थान, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप दास का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला, भारत और खासकर बिहार के लोगों में कोरोना-19 के वायरस का जो घातक प्रभाव है, उसका असर नहीं होने का यह कारण हो सकता है कि यहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अमेरिकी और यूरोपियन लोगों से अधिक हो। उनके अनुसार, इसका दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि बिहार के लोगों को बचपन से ही विभिन्न तरह के वायरस से जूझना पड़ता है।
वहीं, दूसरी ओर एनएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ. निर्मल कुमार सिन्हा का मानना है कि बिहार पुराने समय से मलेरिया संक्रमित जोन में रहा है। कोविड-19 के इलाज में अगर कोई दवा कुछ असर कर रही है, तो वह मलेरिया की है। इसी कारण अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मंगा रहा है। चूंकि अमेरिका और यूरोपियन देशों में मलेरिया का कभी असर ही नहीं रहा है, ऐसे में कोविड-19 वायरस का वहीं पर गंभीर अटैक हो रहा है। बिहार में मलेरिया के कारण हो सकता है कि यहां के लोगों में उस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो गई हो। हालांकि दोनों चिकित्सकों ने यह माना कि यह एक शोध का विषय है।

सम्बंधित खबरें


लॉकडाउन में 10 अप्रैल को कैसे ढूंढ निकाला डॉ.मधेपुरी ने…?

कोरोना  के कहर के कारण देश में जो लाॅकडाउन लगाया गया है उससे भले ही देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगी है, लोग कृषि एवं उद्योग के कार्यों से खुद को दूर रखने हेतु विवश होने लगे हैं और अकारण ही मौत को गले भी लगाने लगे हैं, परंतु अब तो कोरोना लोक डाउन के कुछ फायदे भी बताए जाने लगे हैं।

यही कि लाॅकडाउन के चलते रेल एवं रोड पर गाड़ियों के नहीं चलने एवं फैक्ट्रियों के बंद होने से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई जैसे शहरों का प्रदूषण तेजी से घटने लगा है तथा गंगा-यमुना जैसी नदियों का पानी भी साफ होने लगा है। तभी तो दूरदर्शन के सभी चैनलों द्वारा अहर्निश उद्घोषणा होने लगी है-

देश रिचार्ज हो रहा है…. यहाँ का कोना-कोना खड़ा है और इंतजार कर रहा है…. आप घर में रहें, सुरक्षित रहें।

Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri. (File Photo)
Samajsevi-Sahityakar Dr.Bhupendra Madhepuri. (File Photo)

बता दें कि घर में रहने पर लोग जो नहीं सोच पाते थे वो भी सोचने लगे हैं। समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने लोकप्रिय  होम्योपैथ चिकित्सक मित्र डॉ.शमशाद (मरहूम) को याद करते करते यह भी ढूंढ निकालते हैं कि आज 10 अप्रैल है, जो विश्व होम्योपैथ दिवस भी है। डॉ.मधेपुरी ने अपने मित्र डॉ.शमशाद के साथ-साथ  होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन निवासी एवं एमडी डिग्री प्राप्त एलोपैथिक चिकित्सक सैमुअल हैनीमैन को भी याद कर आज अपने निवास पर अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चौधरी के साथ विश्व  होम्योपैथ दिवस मनाया। इस दिवस को इस दंपत्ति ने  होम्योपैथ दवा  आर्सेनिक एल्बम की दो-दो बूंदें लेकर मनाया।

चलते-चलते यह भी बता दें कि घर में रहकर अपनी कर्मभूमि में निरंतर अपने श्रम का खाद डालने में लगे रहते हैं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी। यूँ तो पूर्व में डॉ.मधेपुरी ने इस ऐतिहासिक भूमि को गढ़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी व समाज सुधारक रास बिहारी लाल मंडल, गांधीवादी शिवनंदन प्रसाद मंडल एवं समाजवादी भूपेन्द्र नारायण मंडल की जीवनियाँ सर्वप्रथम  लिखी और समादृत भी हुए। इस लाॅकडाउन में वे खुद को रिचार्ज कर सामाजिक न्याय के प्रणेता बीपी मंडल की अमूल्य जीवनी आरंभ कर दी है।

सम्बंधित खबरें


कोरोना ने भारत के वसुधैव कुटुंबकम को भी जगाया

भारत में लोगों ने कोरोना को किसी युद्ध से कम नहीं माना है। इस युद्ध को लड़ने में सभी एकजुट दिख रहे हैं। विकसित देशों के समक्ष भारत मिसाल पेश करता दिख रहा है। युद्ध काल में पहले भी माताएं और बहनें अपना नाक-कान के आभूषण उतार कर देश के नाम दान करते देखी जाती रही हैं।

बता दें कि आज जहाँ भारत के लोग एकजुट होकर 1 दिन का वेतन दे रहे हैं वहीं हमारे सारे सांसदों ने 30% वेतन कटौती कर कोरोना को भगाने हेतु डोनेट किया है। यह 30% वेतन की कटौती मात्र 1 महीने के लिए नहीं बल्कि 1 वर्ष तक यह कटौती जारी रहेगी। इस बाबत महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि के द्वारा भी 30% वेतन कटौती से कोरोना से लड़ने वाले उपकरणों की खरीदारी की जाएगी।

यह भी बता दें कि प्रत्येक सांसद के क्षेत्रीय विकास मद के 2 वर्षों (20-21 एवं 21-22) के 10-10 करोड़ की राशि को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में आज मंजूरी दी है जबकि पिछले महीने मधेपुरा के एमएलसी ललन कुमार सर्राफ ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास निधि से कोरोना वायरस के रोकथाम एवं इलाज में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न सामग्रियों जिसमें थर्मल स्केनर, मास्क, साबुन-सैनिटाइजर, ग्लब्स, स्प्रे-मशीन, चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन किट के लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए की अनुशंसा एवं सहमति पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रेषित कर दी है। उन्होंने लाॅकडाउन के समय लोगों को अपने घर में रहने की अपील की तथा सबों के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन की कामना की। कई स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों के साथ-साथ जानवरों को भी भोजन उपलब्ध कराने में तत्पर दिखे। कई जगह बंदर और कुत्ता को भी खाना खिलाते हुए देखा गया।

सम्बंधित खबरें


कोरोना के विरुद्ध संकल्प की दीवाली

कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर रविवार, 5 अप्रैल 2020 को बिहार समेत पूरे देश ने एकजुटता दिखाई। शहरों से लेकर गांवों तक करोड़ों लोगों ने रात नौ बजे 9 मिनट तक घरों की लाइट बुझाकर और दीये, मोमबत्ती, टॉर्च और मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर इस महामारी से मुक्ति की दुआ की।

घड़ी में जैसे ही 9 बजे कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों ने कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। खुद प्रधानमंत्री ने दीप जलाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और एक श्लोक साझा किया जो इस प्रकार है:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यो धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोsस्तुते।।

अर्थात् जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य करता है, धन संपदा करता है, ऐसे दीप की रोशनी को मैं नमन करता हूँ।

इधर बिहार में भी रात नौ बजे करोड़ों लोगों ने कोरोना के खिलाफ एकजुटता का शानदार उदाहरण पेश किया। लॉकडाउन से उकताए लोग अपने-अपने घरों के दरवाजे, बालकनी और छतों पर निकल आए। लोगों ने न केवल दीप-मोमबत्ती जलाए बल्कि पटाखे भी फोड़े। लगा जैसे दीवाली आ गई हो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने सरकारी आवास 1, अणे मार्ग में रात नौ बजे 9 मिनट तक दीप जलाकर कोरोना संक्रमण के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। यह एक तरह से सम्पूर्ण बिहार के संकल्प का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और भी मजबूत हुई है। हमें विश्वास है कि देशवासियों की एकजुटता से हम कोरोना से मुक्ति पाने में सफल होंगे।

 

सम्बंधित खबरें


मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 4 अप्रैल 2020 को 1, अणे मार्ग स्थित ‘नेक संवाद’ में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। हम सब आत्मविश्वास बनाए रखें। मुझे पूरा भरोसा है कि सबके सहयोग से हमलोग इस संकट से बाहर आएंगे। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा तथा अनुपम कुमार भी उपस्थित रहे।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की जानकारी मिलते ही हमलोगों ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी थी। 13 मार्च से ही एहतियाती कदम उठाए जाने लगे। ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ पूरे राज्य में जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक लॉकडाउन का निर्णय लिया। उसके दो दिन बाद केन्द्र सरकार ने पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग कोरोना वायरस के संक्रमण को ले पूरी तरह सचेत हैं। गांव के लोग भी बाहर से आने वाले लोगों को अलग रखने में सहयोग दे रहे हैं। सभी जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग मिल रहा है। जो लोग भी बिहार के बाहर से आए हैं उनकी सघन स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएमसीएच, पटना को कोविड-19 के ट्रीटमेंट के लिए विशेष अस्पताल के रूप में चिह्नित किया गया है। वहां काम करने वाले चिकित्सकों, नर्सों और पारा मेडिकल स्टाफ को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमलोगों को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि अन्य बीमारियों के इलाज को ले लोगों को असुविधा नहीं हो। इसके लिए अन्य अस्पतालों को भी कार्यरत करना होगा। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की सुविधा के लिए हर जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी मुख्यमंत्री को अद्यतन स्थिति की जानकारी दी और सरकार के स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। जो चिकित्सक इस दौरान मौजूद रहे, वे हैं डॉ. एसएन आर्या, डॉ. एए हई, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. सत्येन्द्र नारायण सिंह, डॉ. हेमंत शाह, डब्ल्यूएचओ के डॉ. बीपी सुब्रह्मण्यम, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार दास, डॉ. विजय कुमार गुप्ता, एम्स के निदेशक डॉ. पीके सिंह, आईजीआईअमएस के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास एवं डॉ. एसके शाही।

सम्बंधित खबरें