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राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली के लिए 12 मई से एक स्पेशल ट्रेन का परिचालन प्रारंभ

कोविड- 19 के कहर के कारण लगभग 2 महीने से भारत में ट्रेन और प्लेन का परिचालन बंद है। संपूर्ण भारत लाॅक डाउन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाॅकडाउन-3 के दरमियान वैश्विक आर्थिक मंदी एवं मजदूरों के वापसी के मद्देनजर 12 मई 2020 से 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को स्वीकृति दे दी है।

बता दें कि यह सभी ट्रेनें नई दिल्ली स्टेशन से स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाई जाएंगी जो पटना, हावड़ा, डिब्रूगढ़, अगरतला, बिलासपुर, राँची, मडगांव, गोवा, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मूतवी को जोड़ेगी।

यह भी जान लें कि पूर्व मध्य रेल द्वारा राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली एवं वापसी के लिए प्रतिदिन एक स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। राजेंद्र नगर टर्मिनल से 12 मई से एक स्पेशल ट्रेन नंबर 02309 संध्या 7:20 बजे खुलेगी और दूसरे दिन प्रातः 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। पुनः वापसी में ट्रेन नंबर 02310 नई दिल्ली स्टेशन से 13 मई को संध्या 5:15 बजे खुलेगी और दूसरे दिन प्रातः 5:30 बजे राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुंचेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस स्पेशल ट्रेन में वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के 09, द्वितीय श्रेणी के 07 एवं प्रथम श्रेणी के 2 कोच लगेंगे। अग्रिम आरक्षण अवधि फिलहाल 7 दिन रखा गया है। स्टेशन के बुकिंग काउंटर अभी बंद रहेंगे। प्लेटफार्म टिकट भी जारी नहीं की जाएगी। यात्री खाने-पीने की सामग्री अपने साथ लेकर चलेंगे। सभी डिब्बे वातानुकूलित होंगे परंतु रेल द्वारा कंबल नहीं दिया जाएगा। बिना मास्क के यात्रा की अनुमति नहीं होगी। ट्रेन खुलने के समय से डेढ़ घंटे पूर्व आकर स्क्रीनिंग के पश्चात ही सिर्फ उन्हीं यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति होगी जिनमें कोविड-19 के संक्रमण का कोई लक्षण नहीं होगा।

 

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डॉ. नवल के निधन से शोक में डूबा साहित्य-जगत

हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ. नंदकिशोर नवल का मंगलवार रात निधन हो गया। वे कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। 83 वर्षीय डॉ. नवल पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक रह चुके थे। उनका जन्म 2 सितंबर 1937 को वैशाली जिले के चांदपुरा में हुआ था।
डॉ. नवल ने हिन्दी साहित्य को अपनी दर्जनों महत्वपूर्ण पुस्तकों से समृद्ध किया। कविता की मुक्ति, हिन्दी आलोचना का विकास, शताब्दी की कविताएं, समकालीन काव्य-यात्रा, कविता के आर-पार आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं। उन्होंने निराला रचनावली तथा दिनकर रचनावली का संपादन भी किया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. नवल के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके निधन से हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
डॉ. नवल के निधन से साहित्य-जगत जैसे शोक में डूब गया। मधेपुरा के साहित्यप्रेमी भी उनके निधन से मर्माहत हैं। पूर्व सांसद, बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति व दर्जनों पुस्तकों के रचयिता डॉ. आर. के. यादव रवि, कोसी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ एवं मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने संयुक्त शोक-संदेश जारी कर कहा कि डॉ. नंदकिशोर नवल जी ने आजीवन साहित्य की जैसी साधना की उसकी कोई सानी नहीं है। आलोचना के क्षेत्र में उन्होंने जो स्थान बनाया था उसकी भरपाई संभव दिखाई नहीं पड़ती।
जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष व साहित्यकार डॉ. अमरदीप ने कहा कि डॉ. नवल अपनी बात को जिस शैली में और जितनी बेबाकी से रखते थे उसके लिए वे सदैव याद किए जाएंगे और उनका रचा वांग्मय आने वाली कई पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।

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कोरोना की धमकी से फिलहाल मुक्ति नहीं, बरतें सावधानियाँ

कोरोना की धमकियों से हाल-फिलहाल दुनिया मुक्त नहीं होने जा रही है। जीवन और जगत पर ब्रेक लग गया है। कोरोना के कारण कारागृह में कब तक बंद रहेगी दुनिया। इन सावधानियों के साथ जीवन को आगे बढ़ाएं-

1.शाकाहारी भोजन पसंद करें और इम्यूनिटी बढ़ाएं ! 2.प्रत्येक गुजर रहे सप्ताह में विशेष सावधानियां रखें ! 3.अनावश्यक मीटिंग को नकारें और जिसमें जाना आवश्यक हो तो मास्क लगाएं एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें। 4. मीटिंग में  रुमाल, घड़ी, अंगूठी और बेल्ट आदि पहनकर नहीं जाएं। संभव हो तो सैनिटाइजर एवं टिशू पेपर को साथ रखें तथा आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें। 5. सैैलून या पार्लर से आने के बाद भी सर्वाधिक सावधानियों का ध्यान रखें…. संभव हो तो ब्लेड, तौलिया, कंघी-कैची … आदि अपना ही इस्तेमाल करें। 6.सालभर सिनेमा हॉल, मॉल, भीड़ भरी जगहों पर या पार्टियों में ना जाएं। 7. 1 साल तक घर से बाहर खाना ना खाएं एवं उत्सवों में अनावश्यक ना जाएं। 8.अनावश्यक की यात्रा ना करें 1 वर्ष और विदेश यात्रा पर न जाएं 2 वर्षों तक।

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आधार और खाता नहीं होने पर भी मिलेगी सहायता राशि

नीतीश सरकार ने राज्य के 56 लाख 62 हजार राशन कार्डधारकों को बड़ी राहत दी है। ऐसे व्यक्ति जिनका ना आधार नंबर है ना बैंक खाता, उन्हें भी एक-एक हजार रुपए जल्द मिलेंगे। कोरोना सहायता राशि से जो अब तक वंचित हैं, उन्हें कोरोना सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नया तरीका अपनाने जा रही है। इसके लिए नियम में बदलाव करते हुए डीएम के स्तर पर सहायता राशि देने का फैसला किया गया है।
ध्यातव्य है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में राज्य में एक करोड़ 68 लाख परिवार आते हैं। इनमें 14 लाख 69 हजार ऐसे राशन कार्डधारक हैं जिनका ना आधार नंबर मिल पा रहा है ना खाता नंबर। ऐसे परिवारों के लिए नियम में बदलाव करते हुए डीएम को सहायता राशि देने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के जरिये पीडीएस दुकानदारों द्वारा ऐसे कार्डधारकों की सूची तैयार कराई जा रही है। यह सूची जिलाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
इसके अतिरिक्त बिहार में 41 लाख 93 हजार ऐसे राशन कार्डधारक हैं जिनका बैंक खाता आधार नंबर से लिंक नहीं रहने और बैंक खाता और राशन कार्ड में दर्ज नाम में भिन्नता के चलते राशि भेजने में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे लाभुकों के नाम को ठीक कराया जा रहा है ताकि डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जा सके। अब तक नौ लाख राशन कार्डधारकों के बैंक खाते में नाम की भिन्नता को ठीक करा लिया गया है। अब उन्हें आधार नंबर से लिंक कराया जा रहा है। बता दें कि कागज दुरुस्त रखने वाले एक करोड़ 11 लाख से ज्यादा राशन कार्डधारकों को अप्रैल की सहायता राशि भेजी जा चुकी है।

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अब कोरोना से क्यों डरना ?

2020 के आरंभ से ही सारे विश्व में कोरोना के कहर के कारण अमेरिका, इटली, स्पेन… आदि जैसे देशों में भी कोहराम मचा है। विश्व का कदाचित कोई देश नहीं जो कोरोना से युद्ध नहीं लड़ रहा हो। अमेरिका में कोरोना वायरस के चलते मरने वालों की संख्या तेजी से लाख छूने ही वाली है।

बता दें कि भारत में अब तक 60 हजार के लगभग संक्रमित हैं और 2 हजार  के पार लोगों की मौत हो चुकी है। लाॅकडाउन- 3 भी समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोना को महामारी घोषित कर दिया गया है… जबकि बहुत सारे देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजरने लगा है। ट्रेन से लेकर प्लेन तक अब और कितने दिनों तक बंद रखा जाएगा। संभव है अब जनहित व देशहित में सब कुछ धीरे-धीरे नॉर्मल स्थिति में लाए जाएं ताकि आर्थिक मंदी से भी निपटा जाए।

बता दें कि ऐसी परिस्थिति में भले ही लाॅकडाउन-3 के बाद कुछ जिलों में लाॅकडाउन समाप्त हो जाए फिर भी प्रत्येक व्यक्ति को ये सावधानियाँ बरतना आवश्यक है। इन्हें आप अपने दिनचर्या में समाहित कर लें। लाॅकडाउन हो या ना हो फिर भी अगले 6 से 12 महीने तक ये सावधानियाँ अति आवश्यक हैं- बस हमेशा याद रखें-

1.मास्क 2.हैंड सेनीटाइजर 3.सोशल डिस्टेंसिंग 4.बिना गए काम नहीं हो तभी बाहर जाएं 5.बाहर से आते ही हाथ -पैर धोकर ही घर में प्रवेश करें 6.यदि ऐसा लगे कि किसी संदिग्ध के संपर्क में आ गए हैं तो पूरा स्नान करें, भाप लें तथा गर्म काढ़ा पियें 7.जूते भी बाहर रखें 8.बेल्ट, अंगूठी, घड़ी, रुमाल का इस्तेमाल नहीं करें 9.सैनिटाइजर और टिश्यू पेपर साथ में रखें और जब जरूरी समझें तब इस्तेमाल करें। 10.सैलून जाने से बचें, दाढ़ी स्वयं शेव करें और बाल बनाने हेतु नाई को घर पर बुलाएं तो उसे मास्क पहना हो, हाथ सैनिटाइज कराएं तथा कंघी-कैंची-ब्लेड आदि सब समान आपका अपना हो।

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लॉक डाउन में रवीन्द्र नाथ टैगोर की 160वीं जयंती मधेपुरा में इस तरह मनी

मधेपुरा की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन जहां कोरोना संक्रमण के कारण गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की 160वीं जयंती 7 मई को आयोजित नहीं की जा सकी। सम्मेलन के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ के निदेशानुसार सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने लाॅकडाउन के दरमियान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए अपने परिवार के सदस्यों के बीच नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एक सशक्त कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार, चित्रकार के साथ-साथ एक महान शिक्षक रवीन्द्र नाथ टैगोर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-

कि 7 मई के ही दिन 1861 ई. में कोलकाता के देवेंद्र नाथ टैगोर के घर चौदहवीं संतान के रूप में एक बालक रवीन्द्र ने जन्म ग्रहण किया था। उसने 8 वर्ष से लिखना आरंभ किया। उसकी कविता 12 वर्ष में एवं लघु कथा 16 साल की उम्र में प्रकाशित हुई। वर्ष 1910 में उन्होंने गीतांजलि की रचना की जिसे 10 दिसंबर 1913 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान “नोबेल पुरस्कार” पाने वाला पहला भारतीय बने रवीन्द्र नाथ टैगोर।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने पुनः कहा कि 3 देशों के राष्ट्रगान से गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम जुड़ा है। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन…..” और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला….” तो उनकी ही रचनाएं हैं। तीसरा देश श्रीलंका  जिसका राष्ट्रगीत “श्रीलंका मथा….” भी गुरुदेव की कविताओं की प्रेरणा से बना है।

चलते-चलते यह भी कि बचपन में इस नोबेल पुरस्कार विजेता को स्कूल की दीवारें बंधन जैसा लगता था जिसके कारण उन्होंने बड़े होकर शांति निकेतन की स्थापना की। आज दुनिया उसे विश्व भारती यूनिवर्सिटी के नाम से पुकारती है।

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मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की सर्वदलीय बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार, 05 मई को सभी राजनीतिक दल के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सर्वदलीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने कोरोना संकट से मुकाबले के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, जदयू के बिजेन्द्र प्रसाद यादव, भाजपा के प्रेम कुमार, हम के जीतन राम मांझी, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी, कांग्रेस के सदानंद सिंह, भाकपा माले के महबूब आलम एवं लोजपा के राजू तिवारी शामिल रहे। इन नेताओं के अलावे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे।

All Party Meet through Video Confrencing.
All Party Meet through Video Confrencing.

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा कोरोना संकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों व किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में बाहर से आने वाले लोगों के कारण कोरोना संक्रमण का फैलाव ज्यादा हुआ। बाहर से आने वाले लोगों के कॉन्टैक्ट्स से भी कोरोना संक्रमण की चेन बनी, जिसे तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने निर्देश दिया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों में जिला प्रशासन संबंधित विधायकों से भी सुझाव लें। विधायकों व राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बैठक में विपक्ष से आग्रह किया कि वे केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से बैंकों के जरिए गरीबों को दी जा रही 12162 करोड़ की सहायता राशि व खाद्यान्नों के वितरण में सहयोग करें। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार, राहत और बचाव कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सेवा ले। उनके सुझाव का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को जवाबदेही देने का आश्वासन दिया। हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने राज्य सरकार को एक अलग पोर्टल बनाने का सुझाव दिया, जिस पर किसी भी राज्य में फंसे बिहारी श्रमिक अपना निबंधन करा सकें।

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कोरोना के कहर के कारण माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई भी बंद की नेपाल ने

कोरोना वायरस के कोहराम से चिंता की लहर जब यूरोपीय देशों में उठी तो आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। रोम के चर्च में जहां प्रार्थना पर रोक लगा दी गई वहीं कावा में सामूहिक नमाज अता करने पर प्रतिबंध…. या फिर काशी के मंदिरों में ताले ही लगा दिए गए। सभी प्रकार के वाहनों से लेकर सरकारी व निजी विमानों के परिचालन पर आज तक रोक लगी हुई है।

क्यों न लगे रोक… जबकि लाखों-लाख लोग कोरोना की चपेट में दम तोड़ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने तो इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। सारा विश्व कोरोना के खिलाफ युद्ध कर रहा है। सारे विश्व की गति ठहर सी गई है। स्कूल-कालेज, कोर्ट-कचहरी और बाजार सबके सब बंद हैं। सभी देश घर के अंदर सिमट गया है।

यह भी जानिए कि कोरोना का असर लोगों तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि उसके  बंद के घेरे में गिरिराज हिमालय के माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई भी आ गई है। नेपाल ने भी कोरोना संक्रमण के डर से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई बंद कर दी है। नेपाल सरकार के पर्यटन मंत्री ने घोषणा कर दी है कि माउंट एवरेस्ट सहित पर्वतराज हिमालय की अन्य चोटियों की चढ़ाई भी वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दी गई है। मतलब यही कि इस घोषणा के अनुसार मार्च से मई तक फिलहाल किसी प्रकार का पर्वतारोहण नहीं होगा। इससे नेपाल सरकार के पर्यटन विभाग को लाखों-लाख  डॉलर आय का नुकसान होगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोरोना की चोट सहन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।

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पायें इंटर उत्तीर्ण अविवाहिता के लिए सीएम कन्या योजना के 10 हजार, दें सही जानकारी

नि:संदेह आज की तारीख में दुनिया पर है भारी… कोरोना की महामारी। भले ही भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या आज 40 हजार के पार और मौतों की संख्या 13 सौ के पार हो गई है, परंतु सृजन के कार्यों को तो समुचित सावधानियों के साथ हमें करते ही रहना है। सृजन का काम रुकने से यह संसार ही निष्प्राण होने लगेगा।

बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेटियों के हौसलों को नई उड़ान देने के लिए इंटरमीडिएट पास अविवाहित छात्राओं को प्रति छात्रा ₹10000 की राशि देने हेतु मुख्यमंत्री कल्याण उत्थान योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष 2019 में 3 लाख 62 हजार 613 छात्राओं को दस-दस हजार रुपये की राशि दी जानी थी जिसमें सही जानकारी देने पर कुल 3 लाख 31 हजार 530 छात्राओं के खाते में राशि चली गई और शेष 30 हजार 883 छात्राओं को उक्त राशि इसलिए नहीं दी जा सकी कि उनके द्वारा दी गई आवश्यक जानकारी या तो नहीं दी गई और यदि दी भी गई तो पूरी की पूरी सही-सही नहीं दी गई।

जानिए कि वैसी बेटियों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआईसी पोर्टल पर सही जानकारी देने हेतु शिक्षा विभाग को एक मौका और देने का निर्देश दिया है। ऐसी छात्राओं के माता-पिता व अभिभावक शीघ्राति शीघ्र एनआईसी पोर्टल पर अपनी बेटियों के बैंक खाता संख्या, बैंक शाखा का नाम, आईएफएससी कोड, आधार नंबर तथा अविवाहित होने की विधिवत जानकारी प्रेषित करें और मुख्यमंत्री कल्याण उत्थान योजना के तहत 10 हजार  की राशि प्राप्त करें तथा बेटियों के सपनों को पंख लगाकर ऊंची उड़ान का अवसर प्रदान करें।

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प्रवासियों के आने का पूरा खर्च वहन करेगी बिहार सरकार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार, 4 मई को एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जो भी प्रवासी बिहारी लौट कर आ रहे हैं, उनके आने का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले मजदूरों एवं अन्य लोगों को 21 दिनों के क्वारंटाइन के बाद बिहार सरकार किराया खर्च के अलावा और 500 रु. एवं न्यूनतम 1000 रु. देगी। वहीं, अपने संदेश में कोटा से आने वाले छात्र-छात्राओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें बिहार आने कि लिए रेल भाड़ा नहीं देना होगा। इसके लिए बिहार सरकार रेलवे को पैसा दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी बिहारी रेल से जिस किसी भी स्टेशन पर उतरेंगे, वहां से उन्हें उनके प्रखंड मुख्यालय स्थित क्वारंटाइन सेंटर पर राज्य सरकार भेजेगी। इन क्वारंटाइन सेंटर्स पर बाहर से आने वाले मजदूरों एवं अन्य लोगों को 21 दिनों के क्वारंटाइन के बाद किराया खर्च के अलावा और 500 रु. एवं न्यूतम 1000 रु. राज्य सरकार द्वारा दिए जाएंगे।
ध्यातव्य है कि प्रखंड क्वारंटाइन सेंटर्स में भोजन, आवासन, चिकित्सा से लेकर देख-रेख के सारे इंतजाम किए गए हैं। लोगों के स्नान, शौचालय, शुद्ध पेयजल आदि की पूरी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार आने वाले सभी प्रवासी मजदूर क्वारंटाइन सेंटर में 21 दिनों तक रहेंगे और जब वहां से 21 दिनों के बाद निकलेंगे तो वे जहां जिस राज्य में फंसे हुए थे, वहां से यहां तक आने में उनका जितना भी पैसा लगा हो, चाहे वो रेल का भाड़ा हो या अन्य प्रकार से उनका कोई पैसा लगा हो, वो पैसा सरकार देगी। यही नहीं, उस राशि के अलावे सरकार और 500 रु. देगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहर से आए हुए हर व्यक्ति को न्यूनतम 1000 रु. दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हमलोग जो भी काम करते हैं लोगों के हित में करते हैं और चाहते हैं कि ये काम हो। उन्होंने कहा, हमने सोचा था कि लोगों को लाभ मिलता तो वे अपने आप बताते लेकिन इधर काफी बयानबाजी हो रही है, इसको देखते हुए हमने सोचा कि इन सब बातों की जानकारी साझा करना आवश्यक है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के अधिकांश लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं, यही कारण है कि बिहार को वैसी परेशानी नहीं हो रही जैसी अन्यत्र है। इसके लिए बिहारवासियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पुन: सबलोगों से अपील करूंगा कि कोरोना वायरस से भयभीत होने की जरूरत नहीं, सजग रहने की जरूरत है। हमलोग जरूर उस पर कामयाबी हासिल करेंगे।

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