केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए तीन महीने नि:शुल्क गैस रिफिल की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक तेल कंपनियों के द्वारा इस मद में उज्ज्वला योजना के करीब 7.15 करोड़ लाभार्थियों के खाते में 5606 करोड़ हस्तांतरित किए गए हैं।
ध्यातव्य है कि यह योजना 01 अप्रैल से 30 जून तक के लिए प्रभावी है। इसके तहत कंपनियां लाभार्थी के खाते में उसके पैकेज के हिसाब से 14.2 किलो या 05 किलो के सिलेंडर की कीमत के बराबर का एडवांस जमा करा रही हैं। ग्राहक इस पैसे से सिलंडर रिफिल करा सकेंगे।
कोराना संकट को देखते हुए सभी कंपनियां हर लिहाज से कमर कस चुकी हैं। कंपनियां सुनिश्चित कर रही हैं कि डिलीवरी के लिए किसी ग्राहक को दो दिन से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े। लॉकडाउन के बाद से देश में हर दिन रोजाना करीब 60 लाख सिलेंडर रिफिल किए जा रहे हैं।
यह भी जानें कि आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां पहले ही डिलीवरी ब्वाय समेत सप्लाई चेन के विभिन्न चरणों में कार्यरत अपने कर्मचारियों के लिए 05 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा कर चुकी हैं। किसी भी कर्मचारी की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु की स्थिति में यह राशि उनके परिजनों को दी जाएगी।
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महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयन्ती अकेले मनाई डॉ.मधेपुरी ने
महात्मा जोतीबा फुले की 193वीं जयंती पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने शनिवार को मधेपुरा स्थित अपने वृंदावन निवास में कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के तहत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा-
मानवता के कल्याण के लिए हमें जितना भी कष्ट उठाना पड़े….. सभी कार्यों का परित्याग कर घर के अंदर ही रहना पड़े….. हम सभी वैसा ही करें। प्रशासन एवं चिकित्सकों द्वारा निर्धारित जो भी नियम बताए गए हैं उसका पालन करें। इसके अतिरिक्त हम जितना दान कर सकते हैं- देश के लिए… देश में रहने वाले गरीब मजदूर-किसान के लिए तथा पशु-पक्षी के लिए… उतना भर दान हर कोई अवश्य करें। पर सेवा और पर उपकार में हम सब प्रतिदिन लगे रहें।

यह भी ध्यान देंगे कि हमारे आस-पास कोई भूखा नहीं सोये… यही आज की तारीख में जोतीबा फुले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी तथा कोरोना वायरस को परास्त करने का सच्चा मार्ग भी।
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कोरोना संकट में बिहार के लिए सुकून भरा संकेत
क्या बिहार, क्या भारत, सम्पूर्ण संसार कोरोना वायरस की चपेट में है। लेकिन कोरोना संकट के इस दौर में भी बिहार के लिए एक सुकून भरा संकेत है और वह यह कि यहां एक भी मरीज न तो आईसीयू में भर्ती हुआ है और न ही किसी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखने की नौबत आई है। बस पॉजिटिव मरीज को अलग वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड-19 इलाज के लिए समर्पित एनएमसीएच, पटना में सिर्फ दो पॉजिटिव मरीजों को ही इमरजेंसी वार्ड में रखा गया है।
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आईसीयू में भर्ती न होने या वेंटिलेटर पर नहीं जाने को लेकर भारत सरकार के ट्रॉपिकल डिजीज संस्थान, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप दास का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला, भारत और खासकर बिहार के लोगों में कोरोना-19 के वायरस का जो घातक प्रभाव है, उसका असर नहीं होने का यह कारण हो सकता है कि यहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अमेरिकी और यूरोपियन लोगों से अधिक हो। उनके अनुसार, इसका दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि बिहार के लोगों को बचपन से ही विभिन्न तरह के वायरस से जूझना पड़ता है।
वहीं, दूसरी ओर एनएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ. निर्मल कुमार सिन्हा का मानना है कि बिहार पुराने समय से मलेरिया संक्रमित जोन में रहा है। कोविड-19 के इलाज में अगर कोई दवा कुछ असर कर रही है, तो वह मलेरिया की है। इसी कारण अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मंगा रहा है। चूंकि अमेरिका और यूरोपियन देशों में मलेरिया का कभी असर ही नहीं रहा है, ऐसे में कोविड-19 वायरस का वहीं पर गंभीर अटैक हो रहा है। बिहार में मलेरिया के कारण हो सकता है कि यहां के लोगों में उस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो गई हो। हालांकि दोनों चिकित्सकों ने यह माना कि यह एक शोध का विषय है।
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लॉकडाउन में 10 अप्रैल को कैसे ढूंढ निकाला डॉ.मधेपुरी ने…?
कोरोना के कहर के कारण देश में जो लाॅकडाउन लगाया गया है उससे भले ही देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगी है, लोग कृषि एवं उद्योग के कार्यों से खुद को दूर रखने हेतु विवश होने लगे हैं और अकारण ही मौत को गले भी लगाने लगे हैं, परंतु अब तो कोरोना लोक डाउन के कुछ फायदे भी बताए जाने लगे हैं।
यही कि लाॅकडाउन के चलते रेल एवं रोड पर गाड़ियों के नहीं चलने एवं फैक्ट्रियों के बंद होने से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई जैसे शहरों का प्रदूषण तेजी से घटने लगा है तथा गंगा-यमुना जैसी नदियों का पानी भी साफ होने लगा है। तभी तो दूरदर्शन के सभी चैनलों द्वारा अहर्निश उद्घोषणा होने लगी है-
देश रिचार्ज हो रहा है…. यहाँ का कोना-कोना खड़ा है और इंतजार कर रहा है…. आप घर में रहें, सुरक्षित रहें।

बता दें कि घर में रहने पर लोग जो नहीं सोच पाते थे वो भी सोचने लगे हैं। समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने लोकप्रिय होम्योपैथ चिकित्सक मित्र डॉ.शमशाद (मरहूम) को याद करते करते यह भी ढूंढ निकालते हैं कि आज 10 अप्रैल है, जो विश्व होम्योपैथ दिवस भी है। डॉ.मधेपुरी ने अपने मित्र डॉ.शमशाद के साथ-साथ होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन निवासी एवं एमडी डिग्री प्राप्त एलोपैथिक चिकित्सक सैमुअल हैनीमैन को भी याद कर आज अपने निवास पर अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेणु चौधरी के साथ विश्व होम्योपैथ दिवस मनाया। इस दिवस को इस दंपत्ति ने होम्योपैथ दवा आर्सेनिक एल्बम की दो-दो बूंदें लेकर मनाया।
चलते-चलते यह भी बता दें कि घर में रहकर अपनी कर्मभूमि में निरंतर अपने श्रम का खाद डालने में लगे रहते हैं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी। यूँ तो पूर्व में डॉ.मधेपुरी ने इस ऐतिहासिक भूमि को गढ़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी व समाज सुधारक रास बिहारी लाल मंडल, गांधीवादी शिवनंदन प्रसाद मंडल एवं समाजवादी भूपेन्द्र नारायण मंडल की जीवनियाँ सर्वप्रथम लिखी और समादृत भी हुए। इस लाॅकडाउन में वे खुद को रिचार्ज कर सामाजिक न्याय के प्रणेता बीपी मंडल की अमूल्य जीवनी आरंभ कर दी है।
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एक इंच वाला दुनिया का सबसे छोटा लैपटॉप
अमेरिकी आईटी इंजीनियर पॉल क्लिंगर ने दुनिया का सबसे छोटा लैपटॉप बनाया है जिसका स्क्रीन मात्र 1 इंच की है। पॉल क्लिंगर ने इसे मात्र 7 दिनों में ही तैयार किया है जिसकी कीमत माात्र $85 यानी लगभग 6 हजार रूपया है। उपयोगकर्ता इस लैपटॉप पर गेम भी खेल सकते हैं। जिसका डिस्प्ले .96 सेंटीमीटर का है।
बता दे की आईटी इंजीनियर पॉल क्लिंगर के अनुसार इस लैपटॉप का नाम उन्होंने ‘थिंक टिनी’ रखा है। यह लैपटॉप आईबीएम के थिंकपैड का छोटा रूप है। थिंक टिनी जैसे सबसे छोटे लैपटॉप में थिंक पैैड की तरह कीपैड के बीच में लाल रंग का ट्रैक प्वाइंट स्टाइल कर्सर कंट्रोलर भी लगाया गया है। इस मिनी लैपटॉप में 300 एमएएच की बैटरी लगाई जाती है जिस बैटरी को चार्ज भी किया जा सकता है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि इस मिनी लैपटॉप में एक 14- पिन एटी टिनी 1614 माइक्रोकंट्रोलर (20 मेगा हर्ज) है जो एक छोटे 128×64 पिक्सेल ओएलईडी डिस्प्ले से जुड़ा है और इसमें 7 लाइनों वाला बोर्ड भी है।
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‘वर्ल्ड हेल्थ डे’ को कोरोना युग में यूँ याद किया डॉ.मधेपुरी ने
जब लॉकडाउन के दरमियान कोरोना वायरस के उत्पात की व्यथा-कथा टेलीविजन में देखते-देखते, अखबारों में पढ़ते-पढ़ते तथा घर में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते-करते दिमाग थकने लगा तो समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने स्वामी रामदेव द्वारा दिए गए निर्देशानुसार इम्यूनिटी बढ़ाने हेतु योगासन-प्राणायाम के साथ-साथ व्यायाम भी करना शुरू कर दिया।
इसी क्रम में डॉ.मधेपुरी को अपना विद्यार्थी जीवन याद आया और उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में उन्हें टीएनबी कॉलेज भागलपुर के तत्कालीन एथलेटिक प्रसिडेंट प्रो.एस ए नसर द्वारा शरीर सौष्ठव (Muscle Control) प्रदर्शित करने तथा मुंह से फूंक-फूंक कर फुटबॉल के ब्लैडर को फोड़ने हेतु पुरस्कृत भी किया गया था।
चलते-चलते यह भी बता दें कि डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को “विश्व स्वास्थ्य दिवस” मनाया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम भी किए जाते हैं। परंतु, इस बार तो कोरोना के कहर के कारण भारत के साथ-साथ विश्व के सर्वाधिक देशों ने 15 से 30 दिनों का लाॅकडाउन घोषित कर दिया है। तभी तो “Health is Wealth” का संदेश बच्चों एवं बड़ों तक पहुंचाने के लिए डॉ.मधेपुरी ने अपने निवास ‘वृंदावन’ में अकेले “विश्व स्वास्थ्य दिवस” मनाया जबकि 10 वर्ष पूर्व ही लगातार दो बार उनका बायपास सर्जरी किया जा चुका है। संकल्प और संयम से कुछ भी जीता जा सकता है।
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जहाँ गरजती थी कभी बंदूकें, वहाँ अब पेंटिंग व पढ़ाई से संवरने लगा है जीवन
मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड के टेंगराहा-सिकयाहा में जहाँ कभी गरजती थीं बंदूकें वहीं सिकयाहा के आदित्य आनंद के यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन में कम्पीट करने के बाद से गांव में सजीव बदलाव का श्रीगणेश हो गया है। जहां की गली-सड़क पर गरजती थी बंदूकें वहीं अब कूची से निकले रंग से मधुबनी पेंटिंग बनने लगी है और जीवन सँवरने लगा है। गांव की माली हालत में सुधार होने लगा है और आर्थिक समृद्धि आने लगी है।

यह भी जानिए कि यही वह क्षेत्र है जहां हजारों एकड़ बंजर भूमि है। जहां कभी सैकड़ों एकड़ जमीन जंगल जैसे दृष्टिगोचर होते थे। लोग बंदूके थामे रहते थे। कई बार हथियार समर्पण कराए गए। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर के प्रयास से हथियारबंद लोगों ने आत्मसमर्पण यह सुनकर किया कि सरकार आपके रोजगार का बंदोबस्त करेगी, परंतु ऐसा नहीं हो पाया।
बता दें कि 70 के दशक में उस इलाके में भ्रमण करने के अनुभवों को समाजसेवी प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने मधेपुरा के एक सांसद के समक्ष रखते हुए यही कहा था कि यदि केंद्रीय सरकारी सरकार की ‘बंजर भूमि सुधार आयोग’ की टीम को लाकर इस बंजर भूमि को सुधारा जाए, जिसके बीचों-बीच एक नदी बहती है, तो यह इलाका उपजाऊ बन जाएगा और लोग बंदूक की जगह हल चलाने लगेंगे… लेकिन वैसा नहीं हो पाया।
मालूम हो कि टेंगराहा-सिकयाहा की गूंजती बंदूकों को शांत करने के लिए 2006 में सूबे बिहार के सीएम नीतीश कुमार के पहल पर 60 लोगों को आत्मसमर्पण कराकर मुख्यधारा में लाया गया। 26 भूमिहीनों को जमीन भी दी गई तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी… फिर भी माली हालात नहीं सुधर पाई।
डीएम बनने की तमन्ना लिए गांव के स्कूल में पढ़ने वाला उसी धरती का बेटा आदित्य आनंद जब यूपीएससी कम्पीट कर दिखाया तो बच्चे पढ़ने लगे और अचानक गांव में बदलाव की हवा भी बहने लगी। आज गांव की महिलाएं मधुबनी पेंटिंग एवं डगरा निर्माण करने लगी है। वर्तमान में सौ से अधिक महिलाएं एक-एक पेंटिंग 1200 से 1500 तक में बेच लेती है। हाल में जिला प्रशासन की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया है।
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कोरोना ने भारत के वसुधैव कुटुंबकम को भी जगाया
भारत में लोगों ने कोरोना को किसी युद्ध से कम नहीं माना है। इस युद्ध को लड़ने में सभी एकजुट दिख रहे हैं। विकसित देशों के समक्ष भारत मिसाल पेश करता दिख रहा है। युद्ध काल में पहले भी माताएं और बहनें अपना नाक-कान के आभूषण उतार कर देश के नाम दान करते देखी जाती रही हैं।
बता दें कि आज जहाँ भारत के लोग एकजुट होकर 1 दिन का वेतन दे रहे हैं वहीं हमारे सारे सांसदों ने 30% वेतन कटौती कर कोरोना को भगाने हेतु डोनेट किया है। यह 30% वेतन की कटौती मात्र 1 महीने के लिए नहीं बल्कि 1 वर्ष तक यह कटौती जारी रहेगी। इस बाबत महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि के द्वारा भी 30% वेतन कटौती से कोरोना से लड़ने वाले उपकरणों की खरीदारी की जाएगी।
यह भी बता दें कि प्रत्येक सांसद के क्षेत्रीय विकास मद के 2 वर्षों (20-21 एवं 21-22) के 10-10 करोड़ की राशि को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में आज मंजूरी दी है जबकि पिछले महीने मधेपुरा के एमएलसी ललन कुमार सर्राफ ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास निधि से कोरोना वायरस के रोकथाम एवं इलाज में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न सामग्रियों जिसमें थर्मल स्केनर, मास्क, साबुन-सैनिटाइजर, ग्लब्स, स्प्रे-मशीन, चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन किट के लिए 3 करोड़ 25 लाख रुपए की अनुशंसा एवं सहमति पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रेषित कर दी है। उन्होंने लाॅकडाउन के समय लोगों को अपने घर में रहने की अपील की तथा सबों के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन की कामना की। कई स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों के साथ-साथ जानवरों को भी भोजन उपलब्ध कराने में तत्पर दिखे। कई जगह बंदर और कुत्ता को भी खाना खिलाते हुए देखा गया।
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कोरोना के विरुद्ध संकल्प की दीवाली
कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर रविवार, 5 अप्रैल 2020 को बिहार समेत पूरे देश ने एकजुटता दिखाई। शहरों से लेकर गांवों तक करोड़ों लोगों ने रात नौ बजे 9 मिनट तक घरों की लाइट बुझाकर और दीये, मोमबत्ती, टॉर्च और मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर इस महामारी से मुक्ति की दुआ की।
घड़ी में जैसे ही 9 बजे कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों ने कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। खुद प्रधानमंत्री ने दीप जलाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और एक श्लोक साझा किया जो इस प्रकार है:
शुभं करोति कल्याणमारोग्यो धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोsस्तुते।।
अर्थात् जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य करता है, धन संपदा करता है, ऐसे दीप की रोशनी को मैं नमन करता हूँ।
इधर बिहार में भी रात नौ बजे करोड़ों लोगों ने कोरोना के खिलाफ एकजुटता का शानदार उदाहरण पेश किया। लॉकडाउन से उकताए लोग अपने-अपने घरों के दरवाजे, बालकनी और छतों पर निकल आए। लोगों ने न केवल दीप-मोमबत्ती जलाए बल्कि पटाखे भी फोड़े। लगा जैसे दीवाली आ गई हो।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने सरकारी आवास 1, अणे मार्ग में रात नौ बजे 9 मिनट तक दीप जलाकर कोरोना संक्रमण के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। यह एक तरह से सम्पूर्ण बिहार के संकल्प का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और भी मजबूत हुई है। हमें विश्वास है कि देशवासियों की एकजुटता से हम कोरोना से मुक्ति पाने में सफल होंगे।
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मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार, 4 अप्रैल 2020 को 1, अणे मार्ग स्थित ‘नेक संवाद’ में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। हम सब आत्मविश्वास बनाए रखें। मुझे पूरा भरोसा है कि सबके सहयोग से हमलोग इस संकट से बाहर आएंगे। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा तथा अनुपम कुमार भी उपस्थित रहे।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की जानकारी मिलते ही हमलोगों ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी थी। 13 मार्च से ही एहतियाती कदम उठाए जाने लगे। ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ पूरे राज्य में जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक लॉकडाउन का निर्णय लिया। उसके दो दिन बाद केन्द्र सरकार ने पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग कोरोना वायरस के संक्रमण को ले पूरी तरह सचेत हैं। गांव के लोग भी बाहर से आने वाले लोगों को अलग रखने में सहयोग दे रहे हैं। सभी जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग मिल रहा है। जो लोग भी बिहार के बाहर से आए हैं उनकी सघन स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएमसीएच, पटना को कोविड-19 के ट्रीटमेंट के लिए विशेष अस्पताल के रूप में चिह्नित किया गया है। वहां काम करने वाले चिकित्सकों, नर्सों और पारा मेडिकल स्टाफ को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमलोगों को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि अन्य बीमारियों के इलाज को ले लोगों को असुविधा नहीं हो। इसके लिए अन्य अस्पतालों को भी कार्यरत करना होगा। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की सुविधा के लिए हर जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी मुख्यमंत्री को अद्यतन स्थिति की जानकारी दी और सरकार के स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। जो चिकित्सक इस दौरान मौजूद रहे, वे हैं डॉ. एसएन आर्या, डॉ. एए हई, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. सत्येन्द्र नारायण सिंह, डॉ. हेमंत शाह, डब्ल्यूएचओ के डॉ. बीपी सुब्रह्मण्यम, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार दास, डॉ. विजय कुमार गुप्ता, एम्स के निदेशक डॉ. पीके सिंह, आईजीआईअमएस के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास एवं डॉ. एसके शाही।



























