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प्रेमचन्द जयंती पर एकल काव्य पाठ

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मलेन संस्थान के ‘अम्बिका सभागार’ में 31 जुलाई (रविवार) को महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर सुकवि अरविंद ठाकुर (सुपौल) द्वारा समकालीन प्रेम कविताओं का एकल पाठ किया गया |

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की, आशीर्वचन संस्थापक कुलपति डॉ.रामेन्द्र कुमार यादव रवि एवं प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल ने दिया और अंगवस्त्रम, पाग एवं पुष्प गुच्छ से कवि अरविंद ठाकुर को सम्मानित किया संस्थान के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने |

Sammelan Sachiv Dr.Bhupendra Madhepuri honouring Sukavi Arvind Thakur by presenting Angavastram, Paag and Bouquet at Kaushiki Ambika Sabhagaar Madhepura.
Sammelan Sachiv Dr.Bhupendra Madhepuri honouring Sukavi Arvind Thakur by presenting Angavastram, Paag and Bouquet at Kaushiki Ambika Sabhagaar Madhepura.

यह भी बता दें कि समारोह का श्रीगणेश सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी ने, प्रेमचंद को दिये गये श्रद्धांजलि के दो शब्दों के साथ, सुकवि ठाकुर के जीवनवृत का विस्तार से पाठ किया | और सम्मेलन के अध्यक्ष श्री शलम ने कोसी अंचल के स्थापित कवि बलेन्द्र नारायण ठाकुर ‘विप्लव’ को स्मरण करते हुए कहा कि सुकवि अरविंद ठाकुर ने फिलहाल साहित्य के विभिन्न विधाओं में खुद को योग्य पिता का योग्यतम पुत्र साबित कर लिया है |

भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.रवि ने प्रेमचंद को याद करते हुए समयाभाव के कारण ‘गोदान’ के बाबत बस इतना ही कहा कि होरी की विकलता में महाकाव्यत्व की गरिमा है | साथ ही आशीर्वचन के रूप में सुकवि श्री ठाकुर की प्रेम कविताओं को ध्यान मग्न होकर सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेम कविताओं में शब्दों के सटीक चयन के साथ-साथ विचारों के प्रवाह की प्रखर अभिव्यक्ति से ऐसा लगा कि कवि श्री ठाकुर को भोगे हुए यथार्थ के प्रेम चित्रण में महारत हासिल है तभी तो खुली खिड़की भी दीवार बन जाती है |

प्रतिकुलपति डॉ.मंडल व साहित्यकार प्रो.मणिभूषण ने प्रेम-कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि ‘प्रेम’ के साथ ‘विरह’ मिलकर ही जीवन को शास्वत गति प्रदान करता है | सहरसा से आये हास्य कवि केदारनाथ गुप्ता के अतिरिक्त स्थानीय कवि दशरथ प्रसाद सिंह ‘कुलिस’, राजू भैया, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, संतोष कुमार नवल, उल्लास मुखर्जी, मयंक जी, आशीष कुमार मिश्रा, कुमारी रश्मि, राकेश द्विजराज, रतन स्वरूप, किशोर श्रीवास्तव, डॉ.अरुण कुमार आदि ने भी अपनी अपनी कविताओं से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया | डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने कवि गोष्ठी का मंच संचालन किया |

समारोह में व्यापार मंडल के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद प्राणसुखका, तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार ‘सुमित्र’, प्राचार्य डॉ.हरिनंदन यादव, सम्मेलन के आजीवन सदस्य शिव जी साह, नवाचार मंडल के संचालक मो.शहंशाह, पूर्व कुलसचिव प्रो.शचीन्द्र, आचार्य योगेश्वर, जनपथ न्यूज़ टुडे के प्रतिनिधि विकास कुमार, डॉ.अर्जुन कुमार आदि प्रमुखरूप से अंत तक मौजूद रहे |

अंत में सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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प्रेमचंद का ‘गोदान’ समझना हो तो होरी संग जरूरी है धनिया

हर बड़े रचनाकार के साथ मुख्यत: उसकी एक कृति का नाम जुड़ा होता है। वह कृति एक तरह से उस रचनाकार की, उसकी संवेदना, उसके विचार, उसके सम्पूर्ण कृतित्व की प्रतिनिधि, या यूँ कहें, पर्याय हो जाती है। तुलसीदास के साथ ‘रामचरितमानस’, कालिदास के साथ ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’, शेक्सपियर के साथ ‘हैमलेट’, टॉलस्टॉय के साथ ‘कामायनी’, टैगोर के साथ ‘गीतांजली’, प्रसाद के साथ ‘कामायनी’ और प्रेमचंद के साथ ‘गोदान’ का नाम इसी तरह से जुड़ा है। ‘गोदान’ प्रेमचंद की सर्वोत्तम कृति और हिन्दी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्जवलतम प्रकाश-स्तंभ है। सच्चे अर्थों में यह उपन्यास भारतीय ग्राम्यजीवन और कृषि संस्कृति का ‘महाकाव्य’ है जिसका नायक है होरी और धनिया इसकी नायिका।

इसमें कोई दो राय नहीं कि होरी ‘गोदान’ की ‘आत्मा’ है लेकिन प्रेमचंद ने उस ‘आत्मा’ की ‘काया’ धनिया के सहारे ही गढ़ी है। ‘गोदान’ में प्रेमचंद जो होरी के माध्यम से नहीं कह पाए उसे उन्होंने धनिया के द्वारा अभिव्यक्ति दी है। अगर कहा जाय कि धनिया गोदान की ‘पूर्णता’ है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। स्वयं होरी के शब्दों में “धनिया सेवा और त्याग की देवी ; जबान की तेज पर मोम जैसा हृदय ; पैसे-पैसे के पीछे प्राण देने वाली, पर मर्यादारक्षा के लिए अपना सर्वस्व होम कर देने को तैयार” रहने वाली नारी है।

धनिया सच्चे अर्थों में ‘अर्द्धांगिनी’ है। चाहे जो कुछ हो जाय, वह होरी का साथ छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उसमें ना तो होरी जैसी व्यवहारकुशलता है और ना वह लल्लो-चप्पो ही करना जानती है, पर अपने संकल्पित आचरण द्वारा वह होरी की सहायता करती है, उसे डगमगाने से बचाती है, ढाढ़स देती है। हाँ, सुनाती भी खूब है। आवेग में वह कभी-कभी अदूरदर्शितापूर्ण कार्य कर जाती है, पर तत्कालीन सामंती परिवेश में भी वह निर्भीक और निडर है, ये बड़ी बात है। उसमें प्रतिशोध-भावना है, जो होरी में नहीं है, पर कोमल भी वह उतनी ही है। तभी तो किसी की पीड़ा देख उसका आक्रोश दब जाता है।

‘गोदान’ में भारतीय किसान के संपूर्ण जीवन का जीता-जागता चित्र उपस्थित किया गया है। उसकी गर्दन जिस पैर के नीचे दबी है उसे सहलाता, क्लेश और वेदना को झुठलाता,  ‘मरजाद’ की झूठी भावना पर गर्व करता, ऋणग्रस्तता के अभिशाप में पिसता,  तिल-तिल शूलों भरे पथ पर आगे बढ़ता,  भारतीय समाज का मेरुदंड यह किसान कितना विवश और जर्जर हो चुका है, यह गोदान में प्रत्यक्ष देखने को मिलता है। होरी उसी भारतीय किसान का प्रतिनिधि चरित्र है। उसे हम पग-पग पर परिस्थितियों से दबते और समझौतों में ढलते देख सकते हैं लेकिन धनिया ऐसी कतई नहीं। वह जिस बात को ठीक समझती है, उसे जात-बिरादरी, समाज, कानून आदि की परवाह किए बिना करती है। कभी-कभी तो वह अपने आचरण द्वारा गाँव की ‘नाक’ तक रख लेती है।

एक नारी की भाँति धनिया मातृ-भावना और स्नेह से परिपूर्ण है। वह होरी की ऐसी ‘परछाई’ है जो उसकी ‘रिक्तता’ को भर देती है। होरी अगर भारतीय किसान का प्रतीक है तो धनिया कृषक-पत्नी की प्रतिनिधि। सच तो ये है कि धनिया के बिना ना तो किसी ‘होरी’ की परिकल्पना की जा सकती है, ना किसी किसान के घर की और ना ही भारत के ग्रामीण जीवन की। कुल मिलाकर, अगर धनिया नहीं होती तो प्रेमचंद को पूर्णता देनेवाला ‘गोदान’ भी ना होता। अगर होता भी तो वो नहीं होता जो अब है। इस तरह कहना गलत ना होगा कि प्रेमचंद, गोदान और होरी – तीनों की ‘पूर्णता’ है धनिया।

मधेपुरा अबतक के लिए रूपम भारती से साभार

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तेरी उड़ान में कभी विराम न हो…..!

कवि, साहित्यकार, संगीतकार के साथ-साथ बेमिसाल शिक्षक एवं महान वैज्ञानिक डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई, 2015 को तब हुआ जब उन्होंने शिलांग में- “पृथ्वी को रहने लायक कैसे बनाया जाय” विषय पर बोलते हुए अचानक पृथ्वी को ही अलविदा कह दिया |

उसी भारतरत्न डॉ.कलाम की पुण्यतिथि के अवसर पर मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसका विषय था- ‘ग्रामीण क्षेत्र के विकास में तकनीकी शिक्षा का योगदान’ तथा आयोजनकर्ता थे इसी कॉलेज के बी.सी.ए. एवं बी.बी.ए. के छात्रगण एवं बी.सी.ए. के शिक्षक प्रो.संदीप शांडिल्य |

गणमान्यों का परिचय कराते हुए प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार ने छात्र-छात्राओं से कहा कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी करेंगे जिन्होंने महामहिम राष्ट्रपति डॉ.कलाम की जीवनी तो लिखी ही है साथ ही राष्ट्रनिर्माता शिक्षक के रूप में उनका सानिध्य भी पाया है | मुख्य अतिथि उपकुलसचिव डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव व विशिष्ट अतिथि डॉ.शैलेश्वर प्रसाद, प्राचार्य डॉ.पूनम यादव आदि द्वारा उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी व अध्यक्ष डॉ.अशोक कुमार के साथ सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया |

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Bharatratna Dr APJ Abdul Kalam at Madhepura College Madhepura .
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Bharatratna Dr APJ Abdul Kalam at Madhepura College Madhepura .

यह भी बता दें कि सर्वप्रथम डॉ.कलाम के तैलचित्र पर माल्यार्पण करते हुए उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिदिन शाम में रामेश्वरम के गली वाली मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद वह नन्हा बालक कलाम रामेश्वरम की शिव मंदिर की परिक्रमा करता और लगे हाथ समुद्र के किनारे जाकर बालू के ढेर पर बैठकर आकाश में उड़ते पंछियों से यही कहता- ऐ पंछियों ! तेरी उड़ान में कभी विराम नहीं हो तुम झील के पानी की तरह रूकना नहीं….! डॉ.मधेपुरी ने उनके साथ बिताए अविस्मरणीय क्षणों का विस्तार से चर्चा करते हुए छात्रों को ढेर सारे संदेश दिए |

मुख्य अतिथि डॉ.श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डॉ.प्रसाद, प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार एवं प्राचार्या डॉ.पूनम यादव, प्रो.संदीप शांडिल्य ने छात्र-छात्राओं को कलाम के बताए गए मार्ग पर चलने के बहुतेरे संदेश दिये | सबों ने एक स्वर से यही कहा कि जब तक युवजन मानसिक रुप से विकसित नहीं होंगे तब तक गांव- शहर, प्रदेश और देश विकसित नहीं होगा |

सेमिनार में प्रो.विभाष चंद्र, प्रो.मनोज भटनागर, प्रो.मुस्ताक अहमद सहित गरिमा, उर्वशी व अन्य कई छात्र-छात्राओं ने भी अपना उद्गार व्यक्त किया | अंत में डॉ.कलाम की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया |

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जारी है कोसी-गंगा व महानंदा का कहर

कोसी, पूर्णिया और पूर्वी इलाकों में कोसी-गंगा व महानंदा के बढ़ते जलस्तरों के कारण बाढ़ की भयावह स्थिति हो गई है | हर तरफ डूबने से लोगों की मौत हो रही है |

यह भी बता दें कि कोसी में पानी बढ़ने से इंडो-नेपाल सीमा बांध लगभग 30 मीटर तक बह गया है | इस सीमा बांध के टूटने से भारतीय भूमि पर 100 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई है | साथ ही कोसी के कटाव से सहरसा-मानसी रेलखंड पर ट्रेन का परिचालन बंद हो गया है |

यह भी जान लें कि मधेपुरा के चौसा और आलमनगर प्रखंड की क्रमशः छह एवं तीन पंचायतें बाढ़ की चपेट में है | हर ओर एसडीआरएफ एवं मेडिकल-टीम को तैनात कर दिया गया है |

सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड के डरहरा गांव में तेज कटाव के चलते गांव पर खतरा मंडरा रहा है | अररिया जिलें में ढाई सौ से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं | हजारों एकड़ की फसलें बर्बाद हो गई है | सड़कों पर 3 फीट तक पानी बह रहा है | विगत 24 घंटे के दौरान पूर्णिया-कटिहार जिले में 8 लोगों के मरने की खबर है |

एक तरफ जहां बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे ज्यादा संकट शौचालय और पशुओं की चारा को लेकर है वहीं दूसरी तरफ लोग जान-जोखिम में डालकर पुराने नाव की सवारी करते हैं | और इस सबके बावजूद सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में 24 घंटे नजर रखने के निर्देश सभी अधिकारियों एवं विभागीय कर्मियों को दिये जा रहे हैं |

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हुनरमंद बनाये जायेंगे एक करोड़ युवा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित वि.वि. प्रेक्षागृह में एक दिवसीय प्रशिक्षण के तहत सीएम नीतीश कुमार ने नवनिर्वाचित ( सरपंच एवं पंचो को छोड़ ) सभी पंचायत प्रतिनिधियों को विकास योजनाओं की जानकारी देने हेतु संवाद किया | बापू के सपनों को साकार करने हेतु C.M. ने अपने सात निश्चयों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि पंचायती राज को सशक्त बनाने हेतु सत्ता का विकेंद्रीकरण आवश्यक है | तभी तो पंचायत प्रतिनिधियों को अब लोक सेवक का दर्जा दिया जा चुका है | साथ ही कानून में संशोधन करते हुए महिलाओं के लिए एक तिहाई स्थान आरक्षित कर दिया गया है |

यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री ने एक करोड़ युवाओं को प्रोत्साहित कर दशरथ मांझी कौशल विकास योजनाओं के तहत हुनरमंद बनाये जाने तथा राज्य सरकार की सेवाओं में महिलाओं को 35% आरक्षण दिये जाने की चर्चा की | उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से सामाजिक परिवर्तन की गति तेज होने का अहसास हम सभी महसूसने लगे हैं |

इससे पहले मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल, दूसरी बार निर्वाचित जिप अध्यक्ष मंजू देवी, विधायक प्रोफेसर रमेश ऋषि देव आदि ने दीप प्रज्वलित कर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का शुभारंभ किया | प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए डीएम ने कहा कि सीएम द्वारा अब वार्ड सदस्य तक को भी योजनाओं की स्वीकृति का अधिकार दे दिया गया है | विकास को गति देने के लिए हम सबको प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा |

जिला परिषद अध्यक्ष मंजू देवी ने पंचायती राज प्रतिनिधियों को ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं को शीघ्रातिशीघ्र कार्यांवित करने का आह्वान किया | उन्होंने शराबबंदी को सफल बनाने की पुरजोर अपील की |

विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव एवं विधायक निरंजन कुमार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री के विकास कार्यक्रमों को गति देने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को आगे बढ़कर सहयोग करना होगा |

कार्यक्रम का संचालन करते हुए विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने पंचायती राज प्रतिनिधियों को अपने विकास कार्यों में तेजी लाने की सलाह दी | मौके पर प्रबंधक नौशाद अहमद खां, डीपीआरओ क्यूम अंसारी, डीपीओ राखी कुमारी, डीईओ बद्री प्रसाद मंडल, जिला परिषद उपाध्यक्ष रघुनंदन दास, डीआईओ सुनील कुमार आदि उपस्थित थे |

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नीतीश सरकार में स्कूली छात्र-छात्राएं शैक्षिक परिभ्रमण पर

बिहार में शैक्षिक माहौल कायम करने के लिए नीतीश सरकार द्वारा स्कूली छात्र-छात्राओं को बिहार दर्शन के लिए शैक्षिक परिभ्रमण को अनिवार्य कर दिया गया है | मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत वर्ग 9 एवं 10 के छात्र-छात्राओं को पर्यटक स्थलों के परिभ्रमण का अवसर प्रतिवर्ष दिया जाता है | इसके लिए प्रत्येक जिले को स्कूल की संख्या के अनुसार लगभग 25 से 50 लाख तक की राशि आवंटित की जाती है |

Member of Managing Committee- SNPM High School Madhepura Dr. Bhupendra Madhepuri with green flag , departing students on excursions under under "Mukhyamantri Bihar Darsham" Programme along with Principal Dr.Niranjan Kumar.
Member of Managing Committee- SNPM High School Madhepura Dr. Bhupendra Madhepuri with green flag , departing students on excursion under “Mukhyamantri Bihar Darshan” Programme along with Principal Dr.Niranjan Kumar.

यह भी बता दें कि बिहार में विक्रमशिला, नालंदा, राजगीर, मंदार पहाड़, वीरपुर का बैरेज……आदि-आदि दर्शनीय स्थलों के परिभ्रमण से छात्रों के सामान्य ज्ञान में और अभिवृद्धि होती है |

आज प्रातः मधेपुरा के शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डॉ.निरंजन कुमार- श्रीमती निर्मला देवी, निरुपमा व शिक्षिका मिंटू देवी सहित शिक्षक संतोष कुमार, रमेश कुमार, आनंद कुमार एवं गौतम कुमार के साथ लगभग 45 छात्र-छात्राएं शैक्षिक परिभ्रमण पर धार्मिक स्थल सिंघेश्वर स्थान, गणपतगंज के भव्य मंदिर और वीरपुर बैरेज आदि के लिए प्रस्थान किये |

मौके पर स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बस पर सवार परिभ्रमण दल को (विक्ट्री साइन/ हरी झंडी) दिखाकर विदा किया | साथ ही छात्र-छात्राओं को शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं से सामान्य ज्ञान की बातें सीखने की बातें भी कहीं |

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मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री में पहले साल बनेगा 5 इलेक्ट्रिक इंजन

ग्रीनफ़ील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाना, मधेपुरा के लिए श्रीपुर चकला गांव के आस-पास अधिग्रहित 300 एकड़ जमीन पर जी इ एल एफ  के डिप्टीचीफ इंजीनियर के.के.भार्गव द्वारा मई के प्रथम सप्ताह में भूमि पूजन किया गया | मौके पर मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने कारखाने के विद्युतीकरण कार्यों में सहयोग करने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये |

बता दें कि 2 साल बाद यानी 2019 में इस कारखाने में विद्युत रेल इंजन निर्माण का काम शुरू हो जायेगा | प्रथम वर्ष में फैक्ट्री द्वारा पांच इंजन तैयार होगा और 2022 तक यह कारखाना सेंचुरी बना लेगा यानी चौथे साल से 100 विद्युत रेल इंजन तैयार करने का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा |

यह भी जान लें कि एक विद्युत रेल इंजन की कीमत होगी 28 करोड़ रुपये | 12 साल लगते-लगते 12000 हार्स पावर (HP)  के 800 विद्युत रेल इंजन इस कारखाने द्वारा तैयार कर लिया जायेगा | और इसी के साथ अब ‘मधेपुरा’ राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जी.के. के रूप में याद किया जायेगा |

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एम.एल.सी. डॉ.संजीव कुमार सिंह के क्षेत्र में निवेदन समिति की नाराजगी

विधान परिषद की 4 सदस्यीय निवेदन समिति की टीम गुरुवार को मंडल विश्वविद्यालय में पहुंची | विभिन्न मामलों की प्रगति की समीक्षा के क्रम में टीम के चारों विधान परिषद सदस्यों श्री केदार पांडे, डॉ.संजीव कुमार सिंह, प्रो.संजय कुमार सिंह एवं प्रो.संजीव श्याम सिंह ने विश्वविद्यालय के काम-काज की स्थिति को दुखद बताया | टीम का नेतृत्व कर रहे शिक्षा-जगत के अनुभवी विधान पार्षद केदार पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय में कोई कार्यप्रणाली ही नहीं है |

यह भी जान लें कि टीम के एक सदस्य डॉ.संजीव कुमार सिंह भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय सिंडिकेट के मेंबर भी हैं तथा इसी मधेपुरा शिक्षक कोसी निर्वाचन क्षेत्र से एम.एल.सी. चुने गये हैं | बता दें कि आजीवन इसी कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद रहे स्व. डॉ.शारदा प्रसाद सिंह के सुपुत्र हैं विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह | जहाँ शारदा बाबू को विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय शिक्षकों की सेवा नियमावली  का इनसाइक्लोपीडिया कहा जाता रहा वही उनके सुपुत्र डॉ.संजीव कुमार सिंह भी शिक्षकों के हित में अहर्निश अपनी सेवा व समर्पण के कारण लोकप्रिय बनते जा रहे हैं |

बता दें कि निवेदन समिति की टीम ने सभी निर्देशित मामलों पर अद्यतन रिपोर्ट लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उपस्थित प्रोवीसी  डॉ.जे.पी.एन झा एवं कुलसचिव डॉ.के.पी. सिंह से कहा कि 11 अगस्त को बिहार विधान परिषद मैं उपस्थित हों |

निवेदन समिति ने छात्र संगठन द्वारा लगाये गये कतिपय आरोपों को सही ठहराया जब एफ.ओ. एवं एफ.ए. बिना छुट्टी के आवेदन दिए ही अनुपस्थित पाए गये | समिति ने बीएड प्रवेश परीक्षा का जिम्मा बिना सिंडीकेट के अनुमोदन के ही आउटसोर्सिंग को सौंप दिये जाने पर आपत्ति जताई तथा यह सारी शिकायतें राज भवन एवं शिक्षा विभाग को भी भेज दिए जाने की चेतावनी दी | यूँ बैठक में मुख्यरूप से संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा नियमितीकरण का मुद्दा छाया रहा | एक्सपर्ट टीम गठित कर इसे 31 मार्च 2017 तक समायोजित कर लिया जाएगा |

स्थानीय शिक्षक प्रतिनिधि होने के कारण डॉ.संजीव कुमार एमएलसी को अवकाश प्राप्त शिक्षकों द्वारा प्रतिशत में पेंशन भुगतान किए जाने के बाबत आवेदन दिया गया | कई शिक्षकों को हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी भुगतान नहीं किए जाने जैसे शिक्षक-समस्याओं पर समिति ने नाराजगी जताई |

विश्वविद्यालय परिसर के बाहर परिसदन में निवेदन समिति द्वारा शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को बुलाकर शिक्षा में सुधार के बाबत जमकर क्लास लिया गया |

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मधेपुरा इप्टा की रीढ है सुभाष

वर्तमान में इप्टा के प्रदेश सचिव सुभाष चंद्र द्वारा मधेपुरा में राष्ट्रीय ग्रामीण नाट्य महोत्सव-2016 के कार्यक्रम संयोजक होने के नाते महोत्सव के आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया | आय-व्यय की समीक्षा के साथ-साथ इप्टा मधेपुरा के शाखा सम्मलेन की तिथि पर, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.नरेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपस्थित सदस्यों के बीच, विचार-विमर्श किया गया |

यह भी बता दें कि विश्व विख्यात उपन्यासकार एवं साहित्य शिल्पी मुंशी प्रेमचंद की जयंती के मौके पर 31 जुलाई को स्थानीय भूपेन्द्र कला भवन में इप्टा शाखा सम्मेलन करने का फैसला लिया गया | इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक संध्या आयोजित कर प्रेमचंद के नाटकों के मंचन करने का फैसला भी लिया गया |

साथ ही इप्टा के संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर कश्यप, तुर्वसु उर्फ़ बंटी आदि ने 2016 के त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण नाट्य महोत्सव को एक सफल आयोजन बताया और उसकी सफलता का श्रेय सबों ने सुभाषचंद्र को दिया जिन्होंने बिहार-यूपी सहित देश के दर्जनों राज्यों में ‘नारदीगायन’ कार्यक्रम का परचम लहराया है |

यहां यह भी बता देना मौजूँ है कि हाल ही में 18-20 जून के दरमियान सुभाषचंद्र को नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए इप्टा कोलकाता द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया | जिसके लिए सभी सदस्यों ने सुभाषचंद्र को साधुवाद दिया तथा संरक्षक डॉ.मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा इप्टा की रीढ है सुभाषचंद्र | सुभाष चन्द्र को  मोमेंटो, प्रमाण-पत्र एवं अंग-वस्त्र से सम्मानित किया-  के बैनर तले- एन.एस.डी. के अध्यक्ष रतनथियम, संगीत नाटक एकेडमी के उपसचिव सुमन कुमार, बंगाल सरकार के आईटी मंत्री बी.बसु तथा इप्टा कोलकाता के सचिव डी.दत्ता आदि ने |

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अकेले मियाँ रोएगा कि कब्र खोदेगा ?

प्राथमिक विद्यालय हो या मध्य विद्यालय,  माध्यमिक हो या उच्च माध्यमिक- यहां तक कि चिकित्सालयों से लेकर विश्वविद्यालयों अथवा राज्य सरकार के कई विभागों में कर्मचारियों की घटती संख्या की कौन कहे- वहाँ तो आचार्यों एवं अधिकारियों के भी ढेर सारे पद वर्षों से रिक्त हैं |

मधेपुरा जिला भी अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है | यहां एडीएम, एडीएम (आपदा), डायरेक्टर डीआर डीए, एसिस्टेंट डायरेक्टर सामाजिक सुरक्षा, डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी आदि कई पद तो रिक्त हैं ही- तुर्रा तो यह है कि वरीय उपसमाहर्ता के आधे दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं और सभी कई वर्षो से प्रभार में चल रहे हैं |

यहाँ यह भी जान लेना मौजूँ होगा कि स्थानीय विधायक प्रो.चंद्रशेखर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री हैं फिर भी यहां एडीएम (आपदा) का पद 1 जनवरी, 2016 से ही प्रभार में चल रहा है जबकि कोसी में जल प्रलय फन फैलाए आपदाओं को आमंत्रित करने हेतु इंतजार में है | ज्ञातव्य है कि प्रतिवर्ष जुलाई आते ही कोसीवासियों को बाढ़ की चिंता सताने लगती है |

बता दें कि जिले के कुल 13 में से 6 प्रखंडों में सीडीपीओ नहीं होने के कारण वहां के सीओ अथवा बीडीओ को प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है जिन्हें स्वयं सांस लेने का समय नहीं होता, फिर भी किसी-किसी सीओ व बीडीओ को यदा-कदा स्वयं 3-4 प्रखंडों के प्रभार में भी रहना पड़ता है | शीर्ष पर सत्तासीन देखनेवाले भले ही आंखे मूंद ले, लेकिन इन सबका असर तो विकास को अवरुद्ध करते हुए साफ-साफ दिखता है |

आपका ध्यान शिक्षा जगत की ओर आकृष्ट करूं तो आप पायेंगे कि सरकार सर्वाधिक घोषणाएं ही करती हैं- पंचायतों में पूर्व से संचालित 28 मिडल स्कूलों को उत्क्रमित कर +2 विद्यालयों का दर्जा तो दे दिया गया, परंतु शिक्षकों के सभी पद खाली पड़े हैं | सरकार बहाली करना भूल गई है | तभी तो एक ओर बिना पढे ही छात्र-छात्राएं लालकेश्वर की कृपा से टॉपर बन रहे हैं जबकि दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में फर्जी तरीके से आचार्यों-प्राचार्यों व कुलपतियों की नियुक्तियां तेजी से हो रही हैं |

जब मधेपुरा अबतक द्वारा जिले के विकास के लिए व्याकुल जिलाधिकारी मो.सोहैल से कमेंट करने को कहा गया तो बस इतनी सी बातें उन्होंने कही कि शिक्षकों की बहाली के लिए शिक्षा विभाग कार्ययोजना बनाने में मशगूल है |

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