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एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

जकार्ता में हो रहे एशियन गेम्स के 14वें दिन शनिवार को भारत ने 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक अपनी झोली में डाले। इसके साथ ही 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक समेत भारत के पदकों की संख्या 69 हो गई। टूर्नामेंट में आठवें नंबर पर मौजूद भारत का एशियन गेम्स के इतिहास में अब तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत ने 2010 में चीन के ग्वांगझू में हुए एशियन गेम्स में 65 पदकों के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। रविवार को एशियाड का आखिरी दिन है, लेकिन इस दिन भारत की किसी भी स्पर्धा में भागीदारी नहीं है।

गौरतलब है कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी भारत ने शुक्रवार को ही कर ली थी लेकिन शनिवार को बॉक्सर अमित पंघल और ब्रिज में शिवनाथ सरकार एवं प्रणव वर्धन की जोड़ी ने स्वर्ण, महिला स्कवैश टीम ने रजत और पुरुष हॉकी टीम ने पाकिस्तान को हराकर कांस्य पदक हासिल कर इस आंकड़े को 69 तक पहुंचा दिया। टूर्नमेंट में अब तक 129 गोल्ड मेडल के साथ कुल 283 पदक हासिल कर चीन पहले नंबर पर बना हुआ है। वहीं, जापान 72 गोल्ड मेडल जीतकर 200 पदकों के साथ दूसरे पायदान पर है। जबकि साउथ कोरिया 48 गोल्ड मेडल जीतकर 172 पदकों के साथ तीसरे नंबर पर है। पदक तालिका में इंडोनेशिया चौथे, उज्बेकिस्तान 5वें, ईरान छठे और चीनी ताइपे सातवें स्थान पर है।

इस बार भारत द्वारा जीते गए स्वर्ण पदकों की बात करें तो एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा ने जेवलिन थ्रो, मनजीत सिंह ने 800 और जिनसन जॉनसन ने 1,500 मीटर रेस, तेजिंदर पाल सिंह तूर ने शॉट पुट, अरपिंदर सिंह ने ट्रिपल जम्प, हिमा दास, पूवम्मा राजू मछेत्रिया, सरिताबेन लक्ष्मणभाई गायकवाड़, विस्मया कोरोत वेल्लुवा ने महिला 4×400 मीटर और स्वप्ना बर्मन ने महिला हेप्टाथलॉन में स्वर्ण पदक जीते। वहीं निशानेबाजी में सौरभ चौधरी ने पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल और राही जीवन सरनोबत ने महिला 25 मीटर पिस्टल में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। कुश्ती में बजरंग पुनिया पुरुष 65 किग्रा और विनेश फोगाट महिला 50 किग्रा वर्ग में सोना जीतने में सफल रहे। टेनिस में रोहना बोपन्ना और दिविज शरण पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे तो मुक्केबाजी में अमित पंघल ने 49 किग्रा वर्ग में पहली बार सोना दिलाया। रोइंग में स्वर्ण सिंह, ओम प्रकाश, सुखमीत सिंह और बब्बन दत्तू भोकानल की टीम ने देश को पहली बार क्वाड्रूपुल स्कल्स स्पर्द्धा में स्वर्ण दिलाया। ब्रिज, जिसे एशियाड में पहली बार शामिल किया गया था, में प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार मेन्स पेयर में चैम्पियन बने।

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मधेपुरा रेलवे स्टेशन सज रही है मधुबनी पेंटिंग से

मधेपुरा से मानसी एवं मधेपुरा से पूर्णिया रेलखंड के सभी स्टेशन बिहार की विरासत मिथिलांचल इलाके की प्रसिद्ध ‘मधुबनी पेंटिंग’ से सजेंगे | स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा |

बता दें कि समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आरके जैन के निर्देशानुसार कोसी क्षेत्र के दौराम मधेपुरा स्टेशन से तत्काल इसकी शुरुआत कर दी गई है | अब पेसेंजरों को स्टेशन के कक्षों एवं दीवारों पर मिथिलांचल की प्रसिद्ध कलाकृतियाँ देखने को मिलेंगी |

डीआरएम श्री जैन ने मधेपुरा अबतक को बताया कि भारतीय रेल के प्रयास से अब जल्द ही मधेपुरा की तरह अन्य सारे स्टेशनों की सूरत बदली हुई दिखेंगी | उन्होंने कहा कि मिथिलांचल की इस पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए यह नई पहल की गई है | यात्रियों को स्टेशन के अंदर और बाहर मधुबनी पेंटिंग का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा | जंक्शन पर के वेटिंग हॉल सहित अन्य जगहों को भी मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है | अब तक 20 बोर्ड तैयार किये जा चुके हैं जिसे फिलहाल बाहर में लगाई जा रही है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि मधेपुरा स्टेशन को मधुबनी पेंटिंग से सजाने की जिम्मेवारी रेलवे ने स्थानीय ग्वालपाड़ा प्रखंड की महिला व युवा कलाकारों को दी है जिसमें आशा, ममता, पुनम, रेखा व रंभा आदि शामिल हैं | चंद्रकला राजेश्वरी संस्थान एवं द चाइल्ड ऑफ इंडिया नामक दोनों संस्थानों से जुड़ी इन कलाकारों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि लोक कला को प्रोत्साहन देने वाले सरकार की इस योजना का हिस्सा बनने से हम ग्रामीण कलाकार भी गौरवान्वित महसूस करने लगी हूँ | हम कलाकारों को भी इस बात की खुशी हो रही है कि इस स्टेशन पर आने वाले विदेशी यात्री बिहार की लोक कलाओं से अवगत होते रहेंगे |

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करुणानिधि की घोषणा को परिणति दें स्टालिन: नीतीश कुमार

गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चेन्नई में स्व. एम करुणानिधि की स्मृति में आयोजित सभा में शामिल हुए। इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्व. करुणानिधि ने कहा था कि अगर डीएमके सत्ता में वापस आई तो लोकहित में शराबबंदी को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। उनके उत्तराधिकारी के रूप में अब एमके स्टालिन का यह दायित्व बनता है कि वह करुणानिधि की घोषणा को तार्किक परिणति तक पहुंचाएं।

गौरतलब है कि डीएमके ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में शराबबंदी को प्रमुखता दी थी। बिहार में लागू शराबबंदी की प्रतिध्वनि उनकी घोषणा में परिलक्षित हुई थी। अपने एक इंटरव्यू में करुणानिधि ने कहा था कि जब बिहार में शराबबंदी हो सकती है तो फिर तमिलनाडु में क्यों नहीं? इस ओर इंगित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि देश महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने जा रहा है। राष्ट्रपिता के प्रति सबसे बड़ा सम्मान यह होगा कि इस मौके पर पूरे देश में शराबबंदी लागू की जाए। उन्होंने कहा कि बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी बापू के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. करुणानिधि को याद करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे सामाजिक न्याय एवं समानता के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे। उन्होंने जीवन भर गरीब एवं पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ी। सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के अनुरूप आरक्षण नीति को लागू करने में उनकी अहम भूमिका रही। केन्द्र में सरकार के गठन में भी स्व. करुणानिधि ने कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया। उनके नहीं रहने से तमिलनाडु के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है।

बता दें कि स्मृति-सभा में भाजपा की ओर से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाग लिया, जबकि विपक्षी दलों में कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद, सीपीएम की ओर से सीतारीम येचुरी, नेशनल कांफ्रेंस की ओर से फारूक अब्दुल्ला, टीएमसी की ओर से डेरेक ओ ब्रायन आदि नेताओं ने हिस्सा लिया।

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हे देव बहा दो अहंकार…….. दादी प्रकाशमणि की पुण्य तिथि पर !

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मधेपुरा शाखा के स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी की अध्यक्षता में ब्रम्हाकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका रही दादी प्रकाशमणि की पुण्यतिथि को (11वीं वर्षगांठ पर) ‘स्नेह मिलन समारोह’ के रूप में आयोजित किया गया | समारोह में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को मुख्य अतिथि, वरिष्ठ व्यापारी दिनेश सर्राफ एवं मंडल विश्वविद्यालय के HOD, Zoology डॉ.अरुण कुमार को विशिष्ट अतिथि के रुप में मंच संचालक बी.के. किशोर ने ससम्मान आसन ग्रहण कराया | कार्यक्रम का शुभारंभ सभी श्रद्धालुओं ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

बता दें कि उपस्थित श्रद्धालु नर-नारियों को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने दादी प्रकाशमणि के बाबत यही कहा कि दादी जी में प्रेम-स्नेह, शील और शक्ति का अद्भुत  समन्वय था | तभी तो 40 वर्षों तक ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय को नेतृत्व-प्रदान करने वाली दादी जी को विभिन्न देशों द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता रहा | संयुक्त राष्ट्र ने तो दादी प्रकाशमणि को “विश्व शांति दूत” सरीखे सम्मान से सम्मानित किया था | अंत में उन्होंने विश्वगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर को संदर्भित करते हुए यही कहा कि दादी प्रकाशमणि का आध्यात्मिक प्रकाश जिस पर पड़ेगा वह व्यक्ति अहंकार शून्य हो जायेगा |रवींद्रनाथ ने भी यही कहा है- हे देव बहा दो अहंकार …..  मेरे ही आंसू जल में…..

अध्यक्षीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी ने अपने संबोधन में यही कहा कि दादी जी सदा यही कहती रही कि जैसा कर्म हम करेंगे, वैसा ही फल हमें मिलेगा | सफाई और सच्चाई हर किसी के जीवन को सँवारता है | खुश रहने और खुशियाँ बांटने से वातावरण उत्साह-उमंग से भर जाता है | अंत में उन्होंने यही कहा कि शांति की कामना न करें बल्कि इच्छाओं को शांत रखें तो शांति खुद-ब-खुद पास आ जाएगी और परमात्मा से सम्बन्ध जुड़ता चला जाएगा |

मौके पर विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, उपेंद्र रजक, डॉ.एन.के.निराला, ओम प्रकाश यादव, रंजीत कुमार, विजय यादव, राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी बबीता देवी, दुर्गा बहन , संजीव भाई , बैजनाथ यादव एवं कार्यक्रम संचालक ब्रह्माकुमार किशोर भाई श्रद्धालुओं द्वारा सम्मानपूर्वक प्रसाद ग्रहण करने तक मौजूद रहे |

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जकार्ता में जारी गेम्स में नीरज ने रचा नया इतिहास !

मात्र 20 वर्षीय हरियाणवी एथलीट नीरज चोपड़ा जकार्ता में जारी इस 18वें एशियन गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे हैं। सोमवार को एशियाई खेलों के नौवें दिन नीरज ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम कर भारत का नाम रोशन किया है।

बता दें कि इस तरह भारत ने पहली बार एशियन गेम्स की भाला फेंक (Javelin Throw) स्पर्धा में सुनहरा तमगा अपने नाम किया है। जानिए कि नौ दिनों के खेल में भारत का आठवां और एथलेटिक्स में दूसरा स्वर्ण पदक है। भारत की तरफ से एशियन गेम्स में भाला फेंक पुरुष वर्ग में 36 वर्ष पूर्व 1982 ई. में नई दिल्ली में गुरतेज सिंह ने कांस्य पदक जीता था।

हरियाणा के पानीपत में जन्मे नीरज ने मधेपुरा अबतक को बताया कि उनके छह प्रयासों में से दो (दूसरे और छठे) को अयोग्य घोषित कर दिया गया…… लेकिन तीसरे प्रयास में ही नीरज ने अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.06 मीटर की इस कदर फेंकी कि एशियन गेम्स के भाला फेंक स्पर्धा वाले स्वर्ण पदक पर भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा का नाम अंकित करा लिया क्योंकि रजत पदक जीतने वाले चीन के लियु क्रिझन की जेवलिन नीरज के मुकाबले 5.84 मीटर पीछे रही और कांस्य पदक जीतने वाले पाकिस्तान के नदीम अरशद की जेवलिन 7.31 मीटर पीछे गिरी। नीरज के तीसरे थ्रो के बाद कोई भी खिलाड़ी उनके आस-पास तक नहीं पहुंच सका।

चलते-चलते यह भी बता दें कि नीरज ने एशियन गेम्स के 67 साल के इतिहास में पहली बार भारत के लिए जेवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। यह भी जान लें कि 1951 ई. से ये एशियन गेम्स आयोजित हो रहे हैं, तब से मात्र एक ‘कास्य’ ही नसीब हुआ था।

यह भी कि नीरज खुद के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते जा रहे हैं। गत मई महीने में दोहा में आयोजित ‘डायमंड लीग सीरीज’ के पहले चरण में नीरज ने 87.43 मीटर के साथ रिकॉर्ड बनाया था। नीरज के नाम पर 86.48 मीटर का जूनियर विश्व रिकॉर्ड अभी भी कायम है।

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मधेपुरा में क्रान्तिवीर रासबिहारी लाल मंडल की 100वीं पुण्यतिथि मनी !

26 अगस्त 1918 को यानि 100 वर्ष पूर्व महात्मा कबीर की नगरी ‘काशी’ में इहलीला समाप्त कर चुके इस महाप्राण रासबिहारी लाल मंडल को हम आज भी शिद्दत से याद करते हैं। सौ साल के बाद भी उनके नाम की आभा कम नहीं हुई, पर इस बीच आये-गये मौसमों से उनकी आकृति धुंधला जरूर गई थी। जिस धुंधलेपन को समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी अपनी साधना के बल पर हटाने में लगे रहे।

बता दें कि उनके देहावसान के लगभग 85 वर्ष बाद उन्हीं के नाम वाले रासबिहारी उच्च विद्यालय परिसर में जन सहयोग से उनकी प्रतिमा स्थापित कराई डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने……. और आज 100वीं पुण्यतिथि पर डॉ.मधेपुरी द्वारा लिखित पुस्तक – “रासबिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच” को जल्द ही लोकार्पित कराने की घोषणा भी कर दी गई है |

Paying homage to the statue of Babu Rasbihari Lal Mandal.
Paying homage to the statue of Babu Rasbihari Lal Mandal.

डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि रासबिहारी बाबू विद्यानुरागी थे। वे बांग्ला, अंग्रेजी, फ्रेंच, हिन्दी, संस्कृत , कैथी,  उर्दू , फारसी आदि के सर्वमान्य ज्ञाता थे। उन्होंने बंग-भंग के समय ‘भारत माता का संदेश’ पुस्तक लिखी थी। वे अंग्रेजों से कभी नहीं डरे… तभी तो लोग उन्हें यदाकदा ‘साहेब’ कहकर पुकारा करते और कभी ‘तिरहुत का राजा’। दरभंगा महाराज तो उन्हें “मिथिला का शेर” कहते थे ।

इस अवसर पर प्रो.प्रभाष चन्द्र यादव, डॉ.विनय चौधरी एवं डॉ.अरुण कुमार मंडल ने उनके द्वारा दलितों , शोषितों एवं पिछड़ों के उत्थान के लिए किए गये महत्वपूर्ण कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.सुरेश भूषण, संतोष कुमार, प्राण मोहन यादव, डॉ.आलोक कुमार आदि वक्ताओं ने एक स्वर से यही कहा कि रासबिहारी बाबू स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनापति तो थे ही, साथ ही वे सामाजिक परिवर्तन के प्रखर अगुआ भी थे।

जानिए कि इस बार रासबिहारी क्विज प्रतियोगिता एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का श्रीगणेश उनकी प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर किया गया। पुन: अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के बाद विद्यालय के संगीत शिक्षक गांधी कुमार मिस्त्री द्वारा ‘रास बिहारी गीत’ की प्रस्तुति दी गई।

अंत में क्विज में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय आये छात्रों क्रमशः दिलखुश-भूषण-राहुल को पुरस्कृत किया गया। निबंध प्रतियोगिता में राहुल प्रथम, आनंद द्वितीय एवं तृतीय हर्षराज को डिक्शनरी दे-देकर पुरस्कृत किया गया।

मौके पर जिला खेल प्रशिक्षक खेलगुरु संत कुमार, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव डॉ.अरुण कुमार, जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार एवं शिक्षक डॉ.अमलेश कुमार, कृष्ण कुमार, मुर्तजाअली, उर्वशी कुमारी, रंजना झा, बीरबल यादव आदि अंत तक मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य अनिल कुमार चौहान ने किया तथा मंच संचालन सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव ने।

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सीएम नीतीश कुमार के आगमन से मंडलमय हुआ मुरहो

आज 25 अगस्त 2018 का दिन जहाँ सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के शताब्दी जन्म जयंती राजकीय समारोह के रूप में मधेपुरा-मुरहो में शानदार तरीके से मनाया गया वहीं बिहार के जानदार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं केबिनेट मंत्री मंगल पाण्डेय, डॉ.रमेश ऋषिदेव तथा मंत्रीमंडल की रीढ़ मानेजाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव का आगमन इस समारोह को ऊँचाई दे गया। माननीय मुख्यमंत्री की टीम द्वारा मंडल की समाधी पर पुष्पांजलि की गई एवं सर्वधर्म प्रार्थना सभा में सम्मिलित होने के बाद मंडल साहब की जीवनी पर आधारित “कॉफी टेबल बुक” का लोकार्पण भी किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम में सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पु यादव, विधायक निरंजन मेहता, विधान पार्षद ललन सर्राफ , समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, पूर्व विधायक मनिन्द्र कुमार मंडल एवं पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव आदि सम्मिलित हुए।

बता दें कि माननीय मुख्यमंत्री की कार्यव्यस्ता के चलते आसपास से आये नर-नारियों एवं पूरे जिले के कार्यकर्ताओं-नेताओं की भीड़ चाहकर भी कुछ सुन नहीं सकी…… परन्तु मुरहो छोड़ने से पूर्व ही समस्त सुधि जनों के बीच समाजसेवी-साहित्यकार एवं मधेपुरा के डॉ.कलाम कहलाने वाले डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने समस्त उपस्थित जनों का प्रतिनिधित्व करते हुए सूबे के मुखिया नीतीश कुमार से बस यही कहा-

मान्यवर ! मै डॉ.मधेपुरी आपको सुनने आये समस्त लोगों की भावनाओं का कद्र करते हुए उनकी ओर से यही अनुरोध करता हूँ कि बी.पी.मंडल जैसे उदार एवं विशाल ह्रदय वाले मंडल कमीशन के अध्यक्ष के लिए श्रीमान द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारतरत्न” देने हेतु अनुशंसा करने की महती कृपा की जाय।

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राजकीय जन्मशताब्दी जयन्ती की पूर्व संध्या का परिदृश्य

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मंडल कमीशन के अध्यक्ष बी.पी.मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 को महात्मा कबीर की नगरी काशी में हुआ था। इस अवसर पर जन्म शताब्दी समारोह की पूर्व संध्या पर बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में खेल-गुरु संत कुमार एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार की देखरेख में बालक एवं बालिकाओं के ग्रुपों के बीच कबड्डी प्रतियोगिता, शतरंज, बैडमिंटन, वॉलीबॉल आदि खेलों के साथ-साथ बी.पी.मंडल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला की टीम के सौजन्य से किया गया।

बता दें कि जहां अब तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार भाषण प्रतियोगिता में प्रथम आए उ.उ.वि. मलिया के छात्र एमरोज कुमार, द्वितीय स्थान पर रही योगेंद्र उच्च विद्यालय मुरहो की रूचि कुमारी एवं तृतीय स्थान पर रही टी.पी.कॉलेजिएट की मुस्कान रानी, वहीं कबड्डी में बालिका ग्रुप में चैंपियन रही मलिया की टीम। शेष खेलों की जानकारी प्राप्त होने पर दी जा सकेगी।

इस बीच समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से बालक वर्ग की कबड्डी टीमों के खिलाड़ियों से सचिव अरुण कुमार ने परिचय कराया और फिर विधिवत खेल का शुभारंभ किया गया।

बता दें कि एक ओर जहां उमस के बावजूद बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों एवं दर्शकों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया, वहीं दूसरी और यह जानकारी भी दी गई कि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं प्रो.श्यामल किशोर यादव द्वारा स्थानीय मंडल के कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण डॉ.अमोल राय के नेतृत्व में डॉ.इंद्र नारायण यादव, अनिल कुमार यादव, सियाराम यादव मयंक, बिजेंद्र प्रसाद यादव, बिंदेश्वर ठाकुर, अमरेंद्र कुमार, दीपक कुमार मंडल आदि की टीम को शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘काशी’ के लिए विदा किया। 25 अगस्त को तो संपूर्ण जिला बी.पी.मंडलमय दिखेगा- प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक।

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लालजी टंडन ने बिहार के 39वें राज्यपाल के रूप में ली शपथ

बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल लालजी टंडन ने बिहार के 39वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमआर शाह ने राजभवन के राजेन्द्र मंडपम में आयोजित समारोह में राज्यपाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर लेडी गवर्नर कृष्णा टंडन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राज्यपाल के पुत्र व उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन, बिहार सरकार के कई मंत्री, वरीय अधिकारी व अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

इससे पूर्व बुधवार की शाम पटना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा,  खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस, पटना की मेयर सीता साहू, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक केएस द्विवेदी के साथ ही अन्य महकमों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

बता दें कि 83 वर्षीय लालजी टंडन उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं और इन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के निकट सहयोगी के रूप में जाना जाता है। लालजी टंडन 1978 से लेकर 1996 तक लगातार एमएलसी रहे। फिर वे लखनऊ से विधायक चुने गये और लगातार तीन बार विधायक रहे। इसके बाद वे 2009 में लखनऊ से लोकसभा के सांसद बने। एक सभासद से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले टंडन उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भी रहे। उऩ्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

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मधेपुरा में मनी महापंडित तुलसीदास की भव्य जयन्ती

मधेपुरा के सर्वाधिक पुराने साहित्यिक संस्थान कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अम्बिका सभागार में स्थानीय कवि-साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों के बीच भव्यता के साथ गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शहर के शिक्षक-प्रोफेसर, अधिवक्ता-साहित्यकार एवं तुलसी सहित रामचरितमानस पर साधिकार अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले दो-दो विद्वान वक्ताओं को आमंत्रिक किया गया था- एक तिलका माँझी , भागलपुर वि.वि में प्रतिकुलपति रह चुके डॉ.के.के.मंडल और दूसरे भू.ना.मंडल वि.वि. में स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप।

बता दें कि मंच संचालन करते हुए सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कोसी अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ से कार्यक्रम का शुभारम्भ ‘तुलसी की तस्वीर’ पर पुष्पांजलि के साथ करने का अनुरोध किया। अध्यक्षता कर रहे श्री शलभ ने कहा-

मानव कल्याण, धर्म, नीति और सदाचार का जितना प्रचार तुलसी के ग्रन्थों द्वारा हुआ है उतना किसी अन्य ग्रन्थों द्वारा नहीं। चौतरफे हमले से हमारी धर्म-संस्कृति की रक्षा की तथा पंच मकारी प्रयोग से हमारे समाज को बचाया भी। तुलसी के समग्र काव्य को विश्व-साहित्य की सर्वोत्तम धरोहर तथा म्रियमान समाज के लिए संजीवनी कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी |

यह भी जानिए कि प्रखर वक्ता पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल द्वारा मानस के सुन्दर कांड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यह कहा गया कि सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड ज्ञानगुणसागर हनुमान जी की कृतिगाथा से समन्वित है | बजरंगवली का समुद्र पार करना….माँ जानकी से मिलना…..लंका दहन के बाद विभीषण का राम की शरण में आना….एवं पुल निर्माण के साथ ही यह सुन्दर काण्ड समाप्त होता है ।

दूसरे प्रमुख वक्ता के रूप में BNMU के स्नातकोत्तर हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हिन्दी प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने तुलसी के रामचरितमानस में युगीन सच को उकेरते हुए कहा कि मानस में इस देश की सनातन भाव द्वंदता की अभिव्यक्ति है जो अमरता प्रदान करती है | उन्होंने कहा कि इस युग की सच्चाई को लगभग 5 सौ वर्ष पहले ही तुलसी ने मानस के उत्तरकांड में अभिव्यक्त कर दिया था |

अंत में सम्मलेन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने रामचरितमानस को संदर्भित करते हुए विज्ञान के अनेक-प्रसंगों का उल्लेख किया। इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ काव्य ग्रन्थ कहा और गोस्वामी तुलसीदास को सर्वाधिक समन्यवयकारी महामानव बताया। अन्य वक्ताओं में हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव , डॉ.आलोक कुमार, डॉ.सुरेश भूषण, साहित्यकार दशरथ प्रसाद सिंह कुलिश , रघुनाथ प्र. यादव , सुकवि उल्लास मुखर्जी, निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र, प्राणमोहन प्रसाद द्विजराज, आनंद आदि। अंत में तुलसी जयंती के अवसर पर कुछ प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। सम्मलेन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो.श्यामल किशोर यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया और अंत में कवि ह्रदय प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के निधन पर उन्हें दो मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।

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