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लाखों की जगह अब ₹100 में होगा जमीन का रजिस्टर्ड बँटवारा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार सूबे बिहार में पैतृक जमीन व पारिवारिक संपत्ति का रजिस्टर्ड बँटवारा अब मात्र ₹100 देकर कराया जा सकेगा जिसके लिए प्रायः परिवार को जमीन के सर्किल रेट के अनुसार लाखों रुपये और कुछ को तो करोड़ों रुपये रजिस्ट्री शुल्क एवं स्टांप ड्यूटी के मद में देने पड़ते थे। नीतीश सरकार में पारिवारिक संपत्ति विवाद के मामलों को समाप्त करने के इरादे से निबंधन शुल्क ₹100 करने का फैसला लिया है।

बता दें कि वर्तमान में जमीन या पारिवारिक संपत्ति के बाजार भाव का 2 प्रतिशत निबंधन शुल्क एवं 3 प्रतिशत स्टांप शुल्क जमा करने पर ही रजिस्ट्री होती थी जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा अब मात्र 100 रुपये स्टांप-निबंध (₹50+ ₹50) शुल्क निर्धारित कर दिया गया है।

गृह विभाग के प्रधान सचिव सह अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि राज्य में पारिवारिक संपत्ति एवं पैतृक जमीन को लेकर हिंसा और मारपीट जैसी घटनाएं आए दिन होती हैं। इन्हीं समस्याओं, वारदातों एवं रोज-ब-रोज की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने पारिवारिक संपत्ति की निबंधन दरों को लगभग समाप्त करते हुए जमीन रजिस्ट्री शुल्क ₹50 कर दिया है। इसके अतिरिक्त स्टांप शुल्क के ₹50 मात्र अलग से लगेंगे।

राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी के अनुसार सरकार की ऐसी मान्यता है कि इस प्रस्ताव के अधिसूचित होते ही पैतृक एवं पारिवारिक संपत्ति से जुड़े विवाद के मामलों में तेजी से कमी आएगी साथ ही सूबे की विधि व्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा….. तथा आम लोग सर्वाधिक लाभान्वित होंगे।

 

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सादगी ऐसी की खपरैल मकान में ही अंतिम सांस ली देशरत्न राजेन्द्र ने

देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद कहिए या भारत रत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद….. जन्म भले ही जीरादेई में हुआ लेकिन वे वर्ष 1921 से 1946 तक पटना में कुर्जी के नजदीक मौलाना मजहरुल हक द्वारा कांग्रेस को दी गई जमीन पर स्थित बिहार विद्यापीठ परिसर में बने एक खपरैल मकान में ही रहा करते थे। हाँ! पढ़ाई और वकालत के बाद कुछ समय देश सेवा के दरमियान जेल में और भारत के राष्ट्रपति के रूप में दस वर्षों (1952-1962) तक 320 एकड़ में फैले 340 सुसज्जित कमरों वाले राष्ट्रपति भवन में बीते।

बता दें कि 1962 में ही दिल्ली के राष्ट्रपति भवन को अलविदा कहकर पटना के उसी बिहार विद्यापीठ वाले खपरैल मकान में लगभग साल भर अपना जीवन गुजारा राजेन्द्र बाबू ने। 28 फरवरी 1963 की रात बाबू राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार के विद्यापीठ परिसर में के उसी खपरैल मकान में अंतिम सांस ली।

यह भी जानिए कि इस विद्यापीठ की स्थापना 1921 में ही महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। इसकी स्थापना के लिए गांधी ने झरिया जाकर वहाँ के एक गुजराती कोयला व्यवसायी से चंदे के रूप में कुछ राशि ली और तब मजहरुल हक द्वारा दी गई जमीन पर निर्माण हुआ।

डॉ.राजेन्द्र प्रसाद जब दिल्ली से लौटकर बिहार विद्यापीठ में पुनः स्थाई रूप से रहने लगे तो कोई ऐसा दिन नहीं होता जब नेताओं एवं आम लोगों का जमावड़ा नहीं लगता। आज भले ही देश रत्न हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनकी स्मृतियाँ आज भी उनके होने का एहसास कराती हैं। वह पुराना खपरैलनुमा भवन आज भी हमारे मानस पटल पर ढेर सारे संस्मरणों को अंकुरित होने के लिए प्रोत्साहित करता है। पास में जमीन पर बिछी सफेद चादर पर रखा चरखा आजादी के आंदोलनों को तरोताजा कर देता है। राजेन्द्र बाबू की धर्मपत्नी राजवंशी देवी से जुड़ी कई यादें आज भी जिंदा हो जाती हैं।

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राष्ट्रकवि दिनकर के सिमरिया में सजेगा साप्ताहिक साहित्य महाकुंभ

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सिमरिया में दिसंबर 2 से 9 तक : जहाँ सजेगा सप्ताहिक साहित्य महाकुंभ वहीं अन्य दो सत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मुरारी बापू के रामकथा से सियाराममय होयेगा सिमरिया……! इस साहित्य महाकुंभ में देश के विभिन्न प्रांतों के साहित्यकार होंगे शामिल। इस प्रेममय साहित्य यज्ञ में सर्वाधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाले पंडाल में छः दर्जन एलसीडी भी लगाये गये हैं। दिनकर की भूमि पर राम कथा, साहित्य और संगीत का 10 दिवसीय समागम इसे संपूर्णता में गौरवान्वित करने जा रहा है।

बता दें कि मिथिलांचल की पवित्र तीर्थनगरी तथा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्म भूमि पर मिथिला की प्रसिद्ध लोक गायिका रंजना झा के स्वागत गान की प्रस्तुति के साथ सिमरिया स्वर्ग लोक में तब्दील हो गया है। साहित्य महाकुंभ एवं राम कथा की पूरी व्यवस्था पर ड्रोन कैमरे की भी नजर रहेगी……।

यह भी जानिए कि इस साहित्य महाकुंभ के आयोजन स्थल पर लगभग दो लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 300 एकड़ जमीन पर स्विस कॉटेज, मंच, भोजन के पांडाल आदि बनाये जा रहे हैं। कुल मिलाकर लगभग पांच लाख वर्ग फीट का पंडाल बनाया गया है। सुलभ इंटरनेशनल द्वारा 300 के आसपास शौचालय बनाये जा रहे हैं। आयोजन स्थल पर प्रवेश के लिए 2 वीआईपी द्वार समेत पांच अन्य बड़े-बड़े द्वारों का निर्माण भी किया गया है।

बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की धरती पर श्रद्धा एवं साहित्य का संगम। यह पहला आयोजन है जिसमें विश्वभर से पधारे साहित्यकारों, कलाकारों एवं सांस्कृतिक कर्मियों का होगा विचार मंथन। व्यवस्थाएँ जितनी बेहतरीन है, विचार भी उतना ही विशाल। तभी तो दलित बच्चों से स्वागत-आरती कराकर दिनकर की धरती से समरसता का संदेश दिया जा रहा है। सभी धर्मों व संप्रदायों के 10 लाख लोग रोजाना करेंगे भोजन जिसके लिए समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय आदि आसपास के जिलों से बुलाये गये हैं 5 हज़ार हलवाई। इसके अतिरिक्त कोलकाता एवं गुजरात से भी कारीगरों को मंगाये गये हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि राष्ट्रकवि दिनकर की भूमि पर ‘संस्कृति के चार अध्याय’- धर्म, साहित्य, संस्कृति और समाज का अद्भुत संगम है….. सिमरिया का यह साहित्यिक महाकुंभ…….। 9 दिसंबर से पूर्व एक बार तो इस साहित्यिक महाकुंभ में स्नान करने के लिए आईए…..।

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कुशवाहा ने कसा तंज, एनडीए से पूरी तरह मोहभंग

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रालोसपा के एक नेता की हत्या के बाद उनके परिजनों से मिलने पहुंचे रालोसपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा। पत्रकारों द्वारा लोकसभा चुनाव के सीट बंटवारे को लेकर दोनों नेताओं द्वारा समय नहीं दिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘उन्होंने क्यों समय नहीं दिया, इसका उत्तर तो वही दे सकते हैं लेकिन दिनकर के शब्दों में – ‘जब नाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।’

रालोसपा प्रमुख ने आगे कहा, ‘आगामी 4 दिसंबर से 6 दिसंबर तक पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर में पार्टी का चिंतन शिविर आयोजित किया गया है। यहां कार्यकर्ताओं की राय जानने के बाद पार्टी अगले कदम की घोषणा करेगी।’ गौरतलब है कि कुशवाहा ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर 30 नवंबर तक का अल्टिमेटम दिया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा था। इससे पहले भी कुशवाहा ने इस मामले को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश की थी।

बहरहाल, एनडीए से मोहभंग के दौर से गुजर रहे कुशवाहा ने बिहार सरकार को भी आड़े हाथों लिया। रालोसपा नेता की हत्या को लेकर बिहार की नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘यह कैसा सुशासन है, जहां प्रतिदिन लोगों की हत्याएं हो रही हैं।‘ कहने की जरूरत नहीं कि कुशवाहा के बयानों से उनके भावी रुख का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही केन्द्रीय मंत्री का पद छोड़ने और एनडीए से अलग होने की विधिवत घोषणा कर सकते हैं।

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अभी से बूथ की तैयारी में जुटी जदयू

नालंदा के दीपनगर में जदयू का एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा में दल के नेता श्री आरसीपी सिंह थे। संगठन की मजबूती एवं चुनाव-प्रबंधन की कुशलता बढ़ाने के लिए आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर में श्री सिंह जिले के सभी प्रखंड एवं पंचायत प्रभारियों एवं प्रतिनिधियों से रू-ब-रू हुए। उनके साथ ही विधानपार्षद एवं जदयू बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्री रविन्द्र सिंह, जदयू प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील कुमार एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने जिले के सभी साथियों से संवाद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला जदयू अध्यक्ष श्री बनारस प्रसाद सिन्हा ने की, जबकि प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, संगठन प्रभारी चंदन कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार सिंह, परमहंस कुमार, कामाख्या नारायण सिंह एवं कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस मौके पर अपने संबोधन में श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने देश भर में बाकी पार्टियों से एक अलग पहचान बनाई है। आज हमारी पार्टी पॉलिटिक्स विद डिफरेंस के लिए जानी जाती है। श्री नीतीश कुमार ने 2005 के अंधेरे से बिहार को बाहर निकालकर एक ओर न्याय के साथ विकास और सुशासन को स्थापित किया तो दूसरी ओर समाज-सुधार के अभियानों से पूरे देश को रास्ता दिखाने का काम किया। उन्होंने कहा कि हमारा काम ही हमारा यूएसपी है और पार्टी के हर सिपाही का दायित्व बनता है कि इन कामों को जन-जन तक पहुँचाएं। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि हर बूथ पर जदयू का कम-से-कम एक समर्पित कार्यकर्ता जरूर हो।
अपने संवाद के क्रम में विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने पार्टी की विचारधारा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि गांधी-जेपी-लोहिया के आदर्शों को हमारे नेता श्री नीतीश कुमार धरातल पर उतारने का काम कर रहे हैं। मैनेजमेंट विशेषज्ञ सुनील कुमार ने व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास की जरूरत पर बल दिया। मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने आने वाले चुनावों में मीडिया के महत्व को रेखांकित करते हुए उसके समुचित उपयोग की जरूरत बताई। विधानपार्षद ललन सर्राफ ने कहा कि नेताओं की भीड़ में एकमात्र नीतीश कुमार हैं जिन्हें अपने परिवार की नहीं, बिहार के करोड़ों लोगों की चिन्ता है। वहीं, संगठन के कार्यों में अच्छा अनुभव रखने वाले रविन्द्र सिंह ने बूथ स्तर तक पार्टी की मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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तलाक की अर्जी वापस न लेने पर अडिग हैं तेजप्रताप

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बडे़ बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने तलाक की अर्जी वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। तेज प्रताप ने दो टूक कहा कि उन्होंने तलाक की जो अर्जी दायर की है, उस पर वह कायम हैं। बाद में कोर्ट ने तेजप्रताप की पत्नी ऐश्वर्यो को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 8 जनवरी तय कर दी।

गौरतलब है कि दिल्ली से आए वकील अमित खेमका की अगुवाई में तेज प्रताप के वकीलों की टीम के अनुरोध पर जज उमा शंकर द्विवेदी ने यह आदेश पारित किया। हालांकि सुनवाई से पहले यह चर्चा काफी तेज थी कि तेजप्रताप अर्जी वापस ले सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर कोर्ट परिसर में तेजप्रताप ने कहा, ‘मैंने जो अर्जी दायर की है, उस पर अडिग हूँ और मैं अपनी लड़ाई खुद लड़ूंगा।’

बता दें कि तेजप्रताप ने एक नवंबर को तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद से ही वह घर नहीं लौटे थे। बुधवार को तलाक की अर्जी पर सुनवाई के लिए तेजप्रताप पटना पहुंचे, पर वे अपने घर नहीं गए और न ही अपने किसी परिजन से मुलाकात की। बहरहाल, अब सबकी निगाहें 8 जनवरी पर लगी रहेंगी। लालू प्रसाद यादव अपने परिवार और पार्टी दोनों के हित में जरूर चाहेंगे कि लोकसभा चुनाव से पूर्व इस मामले को सुलझा लिया जाय।

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तेजप्रताप-ऐश्वर्या प्रकरण पर तेजस्वी की सधी हुई प्रतिक्रिया

आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप के पत्नी ऐश्‍वर्या राय से तलाक लेने के मामले पर बहुत सधा हुआ बयान दिया है। उन्होंने इस मामले को निजी करार देते हुए कहा कि दोनों वयस्‍क हैं और अपने जीवन का फैसला लेने में सक्षम हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी ने कहा कि दोनों परिवारों में अभी बातचीत चल रही है और इस पर राजनीतिक बयानबाजी न की जाए।

विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने आगे कहा कि यदि निजी मामलों को सार्वजनिक किया जाएगा तो देश के कई शीर्ष नेता संकट में पड़ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तलाक का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। तलाक का मामला अब अदालत में है और वह इस मामले को देखेगा।

तेजस्‍वी यादव के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि तेज प्रताप और ऐश्‍वर्या के बीच सुलह कराने की परिवार की कोशिशें अभी तक सफल नहीं हो पाई हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार तेजप्रताप यादव को पत्नी ऐश्वर्य राय से तलाक की अर्जी वापस लेने के लिए मनाने में जुटा है लेकिन तेज मानते नहीं दिख रहे।

बहरहाल, सच तो यह है कि पहले से ही चल रहे कई मामलों-मुकदमों के बाद तलाक के इस प्रकरण ने न केवल लालू परिवार की बल्कि आरजेडी की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि अभी आने वाले कई दिनों तक इस प्रकरण पर मीडिया समेत सभी राजनीतिक दलों की नज़र लगी रहेगी।

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जन-जन तक पहुँचने की तैयारी में जदयू मीडिया सेल

बुधवार को जदयू मीडिया सेल मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने पटना महानगर के सभी 19 सेक्टरों के नवमनोनीत संयोजकों को मनोनयन पत्र सौंपा। इस अवसर पर मीडिया सेल प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य धनंजय कुमार शर्मा, अप्पू पटेल, पटना महानगर के संयोजक अशरफ हुसैन, तकनीकी समिति के कोऑर्डेनेटर राहुल सिन्हा, रिसर्च प्रभारी विकास कुमार सिंह, आनंद बिन्दु गुप्ता, पवन सिंह राठौड़, राधा रानी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

इस मौके पर आयोजित कार्यशाला में बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि एक ओर राज्य की करोड़ों जनता है और दूसरी ओर हमारी पार्टी और हमारे नेता के नेतृत्व में चल रही सरकार। जदयू मीडिया सेल को इनके बीच पुल का काम करना है। अपने नेता और अपनी पार्टी के काम को मीडिया के विभिन्न फॉर्मेट के माध्यम से कैसे जन-जन तक पहुँचाए हमें यह सुनिश्चित करना है।

जदयू मीडिया सेल की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य धनंजय शर्मा ने बताया कि सभी जिलों के बाद अभी हाल ही में 320 प्रखंड संयोजकों की घोषणा की गई थी। अब शीघ्र ही शेष प्रखंडों एवं सेक्टरों में संयोजकों का मनोनयन कर दिया जाएगा।

पटना महानगर के सभी 19 सेक्टर संयोजकों के नाम इस प्रकार हैं: विकास कुमार (कुर्जी मैनपुरा), मो. परवेज मल्लिक (सचिवालय), आकाश कुमार (गर्दनीबाग), धनंजय गुप्ता (मीठापुर), कुमार धर्मेद्र पांडेय (पाटलिपुत्रा), साबिर शेख (गौतम बुद्ध), अमित कुमार मिश्रा (कंकड़बाग), अमित कुमार पांडेय (भागवत नगर), अनुज कुमार (बाजार समिति), संदीप वर्मा (अगम कुआं), शाहनवाज (गुरु गोविन्द सिंह), मोख्तार (गायघाट), राशिद हुसैन (पटना सदर पूर्वी), संतोष कुमार (संपतचक), रोशन सिन्हा (दानापुर), कासीद शेख (दानापुर नगर परिषद), स्वामीनाथ पासवान (खगौल नगर परिषद), सौरभ कुमार (फुलवारी शरीफ), अरशद हुसैन (फुलवारीशरीफ नगर)।

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बड़ी दूर से आए हैं… गीत गाकर हमसे दूर चले गए मो.अजीज

अभी-अभी 20 नवंबर की ही तो बात है, मधेपुरा (बिहार) में गोपाष्टमी महोत्सव के समापन के अवसर पर बॉलीवुड के लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर मोहम्मद अजीज के इस गीत (‘बड़ी दूर से आए हैं’) ने खूब तालियां बटोरी थीं… और सप्ताह भी नहीं बीता कि हमसे बहुत दूर चले गए हर दिल अजीज मो. अजीज। अब भारतरत्न लता मंगेशकर से लेकर गायक-गायिकाओं की आज तक की पीढ़ी की आवाज से आवाज मिलाने वाले मो. अजीज को कोई देख ना पाएगा..!

 

Dr.Bhupendra Madhepuri presenting his book "Chhota Lakshya Ek Apradh Hai" to Md.Aziz.
Dr.Bhupendra Madhepuri presenting his book “Chhota Lakshya Ek Apradh Hai” to Md.Aziz.

मधेपुरा में समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. मधेपुरी की मो. अजीज से लंबी बातचीत हुई थी। डॉ. मधेपुरी ने उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के ऊपर लिखी अपनी चर्चित किताब ‘छोटा लक्ष्य एक अपराध है’ भेंट करते हुए उनके साथ के संस्मरणों को उनसे साझा किया था। संयोगवश मो. अजीज के भी कलाम साहब से निकट संबंध थे। फिर क्या था, दोनों लोगों के बीच कलाम साहब जैसे ‘पुल’ हों तो बातों का सिलसिला चल पड़ना लाजिमी ही था।

मो. अजीज ने बातचीत के दौरान डॉ. मधेपुरी से अपनी कुछ पंक्तियां सुनाने का आग्रह किया था, जिसे डॉ. मधेपुरी टाल ना पाए और उन्हें अपनी कुछ पंक्तियां सुनाईं जो ये थीं:
कहाँ जन्मे सुनो हम नहीं जानते
कब मरेंगे कहाँ हम नहीं जानते
काम करना है, रुकना नहीं है यहाँ
कब छुटेगा जहाँ हम नहीं जानते।
मो. अजीज को डॉ. मधेपुरी की पंक्तियां कुछ इस कदर भाईं कि वो तत्काल उसे गुनगुनाने भी लगे। शायद वो इन पंक्तियों को अपना स्वर देना चाहते थे। उन्होंने डॉ. मधेपुरी को मुंबई बुलाया। डॉ. मधेपुरी मुंबई गए भी। लेकिन मुलाकात नहीं होनी थी, सो नहीं हुई… कहाँ जन्मे सुनो हम नहीं जानते… कब मरेंगे कहाँ हम नहीं जानते..!

बहरहाल, 80-90 के दशक में एक से बढ़कर एक हिट गानों को अपनी आवाज से नवाजने वाले मो. अजीज ने मंगलवार को 64 साल की उम्र में मुंबई के नानावटी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका जन्म 2 जुलाई 1954 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कोलकाता से एक कार्यक्रम कर मंगलवार को मुंबई आने के क्रम में मुंबई एयरपोर्ट पर ही उनकी तबीयत खराब हुई। उन्हें वहां से सीधे नानावटी अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।

चलते-चलते बता दें कि अस्सी के दशक में मो. अजीज कई बड़े अभिनेताओं की आवाज बने जिनमें अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, ऋषि कपूर, सनी देओल और गोविंदा के नाम प्रमुख हैं। अमिताभ बच्चन के ऊपर फिल्माया गया गीत ‘तू मुझे कबूल’ (फिल्म ‘खुदा गवाह’) हो या गोविन्दा के ऊपर फिल्माया गया गीत ‘आपके आ जाने से’ (फिल्म ‘खुदगर्ज’), इन गीतों को भला कौन भूल सकता है..! उन्होंने हिन्दी के अलावे मराठी, बंगाली समेत कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए थे। उन्हें ‘मधेपुरा अबतक’ की विनम्र श्रद्धांजलि..!

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जदयू का तीन दिवसीय महिला समागम सम्पन्न

जदयू महिला समागम के तीन दिवसीय जिला सम्मेलन के अंतिम दिन खगड़िया, मधुबनी, दरभंगा, बक्सर, किशनगंज, नालंदा, लखीसराय, सीवान, भोजपुर, कटिहार एवं औरंगाबाद में सम्मेलन का आयोजन हुआ। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह नालंदा में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। वहीं महिला समागम के लिए गठित 12 टीमों की नेत्रियों में कहकशां परवीन, सांसद खगड़िया में, डॉ. रंजू गीता, स.वि.स. मधुबनी में, कविता सिंह, स.वि.स. दरभंगा में, रेणु देवी, पूर्व स.वि.स. बक्सर में, प्रो. हरपाल कौर, पूर्व अध्यक्ष, महिला जदयू किशनगंज में, अंजली सिन्हा, राज्य कार्यकारिणी सदस्य नालंदा में, डॉ. सुहेली मेहता, प्रदेश प्रवक्ता लखीसराय में, डॉ. भारती मेहता, प्रदेश प्रवक्ता सीवान में, अंजुम आरा, प्रदेश प्रवक्ता वैशाली में, कंचन गुप्ता, अध्यक्ष, महिला जदयू कटिहार में एवं श्वेता विश्वास, प्रदेश प्रवक्ता औरंगाबाद में मौजूद रहीं।

नालंदा में अपने संबोधन में आरसीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के युगांतरकारी कार्यों से बिहार में महिलाओं का सम्मान और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उनमें निर्णय लेने की क्षमता आई है। उन्होंने सात निश्चय योजना, कन्या उत्थान योजना, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना आदि की चर्चा करते हुए कहा कि इन योजनाओं की मदद से हमारी बेटिय़ां आज नए जमाने के साथ कदमताल करने की स्थिति में हैं।

जिला महिला समागम में नेत्रियों ने कहा कि महिलाओं की मांग पर ही नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू की। कन्या-सुरक्षा जैसी योजनाओं से बेटियों को सुरक्षा प्रदान की। आज बेटियों के जन्म से लेकर उनके स्नातक होने तक सारी जिम्मेदारियां बिहार सरकार उठा रही हैं। दो पहिए की साइकिल आज बेटियों के उत्थान का प्रतीक बन चुकी हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो जदयू महिला समागम के तीन दिवसीय सम्मेलन को आशानुरूप सफलता मिली। समागम के लिए गठित नेत्रियों की सभी 12 टीमों ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए युगांतरकारी कार्यों को बहन-बेटियों के बीच रखने का काम किया। खासकर महिलाओं के उत्थान के लिए चल रही योजनाओं से उन्हें अवगत कराया गया ताकि उनका लाभ उठाकर आधी आबादी बढ़ते बिहार का हिस्सा बन सकें।

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