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बीएनएमयू के पीआरओ डॉ.सुधांशु निरंतर ऊँचाइयों को छू रहे हैं

डॉ.सुधांशु शेखर का बीपीएससी से दर्शनशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में ज्यों ही चयन किया गया कि वे 3 जून 2017 को टीपी कॉलेज मधेपुरा में योगदान कर लेते हैं। साठ दिनों के अंदर ही वे विश्वविद्यालय के पीआरओ (जनसंपर्क पदाधिकारी) बन जाते हैं और 250 दिनों के अंदर ही विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर दर्शन शास्त्र विभाग में इन्हें प्रतिनियोजित कर लिया जाता है।

बता दें कि अब तक डॉ.सुधांशु के दो दर्जन से अधिक शोध-पत्रों के प्रकाशन तथा एक दर्जन रेडियो वार्ताओं के प्रसारण हो चुके हैं। साथ ही वे शोध-पत्रिका ‘दर्शना’ एवं ‘सफाली’ जर्नल ऑफ सोशल रिसर्च का संपादन भी करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त ‘लोकतंत्र : नीति और नियति’ a1 ‘भूमंडलीकरण और पर्यावरण’ आदि आधे दर्जन पुस्तकों का डॉ.सुधांशु ने संपादन भी किया है। इनकी सर्वाधिक लोकप्रिय दो पुस्तकें हैं- सामाजिक न्याय : आंबेडकर विचार… (2014) एवं गांधी विमर्श (2015)।

यह भी जानिए कि पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर को पटना में आयोजित 41वें दर्शन परिषद बिहार का प्रदेश संयुक्त सचिव बनाया गया जबकि वे परिषद के मीडिया प्रभारी के साथ-साथ परिषद की अर्धवार्षिक शोध-पत्रिका ‘दार्शनिक अनुगूंज’ के संपादक मंडल के सदस्य भी रहे हैं। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी के अनुसार- ऐसा लगता है कि दर्शन परिषद बिहार का लाइफ लाइन बन गया है बीएनएमयू का पीआरओ डॉ.सुधांशु शेखर।

विश्वविद्यालय के क्षेत्रान्तर्गत डॉ.सुधांशु के आभामंडल से प्रभावित होकर कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, प्रतिकुलपति डॉ.फारूक अली एवं डीन डॉ.शिवमुनि यादव ने कहा कि उनकी इस उपलब्धि से मंडल विश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है। तभी तो शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने वाले डॉ.शेखर को इनकी उपलब्धियों के लिए वित्त परामर्थी एससी दास, डीएसडब्ल्यू डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ.ज्ञानंजय द्विवेदी, सीनेटर एवं बीएन मुस्टा के महासचिव डॉ.नरेश कुमार, डॉ.एम.आई.रहमान, खेल पदाधिकारी डॉ.फजल, विकास पदाधिकारी ललन प्रसाद अद्री आदि ने हृदय से बधाई दी है।

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मधेपुरा में पहला अटल टिंकरिंग लैब किरण पब्लिक स्कूल को मिला

जेपी नगर पीपरपत्ता में किरण पब्लिक स्कूल की शाखा को अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने हेतु अटल इनोवेशन मिशन के तहत 20 लाख की राशि नीति आयोग द्वारा अनुदान के रूप में मिला। जिले के पहले टिंकरिंग लैब का उद्घाटन जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (आईएएस), प्रो-वीसी डॉ.फारूक अली, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल, निदेशिका किरण प्रकाश आदि ने सम्मिलित रूप से किया।

बता दें कि डीएम नवदीप शुक्ला ने भव्य समारोह को संबोधित करते हुए यही कहा कि यहाँ के छात्रगण सर्वाधिक भाग्यशाली हैं जिन्हें इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। ऐसे बच्चे अपनी क्षमता का पूरा-पूरा उपयोग एटीएल लैब के माध्यम से कर सकेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि स्कूल ऐसी व्यवस्था करे ताकि जिले के अन्य बच्चे भी यहाँ आकर अपने सपनों को साकार कर सकें।

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि दुनिया का पहला वैज्ञानिक कोई बच्चा ही रहा होगा क्योंकि बच्चों को नई-नई चीजें जानने की सर्वाधिक जिज्ञासा होती है तथा उनके अंदर अद्भुत क्रिएटिविटी भी होती है। डॉ.मधेपुरी ने केपीएस के प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश, निदेशिका किरण प्रकाश एवं सहयोगी शिक्षकों को बधाई देते हुए यही कहा कि आजादी मिलने के बाद बापू ने सबों को गांव की ओर चलने को कहा…… आज पीपरपत्ता गांव के जयप्रकाश नगर में उनके सपनों को साकार होते हम देख रहे हैं।

मुख्य अतिथि प्रो-वीसी डॉ.फारूक अली ने अटल टिंकरिंग लैब को मील का पत्थर मानते हुए यही कहा कि इस अटल लैब से बच्चों को लाभान्वित होने के लिए प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा स्कूल प्रबंधन को सम्मिलित रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान के लिए आईडिया के साथ-साथ सकारात्मक सोच की जरूरत होती है तभी इसका लाभ आम लोगों को मिल पाता है।

डीईओ उग्रेश प्रसाद मंडल ने जानकारी देते हुए यही कहा कि भारत में 54 सौ के करीब अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किया गया है। इस जिले में 20-20 लाख की राशि अनुदान के रूप में प्राप्त करने वाले तीन स्कूल हैं- दो सरकारी- जवाहर नवोदय विद्यालय सुखासन और बी.एल.स्कूल मुरलीगंज एवं प्राइवेट स्कूलों में मात्र एक यही है- किरण पब्लिक स्कूल की शाखा, जेपी नगर पीपरपत्ता। उन्होंने विश्वास जताया कि इस लैब से प्राथमिक नवप्रवर्तन एवं वैज्ञानिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा रूपांतरण देखने को मिलेगा।

प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश एवं प्राचार्य मो.आकिब द्वारा विद्यालय की उपलब्धियों को प्रकाश में लाया गया। सबों ने इस विद्यालय का चयन अटल टिंकरिंग लैब हेतु किये जाने को शान की बात कही।

आरम्भ में गायक किशोर जी एवं रोशन जी द्वारा गणेश वंदना एवं स्वागत गान प्रस्तुत किया गया। स्कूली बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सृजन दर्पण के निदेशक विकास कुमार की प्रस्तुतियां खूब तालियां बटोरी। आरंभ में निदेशिका किरण प्रकाश द्वारा अतिथियों को बुके एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

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टूट गई रालोसपा, कुशवाहा के लिए संकट की घड़ी

अभी-अभी एनडीए से अलग हुई रालोसपा आज दो भागों में बंट गई। बिहार में पार्टी के दोनों विधायक और एकमात्र विधानपार्षद ने एनडीए के साथ रहने की घोषणा करते हुए रालोसपा पर दावा तक ठोंक दिया। इन नेताओं ने स्वयं को असली रालोसपा का नेता बताते हुए अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिगत राजनीति करने का आरोप लगाया।

पटना में रालोसपा के दोनों विधायकों – सुधांशु शेखर और ललन पासवान – के साथ विधानपार्षद संजीव श्याम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन कर एनडीए में रहने की घोषणा की और कहा कि वे एनडीए में थे और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि रालोसपा एनडीए से कभी अलग हुई ही नहीं है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पूर्व रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने एनडीए में ‘सम्मान’ नहीं मिलने के कारण अलग होने की घोषणा की थी।

बहरहाल, संवाददाता सम्मेलन में तीनों नेताओं ने रालोसपा पर दावा ठोंकते हुए कहा कि अगर जरूरत पडे़गी तो वे लोग निर्वाचन आयोग से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं। उपेन्द्र कुशवाहा पर व्यक्तिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने कहा कि वे केवल अपने लाभ की बात करते हैं। उन्हें ना पार्टी से मतलब रहा ना ही उन्हें बिहार से मतलब रहा।

कुल मिलाकर पहले ही कठिन दौर से गुजर रहे उपेन्द्र कुशवाहा के लिए ये सचमुच बहुत बुरी खबर है। पार्टी में दो फाड़ होने से स्पष्ट है कि महागठबंधन में भी उन्हें वो ‘भाव’ नहीं मिलेगा जिसकी उन्हेँ अपेक्षा होगी। कांग्रेस के दिन उधर अलग फिर गए हैं। तीन-तीन राज्यों में सत्ता में आने के बाद उसके हौसले बुलंद हैं और बहुत संभव है कि पार्टी बिहार में अधिक हिस्सेदारी चाहेगी। इसका खामियाजा भी कहीं ना कहीं रालोसपा को भुगतना पड़ेगा।

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अमिताव घोष को 2018 का ज्ञानपीठ पुरस्कार

अंग्रेजी के सुविख्यात साहित्यकार अमिताव घोष को वर्ष 2018 के लिए 54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाएगा। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे अंग्रेजी के पहले लेखक हैं। शुक्रवार को प्रतिभा रॉय की अध्यक्षता में आयोजित ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी को तीन साल पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार की भाषा के रूप में शामिल किया गया था और अमिताव घोष देश के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अंग्रेजी के पहले लेखक हैं।

साहित्य अकादमी और पद्मश्री सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित अमिताव घोष का जन्म 1956 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उन्हें लीक से हटकर काम करने वाले रचनाकार के तौर पर जाना जाता है। वे इतिहास के ताने बाने को बड़ी कुशलता के साथ वर्तमान के धागों में पिरोने का हुनर जानते हैं। ‘द सर्किल ऑफ रीजन’, ‘दे शेडो लाइन’, ‘द कलकत्ता क्रोमोसोम’, ‘द ग्लास पैलेस’, ‘द हंगरी टाइड’, ‘रिवर ऑफ स्मोक’ और ‘फ्लड ऑफ फायर’ आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

बता दें कि ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं। यह भी जानें कि पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था।

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मधेपुरा में 67वाँ राज्यस्तरीय टे.टे.का चार दिवसीय समारोह

बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में चार दिवसीय (11-14 तक) टे.टे. प्रतियोगिता में 14 जिलों के 5 Age ग्रुपों में बांटे गये 125 खिलाड़ियों द्वारा रोज-रोज नए-नए जौहर दिखाये जायेंगे। खेल का आनंद लेने हेतु जिले के खेल प्रेमियों की भीड़ स्टेडियम में देखने योग्य रही।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त मुकेश कुमार, समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, मंडल विश्वविद्यालय के खेल पदाधिकारी डॉ.फजल, टे.टे.स्टेट सचिव मुकेश राज, प्रो.चंद्रशेखर, प्रशांत कुमार, विनय कुमार झा, संतोष झा , ध्यानी यादव, प्रदीप, संदीप आदि की उपस्थिति में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (आईएएस) द्वारा दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। आये हुए टे.टे.खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाते हुए डीएम ने स्वयं टेबल टेनिस प्रतियोगिता की शुरुआत की। जिलाधिकारी ने सभी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन कर राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्र के नाम को रोशन करने की शुभकामनाएं दी। डीएम शुक्ला ने कहा कि पिछले कई वर्षों से मधेपुरा में State Level T.T. Competition का आयोजन बड़ी बात है।

सूबे बिहार के 14 जिले से आये 125 खिलाड़ियों 10 तकनीकी पदाधिकारियों एवं समस्त खेल प्रेमियों को संबोधित करते हुए मधेपुरा के कलाम कहे जाने वाले समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने अपने सारगर्भित संबोधन में बच्चों से यही कहा-

बच्चो ! पहले लोग यही बोला करते थे- पढ़ोगे-लिखोगे होगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब…… परंतु आजकल वह बात नहीं रही। आज यदि एक ओर प्रतिभा संपन्न गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा जाता है तो वहीं दूसरी ओर खेल की दुनिया का सरताज मिडिल पास सचिन तेंदुलकर को भी “भारत रत्न” से सम्मानित किया जाता है।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि भारत की एकता व अखंडता को बनाये रखने के लिए भारतीय रेल, खेल, हिन्दी और गांधी की जितनी प्रशंसा की जाय वह कम होगी। साथ ही अर्थ के अभाव में किसी भी क्षेत्र में कुंठित व अर्थहीन हो रही प्रतिभा को बचाने का संकल्प वे बार-बार दोहराते रहे…… तथा इस खेल में मधेपुरा का नाम रोशन करने वाले सभी खिलाड़ियों-रियांशी, पायल, सुंदरम, हंसराज, वैष्णवी आदि की जमकर तारीफ करते रहे।

जिला टे.टे.के अध्यक्ष प्रो.चंद्रशेखर ने कहा कि खेल के सफल आयोजन हेतु बिहार से आये समस्त खिलाड़ियों के हर तरह की असुविधाओं को दूर करने का प्रयास किया जायेगा तथा उनकी सुख-सुविधा का ख्याल भी रखा जाएगा। कार्यक्रम को जहाँ प्रोत्साहित किया स्टेट टे.टे.सचिव मुकेश राज ने वहीं आयोजन समिति के सचिव अमित कुमार मुनि, अध्यक्ष प्रशांत कुमार, उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार, पप्पू, एथलेटिक सचिव संत कुमार, कबड्डी सचिव अरुण कुमार, वालीबॉल सचिव अनिल राज सहित अशफाक आलम, दीपक प्रकाश, विकास-राजीव-अमित-आशीष…… आदि द्वारा आयोजन की सफलता पर हमेशा नजर रखी जा रही है।

खेल में जौहर दिखाने वाले नाम है- पटना की प्रगति, मुजफ्फरपुर के पंकज , मधेपुरा की रियांशी, पटना की ही माही गुप्ता , फाल्गुनी मुखर्जी और योगेश…..आदि।

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विकसित समझ वाले 266 बाल वैज्ञानिक जुटेंगे राजधानी पटना में

राज्य स्तरीय 46वीं विज्ञान प्रदर्शनी में राज्य भर के 500 से अधिक बाल वैज्ञानिक तथा उनके मार्ग-दर्शक शिक्षक 20-21 दिसंबर को राज्य शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में भाग लेंगे। स्कूलों में पढ़नेवाले ये बच्चे जीवन की चुनौतियों के बाबत वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करेंगे।

बता दें कि SCERT के डायरेक्टर विनोद कुमार सिंह के कथनानुसार यह विज्ञान प्रदर्शनी पटना के महेंद्रु स्थित SCERT कैंपस में होगी। जिसका उद्घाटन करेंगे शिक्षा मंत्री कृष्णानंद प्रसाद वर्मा और मुख्य अतिथि होंगे अपर मुख्य सचिव आर.के.महाजन।

यह भी जान लें कि एससीईआरटी के विज्ञान विभाग के अध्यक्ष टी.एन.प्रसाद के अनुसार प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए सभी प्रतिभागीगण 19 दिसंबर को ही अपना निबंधन करा लेंगे। हिदायत के साथ श्री प्रसाद ने ऐलान कर दिया है कि 20 दिसंबर को पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं इसका हिस्सा नहीं बन पायेंगे।

यह भी बता दें कि सूबे के छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक समझ विकसित करने के लिए प्रत्येक वर्ष राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित की जाती है जिसका विषय एवं उप-विषय एनसीईआरटी (नेशनल कौंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) द्वारा निर्धारित किया जाता है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रदर्शनी में हर जिले से चुनकर आयेंगे सर्वश्रेष्ठ सात बाल वैज्ञानिक जिसका मुख्य विषय है- “जीवन की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान”। इसके छह उपविषय रखे गये हैं- (1) कृषि एवं जैविक खेती (2) स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (3) संसाधन प्रबंधन (4) अपशिष्ट प्रबंधन (5) परिवहन और संचार (6) गणितीय प्रतिरूपण। इनमें से कोई विषय चुनने के लिए विद्यार्थी स्वतंत्र है। यह भी याद कर लें कि इन सभी विषयों में प्रथम आने वाले बाल वैज्ञानिक पुरस्कृत किये जायेंगे……. और आगे NCERT द्वारा लगाई जाने वाली राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में अपने सुबे बिहार का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

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अब मंगल की आवाज पहुँची धरती पर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के इनसाइट लैंडर की मदद से पहली बार लाल ग्रह की आवाज धरती पर पहुँची है। यह आवाज हल्की आंधी की है। लैंडर ने जो आवाज भेजी है वह मंगल ग्रह पर 10 से 15 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवा की हल्की गड़गड़ाहट की है, जो बहुत हद तक हमारे यहां चलने वाली हवा जैसी है। इस आवाज को सुनना धरती पर रहने वाले लोगों के लिए सचमुच रोमांचक होगा। बता दें कि नासा ने यह लैंडर 26 नवंबर को मंगल ग्रह पर भेजा थ। वैज्ञानिकों का कहना है कि दो सप्ताह के भीतर इस तरह का परिणाम मिलना लैंडर की बड़ी उपलब्धि है।

इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रमुख खोजकर्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘सिस्मोमीटर से मिला यह शुरुआती 15 मिनट का पहला डाटा है। ’इस आवाज को www.nasa.gov/insightmarswind पर सुना जा सकता है। उन्होंने आगे कहा – ‘यह किसी झंडे के लहरने के दौरान निकलने वाली आवाज की तरह है। यह आवाज वास्तव में पारलौकिक है।’

बता दें कि इनसाइट लैंडर को मंगल ग्रह की अंदरूनी जानकारी का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें भूकंप का पता लगाना और ग्रह की ऊपरी सतह से निकलने वाली गर्मी का अध्ययन करना शामिल है।

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मोदी ने शरद पर कुछ यूँ किया कटाक्ष

भाजपा के वरिष्ठ नेता व बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को लोकतांत्रिक जनता दल के संस्थापक व मधेपुरा के पूर्व सांसद शरद यादव को आड़े हाथों लिया। शरद यादव पर पर कटाक्ष करते हुए कहा उन्होंने कहा कि पूर्व जदयू प्रमुख को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की कथित बेनामी संपत्ति में कुछ भी गलत नहीं लगता है। गौरतलब है कि मोदी की यह टिप्पणी चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू से जेल जाकर मुलाकात करने की पृष्ठभूमि में आई है।

सुशील कुमार मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘शरद यादव को लालू परिवार की बेनामी सम्पत्ति जायज लगती है, इसलिए वे जदयू से बगावत कर राजद का साथ देने लगे’’ उपमुख्यमंत्री मोदी ने ‘‘राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर अमर्यादित टिप्पणी करने, लेकिन गांधी परिवार को लाभ पहुंचाने वाले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर घोटाला में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से पकड़ कर लाने में उनकी चुप्पी’’ की भी आलोचना की।

बता दें कि तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच शरद नई संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि एनडीए से असंतुष्ट चल रहे केन्द्रीय मंत्री व रालोसपा नेता उपेन्द्र कुशवाहा के साथ मिलकर वे महागठबंधन में अपनी उपस्थिति और असरदार बनाना चाहते हैं।

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दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता पर जदयू का सम्मान-समारोह

पिछले कुछ महीनों से सभी जिलों व प्रमंडलों में लगातार चले पार्टी के कार्यक्रमों और सम्मेलनों के बाद जदयू इन आयोजनों को सफल बनाने वाले पार्टी के समर्पित सदस्यों को सम्मानित कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता से जुड़े प्रदेश व जिला स्तर के सभी दलित-महादलित नेताओं को सम्मानित किया। सम्मान-समारोह में भवन-निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष निराला, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व मंत्री सह विधानपार्षद अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री राम लषण राम ‘रमण’, विधायक रत्नेश सदा, विधायक व जदयू दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवि ज्योति, विधायक प्रभुनाथ राम, पूर्व विधायक अरुण मांझी, पूर्व विधायक मंजू देवी, पूर्व विधायक रेणु देवी, पूर्व विधायक शिवाधार पासवान, दलित-महादलित प्रकोष्ठ के प्रभारी विद्यानंद विकल, महादलित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हुलेश मांझी समेत दलित-महादलित प्रकोष्ठ के सभी जिलाध्यक्षों तथा प्रदेश व जिला स्तर के लगभग तीन सौ नेताओं को शाल देकर सम्मानित किया गया। दलित-महादलित नेताओं के अतिरिक्त सम्मान-समारोह में पार्टी के कई और नेता उपस्थित रहे जिनमें विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधानपार्षद ललन सर्राफ, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, मुख्यालय प्रभारी चंदन सिंह एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप प्रमुख हैं। सम्मान-समारोह में भोज का भी आयोजन किया गया।

JDU General Secretary RCP Singh addressing district & state level Dalit-Mahadalit leaders in Samman Samaroh.
JDU General Secretary RCP Singh addressing district & state level Dalit-Mahadalit leaders in Samman Samaroh.

इस अवसर पर उपस्थित नेताओं को दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता पर बधाई देते हुए श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि इन कार्यक्रमों की सफलता से इस बात पर मुहर लगी कि समाज के वंचितों को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के विचारों में कितनी आस्था है। उन्होंने कहा कि जदयू किसी जातिविशेष की पार्टी नहीं। हमारा मॉडल समावेशी है और समाज की सेवा ही हमारे संगठन का उद्देश्य है। हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने नेता की सोच और उनके काम का लाभ गांव-गांव तक पहुँचाएं। लोगों में यह भरोसा और विश्वास हो कि जदयू हमारी पार्टी है।

JDU Media Cell State President Dr. Amardeep with SC-ST Welfare Minister Ramesh Rishidev in Samman Samaroh.
JDU Media Cell State President Dr. Amardeep with SC-ST Welfare Minister Ramesh Rishidev in Samman Samaroh.

बिहार सरकार के मंत्रियों महेश्वर हजारी, संतोष निराला एवं रमेश ऋषिदेव ने कहा कि नीतीश कुमार के कार्यों से सबसे अधिक लाभ समाज के वंचित वर्ग को पहुँचा है। दलितों-महादलितों के बीच जैसी विश्वसनीयता नीतीश कुमार की है वैसी और किसी नेता की नहीं। उन्होंने अपने कार्यों से जैसी छवि बनाई है उसकी कोई सानी नहीं। वहीं, अशोक चौधरी ने कहा कि सदियों से शोषित समाज को नीतीश कुमार ने नई राह दिखाने का काम किया है। उनके योगदान को यह समाज कभी भुला नहीं सकता। अन्य वक्ताओं ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि बिहार में आने वाले लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू व एनडीए को ऐतिहासिक सफलता मिलेगी।

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पीयू चुनाव-परिणाम पर एक नज़र

बिहार में सत्तारूढ़ जदयू ने राज्य में सहयोगी भाजपा के हंगामे के बावजूद पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के पद पर कब्जा कर लिया है। वहीं, इस चुनाव में भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उपाध्यक्ष समेत तीन पदों पर जीत हासिल की।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के लिए कल हुए चुनाव में छात्र जदयू से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहित प्रकाश और कोषाध्यक्ष पद पर कुमार सत्यम निर्वाचित घोषित किए गए। बता दें कि इससे पूर्व जदयू की छात्र इकाई ने 2012 में संयुक्त सचिव का पद जीता था। इस बार अध्यक्ष पद पर काबिज होना उसके लिए बड़ी उपलब्धि कही जाएगी। वैसे एबीवीपी को भी चुनाव-परिणाम से संतुष्ट होना चाहिए कि उसकी झोली में शेष तीनों पद गए हैं। एबीवीपी उम्मीदवार अंजना सिंह उपाध्यक्ष, मणिकांत मणि महासचिव और रवि राज संयुक्त सचिव निर्वाचित घोषित किए गए हैं।

इससे पूर्व छात्र संघ चुनाव प्रचार के अंतिम दिन देर शाम जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात का छात्र संगठनों और भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने विरोध किया। यही नहीं, एबीवीपी के कार्यकर्ता रवि करण को हिरासत में रखे जाने के विरोध में अगले दिन एक धरने का आयोजन किया गया। इसमें भाजपा के स्थानीय विधायक अरूण कुमार सिन्हा और विधायक सह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नीतिन नवीन ने भी हिस्सा लिया। इन नेताओं ने प्रशांत किशोर पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को प्रभावित करने के लिए कुलपति सहित सभी चुनाव पदाधिकारियों पर अपने उम्मीदवारों के पक्ष में दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी तक की मांग की थी। उधर प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा था कि पटना यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में संभावित हार की घबराहट मेरी गाड़ी पर पत्थर मारने से कम नहीं होगी।

बहरहाल, खासा हंगामेदार रहे इस चुनाव की गौर करने वाली बात यह रही कि जदयू और भाजपा की छात्र इकाईयों की आपसी तनातनी के बावजूद पांचों पद इन्हीं दो पार्टियों के पास गए। राजद, कांग्रेस, वामदल और जाप की छात्र इकाईयों के हाथ कुछ भी नहीं लगा। एनडीए के लिए जहां ये बात संतोष देने वाली है, वहीं आगामी लोकसभा चुनाव के संभावित महागठबंधन के लिए ये आत्ममंथन का समय है। और हाँ, यह रेखांकित करना भी जरूरी है कि एनडीए के घटक दलों जदयू और भाजपा को भी इस चुनाव से संबंधों में आई कड़वाहट को दूर करने के लिए कई स्तरों पर संवाद करना होगा।

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