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अब बाबा विशु के समाधि स्थल पर लगने लगा है चार दिवसीय राजकीय मेला

मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर दक्षिण लौआलगान पूर्वी पंचायत के पचरासी में लोकदेव बाबा विशु राउत का समाधि स्थल है जहां 425 वर्षों से 14-17 अप्रैल यानी चार दिवसीय मेला लगता है। जानिए कि पचरासी बहियार स्थित पशुपालकों के लोकदेव बाबा विशु की समाधि स्थल पर अब नीतीश सरकार ने कई वर्षों से 4 दिवसीय मेला को राजकीय मेला घोषित कर दिया है।

बता दें कि अब इस मेले में बिहार के कोने-कोने से आये श्रद्धालुओं के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नेपाल, भूटान आदि से भी भारी संख्या में लोग आने लगे हैं। इस मेले में प्रत्येक दिन कम से कम एक लाख पशुपालक कच्चे दूध का दुग्धाभिषेक करते हैं।

यह भी बता दें कि सर्वोच्च मेला समिति, चरवाहा कल्याण संघ और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि रविवार को अहले सुबह 2:00 बजे से ही समाधि स्थल का कपाट खोलकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समाधि की पूजा की गई तत्पश्चात कपाट खुलते ही हजारों भक्तों की लंबी कतार दुग्धाभिषेक करने के लिए आगे खिसकने लगी।

सर्वोच्च मेला समिति के सदस्यों के अनुसार मेला को राजकीय मेला घोषित किये जाने के बाद यहाँ की व्यवस्था दिन प्रतिदिन सुदृढ़ होती जा रही है। दूध को सुरक्षित रखकर खीर बनाकर प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल चढ़ाए गये दूध को प्रसाद के रूप में आस-पास के 25-30 गांवों के बड़े और बच्चे ले जाते हैं। फिर भी 20% दूध को बहने से कोई रोक नहीं पाता है। समाधि स्थल पर गिरती दूध की अविरल धारा से बाल्टी व टिन में दूध भर कर ले जाने वालों कि जहां दिनभर भीड़ लगी रहती है वहीं श्रद्धालुओं द्वारा दुग्धाभिषेक के साथ-साथ बताशा और गांजा भी चढ़ावे में जाते हैं। पहले दिन लगभग सवा लाख श्रधालुओं द्वारा ढाई लाख लीटर दूध से अभिषेक किया गया माना जाता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर जारी किये गये आचार संहिता के चलते बड़े नेताओं व जनप्रतिनिधियों का आगमन नहीं हुआ। पुलिस-प्रशासन एवं स्थानीय वॉलिंटियर्स भीड़ एवं व्यवस्था को संभालने में जुटे हैं।

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वाराणसी में मोदी बनाम प्रियंका की संभावना !

राजनीति के गलियारे में इन दिनों एक चर्चा काफी जोर पकड़ रही है कि कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। जी हाँ, कांग्रेस के सूत्र कह रहे हैं कि इसे लेकर पार्टी में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रियंका चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो चुकी हैं।

बात जहां तक कांग्रेस पार्टी की है तो वह भले ही इस मुद्दे पर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ कहने को तैयार नहीं हो लेकिन इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं। पार्टी में ऐसा मानने वालों की कमी नहीं कि प्रियंका अगर वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो मोदी को वहां घेरा जा सकता है। इसके पीछे दो तर्क दिए जा रहे हैं – पहला यह कि इस बार मोदी लहर जैसी कोई बात नहीं है और दूसरा यह कि पिछले चुनाव में करीब चार लाख वोट मोदी के खिलाफ लड़ रहे प्रत्याशियों में बंटे थे। अब अगर कांग्रेस को सपा और बसपा का सहयोग मिलता है तो मोदी को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में वाराणसी से चुनाव जीते भाजपा उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले थे जबकि आप के अरविन्द केजरीवाल को 2,09,238 मत। वहीं कांग्रेस को यहां 75,614, बसपा को 60,579 और सपा को 45,291 मत हासिल हुए थे। कांग्रेस की सोच यह है कि अगर भाजपाविरोधी इन सारे मतों को एक जगह कर दिया जाए तो मोदी को न केवल कड़ी टक्कर दी जा सकती है बल्कि प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व और नेहरू-गांधी परिवार का आकर्षण भी साथ में जोर दिया जाए तो चौंकाने वाला परिणाम भी मिल सकता है।

बहरहाल, ये सारे समीकरण अपनी जगह हैं। कांग्रेस और खासकर प्रियंका गांधी सीधे मोदी को चुनौती देने का मन बना पाते हैं या नहीं, यह देखने की बात होगी।

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मधेपुरा का दोनों चुनाव मॉडल रूल के अनुरूप होगा

मधेपुरा में आजकल सवेरे से ही दोनों चुनावों की चर्चा में गर्माहट आने लगती है। एक ओर 15 अप्रैल को होने वाले मधेपुरा अधिवक्ता संघ के चुनाव की सरगर्मी प्रातः 6:00 बजे से ही कोर्ट में परवान चढ़ने लगती है तो दूसरी ओर 23 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की प्रचार गाड़ियों से ध्वनि विस्तारक यंत्र द्वारा प्रस्फुटित गगनभेदी आवाज निकलने लगती है।

बता दें कि मधेपुरा लोकसभा चुनाव एवं मधेपुरा जिला अधिवक्ता संघ चुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। जहाँ जिला अधिवक्ता संघ के 21 पदों पर चुनाव होना है जिसके विरुद्ध कुल 37 अधिवक्ता प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े हैं वहीं मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से एक सांसद पद के लिए चुनाव होना है जिसके निमित्त 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं।

यह भी जान लें की अधिवक्ता संघ चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी अधिवक्ता अजय सहाय वर्मा और लोकसभा चुनाव के निर्वाचित पदाधिकारी डीएम नवदीप शुक्ला दोनों के दोनों चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने को लेकर कृत संकल्पित हैं तथा पूरी तरह कटिबद्ध हैं। कहीं से भी कोई भेदभाव या किसी प्रकार के पक्षपात की कोई संभावना नहीं है।

यह भी बता दें कि मधेपुरा अधिवक्ता संघ के निर्वाची पदाधिकारी अजय सहाय वर्मा द्वारा संघ के 493 अधिवक्ता मतदाताओं सहित 14 पीठासीन सह गणक घोषित पदाधिकारियों को जानकारी दी गई कि 15 अप्रैल को सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे दिन तक अधिवक्ता संघ परिसर में बनाये गये 3 मतदान केंद्रों पर मतदान किये जाने हेतु सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। मतदान के तुरंत बाद मतगणना होगी और विजयी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जायेगी।

चलते-चलते यह भी कि इस अधिवक्ता संघ चुनाव में सहायक निर्वाचक पदाधिकारी की भूमिका में लाल बहादुर सिंह एवं मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका में राजेन्द्र कुमार ने सभी 14 पीठासीन सह गणक पदाधिकारियों को चुनाव व मतगणना से संबंधित नियमों व शर्तों की विशेष जानकारियाँ दे दी है।

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दिनभर प्रथम चरण की 4 सीटों पर मतदान, शाम में चैती छठ का अर्घ्यदान

जहाँ एक ओर लोकसभा चुनाव- 2019 के महासंग्राम के सात चरणों में होने वाले मतदान के प्रथम चरण का मतदान 11 अप्रैल (गुरुवार) को दिनभर बिहार की 4 सीटों- गया, नवादा, औरंगाबाद और जमुई में मिलाजुला कर शांतिपूर्वक चलता रहा वहीं लोक आस्था के महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान सूबे बिहार में संध्या अर्घ्य के साथ संपन्न होता रहा।

बता दें कि बुद्ध और महावीर की इस पावन धरती पर इन दोनों महापर्वों का उत्साह चरम पर रहा। बिहार की इन 4 सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 2.27 फ़ीसदी अधिक वोट पड़े….. वह भी तब जब दिनभर सूरज की तपिश के कारण थर्मामीटर का पारा 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच नाचता रहा। छठ व्रतियों ने पहले लोकतंत्र के महापर्व में सम्मिलित होकर मतदान किया और बाद में लोक आस्था के छठ महापर्व में समर्पित होकर अस्ताचलगामी सूर्य को शाम में अर्घ्यदान किया।

ध्यातव्य है कि गुरुवार (11 अप्रैल 2019) को बिहार दो महान पर्वों का साक्षी बना-  (1) लोकतंत्र का महापर्व – लोकसभा चुनाव का मतदान और (2) लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान। जमुई में तो सूर्योदय के साथ ही मतदाता बूथ की ओर जाने लगे…… दिन भर वोट पड़े…… और शाम ढलते ही मतदातागण भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने घाटों की ओर निकल पड़े। जमुई में कड़ी सुरक्षा के बीच 54% वोट डाले गये। फिर भी जहाँ पिछले चुनाव की अपेक्षा जमुई शहरी क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत कम रहा वहीँ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी चुनाव के प्रति मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

जहाँ गया के अधिकांश शहरी बूथों पर सशस्त्र महिला बटालियन की तैनाती देखी गयी, वहीं नवादा संसदीय क्षेत्र के कई बूथों पर ईवीएम में गड़बड़ी के कारण मतदान की शुरुआत विलंब से हुई….. साथ ही यह कि औरंगाबाद के सदर प्रखंड के बेली गांव के मतदाताओं द्वारा वोट के बहिष्कार करने के बावजूद पिछली बार की तुलना में लगभग पौने दो फ़ीसदी कम वोटिंग हुई।

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विश्व होम्योपैथी दिवस पर नीतीश ने लहराया ऐतिहासिक परचम

आज एक नहीं….. बिहार के दो-दो नीतीश का परचम चतुर्दिक लहरा रहा है। एक हैं डॉ.नीतीश जिसने मुंगेर केे  एक साधारण परिवार व ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और दूसरे हैं इंजीनियर नीतीश जो बिहार में न्याय के साथ विकास की गंगा बहाने में लगे हैं और अपना बेशकीमती जीवन बिना किसी चाहत के दलितों-शोषितों के सेवार्थ न्योछावर करने में लगे हैं।

बता दें कि जर्मनी से….. बंगाल के रास्ते भारत पहूँची होम्योपैथी की सालाना ग्रोथ 22% है जो जल्द ही चिकित्सा का प्रमुख विकल्प होने जा रहा है। भला क्यों नहीं, फ्रांस में तो 47.5 प्रतिशत होम्योपैथी की दवा खपत होती है। दुनिया के लगभग 100 देशों में लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का लाभ ले रहे हैं तथा लगभग 50 देशों में होम्योपैथी को अलग औषधीय प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

आज मुंगेर जिले के कल्याणपुर गांव की गलियों से निकलकर होम्योपैथी के सरताज डॉ.नीतीश चंद्र दुबे का परचम दुनिया में लहरा रहा है। इस यात्रा के पीछे डॉ.नीतीश का अथक परिश्रम है। ये दोनों नीतीश- मुख्यमंत्री ई.नीतीश और डॉ.नीतीश द्वारा जन सेवा को ही सर्वोपरि समझा जाता है। एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के दौरान ही इनकी नींद पूरी होती है। भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होने के चलते ये दोनों नीतीश यही कहते हैं….. आपके पास एक बड़ा उद्देश्य हो और सपना हो तो वो सोने नहीं देता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि संपूर्ण विश्व के बड़े-बड़े मंचों पर दोनों नीतीश को बुलाया जाता है…… मुख्यमंत्री ई.नीतीश को पीएम मटेरियल कह कर नवाजा जाता है तो डॉ.नीतीश को लंदन में मेडिकल के छात्रों को होम्योपैथ के महत्व को बताने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कभी डॉ.नीतीश को जर्मनी तो कभी स्विट्जरलैंड में अवार्ड देकर सम्मानित किया जाता है। हाल ही में  डेलहाइट्स की ओर से डॉ.नितीश को डॉ.त्रेहान के साथ सम्मानित किया जा चुका है। और तो और विगत नवंबर में ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भारत कांक्लेव के दौरान भी डॉ.नीतीश को सम्मानित किया गया था।

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राष्ट्रीय महात्योहर (चुनाव) के दौरान त्योहारों को लेकर भी बैठकें

मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र न.-13 में भयमुक्त, निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग से भेजे गये तीन प्रेक्षकों- (1) सामान्य प्रेक्षक पुनीत गोयल (IAS) (2) पुलिस प्रेक्षक एल.भी.ए. देव कुमार (IPS) एवं व्यय प्रेक्षक रतन कुमार माथुर (IRS), ने मंगलवार को प्रत्याशियों के साथ मधेपुरा समाहरणालय सभाकक्ष में बैठक की एवं चुनाव से संबंधित जानकारियाँ उपलब्ध कराई।

बता दें कि बैठक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम नवदीप शुक्ला (IAS) व एसपी संजय कुमार (IPS) के अलावे चुनाव में खड़े प्रत्याशीगण या उनके प्रतिनिधिगण उपस्थित थे। प्रेक्षकों द्वारा प्रत्याशियों या उनके प्रतिनिधियों से उनकी समस्याएं सुनी गई तथा समाधान किया गया।

यह भी बता दें कि बैठक में प्रेक्षकों ने कहा कि प्रत्याशी किसी भी समस्या को लेकर प्रेक्षक या जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम से बात कर सकते हैं ताकि निदान जल्द से जल्द किया जा सके। मधेपुरा संसदीय क्षेत्र के आलमनगर विधानसभा में डीसीएलआर ललित कुमार सिंह, बिहारीगंज में एसडीएम-एसजेड हसन, मधेपुरा में एसडीएम वृंदालाल, सोनवर्षा विधानसभा में राजेंद्र दास, सहरसा में SDO शंभू नाथ झा तथा महिषी में धीरेंद्र कुमार झा को डिस्पैच व प्राप्ति प्रभारी पदाधिकारी बनाया गया है।

जहाँ एक ओर चुनाव का महासमर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करने हेतु प्रेक्षकों व प्रत्याशियों की बैठकें हो रही है वहीं दूसरी ओर रामनवमी को लेकर हरेक थानाध्यक्ष की अध्यक्षता में मंगलवार को शांति समिति की बैठक आयोजित की गई है। जहाँ रामनवमी के जुलुस के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता को स्वीकार की गई। उपद्रवियों पर पुलिस की पैनी नजर रखने के साथ-साथ संवेदनशील जगहों एवं चौक-चौराहे पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल भी तैनात किये जाने की स्वीकृति दी गई।

चलते-चलते यह भी कि 14 से 17 अप्रैल तक लगने वाले बाबा विशु राउत राजकीय मेला पचरासी की तैयारी हेतु आयोजित बैठक मंगलवार को ही एसडीओ एसजेड हसन की अध्यक्षता में हुई जिसमें शांति बनाये रखने हेतु मेले में किसी भी राजनीतिक पार्टी का बैनर-पोस्टर लगाने की अनुमति नहीं दी गई। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जायेगी।

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चुनावी महासमर की तीन सीटें तय करेंगी लालू की अहमियत

इस संसदीय चुनावी महासमर 2019 में बिहार प्रदेश की 3 सीटें- मधेपुरा, पाटलिपुत्र और सारण लालू प्रसाद की सियासी अस्तित्व की पैमाइश कर देंगी। भला क्यों नहीं, इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद के राजनीतिक करियर का कोई-न-कोई सूत्र जुड़ा हुआ दिखता है। इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद यादव चुनाव लड़ चुके हैं। मधेपुरा में राजनीति के सिद्धहस्त लालू को जिस शरद यादव ने राजग के उम्मीदवार के रूप में पटकनी दी थी उसी शरद को हाथ में लालटेन पकड़ा कर आज मझधार से निकालने में लगे हैं लालू।

बता दें कि 2014 के चुनाव में राजद के पप्पू यादव से जो शरद यादव शिकस्त खा चुके हैं….. वही दोनों इस बार आमने-सामने हैं। पप्पू यादव लोगों के बीच यही कहते हैं- “आपकी सेवा करने वाला इस माटी का बेटा पप्पू चाहिए या वोट लेकर दिल्ली में रहने वाला। लालू का विरोध करने वाला आज उनके नाम पर वोट मांग कर बैतरनी पार करने में लगा है। ……. लोगों को समझना होगा कि बाढ़ हो या सुखाड़ हर समय बेटे की तरह यह पप्पू आपलोगों की सहायता में तत्पर रहता है।…… फैसला आपको करना है….. निर्णय आप को लेना है। मधेपुरा की आजादी के लिए मतदान करेंगे और लालू के लिए जिस पप्पू ने गोली खाई उसे पुनः सेवक बनाने के लिए मतदान करेंगे।”

यह भी जान लें कि एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाये गये कोसी के विकास पुत्र के नाम से लोकप्रिय दिनेश चन्द्र यादव बिना किसी शिकवा-शिकायत में फंसे बस यही कहा करते हैं कि सीएम नीतीश कुमार के शासन में प्रदेश विकसित होगा और पीएम नरेंद्र मोदी के शासन में देश सुरक्षित रहेगा।

और हाँ ! पाटलिपुत्र में कभी लालू ने अपने ही सहयोगी रंजन यादव से पटकनी खाई थी जब प्रो.रंजन यादव जदयू के प्रत्याशी थे। बाद में लालू के अभिन्न रामकृपाल राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो लालू की बेटी मीसा भारती को पराजित कर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गये…. इस बार फिर दोनों आमने-सामने हैं। यह मुकाबला लालू बनाम रामकृपाल ही बोलने लगे हैं लोग।

अंत में बात आती है सारण की सीट। जब सारण को छपरा के नाम से जाना जाता था तब लालू छपरा से 4 बार सांसद चुने गए थे। पिछली बार राबडी देवी यहाँ से भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से पराजित हो गई। इस बार वहीं से लालू के समधी चंद्रिका राय (पुत्र दरोगा राय पूर्व सीएम) को राजद का उम्मीदवार बनाया गया है। ये तीन सीटें लालू के अस्तित्व से जुड़ी है जो 10 अप्रैल को लालू की जमानत के बाबत सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद ही उसकी दशा और दिशा तय करेगी।

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यूपीएससी की परीक्षा में कोसी अंचल का मधेपुरा जिला ‘सुपर से भी ऊपर रहा’

यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा 2018 में इस बार कोसी के तीनों जिले मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल के बेटे ने अपने-अपने जिले को गौरवान्वित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इस बार कोसी की धरती ने प्रदेश ही नहीं देश में भी अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर दी है।

बता दें कि जहाँ सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल (सलखुआ प्रखंड) के माठा गांव निवासी गजेन्द्र यादव व राधा देवी के पुत्र चन्द्र प्रकाश ने ऑल इंडिया में 440वाँ रैंक लाकार अपने जिले का नाम रोशन किया और सुपौल जिले के किसनपुर प्रखंड के अंदौली गाँव निवासी चन्द्र किशोर चौधरी व राम शीला देवी के पुत्र सावन कुमार ने आईएएस की परीक्षा में 89वाँ रैंक प्राप्त कर अपने जिले को गौरव प्रदान किया….. वहीं मधेपुरा जिला के पुरैनी प्रखंड मुख्यालय निवासी आनंद जैन व सुधा जैन के पुत्र नीतेश कुमार जैन ने UPSC Exam. 2018 में अखिल भारतीय स्तर पर 96वाँ रैंक लाकर मधेपुरा जिले का नाम रोशन किया है।

यह भी बता दें कि इन धरती पुत्रों ने अपनी लगन व मेहनत से कोसी की धरती को तो सर्वाधिक गौरवान्वित किया ही साथ ही अपने-अपने माता-पिता व सगे संबंधियों को भी इतनी खुशियां दे डाली कि सभी पास-पड़ोस वालों में मिठाइयां बाँटने से पहले एक-दूसरे को ही मीठाइयाँ खिलाने लगे। इन कोसी पुत्रों की सफलता से इनके गांव के लोगों में भी सर्वाधिक खुशी का माहौल है। रिजल्ट की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां मनाई।

मधेपुरा अबतक द्वारा इन धरती पुत्रों से चलभाष पर संपर्क किये जाने और सफलता के बाबत चर्चा करने पर उन्होंने यही कहा कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो कोई भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। सबों ने यही कहा कि गुरु एवं माता-पिता के सहयोग व आशीर्वाद तथा अपनों की दुआओं व प्यार की बदौलत हमें यह सफलता प्राप्त हुई है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सहरसा जिले के महिषी (आरापट्टी) निवासी सरोज चौधरी के पुत्र सजल ने मारुति कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्य करते हुए आईएएस की तैयारी भी की और प्रथम प्रयास में ही 284 वाँ रैंक प्राप्त कर ली। उनकी सफलता पर जहाँ ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है वहीं बीएनएमयू के कुलपति डॉ.ए.के.राय, प्रति कुलपति डॉ.फारुख अली और पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के बीच चर्चा होने लगी है कि अब जल्द ही शिक्षा पटरी पर आ जाएगी…..!

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कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न, पटना साहिब से लड़ेंगे चुनाव

भाजपा के ‘शत्रु’ ने आखिरकार कांग्रेस का दामन थाम ही लिया। संयोग देखिए कि आज ही भाजपा का स्थापना दिवस भी है और आज ही के दिन पार्टी के संघर्ष से लेकर उसके शिखर तक साथ रहे बिहारी बाबू ने अपनी राह अलग कर ली। दिल्ली में आज कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही कांग्रेस ने घोषणा की है कि पार्टी के टिकट से शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब संसदीय सीट से इस बार पार्टी के उम्मीदवार होंगे। यहां उनका मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से होना है।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहित और केसी वेणुगोपाल उनके साथ मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को 39वीं स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज के दिन पार्टी छोड़ना मेरे लिए दुखद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर हमला बोलते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा को वन मैन शो और टू मैन आर्मी करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा में विरोधियों को दुश्मन नहीं समझा जाता था। लेकिन अब इस पार्टी में विरोधियों को दुश्मन के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान शत्रुघ्न सिन्हा ने नोटबंदी और जीएसटी को लेकर भी भाजपा पर सवाल दागा। जीएसटी को तो उन्होंने विश्व का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया।

गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगता रहा है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कामकाज की आलोचना करते रहे हैं और दोनों पर देश को तानाशाह की तरह चलाने का आरोप लगाते रहे हैं। वे पार्टी में रहने के बावजूद विपक्ष की रैलियों को भी संबोधित करते रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा कहते रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में ‘लोकशाही’ थी, जबकि मोदी सरकार में ‘तानाशाही’ है।

बता दें कि पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा ने रांची जाकर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से भी मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके आरजेडी में शामिल होने की अटकलें लगायी जा रही थीं। लेकिन, आज सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए वे कांग्रेस के हो गए।

 

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इग्नू के 32वें दीक्षांत समारोह में प्रदान की गई डिग्री

उच्च शिक्षा की चाहत रखने वालों के लिए वरदान इग्नू के 32वें दीक्षांत समारोह का लाइव प्रसारण दिल्ली स्थित इग्नू के मुख्यालय से किया गया…… जहाँ से भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू द्वारा संपूर्ण देश भर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययनरत एवं उत्तीर्ण शिक्षार्थियों को संबोधित किया गया। समस्त क्षेत्रीय केन्द्रों पर बुधवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया और डिग्रियां प्रदान की गई।

बता दें कि कोसी क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों द्वारा सहरसा में आयोजित समारोह में बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलपति प्रो.अवध किशोर राय ने दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ.राय ने कहा कि उच्च शिक्षा की चाहत रखने वालों के लिए इग्नू वरदान है क्योंकि इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अधिकतम उम्र सीमा की कोई पाबंदी नहीं है। उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु इग्नू से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। गृह कार्यों में व्यस्त महिलाओं के लिए इन विषयों….. एमएच, एमकॉम, एमईसी, एमईजी, एमपीए, एमपीएस, बीटीएस……. आदि में शिक्षा प्राप्त करने के लिए ही तो इग्नू की स्थापना की गई है। कुलपति डॉ.राय द्वारा मास्टर डिग्री के 50 शिक्षार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

यह भी जानिए कि 8 जिले में जेल बंदियों, महिलाओं एवं अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र के लिए इग्नू के 16 अध्ययन केंद्र कार्यरत हैं। इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रति कुलपति डॉ.फारुख अली, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक डॉ.तकीउद्दीन अहमद व निदेशक डॉ.मिर्जा बेग, इग्नू के सहायक सचिव जयप्रकाश ओझा, प्रो.जवाहर झा, प्राचार्य डॉ.रेणु सिंह, डॉ.के.एस.ओझा, डॉ.राणा जयराम सिंह आदि ने 250 शिक्षार्थियों को डिग्री प्रदान की।

सभी शिक्षाविदों ने अपने संबोधनों में योग्य शिक्षकों की उपस्थिति के बावजूद कॉलेज के रेगुलर क्लासेस में छात्रों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की और यही कहा कि छात्रों की उपस्थिति को लेकर शिक्षकों, अभिभावकों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक सामूहिक प्रयास होना अनिवार्य है।

वर्तमान में पूरे भारत में 903 विश्वविद्यालय हैं, 40 हज़ार कॉलेज हैं तथा 30 लाख शिक्षार्थी इग्नू में नामंकिंत है। क्षेत्रीय केंद्र सहरसा के 8 जिले में 16 अध्ययन केंद्र क्रियाशील है जिसमें लगभग 17 हज़ार शिक्षार्थी नामांकित है।

कार्यक्रम का संचालन सहायक कुलसचिव ओझा जयप्रकाश ने किया और राजकुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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