पृष्ठ : भारत अबतक

अब भारत में होगा सिंगल इमरजेंसी नंबर

वर्तमान में आपको पुलिस के लिए 100 नंबर डायल करना होता है, फायरब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102 और आपात आपदा प्रबंधन के लिए 108 नंबर। पर अब देशभर में इन तमाम सेवाओं के लिए आपको बस एक सिंगल इमरजेंसी नंबर 112 डायल करना होगा। ये सुविधा एक जनवरी 2017 से लागू होगी। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी आपात सेवाओं के लिए एकल नंबर के प्रावधान को मंजूरी दे दी है। यह अमेरिका में सभी आपात सेवाओं के एक नंबर 911 की तर्ज पर है।

खास बात है कि यह सेवा उन सिम या लैंडलाइन पर भी उपलब्ध होगी जिनकी आउटगोइंग सुविधा रोक दी गई। परेशानी में फंसा कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल करेगा तो उसकी कॉल तत्काल संबंधित विभाग को स्थानांतरित की जाएगी। 112 नंबर शुरू होने के बाद अन्य सभी मौजूदा आपात नंबर धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। यह इस नई सुविधा को लेकर जागरूकता पर निर्भर करेगा।

यह भी बता दें कि लोग इस 112 नंबर को पैनिक बटन प्रणाली में फीड कर सकेंगे। कानून के तहत पैनिक बटन सुविधा भी सभी मोबाइल फोनों पर एक जनवरी से उपलब्ध होगी। पैनिक बटन के जरिए आप सिर्फ एक बटन दबाकर कई नंबरों पर इमरजेंसी कॉल कर सकेंगे या अलर्ट भेज सकेंगे।

सम्बंधित खबरें


केजरीवालजी, आप ही क्यों नहीं खोल देते कांग्रेस-मोदी रिश्ते का ‘राज’?

दिल्ली के मुख्यमंत्री आदत से मजबूर हैं या सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा करते हैं पर कई बार वो कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिसके निहित अर्थ और गंभीरता को वो या तो समझते ही नहीं या फिर तब समझते हैं जब देर हो चुकी होती है। अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे पर अरविन्द केजरीवाल का आज का ट्वीट कुछ ऐसा ही है जिसमें उन्होंने कहा है कि “गांधी परिवार के पास मोदीजी के कुछ राज हैं। इसलिए मोदीजी कभी गांधी परिवार के खिलाफ कदम नहीं उठाते।”

इससे पहले अरविन्द केजरीवाल अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए सोनिया को गिरफ्तार करने की चुनौती प्रधानमंत्री मोदी को दे चुके हैं। उनकी पार्टी (आप) ने बीते शनिवार को सोनिया गांधी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।

बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के शासनकाल में खरीदे गए थे और पिछले महीने इस सौदे पर इटली की एक अदालत के फैसले में सोनिया गांधी का नाम आया था। जिसके बाद से वो निशाने पर हैं। हालांकि संसद में इस हेलीकॉप्टर घोटाले पर कांग्रेस ने कहा है कि टेंडर के मापदंड में जो बदलाव किए गए थे वो भाजपा की अटल बिहारी सरकार के समय हुए थे।

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड से वर्ष 1999 में 12 हेलीकॉप्टर खरीदने की बात शुरू हुई थी और विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद 2005 में ये सौदा हुआ था। लेकिन 2012 में जब इस सौदे में रिश्वत दिए जाने की ख़बर आई तो तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने माना कि ऐसा हुआ है और इसकी जांच सीबीआई और ईडी को सौंप दी।

बहरहाल, समय के साथ सत्य सामने आ ही जाएगा। लेकिन क्या केजरीवाल ये बताने का कष्ट करेंगे कि मोदीजी के तथाकथित ‘राज’ के बारे में ऐसी कौन सी ‘आकाशवाणी’ हुई जो पूरे देश में केवल उन्होंने सुनी और अब उसे ‘नि:शुल्क’ प्रसारित कर रहे हैं..? एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का बिना किसी ‘तथ्य’ के इस तरह की बात करना अत्यन्त आपत्तिजनक और निन्दायोग्य है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


अब लालू को ‘क्रीम’ क्यों लगा रहे बाबा रामदेव..?

समय और सत्ता की महिमा अपरम्पार है। ‘रा’ज-योग’ सचमुच भारी है हर ‘योग’ पर। तभी तो एक-दूसरे के विरोधी रहे योगगुरु बाबा रामदेव और बिहार की सत्ता में भागीदार आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के करीब आ गए हैं। अब ना केवल दोनों गले मिल रहे हैं बल्कि बाबा रामदेव को लालू में अपना ‘ब्रांड एम्बेसेडर’ भी दिखने लगा है।

जी हाँ, चौंकिए नहीं। बीते बुधवार की बात है कि बाबा रामदेव दिल्ली में अचानक और वो भी सुबह-सुबह लालू के मौजूदा आवास (शकुंतला फार्महाउस) पर ‘प्रकट’ हुए, उनसे अकेले में बातचीत की और यहाँ तक कि सबके बीच उनके चेहरे पर क्रीम भी लगा डाली। बातचीत का विषय क्या था इस पर दोनों भले ही मौन रहें लेकिन इसके ‘राजनीतिक’ और ‘व्यावसायिक’ दोनों मायने निकाले जा रहे हैं। चलिए बताते हैं कैसे।

बाबा रामदेव के हृदय में ये लालू-प्रेम यूँ ही नहीं उमड़ पड़ा। इसका पहला और स्पष्ट कारण तो ये है कि लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप बिहार के स्वास्थ्य मंत्री हैं। जाहिर है कि बाबा रामदेव के ब्रांड ‘पतंजलि’ के लिए संभावनाओं के कई द्वार वो खोल सकते हैं। बता दें कि पिछले दिनों बाबा रामदेव मुलायम के छोटे भाई और यूपी की अखिलेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव के साथ भी एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

बहरहाल, अब दूसरे कारण पर गौर करें। दरअसल कुछ दिनों पहले दिल्ली में हुए श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी मौजूद थे और उनकी ये मौजूदगी योगगुरु को नागवार गुजरी। कारण ये कि दो साल पहले मोदी के चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने पर बाबा रामदेव ने दिल्ली में एक कार्यक्रम रखा था और मोदी को खास तौर पर आमंत्रित किया था लेकिन मोदी उस कार्यक्रम में नहीं गए थे।

रामदेव-लालू की मुलाकात पर भाजपा का कहना है कि बाबा रामदेव ना तो भाजपा के सदस्य हैं और ना ही सहयोगी। वो किसी से भी मिल सकते हैं। पर सच यह है कि इस मुलाकात ने योगगुरु और भाजपा के संबंधों में आई खटास को उजागर करने का काम तो किया ही है। जहाँ तक पूरी सच्चाई का प्रश्न है तो इसके बारे में अपने-अपने फन में माहिर दोनों धुरंधर – बाबा रामदेव और लालू – ही कुछ बोल सकते हैं। बाबा रामदेव का लालू के चेहरे पर ‘क्रीम’ लगाना अकारण तो खैर हरगिज नहीं हो सकता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


नहीं रहे जनसंघ और एबीवीपी के संस्थापक प्रोफेसर बलराज मधोक

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ जनसंघ की नींव रखने वाले और अखिल भारतीय छात्र संघ (एबीवीपी) के संस्थापक प्रोफेसर बलराज मधोक नहीं रहे। प्रोफेसर मधोक कुछ समय से बीमार चल रहे थे और पिछले एक महीने से एम्स में भर्ती थे जहाँ आज सुबह नौ बजे उनका निधन हो गया। वक्त की विडंबना देखिए कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के राजनीति में सक्रिय होने से पहले दक्षिणपंथ के सबसे बड़े नेता रहे प्रोफेसर मधोक की मृत्यु की जानकारी मीडिया को केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के ट्वीट से मिली..! प्रोफेसर बलराज मधोक के कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके जनसंघ के अध्यक्ष रहते हुए ही पं. दीनदयाल उपाध्याय पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रहे थे और 1967 में प्रोफेसर मधोक के निवर्तमान होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। ये और बात है कि आज की तारीख में ये बात गिनती के लोगों को पता होगी।

25 फरवरी 1920 को जम्मू-कश्मीर के स्कार्दू इलाके में जन्मे प्रोफेसर बलराज मधोक अपने समय के बड़े शिक्षाविद, विचारक, इतिहासवेत्ता, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक थे। 1961 और 1967 में क्रमश: नई दिल्ली और दक्षिण दिल्ली से लोकसभा के सदस्य रहे प्रोफेसर मधोक एबीवीपी के संस्थापक सचिव थे। 1951 में वे भारतीय जनसंघ के प्रथम समन्वयक बने और उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। 1966 में वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। प्रोफेसर मधोक नई दिल्ली के पीजीडीएवी कॉलेज में इतिहास विभाग के प्राध्यापक थे। आरएसएस के लम्बे समय तक प्रचारक रहे प्रो. मधोक ने एक दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी थीं और 1947-48 में ‘ऑर्गेनाइजर’ तथा 1948 में ‘वीर अर्जुन’ का सम्पादन भी किया था।

ये जानना दिलचस्प होगा कि प्रोफेसर मधोक के जनसंघ के अध्यक्ष रहते पार्टी अपनी कामयाबी के शीर्ष पर थी। उस समय लोकसभा में जनसंघ के गठबंधन के पास 50 से ज्यादा सीटें थीं। यही नहीं पंजाब में जनसंघ की संयुक्त सरकार बनी थी और उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित देश के आठ प्रमुख राज्यों में जनसंघ मुख्य विपक्षी दल बनने में कामयाब हुआ था।

ये प्रोफेसर मधोक ही थे जिन्होंने सदन में पं. जवाहरलाल नेहरू के सामने बिना किसी लाग-लपेट के पुर्तगालियों से गोवा को आजाद कराने और श्रीराम जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ और मथुरा के श्रीकृष्ण मन्दिर को हिन्दुओं को सौंपने जैसे मुद्दों को उठाया था। उस दौर की राजनीति में प्रो. मधोक सम्भवत: एकमात्र ऐसी शख्सियत थे जो पं. नेहरू को राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व जैसे विषय पर अपनी बात सुनने को बाध्य कर देते थे। लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कई बार यादगार भूमिका निभाई थी और देश की सुरक्षा सलाहकार समिति के वे सदस्य भी रहे थे।

आज भाजपा प्रशस्त राजपथ पर खड़ी है पर पार्टी की मौजूदा पीढ़ी लगभग भूल चुकी है कि इस राजपथ का रास्ता जनसंघ की पगडंडियों से निकला है। डालियाँ और शाखाएं लाख इतरा लें पर उनका अस्तित्व तभी तक है जब तक वो अपनी जड़ से जुड़ी हैं। आज जिस ‘वटवृक्ष’ का नाम भाजपा है उसकी जड़ में प्रोफेसर मधोक के जीवन के कई बहुमूल्य वर्ष भी हैं, इसे हरगिज भुलाया नहीं जा सकता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


रियल एस्टेट कानून आज से लागू, अब बिल्डर नहीं कर पाएंगे मनमानी

केन्द्र सरकार  ने मई दिवस के दिन आमलोगों को एक बड़ा तोहफा दिया। अगर आपने हाल-फिलहाल घर लिया है या लेने की योजना बना रहे हैं तो आपको जानकर विशेष खुशी होगी कि आम उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षित करने और बिल्डरों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट कानून आज से लागू हो गया। इसके लागू होने के साथ ही बिल्डरों पर नकेल कस जाएगी और ग्राहक ठगे जाने से बच जाएंगे।

इस बहुप्रतीक्षित कानून के तहत बिल्डरों को तय समय के भीतर ग्राहकों को उनका आशियाना देना होगा। अब प्रमोटर और बिल्डर की मनमानी किसी सूरत में नहीं चल पाएगी। इस कानून के तहत सभी आवासीय और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटर के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है और यह नियम ना केवल नई बल्कि चालू परियोजनाओं पर भी लागू होगा।

रियल एस्टेट कानून के तहत एक महत्वपूर्ण प्रावधान ये है कि अब डेवलपर बिना ग्राहक की सहमति के प्रोजेक्ट में कोई बदलाव नहीं कर पाएगा। ग्राहकों की गाढ़ी कमाई के पैसे को सुरक्षित करने के लिए एक अन्य प्रावधान यह जोड़ा गया है कि बिल्डरों को खरीदारों से लिए पैसे का 70% संबंधित प्रोजेक्ट के अकाउंट में ही रखना होगा।

बता दें कि अब सभी राज्यों में रियल एस्टेट अथॉरिटी होगी जहाँ ना केवल बिल्डर बल्कि रियल एस्टेट एजेंट को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यही नहीं, कानून के प्रावधानों के अन्तर्गत केन्द्र और राज्य सरकारों को छह महीने के भीतर नियम बनाने होंगे। प्रोजेक्ट के तहत फ्लैटों की समय से डिलीवरी सुरक्षित कराने के लिए प्रस्तावित रियल एस्टेट रेगुलेटर और अपीलीय ट्रिब्यूनल भी एक साल में बन जाएंगे। बता दें कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के लिए भारी जुर्माने के साथ ही तीन साल की सजा का भी प्रावधान है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


अब टिकते नहीं बिहार में नीतीश के पैर..!

इधर लोग नीतीश कुमार के पीएम मैटेरियल होने ना होने पर बहस ही कर रहे हैं और उधर नीतीश बड़ी खामोशी से एक के बाद एक कदम रखते जा रहे हैं। जी हाँ, जेडीयू की कमान विधिवत सम्भालने के बाद वे मिशन 2019 को भी विधिवत शुरू करने जा रहे हैं। शुरुआत आगामी 7 मई को केरल से होगी जहाँ वो जनसभा को संबोधित करेंगे।

केरल के बाद नीतीश झारखंड का रुख करेंगे। वहाँ 10 मई को धनबाद में वो शराबबंदी अभियान के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। बता दें कि बिहार की तर्ज पर वहाँ भी महिलाओं ने उन्हें शराबबंदी के कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए बुलाया है।

झारखंड के बाद नीतीश अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र यूपी में दस्तक देंगे। 12 मई को बनारस तो 15 मई को वो लखनऊ में होंगे। इस दौरे में नीतीश यूपी को लेकर अपनी रणनीति को ठोस रूप देने की कोशिश करेंगे।

बता दें कि अभी हाल ही में एनसीपी के नेता शरद पवार ने नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताया था। इधर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी ने भी उन्हें इस मुद्दे पर ‘नैतिक’ समर्थन दिया है। कहने की जरूरत नहीं कि अपनी बढ़ती स्वीकार्यता से 2019 को लेकर नीतीश के हौसले इधर और बुलंद हुए हैं। अब हाल ये है कि उनके पैर बिहार में टिक ही नहीं रहे। भाजपा और मोदी के विकल्प के तौर पर खुद को देश भर में पेश करने की खातिर उन्होंने पूरी ताकत झोंक देने की ठान ली है। नीतीश के ‘भारत-दौरे’ पर किसी ने कमाल की चुटकी ली कि मोदी (अपने विदेश-दौरों के कारण) भारत में नहीं दिखते और अब नीतीश बिहार में नहीं दिखेंगे..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा सात अगस्त को

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा हेतु ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। इस साल सिविल सर्विसेज के लिए 1079 पद हैं जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा सहित 24 वर्ग हैं तथा भारतीय वन सेवा के लिए 110 पद हैं। इस तरह दोनों सेवाओं को मिलाकर कुल 1189 पद हैं।

बता दें कि प्रत्येक वर्ग के लिए अभ्यर्थी 27 मई 2016 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। याद रखें कि यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा (पीटी) 7 अगस्त 2016 को होगी। इस बार परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण ‘फर्स्ट अप्लाई, फर्स्ट अलॉट’ के आधार पर होगा जिसकी अधिसूचना यूपीएससी ने कर दी है।

जहाँ तक उम्र की बात है, 1 अगस्त 2016 तक जिनकी उम्र 32 वर्ष नहीं हुई है, वे परीक्षा दे सकते हैं। जबकि पूर्व में उम्र सीमा 30 थी और चार बार ही परीक्षा में भाग लिया जा सकता था। परन्तु अब सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी छह बार सिविल सेवा की परीक्षा में भाग ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केन्द्र सरकार की ये बड़ी पहल है।

सम्बंधित खबरें


मिशन 2019 में अभी से क्यों जुटे नीतीश..?

लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं लेकिन जेडीयू ने नीतीश कुमार को अभी से मैदान में उतार दिया है। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक ओर अध्यक्ष के तौर पर नीतीश की ताजपोशी की गई तो दूसरी ओर गैरभाजपा दलों का एका करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। संदेश स्पष्ट है कि नीतीश अब औपचारिक रूप से राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल जैसे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नेताओं के क्लब में शामिल हो गए।

ये स्पष्ट है कि बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस गैरभाजपा विकल्प के तौर पर कभी नीतीश के नाम पर सहमत नहीं हो सकती और ना ही राजद समेत अन्य दलों ने अभी इस संबंध में अपनी राय खुलकर जाहिर की है। (हाँ, नीतीश को ‘पीएम मैटेरियल’ बताना अलग बात है।) लेकिन नीतीश और उनकी टीम जल्दी में दिख रही है। इस जल्दबाजी से उन्हें दो कारण दिख रहे हैं। पहला यह कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी जैसा ‘मोदीमय’ माहौल है उसमें उनके विकल्प के तौर पर आक्रामक होकर आने का साहस और तैयारी किसी के पास नहीं दिख रही और इसका फायदा नीतीश और उनकी टीम उठाना चाहती है। दूसरा ये कि बिहार चुनाव के परिणाम के बाद नीतीश की जैसी करिश्माई छवि बनी है उस पर वक्त की धूल-मिट्टी पड़ने से पहले ही उसे भुना लेने की कोशिश की जा रही है।

नीतीश कुमार मंझे हुए नेता हैं और राजनीति की बिसात पर गोटियां बिठाना उन्हें खूब आता है। उन्हें पता है कि बड़े लक्ष्य के लिए केवल नारेबाजी से काम नहीं चलता, धरातल पर भी बहुत कुछ कर के दिखाना होता है। यही कारण है कि एक ओर वो संघमुक्त भारत का नारा दे रहे होते हैं तो दूसरी ओर शराबबंदी को राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात करते हैं। महिला आरक्षण और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसे फैसलों को नीतीश अब राष्ट्रीय फलक पर अपने विकास मॉडल के तौर पर पेश करना चाहते हैं।

यूपी चुनाव से पहले अजित सिंह के रालोद और बाबूलाल मरांडी के जेवीएम को मिलाकर अपना ‘कैनवास’ बड़ा करने की कोशिश नीतीश के मिशन 2019 का ही हिस्सा है। यूपी में उनकी सफलता या असफलता से भारत की भावी राजनीति की तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


जी हाँ, न्यूयार्क ने 14 अप्रैल को मनाया ‘बिन्देश्वर पाठक डे’

भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिन्देश्वर पाठक को न्यूयार्क शहर ने अनूठा सम्मान दिया। एक असाधारण कदम के तहत न्यूयार्क के मेयर बिल डी ब्लासियो ने 14 अप्रैल 2016 को ‘बिन्देश्वर पाठक डे’ घोषित किया। पाठक को अमानवीय स्थिति में काम करने वाले लाखों लोगों के जीवन-स्तर को सुधारने के लिए यह सम्मान दिया गया। सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में पाठक के अभूतपूर्व योगदान से पूरी दुनिया वाकिफ है।

न्यूयार्क में आयोजित समारोह में 73 वर्षीय पाठक स्वयं उपस्थित थे। उन्हें ‘न्यूयार्क ग्लोबल लीडर्स ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड’ प्रदान किया गया। इस अवसर पर मेयर ब्लासियो ने कहा कि “पाठक एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसने समाज में घोर अन्याय देखा, ऐसी चीज देखी जो बहुत सारे लोगों के लिए अव्यावहारिक एवं स्थायी है और जिसमें बदलाव लाने के लिए रचनात्मकता, ऊर्जा, प्रेरणा तथा उम्मीद थी।” आगे उन्होंने कहा कि “पाठक ने अपनी दृष्टि से शोषित वर्ग की मदद की और अपने काम एवं संगठन के जरिए नई प्रौद्योगिकी का निर्माण किया जिसने सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा पर्यावरण में सुधार किया और कई समुदायों के लिए मूल रूप में वास्तविकता बदल दी।”

बता दें कि डॉ. बिन्देश्वर पाठक का जन्म 2 अप्रैल 1943 को बिहार में हुआ था। सुलभ इंटरनेशनल की नींव इन्होंने 1970 में रखी थी जिसकी आज ना केवल भारत बल्कि विश्व भर में प्रतिष्ठा है। सुलभ इंटरनेशनल मानव अधिकार, पर्यावरणीय स्वच्छता, ऊर्जा के गैर पारंपरिक स्रोतों और शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली अग्रणी संस्था है। अपने विशिष्ट कार्यों के लिए ‘पद्मभूषण’ डॉ. पाठक 60 से ज्यादा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। 2003 में उनका नाम विश्व के 500 उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों की सूची में प्रकाशित किया गया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


मोदीजी, महू से उठाएं अंबेडकर के सपनों को पूरा करने की कसम

अंबेडकर का जितना नाम आज मायावती (बसपा), रामविलास पासवान (लोजपा) और रामदास अठावले (आरपीआई) लेते हैं उतना ही कांग्रेस, वामदल, आम आदमी पार्टी और यहाँ तक कि भाजपा और आरएसएस भी। आज भाषण और नारे उनके बिना पूरे नहीं होते, हर कोई अपने को उनका सच्चा और अच्छा ‘वारिस’ बता रहा है। कारण स्पष्ट है कि भारत की कुल आबादी का एक चौथाई वोट ‘अंबेडकर’ नाम से जुड़ा है। ये अलग बात है कि वोटों के गुणा-भाग में दल और नेता उन वजहों को ही भूल जाते हैं जिन्होंने अंबेडकर को ‘अंबेडकर’ बनाया।

बहरहाल, आज बाबा साहब की 125वीं जयंती है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘भारतीय संविधान के जनक’ को श्रद्धांजलि देने उनके जन्म-स्थान महू (मध्यप्रदेश) पहुँचे और आज से 24 अप्रैल तक ‘ग्राम उदय से भारत उदय’ आंदोलन चलाने की घोषणा की। शायद आपको आश्चर्य हो कि मोदी महू स्थित अंबेडकर स्मारक जाने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू महू गए जरूर थे लेकिन तब स्मारक नहीं बना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने आज महू में आयोजित बड़ी सभा में कहा कि बाबा साहब एक व्यक्ति नहीं थे बल्कि एक ‘संकल्प’ का नाम थे। उन्होंने स्वयं को भाग्यशाली बताया कि उन्हें उस धरती को नमन करने का मौका मिला जहाँ बाबा साहब का जन्म हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जिसकी माँ बचपन में बर्तन साफ करती हो उसका बेटा प्रधानमंत्री बन जाए तो इसका श्रेय बाबा साहब को जाता है। उन्होंने कहा कि अंबेडकर की लड़ाई सामाजिक अन्याय के खिलाफ और समानता और बराबरी की स्थापना के लिए थी। लगे हाथ उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साध लिया कि छह दशकों तक गरीबी-गरीबी करने वालों ने गरीबों के लिए कुछ नहीं किया।

अंबेडकर ने बहुत पहले कह दिया था कि जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके लिए बेमानी है। आज अक्षरश: यही हो रहा है। दलितों के हित के नाम पर आज कई कानून और अधिनियम हैं, पर उनका दमन बदस्तूर जारी है। आज ये महत्वपूर्ण नहीं है कि उनकी इस स्थिति के लिए कल जिम्मेदार कौन था? महत्वपूर्ण ये है कि इस स्थिति को हल करने के लिए हम आज क्या कर रहे हैं? स्वाभाविक है कि आज ये अपेक्षा देशवासियों को अपने प्रधानमंत्री से होगी।

नरेन्द्र मोदी ने ‘ग्राम उदय से भारत उदय’ आंदोलन को शुरू करने के लिए बहुत सही दिन और बहुत सही जगह का चयन किया। पर ये उदय ‘पूर्णोदय’ तब तक नहीं होगा जब तक करोड़ों दलित बच्चे स्कूल जाने की उम्र में मजदूरी करेंगे, जब तक उनके पिता सिर पर मैला ढोएंगे और फिर बांधकर पीटे भी जाएंगे और जब तक उनकी माँओं का गैंगरैप कर उन्हें नंगा घुमाया जाता रहेगा..! मोदीजी, आज आप महू गए, वहीं से उठाएं अंबेडकर के सपनों को पूरा करने की कसम।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें