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लालू से जुड़े 22 ठिकानों पर आयकर का छापा

आयकर विभाग ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी राज्यसभा सांसद मीसा भारती से जुड़े कथित बेनामी लैंड डील मामले में दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी की है। ख़बरों के मुताबिक 1000 करोड़ रुपये की लैंड डील के मामले में 22 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि छापे की कार्रवाई आज सुबह 8.30 बजे से ही चल रही है। ये छापे उन कंपनियों और लोगों के यहां मारे गए हैं जो लैंड डील के मामले में लालू से जुड़े हैं। गौरतलब है कि आज ही चेन्नई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती चिदंबरम के घर भी सीबीआई ने छापे मारे हैं।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ ने हाल ही में अपने खुलासे में दावा किया था कि दिल्ली में लालू की बेटी और उनके दामाद ने यूपीए सरकार के दौरान करोड़ों की जमीन मुखौटा कंपनियों के जरिए बहुत ही कम दाम में खरीदी थी। चैनल के मुताबिक यह काम इन कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की आड़ में किया गया था। आरोपों के घेरे में लालू की सबसे बड़ी बेटी मीसा और दामाद शैलेश कुमार हैं। चैनल की मानें तो जिस कंपनी के जरिए यह कथित स्कैम किया गया, उसका रजिस्टर्ड पता लालू का सरकारी आवास था। आरजेडी ने इस खुलासे को ‘सुपारी पत्रकारिता’ करार दिया था।

बहरहाल, आयकर विभाग की छापेमारी के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। यह अजीब ‘संयोग’ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल ही कहा था कि अगर इस मामले में विपक्ष के पास कोई प्रूफ है तो वो जांच करा ले, और आज सुबह छापेमारी की कार्रवाई शुरू हो गई। बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने इस ‘संयोग’ का राजनीतिक लाभ लेने में जरा भी देर नहीं कि और कहा कि यह कार्रवाई नीतीश के कहने पर हुई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि नीतीश कुमार ने कल ही कहा था कि लालू परिवार की अवैध संपत्तियों के आरोपों में अगर सच्चाई हो तो केन्द्र सरकार इसकी जांच करा ले। तो केन्द्र सरकार ने इस पर कार्रवाई कर दी है। मुझे उम्मीद है कि नीतीश कुमार ये नहीं कहेंगे कि ये छापेमारी बदले की भावना से की गई है।

उधर जदयू नेता पवन वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी से समझौता नहीं करेंगे। जहां तक गठबंधन का प्रश्न है, हमने गठबंधन राजद पार्टी से की थी, न कि लालू यादव से। इस मामले के बाद भी महागठबंधन पर कोई असर नहीं होगा। वहीं पार्टी महासचिव श्याम रजक ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। इस मामले में ज्यादा बोलना ठीक नहीं। जबकि कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि अभी कार्रवाई चल रही है, चलने दीजिए। हम सब एक साथ हैं, जो होगा आगे देखा जाएगा।

सम्पूर्ण घटनाक्रम पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि भाजपा पूरी योजना बनाकर लालू प्रसाद यादव की राजनैतिक हस्ती को खत्म करना चाहती है। इसके लिए पूरी कहानी गढ़ी गई है। उनका यह प्रयास सफल नहीं होगा। हम सब साथ हैं और साथ ही रहेंगे।

चलते-चलते बता दें कि छापेमारी की ख़बर आते ही लालू के पटना स्थित आवास पर उनके करीबियों का आना शुरू हो गया, जबकि बाहर एकदम सन्नाटा पसरा हुआ है। बताया जा रहा है कि इस बीच लालू अपने करीबियों से मंत्रणा करने के साथ-साथ कानूनविदों से भी सलाह ले रहे हैं।

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लालू ने दी मोदी को लोकसभा भंग कर चुनाव कराने की चुनौती

इन दिनों चौतरफा आरोपों से घिरे और हाल ही में चारा घोटाले पर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परेशान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी है कि लोकसभा भंग कर फिर से आम चुनाव कराएं। लालू ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार पिछले तीन साल में सभी मोर्चों पर विफल साबित हुई है। फायदा आमजन को नहीं, सिर्फ भाजपा और आरएसएस को हुआ है। लालू ने रविवार को कहा, ‘मोदी लोकसभा भंग करें और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ नए सिरे से आम चुनाव कराएं, क्योंकि उनकी सरकार 2014 के आम चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे करने में विफल रही है।’

लालू ने यह मांग भी की है कि नरेन्द्र मोदी जनता को अपने उस वादे का जवाब दें, जिसमें उन्होंने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हर साल दो करोड़ लोगों को नौकरियां देने के उनके वादे का क्या हुआ? भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बताए कि मई, 2014 से अब तक कितने लोगों को नौकरियां दी गईं?’

पूर्व रेलमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार को इस बारे में भी आधिकारिक आंकड़ा पेश करना चाहिए कि तीन साल में विदेशी बैंकों में जमा कितना काला धन देश में वापस लाया गया। लालू ने कहा, ‘भाजपा के हाथों में देश सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह पार्टी किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने के लिए समाज को बांटने और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा करने में लगी है। सबका साथ, सबका विकास वाले इस जुमले की हकीकत वही जानता है, जिस पर बीतता है।’ बकौल लालू भाजपा देश के संघीय ढांचे को खत्म करने पर आमादा है। यह पार्टी क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की हर कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

बहरहाल, इन दिनों लालू के दोनों तेज और बेटी मीसा पर कई आरोप लगे हैं। स्वयं लालू पर रघुनाथ झा व कांति सिंह से ‘गिफ्ट’ लेकर केन्द्र में मंत्री बनाने के आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के मामले में दर्ज सभी केस में उन पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया वो अलग। नीतीश उनसे अपने संबंधों पर पुनर्विचार कर सकते हैं, ये चर्चा भी हवा में है। बावजूद इन सबके लालू द्वारा विजयरथ पर सवार प्रधानमंत्री को चुनौती साहस से भी आगे ‘दुस्साहस’ की श्रेणी में रखी जाने लायक बात है। कहना गलत न होगा कि ये चुनौती अपने समर्थकों को ‘हताशा’ से बचाने की कवायद से अधिक कुछ नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सरहदों से नहीं बदलता ‘मदर्स डे’ का सार

माँ – वो शब्द जिसे परिभाषित करने में दुनिया की सारी भाषाओं के सारे शब्द और साहित्य व कला की सारी विधाएं खर्च हो जाएं, फिर भी परिभाषा अधूरी रह जाए। संसार का साक्षात ईश्वर, सृष्टि का पर्याय, हमारे अस्तित्व का पहला अध्याय होती है मां। दुनिया के हर बच्चे के लिए सबसे खास, सबसे प्यारा, सबसे गहरा, सबसे नि:स्वार्थ रिश्ता। सच तो यह है कि हमारे जीवन के सारे दिन मां से और मां के  होते हैं, फिर भी मां को सम्मानित करने के लिए एक खास दिन को दुनिया ने ‘मदर्स डे’ का नाम दिया, जो भारत में मई माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। लेकिन यह जानना दिलचस्प होगा कि अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की तारीख और इसकी शुरुआत की कहानी भी अलग-अलग है। तो आईये, मदर्स डे के इतिहास में झांकें, इस दिन को सम्पूर्णता में देखें।

मदर्स डे का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन ग्रीक और रोमन इतिहास में मदर्स डे को मनाने के कई साक्ष्य हैं। पुराने समय में ग्रीस में मां को सम्मान देने के लिए पूजा का रिवाज था। कहा जाता है कि स्य्बेले ग्रीक देवताओं की मां थीं और उनके सम्मान में यह दिन त्योहार के रूप में मनाया जाता था। उधर एशिया माइनर के आसपास और रोम में इसे वसंत ऋतु के करीब ‘इदेस ऑफ मार्च’ यानि मां को सम्मान देने के पर्व के रूप में 15 से 18 मार्च तक मनाया जाता था।

यूरोप और ब्रिटेन में मां के प्रति सम्मान दर्शाने की कई परंपराएं प्रचलित हैं। उसी के अंतर्गत एक खास रविवार को मातृत्व और माताओं को सम्मानित किया जाता था, जिसे ‘मदरिंग संडे’ कहा जाता था। इंग्लैंड में 17वीं शताब्दी में 40 दिनों के उपवास के बाद चौथे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता था। इस दौरान चर्च में प्रार्थना के बाद छोटे बच्चे फूल या उपहार लेकर अपने-अपने घर जाते थे। इस दिन सम्मानस्वरूप मां को घर का कोई काम नहीं करने दिया जाता था।

दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में मदर्स डे 27 मई को मनाया जाता है। यहां मदर्स डे का मतलब कोरोनिल्ला युद्ध को स्मरण करना है। दरअसल 27 मई 1812 को यहां के कोचाबाम्बा शहर में युद्ध हुआ। कई महिलाओं का स्पेनिश सेना द्वारा कत्ल कर दिया गया। ये सभी महिलाएं सैनिक होने के साथ-साथ मां भी थीं। इसीलिए 8 नवंबर 1927 को यहां एक कानून पारित किया गया कि यह दिन मदर्स डे के रूप में मनाया जाएगा।

चीन में भी मदर्स डे काफी लोकप्रिय है। इस दिन वहां उपहार के रूप में गुलनार के फूल खूब बिकते हैं। चीन में 1997 में यह दिन गरीब माताओं की, खासकर उन गरीब माताओं की जो ग्रामीण क्षेत्रों जैसे पश्चिम चीन में रहती हैं, की मदद के लिए निश्चित किया गया था।

जापान में मदर्स डे शोवा युग (1926-1989) में महारानी कोजुन (सम्राट अकिहितो की मां) के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता था। अब इस दिन को लोग वहां अपनी मां के लिए ही मनाते हैं। इसी तरह थाईलैंड में भी रानी के जन्मदिन की तारीख को मदर्स डे की तारीख में बदल दिया गया।

बहाना चाहे जो हो, आज मदर्स डे दुनिया के अधिकांश देशों में मनाया जाता है। जैसे कई कैथोलिक देशों में वर्जिन मेरी डे को तो इस्लामिक देशों में पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा के जन्मदिन को मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है। कुछ देश 8 मार्च यानि वुमेंस डे को ही मदर्स डे की तरह मनाते हैं, लेकिन मनाते जरूर हैं। कई देशों में तो मदर्स डे पर अपनी मां का विधिवत सम्मान नहीं करना अपराध की श्रेणी में आता है।

अमेरिका में मदर्स डे की शुरुआत 1870 में जूलिया वार्ड होवे ने की थी। उनका मानना था कि महिलाओं या माताओं को राजनीतिक स्तर पर अपने समाज को आकार देने का सम्पूर्ण दायित्व मिलना चाहिए। आगे चलकर 1912 में मदर्स डे इंटरनेशनल एसोसिएशन बना और एना जॉर्विस (वर्जीनिया) ने मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे घोषित किया। गौरतलब है कि जॉर्विस शादीशुदा नहीं थीं और न ही उनका कोई बच्चा था। उन्होंने अपनी मां एना मैरी रविस जॉर्विस की मृत्यु के बाद उनके प्रति अपना प्यार और सम्मान जताने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी। भारत में भी मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे मनाया जाता है। वैसे यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी के जन्मदिन को भी मदर्स डे के तौर पर मनाने के उदाहरण देखे जा सकते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या केजरीवाल ने सचमुच लिए दो करोड़ रुपए !

अभी-अभी पंजाब और गोवा में मुंह की खाने और एमसीडी चुनाव में अपनी प्रतिष्ठा गंवाने वाले अरविन्द केजरीवाल की कठिनाईयां कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। केजरीवाल इन पराजयों की पीड़ा से उबरे भी नहीं थे कि दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार का सनसनीखेज आरोप लगा दिया। जी हां, राजघाट पर कपिल मिश्रा ने  आरोप लगाया कि उनकी आंखों के सामने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल को दो करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन ने जमीन सौदे के लिए 50 करोड़ रुपये की डील कराई, जिसमें से ये रकम केजरीवाल को उनके घर पर दिए गए। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि मिश्रा के आरोप बेबुनियाद है। गौरतलब है कि मिश्रा पार्टी के वरिष्ठ सदस्य कुमार विश्वास विश्वास के करीबी रहे हैं।

बहरहाल, कपिल मिश्रा का आरोप है कि केजरीवाल की जानकारी में सारे घोटाले हुए हैं। मिश्रा ने कहा कि सत्येंद्र जैन ने मुझे खुद बताया कि उन्होंने केजरीवाल जी के किसी रिश्तेदार को जमीन दिलवाने के लिए 50 करोड़ की डील कराई। उन्होंने सत्येंद्र जैन के स्वास्थ्य मंत्रालय को करप्शन का अड्डा बताते हुए कहा कि “मैने उपराज्यपाल अनिल बैजल को इस बारे में सूचित कर दिया है और मैं सभी जांच एजेंसियों को भी इस बारे में सूचित करूंगा।” कपिल के खुलासे के बाद दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल का इस्तीफा मांगा है।

बता दें कि शनिवार को कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से उन्होंने ट्विटर पर पार्टी नेताओं को घेरना शुरू किया और रविवार सुबह उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की। मिश्रा ने दावा किया कि वह कथित घोटाले में ‘आप’ के कुछ नेताओं की संलिप्तताओं का पर्दाफाश करने की तैयारी में थे। उनका यह भी कहना है कि शनिवार दिन में उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और कथित घोटाले के संबंध में उन्हें दस्तावेज सौंपे थे।

उधर इस मसले पर केजरीवाल के घर पर संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और कुमार विश्वास की बैठक हुई। बैठक के बाद मीडिया के सामने मनीष सिसोदिया ने कहा कि मिश्रा के आरोप बेबुनियाद हैं। इस पर कोई जवाब नहीं दिया जा सकता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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और निर्भया को इंसाफ मिल गया

पूरे देश को स्तब्ध करने वाले निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप को पूरे देश में ‘सदमे की सुनामी’ बताते हुए कहा कि इस केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। कोर्ट ने माना कि इस मामले में अमीकस क्यूरी की ओर से दी गई दलीलें अपराधियों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इस फैसले के बाद अदालत में लोगों ने तालियां बजाईं और इंसाफ की प्रतीक्षा में कोर्ट की पिछली सीट पर बैठे निर्भया के माता-पिता को समझते देर नहीं लगी कि इंसाफ हो गया है।

फैसले के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि आज निर्भया के साथ-साथ देशभर को इंसाफ मिला है। अपराधियों पर लगाम के लिए यह जजमेंट एक संदेश की तरह होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा था कि इस मामले में फांसी की सजा बरकरार रहेगी और वही हुआ। हालांकि उन्हें तसल्ली तब होगी जब चारों को फांसी पर लटकाया जाएगा। निर्भया की मां ने कोर्ट से बाहर निकलने के बाद कहा कि इस घटना के बाद जिस तरह से देश ने निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाइयां लड़ी हैं उसके लिए वह सबका धन्यवाद देती हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि आगे कोई बच्चियों के साथ ऐसी दरिंदगी न करे इसके लिए लड़ाई जारी रहनी चाहिए।

बता दें कि निर्भया 23 साल की थी जब ये हादसा हुआ था। आज वह जिंदा होती तो मेडिकल की पढ़ाई पूरी हो चुकी होती और शायद उसकी शादी भी हो गई होती। खैर, आज निर्भया के माता-पिता के साथ-साथ पूरे देश को इस बात की तसल्ली है कि निर्भया को इंसाफ मिला है। हालांकि देखा जाय तो कानून की सीमाओं के कारण पूरा न्याय अब भी बाकी है क्योंकि गैंगरेप का नाबालिग अपराधी छूट गया है। कानून के पंजे से उसके छूट जाने पर निर्भया के परिवार का अफसोस आज भी बरकरार है। उसके माता-पिता ने जी-जीन लगा दिया था कि उसे भी फांसी की सजा मिले, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी डाली, लेकिन वह खारिज हो गई।

बहरहाल, अब जबकि निर्भया के चार गुनगारों के लिए कानून के सभी दरवाजे बंद हो चुके हैं, ऐसे में अब उनकी निगाहें राष्ट्रपति की ‘अदालत’ की तरफ होगी। दया याचिका पर आखिरी फैसला राष्ट्रपति का ही होगा। हालांकि मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जिस तरह अपने 5 साल के कार्यकाल में सभी 32 दया याचिका के मामले को निपटाया है, और इनमें से 28 में फांसी की सजा बरकरार रखी है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि इन चारों दरिंदे पर वे दया दिखाएंगे। वैसे गौरतलब है कि उनके कार्यकाल में अब केवल तीन ही महीने शेष हैं और बहुत संभव है कि इस मामले को अगले राष्ट्रपति निबटाएं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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टॉपर कल्पित को करीब से जानिए

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के जेईई मेन 2017 में राजस्थान के कल्पित वीरवल ने सफलता का नया कीर्तिमान गढ़ा है। इस प्रतिभाशाली छात्र ने पहली रैंक तो हासिल की ही है, साथ ही परीक्षा में पूरे 100 प्रतिशत अंक यानी 360 में से 360 अंक लाने का अभूतपूर्व कारनामा भी किया है। ये जेईई के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब किसी छात्र ने गणित, भौतिकी और रसायनशास्त्र तीनों में से हरेक में 120 में से 120 अंक हासिल किये हैं। गौरतलब कि जेईई में टॉप करने से पहले कल्पित ‘इंडियन जूनियर साइंस ओलंपियाड’ और ‘नेशनल टैलेंट सर्च’ में भी टॉप कर चुके हैं।

17 साल के कल्पित वीरवल की सफलता में जिस बात ने सबसे अहं भूमिका निभाई वह थी बगैर कोई स्ट्रैस लिए हर दिन पांच से छह घंटे की पढ़ाई। उदयपुर के एसडीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र कल्पित के साथी बताते हैं कि वे पूरे साल एक भी कक्षा में गैरहाजिर नहीं रहे। यही नहीं, कल्पित ने 8वीं क्लास से ही कोचिंग लेनी भी शुरू कर दी थी और अपनी सफलता का उन्हें पूरा यकीन था, लेकिन उन्होंने ये नहीं सोचा था कि वे 100 में 100 नंबर ले आएंगे।

दलित वर्ग  से ताल्लुक रखने वाले कल्पित के पिता पुष्पेंद्र वीरवल उदयपुर में महाराणा भूपल राजकीय अस्पताल में कंपाउंडर हैं और माँ पुष्पा सरकारी स्कूल में टीचर। साधारण आय वाले माता-पिता के लिए बेटे को बाहर पढ़ाना स्वाभाविक तौर पर कठिन होता। पर जब सामने कल्पित जैसा होनहार हो तो इन कठिनाईयों की भला क्या बिसात। कल्पित कहते हैं, “मुझे हर कोई सलाह देता था कि मुझे कोचिंग के लिए कोटा या हैदराबाद जाना चाहिए, लेकिन मैं पढ़ाई को लेकर कोई बर्डन नहीं लेना चाहता था। मैंने जो कुछ सीखा उससे इन्जॉय करना चाहता था, इसलिए मैंने उदयपुर में ही रहने का फैसला किया और यहीं के कोचिंग सेंटर को ज्वाइंन किया।” और आज परिणाम सामने है।

कल्पित का शतप्रतिशत अंक लाना इसलिए भी मायने रखता है कि उन्होंने निगेटिव मार्किंग होने के बावजूद सारे सवाल हल किए और सही हल किए। सीबीएसई की ये परीक्षा 02 अप्रैल को ऑफलाइन और 09 अप्रैल को ऑनलाइन हुई थी। इस परीक्षा में 10 लाख से ज्यादा विद्यार्थी शामिल हुए थे। गुरुवार को घोषित नतीजों में से 2.20 लाख छात्रों ने एग्जाम क्वालिफाई किया, जो अब 21 मई को होने वाले जेईई एडवांस्ड में शामिल हो सकते हैं। जेईई परीक्षा के जरिए ही छात्र आईआईटी, एनआईटी और दूसरे गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेते हैं।

बहरहाल, कल्पित ने इस परीक्षा में सौ फीसदी अंक लाकर न केवल जेईई-मेन्स की परीक्षा के दलित वर्ग में टॉप किया है बल्कि जनरल कैटेगरी में भी टॉप कर सबको पीछे छोड़ दिया है। सीबीएसई के अध्यक्ष आर के चतुर्वेदी ने ने स्वयं फोन कर उन्हें ये खुशखबरी दी थी। अपनी इस उपलब्धि पर कल्पित वीरवल ने कहा कि “जेईई-मेन्स में टॉप करना मेरे लिए खुशी की बात है लेकिन मैं अभी जेईई-एडवांस की परीक्षा के लिए फोकस करना चाहता हूं, जो कि अगले महीने आयोजित होगी।”

चलते-चलते बता दें कि असाधारण छात्र कल्पित की क्रिकेट और फुटबॉल में खासी रुचि है और वे म्यूजिक का भी शौक रखते हैं। उन्होंने अभी फिलहाल अपना करियर प्लान नहीं बनाया है, लेकिन वे आईआईटी, मुंबई में कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लेना चाहते हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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‘बाहुबली-2’ के करिश्मा के आगे नतमस्तक हजार करोड़

‘बाहुबली-2’… एक फिल्म जिस पर बात करने के लिए पुराने शब्द, पुरानी भाषा, पुराने विशेषण, पुरानी उपमा, पुराने संदर्भ, पुरानी व्याख्या – सब अधूरे प्रतीत हो रहे हैं। भारतीय सिनेमा की नई परिभाषा तो ‘बाहुबली-1’ ने ही रच दी थी, अब ‘बाहुबली-2’ ने उसे अकल्पनीय विस्तार दे दिया है। निर्देशक एसएस राजामौली की ये फिल्म हर लिहाज से कितनी भव्य है, प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना भाटिया ने कैसा अभिनय किया है, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा – ये सब तो आप बस हॉल जाकर देखें, फिलहाल बात करते हैं इसकी कमाई की।

गौरतलब है कि हिन्दी फिल्मों के सौ करोड़ी, दो सौ करोड़ी, तीन सौ करोड़ी क्लब की शुरुआत मूल रूप से तीनों खान – आमिर, सलमान, शाहरुख – की फिल्मों से हुई। इस क्लब में अक्षय कुमार, अजय देवगन, ऋतिक रोशन, रणबीर कपूर, रणबीर सिंह और बिग बी अमिताभ बच्चन की फिल्में भी समय-समय पर शामिल हुईँ। लेकिन हमें जानना चाहिए कि हिन्दी फिल्मों से भी पहले ऐसे क्लब की शुरुआत दक्षिण में हुई थी। 2007 में बनी तमिल फिल्म ‘शिवाजी’, जिसमें रजनीकांत की मुख्य भूमिका थी, ने 148 करोड़ की कमाई की थी। तब तक किसी हिन्दी फिल्म ने सौ करोड़ का स्वाद भी नहीं चखा था। हालांकि बाद के दिनों में ‘बाहुबली-1’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘सुल्तान’, ‘पीके’ और ‘दंगल’ जैसी फिल्मों ने पांच सौ, छह सौ, और सात सौ करोड़ तक के क्लब बना दिए। लेकिन ‘बाहुबली-2’ ने रिलीज के पहले दिन जैसी कमाई की है, उसे देखते हुए कहना गलत न होगा कि सौ करोड़ की तरह हजार करोड़ वाले क्लब की शुरुआत का श्रेय भी दक्षिण को ही मिलेगा। वैसे तेलुगु-तमिल-मलयालम और हिन्दी में एक साथ रिलीज हुई और सम्पूर्ण भारत में समान उत्सुकता और उत्साह से देखी जा रही ‘बाहुबली-2’ को पहली ‘भारतीय’ फिल्म भी बोलें तो गलत न होगा।

बहरहाल, ‘बाहुबली-2’ रिलीज के पहले दिन सौ करोड़ के क्लब में प्रवेश पाने वाली पहली फिल्म बन चुकी है। ‘बॉक्स ऑफिस इंडिया’ के मुताबिक ‘बाहुबली-2’ के पहले दिन का कलेक्शन 122.3 करोड़ रुपए का है। यहां तक कि इस बहुभाषी फिल्म ने हिन्दी मार्केट में पहले ही दिन 40.75 करोड़ का कारोबार किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे पहले सुल्तान ने पहले दिन 36.54 करोड़ और दंगल ने 29.78 करोड़ का आंकड़ा छुआ था। बता दें कि ‘बाहुबली-2’ भारत में 6500 और दुनिया भर में करीब 9000 स्क्रीन पर रिलीज हुई है और खास बात यह कि रिलीज से पहले ही यह बकायदा 500 करोड़ की कमाई भी कर चुकी है। ऐसे में आप ही बताएं कि हजार करोड़ का आंकड़ा भला कितनी दूर है।

ट्रेड एनालिस्ट्स की मानें तो इस फिल्म के पहले दिन की कमाई को लेकर ऐसी उम्मीद पहले से ही थी। और हो भी क्यों न? जिस फिल्म की प्रतीक्षा उन्माद में तब्दील हो चुकी हो, रिलीज से पहले सिनेमाहॉल हाउसफुल हो चुके हों और पहले दिन पहले शो के लिए लोग कड़ी धूप में भी कतार में खड़े हों, तो ऐसा होना और इतिहास का रचा जाना स्वाभाविक ही था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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खत्म हो तीन तलाक, मोदी ने किया मुस्लिम समाज का आह्वान

इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी, दहेजबंदी और बालविवाह-उन्मूलन की बात कर रहे हैं तो उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुस्लिम समाज में व्याप्त तीन तलाक जैसी बुराई को दूर करने की पहल कर रहे हैं। काश कि राजनीति में हमेशा ऐसी ही बयार चले और राजनीति समाज को बदलने का, बेहतर करने का जरिया बने। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए इसका हल तलाशने को मुस्लिम समाज का आह्वान किया है और साथ में उम्मीद जताई है कि मुस्लिम समाज से ही लोग आगे आएंगे और तीन तलाक के संकट से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं के लिए रास्ता निकालेंगे।

शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 12वीं सदी के महान समाज सुधारक गुरु बसव की जयंती पर आयोजित समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समाज के अंदर के लोग ही परंपराओं को तोड़ आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने हिन्दू समाज से विधवा विवाह को खत्म करने वाले महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय की चर्चा की और कहा कि उन्होंने जब विधवा विवाह खत्म करने की बात रखी होगी, उस समय उन्हें कितनी आलोचना का शिकार होना पड़ा होगा। फिर भी वे माता-बहनों के साथ समाज में हो रहे घोर अन्याय के खिलाफ लड़े और जीत कर दिखाया। मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए आज वास्तव ऐसी ही पहल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की महान परंपरा में ऐसे कई उदाहरण हैं जब लोगों ने आगे बढ़कर बुरी परंपराओं को तोड़ा और आधुनिक परंपराओं को विकसित किया। इसीलिए तीन तलाक की समस्या के समाधान को लेकर भी वे आशावान हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों पहले से ही भारत में महिलाओं को अपनी बात कहने का हक रहा है। आज तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। देश के प्रबुद्ध मुस्लिम इसके लिए कदम उठाएं। आने वाली पीढ़ियों को इससे ताकत मिलेगी। मोदी ने विश्वास जताया कि भारत के प्रबुद्ध मुसलमान न केवल देश में बल्कि दुनिया को तीन तलाक से निपटने का रास्ता दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर देश में छुआछूत, जातिप्रथा जैसी व्यवस्था खत्म करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नींव तभी मजबूत रहेगी जब बिना भेदभाव के सभी का विकास हो। सबको साथ लेकर और सबके प्रयत्न से ही सबका विकास किया जा सकता है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नहीं रहे विनोद खन्ना

न केवल हिन्दी सिनेमा बल्कि सम्पूर्ण भारतीय सिनेमा के चंद अत्यंत हैंडसम अभिनेताओं में शुमार विनोद खन्ना नहीं रहे। अभी कुछ ही दिन पहले उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें उनका शरीर अतंयंत जर्जर दिख रहा था। उस तस्वीर ने बॉलीवुड समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। तब वो मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती थे और बताया गया था कि उनके शरीर में पानी की कमी हो गई है। और अब उनके नहीं रहने की ख़बर आई है। 70 वर्षीय विनोद ने गुरुवार सुबह अन्तिम सांस भी रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल अस्पताल में ही ली। उनका अन्तिम संस्कार मुंबई के वर्ली श्मशान घाट पर किया गया।

विनोद खन्ना को अंतिम विदाई देने उनके सैकड़ों प्रशंसकों के अतिरिक्त बॉलीवुड और राजनीति की कई दिग्गज हस्तियां पहुंचीं, जिनमें अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन, प्रफुल्ल पटेल, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, सुभाष घई, गुलजार, रमेश सिप्पी, रंजीत, उदित नारायण, रणदीप हुडा, दिया मिर्जा आदि प्रमुख हैं। मुखाग्नि उनके छोटे बेटे साक्षी खन्ना ने दी। विनोद के दो अन्य बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना भी अभिनय के ही क्षेत्र में हैं।

विनोद खन्ना अभिनय के अलावा राजनीति में भी सक्रिय थे और वर्तमान में गुरुदासपुर से भाजपा के सांसद थे। उनकी मृत्यु पर ट्वीट कर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘विनोद खन्ना को हम हमेशा एक प्रसिद्ध अभिनेता, समर्पित नेता और बहुत ही अच्छे इंसान के रूप में याद करेंगे। उनके परिवार को इस दुखद घड़ी में मेरी सहानुभूति।‘

विनोद खन्ना ने अभिनय की शुरुआत 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से की और अपने करियर में 140 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘मेरे अपने’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘इम्तिहान’, ‘इनकार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘लहू के दो रंग’, ‘कुर्बानी’, ‘दयावान’, ‘जुर्म’ जैसी कई फिल्में उनके यादगार अभिनय के लिए याद की जाएंगी। हाल के दिनों में विनोद सलमान खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दबंग’ में और आखिरी बार शाहरुख खान के पिता की भूमिका में फिल्म ‘दिलवाले’ में नज़र आए थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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सुकमा के शहीदों के परिवार की मदद के लिए आगे आई बिहार सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस हमले में बिहार के शहीद छह जवानों के परिजनों को राज्य सरकार की और से 5 लाख रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने शहीद हुए जवानों का अंतिम संस्कार राज्य सरकार की ओर से पूरे पुलिस सम्मान के साथ किए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंगलवार को जारी बयान में नीतीश ने कहा कि इन जवानों की शहादत को देश हमेशा याद रखेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को छत्तीसगढ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस घटना में पच्चीस जवान शहीद हो गए थे, जिनमें छह जवान बिहार के थे। नक्सलियों से लड़ते हुए बिहार के जो लाल शहीद हुए, उनके नाम कृष्ण कुमार पांडेय (सासाराम), अभय कुमार लोमा (वैशाली), रंजीत कुमार (शेखपुरा), नरेश यादव (दरभंगा), सौरभ कुमार (दानापुर कैंट, पटना) और अभय मिश्र (भोजपुर) हैं।

उधर इस मामले को लेकर आरजेडी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। पार्टी ने कहा कि केवल ट्विटर पर राष्ट्रवाद की बातों से काम नहीं चलने वाला है। एक्शन भी जरूरी है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार नक्सलियों और आतंकियों के खिलाफ एक्शन प्लान बनाए।

कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार बताया। पार्टी के नेता प्रेमचंद मिश्रा ने नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री को घेरा और इसे गृह मंत्रालय की बड़ी विफलता बताते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस्तीफे की मांग की।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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