प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान सिर्फ और सिर्फ एक काम करें कि बस अपने घर में रहें। किसी सूरत में बाहर न निकलें। देश के हर राज्य को, हर केन्द्रशासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है। हिन्दुस्तान को बचाने के लिए, हिन्दुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियों, पिछले दो दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है। राज्य सरकारों के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता-पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं। सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा।
कोरोना से प्रभावित रहे चीन, अमेरिका, इटली, ईरान आदि देशों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है, और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है सामजिक दूरी। समाज के लोग एक-दूसरे से अलग-थलग रहेंगे तो यह बीमारी भी उनसे दूर रहेगी। प्रधानमंत्री की गौर करने वाली एक बात यह भी थी कि उन्होंने कहा, यह लॉकडाउन कर्फ्यू नहीं है लेकिन इसे कर्फ्यू की तरह ही लें। जरूरत पड़ी तो सख्ती भी बरती जाएगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि साथियो, आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। एक दिन के जनता कर्फ्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब, मध्यम वर्ग, उच्च वर्ग – हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था, एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। अब आगे भी पूरे देश में लागू किए जा रहे लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करें। हम जल्द ही कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से निपटने में सफल होंगे।
पृष्ठ : भारत अबतक
लॉकडाउन: नीतीश कुमार ने की सहायता पैकेज की घोषणा
आज 1, अणे मार्ग स्थित संकल्प में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस से उत्पन्न संक्रमण की गंभीर स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा तथा मुख्य सचिव दीपक कुमार समेत वरीय अधिकारीगण मौजूद थे।
इस उच्चस्तरीय बैठक में लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में लोगों को सहायता पैकेज देने के संबंध में पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैं – पहला, सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक माह का राशन मुफ्त में दिया जाएगा। दूसरा, सभी प्रकार के पेंशनधारियों (मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन) को अगले तीन माह की पेंशन राशि अग्रिम तौर पर तत्काल दी जाएगी। यह राशि उनके खाते में सीधे अंतरित की जाएगी। तीसरा, लॉकडाउन क्षेत्र के सभी नगर निकाय क्षेत्रों एवं प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में अवस्थित सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक हजार रुपए प्रति परिवार दिया जाएगा। यह राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित की जाएगी। चौथा, वर्ग 1 से 12 तक के सभी छात्र/छात्राओं को देय छात्रवृत्ति 31 मार्च 2020 तक उनके खाते में दे दी जाएगी तथा पांचवां, सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को एक माह के वेतन के समतुल्य प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि लॉकडाउन के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई सलाह का अनुपालन करें। आपके सहयोग से ही इस महामारी से निपटने में सहायता मिलेगी।
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निर्भया के मामले में उसकी माँ को क्यों मिला मुश्किल से न्याय
निर्भया कांड के चारों गुनहगारों को जोड़कर आजाद भारत में फांसी के फंदे पर लटकने वालों की कुल संख्या 724 हो गई। देश में पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारों गोडसे एवं आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला सेंट्रल जेल में दी गई थी तथा अंतिम फांसी निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को 20 मार्च 2020 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में दी गई।
बता दें कि निर्भया के माता-पिता के अटूट संकल्प व संयम के चलते और कोर्ट के कानूनी दांव-पेंच के बीच लगे व जगे रहने के कारण ही… लगभग 7 वर्ष 3 महीने से अधिक समय तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार छह दुष्कर्मियों में से चार को ही फांसी पर लटकाया गया। एक तो जेल में ही खुदकुशी कर ली थी और दूसरे को नाबालिग का लाभ मिल गया।
यह भी बता दें कि जब 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की सर्द रात में छह दुष्कर्मियों ने निर्भया को अपना शिकार बनाया था तो ऐसा लगा कि सारा देश ठहर सा गया। निर्भया द्वारा अंतिम सांस लेने के बाद उसकी माँ “आशा” भारत की सारी माँओं की आशा बनकर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाती रही और न्याय पाने के लिए बिलबिलाती रही। इस दरमियान यदा-कदा थक जाने के चलते हलचल काफी कम हो जाया करती तथा घर में अकेले निर्भया की तस्वीर के सामने बैठना उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। मार्च 20 (शुक्रवार) को सवेरे 5:30 बजे फांसी की जानकारी के साथ निर्भया के माता-पिता को सुकून मिला और भारत की समस्त महिलाओं को खुशी मिली।
यह भी बता दें कि कई बार डेथ वारंट निकलने और फांसी की तिथि तय होने के बावजूद कोई ना कोई कानूनी पेच फंस ही जाता। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतिम तिथि 17 जनवरी को दया याचिका ठुकराई, फिर भी फांसी पर लटकने में दोषियों के वकील ने 70 दिन से अधिक समय जाया कर दिया।
चलते-चलते यह भी जानिए कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से जब निर्भया के मामले वाले दुष्कर्मियों को फांसी दिए जाने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों एवं भारतीय सांसदों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। केवल फांसी से ऐसे अपराध की पुनरावृति रुकने वाली नहीं है। परन्तु, हमारी कोशिश हो कि इस तरह के क्रूरतम अपराध फिर नहीं हो…. क्योंकि कोशिश का दुनिया में कोई विकल्प नहीं है…।
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आखिर ज्योतिरादित्य ने अलग कर ही ली अपनी राह
मध्यप्रदेश में आंतरिक कलह और वर्चस्व की लड़ाई की शिकार कांग्रेस आखिरकार बिखर ही गई। पार्टी के भीतर लगातार उपेक्षा के शिकार हो रहे ज्योतिरादित्य ने वहां कमलनाथ सरकार की जड़ें हिला दीं। यही नहीं, अब उनके भाजपा में जाने की खबर है। पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। चर्चा तो यह भी है कि राज्यसभा चुनाव के ठीक बाद उन्हें मोदी सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है।
बता दें कि ज्योतिरादित्य मंगलवार सुबह करीब 10:45 बजे गुजरात भवन पहुंचे। यहां से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें अपने साथ 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास लेकर गए, जहां शाह की मौजूदगी में सिंधिया की प्रधानमंत्री से करीब घंटेभर बातचीत हुई। फिर शाह की ही कार में सिंधिया गुजरात भवन लौटे। इस मुलाकात के बाद दोपहर 12.10 बजे उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफे की चिट्ठी ट्वीट कर दी, जो सोमवार, यानी 9 मार्च को ही लिख ली गई थी।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने सिंधिया का प्रचार के मुख्य चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन सीएम पद की दौड़ में वे पिछड़ गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी उनका नाम आगे रहा, लेकिन पद नहीं मिला। अटकलें थीं कि वे डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उपेक्षा का दौर यहीं नहीं रुका, खबर यह भी है कि सिंधिया ने चार इमली में बी-17 बंगला मांगा, लेकिन वह कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को दे दिया गया। रही-सही कसर भी तब पूरी हो गई जब 14 फरवरी को टीकमगढ़ में अतिथि विद्वानों की मांगों पर ज्योतिरादित्य ने कहा कि यदि वचन पत्र की मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरेंगे। इस पर कमलनाथ ने टका सा जवाब दिया कि ऐसा है तो उतर जाएं। इसी के बाद तल्खी और बढ़ गई और इतनी बढ़ी कि मौजूदा शक्ल अख्तियार कर ली। यह भी याद दिला दें कि करीब 4 महीने पहले 25 नवंबर 2019 को ही ज्योतिरादित्य ने ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल से कांग्रेस का नाम हटा दिया था। इसकी जगह उन्होंने स्वयं को केवल जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया था।
एक ओर पृष्ठभूमि में इतनी बातें थीं हीं। ज्योतिरादित्य के सामने एक तरह से अस्तित्व का संकट था। ऐसे में राज्यसभा चुनाव आ गया। मध्यप्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों में से 2 पर उसके उम्मीदवारों का जीतना तय था। दिग्विजय की उम्मीदवारी पक्की थी। दूसरा नाम ज्योतिरादित्य का सामने आया। बताया जा रहा है कि यहां भी उनके नाम पर कमलनाथ अड़ंगे लगा रहे थे। इसी से ज्योतिरादित्य नाराज थे। इसके बाद 9 मार्च को जब प्रदेश के हालात पर चर्चा के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे थे, तभी 6 मंत्रियों समेत सिंधिया गुट के 17 विधायक बेंगलुरु चले गए थे। इससे साफ हो गया कि सिंधिया अपनी राहें अलग करने जा रहे हैं। बहरहाल, उनके भाजपा में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी अब हो ही जाएगी। उधर कमलनाथ अपने तरकश से कौन-कौन से तीर निकालते हैं और कांग्रेस सरकार की डूबती दिख रही नाव को किस तरह पार लगाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे वे ऐसा कर पाएंगे, इस पर मौजूदा स्थिति में यकीन कर पाना मुश्किल लगता है।
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कोरोना: पीछे हटने का नहीं, मिलकर काम करने का वक्त
दुनिया भर में कोरोना वायरस का फैलना जारी है। चीन में शुक्रवार को 28 और लोगों की मौत के साथ दुनिया भर के 17 देशों में मरने वालों की संख्या 3406 हो गई है। वहीं, संक्रमण के 99 नए मामले सामने आए। चीन में जहां संक्रमण के केन्द्र वुहान में नए मरीजों की संख्या में कमी आई है, वहीं हुबेई प्रांत से बाहर संक्रमण का फैलना जारी है। दूसरे देशों से चीन लौटे 24 लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। दूसरी तरफ संक्रमण के खतरे की वजह से अमेरिका में केलिफोर्निया के तट पर खड़े किए गए क्रूज शिप ग्रांड प्रिंसेस में फंसे 21 और यात्री संक्रमित पाए गए हैं।
ध्यातव्य है कि दुनिया के 84 देश कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और अब तक 1,00,329 लोग संक्रमित पाए गए हैं। बीमारी के केन्द्र चीन में सबसे ज्यादा 3070 मौतें हुई हैं और वहां 80,653 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। संक्रमण के चलते चीन के बाद इटली में सबसे ज्यादा 148 और ईरान में 107 लोगों की जान गई है।
पूरी दुनिया पर अभिशाप बनकर मंडराने वाले कोरोना वायरस के बारे में माना जा रहा है कि चीन के वुहान के सी-फूड और पोल्ट्री मार्केट से यह वायरस फैला। वुहान की आबादी 1.1 करोड़ है। वायरस लोगों से लोगों में फैल रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वायरस इतनी तेजी से कैसे फैला और इस कदर खतरनाक हो गया। एशिया में दक्षिण कोरिया और ईरान इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ईरान में पीड़ितों की संख्या 3513 पहुंच गई है। दक्षिण कोरिया में 6593 केस सामने आए हैं। जापान में 1065 लोग इसकी चपेट में हैं। वहीं, भारत में कोरोना वायरस के 31 मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में एक और मरीज में संक्रमण की पुष्टि हुई।
इधर बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्तर पर लोग अलर्ट हैं और केन्द्र सरकार भी पूरी तरह सचेत है। उन्होंने कहा कि हमलोगों ने राज्य स्तर पर बैठक कर हर पहलू पर चर्चा की है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को जिम्मेवारी सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गया में बाहर से लोग आते हैं। इसके साथ ही नेपाल का बॉर्डर खुला हुआ है, वहां से भी लोग आवागमन करते हैं। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि चीन या अन्य जगहों से भी लोग नेपाल आए हों। हर पहलू को ध्यान में रखकर गंभीरता से विमर्श हुआ है। हर परिस्थिति में लोगों की सहायता करना सरकार का दायित्व है और सरकार की ओर से सब कुछ किया जा रहा है।
अंत में, जैसा कि शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा, हम भी यही कहेंगे कि यह वक्त पीछे हटने का नहीं, बल्कि मिलकर काम करने का है। तो आइये, सचेत रहें और मिलकर इसका सामना करें।
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सुप्रीम कोर्ट कानून बनाकर रोक सकता है… राजनीति का अपराधीकरण
आजादी के 70 वर्ष बाद चुनावी राजनीति में बेशुमार धन-बल का इस्तेमाल एवं दागी जनप्रतिनिधियों की बढ़ती दखल… अब सर्वोच्च न्यायालय को भी चिंतन करने के लिए मजबूर कर रहा है। ऐसा लगता है कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त रुख अख्तियार करने का निश्चय भी कर लिया है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति को स्वच्छता प्रदान करने के लिए भारत के सभी राजनीतिक दलों सहित चुनाव आयोग को भी कई दिशा निर्देश दिए हैं। समाज शास्त्रियों एवं शिक्षाविदों का कहना है कि नए नियमों से राजनीति का अपराधीकरण कितना रुकेगा, यह तो राजनीतिक दलों की वैचारिक सुचिता पर निर्भर करेगा… तथा चुनाव आयोग की प्रभावी भूमिका से भी तय होगा।
जानिए कि 17वीं लोकसभा चुनाव- 2019 में खड़े 8049 उम्मीदवारों में से 7228 के शपथ-पत्र का विश्लेषण किए जाने के क्रम में पाया गया कि जहाँ 1500 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की स्वयं घोषणा की थी वहीं 1070 ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों यथा हत्या, बलात्कार, अपहरण… आदि की बात स्वीकार की थी। तुर्रा तो यह है कि 50 से अधिक ने जहाँ 302 के तहत अपने खिलाफ हत्या का आरोप स्वीकारा, वहीं दर्जनों ने अपने खिलाफ दोष सिद्धि की बात भी स्वीकार की थी।
चलते-चलते बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पास यह विशेष अधिकार है कि अगर किसी कानून में कोई कमी है या किसी बात पर कानून नहीं है या संसद उस तरफ ध्यान नहीं दे रही है और उससे जनहित को नुकसान हो रहा है, तो इन तीनों ही परिस्थितियों में वह नया कानून बना सकता है या मौजूदा कानून में कमियों को दूर कर सकता है।
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बांग्लादेश में जलमग्न होने पर बच्चों के घर तक पहुँच गए बोट स्कूल
बांग्लादेश के जिस भाग में 8 महीने तक स्कूलों में पानी भरा रहता है और बच्चे स्कूल जाकर पढ़ नहीं सकते… बल्कि स्कूल तक जा भी नहीं सकते तो स्कूल ही उन बच्चों के घर तक पहुंच जाया करता। फिलहाल तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि अब तक पाँच सौ ‘बोट स्कूल’ में लगभग 15 हज़ार बच्चे पढ़ रहे हैं।
बता दें कि जितनी भी बोट स्कूल हैं उनमें सौ फ़ीसदी शिक्षक केवल और केवल महिलाएं ही हुआ करती हैं। ऐसा इसलिए कि वे महिला शिक्षक बच्चों को संपूर्णता में देखभाल भी कर लेती है। नतीजा यह हुआ कि आज बांग्लादेश में 97% बच्चे स्कूल जाने लगे हैं और पढ़ने लगे हैं।
बता दें कि बांग्लादेश में 2012 से स्कूल बोट की शुरुआत हुई और अब तक लगभग 15 हजार बच्चे इनमें पढ़ाई कर रहे हैं। सर्वाधिक उपलब्धि यह है कि 8 वर्ष में 80 हजार बच्चे इन बोट स्कूलों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं तथा अन्य दूसरे शहरों के स्कूल-कॉलेजों में आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। जानिए कि इनमें से कई तो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास कर एवं स्कॉलरशिप हासिल कर पढ़ाई कर रहे हैं। यह भी कि जो बच्चे दिन में स्कूल नहीं जा पाते, उन्हें रात के समय पढ़ाया जाता है।
चलते-चलते बता दें कि इन बोट स्कूलों में रोशनी के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। उसी रोशनी में महिलाओं को कढ़ाई-सिलाई सिखा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाता है।
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फिल्म ‘गली ब्वॉए’ ने फिल्मफेयर सहित 13 पुरस्कार जीत इतिहास रच दिया
असम के गुवाहाटी शहर में शनिवार को फिल्म फेयर समारोह का आयोजन किया गया जिसमें फिल्म फेयर पुरस्कारों की घोषणा की गई। पूरे समारोह में अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री आलिया भट्ट की जोड़ी छा गई।
बता दें कि जोया अख्तर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘गली ब्वॉए’ ने कुल 13 पुरस्कार अपने नाम दर्ज कराकर फिल्मी दुनिया में एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। इस फिल्म ने 2005 में बनी फिल्म ‘ब्लैक’ को भी पटकनी देकर जीत का परचम लहराया। जहां ‘ब्लैक’ दो दर्जन पुरस्कार से एक कम यानी 11 पर ही सिमट गया वहीं गली ‘गली ब्वॉए’ दर्जन से एक अधिक यानि 13 पुरस्कार के साथ अब तक का सर्वश्रेष्ठ अवार्डों की सूची में सबसे ऊपर नाम दर्ज करा लिया है।
चलते-चलते बता दें कि रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की मुख्य भूमिका वाली फिल्म गली ब्वॉए’ ने सभी 13 श्रेणियों में पुरस्कारों पर कब्जा जमा लिया है। इस फिल्म ‘गली ब्वॉए’ की झोली में सर्वश्रेष्ठ फिल्म सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (जोया अख्तर), सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (रणवीर सिंह), सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (आलिया भट्ट) के पुरस्कार तो गया ही, साथ ही सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (सिद्धांत चतुर्वेदी) और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री (अमृता सुभाष) का पुरस्कार भी इसकी झोली में समा गया। इसके अलावे सर्वश्रेष्ठ गीत (अंकुर तिवारी) आदि कुल मिलाकर 1 दर्जन से अधिक पुरस्कार विजेता फिल्म है आलिया-रणवीर की ‘गली ब्वॉए’।
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कमाल की कलाकारी
बेशक कोई भी कलाकारी संवेदना से सृजित होती है, लेकिन कलाकारी का भाव मन की गहराइयों से पैदा होते हैं। संसार में कोई समय गुजारने के लिए यह शौक पालता है तो कोई शोहरत पाने के लिए। इनसे जुदा कुछ चितेरे ऐसे भी होते हैं जो कुछ कर गुजरने के लिए कलाकारी के सेवक बन जाते हैं।
बता दें कि ऐसी ही कमाल की कलाकारी का प्रदर्शन जहां दिल्ली में अन्ना हजारे का शिष्य अरविंद केजरीवाल ने पुनः किया है, वहीं यूपी के बरौली-खरका निवासी 25 वर्षीय अवनीश अद्भुत कलाकारी की बानगी है। एक तरफ आईआईटियन अरविंद ने बिना किसी ट्रेनिंग के ही अभूतपूर्व व कमाल की राजनीतिक कलाकारी दिखाई वहीं दूसरी तरफ बिना किसी प्रशिक्षण के ही यूपी के अवनीश ने स्टेपल पिनों से स्वामी विवेकानंद का चित्र हू-ब-हू बना कर दिखाया है कमाल की कलाकारी।

जानिए कि महज 5 दिनों में जहां 17 हज़ार 5 स्टेपल पिन का प्रयोग करते हुए स्वामी विवेकानंद के चित्र बनाकर अवनीश ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान बना लिया है वहीं दिल्ली में अरविंद ने अपने 5 वर्ष के शासनकाल में अभूतपूर्व प्रयोग के जरिए राजनीति के धुरंधरों को पटकनी देते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी का रास्ता प्रशस्त करने हेतु कदम बढ़ा दिया है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि अवनीश ने भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के चित्र तैयार करने में 30 हजार 6 सौ 1 स्टेपल पिन व्यवहार में लाकर डॉ.कलाम का हू-ब-हू चित्र तैयार किया है। अवनीश भी अब अरविंद की तरह ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी में लग गए हैं और सपनों को पंख लगाने के लिए सनलाइट आर्ट की मदद से लकड़ी पर मदर टेरेसा का चित्र उकेरने में दिन रात लगे रहते हैं।
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स्वामी रामदेव के योग प्रशिक्षक आचार्य रफीक बांट रहे योग का मर्म
आज हमारी सोच को संकीर्ण बनाने में लगी है… पाखंड में डूबी धर्म की व्याख्याएं। इन्हीं मान्यता प्राप्त संस्थाओं से ऊपर उठकर मानवतावाद का सिद्धांत प्रतिपादित किया था- स्वामी रामदेव ने। इस सिद्धांत के मूल में जाति, धर्म, समुदाय से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता के कल्याण की परिकल्पना है- ये बातें स्वामी रामदेव के योग प्रशिक्षक आचार्य रफीक खान की हैं जो पांच वक्त के नमाजी होने के बावजूद योगानुरागी नर-नारियों को समझा रहे हैं- योग करो, निरोग रहो के साथ-साथ योग के समस्त मर्मों को।
बता दें कि आचार्य रफीक एक शिक्षक हैं जो उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के हिमगिर प्रखंड के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं। शेष समय में वे समाज को सुशिक्षित करने हेतु योगगुरु की भूमिका का निर्वहन भी करते हैं। शिक्षक रफीक खान ने बिना किसी ब्रेक के योग एवं वैदिक दर्शन के प्रचार-प्रसार में अपना समस्त जीवन ही समर्पित कर दिया है। बकौल रफीक मंजिल तक पहुंचने से पहले रुकना उन्हें नहीं है।
यह भी जानिए कि आचार्य रफीक एक मुस्लिम होने के बावजूद गायत्री मंत्र से लेकर तमाम वैदिक मंत्रों का नियमित रूप से निष्ठा के साथ जाप करते हैं। ईश्वर-अल्लाह…. राम-रहीम दोनों के प्रति वे समान रूप से श्रद्धावनत रहते हैं। वे स्वस्थ रहने के लिए योग को जरूरी मानते हैं। वे सर्वधर्म सद्भाव का संदेश भी देते रहते हैं। वे कहते हैं कि मेरे लिए गायत्री मंत्र और नमाज दोनों इबादत है। वे वेद पाठ भी करते हैं और पांच वक्त का नमाज भी पढ़ते हैं। इसलिए लोग उन्हें आचार्य रफीक खान के नाम से पुकारा करते हैं। यही है भारत की माटी की असली खुशबू…।


























