बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की बाध्यता खत्म कर दी है। यानि अब स्ट्रीमवाइज पढ़ाई नहीं होगी, सिर्फ इंटरमीडिएट होगा। छात्र अब मनचाहा विषय लेकर इंटर कर सकेंगे और उन्हें ‘इंटरमीडिएट’ की डिग्री दी जाएगी। आईए, आईएससी और आईकॉम के संकायों में उन्हें बांटा नहीं जाएगा। यह महत्वपूर्ण फैसला शनिवार को बोर्ड की गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया। अब इस आशय का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार से मंजूरी मिलते ही वर्ष 2018 से इसे लागू कर दिया जाएगा।
गौरतलब कि इंटर का नया सिलेबस 2007-09 में ही तैयार किया गया था, जिसमें पहले से ही उक्त व्यवस्था है। इस व्यवस्था को शिक्षा विभाग से अनुमोदन भी प्राप्त है, पर इसे लागू नहीं किया जा सका था। नए सिलेबस के अनुसार छात्रों को भाषा समूह से कोई दो तथा वैकल्पिक विषयों में से कोई तीन विषय रखना होगा। साथ ही एक ऐच्छिक विषय रखने की सुविधा होगी, जो अनिवार्य नहीं होगा।
बता दें कि भाषा समूह में कुल 12 भाषाएं – हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, भोजपुरी, बांग्ला, मैथिली, मगही, अरबी, फारसी, पाली तथा प्राकृत – होंगी, जबकि वैकल्पिक विषयों की संख्या 19 होगी। ये वैकल्पिक विषय हैं – गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान, रसायनशास्त्र, कम्प्यूटर साइंस, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, भूगोल, संगीत, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, बिजनेस स्टडीज, एकाउंटेंसी, इंटरप्रेन्योरशिप, मल्टीमीडिया एवं वेब टेक्नोलॉजी तथा योग एवं शारारिक शिक्षा।
बिहार बोर्ड ने देर से ही सही लेकिन दुरुस्त निर्णय लिया है। सीबीएसई और आईसीएसई में यह व्यवस्था पहले से ही थी। आज पूरी दुनिया में इसी पैटर्न पर पढ़ाई हो रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बोर्ड के इस बड़े बदलाव से बिहार के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लकीर का फकीर बनने की कोई बाध्यता नहीं होगी उनके सामने। अपनी रुचि, प्रतिभा और आवश्यकता के अनुरूप वे विषयों का चयन कर सकेंगे। तेज रफ्तार ज़िन्दगी और गलाकाट प्रतियोगिता के इस दौर में उनकी क्षमता और श्रम का समुचित उपयोग होगा, ये बड़ी बात है।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
पृष्ठ : बिहार अबतक
तेजस्वी के विभागीय व्हाट्सएप पर शादी के 44000 प्रस्ताव!
बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों – लालू प्रसाद यादव एवं राबड़ी देवी – के उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी यादव इन दिनों परेशान हैं। आप कुछ और सोचें उससे पहले ही बता दें कि उनकी परेशानी के मूल में कोई विपक्षी दल या नेता नहीं, पार्टी और सरकार भी मजे में चल रही है। फिर भी यकीन मानें लालू के छोटे लाडले बेहद परेशान हैं। चलिए, पहलियां बुझाने की बजाय आपको वजह बताते हैं। दरअसल इस पूर्व क्रिकेटर की परेशानी यह है कि इन दिनों वे ‘लव यू’ के बाउंसर झेल रहे हैं। जी हाँ, उन्हें व्हाट्सएप पर पिछले कुछ महीनों में शादी के 44000 प्रस्ताव मिल चुके हैं और मजे की बात यह कि जो व्हाट्सएप नंबर इन प्रस्तावों का गवाह बना है वो उनका पर्सनल नंबर नहीं, उनके विभाग का नंबर है।
दरअसल, उपमुख्यमंत्री सह पथ निर्माण मंत्री तेजस्वी ने यह नंबर खराब सड़कों की जानकारी देने के लिए जारी किया था। उन्होंने लोगों से कहा था कि अगर कोई सड़क बदहाल दिखे तो उसकी तस्वीर और सड़क कहाँ है इसकी जानकारी भेजें। लेकिन इस व्हाट्सएप का हाल यह है कि इस पर अब तक आए 47000 मैसेज में से लगभग 44000 मैसेज में उनसे शादी का प्रस्ताव रखा गया है। सिर्फ 3000 मैसेज ऐसे हैं जिनमें सड़कों का मरम्मत कराने की बात कही गई है।
विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर लड़कियों ने व्हाट्सएप पर अपनी पर्सनल जानकारी शेयर की है जिसमें फिगर से लेकर त्वचा का रंग और लंबाई भी शामिल है। हालांकि सावधानी बरतते हुए यह भी कहा कि शायद लड़कियों को लगा हो कि यह तेजस्वी का पर्सनल नंबर है। वहीं तेजस्वी ने इस ‘अभूतपूर्व’ समस्या पर कहा कि अगर वह शादीशुदा होते तो ऐसे पर्सनल मैसेज से मुश्किल में पड़ जाते। उन्होंने कहा – “भगवान का शुक्र है कि मैं सिंगल हूँ।”
इस बाबत आगे कोई सवाल न हो, यह भांपकर तेजस्वी ने पहले ही कह दिया कि वे अरेंज्ड मैरेज करना पसंद करेंगे। यह सुन पता नहीं वे 44000 लड़कियों क्या करेंगी जो व्हाट्सएप पर अपना ‘भविष्य’ तलाशने में जुटी हैं। शायद उनमें से कई अपने ‘लव’ (अगर सचमुच हो तब भी, ना हो तब भी) को ‘अरेंज्ड’ करने की जुगत में लग भी गई हों!
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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2019 के आईने में जेडीयू का राजगीर अधिवेशन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘संघमुक्त भारत’ के अपने अभियान की औपचारिक घोषणा कर दी। राजगीर में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के बाद उन्होंने सभी विपक्षी दलों से मुद्दों के आधार पर एक मंच पर आने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे गैर बीजेपी दलों के साथ आने को तैयार हैं। नीतीश कुमार का यह कदम 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गैर बीजेपी दलों का साझा मंच बनाने की कोशिश का हिस्सा है और कहने की जरूरत नहीं कि वह यह मंच अपनी अगुआई में चाहते हैं। दो दिनों के इस अधिवेशन में पार्टी ने नीतीश कुमार को साझे मंच का पीएम उम्मीदवार भी माना, हालांकि इतनी ‘सावधानी’ जरूर बरती गई कि राजनीतिक प्रस्तावना में इस बात का जिक्र ना हो।
इस अधिवेशन में नीतीश ने सर्जिकल स्ट्राइक पर पहली बार मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वे शुरू से इस मुद्दे पर सरकार के साथ हैं और रहेंगे लेकिन अब इस मुद्दे पर बीजेपी राजनीति करने लगी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी देश के पीएम हैं, किसी एक दल के नेता मात्र नहीं और उनका व्यवहार उसी अनुरूप होना चाहिए। पाकिस्तान मुद्दे पर सरकार को और कड़ा रुख अपनाने की सलाह देते हुए नीतीश ने कहा कि मोदी सरकार को पाकिस्तान को ‘लव लेटर’ लिखना बंद कर देना चाहिए। तीन तलाक के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह सब धार्मिक संगठनों के ऊपर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि विकास के मामले में पूरी तरह फेल होने के कारण वह ऐसे मुद्दे उठा रही है।
नीतीश कुमार ने अध्यक्ष पद संभालने के बाद घोषणा की कि अब वे सभी राज्यों का दौरा करेंगे। उन्होंने अपनी पार्टी के विस्तार और समान विचार वाले गैर बीजेपी दलों के साथ गठबंधन बनाने की बात भी कही। इसके अलावा उन्होंने सभी विपक्षी दलों से 16 नवंबर से होने वाले संसद सत्र के दौरान बड़े मुद्दों पर एक साथ मिलकर सरकार पर हमला बोलने का आग्रह किया।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जेडीयू के राजगीर अधिवेशन से नीतीश और उनकी पार्टी की 2019 के चुनाव को ‘मोदी बनाम नीतीश’ का रूप देने की कोशिश और तेज हुई। इस अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पड़ोसी राज्य झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल मरांडी की उपस्थिति भी अकारण नहीं थी। बिहार चुनाव में जीत हासिल करने के बाद से ही नीतीश मिशन 2019 के तहत बिहार के बाहर पैर पसारने में दिन-रात एक कर रहे हैं। शरद यादव की जगह उनका अध्यक्ष बनना हो, यूपी चुनाव को लेकर चहलकदमी हो, शराबबंदी को राष्ट्रव्यापी अभियान बनाने की कोशिश हो या फिर राजगीर अधिवेशन से उठाये जाने वाले स्वर – ये सारी कवायद अपना कद बढ़ाने और प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी जताने की खातिर है जिसे समझने के लिए आपका राजनीति का पंडित होना जरूरी नहीं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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बिहार का गौरव राष्ट्रीय अंडर-19 शतरंज चैम्पियन
अररिया के 14 वर्षीय कुमार गौरव ने आंध्रप्रदेश में हुई 46वीं राष्ट्रीय अंडर-19 शतरंज प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ गौरव विश्व जूनियर शतरंज में भारत का प्रतिनिधित्व करने के भी पात्र हो गए हैं। अब वह जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप, एशियन जूनियर चैम्पियनशिप और कॉमनवेल्थ चेस चैम्पियशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बता दें कि गौरव बिहार के राष्ट्रीय जूनियर शतरंज विजेता बनने वाले तीसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले प्रमोद कुमार सिंह 1980 और 1981 में दो बार और मनीषी कृष्ण 1989 में बिहार के लिए यह खिताब जीत चुके हैं।
गौरतलब है कि बिहार के इस लाल ने 8 अक्टूबर को शुरू हुई अंडर-19 चेस चैम्पियनशिप का गोल्ड बिहार सहित अन्य राज्यों के 136 खिलाड़ियों को पीछे छोड़ कर जीता है जिनमें कई अन्तर्राष्ट्रीय मास्टर भी थे। यह पहला मौका नहीं है जब गौरव ने बिहार का मान बढ़ाया है। इसके पूर्व भी वह कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। पिछले वर्ष कॉमनवेल्थ चेस चैम्पियनशिप अंडर-18 में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। 2014 में वह दिल्ली में आयोजित पार्श्वनाथ इंटरनेशनल चेस फेस्टिवल के चैम्पियन बने जिसमें 41 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था, और 2013 में पार्श्वनाथ इंटरनेशनल ओपन चेस टूर्नामेंट में उन्होंने बांग्लादेश की चेस क्वीन व वुमेन इंटरनेशनल मास्टर (डब्ल्यूआईएम) खिताबधारी 65 वर्षीया रानी हमीद को हराकर तहलका मचा दिया था। कभी हार ना मानने वाला जज्बा गौरव की सबसे बड़ी ताकत रही है।
ये जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि बिहार के अररिया शहर के शिवपुरी निवासी व अधिवक्ता देवनंदन दिवाकर के पुत्र कुमार गौरव में तो शतरंज की विलक्षण प्रतिभा है ही, उनके छोटे भाई-बहन भी इस खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। गौरव के छोटे भाई सौरभ आनंद 2012 में राष्ट्रीय अंडर-9 शतरंज चैम्पियन रह चुके हैं और इस समय सीनियर बिहार चैम्पियन हैं, जबकि उनकी छोटी बहन गरिमा गौरव राष्ट्रीय स्कूल शतरंज की विजेता रह चुकी हैं।
कहने की जरूरत नहीं कि कुमार गौरव की उपलब्धि से आज पूरा बिहार गौरवान्वित है। उनकी सफलता बिहार शतरंज में नई जान फूंकेगी। शतरंज के इस नन्हे उस्ताद ने साबित कर दिया है कि वह विश्व चैम्पियनशिप जीतने की भी क्षमता रखता है। पर इस चमकते सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि प्रचंड प्रतिभा के धनी इस खिलाड़ी की राह में आर्थिक दिक्कतें बाधा बनती रही हैं। अगर उसे समुचित सुविधा मिले तो वह एक दिन शतरंज की सबसे ऊँची मीनार पर परचम लहराएगा, इसमें कोई दो राय नहीं।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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भारतरत्न डॉ. कलाम की जयंती पर मधेपुरा में मिठाईयां बंटीं
15 अक्टूबर 2016 को महान वैज्ञानिक भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 86वीं जयंती समारोह बिल्कुल सादगी के साथ डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी के निवास ‘वृंदावन’ में स्थानीय तुलसी पब्लिक स्कूल के छात्रों, शिक्षकों एवं स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र व प्राचार्य डॉ. हरिनंदन प्रसाद यादव एवं रंगकर्मी विकास-वरुण-विभीषण आदि की उपस्थिति में मनाई गई तथा बच्चे-बच्चियों, शिक्षकों एवं अखबारनवीसों के बीच मिठाईयां बांटी गईं। इस समारोह में रेणु-रोजी-शिवानी, प्रियंका-मनीषा-गजाला सहित अपर्णा-निगम-संध्या, स्वर्णा-कल्पना-अदिति परमार की उपस्थिति अंत तक बनी रही।
इस अवसर पर सभी गणमान्यों द्वारा डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि दी गई तथा पुष्पांजलि अर्पित की गई। डॉ. मधेपुरी ने अवरुद्ध कंठ से उन शब्दों को रखा जो अविस्मरणीय मुलाकात के क्षणों में महामहिम राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने अपने सहयोगी-शिष्य डॉ. अरुण कुमार तिवारी की उपस्थिति में कहा था – “ये आँखें दुनिया को दुबारा नहीं देख पाएंगीं, अस्तु तुम्हारे अंदर जो बेहतरीन है वह दुनिया को देकर जाना, बच्चों को देकर जाना..!”
हाल ही में शिष्य अरुण कुमार तिवारी द्वारा लिखी गई जीवनी ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – एक जीवन’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से डॉ. मधेपुरी ने कहा – “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी जीवित हैं और आगे भी बच्चों की कल्पनाओं में, युवाओं एवं वयस्कों के विचारों में, वैज्ञानिकों के आविष्कारों में… महान राष्ट्र-निर्माण के सपनों में सदैव जीवित रहेंगे।”
अंत में डॉ. मधेपुरी ने कहा – “विश्व की प्रगति, समृद्धि और शान्ति का सपना देखने वाला विश्वगुरु डॉ. कलाम कभी भी विश्व-क्षितिज से विलीन नहीं होगा और आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत उपहार बना रहेगा।”
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तो राबड़ीजी ने आरएसएस के हाफ पैंट को फुल कर दिया!
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की चुप्पी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई थी। और तो और, ट्विटर और फेसबुक पर भी उनकी ओर से सन्नाटा-सा पसरा था। पर लालूजी आखिर लालूजी हैं। अपनी चुप्पी पर कयासों का बाज़ार गर्म होते देख उन्होंने सबको और खासकर भाजपा को अपने अंदाज में चुप कराने (या चर्चा को शहाबुद्दीन से हटाने) की खातिर खासा दिलचस्प ट्वीट किया है। अपने मसालेदार बयानों से ‘मंच को लूटने’ में माहिर लालूजी ने इस बार ऐसा बयान दे डाला कि पहली बार में कोई भी सकते में आ जाए और कुछ भी प्रतिक्रिया करते ना बने। जी हाँ, ट्वीट के माध्यम से दिए अपने बयान में उन्होंने आरएसएस के हाफ पैंट के फुल पैंट में तब्दील होने का श्रेय अपनी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिया है।
बीते मंगलवार को पोस्ट किए अपने ट्वीट में लालू ने लिखा है कि राबड़ी के एक बयान से ही आरएसएस का खाकी पैंट हाफ से फुल हो गया। लालू ने अपने अगले ट्वीट में लिखा कि हमने आरएसएस को फुल पैंट पहनवा ही दिया। राबड़ी देवी ने सही कहा था कि इन्हें संस्कृति का ज्ञान नहीं, शर्म नहीं आती, बूढ़े-बूढ़े लोग हाफ पैंट में घूमते हैं। लालू की तीखी टिप्पणी यहीं नहीं रुकी। आगे उन्होंने कहा कि अभी तो हमने हाफ को फुल पैंट करवाया है, माइंड को भी फुल करवाएंगे, पैंट ही नहीं सोच भी बदलवाएंगे. हथियार भी डलवाएंगे, जहर नहीं फैलाने देंगे। इसी के साथ उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं जिनमें संघ के लोग अब फुल पैंट पहने दिख रहे हैं।
बता दें कि राबड़ी देवी ने इसी साल जनवरी में आरजेडी के एक कार्यक्रम में कहा था कि पब्लिक के सामने हाफ पैंट पहनने पर आरएसएस नेताओं को शर्म नहीं आती? उन्होंने कहा था – “बूढ़ा-बूढ़ा आदमी सब हाफ पैंट पहनता है… खराब भी नहीं लगता।” अब बाकी लोग जो कहें, लालूजी को राबडी देवी का बयान ‘तर्कपूर्ण’ और ‘आक्रामक’ लगता है और वे बेहिचक अपनी अर्द्धांगिनी को संघ की अब तक चली आ रही परम्परा को तोड़ने का श्रेय भी दे रहे हैं।
बहरहाल, लालूजी तो ट्वीट करके निकल लिए। अब ये भाजपा और संघ पर है कि इस पर चुप रहें, प्रतिक्रिया दें या फिर मौके पर मारे गए चौके को लेकर सिर धुनें। संघ ने चाहे जिस कारण 90 वर्ष पुराने पहनावे में बदलाव किया हो, इस पर राबड़ी की टिप्पणी पहले ही आ गई थी, इससे इनकार कैसे किया जाय? और लालूजी से आप चाहे जितने असहमत हों, उन्हें इसे राबड़ी के बयान का ‘आफ्टर इफेक्ट’ बताने से कैसे रोका जाय?
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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चौंकाती है ये चुप्पी लालूजी की
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आजकल चुप-चुप से हैं। बिहार में सबसे बड़ी पार्टी उनकी, महागठबंधन के वो अभिभावक, दोनों बेटे सरकार में, बेटी को राज्यसभा भेज चुके… फिर भी सोशल मीडिया उनके तीखे, चुटीले और हंसोड़ बयानों के बिना सूना और नीरस है आजकल। लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं कि आखिर चुप क्यों हैं लालूजी? वैसे भी जिन्हें बिहार की राजनीति की थोड़ी भी समझ है वे जानते हैं कि लगभग तीन दशकों से बिहार की राजनीति पर छाए रहने वाले इस शख्स की ‘चुप्पी’ किस कदर मायने रखती है।
ऐसे में जाहिर है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। लोगों की मानें तो लालू तभी से खामोश हैं जब से शहाबुद्दीन वापस जेल गए हैं। हाल ये है कि लालू ही नहीं, उनके दोनों बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप से लेकर आरजेडी के तमाम बयानवीरों ने चुप्पी साधी हुई है। शहाबुद्दीन के वापस जेल जाने से लालू आहत थे ही कि दुष्कर्म के आरोपी विधायक राजवल्लभ यादव का मामला भी सामने आ गया। दोनों ही मामलों में बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना लालूजी को रास नहीं आया | लेकिन ‘गठबंधन धर्म’ की विवशता में वो ना कुछ कर सके, ना कुछ कह सके।
इधर लालू चुप हैं और उधर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। हिना ने कहा कि 2005 में जब सात दिन की सरकार बनी थी, तब शहाबुद्दीन ने आरजेडी को समर्थन दिया था। उसी का बदला निकालने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके पति की जमानत रद्द करवा कर जेल भेज दिया। इसके लिए डीएम-एसपी को हथियार बनाया गया, जो सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर गलत रिपोर्ट भेजते थे। हिना ने तंज कसा कि नीतीश कुमार को लगता था कि शहाबुद्दीन के बाहर आने से बिहार में भय का माहौल पैदा हो गया है, तो उनके जेल जाने पर क्या अमन-शांति का माहौल है? हिना ने आगे कहा कि अगर कानून-व्यवस्था खराब रहती तो लाखों लोग सीवान नहीं पहुँचते। क्या यहाँ आने वाले सभी लोग भयभीत थे?
बहरहाल, हिना का आग उगलना समझ में आता है। बिहार सरकार और उसके मुखिया नीतीश कुमार को वो कोसेंगी ही, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन लालू यहाँ फिर चुप हैं, ये जरूर चौंकाने वाली बात है। याद दिला दें कि शहाबुद्दीन ने जेल से निकलते ही लालू को अपना नेता बताया था और नीतीश को ‘परिस्थितियों का नेता’ कहा था और लालू तब भी चुप ही थे। अब देखना यह है कि लालूजी की ‘चुप्पी’ कब तक कायम रहती है, और टूटती है तो किस तरह टूटती है?
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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सौ भारतीय अमीरों में दो बिहारी
अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीयों की वार्षिक सूची में बिहार के दो उद्योगपतियों – संप्रदा सिंह और अनिल अग्रवाल – ने अपनी जगह बनाई है। धनकुबेरों की इस सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी (कुल सम्पत्ति 1.52 लाख करोड़) लगातार नौवें साल शीर्ष पर हैं। सनफार्मा के दिलीप सांघवी (कुल सम्पत्ति 1.13 लाख करोड़) दूसरे और हिन्दूजा बंधु (कुल सम्पत्ति 1 लाख करोड़) तीसरे स्थान पर हैं। बता दें कि फोर्ब्स की सूची में इस साल छह नए अरबपतियों को पहली बार स्थान मिला है, जिनमें सबसे उल्लेखनीय नाम योगगुरु बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि आयुर्वेद के सह संस्थापक आचार्य बालकृष्ण का है। 16 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ बालकृष्ण 48वें स्थान पर हैं।
बहरहाल, फोर्ब्स द्वारा जारी सूची के अनुसार भारत की पाँचवीं सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल्स कम्पनी एल्केम लैबोरेट्रिज के मालिक संप्रदा सिंह सबसे अमीर बिहारी हैं और 17.9 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ सौ अमीर भारतीयों में 42वें स्थान पर हैं। 25 जनवरी 1926 को बिहार के जहानाबाद जिले में जन्मे संप्रदा पिछले साल इस सूची में 47वें स्थान पर थे। संप्रदा ने अपने भाई नरेन्द्र के साथ 1973 में एल्केम लैबोरेट्रिज की स्थापना की थी। उनकी कम्पनी इस वक्त भारत समेत यूरोप, एशिया, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका में संचालित होती है। एल्केम फार्मास्युटिकल्स को फार्मा लीडर अवार्ड मिल चुका है। अपने कार्यक्षेत्र में भीष्म पितामह का दर्जा रखने वाले 91 वर्षीय संप्रदा सिंह वर्तमान में सपरिवार मुंबई में रहते हैं।
7.4 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ खनन व्यापारी अनिल अग्रवाल इस सूची में स्थान बनाने वाले दूसरे बिहारी हैं। इस साल अनिल को 63वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल वे 53वें पायदान पर थे। 2003 में शुरू हुई अनिल की वेदांता रिसोर्सेस लंदन स्टॉक एक्सचेंज में दर्ज होने वाली पहली भारतीय कम्पनी थी। 24 जनवरी 1954 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा और पुणे में अपने पिता के एल्युमीनियम कंडक्टर बनाने के व्यापार में लग गए। 19 साल की उम्र में वे पुणे से मुंबई आए और अपना व्यापार शुरू किया। स्क्रैप मेटल का काम उन्होंने 1970 में शुरू किया और 1976 में शैमशर स्टेर्लिंग कार्पोरेशन को खरीदा। उसके बाद के उनके सफर से दुनिया भलीभांति परिचित है।
आज देश-दुनिया में बिहारी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह निश्चित रूप से गौरव का विषय है। इन सामर्थ्यवान बिहारियों की उपलब्धियों में तब चार चाँद लग जाएंगे, जब इनमें से आगे बढ़कर कोई बिहार में नए-नए उद्योगों के विकास के लिए सार्थक पहल करे। जिस दिन बिहार को ‘अमीर’ बनाते हुए कोई बिहारी अमीरों की सूची में शामिल होगा, वो दिन नि:संदेह बिहार के इतिहास में मील का पत्थर कहलाएगा।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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दो शहीद के परिवारों की अद्भुत दास्तां
उड़ी के शहीद गया के सुनील कुमार विद्यार्थी की तीन बेटियों ने अपने पिता की तरह सैनिक धर्म निभाया। मानवीय संवेदना के मोर्चे पर उनका ये युद्ध उनके पिता के युद्ध से कम मुश्किल नहीं था। जरा सोचकर देखिए। फोन पर पिता के शहीद होने की ख़बर आ चुकी है। माँ बिलख रही है। घर क्या पूरे मुहल्ले में मातम छाया हुआ है। पर अपने पिता की ये तीन लाडलियां खुद को तैयार करती हैं। आँसू इनके भी नहीं रुक रहे। हिचकियां ले-लेकर रो रही हैं तीनों। छलकती आँखों से प्रश्नपत्र तक धुंधले दिखेंगे, पर इन्हें स्कूल जाना है। आज इनकी परीक्षा जो है। इन्हें अपने पिता से किया वादा जो निभाना है। इन्हें भी आर्मी ऑफिसर जो बनना है।
शहीद सुनील की तीनों बेटियां डीएवी पब्लिक स्कूल (मेडिकल यूनिट) में पढ़ती हैं। बड़ी बेटी आरती कक्षा आठ, दूसरी बेटी अंशु कक्षा छह और तीसरी अंशिका कक्षा दो में पढ़ती है। सुनील अपनी तीसरी बेटी का नामांकन कराने इसी साल जून में आए थे और स्कूल प्राचार्य से कहा था – दो बेटियां आपके स्कूल में पढ़ रही हैं, तीसरी का भी नामांकन कर लीजिए। आपकी छांव में तीनों बेटियां पढ़ेंगी। इन्हें आर्मी ऑफिसर्स बनना है। कल तीनों की परीक्षा थी और छोटी-सी उम्र में आर्मी का अनुशासन जैसे उनकी रगों में दौड़ रहा था। तभी तो उनकी हिचकियों से बेंच भले हिलती रही, वे अपने कर्तव्य-पथ से नहीं हिलीं। तीनों ने परीक्षा पूरी की और फिर घर आकर माँ से लिपटकर खूब रोईं। माँ, जिसे अपनी सुध भले ही ना हो उस वक्त लेकिन अपने पति का कहा निभाने के लिए बेटियों को स्कूल जाने को कहना नहीं भूली थी।
आँसू, श्रद्धा और प्रेरणा से लबालब कर देने वाली एक और कहानी है उड़ी के एक और शहीद कैमूर के राकेश कुमार की पत्नी किरण की। शहीद राकेश का शव आज सुबह दस बजे उनके पैतृक गांव लाया गया तो जैसे उनके अंतिम दर्शन को पूरा कैमूर उमड़ पड़ा। उनका शव गांव के मध्य विद्यालय परिसर में रखा गया। परिजनों के चीत्कार से पूरा वातावरण जैसे रो उठा। शहीद राकेश का पार्थिव शरीर लाने वाले साथी जवान भी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। पर उस शहीद की पत्नी के पहुँचते ही माहौल और गमगीन होने की बजाय वीरता और देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया।
जी हाँ, उस वीरांगना ने अपने पति के अंतिम दर्शन किए। उनको सलामी दी। रोती-बिलखती सास से कहा – मम्मी आप रोएंगी तो हम भी कमजोर पड़ जाएंगे। फिर एक साल के बेटे हर्ष से कहा – बेटे, पापा पर फूल चढ़ाओ। इतना ही नहीं, शव के सिरहाने खड़ी किरण ने वहाँ मौजूद सैनिकों से बड़ी दृढ़ता के साथ कहा – आपलोग प्रधानमंत्री मोदी तक मेरा यह संदेश जरूर पहुँचा दें कि वे पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाएं कि दुनिया के नक्शे से उसका नामोनिशान मिट जाए। बहू की हिम्मत देख शहीद के माता-पिता भी शोक से बाहर निकल जवानों से अपने बेटे की मौत का बदला लेने और सरकार तक पाकिस्तान पर कार्रवाई करने का पैगाम पहुँचाने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर वे आमरण अनशन पर बैठेंगे। अन्त में, गगनभेदी नारों के बीच शव को बक्सर रवाना किया गया, जहाँ एक साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
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और अब पाकिस्तान ने दी एटमी हमले की धमकी
बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए, इधर उड़ी पर आतंकी हमले के बाद मिले सबूत चीख-चीख कर बोल रहे हैं कि इसमें पाकिस्तान की संलिप्तता थी और उधर उसके विदेश विभाग के प्रवक्ता इस हमले की निन्दा कर रहे हैं। हमले के बाद जारी बयान में पाकिस्तानी प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा कि भारत ने हमले के तुरंत बाद इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया, जबकि इसकी कोई जांच भी नहीं की गई। हम इस दावे को खारिज करते हैं। साथ ही पाकिस्तान इस तरह को हमलों की निन्दा करता है।
खैर, ये पाकिस्तान का पुराना राग है, जो वो अपनी हर कायराना हरकत के बाद अलापता है। लेकिन दोमुंहेपन की हद ये है कि उसके प्रवक्ता जहाँ इन हमलों की ‘निन्दा’ कर रहे हैं, वहीं उसके विदेश मंत्री भारत पर एटमी हमले की धमकी दे रहे हैं। जी हाँ, पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक साक्षात्कार में कहा है कि भारत द्वारा हमला किए जाने की स्थिति में हम अपने रणनीतिक हथियार परमाणु बम के इस्तेमाल से भी नहीं चूकेंगे। गौरतलब है कि यह साक्षात्कार शनिवार रात को उड़ी हमले से ठीक पहले रिकार्ड किया गया था।
इस साक्षात्कार में पाकिस्तान के रक्षामंत्री से भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के मद्देनज़र निकट भविष्य में युद्ध की आशंका पर सवाल पूछा गया था जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि तुरंत हमले की आशंका है। हालांकि, अल्लाह ने कुरान में कहा है कि अपने घोड़े हमेशा तैयार रखो। इसलिए हम हर समय बाहरी शक्तियों से अपनी आज़ादी के खतरे के प्रति हमेशा तैयार रहते हैं। इसके आगे उन्होंने जोड़ा कि दुनिया परमाणु ताकत में पाकिस्तान की ‘बादशाहत’ को स्वीकार करती है और साथ ही बड़ी निर्लज्जता से ये भी कह डाला कि हमारे पास ‘जरूरत से ज्यादा’ परमाणु हथियार हैं।
बहरहाल, उड़ी पर हुए घिनौने हमले की निन्दा दुनिया भर में हो रही है। अमेरिका, ब्रिटेन समेत तमाम देशों ने बड़े कड़े शब्दों में इस हमले की निन्दा की और भरोसा दिलाया कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में वे हर कदम पर नई दिल्ली का साथ देंगे। परीक्षा की इस घड़ी में आपसी मतभेदों को भूल हमारे देश के तमाम राजनीतिक दल भी एकजुट हैं। सवा सौ करोड़ भारतीय बड़ी अपेक्षा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर देख रहे हैं। सच यह है कि आतंक के खिलाफ जंग आखिरी दौर में है और अब बात ‘ट्वीट’ से नहीं पाकिस्तान को ‘दो टूक’ जवाब देने से बनेगी।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप
























