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पटना महावीर मंदिर में क्यों हैं एक साथ दो हनुमानजी ?

आप बिहार के हैं और राजधानी पटना न आए हों सामान्यतया ऐसा नहीं हो सकता और पटना आने पर स्टेशन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर आपने न देखा हो ये भी मुमकिन नहीं। आपने जरूर सुना या पढ़ा होगा कि इस मंदिर की गिनती उत्तर भारत के गिने-चुने मंदिरों में होती है। लेकिन सच यह है कि देश भर के चुनिंदा मंदिरों की सूची बनाई जाए जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती हो और चढ़ावों का अंबार लगता हो, तब भी पटना का हनुमान जी का ये मंदिर तिरुपति के बालाजी मंदिर, शिर्डी के सांई बाबा मंदिर और जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर आदि के साथ शीर्ष के कुछ मंदिरों में शुमार किया जाएगा। रामनवमी के दिन तो इस मंदिर में श्रद्धालुओं की लाईन कई किलोमीटर तक लगी होती है। एक अनुमान के मुताबिक इस दिन राम के इस अप्रतिम भक्त के दर्शन के लिए तीन से चार लाख श्रद्धालु जुटते हैं।

Patna Mahavir Mandir
Patna Mahavir Mandir

तो चलिए रामनवमी के पावन अवसर पर इस मंदिर की विशेषताओं से रूबरू होते हैं। सबसे पहली और अहं बात यह कि यहां आकर शीश नवाने वाले किसी भक्त ने आज तक ये नहीं कहा कि उसकी मनोकामना पूरी नहीं हुई। इस मंदिर की स्थापना 1730 ई. में स्वामी बालानंद ने की थी। तब यह मंदिर बैलगाड़ी से चंदे में एक-एक ईंट एकत्र कर बना था। साल 1900 तक यह मंदिर रामानंद संप्रदाय के अधीन रहा। उसके बाद 1948 तक इस पर गोसांई संन्यासियों का कब्जा रहा। साल 1948 में पटना हाईकोर्ट ने इसे सार्वजनिक मंदिर घोषित कर दिया। उसके बाद आचार्य किशोर कुणाल के प्रयास से साल  1983 से 1985 के बीच वर्तमान मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और आज इस मंदिर का भव्य स्वरूप सबके सामने है।

इस मंदिर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है और मंदिर में हनुमानजी समेत सारे देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं, परन्तु गर्भगृह में बजरंग बली की मूर्ति है और कमाल की बात यह कि एक नहीं एक साथ दो मूर्तियां हैं – हनुमानजी की युग्म मूर्तियां। आप याद करें, जब भी आप इस मंदिर गए होंगे, फूलवाले ने आपको दो माला दी होगी ताकि हनुमानजी की दोनों मूर्तियों पर माला चढ़ सके। कभी आपने सोचा कि यहां एक साथ दो मूर्तियां क्यों हैं? देश भर में हनुमानजी के हजारों मंदिर हैं लेकिन कहीं आपने ऐसा नहीं देखा होगा। चलिए, आज हम बताते हैं। दरअसल यहां हनुमानजी की दो मूर्तियां दो अलग आशय से रखी गई हैं। कहा जाता है कि दो मूर्तियों में एक मूर्ति अच्छे लोगों के कार्य पूर्ण करती है और दूसरी बुरे लोगों की बुराई दूर करती है। एक तरह से भक्तों के शीघ्र कल्याण के लिए स्वयं को ही दो हिस्सों में बांट लिया हनुमानजी ने। है न कमाल की बात!

अब बात हनुमानजी के प्रिय भोग लड्डू की। आपको आश्चर्य होगा कि 1930 तक यहां लड्डू की एक भी दुकान न थी और आज आलम यह है कि प्रतिदिन औसतन 25 हजार किलो लड्डू की बिक्री केवल एक दुकान से होती है जो मंदिर परिसर में मंदिर प्रशासन द्वारा ही चलाई जाती है। यहां तिरुपति के कारीगर खास तौर पर नैवेद्यम लड्डू तैयार करते हैं। इसके अतिरिक्त अगल-बगल दर्जनों अन्य दुकानें भी हैं जिनमें बेसन और मोतीचूर के कई किस्म के लड्डू आप खरीद सकते हैं।

सच ही कहा गया है – हरि अनंत हरि कथा अनंता। अभी इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बाते हैं जो आपको चकित करेंगी। फिलहाल चलते-चलते बस एक बात और। इस मंदिर के दूसरे तल पर आप कांच का एक बड़ा बरतन देखेंगे, जिसमें रामसेतु का पत्थर रखा हुआ है। आप उस समय दांतो तले ऊंगली दबा लेंगे जब देखेंगे कि 15 किलो वजन वाला यह पत्थर कितने आराम से पानी में तैरता रहता है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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प्रणब मुखर्जी पूरा करेंगे बिहार के लिए डॉ. कलाम का सपना

बिहार के लिए बड़े सौभाग्य सौभाग्य की बात है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाईलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने यहां के प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान के लिए जो किया, कुछ वैसा ही वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए करने जा रहे हैं। आठवीं-नौवीं सदी के इस गौरवशाली विश्वविद्यालय का भग्नावशेष देखने भागलपुर के कहलगांव अंतीचक पहुंचे महामहिम ने कहा कि विक्रमशिला में ऊंचा से ऊंचा स्तरीय विश्वविद्यालय बनना चाहिए। ऐसी धरोहर को केवल म्यूजियम का शो पीस बनाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करेंगे।

President Pranab Mukherjee Visiting Vikramshila University Ruins
President Pranab Mukherjee Visiting Vikramshila University Ruins

विक्रमशिला के भग्नावशेषों का मुआयना कर अभिभूत दिख रहे राष्ट्रपति ने कहा कि एक जमाना था जब राजा और आमलोग बड़े-बड़े विश्वविद्यालय स्थापित करते थे। तीसरी सदी से तक्षशिला, चौथी सदी से नालंदा और आठवीं-नवीं सदी से विक्रमशिला विश्वविद्यालय ने लोगों का मार्गदर्शन किया। शिक्षा, शोध और तंत्र को प्रोत्साहन दिया। यहां पढ़ने के लिए चीन, यूनान और मिस्र से छात्र, शिक्षक व शोधकर्ता आते थे। उन्होंने बताया कि जब वे कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ते थे उस समय से उनके मन में इन धरोहरों को देखने की इच्छा थी। विदेश मंत्री के रूप में जब वे पाकिस्तान गए थे तो उन्हें तक्षशिला को देखने का मौका मिला था। वहीं पर विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में नालंदा के पुनरुत्थान का प्रस्ताव सिंगापुर और चीन से आया, जिसे भारत सरकार ने मंजूर किया और नालंदा एक बार फिर जी उठा। अब विक्रमशिला की बारी है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में लोकसभा में विक्रमशिला में केन्द्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी और इसके लिए चार-पांच सौ करोड़ रुपए भी मंजूर किए थे। तेज धूप में विक्रमशिला भग्वानवेष परिसर के बाहर खड़े हजारों लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख किया और इसके गौरव को वापस हासिल करने का भरोसा दिलाया।

अब आप ही बताएं, बिहार के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सपनों को पूरा होने और यहां के गौरवशाली अतीत को एक बार फिर करवट लेने से भला कौन रोकेगा! जब देश के प्रथम नागरिक स्वयं इसकी घोषणा कर रहे हों और इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और राज्य में नीतीश कुमार जैसे सजग-सक्षम-सक्रिय प्रहरी हों!

चलते-चलते बता दें कि इस मौके पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी, गोड्डा (झारखंड) के सांसद निशिकांत दूबे, बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री शहनवाज हुसैन भी उपस्थित थे। इसके बाद भागलपुर से लौटकर दिल्ली जाने के क्रम में राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महामहिम को पटना हवाई अड्डे पर विदाई दी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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दिल्ली में बिहारी दंगल

बिहार में भले ही जेडीयू, आरेजडी और कांग्रेस मिलकर सरकार चला रही हैं लेकिन ‘इंद्रप्रस्थ’ की कुर्सी के लिए तीनों पार्टियां एक-दूसरे से जोर-आजमाइश करती नज़र आएंगी। जी हां, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में इन तीनों दलों के दिग्गज हाथ आजमाने जा रहे हैं। जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जहां बिहार में महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस से अलग ताल ठोकने की तैयारी में हैं, वहीं लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान भी जोर-आजमाइश में जुटे हुए हैं। उधर प्रदेश भाजपा के नेता अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में जाने को कमर कस चुके हैं वो अलग। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली की करीब 1 करोड़ 90 लाख की आबादी में लगभग 40 लाख बिहार और पूर्वांचल के मतदाता हैं, जिन्हें बिहार के सारे नेता अपने-अपने दलों की ओर खींचना चाहते हैं।

वैसे जेडीयू की बात करें तो वह पूरी तैयारी के बाद भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी नहीं उतार सकी थी, लेकिन एमसीडी चुनाव में बिहार से बाहर निकलने का मौका वह अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार की मानें तो जेडीयू एमसीडी चुनाव में लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। इसके मद्देनजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पार्टी के पक्ष में मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए 9 अप्रैल को उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली में दो रैलियां करने जा रहे हैं। नीतीश कुमार द्वारा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करना या अभी हाल ही में जेडीयू का भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाना भी एमसीडी चुनाव के मद्देनज़र मतदाताओं को अपनी ओर लाने का प्रयास माना जा रहा है।
इधर आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने भी कहा है कि उनकी पार्टी एमसीडी चुनाव में भाग्य आजमाएगी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में प्रचार के लिए पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित बिहार के कई नेता दिल्ली जाएंगे।

एमसीडी चुनाव को लेकर बिहार महागठबंधन की तरह एनडीए में भी बिखराव देखा जा रहा है। भाजपा के साथ सीटों को लेकर कोई समझौता न होने के कारण लोजपा अकेले ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान कहते हैं कि पार्टी नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करना चाहती थी लेकिन यह नहीं हो सका। उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि हमारा प्रदेश संगठन चुनाव लड़ने के लिए मजबूत है इसलिए हमने अधिकतम सीटों पर दिल्ली नगर निगम चुनाव लड़ने का फैसला किया है।’
ये तो हुई जेडीयू, आरजेडी और लोजपा की बात। अब जरा भाजपा की भी चर्चा कर लें। भाजपा इन चुनावों को ध्यान में रख बिहार और पूर्वांचल के मतदाताओं को लुभाने के लिए पहले ही दिल्ली की कमान मनोज तिवारी को सौंप चुकी है, जो बिहार से आते हैं। वैसे बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव बताते हैं कि एमसीडी चुनाव के प्रचार के लिए बिहार के कई नेता भी दिल्ली जाने की तैयारी कर चुके हैं।

बहरहाल, दिल्ली के इस बिहारी दंगल का परिणाम क्या होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन आप, भाजपा और कांग्रेस के स्पष्ट त्रिकोण में बिहार के दिग्गजों के हाथ कुछ लगेगा, इसकी उम्मीद कम ही है।

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पप्पू यादव की गिरफ्तारी के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन

जन अधिकार पार्टी (जाप) के संरक्षक और मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के विरोध में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा व पप्पू यादव के पिता चंद्र नारायण प्रसाद के नेतृत्व में जाप के एक प्रतिनिधि मंडल ने राजभवन जाकर राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और अपनी पांच सूत्री मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से सारी कानूनी प्रक्रियाओं को ताक पर रख पप्पू यादव की गिरफ्तारी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पार्टी के कार्यकर्ताओं पर की गई पुलिस की तथाकथित ज्यादती की न्यायिक जांच करवा कर इंसाफ दिलाने की मांग की।

गौरतलब है कि बिहार में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ और बिहार कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने सहित कई मांगों को लेकर राजधानी पटना में प्रदर्शन के दौरान सोमवार को जाप के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज का सहारा लिया था। इसी घटना के बाद सोमवार को ही देर रात पुलिस ने पप्पू यादव को गिरफ्तार कर लिया था।

बहरहाल, जाप द्वारा राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सांसद की गिरफ्तारी संसदीय परम्परा की अवमानना है। पार्टी के मुताबिक सांसद को जिस मुकदमे में ‘फंसाया’ गया, वह जनवरी 2017 के राजभवन मार्च का है। इस मामले में रात के अंधेरे में ‘झूठा’ मुकदमा कर न सिर्फ न्यायालय को गुमराह करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की भी अवमानना की गई, जिसमें उल्लेख है कि रात के अंधेरे में पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं करेगी। जाप के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह कुशवाहा के अनुसार राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

चलते-चलते बता दें कि पप्पू यादव की पत्नी व सुपौल की सांसद रंजीत रंजन ने मंगलवार को लोकसभा में भी उनकी गिरफ्तारी का मामला उठाया था और इसे सांसद के सदन में भाग लेने के विशेषाधिकार के अतिक्रमण और राजनीतिक दबाव में पटना जिला प्रशासन की कार्रवाई बताया था।

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नीतीश कुमार को अणुव्रत सम्मान

बिहार में शराबबंदी लागू करने और इसे राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बनाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अणुव्रत सम्मान से सम्मानित किया गया। बता दें कि जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ अणुव्रत समिति का यह सर्वोच्च पुरस्कार है, जिसमें प्रतीक चिह्न के अतिरिक्त 1 लाख 51 हजार की सम्मान-राशि भी दी जाती है। इस राशि को नीतीश ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दे दिया। मंगलवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित इस सम्मान-समारोह में बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि यह पुरस्कार उन लोगों के लिए है जिन्होंने शराबंबदी के बाद शराब से मुक्ति पा ली। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से लोगों के चेहरे की खुशी लौटी है। चारों तरफ आज शांति का माहौल है। हर धर्म और संप्रदाय के लोग शराबबंदी के समर्थन में हैं। पूरे देश में शराबबंदी की आवाज़ उठ रही है। मुझे पक्का भरोसा है कि जो लोग शासन में हैं उन पर इसका असर पड़ेगा। शराबबंदी का निर्णय कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है। मैं इसे सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद मानता हूं।

शराबबंदी के लिए आत्मानुशासन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप चाहे जितना सख्त कानून बना लीजिए पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है आत्मानुशासन। बगैर इसके शराबबंदी सफल नहीं हो सकती। नीतीश ने शराबबंदी के कारण राजस्व के नुकसान की आशंका जताए जाने की चर्चा भी की और  कहा कि इससे कुछ फर्क नहीं दिखा है। इस बार राजस्व संग्रह उस स्तर पर पहुंच गया है जो इसके पूर्व के वित्तीय वर्ष में था।

इस अवसर पर अपने सारगर्भित संबोधन में नीतीश ने यह भी कहा कि देश में आज अतिवाद का दौर है और समाज में असहिष्णुता का माहौल व्याप्त है, जिससे हमें बाहर निकलना होगा। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति केवल भारत की ही नहीं बल्कि वैश्विक है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अब बिहार में भी एंटी-रोमियो स्क्वॉयड!

बिहार में ‘योगी इफेक्ट’ दिखने लगा है। गुरुवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार ने यूपी की तरह बिहार में भी अवैध बूचड़खानों को बंद करने की मांग की थी और अब पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यूपी की ही तर्ज पर बिहार में भी मनचलों पर नकेल कसने के लिए एंटी-रोमियो स्क्वॉयड बनाने की मांग की है।

दरअसल मोदी शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू थे। इस दौरान उन्होंने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए बिहार में एंटी-रोमियो स्क्वॉयड की जरूरत बताई और सरकार से इस बाबत कदम उठाने की मांग की। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में सड़कों पर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ते अपराध की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे दस्ते को महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तथा स्कूल और कॉलेजों के इर्द-गिर्द तैनात किया जाना चाहिए।

अवैध बूचड़खानों को लेकर भी मोदी ने यूपी की राह पर चलने की वकालत की और प्रेम कुमार की मांग का पुरजोर समर्थन किया। यही नहीं, उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर आरोप लगाया कि बिहार में बूचड़खाने सरकार की मदद से चल रहे हैं। मोदी ने यह भी कहा कि बूचड़खानों के लिए 1995 में बनाए गए कानून में संशोधन होना चाहिए।

गौरतलब है कि यूपी में भाजपा की सरकार बनते ही अवैध बूचड़खानों को बंद किया जा रहा है। 31 मार्च के बाद वहां बूचड़खानों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। साथ ही वहां सभी जिलाधिकारियों को एंटी रोमियो स्क्वॉयड बनाने का आदेश दिया गया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पूरे बिहार में मची रही ‘बिहार दिवस’ की धूम !

जहां एक ओर पीएम नरेन्द्र मोदी ने बिहार दिवस (22 मार्च, बुधवार) के सुबह में ही बिहार के 105 वें जन्मदिन पर बिहार की जनता को सीएम नीतीश कुमार के सोशल साइट पर ट्वीट कर विशेष शुभकामनाएं दी वहीं दूसरी ओर मधेपुरा जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने जिले के तेरहो प्रखंडों को 10-10 हजार रूपये का आवंटन देकर ‘बिहार दिवस’ पर विभिन्न खेलों एवं विभागीय मेलों के आयोजनों के साथ-साथ पूर्ण नशाबंदी एवं स्वच्छता अभियान की धूम मचाने का निर्देश दिया |

यह भी बता दें कि पटना के गांधी मैदान से लेकर मधेपुरा के बी.एन.मंडल स्टेडियम तक के मैदान में भी उत्सवी भव्यता का ऐसा रास-रंग रचा गया कि इस बिहार दिवस समारोह के उत्सवी माहौल में चारो ओर हर्षोल्लास और उमंग ही नजर आता रहा | ऐसा लगने लगा कि मात्र मधेपुरा ही नहीं बल्कि सारा बिहार अपनी बढ़ती उम्र के साथ और जवान दिखने लगा |

इस अवसर पर प्रातः 5:00 बजे से ही डी.एम. मो.सोहैल एवं एस.पी. विकास कुमार की पूरी टीम स्टेडियम मैदान में स्कूली बच्चों को गाजे-बाजे व नगाड़े के साथ प्रभातफेरी के लिए हरी झंडी दिखाने हेतु तैयार दिखे | मौके पर एएसपी राजेश कुमार, डीईओ शिव शंकर राय, डीपीओ चंद्रशेखर राय, बीईओ जनार्दन निराला, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, स्काउट एंड गाइड आयुक्त जय कृष्ण यादव, थानाध्यक्ष मनीष कुमार, बैंक अधिकारी संतोष कुमार झा, एसडीएम संजय कुमार निराला एवं प्रधानाध्यापकों की उपस्थिति में दर्जनों स्कूल के बच्चे-बच्चियों को एसपी विकास कुमार एवं डीडीसी मिथिलेश कुमार ने संयुक्त रुप से हरी झंडी दिखाकर प्रभातफेरी के लिए विदा किया |

बता दें कि विशेषरूप से ग्वालपाड़ा, बिहारीगंज, शंकरपुर, मुरलीगंज, आलमनगर, उदा किसुनगंज, कुमारखंड, सिंहेश्वर…….. आदि प्रखंडों सहित मधेपुरा में दिनभर कब्बड्डी-क्रिकेट, बैडमिंटन-टेबल टेनिस, बॉलीबॉल आदि खेलों में युवाओं ने अपनी भागीदारी दी | जहां बी.एन.मंडल स्टेडियम में कबड्डी खेले गये, वहीं बी.पी.मंडल नगर भवन में टेबल टेनिस की माहिर खिलाड़ी प्रियांशी और पायल के बेहतरीन प्रदर्शन की धूम मची रही……| विभिन्न विभागीय स्टालों पर दिनभर मेला लगा रहा |

यह भी जानिए कि शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये बिहार के गौरवशाली अतीत की जानकारी नुक्कड़ नाटक, गीत व नृत्य के माध्यम से दिये जाने से पूर्व जिले के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, समाजसेवी डॉ.मधेपुरी, डीडीसी मिथिलेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, नजारत डिप्टी कलेक्टर मुकेश कुमार, स्काउट एंड गाइड आयुक्त, जयकृष्ण यादव आदि द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया गया |

जहां डीएम ने अपने संक्षिप्त संबोधन में पूर्ण नशा मुक्त जिला बनाने पर बल दिया वहीं एसपी ने मधेपुरा के साथ-साथ बिहार के विकास के लिए संकल्प लेने की बात कही | इतना ही नहीं, जहां डायनेमिक डी.एम मो.सोहैल ने शंकरपुर प्रखंड के लिए दी गयी 3-4 एकड़ जमीन के भूदाता श्री निरंजन प्रसाद सिंह उर्फ भोला सिंह (बेहरारी, शंकरपुर) को अंगवस्त्रम एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया वहीं प्रखर समाजसेवी डॉ.मधेपुरी को “मधेपुरा के भीष्म पितामह” कहकर सम्मानित किया गया |

Director Mr.Shyamal Kumar Sumitra of Tulsi Public School receiving certificate of honour for better performance in Republic Day Ceremony by DM Md.Sohail, SP Vikash Kumar, SDM Sanjay Kr. Nirala & Samajsevi Dr.Madhepuri at BN Mandal statium on the ocassion of Bihar Diwas Samaroh 2017
Director Mr.Shyamal Kumar Sumitra of Tulsi Public School receiving certificate of honour for better performance in Republic Day Ceremony by DM Md.Sohail, SP Vikash Kumar, SDM Sanjay Kr. Nirala & Samajsevi Dr.Madhepuri at BN Mandal statium on the occasion of Bihar Diwas Samaroh 2017.

इस अवसर पर पूर्ण शराबबंदी के लिए आयोजित मानव श्रृंखला, गणतंत्र दिवस झांकी, गणतंत्र दिवस परेड आदि में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले संस्थानों के प्रधान को डीएम-एसपी, डीडीसी, एसडीएम एवं समाजसेवी डॉ.मधेपुरी द्वारा प्रमाण-पत्र आदि से सम्मानित किया गया |

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वित्तरहित शिक्षाकर्मियों को 15 दिनों के अंदर वेतन भुगतान

बिहार के हजारों वित्तरहित शिक्षाकर्मियों के लिए बड़ी ख़बर। राज्य के शिक्षामंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने वित्तरहित संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों संग वार्ता के क्रम में पुरजोर तरीके से कहा कि वित्तरहित शिक्षाकर्मियों को 15 दिनों के अंदर वेतन भुगतान होगा वरना प्रबंध समिति भंग कर दी जाएगी। बुधवार को शिक्षामंत्री के साथ हुई इस महत्वपूर्ण वार्ता में विधान परिषद् के सदस्य दिलीप चौधरी, नीरज कुमार, संजय सिंह, संजीव कुमार सिंह, संजीव श्याम सिंह एवं केदार पाण्डेय उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि वार्ता के दौरान मोर्चा द्वारा कई मांगे रखी गईं जिनमें समान कार्य समान वेतन, अनुदान की बजाय वेतनमान, लंबित अनुदान का शीघ्र भुगतान, कमिटी बनाकर वेतनमान के संबंध में अनुशंसा सहित 6-7 बिन्दुओं पर विशेष चर्चा हुई। सभी मांगों पर गंभीरता के साथ विचार करते हुए शिक्षामंत्री ने कहा कि सर्वप्रथम 15 दिनों के अंदर राशि का भुगतान हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कमिटी भंग कर दी जाएगी और प्रधानाचार्य को भी इसके लिए जिम्मेवार माना जाएगा। इसके साथ ही एक माह के अंदर सेवा शर्त नियमावली बना दी जाएगी और अनुदान की समीक्षा के लिए एक कमिटी का गठन किया जाएगा।

अपने फेसबुक पेज पर डॉ. अशोक चौधरी ने इन सारी बातों की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि ‘मैंने वर्तमान प्रावधानों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।‘ शिक्षा मंत्री ने लंबित भुगतान की भी चर्चा की और बताया कि पूर्व में 285 करोड़ की राशि भेजी गई थी एवं वर्तमान में 303 करोड़ रुपये भेजने की विभागीय कार्रवाई पूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा अनुदान शिक्षक के खाते में ही जाए तथा उसकी पूरी विवरणी वेबसाइट पर डाली जाए यह निदेश भी दे दिया गया है।

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जेडीयू का ‘गर्दा उड़ाने’ को क्यों उतारू हैं रघुवंश?

आरजेडी के वरिष्ठ नेता व उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने एक बार फिर जेडीयू और नीतीश कुमार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इस टिप्पणी के बाद बिहार महागठबंधन में दरार पड़ने की आशंकाओं को भी बल मिलने लगा है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने रघुवंश के बयान को फूहड़ बताते हुए आपत्ति जताई है और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी चेतावनी के लहजे में कहा है कि इसकी पुनरावृत्ति होने पर वे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से शिकायत करेंगे।

गौरतलब है कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने यूपी विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उंगली उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नीतीश द्वारा नोटबंदी का समर्थन करने और यूपी चुनाव के दौरान इस विषय पर चुप्पी साधने से भाजपा को चुनाव में फायदा हुआ। उन्होंने यह भी कहा था कि नीतीश के यूपी में सपा और कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनाव-प्रचार नहीं करने से महागठबंधन कमजोर हुआ है। ध्यान रहे कि नीतीश के स्टैंड से एकदम अलग लालू ने यूपी में सपा-कांग्रेस के समर्थन में जमकर प्रचार किया था।

बहरहाल, जेडीयू ने रघुवंश के आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया की। पार्टी के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य संजय सिंह ने लालू से रघुवंश के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यहां तक कि उन्होंने रघुवंश को ‘शिखंड’ तक कह डाला। बताया जाता है कि जेडीयू के दो वरिष्ठ मंत्रियों –  बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह – ने भी आरजेडी नेतृत्व से रघवंश प्रसाद सिंह को बेतुकी बयानबाजी से रोकने को कहा। इस पर रघुवंश ने बुधवार को एक बार फिर नीतीश कुमार पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा, ‘बिहार के मुख्यमंत्री अपने लोगों को मेरे खिलाफ गाली-गलौज करने के लिए उकसा रहे हैं। अगर पार्टी अलाकमान आदेश दे तो मारकर गर्दा उड़ा देंगे।‘

जाहिर है कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने संजय सिंह की आपत्तिजनक टिप्पणी (शिखंडी) का जवाब भी उतने ही आपत्तिजनक तरीके से दिया। वैसे भी इन दिनों वे लगातार नीतीश और जेडीयू के खिलाफ हमलावर रुख दिखाते रहे हैं। यूपी चुनाव में भी उन्होंने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए उनपर बीजेपी के साथ मैच‘फिक्स’करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा नीतीश कुमार ने जब नोटबंदी के कदम की सराहना की थी तब भी रघुवंश प्रसाद सिंह ने उन्हें खरीखोटी सुनाने में कोई कसर नहीं रखी थी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जोगीरा सा रा रा रा

केकर खातिर पान बनन बा, केकरे खातिर बांस

केकरे खातिर पूड़ी पूआ, केकर सत्यानास

जोगीरा सा रा रा रा

नेतवन खातिर पान बनल बा, पब्लिक खातिर बांस

अफसर काटें पूड़ी पूआ, सिस्टम सत्यानास

जोगीरा सा रा रा रा

ये है जोगीरा की एक बानगी, जिसे लिखा है कबीर की परम्परा के जनकवि आचार्य रामपलट दास ने। आप भारत में हों, होली के रंगों को पहचानते हों और आपके कानों में जोगीरा की थाप न पहुँची हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जोगीरा ना हो तो होली कैसी..? होली का असली रंग तो जोगीरा के साथ ही चढ़ता है। आखिर दिल में उत्साह और दिमाग में सवाल उतार देने वाला, हमारी रग-रग में तैर जाने वाला ये जोगीरा है क्या?  चलिए, आज इसी पर बात करते हैं।

उत्तर भारत के जिन क्षेत्रों में नाथपंथी योगी (जोगी) सक्रिय रहे वहाँ जोगीरा गाने की परम्परा विशेष रूप से पाई जाती है। सम्भवत: इसकी उत्पत्ति जोगियों की हठ-साधना, वैराग्य और उलटबाँसियों का मजाक उड़ाने के लिए हुई हो। यह मूलत: एक समूह-गान है जिसमें प्रश्नोत्तर शैली में एक समूह सवाल पूछता है तो दूसरा उसका जवाब देता है। जवाब प्राय: चौंकाने वाले होते हैं।

समय बदला तो जोगीरा भी बदलता गया। धीरे-धीरे यह रोजमर्रा की घटनाओं से जुड़ता चला गया। घर का आंगन हो, गांव का चौपाल हो या फिर राजनीति का गलियारा इसने हर जगह अपनी पहुँच बना ली। सम्भ्रान्त और शासक वर्ग पर अपना गुस्सा निकालने या यूँ कहें कि उन्हें ‘गरियाने’ का अनूठा जरिया बन गया जोगीरा।

होली में तो वैसे भी खुलकर और खिलकर कहने की परम्परा है। यह एक तरह से सामूहिक विरेचन का पर्व है। आज इस परम्परा को स्वस्थ रूप देते हुए इसे फिर से व्यक्तिगत और संस्थागत, सामाजिक और राजनीतिक विडम्बनाओं और विद्रूपताओं पर कबीर की तरह तंज कसने और हमले करने के अवसर में बदलने की जरूरत है। आचार्य रामपलट दास के ही शब्दों में कुछ इस तरह –

चिन्नी चाउर महंग भइल, महंग भइल पिसान

मनरेगा का कारड ले के, चाटा साँझ बिहान

जोगीरा सा रा रा रा

या फिर कुछ ऐसे –

खूब चकाचक जीडीपी बा चर्चा बा भरपूर

चौराहा पर रोज सबेरे बिक जाला मजदूर

जोगीरा सा रा रा रा।

चलने से पहले हम ये न कहेंगे कि ‘बुरा न मानो होली है’। हम तो कहेंगे ‘अब बुरा मान भी लो होली है’… जोगीरा सा रा रा रा…

रंग और गुलाल के साथ –

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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