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क्यों टूट रही है बिहार कांग्रेस ?

कुछ अपनी कमजोरी, कुछ क्षेत्रीय दलों का उभार, कुछ परिस्थितियों का दोष और बाकी अच्छे दिन का नारा देकर बहुत अच्छे दौर से गुजर रही भाजपा की बेजोड़ रणनीति – कुल मिलाकर कांग्रेस पस्तहाल है। केन्द्र में उसकी स्थिति सबको पता है। वहां तो मोदीयुग चल ही रहा है। हां, बिहार में महागठबंधन बनने के बाद जब उसे 27 सीटें मिलीं, तब जरूर लगा था कि मुरझाती कांग्रेस में फिर हरियाली आ जाएगी। थोड़ी आई भी। पर नीतीश ने महागठबंधन क्या छोड़ा, कांग्रेस की वो हरियाली अब जाने को है। जी हां, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के 27 विधायकों में से 14 विधायकों ने अलग औपचारिक समूह बना लिया है और कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वे जेडीयू में शामिल हो जाएंगे। इस समूह को बस इंतजार है पार्टी के चार और विधायकों के अपने गुट में आने का, ताकि टूट के लिए जरूरी दो तिहाई आंकड़े का इंतजाम हो जाए और पार्टी से अलग होकर भी उनकी सदस्यता बची रहे।

गौरतलब है कि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस आलाकमान ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह को गुरुवार को दिल्ली बुलाया था। बताया जाता है कि इन दोनों नेताओं ने पार्टी में पक रही बगावती खिचड़ी से खुद को अनजान बताया, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें हर हाल में यह टूट रोकने को कहा।

बिहार कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष अब भले ही सतह पर आ गया हो, इसकी शुरुआत उसी दिन हो गई थी जब पार्टी के 27 विधायकों व छह विधानपार्षदों में से केवल चार को ही सत्ता का सुख मिला। महागठबंधन सरकार में दो एमएलसी अशोक चौधरी एवं मदन मोहन झा और दो एमएलए अब्दुल जलील मस्तान एवं अवधेश कुमार को जगह मिली, जबकि बाकी लोग ‘उपेक्षा’ और ‘प्रतीक्षा’ के बीच भटकते रहे। कुछ लोगों को आस थी कि उन्हें बोर्ड और निगम में तो जगह मिल ही जाएगी, लेकिन जेडीयू के एनडीए से जुड़ जाने के बाद उनकी वो उम्मीद भी जाती रही।

वैसे यह कहना भी गलत होगा कि ये विधायक केवल पद की लालसा में परेशान हैं। इनकी परेशानी की एक बड़ी वजह लालू प्रसाद यादव हैं। नीतीश की अनुपस्थिति में अब लालू कांग्रेस के लिए एकमात्र विकल्प हैं और यह बात उन विधायकों को आशंकित कर रही है, जिन्हें अपनी जीत के लिए अगड़ों के वोट की सख्त जरूरत है। जब तक नीतीश साथ थे उनकी ‘छवि’ अगड़ों के लालू विरोध को ‘बैलेंस’ कर देती थी, लेकिन अब वो सहारा भी जाता रहा। ऐसे में ये विधायक करें तो क्या करें।

बहरहाल, कांग्रेस नेता अभी यह कहने में जुटे हैं कि पार्टी में टूट की कोई आशंका नहीं, लेकिन राजनीति के गलियारे में यह चर्चा आम है कि इसमें अब केवल औपचारिकता ही शेष है। हालांकि पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनज़र कांग्रेस ने ‘डैमेज कंट्रोल’ 11 अगस्त को ही शुरू कर दिया था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया विधायकों की नाराजगी दूर करने पटना पहुंचे थे। पर अब ‘डैमेज’ ‘कंट्रोल’ से बाहर जा चुका है। बात जहां तक नीतीश कुमार की है, कांग्रेस के टूटने पर पर उनके ‘बेस’ और मनोबल दोनों में इजाफा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप      

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आयकर विभाग ने आरजेडी से मांगा रैली का हिसाब

बुरे दौर से गुजर रहे लालू प्रसाद यादव के लिए 27 अगस्त की ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली तपती दोपहर में छांव की तरह राहत लेकर आई। लेकिन ये क्या, अब वो छांव भी उनसे छिन जाएगी? जी हां, बात कुछ ऐसी ही है। बेनामी सम्पत्ति को लेकर पूछताछ के बाद आयकर विभाग ने इस रैली के खर्चे को लेकर हिसाब मांगा है। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व ही आयकर विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी बेनामी सम्पत्ति के मामले में घंटों पूछताछ की थी।

सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग ने पार्टी से गांधी मैदान की बुकिंग से लेकर लोगों को दूसरे जिलों से लाने और उनके ‘मनोरंजन’ पर हुए खर्च तक का ब्योरा मांगा है। बाहर से आने वाले नेताओं के लिए पार्टी की तरफ से ठहरने, खाने आदि की जो व्यवस्था की गई थी उसका भी हिसाब मांगा गया है। जैसा कि स्वाभाविक था, आयकर विभाग की नोटिस के बाद आरजेडी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व महागठबंधन सरकार में वित्त मंत्री रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा जो भी प्रश्न पूछे गए हैं, पार्टी उसका जवाब देगी। साथ में यह कहना भी नहीं भूले कि जितना परेशान किया जाएगा, उतना हम मजबूत होंगे।

वहीं आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि पहले भी कई बार भाजपा और उसके सहयोगी दलों की रैलियां हुई हैं, लेकिन आयकर विभाग कभी हरकत में नहीं आया। केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री की कई जगहों पर रैलियां हुईं, लेकिन आयकर विभाग ने न तो नोटिस जारी किया और न ही खर्च का हिसाब मांगा।

बहरहाल, आरजेडी की इस रैली के आयोजन में हो सकता है पैसे ज्यादा खर्च हुए हों, ये भी हो सकता है कि उन पैसों के स्रोत भी स्पष्ट न हों, पर ये जानते हुए भी कि कोई भी दल इससे अछूता नहीं, आयकर विभाग की ये नई कार्रवाई राजनीतिक तौर पर लालू के लिए नुकसान का सौदा नहीं लगता। उनके समर्थक इससे एकजुट ही होंगे।

 

 

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वित्तरहित शिक्षकों को गति देने में लगे हैं कोसी के MLC डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रो.संजय कुमार सिंह एवं गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी संजीव श्याम सिंह सरीखे त्रिमूर्ति ने शिक्षा विभाग के नये मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा एवं सचिवों के साथ शिक्षकों के हित में विभागीय समीक्षात्मक बैठक अंततः ‘शिक्षक दिवस’ के एक दिन बाद यानि 6-9-2017 को आयोजित करने की सहमति ले ही ली | जानकारी मिलते ही बिहार के विभिन्न कोटि के शिक्षकों एवं अप्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों, मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों, प्रोजेक्ट विद्यालय के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के रूप में नियुक्त होने वाले शिक्षकों के बीच खुशी की लहर उठने लगी है |

यह भी बता दें कि अनुदानित माध्यमिक, उच्च माध्यमिक यानि इंटर महाविद्यालय एवं डिग्री महाविद्यालय में G.E.R बढ़ाने हेतु सीट वृद्धि का प्रावधान एवं ऐसे संस्थानों के लंबित सभी अनुदान एकमुस्त विमुक्त करने हेतु विशेष प्रावधान पर विचार किया जाना है | विद्यालयों के संयोजक के पद पर पूर्व के प्रावधान  को ही लागू किये जाने की व्यवस्था पर विचार किया जायेगा |

यह भी जानिये कि राज्य सरकार द्वारा सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों को प्राप्त अनुदान की राशि शिक्षकों एवं कर्मियों के बीच वितरित नहीं करने पर विश्वविद्यालय द्वारा वैसे कालेजों के शासीनिकाय को भंग कर तदर्थ समिति गठित कर दी जायेगी | वर्षों से लंबित संबंधन एवं पदसृजन की प्रक्रिया भी शुरु होगी |

बता दें कि अधिनियमानुसार सम्बद्ध डिग्री महाविद्यालय में 19-4-2007 के बाद नियुक्त शिक्षकों को भी चयन समिति के माध्यम से सेवा नियमितीकरण के संबंध में 6 सितंबर की बैठक में कोसी के शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह अपने सहयोगियों के साथ अपनी ही सरकार पर शिक्षकों के हित में जोर-शोर से दबाव डालेंगे तथा अमलीजामा पहनाकर ही दम लेंगे | इसी बैठक में 1128 मदरसा शिक्षकों एवं 531 संस्कृत शिक्षकों के वेतनमान की चर्चा भी की जायेगी |

कोसी शिक्षक प्रतिनिधि डॉ.संजीव कुमार सिंह ने अंत में बताया कि अल्पसंख्यक विद्यालय के शिक्षकों के अर्जित अवकाश, सेवानिवृत्त शिक्षकों के बकाये सेवान्त लाभ, कार्यरत शिक्षकों के कालबद्ध प्रोन्नति का लाभ, 1975 से पूर्व नियुक्त डिमोंस्ट्रेटर को छठे वेतन पुनरीक्षण का लाभ दिलाने के साथ-साथ 1966 के बाद पी-एच.डी. प्राप्त शिक्षकों को 3 वेतन वृद्धि का लाभ दिलाने के लिए पुरजोर कोशिश की जायेगी और इसके साथ-साथ BPSC द्वारा नियुक्त शिक्षकों के लिए वेतन विमुक्ति की चर्चा भी जमकर की जायेगी |

इन त्रिमूर्तियों के द्वारा ऐसे-ऐसे 19 विचारनीय बिंदुओं पर (25 अगस्त को ही) आगामी 6 सितंबर को बैठक आयोजित किये जाने के लिए सरकार से स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है | अब देखना है कि हमें कितनी सफलता मिलती है…….!

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बाढ़ पीड़ितों के लिए खुला राज्य का खजाना

बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राज्य का खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार शाम हुई कैबिनेट की बैठक में 18 जिलों के बाढ़ पीड़ितों में मुआवजा राशि बांटने के लिए 1935 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि इसी राशि से 440 मृतकों के परिजन को भी 4-4 लाख रुपये दिए जाएंगे।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि दो से तीन दिनों में 30 लाख बाढ़पीड़ितों के खाते में तय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित जिलाधिकारियों को दिया गया है। जिन परिवारों के बैंक खाते नहीं खुले हैं, उनके खाते तत्काल खुलवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बता दें कि बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत देने सहित कैबिनेट की बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी। सरकार द्वारा लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अब राजस्व लगान और सेस की वसूली दस (10) के गुणक में की जाएगी। वर्तमान में यह राशि बहुत कम थी। इसके अलावा राजस्व लगान रुपये के साथ 25, 50 और 75 पैसे के गुणक में होने की वजह से लगान वसूली के दौरान कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था।

कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णयों में एक निर्णय राज्य के मान्यता प्राप्त गैर सरकारी अल्पसंख्यक माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक और शिक्षकेतत्तर कर्मियों को पहली जनवरी 1996 से पंचम और पहली जनवरी 2006 से छठा वेतनमान देने का भी है। इसी तरह एक अन्य निर्णय के तहत कैबिनेट ने एनसीसी अधिकारियों के भत्ते में बढ़ोतरी की है।

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भीड़ से गदगद लालू ने भरी वापसी की हुंकार

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज एक और बड़ी रैली का गवाह बना। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आह्वान पर ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली में लगभग डेढ़ दर्जन विपक्षी दलों के नेता और राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालांकि रैली में जुटी भीड़ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। आरजेडी के अनुसार रैली में 25 लाख से ज्यादा लोग थे तो बकौल सुशील कुमार मोदी लालू द्वारा ही आयोजित गरीब रैला का दशांस भी आज की रैली में नहीं था। पर आज की रैली गांधी मैदान पर आयोजित अब तक की रैलियों से चाहे जितनी बड़ी या छोटी हो, यह एक सफल रैली थी और इस रैली से लालू और उनके परिवार व पार्टी का उत्साह बढ़ा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

आरजेडी और उसके बहाने विपक्षी एकता के लिए आज की रैली प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। लालू की साख दांव पर लगी थी और तेजस्वी, जिनमें पार्टी अपना भविष्य देख रही है, की पैठ जनमानस में कितनी बनी है, उसकी आजमाइश भी होनी थी। कहना गलत न होगा कि रैली ने इन तमाम प्रश्नों के सकारात्मक उत्तर दिए। रैली में कई राज्यों के नेता एक मंच पर साथ दिखे। लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप और मीसा समेत आरजेडी के तमाम बड़े चेहरों के अलावा रैली में जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष और अभी ‘असली जेडीयू’ के अपने साथ होने का दावा कर रहे शरद यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद व सीपी जोशी, झारखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी (जेवीएम) व हेमंत सोरेन (जेएमएम), सीपीआई के डी राजा, रालोद के जयंत चौधरी और एनसीपी के तारिक अनवर के अलावे डीएमके, जेडीएस, केरल कांग्रेस और एयूडीएफ के नेता मुख्य रूप से मौजूद थे।

रैली में शामिल तमाम नेताओं के निशाने पर स्वाभाविक रूप से बीजेपी और नीतीश कुमार रहे। आरजेडी सुप्रीमो लालू ने कहा नीतीश को तेजस्वी से जलन थी क्योंकि उन्हें तेजस्वी से खतरा था। मेरी संपत्ति सार्वजनिक है। वापसी की हुंकार भरते हुए उन्होंने कहा कि ये नीतीश कुमार की अंतिम पलटी है। संघमुक्त भारत का नारा देते थे, बीमारी का बहाना बनाकर हमसे दूरी बनाई और संघ की गोद में जा बैठे। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने कहा, नीतीश हमारे चाचा थे, हैं और रहेंगे पर अब वो अच्छे चाचा नहीं रहे। उन्होंने कहा, तेजस्वी तो बहाना था, उन्हें सृजन घोटाला छुपाना था।

अपनी राज्यसभा सदस्यता को दांव पर लगाकर रैली में पहुंचे शरद यादव ने कहा कि बिहार के लोगों ने महागठबंधन को जनादेश दिया था। उन्होंने कहा, मुझे सत्ता का मोह नहीं है और अब यह महागठबंधन देश स्तर पर बनेगा। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, बिहार की ऐतिहासिक धरती अगर रथ रोक सकती है, तो भाजपा को भी रोक सकती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, काम मन से होता है, भाषणों से नहीं। अच्छे दिन के नाम पर देश में दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद नीतीश कुमार पर विशेष रूप से हमलावर दिखे। उन्होंने उन पर बिहार की 11 करोड़ जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये तो वैसी ही बात हुई कि शादी किसी और से हुई और भाग किसी और के साथ गए। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने देश से भाजपा और बिहार से नीतीश कुमार को भगाने की बात की। उन्होंने सृजन घोटाले को चारा घोटाला जैसा बताया और कहा नीतीश-मोदी खजाना चोर, गद्दी छोड़। उधर उनके बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने पिता के अंदाज में लोगों को संबोधित करते हुए बकायदा शंख फूंककर ‘युद्ध’ का ऐलान किया।

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सर्वोच्च अदालत ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया

भारत के लिए बड़ा दिन। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर। मुस्लिम महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत। जी हां, देश के सबसे जटिल सामाजिक मुद्दों में से एक तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। पांच में से तीन जजों जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस यूयू ललित ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। वहीं चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने छह महीने के लिए एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने और तमाम राजनीतिक दलों को साथ बैठकर कानून बनाने की सलाह दी।

बहरहाल, पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 395 पेज के अपने आदेश में कहा कि पीठ तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को 3-2 के बहुमत से खारिज करती है। कोर्ट ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है, जबकि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करता है। यह प्रथा बिना कोई मौका दिए शादी को खत्म कर देती है। कोर्ट ने मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर लगे बैन का जिक्र किया और पूछा कि भारत इससे आजाद क्यों नहीं हो सकता?

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगाते हुए केन्द्र सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए। इस अवधि में देश भर में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा। सर्वोच्च अदालत ने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दलों को विश्वास में लेते हुए केन्द्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिन्ताओं का ख्याल रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तब भी तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा।

बता दें कि इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 22 अगस्त का दिन तय किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है। ये गैर-जरूरी है। कोर्ट ने सवाल किया था कि जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है, वह कानून के तहत कैसे वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया था कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है?

चलते चलते ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का साधुवाद। ऐसे फैसलों के कारण ही अदालत के प्रति लोगों की आस्था अब तक बनी हुई है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप  

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार इसी सप्ताह!

जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के एनडीए में शामिल होने की घोषणा के बाद अब सबकी निगाहें केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर है। इस विस्तार में जेडीयू के दो और एआईएडीएमके के तीन मंत्री शामिल हो सकते हैं। बता दें कि मोदी कैबिनेट में इस वक्त 71 मंत्री हैं, जाहिर है कि अब इसमें अधिकतम दस मंत्रियों को ही जगह दी जा सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा मंत्रियों की टीम में से कुछ को मिशन 2019 के मद्देनज़र संगठन में लाया जा सकता है और उनकी जगह कुछ नए चेहरों को मोदी की टीम में जगह दी जा सकती है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट और संगठन के बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर सरगर्मियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि कैबिनेट विस्तार के लिए किसी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि 25 अगस्त को नए शामिल होने वाले मंत्रियों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जेडीयू के बाद अब एआईएडीएमके के एनडीए में शामिल होने के औपचारिक ऐलान की प्रतीक्षा की जा रही है। और अब जबकि पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के दोनों गुटों का विलय हो चुका है, माना जा रहा है कि जल्द ही इस बारे में घोषणा हो जाएगी। गौरतलब है कि दोनों गुटों की इस एका में भाजपा ने बड़ी भूमिका निभाई है।

माना जा रहा है कि भाजपा के बिहार कोटे के कुछ मंत्रियों को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी के साथ लाया जा सकता है। अभी हाल में राजीव प्रताप रूढ़ी की अमित शाह से मुलाकात इस संबंध में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं जेडीयू कोटे से आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा के मंत्री बनने की चर्चा राजनीति के गलियारों में है। वैसे वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए बिहार जेडीयू के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह की दावेदारी भी कम नहीं है। बता दें कि संख्याबल के मुताबिक जेडीयू को एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री की जगह मिल सकती है।

चलते-चलते बता दें कि 2019 के चुनाव के पूर्व मोदी कैबिनेट का यह अंतिम बदलाव होगा। लिहाजा मोदी किसी समीकरण को साधने में कोई कमी नहीं रखना चाहेंगे।

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दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए नहीं मिला था जनादेश – नीतीश

जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी के खुला अधिवेशन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आक्रामक तेवर में दिखे। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी से निर्णायक दूरी बना चुके शरद यादव को पार्टी तोड़ने की चुनौती देते हुए बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनादेश बिहार में न्याय के साथ विकास के लिए था, न कि पिछलग्गू बनकर दूसरों के कुकर्म ढोने के लिए। उन्हें और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि हमने जनादेश का अपमान किया, वे पहले जनता के मिजाज को जान लें। उन्होंने कहा, ‘बिहार में महागठबंधन को जनादेश भ्रष्टाचार या परिवारवाद का समर्थन करने के लिए नहीं मिला था। महागठबंधन में जो हालात पैदा हो गए थे, उसमें 20 महीने तक सरकार चली, यह बड़ी बात है।’

जनादेश का अपमान किए जाने के आरोप का जवाब देते हुए कहा नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन तोड़ने का निर्णय दल का निर्णय है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘कुछ लोग जो बात करते हैं जनादेश की, हम पूछना चाहते हैं कि किस लिए जनादेश मिला था। वह जनादेश बिहार के विकास के लिए मिला था या परिवार के विकास के लिए?’ आगे उन्होंने कहा, ‘आरजेडी के सत्ता में आते ही लोगों के बीच भय पैदा हो गया था। महागठबंधन टूटने के बाद वह भय समाप्त हो गया है। सत्ता से बाहर आते ही आरजेडी के लोग तरह-तरह की हरकतें कर रहे हैं, लेकिन जनता सब देख रही है।’

शरद यादव पर तंज कसते हुए नीतीश ने कहा कि जिनको भाजपा के वोट से राज्यसभा में पहुंचाया, वो आज हमारे खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि शरद जेडीयू को तोड़कर दिखाएं। उन्होंने कहा, पार्टी को तोड़ने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यदि उनके पास बहुमत है तो वे साबित करें। जेडीयू के टूट की किसी प्रकार की खबर को निराधार बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में कहीं टूट नहीं है। सभी विधायक, विधानपरिषद सदस्य, राज्य समितियां साथ हैं।

कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने बिहार में आई बाढ़ को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इस वर्ष पानी में प्रवाह तेज है। राज्य के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने सभी से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने की अपील की और कहा कि सरकार मदद के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा, आपदा प्रभावित लोगों को राज्य के खजाने पर पहला हक है। इसी के साथ नीतीश ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए केन्द्र सरकार का आभार भी जताया और कहा कि दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है। अब तेजी से बिहार का विकास होगा।

चलते-चलते बता दें कि पटना में हुई आज की बैठक में कार्यकारिणी की स्वीकृति के बाद जेडीयू के एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा हो गई। जहां तक शरद यादव पर अंतिम निर्णय लेने की बात है, उनकी ‘वरिष्ठता’ और ‘कद’ को देखते हुए पार्टी 27 अगस्त को प्रस्तावित आरजेडी की रैली में उनके शामिल होने तक की प्रतीक्षा कर सकती है। हालांकि नीतीश की बैठक के बरक्स शरद ने भी कल पटना में ‘जन अदालत’ का आयोजन किया, लेकिन अली अनवर, अरुण श्रीवास्तव, रमई राम सरीखे चेहरों के अलावे कोई और बड़ा चेहरा वहां मौजूद नहीं था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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जलमग्न हुआ बिहार, 16 जिलों में हाहाकार

बिहार पर प्रकृति का कहर जारी है। राज्य में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं। 16 जिलों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी त्रासदी झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 119 तो अन्य स्रोतों से 230 लोगों के मारे जाने की ख़बर है। गुरुवार को पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा के कई नए इलाकों में पानी आने से दहशत फैल गई। मधेपुरा में सर्वाधिक प्रभावित आलमनगर और चौसा प्रखंड के अलावा छह और प्रखंड इसकी चपेट में आ गए। जिले में भलुआही के पास एनएच 106 की सड़क लगभग 25 फीट कट जाने से यातायात ठप हो गया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब बाढ़ का पानी सहरसा जिले में भी फैल गया है। उधर कटिहार के नए इलाकों में सदर प्रखंड के भसना, मनसाही और कोढ़ा प्रखंड के कुछ हिस्सों में भी पानी फैलने लगा है। वहीं पूर्णिया जिले में बायसी अनुमंडल के बाद अब पानी बनमनखी और धमदाहा क्षेत्र में बढ़ रहा है। बनमनखी प्रखंड  की 10 पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। गुरुवार से वहां एनएच 107 पर वाहनों का परिचालन भी बाधित हो गया है। अररिया की हालत तो और भी बदतर है। इस जिले में हताहत लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है और अब तक 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

इन जिलों के अतिरिक्त सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर भी बाढ़ से बेहाल हैं। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में अब तक 94 लोगों की मौत हो चुकी है। वैसे गोपालगंज, वैशाली और छपरा में जहां नए इलाके बाढ़ के पानी से घिरे, वहीं कुछ प्रभावित जिलों में पानी के धीरे-धीरे उतरने की ख़बर भी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को गोपालगंज, बगहा, बेतिया, रक्सौल और मोतिहारी के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को तमाम जरूरी निर्देश दिए। बता दें कि बाढ़ प्रभावित तमाम जिलों में एनडीआरएफ की 27 टीमों के 1110 जवान अपनी 114 नौकाओं, एसडीआरएफ की 16 टीमों के 446 जवान 92 नौकाओं और सेना के 630 जवान 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। राहत शिविर बड़े पैमाने पर बनाए गए हैं और इनमें कुल 3.19 लाख लोगों को भोजन कराया जा रहा है। राहत शिविरों के अतिरिक्त 1112 जगहों पर बाढ़ पीड़ितों के लिए कम्यूनिटी किचेन भी शुरू किया गया है। हालांकि बाढ़ ने अपने पांव जिस कदर फैला लिए हैं, उसे देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।

चलते-चलते एक अच्छी ख़बर। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में बाढ़ का तांडव कम होगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के मुताबिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से मिले पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर बिहार के जिलों में बारिश के आसार नहीं हैं। हां, कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश जरूर हो सकती है। दक्षिण बिहार के जिलों के बारे में भी यही पूर्वानुमान है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि बाढ़ से जूझ रहे लोग थोड़ी चैन की सांस ले पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार को बहुत जल्द विशेष पैकेज की सौगात!

राजनीति की उठापटक अपनी जगह है और राज्य व देश का हित अपनी जगह। उसे हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी सोच के कारण महागठबंधन छोड़ने और एनडीए के साथ सरकार बनाने का बड़ा निर्णय लिया था। उनके उस निर्णय का सुखद परिणाम अब सामने आने जा रहा है। जी हां, बिहार को बहुत जल्द केन्द्र से 1.25 लाख करोड़ का विशेष पैकेज मिलने जा रहा है। बता दें कि इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन भाजपा की करारी हार के बाद विशेष पैकेज की बात ठंडे बस्ते में चली गई थी।

गौरतलब है कि नीतीश ने पिछले सप्ताह ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें उनके वादे की याद दिलाई थी। दरअसल नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि एनडीए के विरुद्ध जनादेश लेने के बाद फिर उसी के साथ सरकार बनाने के निर्णय को वे तभी सही ठहरा सकते हैं जब बिहारवासियों से किया वादा वे पूरा करें। अपने हाल के निर्णय में उन्होंने राजधर्म और राज्यधर्म को महागठबंधन-धर्म पर तरजीह दी जिसे बिहार को मिलने जा रही इस सौगात से निश्चित रूप से नैतिक बल मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो जिस दिन बिहार में जेडीयू-एनडीए की सरकार बनी, उसी दिन से विशेष पैकेज मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन ये खुशखबरी इतनी जल्दी मिलेगी इसकी उम्मीद नहीं थी। इन दिनों बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार के लिए ये सचमुच राहत की ख़बर है।

चलते-चलते बता दें कि जहां मोदी-नीतीश मिलकर बिहार से किये वादे पर अमल करने जा रहे हैं वहीं जेडीयू एनडीए में शामिल होने की विधिवत घोषणा भी शीघ्र करने जा रही है। यही नहीं, जेडीयू केन्द्र सरकार में भी शामिल होगी और ख़बर यह भी है कि नीतीश एनडीए के संयोजक हो सकते हैं। भारतीय राजनीति के दो शिखरपुरुषों के एक साथ आने से बिहार के विकास का हर अवरुद्ध मार्ग खुलेगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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