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तेजस्वी यादव का ओपन चैलेंज

भले ही पूर्व मुख्यमंत्री व राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हो पर लालू-राबड़ी के लाल पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव राजद को फिर से अपने पुराने तेवर में लाते दिख रहे हैं |

बीते बुधवार को तेजस्वी यादव ने अपनी डिग्री पर उठ रहे सवाल के बाबत कहा कि राजनीति में सिर्फ डिग्री ही कोई बड़ा पैमाना नहीं होता, बल्कि राजनीति के लिए संवेदना , साहस , संकल्प और सिद्धांत की जरुरत होती है | जो हमारे ही नहीं बल्कि राजद के भी प्रमुख स्तम्भ है |

और आगे अपनी बात पूरी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा की बात करते हैं तो मैं सी.एम. नीतीश कुमार को अंग्रेजी में डिबेट करने की खुली चुनौती देता हूँ | साथ ही बड़ी सरलता से उन्होंने यह भी कहा कि मैं एक नहीं दो-दो सीएम का बेटा हूँ | अगर मेरे माता-पिता चाहते तो नकली डिग्री मुझे भी दिला सकते थे लेकिन हम लोग स्मृति ईरानी जैसे नहीं हैं |

पूर्व उप-मुख्यमंत्री के इस ललकार भरे बयान से बिहार में शीत लहर के बाबजूद राजनितिक गलियारों में अब गरम हवा बहने लगी है |

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लालू को एक और मामले में सजा

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही हैं। बुधवार को चारा घोटाले के एक और मामले में उन्हें सजा सुनाई गई। इस बार सजा पांच साल की है। साथ में 10 लाख का जुर्माना भी। रांची स्थित सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राज्य के एक और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, जगदीश शर्मा, आर के राणा और विद्या सागर निषाद समेत 50 आरोपियों को चाईबासा कोषागार से 35 करोड़ 62 लाख रुपये का गबन करने के मामले में दोषी करार दिया। बता दें कि लालू की तरह ही जगन्नाथ मिश्र को भी पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

चारा घोटाले का यह तीसरा मामला है जिसमें लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र को पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि इस मामले में बहस दस जनवरी को पूरी हो गयी थी। इस ताजा फैसले के बाद चारा घोटाले से ही जुड़े देवघर कोषागार मामले में जेल में बंद लालू प्रसाद यादव के रिहा होने की संभावना अत्यंत धूमिल हो गयी है।

बहरहाल, चारा घोटाले के दो मामलों में लालू को पहले ही सजा हो चुकी है। चाईबासा कोषागार से ही 37.7 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में सितंबर 2013 में पांच वर्ष की सजा हो चुकी है। जबकि देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने इसी महीने छह तारीख को  उन्हें सजा सुनाई  है। इस मामले में वह अभी रांची स्थित होटवार जेल में हैं।

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पांच करोड़ लोगों ने बनाई 13668 किलोमीटर लंबी मानव-श्रृंखला

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का साथ देने एक बार फिर पूरा बिहार उमड़ पड़ा और करोड़ों बिहारवासियों ने दहेज और बालविवाह से मुक्ति का पवित्र संकल्प लिया। रविवार को दोपहर 12 से 12.30 बजे के बीच राज्य के आम हों खास नागरिक, बच्चे हों या बूढ़े, पुरुष हों या महिलाएं, सभी एक समान उत्साह से भरे हुए नजर आए। दैनिक जागरण के मुताबिक श्री नीतीश कुमार के आह्वान पर इस बार 13668 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में करीब पांच करोड़ लोग शामिल हुए और इस तरह बिहार विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का साक्षी बना। बता दें कि इससे पहले भी यह कीर्तिमान बिहार के ही नाम था। शराबबंदी के लिए बनी मानव-श्रृंखला में 2016 में इसी 21 जनवरी के दिन लगभग 4 करोड़ लोग जुटे थे। ध्यातव्य है कि पिछली बार सड़कों पर ही श्रृंखला बनाई गई थी। इस बार यह लोगों पर छोड़ा गया था। लोगों ने गांव-कस्बे-मोहल्ले में जहां चाहा वहां श्रृंखला बनाई।

मानव-श्रृंखला की शुरुआत श्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में गुब्बारा छोड़कर की। श्रृंखला बनाने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह और दहेज के खिलाफ पहले से ही कानून हैं, लेकिन ये कुरीतियां फैलती जा रही हैं। इसलिए हम बापू के जन्मदिवस 2 अक्टबूर से इसके विरोध में अनवरत अभियान चला रहे हैं। आगे भी यह कार्यक्रम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोगों में बाल विवाह व दहेज के खिलाफ जागरुकता आ रही है। उनके संकल्प का प्रकटीकरण सार्वजनिक तौर पर भी होना चाहिए। इसलिए इस मानव-श्रृंखला का आयोजन किया गया।

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने मानव-श्रृंखला को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि श्री नीतीश कुमार ने राजनीति को जिस तरह समाज से जोड़ा है, वह अनोखा है और उसका असर मानव-श्रृंखला के लिए घर से बाहर निकलने वाली बिहार की करोड़ों जनता की आंखों में देखा जा सकता है। वर्तमान समय में पूरे देश में दूसरा कोई ऐसा राजनेता नहीं, जिसने समाज-सुधार को अपना एजेंडा बनाया हो। बिहार की जनता ने अपने नेता के आह्वान पर एक बार फिर जैसा उत्साह दिखाया है, उससे उनके संकल्प को और बल मिलेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के साथ गांधी मैदान में विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, पथनिर्माण मंत्री श्री नंदकिशोर यादव, कृषिमंत्री श्री प्रेम कुमार समेत कई वरिष्ठ नेता व नागरिक मानव-श्रृंखला का हिस्सा बने। वहीं ईको पार्क के निकट स्ट्रैंड रोड पर बनी मानव-श्रृंखला में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष श्री बशिष्ठ नारायण सिंह के नेतृत्व में विधान परिषद के पूर्व सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, विधानपार्षद व जेडीयू बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद व पार्टी के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह (गांधीजी), विधानपार्षद व कोषाध्यक्ष डॉ. रणवीर नंदन, विधानपार्षद व मुख्य प्रवक्ता श्री संजय सिंह, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ एवं जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप समेत हजारों कार्यकर्ता व नेता शामिल हुए।

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नया कीर्तिमान रचेगी इस बार की मानव-श्रृंखला

दहेज व बालविवाह के विरोध में बनने वाली मानव-श्रृंखला को लेकर जेडीयू की तैयारी और कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है। मानव-श्रृंखला की सफलता को लेकर राज्य के सभी 51 सांगठनिक जिलों में जिला अध्यक्ष व जिला प्रभारी और सभी प्रखंडों में प्रखंड अध्यक्ष व प्रखंड प्रभारी बैठक कर चुके हैं।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य श्री बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि शराबबंदी के समर्थन में बुलाई गई मानव-श्रृंखला में पिछली बार 4 करोड़ से ज्यादा लोग जुटे थे, इस बार की मानव-श्रृंखला नया कीर्तिमान रचेगी और सामाजिक सुधार पूरे देश का मुद्दा बनेगा।
जेडीयू संसदीय दल के नेता व राष्ट्रीय महासचिव श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि 21 जनवरी को पूरा बिहार दहेजप्रथा और बालविवाह जैसी कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद करेगा। आधी आबादी की इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी हो, इसके लिए पार्टी ने ‘समाजसुधार वाहिनी’ का गठन किया है।
जेडीयू मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने बताया कि जिलों एवं प्रखंडों से प्राप्त सूचना के अनुसार पार्टी के 40 लाख से ज्यादा सदस्य एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए समाज सुधार अभियान में आस्था रखने वाले तमाम लोग 21 जनवरी को सपरिवार मानव-श्रृंखला में भाग लेंगे। इसके लिए पार्टी लगातार जागरुकता अभियान में जुटी है और हर जरूरी तैयारी की जा चुकी है। सभी जगहों पर इसका पूर्वाभ्यास भी किया जा चुका है। प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर मध्याह्न 12 बजे सभी बिहारवासी एक नया इतिहास रचने को एकत्र होंगे, इसका हमें पूर्ण विश्वास है।

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भारतरत्न डॉ.कलाम अब अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकों में होंगे शामिल- सी.ए.बी.ई.

नई उम्मीदों एवं नये संकल्पों के इस नये साल में जीवन की चुनौतियों से सामना करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष सलाह देने वाली भारत की सर्वोच्च संस्था- “केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड” यानी सी.ए.बी.ई. द्वारा सरकार को यह सुझाव दिया जा रहा है कि भारत के मिसाइल मैन महामहिम भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की आत्मकथा ‘अग्नि की उड़ान’ के कुछ अंश को अंग्रेजी पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जा सकते हैं |

इस पर विचार व्यक्त करते हुए विज्ञानवेत्ता भारतरत्न डॉ.कलाम के निकटतम रह चुके डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि अंग्रेजी में ही नहीं बल्कि हिन्दी सहित अन्य सभी क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से डॉ.कलाम के प्रखर व्यक्तित्व एवं सराहनीय कृतित्व वाली आत्मकथा को प्रारंभिक वर्गों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए | डॉ.मधेपुरी ने इसी क्रम में जानकारी दी कि भारतरत्न डॉ.कलाम पर लिखी गई उनकी पुस्तक- “छोटा लक्ष्य एक अपराध है” का सर्वाधिक अंश झारखंड सरकार ने वर्ग 6 के ‘हिंदी भाषा मंजरी’ के पाठ्यक्रम में शामिल कर बच्चों को सत्र 2017-18 से पढ़ाना भी शुरू कर दिया है |

यह भी जानिये कि केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य मो.लतीफ मकदूम एवं भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष बी.बी.कुमार ने जहाँ बैठक में चिकित्सा विज्ञान की एक ऐसी संस्था के गठन की वकालत की है जो प्राथमिक उपचार, अस्पताल प्रबंधन एवं वार्ड प्रबंधन में अल्प अवधि का सर्टिफिकेट कोर्स कराएगा वहीं डॉ.मधेपुरी राज्य के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पत्र लिख-लिखकर माध्यमिक विद्यालयों के अंतिम 2 वर्षों में प्रत्येक शनिवार को फर्स्ट एड एवं माँस व नस में सूई देने की ट्रेनिंग (विशेषरुप से लड़कियों को) देने की सलाह को लागू कराने के प्रयास में लगे हैं | यदि इसे नीतीश सरकार स्वीकार कर लेती है तो साईकिल योजना एवं पोशाक योजना की तरह इस योजना को भी अन्य राज्यों में भी लागू करने का मार्ग प्रशस्त होने लगेगा और बिहार मॉडल भारत में अपना परचम लहराने लगेगा |

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मकर-संक्रान्ति: कड़ाके की ठंड में भोज की गरमाहट

बिहार की राजनीति में मकर संक्रान्ति खास मायने रखती है। इस दिन आयोजित चूड़ा-दही भोज में कड़ाके की ठंड के बावजूद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहता है और आपसी संबधों को एक नया आयाम मिलता है। आप खुद ही देख लें। पिछले साल मकर संक्रान्ति में जेडीयू और आरजेडी महागठबंधन के साथी के तौर पर एक साथ थे। आरजेडी ने लगातार दो दिनों का भोज आयोजित किया था और उस भोज में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर ‘राजतिलक’ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन, आज के बदले हालात में लालू-नीतीश की राहें जुदा हैं। उधर 2013 के बाद जेडीयू और भाजपा एक बार फिर एक-दूसरे के भोज में मौजूद हैं।

बदले हालात में और अपने नेता के जेल में होने के कारण इस साल आरजेडी की ओर से कोई भोज नहीं था। दूसरी ओर जेडीयू, लोजपा और भाजपा के द्वारा भोज का आयोजन किया गया। 15 जनवरी को रालोसपा ने भी भोज का आयोजन किया है।

जेडीयू की ओर से हमेशा की तरह प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने भोज का आयोजन किया। इस भोज में लगभग 15 हजार लोग जुटे। एनडीए की तमाम बड़ी हस्तियों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। इनमें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, जेडीयू संसदीय दल के नेता व महासचिव आरसीपी सिंह, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान व उनके पुत्र चिराग पासवान, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मंगल पांडेय प्रमुख हैं। जेडीयू के भोज में शामिल प्रमुख लोगों में एक चौंकाने वाला नाम महागठबंधन सरकार में शिक्षामंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का है। हालांकि बकौल चौधरी वे बशिष्ठ नारायण सिंह से अपने ‘व्यक्तिगत’ संबंधों के कारण भोज में शामिल हुए, लेकिन ‘कयास’ लगाने वाले इससे सहमत होंगे, ऐसा नहीं लगता।

गौरतलब है कि हमेशा चर्चा में रहने वाले जेडीयू के भोज के लिए भागलपुर से कतरनी व पश्चिमी चंपारण से मर्चा चूड़ा मंगवाया गया था, जबकि तिलकुट की व्यवस्था गया से की गई थी। इनके साथ-साथ भूरा-चीनी तथा आलू-गोभी-मटर की लजीज सब्जी की व्‍यवस्‍था भी थी। दही का इंतजाम ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ सुधा डेयरी से किया गया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन तीनों भोजों में शिरकत की। बशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित भोज में शामिल होने के बाद वे लोजपा कार्यालय गए। वहां लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने पहली बार मकर संक्रांति भोज का आयोजन किया था। जबकि भाजपा की ओर से एमएलसी रजनीश कुमार के आवास पर भोज का आयोजन था। स्वाभाविक तौर पर इन दोनों जगहों पर भी नेताओं का जुटान हुआ।

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मधेपुरा में ऐतिहासिक मानव श्रृंखला होगी बाल विवाह व दहेज के खिलाफ

मधेपुरा जिला के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम  द्वय संजय कुमार निराला व एस जेड हसन की पूरी टीम गत वर्ष के शराबबंदी के पक्ष में आयोजित मानव श्रृंखला के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त करने में लगी है | क्योंकि, नीतीश सरकार का यह आह्वान है कि बाल विवाह एवं दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किये बिना प्रदेश और देश का विकास संभव नहीं | उन्होंने कहा कि इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जन जागरण आवश्यक है | साथ ही समाज में जागरूकता लाने के लिए जनता की सहभागिता सर्वाधिक जरूरी भी |

यह भी जानिये कि बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियाँ समाज का कोढ़ है जिससे सर्वाधिक प्रभावित होता है- शिक्षा | इन कुरीतियों से मुक्ति पाने तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए इस धरती के शलाका पुरुष बाबू रास बिहारी लाल मंडल द्वारा 1911 ई. में ही दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें सारे भारत से 16000 जनप्रतिनिधि आये थे जिसकी अध्यक्षता नेपाल के तुलसी सिंह ने की थी |

उन दिनों 5 वर्ष की उम्र में ही लड़के की शादी हो जाती थी | इस उम्र सीमा को एक बारगी 10 वर्ष करने पर नेपाल से आये प्रतिनिधिगण विरोध में खड़े हो गये | तब जाकर 6 वर्ष की उम्र पर सहमति बनी | यह भी जान लीजिए कि स्थानीय टी.पी. कॉलेज के प्रधानाचार्य, विधायक, सांसद, उपकुलपति व कुलपति रह चुके डॉ.महावीर प्रसाद यादव की शादी मात्र 6 वर्ष की उम्र में हुई थी | उन दिनों छोटे लड़के को शादी कराने के लिए गोद में या पालकी में ले जाया जाता था और सबसे पहले बच्चे को दूध पिलाया जाता | आज 30 वर्ष के पार भी शादी करने वाले लड़के को ‘विद्य’ के रूप में दूध पिलाया जाता है | इस अंधविश्वास को भी हटाना होगा |

यह भी बता दें कि दहेज खत्म करने को लेकर भी कानून बने हैं, फिर भी पुलिस-हाकिम सभी असमर्थ हैं | कानून कोर्ट में रुके-पड़े हैं | अपनी बेटी के वर खातिर उनके भी सिर झुके हुए हैं | तब से आज तक प्रयास किया जा रहा है लेकिन समाज को सफलता नहीं मिल पाई है | सिक्ख समुदाय में तो कुछ सुधार नजर आता है लेकिन अन्य वर्गों के लोग तो शादियों में दहेज लेकर लाखों रुपये रोशनी एवं पटाखे में बर्बाद कर देते हैं | परंतु, बेटियों को अच्छी शिक्षा देने के समय उनका हाथ खाली रहता है |

बता दें कि एक ओर जहाँ दहेज एवं बाल विवाह बन्दी को लेकर मधेपुरा के डीएम,एसपी, एसडीएम द्वय एवं तेरहो प्रखंडों के बीडीओ, सी.ओ. से लेकर शिक्षा विभाग के सभी संस्थानों व समस्त पदाधिकारियों, शिक्षकों सहित सभी मिलकर मानव श्रृंखला हेतु रूट चार्ट तैयार कर रहे हैं | तैयारी यह भी की जा रही है कि गत वर्ष 21 जनवरी को शराब बन्दी को लेकर बनी मानव श्रृंखला में प्रदर्शन करने वाले 11 लाख 34 हजार की संख्या को इस बार बहुत पीछे छोड़ देना है और सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रौशन करना है |

वहीं दूसरी और राज्य के मुखिया नीतीश कुमार में आस्था-विश्वास रखने वाले जदयू, युवा जदयू एवं सभी प्रकोष्ठों से जुड़े सारे सदस्यगण 21 जनवरी 2018 को इन कुरीतियों द्वय के विरुद्ध आयोजित की जाने वाली मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्राइवेट एवं सरकारी-प्राइमरी, मिडिल स्कूलों से लेकर उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के छात्रों को इस अभियान में जोड़ने हेतु जगाने में अहर्निश लगे हैं |

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बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’: राष्ट्रपति कोविंद

गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एकदिवसीय यात्रा पर बिहार के राजगीर में थे। मौका था अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय व इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय धर्म धम्म सम्मेलन के उद्घाटन का और उनके साथ मौजूद थे बिहार के राज्यपाल सत्य पाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना सहित कई गणमान्य।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 21वीं सदी में भी भगवान बुद्ध के विचार हमें प्रेरित कर रहे हैं। सही मायने में बुद्ध की सोच ‘लाइट ऑफ एशिया’ है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऐसी जगहों पर रह रही है जो भगवान बुद्ध के ज्ञान से प्रभावित है और उस ज्ञान से लगातार प्रेरित हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म धम्म परंपरा यह कहती है कि किस तरह निरंतरता से खुद को बेहतर करना है। इसकी क्या जरूरत और महत्ता है। किस तरह से हमें उच्च स्तर का ज्ञान हासिल करना है। यह ज्ञान ही है जिससे राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बु्द्ध बने और महान योद्धा अशोक बन गए धम्म अशोका। बुद्ध के विचार हमें जीने के सिद्धांत की ओर प्रेरित करते हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर हमें ले जाकर सह अस्तित्व की भावना को विकसित करते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना था। यह विश्वविद्यालय उनके सपनों का मूर्त रूप है। यह महावीर, बुद्ध तथा गुरुनानक की धरती है, जिन्होंने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया। उन्होंने वैश्विक समस्याओं के निवारण के लिए अंतररराष्ट्रीय रिजोल्यूशन सेंटर खोलने पर भी बल दिया।

चलते-चलते यह कहना बेहद जरूरी प्रतीत होता है कि हाल के दिनों में बिहार की बौद्धिक-सांस्कृतिक सक्रियता जिस तरह बढ़ी है, वह नीतीश कुमार जैसे विचारशील और संस्कारयुक्त अगुआ के बिना मुमकिन ना थी। ऐसी तमाम गतिविधियों के लिए वे और उनकी सरकार साधुवाद के पात्र हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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लालू की सजा और करवट लेती बिहार की सियासत

आखिर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा मिल ही गई। आज रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अहम बात यह कि इस फैसले के बाद लालू समेत तमाम दोषियों को जमानत नहीं मिलेगी। इसके लिए उन्हें उच्च अदालत में जाना होगा।

बहरहाल, देवघर के सरकारी कोषागार से 1990-1994 के बीच अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में आए इस बड़े फैसले को लालू समेत सभी 16 दोषियों ने रांची की बिरसा मुंडा जेल में विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए एक साथ बैठकर सुना। गौरतलब है कि 24 दिसंबर 2017 को सीबीआई जज ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 16 लोगों को दोषी करार दिया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया गया था। जो सजा आज सुनाई गई, उसका फैसला 3 जनवरी को ही आना था पर तारीख एक-एक दिन कर टलती जा रही थी।

इधर सजा का फैसला आने से पहले ही पटना में आरजेडी की ओर से बुलाई गई बैठक में विधायक समेत पार्टी के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में लालू यादव की चिट्ठी नेताओं में बांटी गई। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने प्रेस वार्ता में बताया कि फैसला आने के बाद लालू यादव के जेल से लिखे खत को पार्टी के लोग जन-जन तक पहुंचाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ उच्च अदालत जाएंगे। वहीं लालू के बड़े बेटे व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि ‘हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उन्हें (लालू यादव) बेल मिल जाएगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।’

हालांकि फिलहाल जो केस की स्थिति है उस हिसाब से लालू प्रसाद यादव का तुरंत जेल से निकल पाना आसान नहीं है। अभी इस केस में सजा मिलने के अलावा चार और केस में कोर्ट का फैसला आना है। सूत्रों के अनुसार जनवरी महीने में ही उन सभी मामले में अगर लालू प्रसाद को सजा मिलती गई तो सबमें अलग-अलग सजा मिलेगी और सबमें अलग-अलग जमानत लेनी होगी।

कहने की जरूरत नहीं कि लालू की अनुपस्थिति में न केवल आरजेडी बल्कि पूरे बिहार की सियासत में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे। चाहे आरजेडी हो, चाहे उसके विरोध में खड़ी जेडीयू और भाजपा, या फिर उसकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस, समीकरण तमाम दलों के बदलेंगे। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि जनता का रुख इस पर क्या होता है!

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मधेपुरा में खोल गए मुख्यमंत्री संभावनाओं के द्वार

समीक्षा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बृहस्पतिवार को मधेपुरा पहुंचे। शीतलहर के बावजूद उनके लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। योजनाओं की समीक्षा के साथ ही उन्होंने जिले के लिए संभावनाओं के कई नए द्वार भी खोल दिए। सिंहेश्वर के मवेशी हाट में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने मधेपुरा को 658 करोड़ रुपए की सौगात दी और जिले के लिए 1565 योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद लोगों में मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, विधायक निरंजन मेहता, कमिश्नर टीएन बिंधेश्वरी, डीएम मोहम्मद सोहैल आदि प्रमुख हैं।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहेश्वर के गौरीपुर पंचायत के वार्ड नं. 9 एवं 10 में ‘सात निश्चय’ के तहत हुए कार्यों को देखा। सात निश्चय से गांव और शहर के फर्क को मिटाने के अपने सपने को जमीन पर उतरता देख वे खुश नजर आए। विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 250 की आबादी वाले हर टोले और गली को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा। पेयजल, बिजली, शौचालय आदि की सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी। यही नहीं, चार साल के अंदर ये सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पढ़ने में अब पैसा बाधक नहीं बनेगा। 12वीं के बाद राज्य सरकार सभी बच्चे को चार लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा रही है। युवाओं के कौशल विकास पर पूरा फोकस किया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के तहत कुशल युवा कार्यक्रम चलाकर युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा में जहां दक्ष बनाया जा रहा है, वहीं कम्यूनिकेशन स्किल और रहन-सहन को लेकर भी उनके व्यक्तित्व का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विकास के साथ ही समाज-सुधार भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए आमलोगों के जागरुक होने की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि 21 जनवरी को दहेजप्रथा व बालविवाह के विरुद्ध बनाई जाने वाली मानव-श्रृंखला में शामिल होकर उसे ऐतिहासिक बनाएं।

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