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लालू की जमानत अवधि छह हफ्ते और बढ़ी

चारा घोटाला मामले में सजा झेल रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी औपबंधिक जमानत अ‍वधि छह हफ्तों के लिए बढ़ा दी है। गौरतलब है कि उन्‍होंने जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल की  थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया।

शुक्रवार को लालू की ओर से पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद यादव गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज मुंबई के एशियन हार्ट अस्पताल में चल रहा है। वह प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी व डिप्रेशन सहित कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका फिस्टुला का ऑपरेशन हुआ है और अभी जख्म भरा नहीं है। शुगर लेवल बढ़ा होने के कारण हर दिन उन्हें 70 यूनिट इंसुलिन दिया जा रहा है। इस तरह उनकी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इसके बाद अदालत ने औपबंधिक जमानत की अविध छह सप्ताह के लिए बढ़ा दी। बता दें कि लालू प्रसाद यादव की जमानत की अवधि तीन जुलाई को समाप्त हो रही थी।

बहरहाल, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने 10 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित करते हुए आरजेडी सुप्रीमो को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसी अदालत ने डॉ जगन्नाथ मिश्र की औपबंधिक जमानत की अवधि भी 25 जुलाई तक बढ़ा दी है। डॉ. मिश्र को 20 जुलाई को अपनी मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का आदेश कोर्ट ने दिया है।

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शिष्टाचार पर राजनीति ना करें तेजस्वी

आज की राजनीति में शिष्टाचार निभाना भी आफत है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अस्वस्थ चल रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से उनकी तबीयत क्या पूछ ली, इस पर भी बयानबाजी शुरू हो गई। शिष्टाचार संस्कार का हिस्सा होता है और पारिवारिक जीवन हो या सार्वजनिक, उसे अनिवार्य रूप से निभाया जाना चाहिए। पर आज के ‘ट्विटरवीर’ इसे समझे तब ना..!

जैसा कि सब जानते हैं रविवार को लालू जी का फिस्टुला का ऑपरेशन हुआ था। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिष्टाचारवश मंगलवार को लालू जी को फोन कर कुशल उनका क्षेम पूछा था। लेकिन उनके उत्तराधिकारी तेजस्वी इस ‘मर्यादा’ को समझ ही नहीं सके (या समझना नहीं चाहते) और ट्विटर पर तपाक से लिख दिया, देर से ही सही उनको लालू जी की याद तो आई। तेजस्वी ने आगे लिखा, आश्चर्य है कि नीतीश जी ने पिछले चार महीने से बीमार लालू जी का हालचाल नहीं लिया, लेकिन आज फोन कर पूछा। शायद उन्हें पता चला कि भाजपा और एनडीए के लोग अस्पताल जाकर हालचाल ले रहे हैं तो उन्होंने भी फोन कर लिया। यही नहीं, वे इसका विशेषार्थ तक ढूंढ़ने लगे और वे स्वयं और उनकी पार्टी के बाकी धुरंधर इसे महागठबंधन में उनके शामिल होने की ‘तथाकथित इच्छा’ से जोड़ने लगे। बड़बोले शिवानंद तिवारी तो यहां तक कह बैठे कि नीतीश किस मुंह से सोच रहे हैं कि उन्हें महागठबंधन में जगह मिल जाएगी।

उधर जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि शिष्टाचार के तौर पर की गई बातचीत को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजद से नजदीकी बढ़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने भी इस मामले में राजनीति करने पर विपक्षी दलों को घेरते हुए कहा कि यह एक सामान्य व्यवहार है, व्यक्तिगत रिश्ता के नाते नीतीश ने पूछा हाल, इसका कोई राजनीतिक मायने नहीं है। जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने भी कहा कि नीतीश जी ने शिष्टाचार के नाते लालू जी को फोन किया था और यह भी कि तेजस्वी को बयानबाजी से परहेज करना चाहिए। त्यागी ने स्वाभाविक तल्खी से कहा, राजनीति में शिष्टाचार सीखना भी जरूरी है।

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नहीं रहे झारखंड के गांधी

झारखंड की राजनीति में जीते जी किंवदंती बन जाने वाले बागुन सुम्ब्रुई नहीं रहे। पूरी ज़िन्दगी केवल आधे शरीर को कपड़ा से ढंकने वाले सुम्ब्रुई ‘झारखंड के गांधी’ कहे जाते थे। आज शायद ही कोई यकीन करे लेकिन ये सच है कि पांच बार सांसद, चार बार विधायक और उससे पहले पांच बार मुखिया रहने वाले पूर्व मंत्री और कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ नेता वस्त्र के नाम पर केवल एक धोती से काम चला लेते थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन के बाद अपने ट्वीट में बिल्कुल सही कहा कि वे झारखंड की सच्चाई, सादगी और विनम्रता के प्रतीक, आदिवासी समाज की आवाज और गांधीजी के विचारों के सच्चे शिष्य थे। शुक्रवार शाम 96 वर्ष की उम्र में टाटा मेमोरियल अस्पताल में उनका निधन हो गया।
बागुन सुम्ब्रुई का जन्म 1924 में पश्चिम सिंहभूम जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव भूता में हुआ था। प्रारंभिक जीवन भूख, अभाव व गरीबी के बीच गुजरा। प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की और फिर जिला स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन गरीबी के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ दर्जी का काम शुरू करना पड़ा। इसी बीच 1946 में  22 वर्ष की उम्र में गांव के मुंडा बन गये। यहीं से शुरू हुई राजनीतिक जीवन में कभी न रुकने वाली उनकी यात्रा।
लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय तक सिंहभूम की राजनीति का केन्द्र रहे सुम्ब्रुई की पहचान झारखंड से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक रही। जयपाल सिंह के बाद इन्होंने झारखंड पार्टी की कमान संभाली और झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए चले आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के नेता रहे। उनके नेतृत्व वाली झारखंड पार्टी ने 1969 के चुनाव में बिहार में 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 1989 तक उनकी छवि एक ऐसे अपराजेय नेता की थी जिसे चुनाव में हरा पाना असंभव-सा था। सिंहभूम से पांच बार सांसद और चार बार विधायक रहे सुम्ब्रुई वर्ष 1999 में बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद वे झारखंड का पहले विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गए।
सादा जीवन उच्च विचार का आजीवन अनुसरण करने वाले बागुन सुम्ब्रुई ने डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत की थी। अपनी धुन और अपने सिद्धांत के इतने पक्के थे वे कि 1970 में अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय, जिनकी सरकार सुम्ब्रुई की झारखंड पार्टी के 11 विधायकों के समर्थन से चल रही थी, द्वारा बिहार राज्य पथ परिवहन में काम करने वाले एक आदिवासी कंडक्टर के निलंबन को वापस लेने के अपने अनुरोध के नहीं सुने जाने के कारण उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया था। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर की सरकार बनी, जिसमें सुम्ब्रुई परिवहन एवं वन कल्याण मंत्री बने और मंत्री बनते ही उन्होंने सबसे पहले उस कंडक्टर का निलंबन वापस लिया। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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शोधकर्ता श्री सुभाशीष को कोसी नदी में मिला 120 डॉल्फिन !

कल तक सोंस के रूप में प्रचलित कोसी के इलाके का यह जलीय जीव स्वतंत्र शोधकर्ता श्री सुभाशीष डे को कोसी नदी में 120 डॉल्फिन का मिल जाना कोई आम बात नहीं; बल्कि एक खास बात मानी जा रही है | इलाके के लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि इस जलीय जंतु की सुरक्षा एवं संवर्धन की नितांत आवश्यकता है | लगभग 2 वर्ष के अथक प्रयास के बाद कोसी नदी बेसिन गांगेय डॉल्फिन के रूप अब स्थापित होने जा रहा है |

बता दें कि 41 प्रजातियों वाली डॉल्फिन की केवल 5 प्रजातियां साफ पानी में और शेष सभी समुद्री पानी में पायी जाती है | डॉल्फिन का मनुष्य के साथ बरसो से अधिक मित्रतापूर्ण रिश्ता रहा है तथा व्यवहारों एवं भावनाओं में समानता भी |

यह भी जानिए कि प्रो.सुनील कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष- वनस्पति विभाग (टीएम विश्वविद्यालय भागलपुर) के निर्देशन में एक 6 सदस्यीय टीम गठित की गई | अत्याधुनिक कैमरों एवं अन्य आधुनिक यंत्रों के साथ टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य संपन्न किया गया है |

यह भी बता दें कि दो चरणों में किये गये सर्वे में जहां नदी के बहाव के विपरीत दिशा में 12 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सर्वे का काम किया गया वहीं नदी के बहाव की दिशा में 21 अप्रैल से 23 अप्रैल तक पूर्व में किये गये सर्वे का क्रॉस चेकिंग भी किया गया |

वर्ष 2018 में अबतक जहाँ सहरसा-सुपौल क्षेत्र की कोसी नदी में 168 किलोमीटर सर्वे के दरमियान 120 डॉल्फिन मिली वहीं उसके विकास के साथ-साथ अन्य वन्य जीवों के विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार ने सहरसा एवं सुपौल दोनों 1 प्रमंडलों को अलग-अलग क्रमशः 11 लाख 62 हज़ार एवं 7 लाख 74 हज़ार की राशि आवंटित की है | साथ ही वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सभी धाराओं को सख्ती से लागू करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है |

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क्या आपने कभी महिलाओं को बैंड बजाते देखा है?

क्या आपने कभी महिलाओं को बैंड बजाते देखा है? नहीं ना? वैसे भी ये काम परंपरागत तौर पर पुरुषों का माना जाता है। लेकिन जब परिवर्तन की बयार चल रही हो तो रूढ़ियां टूटती हैं और कुछ ऐसा होता है कि दुनिया दांतों तले ऊँगली दबा ले। जी हाँ, कुछ ऐसा ही हुआ है बिहार की  राजधानी पटना के बाहरी हिस्से के एक छोटे से गांव में जहां महिलाओं के एक समूह ने एक संगीत बैंड बनाया है। आप और अधिक चौंकेंगें जब जानेंगे कि ये सभी महिलाएं दलित समुदाय से आती हैं। आज यह बैंड सारी सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ रहा है। ये महिलाएं शादी समारोह में देर रात तक बाहर रहकर बैंड बजाती हैं और न केवल अपने घर बल्कि पूरे समाज के लिए उदाहरण बनकर सामने हैं।

गौरतलब है कि यह बैंड पटना के दानापुर में धिबरा गांव की 10 महिलाओं ने बैंड बनाया है। इस बैंड का नाम उन लोगों ने ‘सरगम बैंड’ रखा है। बैंड की सभी महिलाओं की उम्र लगभग 30 साल है। वे शादी एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। बता दें कि इस बेहद खास बैंड की अगुआई ‘नारी गूंज’ नाम के एनजीओ की संचालक सुधा वर्गीस कर रही हैं। वे गदगद होकर कहती हैं कि रविदास समुदाय की ये महिलाएं खुद के लिए विशिष्ट पहचान तैयार करने में लगी हैं। बैंड की महिलाएं सुधा को सुधा दीदी कहकर बुलाती हैं।

बकौल सुधा 2016 में वह रविदास समुदाय की महिलाओं के साथ काम कर रही थीं उसी दौरान उन्हें यह आइडिया आया। उनके समुदाय में अधिकांश महिलाएं या तो खेतों में काम करती हैं या मजदूरी करती हैं। जब उन्होंने धिबरी की महिलाओं के साथ अपने विचार साझा किए तब शुरुआत में अविश्वास के रूप में प्रतिक्रिया सामने आयी। यह अस्वाभाविक नहीं था। किसी ने भी यहां महिलाओं के संगीत बैंड के बारे में नहीं सुना था। जो काम उन्हें करने के लिए कहा जा रहा था वह पुरूषों का काम माना जाता है। बहरहाल, काफी काउंसलिंग के बाद कुछ महिलाएं राजी हुईं और वे सुधा के साथ आ गईं।

आज उन महिलाओं के एक सकारात्मक और साहस भरे कदम ने इतिहास रच दिया है। अब तो वे दूर-दूर जाकर भी बैंड बजाती हैं। देश और दुनिया के लिए महिला सशक्तिकरण का अनोखा मिसाल पेश कर रही बिहार की इन महिलाओं को हमारा सलाम।

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नीति आयोग की बैठक में छाए रहे बिहार और नीतीश कुमार

राजधानी दिल्‍ली में रविवार को संपन्‍न नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बिहार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छाए रहे। मुख्यमंत्री ने इस बैठक में बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक बार फिर पुरजोर तरीके से रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग के शासी परिषद की चौथी बैठक में अपनी मांग दोहराते हुए उन्होंने विकास के मानकों के साथ-साथ मानव विकास से संबंधित सूचकांक में बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने सात निश्चय के तहत चल रहे कार्यक्रमों तथा सामाजिक अभियान के अंतर्गत शराबबंदी, दहेज उन्मूलन व बाल विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि अंतर क्षेत्रीय एवं अंतरराज्यीय विकास के स्तर में भिन्नता से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की जाए तो पाया जाएगा कि कई राज्य विकास के मापदंड, जैसे प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सांस्थिक वित्त एवं मानव विकास सूचकांकों पर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं। ऐसी स्थिति में तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो ऐसे निवेश और अंतरण की पद्धति को प्रोत्साहित करे जिससे पिछड़े राज्यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने में मदद मिले।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के केंद्रांश में वृद्धि होगी और राज्य को अपने संसाधनों का उपयोग, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिलेगा। वहीं केंद्रीय जीएसटी में अनुमान्य प्रतिपूर्ति मिलने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने बीआरजीएफ के लंबित 1651.29 करोड़ के शीघ्र भुगतान की मांग भी गवर्निंग काउंसिल के सामने रखी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में चल रहे सात निश्चय कार्यक्रम के साथ-साथ चल रहे पूर्ण शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाहबंदी जैसे सामाजिक अभियानों की चर्चा भी की और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों के लिए नीति आयोग के समर्थन व अतिरिक्त संसाधन की मांग की। आगे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता का उल्लेख राष्ट्रीय दृष्टि पत्र 2030 में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।

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बिहार को गौरवान्वित की मधुबनी की बेटी अद्विका ने !

जहाँ हाल ही में बिहार की पहली महिला पायलट बनी दरभंगा जिले की भावना कंठ वहीं दरभंगा से सटे मधुबनी जिले के छोटे से गाँव ‘उमरी’ की दूसरी बेटी अद्विका के वायुसेना में पायलट के पद पर चयनित होने से गाँव एवं जिला ही नहीं बल्कि समस्त बिहार पुनः गौरवान्वित हुआ है | अद्विका के माता-पिता ने फोन पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि उनके लिए इससे अधिक गर्व की बात और क्या होगी कि वे जिस भारतीय सेना में एक कर्मी रहकर काम किये हैं उसी में आज उनकी बेटी एक अधिकारी के तौर पर चुनी गई है |

बता दें कि पायलट के लिए सफल 26 उम्मीदवारों में 20 लड़के एवम 6 लड़कियों में बिहार से एकमात्र अद्विका चयनित हुई | अद्विका की  पायलट वाली ट्रेनिंग आगामी 0 2 जुलाई से हैदराबाद के ‘डुंडीगल’ में शुरू होगी |

यूँ तो ‘उमरी’ गाँव के कुछ लोगों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए मिथिलांचल को गौरवान्वित करते रहे हैं, आज उसी कड़ी को और आगे बढ़ाते हुए गांव की एक और बेटी अद्विका द्वारा महिला सशक्तिकरण की मिसाल को सर्वाधिक प्रगाढ़ किया गया |

जानिये कि कुछ ही वर्ष पूर्व तक भारत में विमान उड़ाती महिलाएं बहुत कम दिखती थी | महिला पायलट को विमान उड़ाते देखने के लिए जहाँ लोगों को महिला दिवस का इंतजार करना पड़ता वहीं आज की तारीख में विश्व में सबसे अधिक महिला पायलट भारत में ही है यानि हर 8वीं फ्लाइट की कमान महिला के हाथ में……. यानि 10,000 पायलटों में 1200  महिलाएँ ही हैं और अब तो बिहार की बेटी भावना कंठ और अद्विका उड़ायेगी भारतीय सेना के लड़ाकू विमानों को…….. और आगे ना मालूम……!!!

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सारे रास्ते बंद, अब बंगला खाली करेंगे शरद

वरिष्ठ नेता शरद यादव अपनी राज्यसभा सदस्यता को लेकर हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे, ये लगभग सबको पता था। क्यों लड़ रहे थे, कई प्रश्नचिह्नों के साथ ही सही, यह भी सब जानते हैं। खैर, होनी को टालने की जितनी कोशिश की जा सकती थी, वो सारी कोशिशें की गईं, पर जो होना चाहिए था, वही हुआ। राज्य सभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित शरद यादव को अंतत: सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी और ना केवल उन्हें मिल रहे वेतन और भत्ते पर रोक लग गई, बल्कि अब सरकारी बंगला भी उन्हें खाली करना होगा।

जी हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान तकनीकी तौर पर यह आदेश दिया है कि न्यायालय अपने स्तर पर आवास खाली किए जाने को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं करेगा पर इस मसले को उस स्तर पर देखा जाएगा जो इसके लिए जवाबदेह है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस विषय को राज्यसभा के सभापति के स्तर पर देखा जाएगा। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट तौर पर लिखा है कि इस मामले में जो ऑथिरिटी है, वह कानून के हिसाब से पूरी कार्रवाई करें।

गौरतलब है कि विगत चार दिसंबर को शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। शरद यादव ने अपने को अयोग्य घोषित किए जाने के इस निर्णय को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है। उनके वकील ने इसी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि हाईकोर्ट में उनकी जो याचिका लंबित है उसके निपटारे तक उन्हें राज्य सभा सदस्य के रूप में आवंटित बंगले में रहने दिया जाए। पर उन्हें निराशा हाथ लगी।

बहरहाल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए शरद यादव के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को संशोधित कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब तक उनकी याचिका हाई कोर्ट में लंबित है तब तक उनके वेतन- भत्ते को बंद नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने वेतन व भत्ते पर तो साफ शब्दों में रोक लगाई ही, बंगले को लेकर भी कानूनी कार्रवाई का निर्देश दे दिया। चलते-चलते बता दें कि जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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जिन्हें जो कहना है कहते रहें, हम काम में लगे हैं – नीतीश कुमार

मंगलवार को युवा जदयू ने राजधानी पटना में अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज की। विश्व पर्यावरण दिवस और सम्पूर्ण क्रांति दिवस के मौके पर यहां के भव्य बापू सभागार में आयोजित जदयू के ‘युवा संकल्प सम्मेलन’ में राज्य के हर कोने से इतने युवा पहुंचे कि सभागार छोटा पड़ गया। जितने लोग सभागार के अंदर थे, उससे कहीं अधिक बाहर देखे गए। इस सम्मेलन में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह, वरिष्ठ मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव समेत दर्जनों नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। सभा की अध्यक्षता युवा जदयू के अध्यक्ष अभय कुशवाहा ने की।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश और समाज की बेहतरी के लिए राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए। जेपी आंदोलन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने युवाओं से कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए परिवार का सहारा ना लें और ना ही धनार्जन को अपना उद्देश्य बनाएं। अप्रत्यक्ष रूप से तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “आज लोग अपनी काबिलियत के बल पर नहीं, परिवार के बल पर राजनीति में आगे बढ़ रहे हैं और पद मिलते ही धनार्जन के पीछे भागते हैं।’ उन्होंने तेजस्वी के ट्विटर पर सक्रिय रहने पर भी इशारों ही इशारों में कटाक्ष करते हुए कहा, ‘उन्हें कुछ करना नहीं है, बस रोज किसी मुद्दे पर ट्वीट कर देना है।”

हालांकि नीतीश कुमार ने यह भी कहा, ‘विपक्ष या कुछ लोग हमारे बारे में क्या कह रहे हैं, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमलोग काम में लगे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं आज तक कभी भी किसी के विषय में अनाप-शनाप नहीं बोला, यह मेरा काम नहीं है। वर्तमान में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जैसे बिहार में सरकार ने कुछ किया ही नहीं।’ जोकीहाट उपचुनाव के परिणाम की पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा कि लोग हमें वोट दें या ना दें, लेकिन अगर आप एससी-एसटी या अतिपिछड़े समुदाय से आते हैं और आपने बीपीएससी और यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास की है तो हम आपको 50 हजार और 1 लाख की राशि जरूर देंगे। सरकार की योजनाओं का लाभ सबको समान रूप से मिलेगा। इसी तरह अल्पसंख्यक कल्याण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पहले इस विभाग का बजट 3 करोड़ था और आज 800 करोड़ है। ऐसा इसलिए कि हमारा ध्यान समीकरण पर नहीं, काम पर है।

उधर नीतीश कुमार के बयान पर पलटवार करते हुए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पुत्र व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा कि “नीतीश चाचा 60 मिनट के भाषण में 45 मिनट तेजस्वी पर ही केंद्रित रखते हैं। भतीजे पर इतना फोकस्ड कॉन्सनट्रेशन रखने के लिए चाचा जी को सहृदय धन्यवाद। तेजस्वी तो बच्चा है जी!” वहीं एक अन्य ट्वीट में पूर्व उपमुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए लिखा, “नीतीश चाचा में नैतिकता व आत्मबल बचा है तो आज ही ऐफिडेविट पर लिखकर कहें कि उनका बेटा कभी भी राजनीति में नहीं आएगा।“

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नीट 2018 में बिहार की कल्पना को पूरे देश में पहला स्थान

कल आर्यभट्ट से लेकर आज आनंद कुमार तक की मातृभूमि बिहार सचमुच प्रतिभा की खान है। बिहार की यह गौरवशाली कड़ी आगे भी कायम रहेगी, राज्य के 11 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के इस विश्वास को आज एक बार फिर बल मिला। और ऐसा सम्भव हुआ बिहार के शिवहर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा कल्पना कुमारी की बदौलत। जी हाँ, असाधारण प्रतिभा की धनी इस छात्रा ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में देश भर में पहला स्थान पाया है। इसमें भी बड़ी बात यह कि बिहार की इस बेटी के अंकों का प्रतिशत 99.99 है।

बोर्ड के आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित नतीजे के अनुसार कल्पना को 720 में से 691 अंक मिले हैं। होनहार कल्पना ने फिजिक्स में कुल 180 में से 171 अंक स्कोर किए, जबकि कैमेस्ट्री में उन्हें 180 में से 160 और बायोलॉजी में 360 में से 360 अंक हासिल हुए। वहीं दूसरे स्थान पर तेलंगाना के रोहन पुरोहित रहे। तीसरा स्थान दिल्ली के हिमांशु शर्मा को मिला।

गौरतलब है कि पूरे देश में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में प्रेवश पाने के लिए इस साल 6 मई को नीट का आयोजन किया गया था। देश के 136 शहरों के 2255 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 13,26,725 उम्मीदवारों ने भाग लिया था। इनमें 5,80,648 पुरुष उम्मीदवार और 7,46,076 महिला उम्मीदवार शामिल थे जबकि इनके अलावा एक ट्रांसजेंडर ने भी नीट की परीक्षा दी थी। बता दें कि इस परीक्षा के माध्यम से 66 हजार एमबीबीएस व डेंटल सीटों के लिए चयन किया जाना है।

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