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जेडीयू पर शरद का दावा खारिज, अब राज्यसभा की बारी

चुनाव आयोग ने जेडीयू विवाद पर अपना निर्णय दे दिया। आयोग ने बिना किसी द्वंद्व के बड़े स्पष्ट शब्दों में पार्टी और उसके सिंबल पर शरद यादव की दावेदारी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ‘असली-नकली’ की जबरदस्ती लड़ी जा रही लड़ाई खत्म हुई और पार्टी विधिवत नीतीश कुमार की हो गई। हालांकि, शरद खेमे के अली अनवर ने आयोग के फैसले पर असंतोष जताते हुए कानूनी राय लेने और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की बात कही, लेकिन वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे की आगे की लड़ाई कितनी मुश्किल हो गई है।

गौरतलब है कि शरद खेमे ने बीते 25 अगस्त को पार्टी सिंबल पर अपना अधिकार जताया था, लेकिन शरद यादव अपने दावे के पक्ष में अपेक्षित कागजात जमा करने में विफल रहे। जबकि दूसरी ओर शुक्रवार को सांसद आरसीपी सिंह के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिलने गया जेडीयू का प्रतिनिधिमंडल सांसदों, विधायकों और 145 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के समर्थन की सूची से लैस था। ऐसे में आयोग को एक आसान फैसला लेना था, जो उसने ले लिया।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि शरद खेमे के दावे के साथ पर्याप्त समर्थन का दस्तावेज नहीं है। ऐसे में इस आवेदन पर कोई विचार ही नहीं किया जा सकता है। जबकि दूसरी ओर नीतीश खेमे के पास पर्याप्त से भी अधिक समर्थन है। हालांकि शरद यादव के पास फिर से आवेदन देने का अधिकार है, लेकिन यह जानते हुए कि जरूरी समर्थन और उसके लिए हस्ताक्षर जुटाना लगभग नामुमकिन है, शायद वो अपनी और किरकिरी न कराना चाहें।

उधर आयोग के इस फैसले के बाद जेडीयू महासचिव संजय झा ने कहा कि अब आयोग के फैसले की यह प्रति राज्यसभा में दी जाएगी ताकि इस आलोक में शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता को लेकर भी आसानी से फैसला लिया जा सके। बता दें कि पार्टी लाईन से अलग चल रहे शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी जेडीयू ने राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया है और इसके बाद राज्यसभा सचिवालय ने नोटिस भेजकर शरद से स्पष्टीकरण भी मांगा है। हालांकि चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब राज्यसभा के सभापति को निर्णय लेने में कोई दुविधा होगी, इसका कोई आधार नहीं दिखता।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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