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कोसी फिल्म फेस्टिवल की वैश्विक पहचान आगे बनेगी भारतीय सिनेमा की शान

सहरसा के कला भवन में पहली बार आयोजित दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल के लिए बहुत बड़ा आयोजन साबित होने जा रहा है। करीब 1 दर्जन से अधिक हिन्दी, मैथिली फिल्मों का प्रदर्शन जहाँ कोसी क्षेत्र की वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है वहीं आये हुए कलाकारों, गीतकारों, संगीतकारों एवं निर्देशकों ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे फिल्म फेस्टिवल का आयोजन एक क्रांतिकारी कदम है जिसका असर 5 साल बाद देखने को मिलेगा।
बता दें कि दो दिनों तक कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा शहर के मिजाज को फिल्मी बनाये रखनेवाले फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन जहाँ  प्रसिद्धि प्राप्त  बिहारी सिने अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र द्वारा सुपर बाजार स्थित कला भवन में किया गया वहीं उसी फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए सभी चेहरे पर्दे पर जाने-पहचाने परंतु कुछ एक  को छोड़कर अधिकतर आज भी अपनों के बीच अनजाने हैं।
जानिए कि कई फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से सुर्खियां बटोरने वाले नवहट्टा-मुरादपुर निवासी पंकज झा, सुपौल-कोशलीपट्टी निवासी राम बहादुर रेणु, सिमरी बख्तियारपुर के  चकभारो  निवासी शाहनवाज हनीफ, बलवाहाट निवासी मनीष सिंह राजपूत, पतरघट-भागवत गांव के विपुल आनंद, सत्तर कटैया-  बारा  गांव के नवनीत झा सहित अनेक लघु चलचित्रों, वृत्तचित्रों के निर्माताओं और निर्देशकों- अमृत सिन्हा, राहुल वर्मा, संदीप कुमार, शंकर आनंद झा , अमलेश आनंद, अहमद जमाल , आशुतोष सागर , गौतम आजाद आदि को मिथिला के परंपरागत पाग के साथ चादर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान 15 लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया और समीक्षा भी…. जिनमें प्रमुख लघु फिल्में हैं- आत्म-ग्लानि, महाकुंभ, नई राह, तिरंगा, गलीकूची, मातृभूमि, चरस, केसर-कस्तूरी…… आदि। इनमें से कुछ टेली फिल्में  कोसी के ऐसे कलाकारों की देन है जो कोसी की माटी में जन्मे तो सही, परन्तु अपनी प्रतिभा के दम पर मुंबई में स्थापित हो चुके हैं।
दो दिवसीय कोसी फिल्म फेस्टिवल के सफल संचालन के लिए दर्शकों नेे हृदय से सहरसा ग्रुप के इन कलानुरागियों को हृदय से साधुवाद दिया जिनकी उपस्थिति और मेहनत चर्चा का विषय बना रहा। वे  हैं- संचालक आनंद झा, डॉ.शशि शेखर झा एवं रवि शंकर सहित रजनीश रंजन, मनीष रंजन, मुक्तेश्वर सिंह मुकेश, प्रो.गौतम कुमार सिंह…… कोएंकर शैली मिश्र, साकेत आनंद, शालिनी सिंह, मृत्युंजय तिवारी, मोनू झा, अजय चौहान, बिपिन सिंह, अमर कुमार, अभिषेक वर्धन, विपिन कुमार आदि।

 

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घर से घाट तक….. लोक आस्था का (चार दिवसीय) महापर्व छठ !

महापर्व छठ देखकर बिहार की ऊँचाई को देश ही नहीं विदेश के लोग भी महसूसते रहे हैं। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है छठ जिसमें मुस्लिम और अन्य धर्मावलंबी भी बढ़-चढ़कर लेते हैं भाग…..। कहीं कोई कलह-कोलाहल नहीं…. कई जगह पर तो मुस्लिम महिलाएं भी करती हैं छठ। इस पर्व के अवसर पर दूर देशों में रहने वाले लोगों को भी खींच लाती है अपनी सरजमीन…..।

बता दें कि देश में ही नहीं…… विदेशों में भी एक दिन कद्दू भात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की अद्भुत छटा विखेरते रहे हैं सात समंदर पार के लोग। सिंगापुर से लेकर बहरीन…… मॉरीशस से लेकर कैलिफोर्निया में बसे बिहारियों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। सूर्योपासना के इस महापर्व छठ के साथ-साथ पद्मश्री शारदा सिन्हा के कर्णप्रिय छठि मैया के गीतों पर देशी महिलाऔं के साथ-साथ विदेशी महिलाएं भी झूम उठती हैं।

यह भी जानिए कि छठ ही एक ऐसा पर्व है, जिसकी पूरी सत्ता मातृ प्रधान है। इस पर्व में महिलाएं स्वामिनी की भूमिका में होती हैं और पुरुष सेवक भाव में खड़ा दिखता है। महिलाएं अर्घ्य – गीत गाती हुई घाटों की ओर जा रही होती हैं तो पुरुष अपने माथे पर पूजन सामग्रियों की टोकरी लिए हुए चलते दिखते हैं…… यानी घर से घाट तक यह पुरुष प्रकृति के सामने नतमस्तक दिखता है। तभी तो प्राचीन भारतीय समाज में पुत्र अपनी मां के नाम से जाना जाता था।

बच्चों को यह जानना जरूरी है कि यह छठ पर्व हमें देता है- प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश। सूर्योपासना का यह पर्व हमें प्रकृति के करीब तो लाता ही है साथ ही किसी भी प्रतिकूल परिणाम को अनुकूल बना देता है। जब लोग जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें अवशोषित होकर ऑक्सीजन में परिणत हो जाती है और लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। यह भी सच है कि सूर्य ही जल के स्रोत को राह देता है।

आगे यह भी जानिए कि इस पर्व के केंद्र में कृषि, किसान और मिट्टी है। हर फल व सब्जी इस पर्व का प्रसाद है। मिट्टी के बने चूल्हे पर हर तरह का प्रसाद बनाया जाता है तथा बांस से बनी सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। बाट से लेकर घाट तक की सफाई की जाती है। आपदा प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था हेतु प्रशासन एवं पब्लिक दोनों सचेत दिखते हैं।

छठ पर्व पर गाए जाने वाले गीतों में एक गीत बेटी मांगने वाला भी है। हमारे बिहार के  ग्राम्य जीवन में ‘कुंवारे आंगन’ जैसे शब्द भी हैं यानी जिस आंगन में बेटी के विवाह के फेरे नहीं पड़े तो वह आंगन कुंवारा रह गया…. ऐसा माना जाता है। परंतु सरकार द्वारा प्रायोजित ‘बेटी बचाओ…… बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम अब इस महापर्व के जरिये प्रखरता से ऊंचाई ग्रहण करता जा रहा है…..!

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नीतीश को ब्रिटिश पार्लियामेंट करेगा सम्मानित

बिहार राज्य के मुंगेर जिले के छोटे से गाँव कल्याणपुर से निकलकर भारत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डॉ.नीतीश दुबे को होम्योपैथ चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं किये गये शोध के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा सम्मानित किया जाएगा। भारत से पहली बार किसी होम्योपैथ चिकित्सक को सम्मानित करने के लिए डॉ.नीतीश को 24-26 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले भारत कॉन्क्लेव में आमंत्रित किया गया है।
बता दें कि इस प्रकार का आयोजन भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसदों द्वारा किया जा रहा है जिसमें वैसी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है जो भारतीय संस्कृति, फैशन, वेद और आयुष जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले भारतीयों में शुमार किये जाते हैं।
जानिए कि होम्योपैथ क्षेत्र से पहली बार ब्रिटिश पार्लियामेंट में किसी डॉक्टर को सम्मानित किया जाएगा। यूँ तो इस सम्मान के लिए चयनित डॉ.दुबे को पहले भी जर्मनी में दुनिया के सबसे बड़े होम्योपैथ रिसर्च संस्थान (DHU) जैसी बड़ी संस्था ने  सम्मानित किया है। जेनेवा में WHO के कार्यक्रम में भी सम्मानित हुए हैं।
यह भी बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे हरि ओम होमियो (कल्याणपुर) के मैनेजिंग डायरेक्टर तो हैं ही , साथ ही बर्नेट होम्योपैथी प्राइवेट लिमिटेड नामक दवा कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। हरिओम होमियो की शाखाएं बेगूसराय , भागलपुर , पटना और दिल्ली में भी है।
चलते-चलते बता दें कि डॉ.नीतीश दुबे के साथ-साथ प्रसिद्ध अभिनेता मनोज वाजपेयी, फिल्म निर्माता बोनी कपूर, पद्मश्री शाहनवाज हुसैन , ग्रीन मैन ऑफ़ इंडिया अब्दुल गनी एवं अनुराधा गोयल जैसी हस्तियों को भी ब्रिटिश पार्लियामेंट के इस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

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बहुत खास है पटना के गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी की चित्रगुप्त पूजा

पटना के गर्दनीबाग स्थित ठाकुरबाड़ी की परंपरा सामाजिक समरसता की रही है। श्रीचित्रगुप्त पूजा का अवसर यहां सबके लिए बड़ा आयोजन है। इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं और भगवान चित्रगुप्त से आशीर्वाद लेते हैं। खास बात यह कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस दिन यहां हर साल आते हैं और सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद और भोजन ग्रहण करते हैं। इस बार भी वे यहां के चित्रगुप्त पूजनोत्सव में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, विधानपार्षद प्रो. रणवीर नंदन, पूर्व मंत्री रंजीत सिन्हा एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप के साथ शामिल हुए और बिहार की सुख, समृद्धि, विकास एवं खुशहाली की कामना की।

CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna
CM Nitish Kumar worshipping at Gardanibagh Thakurbari, Patna.

मुख्यमंत्री एवं उनके साथ समारोह में शामिल हुए विशिष्ट लोगों के अलावे भी इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जिनमें सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, विधानपार्षद सूरजनंदन मेहता, विधायक अरुण सिन्हा एवं विधायक नितिन नवीन शामिल हैं। बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजेश वर्मा, सूचना आयुक्त अरुण कुमार वर्मा सहित कई बड़े अधिकारी भी इस खास मौके पर मौजूद रहे।

इस पुनीत आयोजन का एक बड़ा आकर्षण यह भी रहा कि आज यहां समाज के कई वैसे लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। यही नहीं, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा महादलित समाज के 25 बच्चों को एक साल के खर्च के रूप में छात्रवृत्ति भी दी गयी। इसके साथ ही, इस दौरान लगभग पांच हजार लोगों ने सामाजिक समरसता भोज में हिस्सा लिया जो निश्चित तौर पर समिति के सभी सहयोगियों की बड़ी उपलब्धि है।

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अब देश में मिट्टी से बनेगी बिहार मॉडल की पक्की सड़कें

बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग और विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से पटना एनआईटी में चल रहा है मिट्टी से पक्की सड़क बनाने पर काम जिसमें सीमेंट, चूना-पत्थर और फ्लाई-ऐश को मिट्टी में मिलाकर पत्थर जैसी मजबूती वाली सड़क (प्रति किलोमीटर ₹50 लाख रूपये  बचत के साथ) वरदान साबित हो रही है। क्योंकि, पिछले एक दशक में गिट्टी की कीमत में 3 गुने की वृद्धि हुई है।
बता दें कि प्रथम चरण में भागलपुर, पूर्णिया आदि जिलों की ग्रामीण सड़कों में प्रायोगिक तौर पर इसका प्रयोग सफल रहा है। इस प्रकार की सड़कों में बाढ़ और बहाव में भी टिके रहने की क्षमता प्रायोगिक रूप से देखी गई है।
जानिए कि कंकड़-पत्थर और अलकतरे से बनने वाली सड़कें अब पुरानी हुई। फिलहाल मिट्टी में सीमेंट, चूना-पत्थर और थर्मल पावर प्लांट से निकली फ्लाई-ऐश (राख़) मिलाकर पत्थर जैसी मजबूत सड़क पटना के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी द्वारा बनाने की तैयारी चल रही है। इससे मिट्टी की भार सहन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही धूप, नमी, पानी आदि का प्रभाव भी बहुत कम हो जाता है।
यह भी बता दें कि पटना एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के प्रोफेसर संजीव सिन्हा के नेतृत्व में विभागीय शिक्षकों एवं छात्रों के सहयोग से सड़क बनाने की जिस तकनीक पर काम चल रहा है उसे टिकाऊ एवं सस्ती बताई जा रही है। यह भी कि इसमें सड़कों की लागत लगभग आधी हो जाएगी यानी एक करोड़ में बनने वाली सड़क इस विधि से मात्र ₹50 लाख़ में ही तैयार हो जाएगी।
चलते-चलते यह भी बता दें कि दक्षिण बिहार के 10 जिलों में 20 स्थानों की मिट्टी की जाँच एनआईटी द्वारा की जा रही है। अधिकांश जिले बाढ़ प्रभावित होने के कारण यहाँ की सड़कें पानी में डूब जाने के बाद भी टिकी रहे- ऐसी क्षमता विकसित की जा रही है। कौन सी मिट्टी इस नई तकनीक के लिए बेहतर होगी, इसकी पड़ताल भी पिछले 6 माह से की जा रही है।

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दीपावली पर भी नहीं माने तेजप्रताप

आरजेडी सुप्रीमो के परिवार का इंतजार दीपावली जैसे मौके पर भी पूरा नहीं हुआ। तेजप्रताप नहीं माने। उनके परिवार को पूरी उम्मीद थी कि वे पत्नी ऐश्वर्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दीपावली मनाने घर आएंगे। पर तेजप्रताप हैं कि कभी बनारस तो कभी वृंदावन का रुख कर रहे हैं, पर घर लौटने का नाम नहीं ले रहे।

बता दें कि लालू के बड़े लाल व बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय को तलाक देने के लिए पटना परिवार न्यायालय में अर्जी दाखिल करने के बाद से लगातार घर से गायब रह रहे हैं। उन्हें इस मामले में अपने परिवार से भी समर्थन नहीं मिल रहा। बल्कि सभी उनकी पत्नी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि पत्‍नी से तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद तेजप्रताप शुक्रवार को घर से निकले। शनिवार को वे रांची में पिता लालू प्रसाद यादव से मिले, जहां आरजेडी सुप्रीमो ने उन्हें समझाने की भरपूर कोशिश की। उसके बाद पटना आने के बदले वे बोधगया में ठहर गए। फिर वहां से चुपचाप बनारस चले गए। इसके बाद अब उनके वृंदावन जाने की बात कही जा रही है।

बनारस में तेजप्रताप ने कहा कि वे गायब नहीं हुए हैं, पूजा करने आए हैं। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि जल्द ही बहुत कुछ अच्छा होने वाला है। हालांकि ये ‘अच्छा’ क्या है, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। बहरहाल, इस बीच उन्‍हें समझाने की कोशिशें लगातार जारी है। उधर पार्टी के स्‍तर पर भी डैमेज कंट्रेाल की कवायद जारी है।

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विद्युतीय क्षेत्र में ‘ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल’ पूरे देश में लागू होगा- ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

विद्युत ट्रांसमिशन के बिहार मॉडल को केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने इस कदर सराहा कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को पत्र लिखकर बिहार की ट्रांसमिशन परियोजना पर काम करने को कहा गया। पत्र में यह रेखांकित करते हुए निर्देश दिया गया कि विद्युत संचरण यानी ट्रांसमिशन के मामले में संपूर्ण देश ‘बिहार मॉडल’ का अनुसरण करेगा।
बता दें कि भारत सरकार के ऊर्जा सचिव अजय भल्ला ने बिहार को छोड़कर देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को विशेष रूप से पत्र लिखकर कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से सौभाग्य, इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम एवं दीनदयाल उपाध्याय ज्योतिग्राम योजना के तहत जितनी भी बिजली परियोजनाएं चल रही हैं उन सारी की सारी परियोजनाओं में ‘बिहार मॉडल’ पर ही काम करने को निर्देशित किया जाय। इस मॉडल के जरिये देश के सभी नागरिकों तक सातों दिन 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध होती रहे।
यह भी जानिए कि सबों को बिजली उपलब्ध कराना केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कुछ दिन पहले बिजली की परियोजनाओं में “डिस्ट्ररीब्यूशन बिहार मॉडल” केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया था और अब “ट्रांसमिशन का बिहार मॉडल” अपनाकर बिजली की अनुपलब्धता वाले राज्यों को आसानी से गुणवत्तापूर्ण बिजली देकर लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ने लगा है।
राज्य सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के चलते राष्ट्रीय स्तर पर बिहार को जिस तरह गौरव प्राप्त हो रहा है इससे प्रभावित होकर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उन्हें हृदय से बधाई दी है और पटना के पीएमसीएच को संसार का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने के लिए साढ़े पाँच हज़ार करोड़ रु. की स्वीकृति कैबिनेट द्वारा दिये जाने पर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का डॉ.मधेपुरी ने इस्तकबाल किया है।

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पीएमसीएच बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल

बिहारवासियों के लिए बड़ी खबर। पटना स्थित पीएमसीएच विश्व का सबसे बड़ा अस्पताल बनने जा रहा है। महज कुछ वर्षों के भीतर यहां बेड की संख्या 5462 होगी। जी हाँ, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने शनिवार को पीएमसीएच को विश्व का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 5540 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। अस्पताल का विस्तारीकरण तीन चरणों में और सात वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस काम को और भी पहले कर लेने की आवश्यकता जताई है।

कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के अनुसार पीएमसीएच अपने नए अवतार में पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और ग्रीन बिल्डिंग के मानकों के अनुरूप होगा। अस्पताल परिसर में 450 बेड का धर्मशाला भी बनाया जाएगा। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां एमबीबीएस की सीटों की संख्या को 150 से बढ़ा कर 250 किया जाएगा। वहीं पीजी सीटों की संख्या को 146 से बढ़ा कर 200 किया जाएगा। सुपर स्पेशियलिटी सीटों की संख्या 8 से बढ़ा कर 36 की जाएगी।

बता दें कि वर्तमान में बेलग्रेड (सर्बिया) में दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। वहां कुल 3500 बेड हैं। कुछ वर्षों के बाद 5462 बेड के साथ यह गौरव पीएमसीएच के नाम हो जाएगा। फिलहाल यहां बेड की संख्या 1700 है।

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जदयू मीडिया सेल ने जारी की प्रखंड संयोजकों की सूची

गुरुवारल को पटना स्थित जदयू मीडिया सेल मुख्यालय में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने प्रखंड मीडिया संयोजकों की पहली सूची जारी की। आज जारी सूची में कुल 320 प्रखंडों संयोजकों के नाम हैं। आज की महत्वपूर्ण बैठक में जिन प्रदेश पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया उनमें प्रभात रंजन झा, धनंजय शर्मा, डॉ. धीरज सिन्हा, कैप कुमार, विनीता स्टेफी, प्रवीण तिवारी, प्रभात कुमार आर्य, प्रिंस श्रीवास्तव, राहुल किशोर सिन्हा, राधा रानी, विकास कुमार सिंह एवं आशुतोष सिंह राठौड़ शामिल हैं।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि नवंबर में ही शेष प्रखंडों के साथ-साथ सेक्टर संयोजकों की सूची भी जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार दिसंबर में राजधानी पटना में प्रदेश, जिला एवं प्रखंड संयोजकों के साथ-साथ सभी प्रखंडों के चुने हुए कार्यकर्ताओं का विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य बशिष्ठ नारायण सिंह एवं राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह शामिल होंगे। डॉ. अमरदीप ने कहा कि जदयू मीडिया सेल 2019 और 2020 के चुनाव में अपनी भूमिका को धारदार और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
ध्यातव्य है कि वर्तमान में जदयू मीडिया सेल की टीम में 28 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 51 संगठन जिलों के संयोजक तथा 7 तकनीकी समिति के सदस्य शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी के 15 जाने-माने चेहरे परामर्शदात्री समिति में हैं।

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आज मधेपुरा के हर घर में पहुँच रही है बिजली- ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र

नीतीश सरकार के ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं राज्यसभा सांसद सह राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर-गमरिया पथ पर भैरवपुर के निकट स्थित बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड उपकेंद्र के संचरण प्रमंडल कोसी तथा संचरण अंचल कोसी का उद्घाटन संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया |

मौके पर आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव, SC-ST मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव, पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद ललन सर्राफ, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव सहित विभागीय कार्यपालक अभियंता की पूरी टीम की उपस्थिति देखी गई |

बता दें कि इस अवसर पर नीतीश सरकार के ऊर्जा विभाग के स्तंभ माने जाने वाले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि जहाँ वर्ष 2006 में सूबे बिहार में ग्रीड की बातें करना भी मजाक लगता था वहींआज बिहार के हर घर में बिजली पहुंचाने का संकल्प निर्धारित समय से 2 माह पहले ही पूरा कर लिया गया है | उन्होंने उपस्थित भीड़ को यह जानकारी दी कि इस डिविजन में अब पांच स्थानों पर ग्रीड क्रियाशील हैं- मधेपुरा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा और उदाकिशुनगंज में | साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब मधेपुरा के सिंहेश्वर स्थान में डिविजन ऑफिस खुल जाने से इस क्षेत्र के विद्यत बोर्ड को काफी सुविधा मिलने लगी है बल्कि जिन विभागीय कार्यो के लिए उपभोक्ताओं एवं विद्युत विभाग के कर्मियों को पूर्णिया जाना पड़ता था अब उनका सारा काम यहीं निपट जाएगा |

यह भी जानिए कि बिहार-झारखंड अलग होने के समय जिस बिहार को 110 मेगावाट बिजली मिली थी वही बिहार आज 5,000 मेगावाट बिजली अपने उपभोक्ताओं को मुहैया करा रहा है | आरम्भ में बिहार में ग्रीड की संख्या 35 थी | उन दिनों यहाँ केवल 2 ग्रिड था- एक कटैया में और दूसरा सहरसा में | आज निर्धारित लक्ष्य से पूर्व ही हर घर में बिजली पहुंच गई है |

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