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विकसित समझ वाले 266 बाल वैज्ञानिक जुटेंगे राजधानी पटना में

राज्य स्तरीय 46वीं विज्ञान प्रदर्शनी में राज्य भर के 500 से अधिक बाल वैज्ञानिक तथा उनके मार्ग-दर्शक शिक्षक 20-21 दिसंबर को राज्य शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में भाग लेंगे। स्कूलों में पढ़नेवाले ये बच्चे जीवन की चुनौतियों के बाबत वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करेंगे।

बता दें कि SCERT के डायरेक्टर विनोद कुमार सिंह के कथनानुसार यह विज्ञान प्रदर्शनी पटना के महेंद्रु स्थित SCERT कैंपस में होगी। जिसका उद्घाटन करेंगे शिक्षा मंत्री कृष्णानंद प्रसाद वर्मा और मुख्य अतिथि होंगे अपर मुख्य सचिव आर.के.महाजन।

यह भी जान लें कि एससीईआरटी के विज्ञान विभाग के अध्यक्ष टी.एन.प्रसाद के अनुसार प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए सभी प्रतिभागीगण 19 दिसंबर को ही अपना निबंधन करा लेंगे। हिदायत के साथ श्री प्रसाद ने ऐलान कर दिया है कि 20 दिसंबर को पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं इसका हिस्सा नहीं बन पायेंगे।

यह भी बता दें कि सूबे के छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक समझ विकसित करने के लिए प्रत्येक वर्ष राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित की जाती है जिसका विषय एवं उप-विषय एनसीईआरटी (नेशनल कौंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) द्वारा निर्धारित किया जाता है।

चलते-चलते यह भी जान लें कि प्रदर्शनी में हर जिले से चुनकर आयेंगे सर्वश्रेष्ठ सात बाल वैज्ञानिक जिसका मुख्य विषय है- “जीवन की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान”। इसके छह उपविषय रखे गये हैं- (1) कृषि एवं जैविक खेती (2) स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (3) संसाधन प्रबंधन (4) अपशिष्ट प्रबंधन (5) परिवहन और संचार (6) गणितीय प्रतिरूपण। इनमें से कोई विषय चुनने के लिए विद्यार्थी स्वतंत्र है। यह भी याद कर लें कि इन सभी विषयों में प्रथम आने वाले बाल वैज्ञानिक पुरस्कृत किये जायेंगे……. और आगे NCERT द्वारा लगाई जाने वाली राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में अपने सुबे बिहार का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

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मोदी ने शरद पर कुछ यूँ किया कटाक्ष

भाजपा के वरिष्ठ नेता व बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को लोकतांत्रिक जनता दल के संस्थापक व मधेपुरा के पूर्व सांसद शरद यादव को आड़े हाथों लिया। शरद यादव पर पर कटाक्ष करते हुए कहा उन्होंने कहा कि पूर्व जदयू प्रमुख को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की कथित बेनामी संपत्ति में कुछ भी गलत नहीं लगता है। गौरतलब है कि मोदी की यह टिप्पणी चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू से जेल जाकर मुलाकात करने की पृष्ठभूमि में आई है।

सुशील कुमार मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘शरद यादव को लालू परिवार की बेनामी सम्पत्ति जायज लगती है, इसलिए वे जदयू से बगावत कर राजद का साथ देने लगे’’ उपमुख्यमंत्री मोदी ने ‘‘राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर अमर्यादित टिप्पणी करने, लेकिन गांधी परिवार को लाभ पहुंचाने वाले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर घोटाला में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से पकड़ कर लाने में उनकी चुप्पी’’ की भी आलोचना की।

बता दें कि तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच शरद नई संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि एनडीए से असंतुष्ट चल रहे केन्द्रीय मंत्री व रालोसपा नेता उपेन्द्र कुशवाहा के साथ मिलकर वे महागठबंधन में अपनी उपस्थिति और असरदार बनाना चाहते हैं।

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दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता पर जदयू का सम्मान-समारोह

पिछले कुछ महीनों से सभी जिलों व प्रमंडलों में लगातार चले पार्टी के कार्यक्रमों और सम्मेलनों के बाद जदयू इन आयोजनों को सफल बनाने वाले पार्टी के समर्पित सदस्यों को सम्मानित कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता से जुड़े प्रदेश व जिला स्तर के सभी दलित-महादलित नेताओं को सम्मानित किया। सम्मान-समारोह में भवन-निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष निराला, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व मंत्री सह विधानपार्षद अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री राम लषण राम ‘रमण’, विधायक रत्नेश सदा, विधायक व जदयू दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवि ज्योति, विधायक प्रभुनाथ राम, पूर्व विधायक अरुण मांझी, पूर्व विधायक मंजू देवी, पूर्व विधायक रेणु देवी, पूर्व विधायक शिवाधार पासवान, दलित-महादलित प्रकोष्ठ के प्रभारी विद्यानंद विकल, महादलित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हुलेश मांझी समेत दलित-महादलित प्रकोष्ठ के सभी जिलाध्यक्षों तथा प्रदेश व जिला स्तर के लगभग तीन सौ नेताओं को शाल देकर सम्मानित किया गया। दलित-महादलित नेताओं के अतिरिक्त सम्मान-समारोह में पार्टी के कई और नेता उपस्थित रहे जिनमें विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधानपार्षद ललन सर्राफ, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, मुख्यालय प्रभारी चंदन सिंह एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप प्रमुख हैं। सम्मान-समारोह में भोज का भी आयोजन किया गया।

JDU General Secretary RCP Singh addressing district & state level Dalit-Mahadalit leaders in Samman Samaroh.
JDU General Secretary RCP Singh addressing district & state level Dalit-Mahadalit leaders in Samman Samaroh.

इस अवसर पर उपस्थित नेताओं को दलित-महादलित सम्मेलन की सफलता पर बधाई देते हुए श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि इन कार्यक्रमों की सफलता से इस बात पर मुहर लगी कि समाज के वंचितों को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के विचारों में कितनी आस्था है। उन्होंने कहा कि जदयू किसी जातिविशेष की पार्टी नहीं। हमारा मॉडल समावेशी है और समाज की सेवा ही हमारे संगठन का उद्देश्य है। हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने नेता की सोच और उनके काम का लाभ गांव-गांव तक पहुँचाएं। लोगों में यह भरोसा और विश्वास हो कि जदयू हमारी पार्टी है।

JDU Media Cell State President Dr. Amardeep with SC-ST Welfare Minister Ramesh Rishidev in Samman Samaroh.
JDU Media Cell State President Dr. Amardeep with SC-ST Welfare Minister Ramesh Rishidev in Samman Samaroh.

बिहार सरकार के मंत्रियों महेश्वर हजारी, संतोष निराला एवं रमेश ऋषिदेव ने कहा कि नीतीश कुमार के कार्यों से सबसे अधिक लाभ समाज के वंचित वर्ग को पहुँचा है। दलितों-महादलितों के बीच जैसी विश्वसनीयता नीतीश कुमार की है वैसी और किसी नेता की नहीं। उन्होंने अपने कार्यों से जैसी छवि बनाई है उसकी कोई सानी नहीं। वहीं, अशोक चौधरी ने कहा कि सदियों से शोषित समाज को नीतीश कुमार ने नई राह दिखाने का काम किया है। उनके योगदान को यह समाज कभी भुला नहीं सकता। अन्य वक्ताओं ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि बिहार में आने वाले लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू व एनडीए को ऐतिहासिक सफलता मिलेगी।

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पीयू चुनाव-परिणाम पर एक नज़र

बिहार में सत्तारूढ़ जदयू ने राज्य में सहयोगी भाजपा के हंगामे के बावजूद पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के पद पर कब्जा कर लिया है। वहीं, इस चुनाव में भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उपाध्यक्ष समेत तीन पदों पर जीत हासिल की।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के लिए कल हुए चुनाव में छात्र जदयू से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहित प्रकाश और कोषाध्यक्ष पद पर कुमार सत्यम निर्वाचित घोषित किए गए। बता दें कि इससे पूर्व जदयू की छात्र इकाई ने 2012 में संयुक्त सचिव का पद जीता था। इस बार अध्यक्ष पद पर काबिज होना उसके लिए बड़ी उपलब्धि कही जाएगी। वैसे एबीवीपी को भी चुनाव-परिणाम से संतुष्ट होना चाहिए कि उसकी झोली में शेष तीनों पद गए हैं। एबीवीपी उम्मीदवार अंजना सिंह उपाध्यक्ष, मणिकांत मणि महासचिव और रवि राज संयुक्त सचिव निर्वाचित घोषित किए गए हैं।

इससे पूर्व छात्र संघ चुनाव प्रचार के अंतिम दिन देर शाम जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात का छात्र संगठनों और भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने विरोध किया। यही नहीं, एबीवीपी के कार्यकर्ता रवि करण को हिरासत में रखे जाने के विरोध में अगले दिन एक धरने का आयोजन किया गया। इसमें भाजपा के स्थानीय विधायक अरूण कुमार सिन्हा और विधायक सह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नीतिन नवीन ने भी हिस्सा लिया। इन नेताओं ने प्रशांत किशोर पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को प्रभावित करने के लिए कुलपति सहित सभी चुनाव पदाधिकारियों पर अपने उम्मीदवारों के पक्ष में दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी तक की मांग की थी। उधर प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा था कि पटना यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में संभावित हार की घबराहट मेरी गाड़ी पर पत्थर मारने से कम नहीं होगी।

बहरहाल, खासा हंगामेदार रहे इस चुनाव की गौर करने वाली बात यह रही कि जदयू और भाजपा की छात्र इकाईयों की आपसी तनातनी के बावजूद पांचों पद इन्हीं दो पार्टियों के पास गए। राजद, कांग्रेस, वामदल और जाप की छात्र इकाईयों के हाथ कुछ भी नहीं लगा। एनडीए के लिए जहां ये बात संतोष देने वाली है, वहीं आगामी लोकसभा चुनाव के संभावित महागठबंधन के लिए ये आत्ममंथन का समय है। और हाँ, यह रेखांकित करना भी जरूरी है कि एनडीए के घटक दलों जदयू और भाजपा को भी इस चुनाव से संबंधों में आई कड़वाहट को दूर करने के लिए कई स्तरों पर संवाद करना होगा।

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लाखों की जगह अब ₹100 में होगा जमीन का रजिस्टर्ड बँटवारा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार सूबे बिहार में पैतृक जमीन व पारिवारिक संपत्ति का रजिस्टर्ड बँटवारा अब मात्र ₹100 देकर कराया जा सकेगा जिसके लिए प्रायः परिवार को जमीन के सर्किल रेट के अनुसार लाखों रुपये और कुछ को तो करोड़ों रुपये रजिस्ट्री शुल्क एवं स्टांप ड्यूटी के मद में देने पड़ते थे। नीतीश सरकार में पारिवारिक संपत्ति विवाद के मामलों को समाप्त करने के इरादे से निबंधन शुल्क ₹100 करने का फैसला लिया है।

बता दें कि वर्तमान में जमीन या पारिवारिक संपत्ति के बाजार भाव का 2 प्रतिशत निबंधन शुल्क एवं 3 प्रतिशत स्टांप शुल्क जमा करने पर ही रजिस्ट्री होती थी जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा अब मात्र 100 रुपये स्टांप-निबंध (₹50+ ₹50) शुल्क निर्धारित कर दिया गया है।

गृह विभाग के प्रधान सचिव सह अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि राज्य में पारिवारिक संपत्ति एवं पैतृक जमीन को लेकर हिंसा और मारपीट जैसी घटनाएं आए दिन होती हैं। इन्हीं समस्याओं, वारदातों एवं रोज-ब-रोज की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने पारिवारिक संपत्ति की निबंधन दरों को लगभग समाप्त करते हुए जमीन रजिस्ट्री शुल्क ₹50 कर दिया है। इसके अतिरिक्त स्टांप शुल्क के ₹50 मात्र अलग से लगेंगे।

राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी के अनुसार सरकार की ऐसी मान्यता है कि इस प्रस्ताव के अधिसूचित होते ही पैतृक एवं पारिवारिक संपत्ति से जुड़े विवाद के मामलों में तेजी से कमी आएगी साथ ही सूबे की विधि व्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा….. तथा आम लोग सर्वाधिक लाभान्वित होंगे।

 

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सादगी ऐसी की खपरैल मकान में ही अंतिम सांस ली देशरत्न राजेन्द्र ने

देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद कहिए या भारत रत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद….. जन्म भले ही जीरादेई में हुआ लेकिन वे वर्ष 1921 से 1946 तक पटना में कुर्जी के नजदीक मौलाना मजहरुल हक द्वारा कांग्रेस को दी गई जमीन पर स्थित बिहार विद्यापीठ परिसर में बने एक खपरैल मकान में ही रहा करते थे। हाँ! पढ़ाई और वकालत के बाद कुछ समय देश सेवा के दरमियान जेल में और भारत के राष्ट्रपति के रूप में दस वर्षों (1952-1962) तक 320 एकड़ में फैले 340 सुसज्जित कमरों वाले राष्ट्रपति भवन में बीते।

बता दें कि 1962 में ही दिल्ली के राष्ट्रपति भवन को अलविदा कहकर पटना के उसी बिहार विद्यापीठ वाले खपरैल मकान में लगभग साल भर अपना जीवन गुजारा राजेन्द्र बाबू ने। 28 फरवरी 1963 की रात बाबू राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार के विद्यापीठ परिसर में के उसी खपरैल मकान में अंतिम सांस ली।

यह भी जानिए कि इस विद्यापीठ की स्थापना 1921 में ही महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। इसकी स्थापना के लिए गांधी ने झरिया जाकर वहाँ के एक गुजराती कोयला व्यवसायी से चंदे के रूप में कुछ राशि ली और तब मजहरुल हक द्वारा दी गई जमीन पर निर्माण हुआ।

डॉ.राजेन्द्र प्रसाद जब दिल्ली से लौटकर बिहार विद्यापीठ में पुनः स्थाई रूप से रहने लगे तो कोई ऐसा दिन नहीं होता जब नेताओं एवं आम लोगों का जमावड़ा नहीं लगता। आज भले ही देश रत्न हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनकी स्मृतियाँ आज भी उनके होने का एहसास कराती हैं। वह पुराना खपरैलनुमा भवन आज भी हमारे मानस पटल पर ढेर सारे संस्मरणों को अंकुरित होने के लिए प्रोत्साहित करता है। पास में जमीन पर बिछी सफेद चादर पर रखा चरखा आजादी के आंदोलनों को तरोताजा कर देता है। राजेन्द्र बाबू की धर्मपत्नी राजवंशी देवी से जुड़ी कई यादें आज भी जिंदा हो जाती हैं।

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कुशवाहा ने कसा तंज, एनडीए से पूरी तरह मोहभंग

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रालोसपा के एक नेता की हत्या के बाद उनके परिजनों से मिलने पहुंचे रालोसपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा। पत्रकारों द्वारा लोकसभा चुनाव के सीट बंटवारे को लेकर दोनों नेताओं द्वारा समय नहीं दिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘उन्होंने क्यों समय नहीं दिया, इसका उत्तर तो वही दे सकते हैं लेकिन दिनकर के शब्दों में – ‘जब नाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।’

रालोसपा प्रमुख ने आगे कहा, ‘आगामी 4 दिसंबर से 6 दिसंबर तक पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर में पार्टी का चिंतन शिविर आयोजित किया गया है। यहां कार्यकर्ताओं की राय जानने के बाद पार्टी अगले कदम की घोषणा करेगी।’ गौरतलब है कि कुशवाहा ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर 30 नवंबर तक का अल्टिमेटम दिया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा था। इससे पहले भी कुशवाहा ने इस मामले को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश की थी।

बहरहाल, एनडीए से मोहभंग के दौर से गुजर रहे कुशवाहा ने बिहार सरकार को भी आड़े हाथों लिया। रालोसपा नेता की हत्या को लेकर बिहार की नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘यह कैसा सुशासन है, जहां प्रतिदिन लोगों की हत्याएं हो रही हैं।‘ कहने की जरूरत नहीं कि कुशवाहा के बयानों से उनके भावी रुख का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही केन्द्रीय मंत्री का पद छोड़ने और एनडीए से अलग होने की विधिवत घोषणा कर सकते हैं।

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अभी से बूथ की तैयारी में जुटी जदयू

नालंदा के दीपनगर में जदयू का एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा में दल के नेता श्री आरसीपी सिंह थे। संगठन की मजबूती एवं चुनाव-प्रबंधन की कुशलता बढ़ाने के लिए आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर में श्री सिंह जिले के सभी प्रखंड एवं पंचायत प्रभारियों एवं प्रतिनिधियों से रू-ब-रू हुए। उनके साथ ही विधानपार्षद एवं जदयू बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रामवचन राय, विधानपार्षद श्री ललन सर्राफ, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्री रविन्द्र सिंह, जदयू प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुनील कुमार एवं जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने जिले के सभी साथियों से संवाद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला जदयू अध्यक्ष श्री बनारस प्रसाद सिन्हा ने की, जबकि प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य एवं अनिल कुमार, संगठन प्रभारी चंदन कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार सिंह, परमहंस कुमार, कामाख्या नारायण सिंह एवं कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस मौके पर अपने संबोधन में श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने देश भर में बाकी पार्टियों से एक अलग पहचान बनाई है। आज हमारी पार्टी पॉलिटिक्स विद डिफरेंस के लिए जानी जाती है। श्री नीतीश कुमार ने 2005 के अंधेरे से बिहार को बाहर निकालकर एक ओर न्याय के साथ विकास और सुशासन को स्थापित किया तो दूसरी ओर समाज-सुधार के अभियानों से पूरे देश को रास्ता दिखाने का काम किया। उन्होंने कहा कि हमारा काम ही हमारा यूएसपी है और पार्टी के हर सिपाही का दायित्व बनता है कि इन कामों को जन-जन तक पहुँचाएं। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि हर बूथ पर जदयू का कम-से-कम एक समर्पित कार्यकर्ता जरूर हो।
अपने संवाद के क्रम में विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय ने पार्टी की विचारधारा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि गांधी-जेपी-लोहिया के आदर्शों को हमारे नेता श्री नीतीश कुमार धरातल पर उतारने का काम कर रहे हैं। मैनेजमेंट विशेषज्ञ सुनील कुमार ने व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास की जरूरत पर बल दिया। मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने आने वाले चुनावों में मीडिया के महत्व को रेखांकित करते हुए उसके समुचित उपयोग की जरूरत बताई। विधानपार्षद ललन सर्राफ ने कहा कि नेताओं की भीड़ में एकमात्र नीतीश कुमार हैं जिन्हें अपने परिवार की नहीं, बिहार के करोड़ों लोगों की चिन्ता है। वहीं, संगठन के कार्यों में अच्छा अनुभव रखने वाले रविन्द्र सिंह ने बूथ स्तर तक पार्टी की मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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तलाक की अर्जी वापस न लेने पर अडिग हैं तेजप्रताप

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बडे़ बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने तलाक की अर्जी वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। तेज प्रताप ने दो टूक कहा कि उन्होंने तलाक की जो अर्जी दायर की है, उस पर वह कायम हैं। बाद में कोर्ट ने तेजप्रताप की पत्नी ऐश्वर्यो को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 8 जनवरी तय कर दी।

गौरतलब है कि दिल्ली से आए वकील अमित खेमका की अगुवाई में तेज प्रताप के वकीलों की टीम के अनुरोध पर जज उमा शंकर द्विवेदी ने यह आदेश पारित किया। हालांकि सुनवाई से पहले यह चर्चा काफी तेज थी कि तेजप्रताप अर्जी वापस ले सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर कोर्ट परिसर में तेजप्रताप ने कहा, ‘मैंने जो अर्जी दायर की है, उस पर अडिग हूँ और मैं अपनी लड़ाई खुद लड़ूंगा।’

बता दें कि तेजप्रताप ने एक नवंबर को तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद से ही वह घर नहीं लौटे थे। बुधवार को तलाक की अर्जी पर सुनवाई के लिए तेजप्रताप पटना पहुंचे, पर वे अपने घर नहीं गए और न ही अपने किसी परिजन से मुलाकात की। बहरहाल, अब सबकी निगाहें 8 जनवरी पर लगी रहेंगी। लालू प्रसाद यादव अपने परिवार और पार्टी दोनों के हित में जरूर चाहेंगे कि लोकसभा चुनाव से पूर्व इस मामले को सुलझा लिया जाय।

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तेजप्रताप-ऐश्वर्या प्रकरण पर तेजस्वी की सधी हुई प्रतिक्रिया

आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप के पत्नी ऐश्‍वर्या राय से तलाक लेने के मामले पर बहुत सधा हुआ बयान दिया है। उन्होंने इस मामले को निजी करार देते हुए कहा कि दोनों वयस्‍क हैं और अपने जीवन का फैसला लेने में सक्षम हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी ने कहा कि दोनों परिवारों में अभी बातचीत चल रही है और इस पर राजनीतिक बयानबाजी न की जाए।

विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने आगे कहा कि यदि निजी मामलों को सार्वजनिक किया जाएगा तो देश के कई शीर्ष नेता संकट में पड़ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तलाक का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। तलाक का मामला अब अदालत में है और वह इस मामले को देखेगा।

तेजस्‍वी यादव के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि तेज प्रताप और ऐश्‍वर्या के बीच सुलह कराने की परिवार की कोशिशें अभी तक सफल नहीं हो पाई हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार तेजप्रताप यादव को पत्नी ऐश्वर्य राय से तलाक की अर्जी वापस लेने के लिए मनाने में जुटा है लेकिन तेज मानते नहीं दिख रहे।

बहरहाल, सच तो यह है कि पहले से ही चल रहे कई मामलों-मुकदमों के बाद तलाक के इस प्रकरण ने न केवल लालू परिवार की बल्कि आरजेडी की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि अभी आने वाले कई दिनों तक इस प्रकरण पर मीडिया समेत सभी राजनीतिक दलों की नज़र लगी रहेगी।

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