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अब मनचलों की खैर नहीं, दाँत खट्टे कर देंगी छात्राएँ

बिहार में विशेष रूप से छात्राओं के स्कूल आने-जाने के दौरान मनचलों द्वारा बढ़ रहे हमले एवं छेड़छाड़ की घटनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए प्रदेश मुख्यालय के पटना जिला प्रशासन द्वारा इस साल से उच्च माध्यमिक विद्यालयों की 9वीं एवं 10वीं वर्ग की छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाना आरंभ कर दिया गया है।

बता दें कि इस साल शुरू किये गए छात्राओं द्वारा इस सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम के तहत पटना जिले के 120 माध्यमिक विद्यालयों की 4600 छात्राओं को ट्रेंड किया गया है। प्रशासन के कुछ उत्साहित एवं समर्पित अफसरों द्वारा इस कार्यक्रम को और अधिक विस्तार दिये जा रहे हैं।

यह भी जानिए कि छात्राओं को 46 मास्टर ट्रेनर्स द्वारा इस सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग में जूडो-कराटे व ताइक्वांडो आदि विधाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं अब अपने स्कूल की दूसरी लड़कियों को सिखायेंगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए वित्तीय वर्ष में अलग से बजट स्वीकृत होते ही सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग का दूसरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। तब मनचलों की खैर नहीं रहेगी…. दाँत खट्टे कर देगी यह सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग प्राप्त छात्राएं।

मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से जूडो-कराटे के बाबत विशेष जानकारी हेतु पूछे जाने पर उन्होंने इतिहास को संदर्भित करते हुए कहा कि वर्ष 1932 में जापान ने चीन पर हमला कर कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। युद्ध में चीनी सैनिकों के हाथ से हथियार छूट जाने पर हाथ (यानी ‘कर’) से ही अपनी सुरक्षा करने की विधियों की ईज़ाद की गई जिसे ‘कराटे’ नाम दिया गया। तभी से उस ‘कराटे’ शब्द को चायनीज हैंड एवं जापानी भाषा में ‘Empty Hand’ कहा जाने लगा। संक्षेप में उसी निहत्थे युद्ध प्रणाली को कराटे कहा जाता है जिसे ओलंपिक खेल में शामिल किये जाने हेतु डाॅ.मधेपुरी का प्रयास जारी है। यदि इस प्रयास में डाॅ.मधेपुरी को सफलता मिली तो मधेपुरा की कराटे-क्वीन सोनीराज एक-न-एक दिन ओलंपिक मेडल जीतकर मधेपुरा की शान बनेगी एवं परचम लहरायेगी….।

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विश्व धरोहर दिवस की शुरुआत कब से और क्यों जरूरी है ?

सर्वप्रथम ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल आफ माउंटेंस एंड साइट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल 1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा सर्वसम्मति से मान लिया गया। अगले वर्ष 1983 के नवंबर में यूनेस्को सम्मेलन के 22वें सत्र में यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया कि अब प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जायेगा यानी 18 अप्रैल 1984 से अब तक प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को World Heritage Day मनाया जाता है।

बता दें कि अबतक संसार में लगभग 1052 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है। इनमें इटली की 49, चीन की 45, स्पेन की 44, फ्रांस व जर्मनी की 38 और भारत की 35 धरोहरें शामिल हैं- जिनमें प्रमुख भारतीय धरोहरें हैं- ताजमहल, आगरा का किला, अजंता की गुफाएं, सांची का बौद्ध स्मारक, एलोरा की गुफाएं, खजुराहो, हुमायूं का मकबरा, बोध गया मंदिर, लालकिला, नालंदा विश्वविद्यालय आदि।

यह भी बता दें कि जब 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिल गयी। विश्व धरोहर में शामिल होने वाली यह भारत की 33वीं धरोहर है।

जानिए कि इस नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आस-पास गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी…… 12वीं शताब्दी तक यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना रहा और इसमें दुनिया भर के 10 हज़ार छात्र रहकर शिक्षा ग्रहण करते रहे।

800 वर्षों तक शिक्षा दान का केन्द्र बना यह विश्वविद्यालय नालंदा जिसे तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी द्वारा जला दिया गया। वहाँ के पुस्तकालयों में इतनी पुस्तकें थी कि 6 महीने तक आग सुलगती रही, बुझ नहीं पायी। पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा। लाल ईंट से बनी प्रार्थनालय वाली इमारतें आज भी सुरक्षित हैं | परंतु, वहाँ एक अदद अच्छा सा होटल तक पर्यटकों के लिए उपलब्ध नहीं है….. और आगे………।

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विश्व होम्योपैथी दिवस पर नीतीश ने लहराया ऐतिहासिक परचम

आज एक नहीं….. बिहार के दो-दो नीतीश का परचम चतुर्दिक लहरा रहा है। एक हैं डॉ.नीतीश जिसने मुंगेर केे  एक साधारण परिवार व ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के होम्योपैथी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और दूसरे हैं इंजीनियर नीतीश जो बिहार में न्याय के साथ विकास की गंगा बहाने में लगे हैं और अपना बेशकीमती जीवन बिना किसी चाहत के दलितों-शोषितों के सेवार्थ न्योछावर करने में लगे हैं।

बता दें कि जर्मनी से….. बंगाल के रास्ते भारत पहूँची होम्योपैथी की सालाना ग्रोथ 22% है जो जल्द ही चिकित्सा का प्रमुख विकल्प होने जा रहा है। भला क्यों नहीं, फ्रांस में तो 47.5 प्रतिशत होम्योपैथी की दवा खपत होती है। दुनिया के लगभग 100 देशों में लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का लाभ ले रहे हैं तथा लगभग 50 देशों में होम्योपैथी को अलग औषधीय प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है।

आज मुंगेर जिले के कल्याणपुर गांव की गलियों से निकलकर होम्योपैथी के सरताज डॉ.नीतीश चंद्र दुबे का परचम दुनिया में लहरा रहा है। इस यात्रा के पीछे डॉ.नीतीश का अथक परिश्रम है। ये दोनों नीतीश- मुख्यमंत्री ई.नीतीश और डॉ.नीतीश द्वारा जन सेवा को ही सर्वोपरि समझा जाता है। एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के दौरान ही इनकी नींद पूरी होती है। भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होने के चलते ये दोनों नीतीश यही कहते हैं….. आपके पास एक बड़ा उद्देश्य हो और सपना हो तो वो सोने नहीं देता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि संपूर्ण विश्व के बड़े-बड़े मंचों पर दोनों नीतीश को बुलाया जाता है…… मुख्यमंत्री ई.नीतीश को पीएम मटेरियल कह कर नवाजा जाता है तो डॉ.नीतीश को लंदन में मेडिकल के छात्रों को होम्योपैथ के महत्व को बताने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कभी डॉ.नीतीश को जर्मनी तो कभी स्विट्जरलैंड में अवार्ड देकर सम्मानित किया जाता है। हाल ही में  डेलहाइट्स की ओर से डॉ.नितीश को डॉ.त्रेहान के साथ सम्मानित किया जा चुका है। और तो और विगत नवंबर में ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भारत कांक्लेव के दौरान भी डॉ.नीतीश को सम्मानित किया गया था।

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चुनावी महासमर की तीन सीटें तय करेंगी लालू की अहमियत

इस संसदीय चुनावी महासमर 2019 में बिहार प्रदेश की 3 सीटें- मधेपुरा, पाटलिपुत्र और सारण लालू प्रसाद की सियासी अस्तित्व की पैमाइश कर देंगी। भला क्यों नहीं, इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद के राजनीतिक करियर का कोई-न-कोई सूत्र जुड़ा हुआ दिखता है। इन तीनों सीटों से लालू प्रसाद यादव चुनाव लड़ चुके हैं। मधेपुरा में राजनीति के सिद्धहस्त लालू को जिस शरद यादव ने राजग के उम्मीदवार के रूप में पटकनी दी थी उसी शरद को हाथ में लालटेन पकड़ा कर आज मझधार से निकालने में लगे हैं लालू।

बता दें कि 2014 के चुनाव में राजद के पप्पू यादव से जो शरद यादव शिकस्त खा चुके हैं….. वही दोनों इस बार आमने-सामने हैं। पप्पू यादव लोगों के बीच यही कहते हैं- “आपकी सेवा करने वाला इस माटी का बेटा पप्पू चाहिए या वोट लेकर दिल्ली में रहने वाला। लालू का विरोध करने वाला आज उनके नाम पर वोट मांग कर बैतरनी पार करने में लगा है। ……. लोगों को समझना होगा कि बाढ़ हो या सुखाड़ हर समय बेटे की तरह यह पप्पू आपलोगों की सहायता में तत्पर रहता है।…… फैसला आपको करना है….. निर्णय आप को लेना है। मधेपुरा की आजादी के लिए मतदान करेंगे और लालू के लिए जिस पप्पू ने गोली खाई उसे पुनः सेवक बनाने के लिए मतदान करेंगे।”

यह भी जान लें कि एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाये गये कोसी के विकास पुत्र के नाम से लोकप्रिय दिनेश चन्द्र यादव बिना किसी शिकवा-शिकायत में फंसे बस यही कहा करते हैं कि सीएम नीतीश कुमार के शासन में प्रदेश विकसित होगा और पीएम नरेंद्र मोदी के शासन में देश सुरक्षित रहेगा।

और हाँ ! पाटलिपुत्र में कभी लालू ने अपने ही सहयोगी रंजन यादव से पटकनी खाई थी जब प्रो.रंजन यादव जदयू के प्रत्याशी थे। बाद में लालू के अभिन्न रामकृपाल राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो लालू की बेटी मीसा भारती को पराजित कर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गये…. इस बार फिर दोनों आमने-सामने हैं। यह मुकाबला लालू बनाम रामकृपाल ही बोलने लगे हैं लोग।

अंत में बात आती है सारण की सीट। जब सारण को छपरा के नाम से जाना जाता था तब लालू छपरा से 4 बार सांसद चुने गए थे। पिछली बार राबडी देवी यहाँ से भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से पराजित हो गई। इस बार वहीं से लालू के समधी चंद्रिका राय (पुत्र दरोगा राय पूर्व सीएम) को राजद का उम्मीदवार बनाया गया है। ये तीन सीटें लालू के अस्तित्व से जुड़ी है जो 10 अप्रैल को लालू की जमानत के बाबत सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद ही उसकी दशा और दिशा तय करेगी।

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कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न, पटना साहिब से लड़ेंगे चुनाव

भाजपा के ‘शत्रु’ ने आखिरकार कांग्रेस का दामन थाम ही लिया। संयोग देखिए कि आज ही भाजपा का स्थापना दिवस भी है और आज ही के दिन पार्टी के संघर्ष से लेकर उसके शिखर तक साथ रहे बिहारी बाबू ने अपनी राह अलग कर ली। दिल्ली में आज कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही कांग्रेस ने घोषणा की है कि पार्टी के टिकट से शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब संसदीय सीट से इस बार पार्टी के उम्मीदवार होंगे। यहां उनका मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से होना है।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहित और केसी वेणुगोपाल उनके साथ मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को 39वीं स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज के दिन पार्टी छोड़ना मेरे लिए दुखद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर हमला बोलते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा को वन मैन शो और टू मैन आर्मी करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा में विरोधियों को दुश्मन नहीं समझा जाता था। लेकिन अब इस पार्टी में विरोधियों को दुश्मन के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान शत्रुघ्न सिन्हा ने नोटबंदी और जीएसटी को लेकर भी भाजपा पर सवाल दागा। जीएसटी को तो उन्होंने विश्व का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया।

गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगता रहा है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कामकाज की आलोचना करते रहे हैं और दोनों पर देश को तानाशाह की तरह चलाने का आरोप लगाते रहे हैं। वे पार्टी में रहने के बावजूद विपक्ष की रैलियों को भी संबोधित करते रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा कहते रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में ‘लोकशाही’ थी, जबकि मोदी सरकार में ‘तानाशाही’ है।

बता दें कि पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा ने रांची जाकर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से भी मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके आरजेडी में शामिल होने की अटकलें लगायी जा रही थीं। लेकिन, आज सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए वे कांग्रेस के हो गए।

 

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परिवार से अलग-थलग पड़े तेजप्रताप!

आरजेडी सुप्रीमो सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बगावती सुर न केवल आरजेडी बल्कि पूरे महागठबंधन के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल वस्तुस्थिति यह है कि वे अबकी बार पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं और उनका परिवार पहले की तरह उनकी नोटिस नहीं ले रहा। इस बीच खबर यह है कि तेजप्रताप ने अपने ससुर चंद्रिका राय के खिलाफ चुनाव लड़ना तय कर लिया है। दूसरी ओर, टिकट से वंचित कर दिए गए आरजेडी के कई उम्मीदवार उनकी ओर उम्मीद से देख रहे हैं। ये वंचित अपने इलाके में वोटरों के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं। यह प्रभाव उनकी जीत के लिए काफी नहीं है, लेकिन आरजेडी उम्मीदवार की हार के कारण जरूर बन सकते हैं।

गौरतलब है कि लालू-राबड़ी मोर्चा बनाकर तेजप्रताप चार सीटों के लिए अपने उम्‍मीदवारों की घोषणा कर चुके है। साथ ही अपनी बात नहीं माने जाने पर उन्होंने 20 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारने की बात कही है। तेजप्रताप की इस बगावत का फायदा पार्टी के बागी भी उठाना चाह रहे हैं। तेजप्रताप किसी कारण से सुस्त पड़ते हैं तो ये सब बसपा या दूसरे राज्य की किसी अन्य पार्टी के नजदीक जा सकते हैं। कुल मिलाकर इन सबसे नुकसान महागठबंधन का ही होगा।

देखा जाय तो लालू परिवार में यह सियासी जंग नई नहीं है। इसकी शुरुआत बिहार में जदयू, आरजेडी और कांग्रेस की महागठबंधन सरकार बनने के साथ ही हो गई थी। तब लालू के छोटे बेटे तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री का पद मिला था, जबकि तेजप्रताप को मंत्री बनाया गया था। यहीं से दोनों भाइयों के बीच तुलना का दौर भी शुरू हो गया। तेजप्रताप की बगावत की जो बात सामने आ रही है, उसकी पटकथा उसी समय से लिखी जाने लगी थी।

हालांकि तेजप्रताप और तेजस्वी ने हमेशा यही कहा कि सबकुछ सामान्‍य है। यह पहला मौका है, जब तेजप्रताप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि तेजस्‍वी उनकी बात नहीं मान रहे तथा तेजस्‍वी ने भी तेजप्रताप को नसीहत देते हुए कहा कि यह समय लोकतंत्र व संविधान बचाने का है, न कि इस तरह पारिवारिक विवाद उठाने का।

बताया जाता है कि तेजप्रताप को पिता लालू और माँ राबड़ी की तरफ से मनाने-समझाने की कोशिश की गई, किंतु बात नहीं बनते देख उन्हें पांव खींचने पड़े। उधर पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ने जा रही बड़ी बहन प्रचार में व्यस्त हो गई हैं तो छोटे भाई तेजस्वी महागठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में संसदीय क्षेत्रों के लगातार दौरे कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि तेजप्रताप के बारे में परिवार ने सोचना बंद कर दिया है। यहां तक कि तेज प्रताप को जब किसी ने फोन पर धमकी दी तो भी परिवार की ओर से किसी ने हालचाल नहीं लिया।

उधर पूरे मामले में तेजप्रताप का कहना है कि उनकी लोकप्रियता और पार्टी में बढ़ रहे कद से घबराकर कुछ लोग परिवार में फूट डालना चाहते हैं और दोनों भाइयों में लड़ाई लगाना चाहते हैं। यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है। लालू-राबड़ी मोर्चे से लोग जुड़ रहे हैं। हमारे कार्यक्रमों में आ रहे हैं। इसी कारण धमकियां दी जा रही हैं। तेजप्रताप ने सरकार से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्‍होंने कहा है कि वे जल्दी ही लालू प्रसाद से मुलाकात कर पूरे मामले से उन्हें अवगत कराएंगे।

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तेजप्रताप ने राजद में अपने पद से दिया इस्तीफा

बिहार में महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल राजद महापरेशानी में हैं। सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन के दलों खासकर कांग्रेस से चल रही राजद की तनातनी अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सीटों को ही लेकर लालू परिवार का आंतरिक कलह सतह पर आ गया और सीट बंटवारे से नाराज राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने छात्र राजद के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया। वो तो गनीमत रही कि मां राबड़ी देवी की पहल पर उन्होंने पार्टी लाइन से अलग हटकर कुछ उम्मीदवारों की घोषणा के लिए बुलाई गई प्रेस-कांफ्रेंस स्थगित कर दिया। नहीं तो स्थिति बद से बदतर हो गई होती।

बहरहाल, तेजप्रताप ने ट्वीट के माध्यम से अपने इस्तीफे को सार्वजनिक किया। साथ में यह भी कहा कि “नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे।“ कहने की जरूरत नहीं कि तेजप्रताप के इन शब्दों के संकेत कुछ ठीक नहीं।

दरअसल तेजप्रताप अपनी बहन मीसा भारती को पाटलिपुत्र से लड़ाने को लेकर मुखर होकर बोलते रहे हैं। लेकिन राजद खेमे से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक तेजस्वी इस सीट से मनेर के विधायक भाई वीरेन्द्र को लड़ाने का मन बना चुके हैं और संभवत: लालू भी इसके लिए तैयार हो गए हैं। इसी तरह बताया जा रहा है कि तेजप्रताप अपने मामा साधु यादव के लिए वाल्मीकिनगर सीट चाहते थे, लेकिन इस पर न तो राजद में सहमति बनी और न ही घटक दलों ने इसके लिए हामी भरी। पार्टी के इस रुख से नाराज तेजप्रताप ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला लिया। जानकारी के अनुसार वे पार्टी लाइन से हटकर जहानाबाद और शिवहर से अपनी पसंद का उम्मीदवार घोषित करना चाहते थे, लेकिन प्रेस कांफ्रेंस स्थगित कर दिया गया। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जमकर मशक्कत करनी पड़ी।

इससे पहले लोकसभा चुनाव को लेकर आरजेडी ने अपने स्टार प्रचारकों के नाम की घोषणा की थी लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सूची से राज्यसभा सांसद मीसा भारती का नाम नदारद था। इस बात को लेकर भी लालू परिवार और पार्टी में घमासान मचा है। इस घटना ने तेजस्वी-तेजप्रताप के बीच बढ़ी हुई दूरी को और बढ़ाने का काम किया था।

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होली के बाद उम्मीदवारों की घोषणा: तेजस्वी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को कहा कि बिहार में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बरकरार है और राज्य की सभी 40 सीटों के लिए इसके उम्मीदवारों की घोषणा होली के बाद की जाएगी। तेजस्वी ने दिल्ली से पटना हवाई अड्डे पहुंचने के बाद संवदादाताओं को बताया, “महागठबंधन में सब ठीक है। यह एकजुट एवं मजबूत है और हम चुनाव प्रचार में कड़ी टक्कर देंगे। सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं। हम होली के बाद अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।”

गौरतलब है कि सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी दिल्ली में थे। इधर सीटों के बंटवारे को लेकर कयासबाजी का दौर लगातार जारी है। कभी संभावित सीटों को लेकर तो कभी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खासकर एनडीए के तीनों दलों द्वारा सीट बंटवारे की विधिवत घोषणा के बाद पार्टियां और उनके समर्थक कुछ अधिक ही अधीर हो रहे हैं। इस चीज को भांपते हुए लोजद नेता शरद यादव ने दिल्ली में जोर देकर कहा कि 22 मार्च को पटना में होने वाले संवाददाता सम्मेलन में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) भी महागठबंधन का हिस्सा है और ख़बर है कि उनके हिस्से में दो सीटें आ रही हैं।

इस बीच भाजपा सांसद उदय सिंह आज कांग्रेस में शामिल हो गए। कहा जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस की टिकट पर पूर्णिया से लड़ाया जाएगा। यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ेंगे। पहले उनके आरजेडी से लड़ने की संभावना बताई जा रही थी।

अंदरखाने ख़बर यह भी है कि एक-दो सीटों को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच अभी भी जिच बरकरार है। ऐसी सीटों में दरभंगा अहम है। कांग्रेस यहां से कीर्ति आजाद को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है जिन्होंने पांच साल पहले भाजपा की टिकट पर यह सीट जीती थी। वहीं आरजेडी मोहम्मद अली अशरफ फातमी के लिए यह सीट चाहती है। यहां उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।

बहरहाल, अभी तक के तय फार्मूले के अनुसार आरजेडी 20 या 19 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस 9 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शेष सीटों पर रालोसपा, हम, लोजद और वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे।

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पूर्णिया विश्वविद्यालय जन्म के साथ ही विश्वसनीयता खोने लगा है- एमएलसी डॉ.संजीव

कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चयनित बिहार विधान परिषद सदस्य एवं अधिषद व अभिषद सदस्य (टीएमयू भागलपुर और बीएनएमयू मधेपुरा) डॉ.संजीव कुमार सिंह ने खेद प्रकट करते हुए मधेपुरा अबतक से विस्तार पूर्वक पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति के क्रियाकलापों, दोहरे मापदंडों एवं कर्मियों के प्रति अपमानजनक व्यवहारों की जमकर चर्चा की।

लोकप्रिय एवं कर्मठ एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह ने नवसृजित इस विश्वविद्यालय के बाबत जो भी कहा उसे उन्हीं के शब्दों में उद्धृत किया जा रहा है-

नवसृजित पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया आज शैशवावस्था में ही छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाप्रेमियों के बीच अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो.राजेश सिंह की विवादास्पद कार्यशैली तथा अनियमित कार्यकलापों के साथ-साथ इनके द्वारा राजभवन एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत कार्य किये जाने से विश्वविद्यालय में धीरे-धीरे अकादमिक अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत विश्वविद्यालय की अतिमहत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्राधिकार ‘अभिषद’ (Syndicate) का गठन किया गया है। अन्य सभी महत्वपूर्ण परिनियमित समितियों का कार्य कुलपति स्वयं कर रहे हैं। वस्तुतः अपनी गलत अवधारणाओं पर गठित प्राधिकरों / निकायों / समितियों द्वारा लगातार कार्यकारी आदेशों के तहत वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय दिये जा रहे हैं। किसी भी प्रकार के निर्णय में जल्दबाजी उनके प्रशासनिक अनुभवहीनता को दर्शाता है।

विदित है कि अपने अल्प कार्यकाल में ही विश्वविद्यालय के प्रथम प्रतिकुलपति एवं वित्त पदाधिकारी ने इनकी कार्यशैली से आहत होकर अपना इस्तीफा आपत्तियों के साथ राजभवन को सौंप दिया। इन पदाधिकारियों का दोष सिर्फ इतना ही था कि अन्य पदाधिकारियों की तरह कार्य नहीं कर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम एवं बिहार राज्य वित्त नियमावली के आलोक में कार्य करना चाह रहे थे।

वर्तमानत: परीक्षा केंद्रों के गठन में अंगीभूत एवं संबद्ध इकाइयों के छात्र-छात्राओं के बीच दोहरा मापदण्ड अपनाना, शिक्षक संघ-संगठन की अनदेखी, शिक्षकों एवं कर्मियों के साथ अपमानजनक व्यवहार, विभिन्न कोटि के शिक्षकों को मिली प्रोन्नति के फलस्वरूप वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में विलंब, नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को ओरिऐंटेशन जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में भाग लेने से रोकना आदि कार्यों से विश्वविद्यालय का माहौल विस्फोटक होता जा रहा है। अतिशीघ्र ही संबंधित सारे तथ्यों से महामहिम कुलाधिपति महोदय के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी को भी अवगत कराया जाएगा।

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जानिए, एनडीए में किस पार्टी को मिली कौन-कौन-सी सीटें

ज्यों-ज्यों लोकसभा चुनाव का प्रथम चरण सामने आ रहा है, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए और महागठबंधन से जुड़ी पार्टियों के खाते में कौन-कौन-सी सीटें गई हैं और उन सीटों से उम्मीदवार कौन-कौन होंगे। महागठबंधन की बात करें तो वहां अभी भी घमासान की स्थिति है जबकि एनडीए में चीजें सुलझती नजर आ रही हैं। हालांकि कुछ सीटों को लेकर एनडीए में भी ‘इफ-बट’ की स्थिति थी लेकिन तीनों दलों के नेताओं ने समझदारी दिखाते हुए मामले को सुलझा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक एनडीए में वाल्मीकिनगर, झंझारपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, नालंदा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, और काराकाट की सीट जदयू के खाते में गई है, जबकि बेतिया, मोतिहारी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, उजियारपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, अररिया, बांका, छपरा, महाराजगंज, आरा, बक्सर, सासाराम, पटना साहिब और पाटलिपुत्र की सीट पर भाजपा चुनाव लड़ेगी। जदयू दरभंगा सीट संजय झा के लिए चाहती थी लेकिन गठबंधन धर्म के तहत उसे यह सीट छोड़ना पड़ रहा है।

उधर लोजपा की बात करें तो उसे मुंगेर के बदले नवादा सीट दी गई है। जदयू ने जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को चुनाव लड़ाने के लिए लोजपा से मुंगेर सीट ली है। इसके अलावा हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगडिय़ा उसकी सीटिंग सीटें हैं, जहां से उसके प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। उम्मीद है कि अगले 24 घंटों में सीटों की विधिवत घोषणा हो जाएगी।

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